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विपक्ष की आधारहीन आरोप लगाने की आदत : डॉ. सुधांशु त्रिवेदी
मतदाता सूची की जाँच किए बिना चुनाव करवाने की बात वही कह सकता है जिसे यह लगता हो कि फर्ज़ी मतदान ही उसकी चुनावी संभावनाओं का आधार बन सकता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में बिहार में बड़ी सफलता मिली, जहां 7.5 करोड़ मतदाताओं ने भाग लिया। इस मामले पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने एक टीवी डिबेट में अपनी राय दी।
उन्होंने कहा, स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के द्वारा किसी भी राज्य में नई सरकार चुने जाने के लिए यह आवश्यक है कि मतदाता की वास्तविकता और पात्रता दोनों सही हों। इसी उद्देश्य से SIR या विशेष गहन पुनरीक्षण जिसे सामान्य भाषा में मतदाता सूची शुद्धीकरण कहा जाता है ,किया जा रहा है।
यह प्रक्रिया भारत के इतिहास में अब तक चार बार हो चुकी है। मतदाता सूची की जाँच किए बिना चुनाव करवाने की बात वही कह सकता है जिसे यह लगता हो कि फर्ज़ी मतदान ही उसकी चुनावी संभावनाओं का आधार बन सकता है। घुसपैठियों को डुप्लिकेट या मृत मतदाताओं के नाम की आड़ में वोटिंग कराने का सपना देखने वाला ही इस प्रक्रिया का विरोध कर सकता है।
इससे पूर्व भी चुनावी प्रक्रिया पर आक्षेप करने के लिए ये लोग EVM हैकिंग की बात करते थे, पर अब उन्होंने वह बात छोड़ दी है। अर्थात, उन्होंने स्वयं मान लिया है कि उनका EVM हैकिंग का आरोप झूठा था, इसलिए अब नया आरोप लगाना शुरू किया है।
देश की हर संस्था ,राफेल पर सरकार से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक पर सेना, एयर स्ट्राइक पर वायुसेना, SBI, LIC, HAL, SEBI, COVID वैक्सीन से लेकर CAA, वक़्फ़ बोर्ड से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक और चुनावी प्रक्रिया में EVM से लेकर SIR तक ,मुद्दे तो बदलते रहे हैं, पर झूठे, अनर्गल और आधारहीन आरोप लगाने की आदत नहीं बदली।
जो लोग अपने दौर-ए-हुकूमत में‘बूथ कैप्चरिंग’ करके और‘बैलेट पेपर लूटकर’ सत्ता में आते रहे हैं, वही आज SIR विरोध की आड़ में घुसपैठियों द्वारा ‘वोटर लिस्ट कैप्चरिंग’ करके ‘जनादेश लूटने’ का षड्यंत्र रच रहे हैं।
स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के द्वारा किसी भी राज्य में नई सरकार चुनी जाने के लिए यह आवश्यक है कि मतदाता की वास्तविकता और पात्रता दोनों सही हों, जिससे ही SIR या विशेष गहन पुनरीक्षण या सामान्य भाषा में मतदाता सूची शुद्धीकरण कहा जा रहा है ।
— Dr. Sudhanshu Trivedi (@SudhanshuTrived) October 27, 2025
यह भारत के इतिहास में चार बार हो चुका… pic.twitter.com/D7ChRIjflh
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