जानें, प्रिंट मीडिया मालिकों के लिए पंजाब क्यों बना खास

पंजाब की पहचान आज सिर्फ साइकिल उत्पादन और हौजरी प्रॉडक्ट्स जैसे बिजनेस के लिए ही नहीं रह गई है, बल्कि न्यूजपेपर रीडरशिप में भी यह लगातार दमदार मौजूदगी दर्ज करा रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 18 February, 2020
Last Modified:
Tuesday, 18 February, 2020
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पंजाब की पहचान आज सिर्फ साइकिल उत्पादन और हौजरी प्रॉडक्ट्स जैसे बिजनेस के लिए ही नहीं रह गई है, बल्कि न्यूजपेपर रीडरशिप में भी यह लगातार अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा रहा है। यहां अखबार के पाठकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।    

इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की तीसरी तिमाही (IRS 2019 Q3) के अनुसार, उत्तर भारत के टॉप पांच मार्केट में पंजाब भी शामिल है। उत्तर भारत में 42.9 प्रतिशत टोटल रीडरशिप (TR) और 16.5 प्रतिशत एवरेज इश्यू रीडरशिप (AIR) के साथ आईआरएस चार्ट में पंजाब ने अपनी मजबूत स्थिति कायम कर रखी है। उत्तर भारत में आईआरएस की टॉप फाइव मार्केट की लिस्ट में जिन अन्य राज्यों ने अपना नाम दर्ज कराया है, उनमें दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड शामिल हैं।

मार्केट लीडर्स इन न्यूजपेपर्स (Market Leaders in Newspapers)

पंजाब में अखबारों ने टोटल रीडरशिप (TR) और एवरेज इश्यू रीडरशिप (AIR) दोनों ही मामलों में ग्रोथ दर्ज की है। क्षेत्र के प्रमुख अखबार ‘पंजाब केसरी’ की एवरेज इश्यू रीडरशिप के आंकड़ों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही (IRS Q1 2019) के आंकड़ों के अनुसार जहां इस अखबार का एआईआर 936000 था, वह तीसरी तिमाही (Q3) में बढ़कर 950000 हो गया है।

दूसरी ओर, दैनिक भास्कर की ग्रोथ भी काफी अच्छी रही है। पहली तिमाही में इस अखबार की टोटल रीडरशिप (TR) 1857000 थी, जो दूसरी तिमाही में 1924000 और तीसरी तिमाही में बढ़कर 216700 हो गई है। इसी तरह अखबार की एवरेज इश्यू रीडरशिप (AIR) भी लगातार तीन तिमाहियों में 4,93,000 से 5,00,000  और फिर इससे बढ़कर 5,96,000 हो गई है।    

अब दैनिक जागरण की बात करें तो इस क्षेत्र में पहली तिमाही में अखबार की टोटल रीडरशिप 1819000 थी जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 1922000 और तीसरी तिमाही में 1971000 हो गई। वहीं, दैनिक जागरण की एवरेज इश्यू रीडरशिप (AIR) पहली तिमाही में 446000 थी और दूसरी तिमाही में इसमें मामूली गिरावट के साथ यह 436000 हो गई थी, लेकिन तीसरी तिमाही में इसने फिर अपनी स्थिति मजबूत की और तीसरी तिमाही में यह 466000 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

आखिर क्या है इसकी वजह (What keeps the newspapers going)?

