बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) के आगामी अंक में इसके बारे में और विस्तार से जानकारी दी गई है और देश में मीडियाटेक्नोलॉजी पर फोकस किया गया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो
मीडिया के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी की काफी अहम भूमिका है, लेकिन इसका असली फायदा सिर्फ वही लोग उठा सकते हैं, जो टेक्नोलॉजी को कंटेंट, कल्चर, कॉमर्स, अंतरक्रियाशीलता (interactivity) और मीडियाटेक के इस युग में प्रमुख प्लेटफॉर्म के संयोजन के रूप में बेहतर तरीके से इसका इस्तेमाल करना जानते हों। बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) का अगला अंक इसी स्ट्रैटेजी पर केंद्रित है।
वर्ष 2020 की बात करें तो भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर ने $877.8 मिलियन डॉलर का निवेश जुटाया। यह इस लिहाज से काफी उल्लेखनीय कहा जा सकता है कि महामारी के कारण इस सेक्टर को इस दौरान काफी विरोधाभासी स्थितियों का सामना करना पड़ा। एक तरफ तो कुछ बड़े मीडिया संस्थानों को अप्रत्याशित मंदी का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ ने काफी तेजी से सफलता का सफर तय किया, अन्यथा इस स्थिति को हासिल करने में उन्हें काफी वर्षों लग जाते। भारत में इस तरह के मीडिया बिजनेस के आगे बढ़ने का एक ही कारण था कि वे सभी टेक्नोलॉजी केंद्रित मीडिया प्लेटफॉर्म्स थे।
कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया तो कुछ में लाखों का निवेश हुआ। निवेश हासिल करने वालों में ‘मोहल्ला टेक’ (Mohalla Tech) कंपनी के स्वामित्व वाला शॉर्ट वीडियो ऐप ‘Moj‘ और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्स ‘शेयरचैट‘ (ShareChat), ‘डेली हंट‘ (Daily Hunt) का शॉर्ट वीडियो ऐप ‘जोश’ (Josh) और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू किया गया ‘कू’ (Koo) आदि शामिल हैं। भारत में डिजिटल का उदय देश के लिए अपना घरेलू मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने के अवसर को और मजबूती प्रदान कर रहा है। जो इस फील्ड में अपना स्थान बनाने की प्रतिस्पर्धा में हैं, वे सोशल, कॉमर्स, कंटेंट और कल्चर को भी इसमें शामिल कर रहे हैं, जिसकी भारतीय एंटरप्रिन्योर्स को अच्छी समझ है। इस स्ट्रैटेजी से वे अब तक सफल हो रहे हैं।
देश की सबसे पुरानी बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) के आगामी अंक (issue) में इसके बारे में और विस्तार से जानकारी दी गई है और देश में मीडियाटेक्नोलॉजी पर फोकस किया गया है। प्रसिद्ध कहावत है कि 'कंटेंट इज किंग बट डिस्ट्रीब्यूशन इज गॉड' (Content is King but Distribution is God), लेकिन इस अंक में इस बात पर भी रोशनी डाली गई है कि कैसे इस तरह की विचारधारा एक ऐसी दुनिया में बदल गई है जहां टेलीविजन को व्यक्तिगत स्क्रीन (personal screens) में बदला जा रहा है। कंटेंट की प्राथमिकताओं की बात करें तो आजकल कंज्यूमर्स के लिए पसंदीदा भाषाएं और वीडियो पहली पसंद बन रही है, फिर चाहे वे ऑनलाइन शॉपिंग ही क्यों न कर रहे हों।
इस बारे में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना है, ‘ मीडिया ही ऑरिजनल ‘डायरेक्ट टू कस्टमर’ (D2C) है। यहीं पर दुनिया के सबसे ज्यादा खर्च करने वालों को अपने कंज्यूमर्स तक पहुंचने के लिए अपना पैसा लगाना पड़ा। समय के साथ, टेक्नोलॉजी ने तमाम बैरियर्स को तोड़ दिए हैं और कई संयोजन (combinations) बनाए हैं, लेकिन मीडिया की ताकत केवल बढ़ी है। इस क्षेत्र ने उन विघटनकर्ताओं (disruptors) का उदय देखा है जिन्होंने नए मॉडल पेश किए हैं। मार्केट के गैप को दूर करने के अवसर पैदा किए हैं और इस प्रक्रिया में मीडिया की परिभाषा पहले से विकसित हुई है।’
गेमिंग और सोशल कॉमर्स आज मीडिया का उतना ही हिस्सा हैं, जितना कि ‘ओवर द टॉप’(ओटीटी) या शॉर्ट वीडियो कंटेंट प्लेटफॉर्म। यह व्यापक स्पेक्ट्रम भारत को, एक प्रड्यूसर और कंज्यूमर दोनों के रूप में कंटेंट का दिग्गज बनाता है और इसे आगे बढ़ाता है।
मैगजीन के इस अंक में देश के टॉप मीडियाटेक स्टार्ट-अप्स और प्रतिष्ठित मीडिया घरानों के विचारों को शामिल किया जाएगा, जिनके पास भविष्य के अनुकूल खुद को ढालने के लिए टेक्नोलॉजी है। इस अंक में इंडस्ट्री के विचारों, नए मीडिया मुद्रीकरण के रुझानों और मीडिया परिदृश्य में बड़े बदलावों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा इस अंक में इस बात पर भी बारीकी से प्रकाश डाला जाएगा कि वर्तमान में और महामारी के बाद के भारत में मीडिया टेक्नोलॉजी कैसे एक बहुत बड़ा और अच्छा अवसर है।
