वोट की गूंज के साथ बढ़ता अखबारों का कारोबार: सर्कुलेशन से विज्ञापन तक उछाल

अप्रैल-मई का महीना अक्सर भारत में दो चीजों के साथ आता है- गर्मी और चुनावी हलचल। लेकिन इस बार 2026 में एक और चीज उफान पर है- अखबारों की मांग।

Last Modified:
Friday, 01 May, 2026
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विकास सक्सेना, डिप्टी न्यूज एडिटर, समाचार4मीडिया ।।

अप्रैल-मई का महीना अक्सर भारत में दो चीजों के साथ आता है- गर्मी और चुनावी हलचल। लेकिन इस बार 2026 में एक और चीज उफान पर है- अखबारों की मांग। जिस दौर में यह माना जाने लगा था कि डिजिटल ने प्रिंट की कमर तोड़ दी है, उसी दौर में चुनाव का मौसम प्रिंट मीडिया को एक नई जान दे देता है। हॉकर सुबह जल्दी उठता है, प्रिंटिंग प्रेस रात भर चलती है, स्थानीय दुकानदार अखबार में पूरे पेज का विज्ञापन देता है। यह सिर्फ मीडिया की कहानी नहीं, यह एक पूरे इकोनॉमिक सिस्टम की कहानी है।

2026: पाँच राज्यों का चुनावी महासमर और मीडिया की चांदी

2026 में भारत के पांच राज्यों में विधानसभाओं चुनाव हुए- असम, केरल और पुदुच्चेरी में 9 अप्रैल, तमिलनाडु में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को। इन चुनावों में कुल 824 विधायकों का भाग्य तय हुआ।और जब पाँच बड़े राज्यों में एक साथ चुनाव हों, तो मीडिया इंडस्ट्री के लिए यह किसी त्योहार से कम नहीं। 'एक्सचेंज4मीडिया' के अनुसार, 2026 के राज्य चुनावों से मीडिया सेक्टर को 1,400 करोड़ रुपये से अधिक का फायदा मिलने की उम्मीद जताई गई। यह आंकड़ा सिर्फ विज्ञापन राजस्व का नहीं- इसके पीछे एक पूरी अर्थव्यवस्था है जो चुनाव के साथ जागती है।

प्रिंट का पलटवार: केरल से आया सबसे बड़ा सबूत

TAM AdEx India की केरल विधानसभा चुनाव रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 2021 की तुलना में राजनीतिक विज्ञापनों में जबरदस्त उछाल आया। टेलीविजन पर राजनीतिक विज्ञापन 52 प्रतिशत बढ़े, प्रिंट करीब 2.74 गुना रहा और रेडियो ने सबसे तेज छलांग लगाई- 3.12 गुना वृद्धि।

डिजिटल विज्ञापन में 2026 में 2021 की तुलना में करीब 4 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई। यह एक महत्वपूर्ण संकेत है, जब चुनाव की बात आती है तो पार्टियां प्रिंट और पारंपरिक मीडिया की ओर लौटती हैं।

वैसे बता दें कि जब चुनाव घोषित हुआ, तो केरल में चुनाव की घोषणा और वोटिंग के बीच बहुत कम समय था। उम्मीदवार तय होते-होते पार्टियों के पास व्यक्तिगत संपर्क का वक्त नहीं था, इसलिए मीडिया ही उनके लिए जनता तक पहुंचने का सबसे अच्छा जरिया था। 

मीडिया मिक्स में प्रिंट की 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रही। इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया पर चुनाव के अंतिम 48 घंटों में विज्ञापन नहीं दिया जा सकता, लिहाजा इस नियम ने प्रिंट की भूमिका को और मजबूत कर दिया।

प्रिंट में सबसे ज्यादा गतिविधि अंतिम सप्ताह में रही- कुल प्रिंट विज्ञापन सम्मिलन का 54.4 प्रतिशत चुनाव से ठीक पहले के सप्ताह यानी 5 से 9 अप्रैल में हुआ। यानी जैसे-जैसे मतदान नजदीक आया, अखबारों में विज्ञापन की बाढ़ आ गई।

मलयाला मनोरमा ग्रुप के मार्केटिंग व ऐड सेल्स के वाइस प्रेजिडेंट वर्गीस चांडी ने 'समाचार4मी़डिया' से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन बाजार में प्रिंट की हिस्सेदारी करीब 9% पर स्थिर हो गई है, लेकिन केरल में यह अब भी एक मजबूत माध्यम है और करीब 40% हिस्सेदारी रखता है। इसकी वजह यह है कि मलयाली पाठकों के बीच प्रिंट को आज भी सबसे भरोसेमंद और सर्वसुलभ माध्यम माना जाता है।

यही भरोसा इसे खासकर चुनावों के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों के लिए ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बनाता है। एक उच्च साक्षरता वाले राज्य में छपा हुआ शब्द मतदाताओं का भरोसा जीतने में बड़ी भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि मतदान से पहले के 48 घंटे के ‘साइलेंट पीरियड’ में इसकी अहमियत और बढ़ जाती है, जब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया शांत हो जाता है, तब प्रिंट ही पार्टियों के लिए अपने घोषणापत्र और उम्मीदवारों की खूबियों को लोगों तक पहुंचाने का मुख्य और भरोसेमंद माध्यम बन जाता है।

सर्कुलेशन की असली कहानी: अखबार की मांग कैसे बढ़ती है?

ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) की जनवरी से जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दैनिक समाचार पत्रों का कुल औसत सर्कुलेशन 2.97 करोड़ प्रतियां रहा, जो पिछली अवधि (जुलाई-दिसंबर 2024) की 2.89 करोड़ प्रतियों से 2.77 प्रतिशत अधिक है।

सर्कुलेशन में हिंदी अखबार सबसे आगे हैं। दैनिक भास्कर 30.40 लाख प्रतियों के साथ नंबर एक पर है, इसके बाद दैनिक जागरण 23.53 लाख और अमर उजाला 15.50 लाख प्रतियों पर हैं। अंग्रेजी में टाइम्स ऑफ इंडिया 16.40 लाख प्रतियों के साथ अग्रणी है।

MIB के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में देशभर में अखबारों की कुल सर्कुलेशन 21 करोड़ से ज्यादा रही। यह संख्या RNI में रजिस्टर्ड सभी अखबारों द्वारा बताई गई है, यानी यह ABC जैसे ऑडिटेड आंकड़े नहीं हैं।

इनमें हिंदी अखबारों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है—अकेले हिंदी दैनिकों की सर्कुलेशन 10 करोड़ से ज्यादा है। खास बात यह है कि यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे हिंदी भाषी राज्यों में चुनाव के समय अखबारों की मांग सबसे ज्यादा बढ़ जाती है।

प्रिंट की आर्थिक ताकत: 20,866 करोड़ रुपये का बाजार

Pitch-Madison Advertising Report 2026 के अनुसार, भारत में प्रिंट विज्ञापन राजस्व 2024 में 20,272 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 20,866 करोड़ रुपये हो गया, यानी 3 प्रतिशत की वृद्धि। हालांकि कुल AdEx में प्रिंट की हिस्सेदारी 2024 के 19 प्रतिशत से घटकर 2025 में 18 प्रतिशत रह गई।

साल 2025 की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) सबसे मजबूत तिमाही रही- प्रिंट राजस्व 5 प्रतिशत बढ़कर 6,524 करोड़ रुपये हो गया और इसने पूरे साल के राजस्व में 31 प्रतिशत की हिस्सेदारी बनाई।

डीबी कॉर्प ने FY25 में कुल 2,421.2 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जिसमें विज्ञापन राजस्व 1,690 करोड़ और सर्कुलेशन राजस्व 473.4 करोड़ रहा। FY25 में विज्ञापन राजस्व FY24 के 1,752.4 करोड़ की तुलना में थोड़ा कम रहा, इसकी वजह भी चुनाव रहा।

दैनिक भास्कर ग्रुप के प्रमोटर व डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का विश्लेषण है- चुनाव-मोड में जो राज्य होते हैं, वहां सरकारी घोषणाओं और कल्याण योजनाओं की भरमार रहती है, इससे खपत बढ़ती है और प्रिंट मीडिया को सीधा फायदा मिलता है।

हॉकर, वेंडर और प्रिंटिंग स्टाफ: वो लोग जिनकी जिंदगी बदल जाती है

अखबार इंडस्ट्री की सबसे अनजान लेकिन सबसे जरूरी कड़ी है- हॉकर। भारत के अखबार वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) तंत्र  की रीढ़ ये हॉकर ही हैं। हर सुबह हॉकर एजेंट या सब-एजेंट से अखबार उठाते हैं और डिलीवरी बॉयज के जरिये हर घर तक पहुंचाते हैं। यह वितरण प्रणाली अखबार इंडस्ट्री की स्थिरता की बुनियाद है।

चुनाव के दौरान अखबारों के ज्यादा पेज निकलते हैं, सप्लीमेंट आते हैं, विशेष संस्करण छपते हैं और इसके साथ हॉकरों की कमाई भी बढ़ती है।

छोटे शहरों में Readership Spike: टियर-2 और टियर-3 की असली तस्वीर

भारत के अखबार बाजार की एक खासियत यह है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती साक्षरता, क्षेत्रीय भाषाओं का प्रसार और बढ़ती प्रति व्यक्ति आय- ये तीनों मिलकर प्रिंट की मांग को जीवित रखते हैं। केरल इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। केरल भारत में उन कुछ बाजारों में से एक है जहां पारंपरिक मीडिया आज भी बहुत मजबूत है। यहां अधिकांश घरों में कम से कम एक अखबार आता है और कई घरों में एक से अधिक।

PMAR 2026 के अनुसार, हिंदी बाजार में विज्ञापन मात्रा स्थिर रही जबकि अंग्रेजी में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2026-27 में प्रिंट ऑटो, BFSI, रियल एस्टेट और प्रीमियम एजुकेशन जैसे क्षेत्रों के लिए सबसे कारगर माध्यम बना रहेगा- खासकर हिंदी और अंग्रेजी बाजारों में।