पंजाब केसरी अपनी ग्रोथ का श्रेय अपनी नई पहल (innovations) को देता है, जो उसने प्रॉडक्शन में शुरू की हैं। अखबार के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित चोपड़ा का कहना है, ‘हम डिजिटल का विस्तार कर रहे हैं। पंजाब केसरी में प्रिंट और डिजिटल की ग्रोथ एक-दूसरे की पूरक हैं और इससे हमारी पहुंच बढ़ी है। टेक्नोलॉजी में नए-नए प्रयोग करने से उत्पादकता में बढ़ोतरी के साथ क्वालिटी भी बेहतर हुई है।’

चोपड़ा के अनुसार, ‘हमने हाल ही में अपनी सभी 13 प्रॉडक्शन यूनिट्स में प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को बदल दिया है, जिससे हमें अपनी क्वालिटी और ग्रोथ बढ़ाने में काफी मदद मिली है। सभी लोकल पुलआउट्स भी अब मेन न्यूजपेपर का हिस्सा हैं।’ इसके साथ ही चोपड़ा का यह भी कहना है, ‘उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य की तुलना में जहां पर हिंदी की ज्यादा रीडरशिप है, पंजाब में अंग्रेजी, हिंदी और अंग्रेजी की रीडरशिप काफी ज्यादा है।’

वहीं, दैनिक जागरण के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर, प्रिंटर पब्लिशर और रेजिडेंट एडिटर निशिकांत ठाकुर का कहना है, ‘राज्य में पंजाबी की तुलना में हिंदी रीडरशिप ज्यादा है। लोगों का हिंदी अखबारों की तरफ ज्यादा झुकाव है। पंजाब में रीजनल न्यूजपेपर्स जैसे- जगवाणी की रीडरशिप ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है जबकि शहरी इलाकों में अजीत की रीडरशिप ज्यादा है।’

पंजाब के तीन प्रमुख शहरों-अमृतसर, जालंधर और लुधियाना में दैनिक भास्कर टॉप के अखबारों में शुमार है। दैनिक भास्कर के प्रवक्ता का कहना है, ‘हाल ही में जारी किए गए वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही के आईआरएस सर्वे के नतीजों के अनुसार दैनिक भास्कर ही इकलौता अखबार है, जिसकी ग्रोथ में पिछली तिमाही की तुलना में 23 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह हमारे सर्कुलेशन को बढ़ाने और एडिटोरियल कंटेंट पर फोकस करने के साथ ही पाठकों से जमीनी तौर पर जुड़ने का परिणाम है। हमारे लिए पंजाब काफी प्रमुख मार्केट है और हम इस क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।’

पंजाब में अखबारों की ग्रोथ का क्या कारण है (Why are newspapers in Punjab growing)?

राज्य में अखबारों की रीडरशिप बढ़ने से इस माध्यम में एडवर्टाइर्स की संख्या भी बढ़ी है। विशेषज्ञों की मानें तो राज्य में पिछले दो-तीन वर्षों में विज्ञापन की दरों (ad rates) में भी 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है और पिछले दिनों देश की कमजोर अर्थव्यवस्था के दौरान भी इसमें कोई कमी नहीं देखी गई है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के चौथे दौर (NFHS-4) के नतीजों के अनुसार, देश में दिल्ली और पंजाब के लोग ज्यादा अमीर हैं। ऐसे में स्वभाविक तौर पर लोगों को लुभाने के लिए एडवर्टाइजर्स पंजाब के अखबारों की ओर आकर्षित हुए हैं।

देश का 75 प्रतिशत साइकिल उत्पादन और साइकिल के कलपुर्जों का 80 प्रतिशत निर्माण पंजाब में हो रहा है। इसके अलावा ट्रैक्टर्स, स्पोर्ट्स गुड्स और एग्रीकल्चरल मशीनरी का निर्माण भी इस राज्य में सबसे ज्यादा हो रहा है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात और प्रॉडक्ट के बारे में जानकारी पहुंचाने के लिए ये इंडस्ट्रीज अखबारों का सहारा लेती हैं।

मीडिया विशेषज्ञ अनीता नैय्यर का कहना है, ‘देश में चंडीगढ़ और लुधियाना जैसे शहरों की गिनती अमीर शहरों में होती है और यहां के लोगों की क्रय शक्ति (purchasing Power) ज्यादा है। ऐसे में ब्रैंड्स भी लोगों को लुभाने के लिए यहां के अखबारों पर विज्ञापन में ज्यादा खर्च करते हैं।