कंपनी के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल और डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने कंपनी के प्रदर्शन, डिजिटल कारोबार, रेडियो बिजनेस और प्रिंट इंडस्ट्री की स्थिति पर विस्तार से बात की।
by
Vikas Saxena
दैनिक भास्कर के स्वामित्व वाली कंपनी डीबी कॉर्प (DB Corp Limited) ने 11 मई 2026 को निवेशकों और विश्लेषकों के साथ अपनी चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों को लेकर कॉन्फ्रेंस कॉल की। इस इंवेस्टर्स मीट में कंपनी के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल और डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने कंपनी के प्रदर्शन, डिजिटल कारोबार, रेडियो बिजनेस और प्रिंट इंडस्ट्री की स्थिति पर विस्तार से बात की।
इस दौरान, पवन अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद कंपनी का प्रिंट कारोबार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर, ऑटोमोबाइल और सरकारी विज्ञापनों से अच्छा सपोर्ट मिला। कंपनी की कंसॉलिडेटेड विज्ञापन आय चौथी तिमाही में करीब 6 फीसदी बढ़कर 4067 मिलियन रुपये रही, जबकि सर्कुलेशन रेवेन्यू 1162 मिलियन रुपये पर स्थिर रहा। कुल रेवेन्यू 4 फीसदी बढ़कर 5896 मिलियन रुपये पहुंच गया। वहीं EBITDA में 15.6 फीसदी और PAT में 18.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
उन्होंने कहा कि अगर पिछले साल के चुनावी विज्ञापनों के असर को अलग कर दिया जाए तो कंपनी के प्रिंट विज्ञापन कारोबार में 6.3 फीसदी की अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 28 फीसदी तक पहुंच गया।
न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमतों पर पवन अग्रवाल ने कहा कि कच्चे माल की लागत, ग्लोबल सप्लाई और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने की वजह से कीमतों में तेजी आई है। उनका मानना है कि यह स्थिति अगले कुछ तिमाहियों तक बनी रह सकती है।
डिजिटल कारोबार पर उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस लगातार इस क्षेत्र पर बना हुआ है। मार्च 2026 तक कंपनी के न्यूज ऐप्स पर करीब 2 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स रहे और दैनिक भास्कर हिंदी और गुजराती न्यूज ऐप कैटेगरी में नंबर-1 बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कंपनी हाई क्वालिटी कंटेंट, बेहतर यूजर एक्सपीरियंस और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने पर काम कर रही है। हाइपरलोकल कंटेंट, विजुअल स्टोरीटेलिंग और पर्सनलाइज्ड कंटेंट फॉर्मेट्स को पाठकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
रेडियो बिजनेस पर पवन अग्रवाल ने बताया कि माय एफएम ने साल के दौरान 7 नए स्टेशन शुरू किए हैं और अब कंपनी 37 शहरों में मौजूद है। उन्होंने कहा कि खुशी की बात यह है कि सभी नए स्टेशन सिर्फ तीन महीने में EBITDA पॉजिटिव हो गए। कंपनी श्रोताओं को जोड़ने के लिए इनोवेटिव कंटेंट और ग्राउंड एक्टिवेशन पर फोकस कर रही है।
वहीं गिरीश अग्रवाल ने कहा कि प्रिंट मीडिया को लेकर भले ही यह धारणा बनाई जाती हो कि यह गिरता हुआ माध्यम है, लेकिन कंपनी के लिए यह अब भी मजबूत और भरोसेमंद बिजनेस बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है। FY22 से FY25 के बीच विज्ञापन आय में करीब 13 फीसदी CAGR दर्ज किया गया, जबकि लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी की वजह से PAT CAGR करीब 38 फीसदी रहा।
उन्होंने कहा कि कंपनी का पाठकों से मजबूत जुड़ाव बना हुआ है और सर्कुलेशन रेवेन्यू भी स्थिर बना हुआ है। ग्राउंड एक्टिविटीज और कई पहलों के जरिए पाठकों के साथ लगातार जुड़ाव बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
संपादकीय मोर्चे पर गिरीश अग्रवाल ने कहा कि कंपनी जिम्मेदार और असरदार पत्रकारिता पर फोकस बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि कंपनी की खोजी पत्रकारिता ने कई राज्यों में भ्रष्टाचार, जनता से जुड़े मुद्दों और जनहित के मामलों को उजागर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के दो पत्रकारों को प्रतिष्ठित Ramnath Goenka Awards से सम्मानित किया गया है। उनके मुताबिक यह पहली बार है जब किसी हिंदी अखबार के पत्रकारों को यह सम्मान मिला है।
भविष्य के कारोबार को लेकर गिरीश अग्रवाल ने कहा कि अप्रैल 2026 में कंपनी को मजबूत डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है और भारतीय बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आगे भी अच्छी ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कंपनी 24 से 26 फीसदी EBITDA मार्जिन बनाए रखने को लेकर आश्वस्त है।