लोकल एड मार्केट: जब छोटे व्यापारी भी बन जाते हैं बड़े विज्ञापनदाता

चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों का विज्ञापन नहीं लाते- वे स्थानीय व्यापारियों को भी अखबार में आने के लिए प्रेरित करते हैं। जब पाठकों की तादाद बढ़ती है, तो स्थानीय दुकानदार, बिल्डर, ज्वेलर्स और ऑटो डीलर, सभी इस अवसर का फायदा उठाते हैं। ऐसा माना जाता है कि राजनीतिक विज्ञापन हमेशा प्रीमियम दरों पर बिकते हैं- सामान्य दरों से दोगुने से भी अधिक और यह प्रीमियम घोषणा के पहले दिन से लेकर मतदान के दिन तक एकसमान बना रहता है।

एक्सचेंज4मीडिया के अनुसार, FY25 में सरकारी विज्ञापन खर्च 644 करोड़ रुपये रहा। चुनाव के दौरान जब MCC लागू होती है तो DAVP का खर्च थोड़ा घटता है, लेकिन राजनीतिक दलों का खर्च इसकी भरपाई कर देता है।

डिजिटल बनाम प्रिंट: जंग अभी खत्म नहीं

2026 के राज्य चुनावों में BJP ने चार राज्यों में 40 करोड़ रुपये से अधिक डिजिटल विज्ञापन खर्च किए और Google तथा Meta पर करीब 50,000 विज्ञापन दिए। लेकिन यही पार्टी केरल में प्रिंट विज्ञापन में भी भारी निवेश कर रही थी।

TAM AdEx की रिपोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है- जब डिजिटल दुनिया में गलत सूचनाओं का बोलबाला हो, तो राजनीतिक दल विश्वसनीय माध्यमों यानी प्रिंट और रेडियो की ओर लौटते हैं। केरल 2026 में रेडियो पर 3.1 गुना और प्रिंट पर 2.7 गुना वृद्धि इसी बात की गवाही है।

प्रिंट की ताकत का असली इम्तिहान

2025 में प्रिंट AdEx 20,866 करोड़ रुपये तक पहुंचा। हालांकि कुल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 18 प्रतिशत पर आ गई है, लेकिन प्रिंट एक विश्वसनीयता-आधारित, उच्च-प्रभाव वाले माध्यम के रूप में मजबूती से टिका हुआ है।

चुनाव इस इंडस्ट्री की असली परीक्षा है और हर बार यह इंडस्ट्री साबित करता है कि वह अभी भी प्रासंगिक है। डिजिटल आया, सोशल मीडिया आया, लेकिन जब मतदाता को सुबह अपने उम्मीदवार का नाम, उसका वादा, उसकी नीतियां पढ़नी होती हैं, तो वह अखबार ही उठाता है और उस अखबार को सुबह 5 बजे दरवाजे तक पहुंचाने वाला हॉकर- वही है इस पूरी कहानी का असली नायक।

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निष्ठा बधानी बनीं राजस्थान पत्रिका में वाइस प्रेसिडेंट-नेशनल अकाउंट्स

निष्ठा बधानी को राजस्थान पत्रिका में वाइस प्रेसिडेंट-नेशनल अकाउंट्स नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह जियोस्टार में एसोसिएट डायरेक्टर थीं और टेलीविजन व प्रिंट मीडिया में 16 साल का अनुभव रखती हैं।

Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
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निष्ठा बधानी (Nishtha Badhani) को राजस्थान पत्रिका (Rajasthan Patrika) में वाइस प्रेसिडेंट-नेशनल अकाउंट्स (Vice President-National Accounts) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।

अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उन्हें यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि उन्होंने राजस्थान पत्रिका प्राइवेट लिमिटेड (Rajasthan Patrika Pvt. Ltd.) में वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।

इससे पहले निष्ठा बधानी करीब दो साल तक जियोस्टार (JioStar) के साथ एसोसिएट डायरेक्टर (Associate Director) के पद पर काम कर रही थीं।

निष्ठा बधानी को स्ट्रैटेजिक और रिजल्ट-ओरिएंटेड मीडिया सेल्स लीडर (Strategic and Result-Oriented Media Sales Leader) के तौर पर जाना जाता है। उन्हें टेलीविजन और प्रिंट मीडिया (Television and Print Media) में 16 वर्षों का अनुभव है। अपने करियर में उन्होंने रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) और रणनीति आधारित समाधानों के जरिए लंबे समय तक क्लाइंट रिलेशनशिप (Client Relationships) विकसित करने पर काम किया है।

इससे पहले वह डिज्नी स्टार (Disney Star), नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (Network18 Media & Investments Limited) और डीबी कॉर्प लिमिटेड (DB Corp Ltd.) समेत कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।

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मिली ऐश्वर्या ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया में पूरे किए 18 साल

मिली ऐश्वर्या ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया में 18 साल पूरे किए हैं। उन्होंने 2008 में शुरुआत की थी और अब एडल्ट पब्लिशिंग ग्रुप के साथ 13 इम्प्रिंट्स की जिम्मेदारी संभालती हैं।

Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
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पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (Penguin Random House India) की पब्लिशर और ग्रुप सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (Publisher and Group Senior Vice President) मिली ऐश्वर्या (Milee Ashwarya) ने कंपनी के साथ 18 साल पूरे कर लिए हैं। उन्होंने सितंबर 2008 में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के साथ पब्लिशर, एबरी पब्लिशिंग और विंटेज पब्लिशिंग (Publisher, Ebury Publishing and Vintage Publishing) के तौर पर करियर शुरू किया था। इस भूमिका में उन्होंने 14 साल से ज्यादा समय बिताया।

