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क्या यही है जामिया मिल्लिया का सेक्युलरिज्म : दीपक चौरसिया
संस्थान के गैर मुस्लिम फैकल्टी सदस्य, छात्रों व कर्मचारियों तथा पूर्व छात्रों से बातचीत के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में जामिया में धार्मिक आधार पर भेदभाव की बात कही गई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
कॉल ऑफ जस्टिस ट्रस्ट ने अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआइ) में गैर-मुसलमानों के साथ भेदभाव और मतांतरण के दबाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। संस्थान के गैर मुस्लिम फैकल्टी सदस्य, छात्रों व कर्मचारियों तथा पूर्व छात्रों से बातचीत के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में जामिया में धार्मिक आधार पर भेदभाव और गैर मुसलमान लोगों के प्रति पूर्वाग्रह की बात कही गई है।
इस जानकारी के सामने आने के बाद वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की।
उन्होंने एक्स पर लिखा, कैसे एक काफिर को केबिन दे दिया गया है ये सुनना पड़ा जामिया फैकल्टी के एक गैर मुस्लिम सदस्य को, जामिया में गैर मुस्लिम फैकल्टी और छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव की शिकायतों पर एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई गई जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएन ढींगरा और दिल्ली के पूर्व कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव शामिल थे।
कमेटी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में गैर मुस्लिम लोगों के साथ हो रहे भेदभाव के कई उदाहरण पेश किए हैं। यही नहीं धर्म परिवर्तन के लिए इन तमाम लोगों पर दबाव भी डाला जाता है, क्या यही है जामिया का सेक्युलरिज्म?
आपको बता दें, रिपोर्ट में 27 लोगों की गवाही है, जिसमें सात प्रोफेसर व फैकल्टी सदस्य, आठ-नौ कर्मचारी, 10 छात्र व कुछ पूर्व छात्र हैं।
कैसे एक काफिर को केबिन दे दिया गया है ये सुनना पड़ा जामिया फैकल्टी के एक गैर मुस्लिम सदस्य को, जामिया में गैर मुस्लिम फैकल्टी और छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव की शिकायतों पर एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई गई जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएन ढींगरा और दिल्ली के…
— Deepak Chaurasia (@DChaurasia2312) November 15, 2024
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