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IIT-बॉम्बे के छात्र ने की आत्महत्या, वरिष्ठ पत्रकार संकेत उपाध्याय ने किया ये बड़ा सवाल
पुलिस के मुताबिक दर्शन सोलंकी के पास या उसके कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था, लेकिन छात्र से जातिगत भेदभाव होने का आरोप लगने के बाद उसकी मौत को ‘संस्थागत हत्या’ कहा जाने लगा।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पवई परिसर में एक छात्रावास की इमारत की सातवीं मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगाने से दर्शन सोलंकी (18) की मृत्यु हो गई है। वह अहमदाबाद का रहने वाला था और बी.टेक (केमिकल) पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष का छात्र था।
दर्शन सोलंकी का परिवार अहमदाबाद शहर के मणिनगर इलाके में रहता है और परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि दर्शन को दलित होने के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ा। तीन महीने पहले ही उसका तकनीकी संस्थान में एडमिशन हुआ था।
पुलिस के मुताबिक दर्शन सोलंकी के पास या उसके कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था, लेकिन छात्र से जातिगत भेदभाव होने का आरोप लगने के बाद उसकी मौत को ‘संस्थागत हत्या’ कहा जाने लगा। इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार संकेत उपाध्याय ने भी ट्वीट कर अहम सवाल खड़े किए है।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'बस गलती यहीं से शुरू होती है। सरकार की अपनी रिपोर्ट कहती है कि ख़ुदकुशी करने वालों में ५० % से ज़्यादा आरक्षित श्रेणी के छात्र हैं। राष्ट्रव्यापी जांच का मुद्दा है ये। लेकिन रेपुटेशन बचाने के लिये अगर प्रथम चरण में ही संस्थाने डिनायल में चली जाएंगी तो कैसे मिलेगा इंसाफ?'
बस गलती यहीं से शुरू होती है। सरकार की अपनी रिपोर्ट कहती है कि ख़ुदकुशी करने वालों में ५० % से ज़्यादा आरक्षित श्रेणी के छात्र हैं। राष्ट्रव्यापी जाँच का मुद्दा है ये। लेकिन रेपुटेशन बचाने के लिये अगर प्रथम चरण में ही संस्थाने डिनायल में चली जाएँगी तो कैसे मिलेगा इंसाफ़? https://t.co/TN4X0Kqw84
— Sanket Upadhyay (@sanket) February 16, 2023
अपने एक अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, दर्शन सोलंकी की मौत और 121 अन्य कैंपस आत्महत्याओं से पता चलता है कि जहां तक सामाजिक न्याय का सवाल है, कितना कुछ बाकी है। इससे यह भी पता चलता है कि इसके आसपास की राजनीति ने कितना कम हासिल किया है। क्या दलितों के आसपास के नेता और पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह विफल हो गए हैं? संकेत उपाध्याय के द्वारा किए गए इन ट्वीट पर लोग जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है।
उनके द्वारा किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-
Darshan Solanki’s death and the 121 other campus suicides show how much is left to be desired as far as social justice is concerned. It also shows how little the politics around it has achieved. Have netas & ecosystems around the oppressed completely failed?
— Sanket Upadhyay (@sanket) February 16, 2023
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