जनवरी 2023 में उन्हें सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और पब्लिशर, एडल्ट पब्लिशिंग ग्रुप (Senior Vice President and Publisher, Adult Publishing Group) की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद जनवरी 2026 में उन्हें पब्लिशर और ग्रुप सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर प्रमोट किया गया।

18 साल पूरे होने के मौके पर लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा की गई पोस्ट में मिली ऐश्वर्या ने अपने सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने पब्लिशिंग लैंडस्केप (Publishing Landscape) में बदलाव देखे, इंडस्ट्री की चुनौतियों का सामना किया, नए लेखकों के साथ काम किया और भारतीय पाठकों के लिए कई इम्प्रिंट्स लॉन्च किए।

उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे पब्लिशिंग प्रोग्राम (Publishing Programme) को तैयार करने पर खास गर्व है, जो भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और बौद्धिक विविधता को दर्शाता है और पाठकों तक नई आवाजों और विचारों को पहुंचाता है।

फिलहाल मिली ऐश्वर्या पेंगुइन इंडिया के एडल्ट पब्लिशिंग ग्रुप का नेतृत्व कर रही हैं। वह एलन लेन (Allen Lane), हैमिश हैमिल्टन (Hamish Hamilton), विंटेज (Vintage), वाइकिंग (Viking), पेंगुइन क्लासिक्स (Penguin Classics) और पेंगुइन बिजनेस (Penguin Business) समेत 13 इम्प्रिंट्स की जिम्मेदारी संभालती हैं।

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तमिलनाडु न्यूजप्रिंट एंड पेपर्स की सालाना बैठक में 5 प्रस्ताव मंजूर

तमिलनाडु न्यूजप्रिंट एंड पेपर्स लिमिटेड (TNPL) की 46वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 24 सितंबर 2026 को हुई।

Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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तमिलनाडु न्यूजप्रिंट एंड पेपर्स लिमिटेड (TNPL) की 46वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 24 सितंबर 2026 को हुई। बैठक में शेयरधारकों ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए वित्तीय नतीजों को मंजूरी दे दी।

बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। इसका आयोजन कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के सर्कुलर के तहत किया गया। बैठक की अध्यक्षता कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कुमार जयंत ने की।

AGM में डिविडेंड घोषित करने, रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे एक डायरेक्टर की दोबारा नियुक्ति और वैधानिक ऑडिटर के पारिश्रमिक तय करने समेत कुल पांच साधारण प्रस्ताव रखे गए। सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए।

वोटिंग के नतीजे जारी

कंपनी ने SEBI के लिस्टिंग नियमों के रेगुलेशन 44(3) के तहत कंसोलिडेटेड वोटिंग रिजल्ट भी जारी किया है। 17 सितंबर 2026 की कट-ऑफ डेट तक कंपनी के कुल 51,591 शेयरधारक रिकॉर्ड पर थे।

शेयरधारकों ने 21 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक रिमोट ई-वोटिंग के जरिए और AGM के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के जरिए मतदान किया।

वित्तीय स्टेटमेंट को मंजूरी देने वाले प्रस्ताव के पक्ष में 99.98% वोट पड़े, जबकि डिविडेंड घोषित करने के प्रस्ताव को 99.99% वोट मिले। वहीं, डॉ. एस. विजयकुमार, आईएएस की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के पक्ष में 99.97% वोट पड़े।

ऑडिट में क्या कहा गया?

कंपनी के वैधानिक ऑडिटर एम/एस ए. जॉन मॉरिस एंड कंपनी ने वित्तीय स्टेटमेंट पर बिना किसी प्रतिकूल टिप्पणी के ऑडिट राय दी। हालांकि, उन्होंने कंपनी के अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर Oracle E-Business Suite (EBS) में ऑडिट ट्रेल से जुड़ी एक बात बताई।

ऑडिटर्स के मुताबिक, EBS में एप्लिकेशन लेवल पर ऑडिट ट्रेल मौजूद है, लेकिन डेटाबेस लेवल पर सीधे किए जाने वाले डेटा बदलावों को रिकॉर्ड करने के लिए ऑडिट ट्रेल चालू नहीं है। ऑडिटर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि यूजर्स के पास बैकएंड से एंट्री को बदलने या एडिट करने की सुविधा नहीं है।

इसके अलावा, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने ‘NIL’ रिपोर्ट दी, यानी खातों को लेकर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई। कंपनी के सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स एम/एस श्रीधरन एंड श्रीधरन एसोसिएट्स ने भी अपनी रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में बताई गई योग्यताओं को बोर्ड की रिपोर्ट में संबोधित किया गया है।

AGM में कौन-कौन रहे मौजूद?