विज्ञापन का बिजनेस (Business of advertising)

विभिन्न ब्रैंड्स के एडवर्टाइजर्स ने पंजाब के अखबारों के लिए अपने दरवाजे खोल रखे हैं। लोकल प्लेयर्स जैसे ट्रैक्टर निर्माता आदि ने स्थानीय अखबारों का सहारा लिया है, वहीं नेशनल और इंटरनेशनल ब्रैंड्स अंग्रेजी अखबारों का सहारा ले रहे हैं।

चंडीगढ़ की एडवर्टाइजिंग एजेंसी ‘De Code’ के मार्केटिंग हेड विनय कौशिक के अनुसार, ‘अंग्रेजी पाठकों के लिए एडवर्टाइजर्स पंजाब में ट्रिब्यून को प्राथमिकता देते हैं, वहीं पंजाबी के लिए अजीत और हिंदी में पंजाब केसरी उनकी पहली पसंद है। अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब  मल्टी प्लेयर मार्केट है और यहां अंग्रेजी, हिंदी और पंजाबी में कई विकल्प हैं। यहां चुनौती काफी कड़ी है, इसके बावजूद एडवर्टाइजर्स अखबारों में विज्ञापन पर काफी खर्च कर रहे हैं। यही कारण है कि पिछले तीन साल में विज्ञापन की दरों में पांच से दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।’

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प्रभात खबर ने इस खास अंदाज में मनाया आदिवासी दिवस

आज 9 अगस्त है और पूरी दुनिया 9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के रूप में मनाती है।

Last Modified:
Tuesday, 09 August, 2022
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आज 9 अगस्त है और पूरी दुनिया 9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के रूप में मनाती है। वर्ष 1982 में शुरू हुई इस परंपरा का हर साल पालन किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र बड़े पैमाने पर इसका आयोजन करता है। इस बार विश्व आदिवासी दिवस की थीम 'पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और प्रसारण में स्वदेशी महिलाओं की भूमिका' रखा गया है।

बता दें कि कोविड-19 के चलते 2021 में कोई थीम जारी नहीं की गयी थी। 2021 में वर्ष 2020 की थीम को पुनः जारी कर दिया गया था। विश्व में आदिवासी समुदाय की जनसंख्या लगभग 37 करोड़ है, जोकि पूरे विश्व की जनसंख्या 5 प्रतिशत हिस्सा है। दुनिया में 5000 आदिवासी समुदाय हैं, जिनकी सात हजार भाषाएं हैं।

वहीं, आज आदिवासी दिवस पर झारखंड से प्रकाशित हिंदी दैनिक अखबार ‘प्रभात खबर’ ने एक विशेष प्रस्तुति दी और अखबार के जरिए झारखंड की उन आदिवासी वीरांगनाओं को याद किया, जिन्होंने इस देश की मिट्टी को विदेशियों से बचाने के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए।   

यहां देखिए, 'प्रभात खबर' की ये विशेष प्रस्तुति:

 

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इस पत्रिका में आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर विवाद, संपादक के खिलाफ दर्ज FIR

एक पत्रिका में छपी भगवान शंकर और मां काली की आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

Last Modified:
Friday, 05 August, 2022
TheWeek5454

एक पत्रिका में छपी भगवान शंकर और मां काली की आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बीच यूपी के कानपुर में इस पत्रिका के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है।

दरअसल, मशहूर मलयालम पत्रिका ‘द वीक’ में 24 जुलाई के अंक में हिंदू देवी मां काली को लेकर एक लेख छापा गया है, लेकिन लेख में मां काली और भगवान शंकर की जो तस्वीर छापी गई है, उसे आपत्तिजनक बताया जा रहा है। आरोप है कि यह तस्वीर हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है।