उन्होंने बताया कि कंपनी कई शहरों में किराये की प्रॉपर्टी खरीद रही है, ताकि भविष्य में किराया खर्च कम किया जा सके और प्रॉपर्टी वैल्यू बढ़ने का फायदा भी मिले। भोपाल, जयपुर, कोटा, औरंगाबाद, नासिक और जलगांव जैसे शहरों में यह निवेश किया जा रहा है।
डिजिटल बिजनेस को लेकर गिरीश अग्रवाल ने कहा कि कंपनी ने उत्तर प्रदेश बाजार में नई शुरुआत की है और वहां से अच्छे संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि 23 करोड़ आबादी वाला उत्तर प्रदेश कंपनी के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
प्रिंट सर्कुलेशन में हल्की गिरावट पर उन्होंने माना कि बाजार में चुनौतियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि सुबह अखबार बांटने वाले डिलीवरी बॉय की कमी भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, क्योंकि अब उन्हें दूसरे कामों में ज्यादा कमाई मिलने लगी है। इसके बावजूद कंपनी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में सफल रही है।
गिरीश अग्रवाल ने यह भी कहा कि कंपनी फिलहाल किसी दूसरे मीडिया हाउस के अधिग्रहण की योजना नहीं बना रही है। साथ ही उन्होंने बताया कि गूगल और दूसरे प्लेटफॉर्म्स से रेवेन्यू शेयरिंग को लेकर मामला अभी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के पास लंबित है।
दैनिक भास्कर ग्रुप (Dainik Bhaskar Group) ने प्रतिभा सिंह को जनरल मैनेजर – ब्रांड एंड मार्केटिंग नियुक्त किया है। इससे पहले वह DGM – Brand & Marketing के पद पर कार्यरत थीं।
by
Samachar4media Bureau
दैनिक भास्कर ग्रुप (Dainik Bhaskar Group) ने प्रतिभा सिंह को जनरल मैनेजर – ब्रांड एंड मार्केटिंग के पद पर पदोन्नत किया है। इससे पहले वह कंपनी में DGM – Brand & Marketing की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
इस नई भूमिका की जानकारी प्रतिभा सिंह ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने अपने पेशेवर सफर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने साल 2006 में मुंबई में डिप्टी मैनेजर – कॉर्पोरेट ब्रांड एंड मार्केटिंग के रूप में दैनिक भास्कर ग्रुप के साथ करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने इस नई जिम्मेदारी को अपने करियर का “फुल सर्कल मोमेंट” बताया।
प्रतिभा सिंह पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से दैनिक भास्कर ग्रुप के साथ जुड़ी हुई हैं। इससे पहले अपने करियर के शुरुआती दौर में भी वह कुछ समय तक इस मीडिया समूह का हिस्सा रह चुकी हैं। दैनिक भास्कर ग्रुप में दोबारा शामिल होने से पहले उन्होंने करीब 11 वर्षों तक 94.3 MY FM के साथ काम किया। वह MY FM की फाउंडिंग टीम का हिस्सा थीं और उत्तर भारत के कई बाजारों में ब्रांड को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
ब्रांड और मार्केटिंग इंडस्ट्री में प्रतिभा सिंह को दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने B2B2C, B2B और B2C सेक्टर में उपभोक्ता व्यवहार, मार्केट स्ट्रेटेजी और ब्रांड ग्रोथ पर व्यापक काम किया है। अपने करियर के दौरान वह दैनिक जागरण (Dainik Jagran) और मेगा कॉरपोरेशन (Mega Corporation) जैसी कंपनियों से भी जुड़ी रही हैं।
हिंदी अखबार 'दैनिक भास्कर' के स्वामित्व वाली कंपनी डी.बी. कॉर्प (D. B. Corp Limited) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सोमवार को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी।
by
Vikas Saxena
हिंदी अखबार 'दैनिक भास्कर' के स्वामित्व वाली कंपनी डी.बी. कॉर्प (D. B. Corp Limited) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सोमवार को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी। कंपनी ने मार्च 2026 तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कंपनी ने अपने मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल की दोबारा नियुक्ति को भी मंजूरी दे दी है।
कंपनी के मुताबिक, सुधीर अग्रवाल को 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2031 तक पांच साल के लिए फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी अभी बाकी है। यह फैसला बोर्ड की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर लिया गया।
डी. बी. कॉर्प ने बताया कि सुधीर अग्रवाल पिछले करीब 35 साल से अखबार प्रिंटिंग और पब्लिशिंग बिजनेस से जुड़े हुए हैं और कंपनी की शुरुआत से ही बोर्ड का हिस्सा हैं। कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति और बिजनेस विस्तार में उनकी अहम भूमिका रही है।
कंपनी के अनुसार, उनके नेतृत्व में डी. बी. कॉर्प ने एक राज्य से बढ़कर 12 राज्यों तक अपनी मौजूदगी बनाई। वहीं, 1997 में जहां कंपनी के सिर्फ 4 एडिशन थे, अब यह संख्या बढ़कर 61 हो गई है। कंपनी तीन भाषाओं में देशभर में अपना अखबार प्रकाशित करती है।
