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INS ने IT नियमों में संशोधन को बताया मनमाना, उठाई वापस लेने की मांग

इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) ने इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन नियम- 2023 को वापस लेने के लिए मांग की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) ने इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम- 2023 को वापस लेने की मांग की है। INS का कहना है कि यह संशोधन पूर्ण रूप से मनमाना और प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है।

 

INS ने एक बयान में कहा कि इस प्रकार के अधिकार मनमाने होते हैं, क्योंकि इनका उपयोग पक्षकारों को सुने बिना ही किया जाता है। इस प्रकार यह प्राकृतिक न्याय के सभी सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं और न्यायाधीश के रूप में शिकायतकर्ता को प्रभावित करते हैं। 

हाल ही में सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2023 में संशोधन किया है। यह संशोधन केंद्र सरकार को अपने किसी भी क्रियाकलापों के संबंध में 'फेक या गलत या भ्रामक' निर्धारित करने के लिए 'फैक्ट चेकिंग इकाई' गठित करने की ताकत प्रदान करता है।

फैक्ट चेकिंग इकाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इंटरनेट सेवा प्रदाता और अन्य सेवा प्रदाता समेत मध्यवर्ती संस्थाओं को निर्देश जारी करने का अधिकार रखती है कि वे ऐसी सामग्री को प्रसारित या प्रकाशित न करें और अगर यह प्रसारित या प्रकाशित हो चुका है तो आपत्तिजनक कंटेंट को निकाल दें।

INS के अनुसार, सरकार की फैक्ट-चेकिंग यूनिट के पास कुछ सामग्री को हटाने के बारे में बिचौलियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को निर्देश देने की शक्ति होगी।

INS ने कहा कि अधिसूचित नियमों से यह स्पष्ट नहीं होता है कि इस प्रकार की 'फैक्ट चेकिंग इकाई' का संचालन तंत्र क्या होगा और इसकी शक्तियों पर किस प्रकार की न्यायिक निगरानी उपलब्ध होगी और इस पर अपील करने का क्या अधिकार होगा।

बयान में आगे कहा गया कि इन सभी बातों को देखते हुए हम यह कहने के लिए विवश हैं कि यह प्रेस सेंसरशिप के समान है और इस प्रकार यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

न्यूजपेपर सोसाइटी ने कहा, 'मंत्रालय ने वादा किया था कि इस विषय पर वह मीडिया संगठनों के साथ परामर्श करेगी, लेकिन हितधारकों के साथ कोई सार्थक परामर्श करने की कोशिश नहीं की गई।'

 INS ने कहा, 'उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और देश के संविधान में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी के अनुपालन में हम सरकार से इस अधिसूचना को वापस लेने का आग्रह करते हैं।'


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