बैठक में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर कुमार जयंत, एन. वेंकटेश, आर. कन्नन और कई स्वतंत्र डायरेक्टर शामिल रहे। इनमें डॉ. एन. सुंदरदेवन, टी.एम.टी. एम. सत्यवती, मैथ्यू थॉमस और श्रीगणेश पद्मनाभन शामिल थे।

डॉ. एस. विजयकुमार पहले से तय व्यस्तताओं के कारण बैठक में मौजूद नहीं थे। उन्हें दोबारा डायरेक्टर नियुक्त करने का प्रस्ताव AGM में मंजूर किया गया। AGM दोपहर 1:45 बजे समाप्त हुई। इस दौरान शेयरधारकों ने कंपनी के कामकाज और बाजार की स्थिति से जुड़े सवाल भी पूछे। 

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हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स: प्रियव्रत भारती फिर बने डायरेक्टर, AGM में दो प्रस्ताव मंजूर

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड की 16वीं (पोस्ट-आईपीओ) सालाना आम बैठक (एजीएम) 24 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई।

Last Modified:
Friday, 25 September, 2026
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हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड की 16वीं (पोस्ट-आईपीओ) सालाना आम बैठक (एजीएम) 24 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई। कंपनी ने बैठक में रखे गए दोनों प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिलने की जानकारी दी है।

कंपनी के मुताबिक, एजीएम सुबह 11 बजे शुरू हुई। शेयरधारकों को बैठक से पहले रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम के दौरान ई-वोटिंग के जरिए वोट करने की सुविधा दी गई थी।

बैठक में पहला प्रस्ताव वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों को मंजूर करने से जुड़ा था। इसमें बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट भी शामिल थी। इस प्रस्ताव को 99.9935 फीसदी वोट के साथ मंजूरी मिली।

दूसरा प्रस्ताव प्रियव्रत भारती को रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद फिर से डायरेक्टर नियुक्त करने से जुड़ा था। वे दोबारा नियुक्ति के लिए पात्र थे और उन्होंने इसके लिए अपनी पेशकश की थी। इस प्रस्ताव को 99.9934 फीसदी वोट के साथ मंजूरी मिली।

कंपनी के 17 सितंबर 2026 के कट-ऑफ डेट तक कुल 15,769 शेयरधारक थे। एजीएम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप से 1 और पब्लिक कैटेगरी से 49 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया।

कंपनी ने बताया कि दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए हैं। वोटिंग के नतीजे और स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट कंपनी की वेबसाइट और नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) की ई-वोटिंग वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।

 

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D.B. Corp के दो प्रमोटर ग्रुप को पब्लिक कैटेगरी में लाने को BSE व NSE से मिली हरी झंडी

डी.बी. कॉर्प को NSE और BSE से दो प्रमोटर ग्रुप कंपनियों को ‘पब्लिक’ कैटेगरी में लाने के लिए नो-ऑब्जेक्शन लेटर मिला है।

Last Modified:
Thursday, 24 September, 2026
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डी.बी. कॉर्प लिमिटेड ने बताया है कि उसे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से अपने दो प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी कंपनियों को ‘प्रमोटर ग्रुप’ कैटेगरी से ‘पब्लिक’ कैटेगरी में लाने के लिए नो-ऑब्जेक्शन लेटर मिल गया है।

कंपनी ने 23 सितंबर 2026 को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि उसे BEDR Realcon Private Limited और Diligent Pinkcity Center Private Limited के पुनर्वर्गीकरण (Reclassification) के लिए दोनों एक्सचेंजों से नो-ऑब्जेक्शन लेटर मिला है। यह प्रक्रिया सेबी के लिस्टिंग नियमों के रेगुलेशन 31A के तहत की जा रही है।

NSE ने अपने पत्र में कहा है कि कंपनी की ओर से 22 जुलाई 2026 को दिए गए आवेदन के आधार पर दोनों प्रमोटर ग्रुप कंपनियों के पुनर्वर्गीकरण के आवेदन पर नो-ऑब्जेक्शन दिया गया है।

BSE ने भी 23 सितंबर 2026 को जारी अपने पत्र में BEDR Realcon Private Limited और Diligent Pinkcity Centre Private Limited को प्रमोटर कैटेगरी से हटाकर पब्लिक कैटेगरी में लाने के अनुरोध पर नो-ऑब्जेक्शन दिया है। 

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Infomedia Press: AGM में 4 प्रस्ताव पास, निदेशक पद पर इन अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति मंजूर

Infomedia Press Limited की 71वीं सालाना आम बैठक (AGM) 18 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई।

Last Modified:
Monday, 21 September, 2026
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Infomedia Press Limited की 71वीं सालाना आम बैठक (AGM) 18 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई। कंपनी ने बैठक में हुए कामकाज के मतदान के नतीजे और स्क्रूटिनाइजर की संयुक्त रिपोर्ट शेयर बाजारों को सौंप दी है। कंपनी के मुताबिक, बैठक में रखे गए सभी 4 प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए।

कंपनी की ओर से 18 सितंबर 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को यह जानकारी दी गई। 71वीं AGM शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई।

कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 कट-ऑफ तारीख थी और उस तारीख तक कंपनी के कुल 16,577 शेयरधारक थे। शेयरधारकों को प्रस्तावों पर रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान ई-वोटिंग के जरिए वोट करने की सुविधा दी गई थी।

पहला प्रस्ताव

पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स और उस पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को अपनाने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव साधारण प्रस्ताव (Ordinary Resolution) था और इसे जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 2,54,88,707 वोट पड़े, जबकि 11,25,657 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल पड़े वोटों में 95.7705% वोट पक्ष में और 4.2295% वोट खिलाफ रहे।