डी. बी. कॉर्प ने यह भी कहा कि सुधीर अग्रवाल द्वारा शुरू किया गया डोर-टू-डोर लॉन्च मॉडल काफी सफल रहा, जिस पर Indian Institute of Management Ahmedabad, Indian Institute of Management Bangalore और Harvard Business Review जैसे संस्थानों ने केस स्टडी भी की।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में यह भी साफ किया कि सुधीर अग्रवाल पर किसी भी नियामक संस्था की ओर से डायरेक्टर पद संभालने पर कोई रोक नहीं है।
‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) की पब्लिशिंग कंपनी डी.बी. कॉर्प लिमिटेड (D.B. Corp Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है।
by
Samachar4media Bureau
‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) की पब्लिशिंग कंपनी डी.बी. कॉर्प लिमिटेड (D.B. Corp Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का विज्ञापन राजस्व सालाना आधार पर 6 फीसदी बढ़कर 406.7 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 384.1 करोड़ रुपये था।
कंपनी की कुल कंसोलिडेटेड आय भी 4 फीसदी बढ़कर करीब 589.6 करोड़ रुपये हो गई। वहीं EBITDA में 15.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 117.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) भी 18.8 फीसदी बढ़कर 62.2 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी ने बताया कि FY2022 से FY2025 के बीच विज्ञापन राजस्व में 13 फीसदी की मजबूत CAGR ग्रोथ दर्ज की गई है। वहीं FY2026 में समान आधार (Like-to-Like Basis) पर प्रिंट विज्ञापन कारोबार में 6.3 फीसदी और EBITDA में 7.1 फीसदी की वृद्धि हुई।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी की कंसोलिडेटेड कुल आय 2440.8 करोड़ रुपये रही, जबकि FY2025 में यह 2421.2 करोड़ रुपये थी। हालांकि पूरे साल का EBITDA घटकर 573.6 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष में 627 करोड़ रुपये था। इसी तरह PAT भी 371 करोड़ रुपये से घटकर 332 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
डिजिटल कारोबार भी कंपनी के लिए लगातार ग्रोथ का बड़ा माध्यम बना हुआ है। मार्च 2026 तक कंपनी के मासिक सक्रिय यूजर्स (MAUs) की संख्या 2 करोड़ तक पहुंच गई, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती यूजर एंगेजमेंट और कंटेंट खपत को दर्शाती है।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंपनी का प्रदर्शन उसके प्रमुख कारोबारों में मजबूत कामकाज का नतीजा है। उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया में विज्ञापन मांग और सर्कुलेशन स्थिर बना हुआ है, जिससे कंपनी को अपने प्रमुख बाजारों में मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी यूजर बेस और एंगेजमेंट लगातार बढ़ रहा है, जिससे कंपनी की ‘फिजिटल’ मौजूदगी और मजबूत हुई है। साथ ही लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस के चलते कंपनी स्थिर मार्जिन बनाए रखने में सफल रही है।
कंपनी के अनुसार कंपनी आने वाले समय में भी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने और दीर्घकालिक विकास के अवसरों का लाभ उठाने पर फोकस बनाए रखेगी।
गुजरात के सबसे बड़े और प्रभावशाली मीडिया हाउस 'संदेश लिमिटेड' (The Sandesh Limited) की सीनियर मैनेजर (HR) श्रीप्रधा मोरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 4 मई 2026 को अपना इस्तीफा सौंपा।
by
Vikas Saxena
गुजरात के सबसे बड़ा और प्रभावशाली मीडिया हाउस 'संदेश लिमिटेड' (The Sandesh Limited) के सीनियर मैनेजमेंट में बदलाव हुआ है। कंपनी की सीनियर मैनेजर (HR) श्रीप्रधा मोरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 4 मई 2026 को अपना इस्तीफा सौंपा।
फिलहाल, श्रीप्रधा मोरे तीन महीने के नोटिस पीरियड पर हैं और इसके तहत 3 अगस्त 2026 तक अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहेंगी और उसी दिन उनका आखिरी वर्किंग डे होगा।
अपने इस्तीफे में श्रीप्रधा मोरे ने कहा है कि वह नए प्रोफेशनल मौके तलाशने के लिए यह फैसला ले रही हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि ट्रांजिशन पीरियड के दौरान वह कंपनी को पूरा सहयोग देंगी, ताकि कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे।
'संदेश लिमिटेड' गुजरात की एक बड़ी और पुरानी मीडिया कंपनी है, जो खासतौर पर रीजनल मीडिया में मजबूत पकड़ रखती है। यह कंपनी अखबार, टीवी न्यूज और डिजिटल मीडिया का काम करती है। इसका सबसे बड़ा प्रोडक्ट गुजराती अखबार ‘संदेश’ है, जो राज्य के प्रमुख अखबारों में गिना जाता है। कंपनी की शुरुआत 1923 में हुई थी, जबकि इसे पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में 1943 में स्थापित किया गया।
