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हिंदू समाज किसी शंकाराचार्य के निर्देशों का मोहताज नहीं है: राजीव सचान
पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह में भाग न लेने का निर्णय राम मूर्ति की स्थापना के दौरान स्थापित परंपराओं का पालन न करना है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने स्पष्ट किया है कि अयोध्या में राम मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह में भाग न लेने का निर्णय राम मूर्ति की स्थापना के दौरान स्थापित परंपराओं का पालन न करना है।
दरअसल, बीते 13 जनवरी को शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने इस समारोह में भाग नहीं लेने के अपने रुख को दोहराते हुए कहा था कि धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में राजनीतिक हस्तक्षेप उचित नहीं है और यहां तक कि संविधान भी इसकी अनुमति नहीं देता है।
इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान ने अपने 'एक्स' हैंडल से एक पोस्ट कर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने लिखा, 'अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अस्वीकार करने, धार्मिक अनुष्ठानों को हेय मानने, संत- महंतों को कूपमंडूक समझने वाले आज यदि प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर खुले- छिपे शब्दों में आपत्ति जता रहे धर्माचार्यों की खोज- खबर ले रहे हैं तो उनके प्रति किसी आदर- सम्मान के कारण नहीं, बल्कि इस कारण कि उनकी खुद की ईर्ष्या और कुंठा किसी तरह अभिव्यक्त हो जाए। यह व्यर्थ की कसरत है, क्योंकि हिंदू समाज किसी संत- महात्मा और या फिर शंकाराचार्य के निर्देशों का मोहताज नहीं।'
बता दे, कार्यक्रम में ‘मुख्य अतिथि’ के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी ने प्रस्तावित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को लेकर वरिष्ठ संतों के बीच चिंताएं पैदा कर दी हैं।
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अस्वीकार करने, धार्मिक अनुष्ठानों को हेय मानने, संत- महंतों को कूपमंडूक समझने वाले आज यदि प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर खुले- छिपे शब्दों में आपत्ति जता रहे धर्माचार्यों की खोज- खबर ले रहे हैं तो उनके प्रति किसी आदर- सम्मान के कारण नहीं,… https://t.co/laDua4nsm7
— Rajeev Sachan (@RajeevKSachan) January 17, 2024
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