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अखबारों के फ्रंट पेज पर आज इन खबरों ने बनाई अपनी जगह
कई अखबारों में स्थानीय महत्व की खबरों को भी दी गई है प्राथमिकता
नीरज नैयर 6 years ago
दिल्ली के प्रमुख हिंदी अखबारों के फ्रंट पेज की बात करें तो आज सूचना का अधिकार (आरटीआई) संशोधन और तीन तलाक बिल मुख्य खबरें हैं। नवभारत टाइम्स में आज फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है। अखबार ने आरटीआई संशोधन बिल के राज्यसभा में पास होने को लीड लगाया है, लेकिन उसने बिल पर पूरा फोकस न करते हुए राज्यसभा में सरकार की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया है। ‘राज्यसभा में भी मोदी सरकार का राज’ शीर्षक के साथ इस अलग एंगल ने खबर को और भी ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, अख़बार ने तीन तलाक को लोकसभा में मंजूरी के समाचार को फ्रंट पेज पर नहीं रखा है, जबकि यह भी उतने ही महत्व की खबर है। इसे छोटा या बड़ा लगाया ही जाना चाहिए था। कर्ज में डूबे युवक के समाचार को नवभारत ने प्रमुखता से लगाया है जो कि अच्छा फैसला है। इसके अलावा, पास्को अदालतें खोलने, कर्नाटक के तीन विधायकों के अयोग्य घोषित होने और धोनी की घाटी में तैनाती संबंधी खबरों को भी उपयुक्त स्थान मिला है। हिन्दुस्तान से विधायकों और धोनी की न्यूज के मामले में चूक हो गई है। दोनों ही महत्वपूर्ण और पढ़ी जाने वाली खबरें हैं।
दैनिक जागरण ने आज फ्रंट पेज पर संसद को लीड लगाया है और आरटीआई एवं तीन तलाक को एक ही शीर्षक तले रखा है। पेज पर दूसरी बड़ी खबर पास्को अदालतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है। आम्रपाली केस में आईसीसी चीफ शशांक मनोहर से जुड़े समाचार को भी फ्रंट पेज पर रखा गया है। ये खबर हिन्दुस्तान और नवभारत टाइम्स के पेज पर नहीं है। हालांकि, जागरण ने आजम खान की फटकार को लीड के पैकेज में नहीं लगाया है, इसके अलावा कर्ज से परेशान युवक के आत्मघाती कदम को संक्षिप्त में रखा गया है। वहीं धोनी की खबर को पेज पर लगाने में जागरण ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है। लेआउट के मामले में अखबार का फ्रंट पेज आज भी नीरस ही है। कुछ भी ऐसा नहीं है, जिसे देखकर मुंह से ‘वाह’ निकले।
वहीं, हिन्दुस्तान ने आरटीआई और तीन तलाक बिल के समाचारों को अलग-अलग लगाया है। आरटीआई जहां लीड है, वहीं तीन तलाक को सेकंड लीड का दर्जा मिला है। वैसे यदि दोनों खबरों को एक साथ रखा जाता तो पेज पर एक अतिरिक्त समाचार के लिए जगह उपलब्ध हो सकती थी। इसके अलावा, संसद से जुड़ी आजम खान की खबर भी तीन कॉलम में अलग से है। अखबार का टॉप बॉक्स पढ़ने लायक है। कारगिल विजय दिवस के 20 साल पूरे होने के मौके पर महकार सिंह की बाईलाइन को यहां लगाया गया है। कर्ज में डूबे युवक के आत्मघाती कदम और सभी जिलों में पास्को अदालतें बनाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नीचे दो-दो कॉलम में जगह मिली है। नीरव मोदी और क्रिकेटरों को ठगने वाले कोच की गिरफ्तारी के समाचारों को सिंगल कॉलम में लगाया है।
आज के अमर उजाला का फ्रंट पेज देखें तो यह आइडियल माना जा सकता है। संसद के घटनाक्रम को लीड लगाया गया है और आरटीआई एवं तीन तलाक बिल से जुड़े समाचारों को एक पैकेज के रूप में पेश किया गया है। हालांकि, अगर आजम खान को मिली फटकार को भी इस पैकेज में जगह दी जाती तो और भी ज्यादा बेहतर होता। लीड के पास दो-दो कॉलम में दो महत्वपूर्ण समाचार हैं। पहला, ऊर्जा मंत्रालय भेजे जाने से नाराज वित्त सचिव ने मांगा वीआरएस और दूसरा, कर्नाटक स्पीकर ने तीन बागी विधायकों को अयोग्य घोषित किया। इसके अलावा पेज पर धोनी की कश्मीर ड्यूटी और पास्को अदालतों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को भी रखा गया है।
अन्य अखबारों की तरह नवोदय टाइम्स की लीड भी संसद ही है, लेकिन पैकेज बनाने पर जोर नहीं दिया गया है। तीन तलाक बिल जहां लीड है, वहीं आरटीआई विधेयक के पास होने की खबर नीचे दो कॉलम में और इसके पास ही आजम खान की खबर है। यानी एक ही प्रकृति के तीन समाचारों को एकसाथ लगाने के बजाय अलग-अलग रखा गया है। कर्ज से परेशान युवक से जुड़ी न्यूज को बॉक्स में बेहतर ढंग से लगाया गया है जो कि अच्छा फैसला है। स्थानीय महत्व की खबरों को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए। इसके नीचे कर्नाटक में विधायकों को अयोग्य घोषित करने का समाचार है। पास्को अदालतों को डीप दो कॉलम में उतारा गया है। एंकर में धोनी की नई भूमिका को रखा गया है। फ्रंट पेज पर आज खास विज्ञापन नहीं है, इसके बावजूद कारगिल दिवस से जुड़ी किसी भी न्यूज को पेज पर न लगाना थोड़ा निराशाजनक है।
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