जागरण प्रकाशन (Jagran Prakashan Limited) 29 मई 2026 को एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) आयोजित करने जा रही है
by
Vikas Saxena
जागरण प्रकाशन (Jagran Prakashan Limited) 29 मई 2026 को एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) आयोजित करने जा रही है। यह बैठक दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी।
कंपनी के मुताबिक, इस मीटिंग का नोटिस 5 मई 2026 को शेयरधारकों को ईमेल के जरिए भेज दिया गया है। जिन निवेशकों के ईमेल रजिस्टर हैं, उन्हें ही यह नोटिस भेजा गया है। वहीं, इस बैठक में वोटिंग के लिए 22 मई 2026 को कट-ऑफ डेट तय की गई है।
इस EGM में सबसे बड़ा मुद्दा कंपनी के बोर्ड से 8 डायरेक्टर्स को हटाने का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव कंपनी के प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी कंपनी Jagran Media Network Investment Private Limited की ओर से लाया गया है, जिसके पास करीब 67.97% हिस्सेदारी है।
बैठक में जिन डायरेक्टर्स को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है, उनमें सबसे पहले नाम दिव्या कराणी का है, जो कंपनी में स्वतंत्र निदेशक हैं। इसके अलावा शैलेन्द्र स्वरूप को भी बोर्ड से हटाने का प्रस्ताव है। तीसरा नाम अनीता नय्यर का है, जिन्हें भी हटाने की बात कही गई है। चौथा नाम केमिशा सोनी का है, जो स्वतंत्र निदेशक हैं। इसके बाद प्रमोद अग्रवाल को भी हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। छठे नंबर पर शालीन टंडन का नाम शामिल है। सातवें डायरेक्टर अरुण अनंत हैं, जिन्हें हटाने की बात कही गई है। वहीं आठवें नाम के तौर पर सतीश चंद्र मिश्रा को हटाने का प्रस्ताव है, जो कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक हैं।
कंपनी के मुताबिक, इन डायरेक्टर्स को हटाने का प्रस्ताव कंपनी अधिनियम 2013 के तहत लाया गया है और इसके लिए विशेष प्रस्ताव (Special Resolution) पास करना होगा, जबकि एक मामले में साधारण प्रस्ताव (Ordinary Resolution) रखा गया है।
इस पूरे मामले के पीछे कंपनी के अंदर चल रहा विवाद भी सामने आया है। प्रमोटर ग्रुप का कहना है कि इन डायरेक्टर्स की नियुक्ति सही तरीके से नहीं हुई थी। वहीं कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह मामला पहले से ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में चल रहा है।
दरअसल, इस मामले में कई याचिकाएं NCLT में दाखिल की गई थीं, जिसके चलते पहले EGM पर रोक लगा दी गई थी। बाद में NCLT ने अप्रैल 2026 में इस रोक को हटा दिया और कहा कि सभी पक्ष कानून के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं। इसके बाद कंपनी ने अब EGM बुलाने का फैसला लिया है।
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि शेयरधारक 26 मई से 28 मई 2026 के बीच ई-वोटिंग के जरिए अपने वोट डाल सकते हैं। इसके अलावा, जो सदस्य EGM में शामिल होंगे, वे भी वोट कर सकेंगे।
कुल मिलाकर, यह बैठक कंपनी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें बोर्ड के बड़े बदलाव का फैसला हो सकता है। इससे कंपनी के मैनेजमेंट और भविष्य की रणनीति पर भी असर पड़ने की संभावना है।
मीडिया कंपनी जागरण प्रकाशन मीडिया लिमिटेड ने शेयरधारकों की एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाने का फैसला किया है।
by
Vikas Saxena
मीडिया कंपनी जागरण प्रकाशन मीडिया लिमिटेड ने शेयरधारकों की एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाने का फैसला किया है। यह बैठक 29 मई 2026 को दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की जाएगी।
कंपनी ने बताया कि यह फैसला बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 2 मई 2026 को सर्कुलर रेजोल्यूशन के जरिए लिया है। यह कदम नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के हालिया आदेश और कानूनी सलाह के आधार पर उठाया गया है।
दरअसल, कंपनी को जागरण मीडिया नेटवर्क इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (JMNIPL) की ओर से EGM बुलाने की मांग मिली थी। इस मांग में कंपनी के कुछ डायरेक्टर्स को हटाने का प्रस्ताव शामिल था। पहले यह मामला NCLT के अंतरिम आदेश के चलते रुका हुआ था, लेकिन अब NCLT द्वारा संबंधित याचिकाएं खारिज किए जाने और अंतरिम रोक हटने के बाद कंपनी आगे की प्रक्रिया पूरी कर रही है।