दूसरा प्रस्ताव

दूसरे प्रस्ताव में करनवीर सिंह गिल को रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव था। यह भी साधारण प्रस्ताव था और इसे जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 2,54,88,017 वोट पड़े, जबकि 11,26,247 वोट खिलाफ रहे। यानी कुल वोटों में 95.7683% वोट पक्ष में और 4.2317% वोट खिलाफ रहे।

तीसरा प्रस्ताव

तीसरे प्रस्ताव में बिंदु नवींचंद्र त्रिवेदी को रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रही निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव भी जरूरी बहुमत के साथ पास हुआ। इस प्रस्ताव के पक्ष में 2,54,88,017 वोट पड़े, जबकि 11,26,247 वोट इसके खिलाफ रहे। पक्ष में पड़े वोटों का प्रतिशत 95.7683% और खिलाफ पड़े वोटों का प्रतिशत 4.2317% रहा।

चौथा प्रस्ताव

चौथे प्रस्ताव में पुनीत सिंहवी को कंपनी के गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र निदेशक (Non-Executive Non-Independent Director) के तौर पर नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव भी जरूरी बहुमत के साथ पास हुआ।इस प्रस्ताव के पक्ष में 2,54,88,117 वोट पड़े, जबकि 11,26,247 वोट खिलाफ रहे। पक्ष में पड़े वोटों का प्रतिशत 95.7683% और खिलाफ पड़े वोटों का प्रतिशत 4.2317% रहा।

स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 को AGM के बाद ई-वोटिंग के नतीजों को अनब्लॉक किया गया और वोटों का कंपनी के रिकॉर्ड के साथ मिलान किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्तावों पर पड़े कुल वोटों में कोई अमान्य वोट नहीं था।

स्क्रूटिनाइजर नीलेश कुमार जैन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नोटिस में दिए गए आइटम नंबर 1 से 4 तक के सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए। 

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जागरण प्रकाशन: संजय गुप्ता समेत 4 पूर्णकालिक निदेशकों की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी

जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) की 50वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चार  पूर्ण कालिक निदेशकों (Whole-time Directors) की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है।

Last Modified:
Saturday, 19 September, 2026
JagranPrakashan989

जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) की 50वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चार पूर्ण कालिक निदेशकों (Whole-time Directors) की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा महेंद्र मोहन गुप्ता को Non-Executive Director के तौर पर आगे भी बनाए रखने की मंजूरी दी गई है।

कंपनी ने 18 सितंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि 50वीं AGM शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC)/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम (OAVM) के जरिए हुई। बैठक में सदस्यों ने इन नियुक्तियों और आगे जारी रखने को मंजूरी दी।

चार पूर्ण कालिक निदेशकों की पांच साल के लिए दोबारा नियुक्ति

बोर्ड की सिफारिश के आधार पर सदस्यों ने चार पूर्ण कालिक निदेशकों को अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने की मंजूरी दी है। इनका नया कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा।

धीरेंद्र मोहन गुप्ता को कंपनी के पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर पांच साल के लिए फिर नियुक्त किया गया है। वह 82 साल के हैं और उन्होंने आर्ट्स में स्नातक की डिग्री ली है। कंपनी के मुताबिक, उन्हें प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 60 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और कंपनी की शुरुआत से ही इसके साथ निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वह महेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं। उनकी यह नियुक्ति रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन होगी।

सुनील गुप्ता को भी पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 64 वर्षीय सुनील गुप्ता ने कॉमर्स में स्नातक और मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह प्रमोटर ग्रुप के सदस्य हैं और 1993 से कंपनी के निदेशक हैं। कंपनी ने बताया कि उनका किसी अन्य निदेशक के साथ कोई संबंध नहीं है। उनकी नियुक्ति भी रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन होगी।

संजय गुप्ता को भी पांच साल के लिए पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 63 वर्षीय संजय गुप्ता ने साइंस में स्नातक की डिग्री ली है और उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और 1993 से कंपनी के निदेशक हैं। वह संदीप गुप्ता के भाई हैं। उनकी नियुक्ति रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन नहीं होगी।

शैलेश गुप्ता को भी पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर अगले पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 57 वर्षीय शैलेश गुप्ता ने कॉमर्स में स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह Promoter Group के सदस्य हैं और 1994 से कंपनी के निदेशक हैं। वह महेंद्र मोहन गुप्ता के बेटे हैं। उनकी नियुक्ति भी रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन नहीं होगी।

कंपनी ने यह भी बताया कि इन चारों निदेशकों को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) या किसी अन्य प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

महेंद्र मोहन गुप्ता गैर-कार्यकारी निदेशक (Non-Executive Director) के तौर पर बने रहेंगे

AGM में सदस्यों ने महेंद्र मोहन गुप्ता को कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर आगे भी बनाए रखने की मंजूरी दी है। उनका नया कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक पांच साल का होगा। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर नहीं होंगे।

महेंद्र मोहन गुप्ता को 1 अक्टूबर 2021 से दो साल के लिए कंपनी का चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) नियुक्त किया गया था। उनका यह कार्यकाल 30 सितंबर 2023 को पूरा हुआ। इसके बाद 1 अक्टूबर 2023 से उन्हें कंपनी का गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (Non-Executive Chairman) बनाया गया। अब उनका गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को समाप्त होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से वह गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर कंपनी में बने रहेंगे।म