भाजपा नेता प्रकाश शर्मा ने मैगजीन के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी। इसमें उन्होंने लिखा है कि मैगजीन ने भगवान शिव और मां काली की आपत्तिजनक फोटो छापी है। इससे हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंची है। कोतवाली एसएचओ अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि मुकदमा दर्ज किया गया है, वहीं इसकी जांच की जा रही है।  

भगवान शंकर की यह आपत्तिजनक तस्वीर ‘द वीक’ पत्रिका के 24 जुलाई के अंक में पेज नंबर 62 और 63 में छपी हुई है। यह पूरा व्याख्यान माता काली के उस गुस्से के समय पर प्रकाशित किया गया है, जब उन्हें रोकने के लिए भगवान शंकर उनके पैरों के नीचे लेट गए थे। मगर तस्वीर में भगवान शंकर को आपत्तिजनक तरीके से निर्वस्त्र दर्शाया गया है, जिसे हिंदूवादी संगठन के लोग आपत्तिजनक बता रहे हैं।

हिंदूवादी नेता प्रकाश शर्मा ने इस पूरे मामले पर कानपुर कोतवाली में एक प्रार्थना पत्र दिया है, जिसमें ‘द वीक’ पत्रिका के संपादक और लेख लिखने वाले के साथ तस्वीर बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे मामले में कानपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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‘Hindustan Times’ में सोनल कालरा का कद बढ़ा, अब मिला यह पद

बता दें कि सोनल कालरा को पत्रकारिता में ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका समेत कई अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 03 August, 2022
Last Modified:
Wednesday, 03 August, 2022
Sonal Kalra

जानी-मानी पत्रकार और कॉलमिस्ट सोनल कालरा को अंग्रेजी अखबार ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) में चीफ मैनेजिंग एडिटर (एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल) के पद पर प्रमोट किया गया है।

इस बारे में जानकारी देते हुए सोनल कालरा ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘मुझे यह जानकारी शेयर करते हुए काफी खुशी हो रही है कि मुझे हिन्दुस्तान टाइम्स में चीफ मैनेजिंग एडिटर (एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल) के पद पर पदोन्नत किया गया है। मेरी बेहतरीन टीमों को धन्यवाद, जिनके बिना यहां तक पहुंचना संभव नहीं था। पांच साल पहले इसी तारीख को मैं मैनेजिंग एडिटर बनी थी।’ 

बता दें कि सोनल कालरा को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने इस अखबार की लाइफस्टाइल पहलों (Lifestyle initiatives) को आगे बढ़ाने में काफी अहम भूमिका निभाई है।

प्रसिद्ध लेखक और पॉडकास्टर सोनल कालरा के लोकप्रिय कॉलम 'A calmer you' को देश के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले स्वयं सहायता कॉलम (self-help columns) में स्थान दिया गया है। सोनल कालरा को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड समेत कई अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। 

अपने प्रमोशन के बारे में सोनल कालरा द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट को आप यहां पढ़ सकते हैं।

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अब इस अखबार से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार आयुष्मान बरुआ, मिली बड़ी जिम्मेदारी

बरुआ इससे पहले ‘एचटी मीडिया’ (HT Media) समूह के साथ जुड़े हुए थे और बेंगलुरु में इस समूह के अखबार ‘मिंट’ (Mint) में असिस्टेंट एडिटर के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

Last Modified:
Tuesday, 02 August, 2022
Ayushman Baruah

वरिष्ठ पत्रकार आयुष्मान बरुआ ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ (Indian Express) समूह के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने इस समूह के बिजनेस अखबार ‘द फाइनेंसियल एक्सप्रेस' (The Financial Express) में बतौर एडिटर (टेक्नोलॉजी) जॉइन किया है।

बरुआ बेंगलुरु से अपना कामकाज संभालेंगे और इस अखबार की टेक्नोलॉजी कवरेज की जिम्मेदारी संभालेंगे। बता दें कि बरुआ इससे पहले ‘एचटी मीडिया’ (HT Media) समूह के साथ जुड़े हुए थे और बेंगलुरु में इस समूह के अखबार ‘मिंट’ (Mint) में असिस्टेंट एडिटर के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

