होम / सोशल मीडिया / देर से मिलने वाला न्याय भी अन्याय : सुधीर चौधरी
देर से मिलने वाला न्याय भी अन्याय : सुधीर चौधरी
मामलों की त्वरित सुनवाई, वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली, तकनीकी सुधार और जजों की नियुक्ति में तेजी जैसे कदम अनिवार्य हैं। अन्यथा न्याय पाने की चाह में इंसान सब कुछ खोकर भी खाली हाथ ही रहेगा।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2008 में बम ब्लास्ट हुआ था। इसी के बाद गुरुवार को 'एनआईए' की स्पेशल कोर्ट ने इस केस में पूरे 17 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। इस निर्णय पर वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी का कहना है कि इस देश में न्याय पाने वाले की चाहत और ज़िंदगी दोनों खत्म हो जाती है।
उन्होंने अपने शो में कहा, देर से मिलने वाला न्याय भी अन्याय के समान होता है। हमारी न्याय व्यवस्था में लंबित मुकदमों की संख्या देखें तो कोर्ट को न्याय देने में जितना वक्त लगता है उतने में तो न्याय पाने वाले की चाहत और ज़िंदगी दोनों खत्म हो जाती है। वो चाहे मालेगांव केस हो या कोई और।
जब आप सालों बाद बरी भी हुए तो सोचिए आपको मिला क्या? क्या जो समय आपने न्याय के इंतज़ार में गंवा दिया, वो वापस मिलेगा? आपको बता दें, विलंबित न्याय वास्तव में एक मौन अन्याय है, जो समाज को भीतर से खोखला करता है।
अगर देश में न्यायपालिका को जनविश्वास की रीढ़ बनाए रखना है, तो मामलों की त्वरित सुनवाई, वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली, न्यायालयों में तकनीकी सुधार और जजों की नियुक्ति में तेजी जैसे कदम अनिवार्य हैं। अन्यथा न्याय पाने की चाह में इंसान सब कुछ खोकर भी खाली हाथ ही रहेगा।
देर से मिलने वाला न्याय भी अन्याय के समान होता है. हमारी न्याय व्यवस्था में लंबित मुकदमों की संख्या देखें तो कोर्ट को न्याय देने में जितना वक्त लगता है उतने में तो न्याय पाने वाले की चाहत और ज़िंदगी दोनों खत्म हो जाती है. वो चाहे मालेगांव केस हो या कोई और. जब आप सालों बाद बरी भी… pic.twitter.com/UhAvpbgvV2
— Sudhir Chaudhary (@sudhirchaudhary) August 2, 2025
टैग्स