महेंद्र मोहन गुप्ता 85 साल के हैं और उन्होंने कॉमर्स में स्नातक की डिग्री ली है। कंपनी के अनुसार, उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 65 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और कंपनी की शुरुआत से ही इसके साथ निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वह शैलेश गुप्ता के पिता और धीरेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं।

कंपनी ने बताया कि महेंद्र मोहन गुप्ता को भी SEBI या किसी अन्य प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। 

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गुरमीत राम रहीम से जुड़े विज्ञापन पर ‘द हिंदू’ ने मांगी बिना शर्त माफी

है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।

Last Modified:
Monday, 14 September, 2026
The Hindu Advertisement

देश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार द हिंदू (The Hindu) ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह से जुड़े एक विज्ञापन के प्रकाशन पर अपने पाठकों से बिना शर्त माफी मांगी है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।

अखबार ने अपने माफीनामे में इस विज्ञापन को “offensive front-page advertisement” और “deeply offensive advertisement” बताया। द हिंदू ने कहा कि उसे इस विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार के निदेशक एन. राम (N. Ram) की ओर से भी इस मामले को लेकर जानकारी साझा की गई है।

यह था पूरा मामला: दरअसल, 12 सितंबर के द हिंदू के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों के फ्रंट पेज पर डेरा सच्चा सौदा की ओर से एक पूरे पेज का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। इसका शीर्षक था “What is Dera Sacha Sauda? (Facts vs Fiction)”। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ लगे आरोपों और मामलों को लेकर डेरा की ओर से अपना पक्ष रखा गया था। विज्ञापन में उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर साजिश का दावा भी किया गया था। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा की ओर से सामाजिक कार्यों को लेकर कई आंकड़े भी दिए गए थे। इनमें नशे से लोगों को बाहर निकालने, पेड़ लगाने, रक्तदान और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से जुड़े दावे शामिल थे।

राम रहीम को लेकर क्या है मामला?: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को वर्ष 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें 20 साल की सजा सुनाई थी। विज्ञापन प्रकाशित होने के समय वह 21 दिन की फरलो पर जेल से बाहर थे। इसी पृष्ठभूमि में द हिंदू के फ्रंट पेज पर इस विज्ञापन के प्रकाशन को लेकर पत्रकारों और सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने सवाल उठाए। इसके बाद द हिंदू ने अपने पाठकों से इस विज्ञापन को प्रकाशित करने के लिए बिना शर्त माफी मांगी।

द हिंदू ने क्या कहा?: 13 सितंबर को फ्रंट पेज पर प्रकाशित अपने माफीनामे में अखबार ने कहा कि उसे दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में “डेरा सच्चा सौदा क्या है? (तथ्य बनाम कल्पना)” शीर्षक से प्रकाशित आपत्तिजनक फ्रंट-पेज विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार ने विज्ञापन में किए गए उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख और दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ “ड्रग माफिया और डेरा के विरोधी ताकतों” की ओर से साजिश का दावा किया गया था।

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Assetgro Fintech में HMVL की एंट्री हुई मजबूत, OCDs कन्वर्जन से मिली 2.48% हिस्सेदारी

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 09 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 09 September, 2026
HMVL541

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है। कंपनी ने बताया कि 8 सितंबर 2026 को 8,708 OCDs को 16,02,011 इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट किया गया है। इन शेयरों की कुल राशि 85 करोड़ रुपये है।

इस कन्वर्जन के बाद HMVL को StockGro में 2.48 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह हिस्सेदारी OCDs के इक्विटी शेयरों में कन्वर्जन के जरिए हासिल हुई है।

StockGro में नहीं हुआ नया कैश निवेश

कंपनी के मुताबिक, यह लेन-देन OCDs को इक्विटी शेयरों में बदलने के रूप में हुआ है। यानी इस चरण में 85 करोड़ रुपये का कोई नया नकद निवेश करने की बात नहीं कही गई है। HMVL ने पहले StockGro में निवेश के तहत ये OCDs रखे हुए थे, जिन्हें अब शेयरों में बदला गया है।

निवेश का उद्देश्य क्या है?

कंपनी ने बताया है कि इस निवेश का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही कंपनी में निवेश के जरिए भविष्य में पूंजी पर रिटर्न हासिल करना है। इसके साथ ही HMVL की ओर से कंपनी के मीडिया एसेट्स का लाभ उठाने की भी बात कही गई है।

StockGro क्या करती है?

Assetgro Fintech Pvt Ltd, जिसे StockGro के नाम से जाना जाता है, फिनटेक सेक्टर में काम करती है। कंपनी के अनुसार, StockGro एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो निवेश सलाह, ज्ञान साझा करने और कम्युनिटी आधारित बातचीत को एक ही इकोसिस्टम में जोड़ता है।

इसके प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड निवेश सलाहकारों और यूजर्स के बीच बातचीत की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने इसे भारत का पहला ऐसा प्लेटफॉर्म बताया है जो इन अलग-अलग सुविधाओं को एक साथ जोड़ता है।

StockGro का कारोबार बढ़ा

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, StockGro का टर्नओवर पिछले तीन वित्त वर्षों में बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का टर्नओवर 99 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 125.51 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 में 231.10 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह लेन-देन रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन नहीं है। साथ ही HMVL के प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप या ग्रुप कंपनियों की StockGro में कोई रुचि नहीं है। इस कन्वर्जन के लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं थी।