आयुष्मान ने शिलॉन्ग के St. Anthony's College से मीडिया टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने बेंगलुरु के Commits Institute of Journalism and Mass Communication से मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है।

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जानें, पिछले तीन वर्षों में भारत ने रूस से कितना न्यूजप्रिंट किया आयात

भारत में न्यूजप्रिंट की कुल मांग की तुलना में, रूस से भारत को न्यूजप्रिंट की आपूर्ति पर ज्यादा प्रभाव नहीं दिख रहा है।’

Last Modified:
Monday, 01 August, 2022
Newspaper Industry

सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने हाल ही में राज्यसभा को बताया, पिछले 3 वर्षों में रूस से न्यूजप्रिंट (अखबारी कागज) का आयात 34-39% के बीच रहा है। यह जानकारी उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है।

इस दौरान अनुराग ठाकुर ने बताया, ‘वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने सूचित किया है कि व्यापार के आयात संबंधी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 3 वर्षों में रूस से न्यूजप्रिंट का आयात 34-39 प्रतिशत के बीच है।’

उन्होंने यह भी बताया, ‘रूस से आयात की हिस्सेदारी की मात्रा में वर्ष 2020-21 और 2021-22 में मामूली वृद्धि हुई है। इसलिए, भारत में न्यूजप्रिंट की कुल मांग की तुलना में, रूस से भारत को न्यूजप्रिंट की आपूर्ति पर ज्यादा प्रभाव नहीं दिख रहा है।’

मंत्री ने यह भी कहा कि व्यापार के आयात संबंधी आंकड़ों के अनुसार, फिनलैंड से ग्लॉसी न्यूजप्रिंट (चमकदार अखबारी कागज) के आयात की मात्रा ज्यादा नहीं है।

इससे पहले, मंत्री ने लोकसभा में यह जानकारी दी थी कि न्यूजपेपर इंडस्ट्री द्वारा न्यूजप्रिंट के आयात में भारी गिरावट देखी गई है। वाणिज्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अनुराग ठाकुर ने बताया था कि वित्त वर्ष 2022 में न्यूजप्रिंट का आयात घटकर 597,766 किलोग्राम रह गया है, जो वित्त वर्ष 2021 में 648,620 किलोग्राम था। वित्त वर्ष 2018 में आयात 1,384,056 किलोग्राम था, इसके बाद वित्त वर्ष 2019 में 1,296,300 किलोग्राम और वित्त वर्ष 2020 में 1,296,354 किलोग्राम था।

वहीं, पिछले पांच वर्षों और चालू वित्तीय वर्ष के दौरान देश में न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए घरेलू उत्पादन, खपत और कागज की मांग के विवरण के बारे में पूछे जाने पर, ठाकुर ने कहा कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए इस तरह के डेटा का रखरखाव नहीं करता है।

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महामारी के दौर में घट गया अखबारी कागज का आयात, सरकार ने दिए ये आंकड़े

महामारी (कोविड-19) के दौर में पिछले दो वर्षों में न्यूजप्रिंट (अखबारी कागज) के आयात में करीब 50 प्रतिशत तक की कमी आई है।

Last Modified:
Wednesday, 27 July, 2022
Newspaper

महामारी (कोविड-19) के दौर में पिछले दो वर्षों में न्यूजप्रिंट (अखबारी कागज) के आयात में करीब 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। सरकार ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी है। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में न्यूजपेपर इंडस्ट्री ने 12,96,354 किलोग्राम न्यूजप्रिंट का आयात किया था, वहीं वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा घटकर करीब आधा 6,48,620 किलोग्राम रह गया।

लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2017-18 में न्यूजपेपर इंडस्ट्री द्वारा 13,84,056  किलोग्राम न्यूजप्रिंट का आयात किया गया, जबकि वर्ष 2020-21 में यह करीब 46 प्रतिशत घटकर 6,48,620 किलो रह गया। इसके बाद वर्ष 2021-21 में न्यूजप्रिंट का आयात और घटकर 5,97,766 किलो रह गया।

सूचना प्रसारण मंत्री ने बताया कि न्यूजप्रिंट पर दस प्रतिशत का सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) लगाया गया था, जिसे फरवरी 2020 में घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया था।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समाचार पत्र उद्योग से अखबारी कागज पर सीमा शुल्क में कमी/छूट के लिए तमाम आवेदन प्राप्त हुए थे। वित्त मंत्रालय द्वारा जांच के बाद शीमा शुल्क में कटौती का निर्णय लिया गया था।

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‘जन एक्सप्रेस’ अखबार से जुड़े पत्रकार डॉ. वैभव शर्मा, मिली अहम जिम्मेदारी

मूल रूप से एटा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले डॉ. वैभव शर्मा को मीडिया में काम करने का करीब 18 साल का अनुभव है।

Last Modified:
Wednesday, 27 July, 2022
Dr Vaibhav Sharma

हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’, झांसी में लंबे समय तक सिटी इंचार्ज व चीफ सब-एडिटर रहे पत्रकार डॉ. वैभव शर्मा को दैनिक ‘जन एक्सप्रेस‘ के राज्य मुख्यालय, लखनऊ पर विशेष संवाददाता की अहम जिम्मेदारी दी गई है।

समाचार4मीडिया से बातचीत में डॉ. वैभव शर्मा ने बताया कि पिछले 13 वर्षों से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी दैनिक जन एक्सप्रेस के नेशनल हेड कमलेश फाइटर की संस्तुति पर संपादक अरुण कुमार त्रिपाठी ने उन्हें यह जिम्मदारी सौंपी है।

डॉ. वैभव शर्मा ने वर्ष 2003 में दैनिक ‘अमर उजाला’ से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर वर्ष 2006 से 2010 तक वह दैनिक ’हिन्दुस्तान’ में स्टाफ रिपोर्टर रहे। इसके बाद वह फिर ‘अमर उजाला’ से जुड़ गए और वर्ष 2010 से 2021 तक इस अखबार में सिटी इंचार्ज व चीफ सब-एडिटर की जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

डॉ. वैभव शर्मा को मीडिया में काम करने का करीब 18 साल का अनुभव है। मूल रूप से एटा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले डॉ. वैभव शर्मा ने आगरा से ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने आगरा में डॉ. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी से हिंदी में डॉक्टरेट की है।

डॉ. वैभव शर्मा ने पत्रकारिता की पढ़ाई दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से की है। समाचार4मीडिया की ओर से डॉ. वैभव शर्मा को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।   

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अब जाने-माने पब्लिकेशन ग्रुप ‘पुण्य नगरी’ से जुड़े पंकज बेलवारियार

पूर्व में वह बतौर नेशनल मार्केटिंग हेड ‘प्रभात खबर’ में भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा वह  ‘राजस्थान पत्रिका’ के मार्केटिंग हेड (नॉर्थ) भी रह चुके हैं।

Last Modified:
Tuesday, 26 July, 2022
PANKAJ BELWARIAR

तमाम मीडिया संस्थानों में प्रमुख पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके सीनियर मीडिया प्रोफेशनल पंकज बेलवारियार (Pankaj Belwariar) ने अब नई दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने ‘पुण्य नगरी ग्रुप’ (श्री अंबिका प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशंस) में बतौर कॉरपोरेट मार्केटिंग हेड (नेशनल) जॉइन किया है। इससे पहले पंकज बेलवारियार कुछ महीनों से ‘Supank Consultancy’ में बतौर कंसल्टेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

