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संसद में हंगामे पर अजय कुमार का सवाल, जनता के नाम पर सत्ता पक्ष को घेरने का ड्रामा क्यों?

बीते कई सत्रों की तरह, इस सत्र में भी विपक्ष ने सिर्फ हंगामा ही किया। सरकार पर इलजाम लगा कि विपक्ष के साथ तालमेल बिठाने में सरकार नाकाम रही।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

लोकसभा के सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान पीएम मोदी भी सदन में मौजूद थे। वहीं विपक्षी सांसदों ने दोनों सदनों से 140 सदस्यों के निलंबन पर विरोध जताते हुए गुरुवार को संसद भवन से एक मार्च निकाला, जो विजय चौक पर संपन्न हुआ। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से विजय चौक तक पैदल मार्च किया।

इस घटना पर वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार ने आने 'एक्स' हैंडल से एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने लिखा, लोकसभा के शीतकालीन सत्र को आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। जहां, संसदीय इतिहास में पहली बार, 112 लोकसभा सांसदों को निलंबित करने का रिकॉर्ड बना, वहीं कई महत्वपूर्ण बिल पास भी हुए। तीन क्रिमिनल बिलों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य बिल पर चर्चा हुई। टेलीकम्युनिकेशन बिल 2023 पास हो गया।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति, सेवा शर्तों को विनियमित करने वाले बिल को मंजूरी दे दी गई। बीते कई सत्रों की तरह, इस सत्र में भी विपक्ष ने सिर्फ हंगामा ही किया। सरकार पर इलजाम लगा कि विपक्ष के साथ तालमेल बिठाने में सरकार नाकाम रही। विपक्ष ने सरकार पर तानाशाही का आरोप मढ़ने की पूरजोर कोशिश की। उपराष्ट्रपति कि मिमिक्री का मामला, विपक्ष के तमाम आरोपों पर हावी रहा।

एक बार फिर सत्तापक्ष ये साबित करने में कामयाब रहा कि विपक्षी अवसरवाद और कुंठा की राजनीति ही कर पाता है।और ये सवाल मन में बार बार आता रहा कि विपक्ष ने किसी भी बिल पर, किसी भी चर्चा में Law Points पर सरकार को क्यों नहीं घेरा? हंगामा करना ही मकसद क्यों है? सदन में चर्चा कर जनता के सरोकार को विपक्ष क्यों नहीं उकेरना चाहता?

क्या विपक्ष के पास कोई ठोस मसला है ही नहीं, जिससे वो सरकार को घेर सके?और अगर नहीं, तो फिर जनता के नाम पर सत्ता पक्ष को घेरने का ड्रामा क्यों कर रहा है विपक्ष ?ना कोई प्रमाणिक और ठोस चर्चा - ना ही कोई प्रमाणिक प्रेस वार्ता। सिर्फ आरोप लगा देना मात्र ही विपक्ष का हक तो नहीं है ना।

 


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