 

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BCCL और OpenAI की रणनीतिक साझेदारी, ChatGPT पर दिखेंगी TOI और ET की खबरें

भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है।

Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
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भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी का मकसद BCCL के अखबारों और डिजिटल प्रकाशनों की खबरों को ChatGPT के जरिए ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुंचाना है। खास बात यह है कि ChatGPT पर दिखाई जाने वाली खबरों के साथ मूल प्रकाशन और खबर की पूरी रिपोर्ट तक पहुंचने के लिए सीधे लिंक भी दिए जाएंगे।

इस साझेदारी के तहत BCCL के चुनिंदा प्रकाशनों, जिनमें The Times of India और The Economic Times शामिल हैं, की सामग्री संबंधित सवालों के जवाब में ChatGPT पर दिखाई जा सकेगी। जहां किसी खबर का संक्षिप्त सार या कुछ हिस्सा दिखाया जाएगा, वहां संबंधित प्रकाशन का नाम भी बताया जाएगा और मूल खबर का सीधा लिंक दिया जाएगा। इससे पाठक पूरी खबर और उसका संदर्भ BCCL के प्लेटफॉर्म पर जाकर देख सकेंगे।

अंग्रेजी के साथ भारतीय भाषाओं की खबरें भी होंगी शामिल

यह साझेदारी सिर्फ लाइव खबरों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें BCCL के अंग्रेजी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाली अन्य सामग्री भी शामिल होगी। हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।

BCCL के लिए इस साझेदारी में खबर के मूल स्रोत और उसकी पहचान को बनाए रखने पर खास जोर दिया गया है। BCCL के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और बोर्ड मेंबर मोहित जैन ने कहा कि इस साझेदारी से पाठकों को BCCL के अलग-अलग प्रकाशनों की पत्रकारिता खोजने में मदद मिलेगी, साथ ही मूल खबर के स्रोत, संदर्भ और पहचान को भी बरकरार रखा जाएगा।

वहीं, OpenAI के मीडिया पार्टनरशिप्स के वाइस प्रेसिडेंट वरुण शेट्टी ने कहा कि साझेदारी से ChatGPT के यूजर्स BCCL के अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं के प्रकाशनों की खबरें स्पष्ट स्रोत जानकारी और मूल खबर के सीधे लिंक के साथ खोज सकेंगे।

सिर्फ खबरों तक पहुंच नहीं, AI के दूसरे इस्तेमाल पर भी काम

BCCL और OpenAI की साझेदारी केवल ChatGPT पर खबरें दिखाने तक सीमित नहीं है। दोनों कंपनियां BCCL के अलग-अलग उत्पादों, पाठक सेवाओं और आंतरिक कामकाज में OpenAI की तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाशेंगी।

इसमें पुराने समाचारों और आर्काइव को खोजने, रिसर्च, डेटा विश्लेषण, अनुवाद, पाठक सेवाओं और कारोबारी कामकाज जैसे क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं शामिल हैं।

न्यूजरूम में AI इस्तेमाल पर संपादकीय नियंत्रण बरकरार रहेगा

BCCL ने साफ किया है कि उसके न्यूजरूम में AI का इस्तेमाल होने की स्थिति में संबंधित प्रकाशनों के संपादकीय नियमों और नीतियों का पालन किया जाएगा। साथ ही हर स्तर पर मानवीय निगरानी भी बनी रहेगी।

BCCL के प्रकाशनों का संपादकीय नियंत्रण पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा। खबर क्या होगी, उसकी जांच कैसे होगी, उसे कैसे संपादित किया जाएगा और कब प्रकाशित किया जाएगा, इसका फैसला संपादक और पत्रकार ही करेंगे। OpenAI को BCCL के कवरेज या संपादकीय रुख तय करने में कोई भूमिका नहीं होगी।

AI के दौर में बदल रहा है खबरों तक पहुंचने का तरीका

यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब जनरेटिव AI लोगों के लिए जानकारी और खबरें खोजने का एक नया माध्यम बनता जा रहा है। ऐसे में मीडिया कंपनियों के सामने खबर के मूल स्रोत, सही श्रेय, मूल रिपोर्ट तक पाठकों की पहुंच और संपादकीय स्वतंत्रता जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

BCCL और OpenAI की यह साझेदारी इसी बदलते माहौल का हिस्सा है। इसमें एक ओर ChatGPT के जरिए BCCL की पत्रकारिता को नए पाठकों तक पहुंचाने पर जोर है, तो दूसरी ओर पाठकों को पूरी खबर और उसका मूल संदर्भ देखने के लिए BCCL की वेबसाइट और प्लेटफॉर्म पर वापस भेजने की व्यवस्था भी रखी गई है।

OpenAI दुनिया भर के प्रकाशकों के साथ ऐसी साझेदारियों के जरिए विश्वसनीय जानकारी तक लोगों की पहुंच बेहतर करने और समाचार व प्रकाशन के कामकाज में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है। BCCL के लिए यह साझेदारी पाठकों तक खबरों की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ प्रकाशन और कारोबारी कामकाज के कई क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल का रास्ता भी खोलती है।

 

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