पंकज बेलवारियार को इस क्षेत्र में काम करने का करीब तीन दशक का अनुभव है। पूर्व में वह बतौर नेशनल मार्केटिंग हेड ‘प्रभात खबर’ में भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा वह  ‘राजस्थान पत्रिका’ के मार्केटिंग हेड (नॉर्थ) भी रह चुके हैं।

‘राजस्थान पत्रिका’ से पूर्व बेलवारियार ‘साकाल मीडिया ग्रुप’ में वाइस प्रेजिडेंट (सेल्स) के पद पर भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं। इससे पहले वह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (पटना), ‘अमर उजाला’ और ‘मलयाला मनोरमा’ के साथ भी काम कर चुके हैं। फरवरी 2003 से 2009 तक वह यहां रीजनल जनरल मैनेजर के पद पर और फिर इसके बाद मार्च 2015 तक यहां सीनियर रीजनल जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे थे।

वह अप्रैल 1998 से 2003 तक रीजनल मैनेजर के तौर पर ‘अमर उजाला’ से भी जुड़े रहे हैं। जून 1995 से अप्रैल 1998 के बीच उन्होंने मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर अपना कार्यभार संभाला था। ‘अमर उजाला’ में शामिल होने से पहले बेलवारियार ने अगस्त 1991 से जून 1995 तक ‘टाइम्स टाइम्स ऑफ इंडिया’ के पटना/लखनऊ एडिशन के साथ काम किया। शुरुआती दौर में वह लखनऊ में सीनियर ऑफिसर के पद पर कार्यरत रहे, लेकिन सितंबर, 1992 में प्रमोशन मिलने के बाद उन्होंने जून 1995 तक पटना में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली।

बता दें कि ‘पुण्य नगरी’ समूह महाराष्ट्र का जाना-माना पब्लिकेशन है। करीब 22 साल पहले मुरलीधर सिंगोट (अब दिवंगत) द्वारा ‘पुण्य नगरी’ नाम से इसकी स्थापना की गई थी। अब इस समूह के तहत महाराष्ट्र में विभिन्न पांच भाषाओं में पांच अखबारों का प्रकाशन किया जाता है, जिनकी रीडरशिप दस मिलियन से भी ज्यादा है।

मराठी भाषा में यह समूह ‘पुण्यनगरी’ (PUNYANAGARI), ‘मुंबई चौफेर’ (Mumbai Choufer) और ‘आपला वार्ताहार’ (Aapla Vartahar) नाम से अखबार पब्लिश करता है। इस समूह के तहत कन्नड़ भाषा में  ‘कर्नाटक मल्ला’ (Karnatak Malla) नाम से भी अखबार का प्रकाशन किया जाता है। वहीं हिंदी में यह समूह ‘यशोभूमि’ (YASHOBHUMI) नाम से अखबार निकालता है, जिसे मुंबई में ‘यूपी का दूत‘ के नाम से भी जाना जाता है।

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इस अखबार को UAE में प्रतिबंधित कराने का किया गया प्रयास, पूर्व मंत्री पर आरोप

केरल के क्षेत्रीय अखबार ‘मध्यमम’ के प्रबंधन ने सोमवार को सूबे के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मुलाकात की।

Last Modified:
Tuesday, 26 July, 2022
madhyamam454

केरल के क्षेत्रीय अखबार ‘मध्यमम’ के प्रबंधन ने पूर्व मंत्री और विधायक के.टी. जलील पर आरोप लगाया कि उन्होंने समाचारपत्र की खबर के आधार पर इसे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में प्रतिबंधित कराने का प्रयास किया। इस बाबत अखबार के प्रबंधन ने सोमवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मुलाकात की।

‘मध्यमम’ के प्रबंधन ने कहा कि उन्होंने मंत्री द्वारा प्रोटोकॉल के उल्लंघन की ओर इशारा किया था, जिन्होंने सीधे यूएई के महावाणिज्य दूत को लिखा था और मुख्यमंत्री ने उनकी शिकायत का सकारात्मक जवाब दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोने की तस्करी के विवादास्पद मामले में मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने हाल ही में दावा किया था कि जलील ने यूएई में अखबार को प्रतिबंधित करने का प्रयास किया था, जिसके बाद 'मध्यमम' ने मुख्यमंत्री से संपर्क करने का फैसला किया।