इस EGM में कंपनी के सात इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स- दिव्या करणी, शैलेन्द्र स्वरूप, अनीता नय्यर, केमिशा सोनी, प्रमोद अग्रवाल, शालीन टंडन और अरुण अनंत को हटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, होल-टाइम डायरेक्टर सतीश चंद्र मिश्रा को हटाने का प्रस्ताव भी शेयरधारकों के सामने रखा जाएगा।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह सभी प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी के लिए रखे जाएंगे, जैसा कि कंपनी अधिनियम 2013 के तहत जरूरी है। EGM का नोटिस और उससे जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द ही शेयरधारकों को भेजी जाएगी और स्टॉक एक्सचेंजों पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
बैठक के बाद वोटिंग के नतीजे भी नियमानुसार सार्वजनिक किए जाएंगे। कंपनी ने यह भी कहा है कि रिक्विजिशन के तहत दिए गए स्पेशल नोटिस के कंटेंट की जिम्मेदारी बोर्ड की नहीं है और इस संबंध में जरूरी कार्रवाई कानून के मुताबिक की जा रही है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, उन्होंने शैलेश डोभाल की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है, जो इस अखबार की एडिटोरियल टीम की कमान संभाल रहे थे।
by
Samachar4media Bureau
देश के प्रमुख बिजनेस अखबारों में शामिल ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ (Business Standard) ने वरिष्ठ पत्रकार विकास धूत को प्रमोशन का तोहफा देते हुए एडिटर के पद पर नियुक्त किया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, उन्होंने शैलेश डोभाल की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है, जो इस अखबार की एडिटोरियल टीम की कमान संभाल रहे थे।
विकास धूत इससे पहले ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ में रेजिडेंट एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। उन्होंने यहां पिछले साल फरवरी में जॉइन किया था। अपने करियर के शुरुआत दिनों में भी वह इस अखबार का हिस्सा रहे हैं।
‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ में पिछले साल अपनी नई पारी से पहले विकास धूत करीब द हिन्दू (The Hindu) में बिजनेस एडिटर के पद पर अपनी भूमिका निभा रहे थे। वह इस अखबार से करीब साढ़े नौ साल से जुड़े हुए थे।
पूर्व में वह द इकनॉमिक टाइम्स (The Economic Times), फाइनेंसियल एक्सप्रेस (Financial Express) और द इंडियन एक्सप्रेस (The India Express) जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में विभिन्न प्रमुख पदों पर अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
अप्रैल-मई का महीना अक्सर भारत में दो चीजों के साथ आता है- गर्मी और चुनावी हलचल। लेकिन इस बार 2026 में एक और चीज उफान पर है- अखबारों की मांग।
by
Samachar4media Bureau
विकास सक्सेना, डिप्टी न्यूज एडिटर, समाचार4मीडिया ।।
अप्रैल-मई का महीना अक्सर भारत में दो चीजों के साथ आता है- गर्मी और चुनावी हलचल। लेकिन इस बार 2026 में एक और चीज उफान पर है- अखबारों की मांग। जिस दौर में यह माना जाने लगा था कि डिजिटल ने प्रिंट की कमर तोड़ दी है, उसी दौर में चुनाव का मौसम प्रिंट मीडिया को एक नई जान दे देता है। हॉकर सुबह जल्दी उठता है, प्रिंटिंग प्रेस रात भर चलती है, स्थानीय दुकानदार अखबार में पूरे पेज का विज्ञापन देता है। यह सिर्फ मीडिया की कहानी नहीं, यह एक पूरे इकोनॉमिक सिस्टम की कहानी है।
2026: पाँच राज्यों का चुनावी महासमर और मीडिया की चांदी
2026 में भारत के पांच राज्यों में विधानसभाओं चुनाव हुए- असम, केरल और पुदुच्चेरी में 9 अप्रैल, तमिलनाडु में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को। इन चुनावों में कुल 824 विधायकों का भाग्य तय हुआ।और जब पाँच बड़े राज्यों में एक साथ चुनाव हों, तो मीडिया इंडस्ट्री के लिए यह किसी त्योहार से कम नहीं। 'एक्सचेंज4मीडिया' के अनुसार, 2026 के राज्य चुनावों से मीडिया सेक्टर को 1,400 करोड़ रुपये से अधिक का फायदा मिलने की उम्मीद जताई गई। यह आंकड़ा सिर्फ विज्ञापन राजस्व का नहीं- इसके पीछे एक पूरी अर्थव्यवस्था है जो चुनाव के साथ जागती है।
प्रिंट का पलटवार: केरल से आया सबसे बड़ा सबूत
TAM AdEx India की केरल विधानसभा चुनाव रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 2021 की तुलना में राजनीतिक विज्ञापनों में जबरदस्त उछाल आया। टेलीविजन पर राजनीतिक विज्ञापन 52 प्रतिशत बढ़े, प्रिंट करीब 2.74 गुना रहा और रेडियो ने सबसे तेज छलांग लगाई- 3.12 गुना वृद्धि।
डिजिटल विज्ञापन में 2026 में 2021 की तुलना में करीब 4 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई। यह एक महत्वपूर्ण संकेत है, जब चुनाव की बात आती है तो पार्टियां प्रिंट और पारंपरिक मीडिया की ओर लौटती हैं।
