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आज इस अलग अंदाज में देखने को मिला पाठकों को अपना पसंदीदा अखबार
विज्ञापन की अधिकता और कश्मीर को लेकर ऐतिहासिक फैसले के मद्देनजर अधिकतर प्रमुख अखबारों ने तैयार किए हैं दो फ्रंट पेज
नीरज नैयर 6 years ago
देश के लिए सोमवार का दिन बेहद खास रहा। कश्मीर से धारा 370 हटाकर सरकार ने एक ऐतिहासिक और साहसिक काम को अंजाम दे दिया। इतने बड़े मौके के लिए अखबारों ने भी खास तैयारी की और पाठकों को आज अपना पसंदीदा अखबार कुछ नए अंदाज में देखने को मिला। नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण और अमर उजाला ने जैकेट पेज तैयार किया है और तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया है। हिन्दुस्तान में फ्रंट पेज विज्ञापन है, संभवतः इसलिए अखबार ने यह प्रयोग नहीं किया।
आज सबसे पहले बात करते हैं हिन्दुस्तान की तो अखबार ने संसद की बड़ी तस्वीर के साथ पूरे आठ कॉलम में आधे पेज से ज्यादा ‘कश्मीर का खास दर्जा खत्म’ शीर्षक तले लीड लगाई है। अयोध्या मसले पर रोजाना सुनवाई के समाचार को छोड़ दें तो पूरा पेज कश्मीरमय है। महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला की गिरफ्तारी को तीन कॉलम में जगह मिली है। एंकर में हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर की त्वरित टिप्पणी है, जिसमें उन्होंने मोदी के मिशन कश्मीर को लेकर कुछ अनसुलझे सवाल अपने शब्दों और विचारों में पिरोकर पाठकों के सामने रखे हैं। कश्मीर मसले पर सरकार के ताजा फैसले और उसके परिणामों के विषय में ज्यादा जानने की इच्छा रखने वालों को यह त्वरित टिप्पणी जरूर पढ़नी चाहिए।
यदि अमर उजाला को देखें तो इस अखबार ने आज भी कमाल किया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अखबार की ‘कश्मीर जैकेट’ सबसे ज्यादा आकर्षक है। ऊपर बैकग्राउंड में कश्मीर की डल झील में शिकारे पर लहराता तिरंगा और खुशी में झूमते लोगों की फोटो इस्तेमाल की गई है। साथ ही टूटती जंजीर को भी दिखाया गया है, जो शीर्षक ‘कश्मीर 370 से आजाद’ के साथ सटीक बैठती है। नीचे पीएम मोदी और अमित शाह के कटआउट हैं, जिससे पेज पूरी तरह संतुलित हो गया है। तीसरे पेज को भी अखबार ने फ्रंट पेज की तरह बनाया है। इसकी लीड भी कश्मीर है, लेकिन टॉप बॉक्स में उन्नाव पीड़िता की खबर है और पास ही डॉटेड बॉक्स में अयोध्या पर रोज सुनवाई। इसके अलावा पेज पर कश्मीर पर कांग्रेस की कलह, आतंकी हमले की आशंका और राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे के सरकार के फैसले पर विचार भी हैं। ‘न्यूज डायरी’ में सेंसेक्स में गिरावट के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण समाचार हैं, लेकिन अमर उजाला ने चलती कैब में हुए बलात्कार को फ्रंट पेज पर नहीं लगाया है।
आज नवोदय टाइम्स ने भी दो फ्रंट पेज बनाये हैं। पहले पेज पर आधा पेज विज्ञापन है और ऊपर ‘मिशन कश्मीर: 370 से आजादी’ शीर्षक के साथ लीड लगाई है। नवोदय टाइम्स ने भी फैसले से पहले और बाद की स्थिति को क्रमवार समझाया है, लेकिन पेज खास मौके जितना आकर्षक नजर नहीं आ रहा है। दूसरे फ्रंट पेज पर भी लीड कश्मीर है, लेकिन दिल्ली में बलात्कार के समाचार को प्रमुखता से लगाया गया है। सड़क पर दौड़ती कैब में हुई इस वारदात ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में इस न्यूज को प्रमुखता देकर नवोदय टाइम्स ने अच्छा काम किया है। हालांकि, प्रथम पृष्ठ पर उन्नाव पीड़िता को जगह नहीं मिली है, जबकि उसे भी बड़ा या छोटा लगाया जाना चाहिए था। अन्य खबरों के अलावा एंकर में संपादक अकु श्रीवास्तव ने मोदी सरकार के कश्मीर फैसले पर अपने विचार रखे हैं।
इसके अलावा नवभारत टाइम्स की बात करें तो ग्राफिक्स और फोटो के साथ पेज को आकर्षक बनाने का प्रयास किया गया है। पेज पर सबसे ज्यादा जो ध्यान आकर्षित करता है, वो है ‘संविधान में क्या है 370’ और ‘घाटी में घर बना सकेंगे आप’। तीसरे यानी फ्रंट पेज पर भी लीड कश्मीर है। पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की एक-दूसरे को देखते हुए फोटो के बीच ‘मिशन कश्मीर: पिक्चर अभी बाकी है...’ शीर्षक के साथ इस न्यूज को लगाया गया है। इसके बाद उन्नाव पीड़िता को दिल्ली लाये जाने की खबर दो कॉलम में है और इसके ठीक नीचे कैब में बलात्कार का समाचार। पेज पर विज्ञापन ज्यादा होने की वजह से कुछ अन्य खबरों को भी छोटा करके रखा गया है।
वहीं, आज दैनिक जागरण ने मोदी और शाह के बड़े इलस्ट्रेशन के साथ ‘कश्मीर जैकेट’ तैयार की है। पेज पर राष्ट्रपति की अधिसूचना के मूल पाठ के साथ ही फैसले से पहले और बाद की स्थिति को दर्शाया गया है। तीसरा पेज यानी फ्रंट पेज भी अखबार ने कश्मीर के नाम किया है। लीड का शीर्षक ‘अगस्त में आई एक और क्रांति’ बेहद जबरदस्त है। नीचे तीन कॉलम में सरकार के फैसले पर कांग्रेस की कलह और एंकर में पॉलिटिकल एडिटर प्रशांत मिश्र की त्वरित टिप्पणी को जगह मिली है। मिश्र ने इस साहसिक फैसले के लिए मोदी-शाह के अदम्य साहस को सराहा है। उन्नाव पीड़िता और अयोध्या को संक्षिप्त में रखा गया है मगर रेप की खबर पेज पर नहीं है। वैसे, पेज उतना आकर्षक नहीं लग रहा है, जितना खास मौके पर लगना चाहिए था। सामान्य दिनों की तुलना में फर्क बस इतना है कि फ्रंट पेज पर टेक्स्ट ज्यादा है।
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