हालांकि जलील ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि 'मध्यमम' ने कोविड-19 के कारण विदेशों में मारे गए लोगों की तस्वीरें प्रकाशित करके अनिवासी केरल वासियों के बीच चिंता पैदा की थी।

जलील ने न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्होंने महावाणिज्य दूत का ध्यान एक ऐसी खबर की ओर दिलाया जिसमें दावा किया गया था कि खाड़ी क्षेत्र में इलाज के अभाव में केरल वासियों की मौत हो रही है।

‘मध्यमम’ के चीफ एडिटर ओ अब्दुर्रहमान ने कहा, ‘एक राज्य मंत्री का दूसरे देश के वाणिज्य दूतावास को पत्र लिखना प्रोटोकॉल उल्लंघन था। उनका कार्य प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ एक कदम था। हमने मुख्यमंत्री से मुलाकात की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पत्र के बारे में पता नहीं है। उन्होंने कहा कि आवश्यक कार्रवाई करेंगे। हम उनकी प्रतिक्रिया से संतुष्ट हैं।’

हालांकि, जलील ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी 26 जून, 2020 को खाड़ी देशों में जान गंवाने वालों की तस्वीरों के प्रकाशन की कड़ी आलोचना की थी।

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‘अमर उजाला’ में फिर कई संपादकों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल

सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार, इस बार मुरादाबाद, जम्मू और चंडीगढ़ के संपादक बदले गए हैं।

Last Modified:
Friday, 22 July, 2022
Amar Ujala

हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’ (Amar Ujala) में एक बार फिर कई संपादकों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया गया है। समाचार4मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार, इस बार मुरादाबाद, जम्मू और चंडीगढ़ के संपादक बदले गए हैं।

बताया जाता है कि ’अमर उजाला’, मुरादाबाद में संपादक रणदीप वशिष्ठ को जम्मू भेजा गया है। रणदीप वशिष्ठ को मीडिया में काम करने का करीब 24 साल का अनुभव है। वह मुरादाबाद संस्करण में करीब ढाई साल से अपनी जिम्मेदार संभाल रहे थे। उनकी जगह मुरादाबाद में नोएडा से नीरज तिवारी को लाया गया है। नीरज तिवारी करीब साढ़े आठ साल से इस अखबार के साथ जुड़े हुए हैं। वह पहले मेरठ और कानपुर में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।  

यह भी पढ़ें: ‘अमर उजाला’ में कई संपादकों के कार्यक्षेत्र बदले

वहीं, जम्मू संस्करण में तैनात संपादक बविंदर कुमार वशिष्ठ को चंडीगढ़ भेजा जा रहा है। ‘अमर उजाला’ से करीब दो दशक से जुड़े हुए बविंदर करीब तीन साल से जम्मू में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। पूर्व में वह शिमला में भी रह चुके हैं। वह एक अगस्त को चंडीगढ़ संस्करण में बतौर संपादक जॉइन करेंगे। इसके साथ ही चंडीगढ़ में संपादक संजय पांडेय को नोएडा भेजा जा रहा है। वह अगले कुछ दिनों में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

बता दें कि पिछले महीने भी ‘अमर उजाला’ में कई संपादकों के कार्यक्षेत्र बदले गए थे। इन बदलावों के तहत आगरा संस्करण में संपादक विनोद पुरोहित का तबादला कानपुर किया गया था। देहरादून के न्यूज एडिटर कुमार अतुल को अलीगढ़ में संपादक बना कर भेजा गया था। बतौर संपादक कानपुर में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे विजय त्रिपाठी को लखनऊ में राजीव सिंह की जगह संपादक बनाकर भेजा गया था।

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