वैसे बता दें कि जब चुनाव घोषित हुआ, तो केरल में चुनाव की घोषणा और वोटिंग के बीच बहुत कम समय था। उम्मीदवार तय होते-होते पार्टियों के पास व्यक्तिगत संपर्क का वक्त नहीं था, इसलिए मीडिया ही उनके लिए जनता तक पहुंचने का सबसे अच्छा जरिया था।
मीडिया मिक्स में प्रिंट की 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रही। इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया पर चुनाव के अंतिम 48 घंटों में विज्ञापन नहीं दिया जा सकता, लिहाजा इस नियम ने प्रिंट की भूमिका को और मजबूत कर दिया।
प्रिंट में सबसे ज्यादा गतिविधि अंतिम सप्ताह में रही- कुल प्रिंट विज्ञापन सम्मिलन का 54.4 प्रतिशत चुनाव से ठीक पहले के सप्ताह यानी 5 से 9 अप्रैल में हुआ। यानी जैसे-जैसे मतदान नजदीक आया, अखबारों में विज्ञापन की बाढ़ आ गई।
मलयाला मनोरमा ग्रुप के मार्केटिंग व ऐड सेल्स के वाइस प्रेजिडेंट वर्गीस चांडी ने 'समाचार4मी़डिया' से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन बाजार में प्रिंट की हिस्सेदारी करीब 9% पर स्थिर हो गई है, लेकिन केरल में यह अब भी एक मजबूत माध्यम है और करीब 40% हिस्सेदारी रखता है। इसकी वजह यह है कि मलयाली पाठकों के बीच प्रिंट को आज भी सबसे भरोसेमंद और सर्वसुलभ माध्यम माना जाता है।
यही भरोसा इसे खासकर चुनावों के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों के लिए ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बनाता है। एक उच्च साक्षरता वाले राज्य में छपा हुआ शब्द मतदाताओं का भरोसा जीतने में बड़ी भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि मतदान से पहले के 48 घंटे के ‘साइलेंट पीरियड’ में इसकी अहमियत और बढ़ जाती है, जब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया शांत हो जाता है, तब प्रिंट ही पार्टियों के लिए अपने घोषणापत्र और उम्मीदवारों की खूबियों को लोगों तक पहुंचाने का मुख्य और भरोसेमंद माध्यम बन जाता है।
सर्कुलेशन की असली कहानी: अखबार की मांग कैसे बढ़ती है?
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) की जनवरी से जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दैनिक समाचार पत्रों का कुल औसत सर्कुलेशन 2.97 करोड़ प्रतियां रहा, जो पिछली अवधि (जुलाई-दिसंबर 2024) की 2.89 करोड़ प्रतियों से 2.77 प्रतिशत अधिक है।
सर्कुलेशन में हिंदी अखबार सबसे आगे हैं। दैनिक भास्कर 30.40 लाख प्रतियों के साथ नंबर एक पर है, इसके बाद दैनिक जागरण 23.53 लाख और अमर उजाला 15.50 लाख प्रतियों पर हैं। अंग्रेजी में टाइम्स ऑफ इंडिया 16.40 लाख प्रतियों के साथ अग्रणी है।
MIB के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में देशभर में अखबारों की कुल सर्कुलेशन 21 करोड़ से ज्यादा रही। यह संख्या RNI में रजिस्टर्ड सभी अखबारों द्वारा बताई गई है, यानी यह ABC जैसे ऑडिटेड आंकड़े नहीं हैं।
इनमें हिंदी अखबारों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है—अकेले हिंदी दैनिकों की सर्कुलेशन 10 करोड़ से ज्यादा है। खास बात यह है कि यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे हिंदी भाषी राज्यों में चुनाव के समय अखबारों की मांग सबसे ज्यादा बढ़ जाती है।
प्रिंट की आर्थिक ताकत: 20,866 करोड़ रुपये का बाजार
Pitch-Madison Advertising Report 2026 के अनुसार, भारत में प्रिंट विज्ञापन राजस्व 2024 में 20,272 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 20,866 करोड़ रुपये हो गया, यानी 3 प्रतिशत की वृद्धि। हालांकि कुल AdEx में प्रिंट की हिस्सेदारी 2024 के 19 प्रतिशत से घटकर 2025 में 18 प्रतिशत रह गई।
साल 2025 की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) सबसे मजबूत तिमाही रही- प्रिंट राजस्व 5 प्रतिशत बढ़कर 6,524 करोड़ रुपये हो गया और इसने पूरे साल के राजस्व में 31 प्रतिशत की हिस्सेदारी बनाई।
डीबी कॉर्प ने FY25 में कुल 2,421.2 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जिसमें विज्ञापन राजस्व 1,690 करोड़ और सर्कुलेशन राजस्व 473.4 करोड़ रहा। FY25 में विज्ञापन राजस्व FY24 के 1,752.4 करोड़ की तुलना में थोड़ा कम रहा, इसकी वजह भी चुनाव रहा।
दैनिक भास्कर ग्रुप के प्रमोटर व डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का विश्लेषण है- चुनाव-मोड में जो राज्य होते हैं, वहां सरकारी घोषणाओं और कल्याण योजनाओं की भरमार रहती है, इससे खपत बढ़ती है और प्रिंट मीडिया को सीधा फायदा मिलता है।
हॉकर, वेंडर और प्रिंटिंग स्टाफ: वो लोग जिनकी जिंदगी बदल जाती है
अखबार इंडस्ट्री की सबसे अनजान लेकिन सबसे जरूरी कड़ी है- हॉकर। भारत के अखबार वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) तंत्र की रीढ़ ये हॉकर ही हैं। हर सुबह हॉकर एजेंट या सब-एजेंट से अखबार उठाते हैं और डिलीवरी बॉयज के जरिये हर घर तक पहुंचाते हैं। यह वितरण प्रणाली अखबार इंडस्ट्री की स्थिरता की बुनियाद है।
चुनाव के दौरान अखबारों के ज्यादा पेज निकलते हैं, सप्लीमेंट आते हैं, विशेष संस्करण छपते हैं और इसके साथ हॉकरों की कमाई भी बढ़ती है।
छोटे शहरों में Readership Spike: टियर-2 और टियर-3 की असली तस्वीर
भारत के अखबार बाजार की एक खासियत यह है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती साक्षरता, क्षेत्रीय भाषाओं का प्रसार और बढ़ती प्रति व्यक्ति आय- ये तीनों मिलकर प्रिंट की मांग को जीवित रखते हैं। केरल इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। केरल भारत में उन कुछ बाजारों में से एक है जहां पारंपरिक मीडिया आज भी बहुत मजबूत है। यहां अधिकांश घरों में कम से कम एक अखबार आता है और कई घरों में एक से अधिक।
PMAR 2026 के अनुसार, हिंदी बाजार में विज्ञापन मात्रा स्थिर रही जबकि अंग्रेजी में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2026-27 में प्रिंट ऑटो, BFSI, रियल एस्टेट और प्रीमियम एजुकेशन जैसे क्षेत्रों के लिए सबसे कारगर माध्यम बना रहेगा- खासकर हिंदी और अंग्रेजी बाजारों में।
लोकल एड मार्केट: जब छोटे व्यापारी भी बन जाते हैं बड़े विज्ञापनदाता
चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों का विज्ञापन नहीं लाते- वे स्थानीय व्यापारियों को भी अखबार में आने के लिए प्रेरित करते हैं। जब पाठकों की तादाद बढ़ती है, तो स्थानीय दुकानदार, बिल्डर, ज्वेलर्स और ऑटो डीलर, सभी इस अवसर का फायदा उठाते हैं। ऐसा माना जाता है कि राजनीतिक विज्ञापन हमेशा प्रीमियम दरों पर बिकते हैं- सामान्य दरों से दोगुने से भी अधिक और यह प्रीमियम घोषणा के पहले दिन से लेकर मतदान के दिन तक एकसमान बना रहता है।
एक्सचेंज4मीडिया के अनुसार, FY25 में सरकारी विज्ञापन खर्च 644 करोड़ रुपये रहा। चुनाव के दौरान जब MCC लागू होती है तो DAVP का खर्च थोड़ा घटता है, लेकिन राजनीतिक दलों का खर्च इसकी भरपाई कर देता है।
डिजिटल बनाम प्रिंट: जंग अभी खत्म नहीं
2026 के राज्य चुनावों में BJP ने चार राज्यों में 40 करोड़ रुपये से अधिक डिजिटल विज्ञापन खर्च किए और Google तथा Meta पर करीब 50,000 विज्ञापन दिए। लेकिन यही पार्टी केरल में प्रिंट विज्ञापन में भी भारी निवेश कर रही थी।
TAM AdEx की रिपोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है- जब डिजिटल दुनिया में गलत सूचनाओं का बोलबाला हो, तो राजनीतिक दल विश्वसनीय माध्यमों यानी प्रिंट और रेडियो की ओर लौटते हैं। केरल 2026 में रेडियो पर 3.1 गुना और प्रिंट पर 2.7 गुना वृद्धि इसी बात की गवाही है।
प्रिंट की ताकत का असली इम्तिहान
2025 में प्रिंट AdEx 20,866 करोड़ रुपये तक पहुंचा। हालांकि कुल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 18 प्रतिशत पर आ गई है, लेकिन प्रिंट एक विश्वसनीयता-आधारित, उच्च-प्रभाव वाले माध्यम के रूप में मजबूती से टिका हुआ है।
चुनाव इस इंडस्ट्री की असली परीक्षा है और हर बार यह इंडस्ट्री साबित करता है कि वह अभी भी प्रासंगिक है। डिजिटल आया, सोशल मीडिया आया, लेकिन जब मतदाता को सुबह अपने उम्मीदवार का नाम, उसका वादा, उसकी नीतियां पढ़नी होती हैं, तो वह अखबार ही उठाता है और उस अखबार को सुबह 5 बजे दरवाजे तक पहुंचाने वाला हॉकर- वही है इस पूरी कहानी का असली नायक।
चिंकी सिन्हा पूर्व में द इंडियन एक्सप्रेस और बीबीसी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में विभिन्न पदों पर अपनी भूमिकाएं निभा चुकी हैं।
by
Samachar4media Bureau
चिंकी सिन्हा ने जानी-मानी मैगजीन आउटलुक (Outlook) में एडिटर पद से इस्तीफा दे दिया है। चिंकी सिन्हा आउटलुक की एडिटर के रूप में संपादकीय टीम का नेतृत्व कर रही थीं।
खास बात यह है कि वह इस पब्लिकेशन के 26 साल के इतिहास में इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला एडिटर थीं, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे की वजहों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे अनुभव के साथ चिंकी सिन्हा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। आउटलुक से पहले चिंकी सिन्हा कई बड़े मीडिया संस्थानों के साथ जुड़ी रही हैं।
उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) और ओपन मैगजीन (Open magazine) जैसे प्रतिष्ठित पब्लिकेशंस में काम किया है। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों जैसे बीबीसी न्यूज (BBC News) और अल जजीरा (Al Jazeera) के लिए भी योगदान दिया है।