प्रिंट मीडिया में सरकारी विज्ञापनों के लिए MIB ने जारी कीं ये गाइडलाइंस

सूचना प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) ने प्रिंट मीडिया एडवर्टाइजमेंट पॉलिसी पेश की है। ये एक अगस्त से प्रभावी होगी।

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Tuesday, 28 July, 2020
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सूचना प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) ने प्रिंट मीडिया एडवर्टाइजमेंट पॉलिसी पेश की है। ये एक अगस्त से प्रभावी होगी। इस बारे में जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि सरकार के सभी मंत्रालय या विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्त निकाय और सोसायटीज, केंद्रीय विश्वविद्यालय और भारत सरकार के सभी शैक्षणिक संस्थान अपने डिस्पले विज्ञापनों को  ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ के माध्यम से देंगे।

हालांकि, वे क्लासीफाइड विज्ञापन जैसे(टेंडर नोटिस, नीलामी सूचना, भर्ती विज्ञापन आदि) बीओसी से सूचीबद्ध (empanelled) पब्लिकेशंस को बीओसी की दरों पर जारी कर सकते हैं और भर्ती संबंधी अपने विज्ञापन सीधे रोजगार समाचार (Employment News) में बीओसी की दरों पर पब्लिश करा सकते हैं।  

इसमें आगे कहा गया है कि सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के इच्छुक पब्लिकेशंस के आवेदनों पर विचार करने के लिए एक पैनल सलाहकार समिति (PAC) होगी। इन गाइडलाइंस में पब्लिकेशंस के लिए सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के लिए कुछ मापदंड भी तय किए गए हैं।

इनके अनुसार, पब्लिकेशन को कम से कम 36  महीने तक बिना रुकावट के नियमित रूप से पब्लिश होना चाहिए। हालांकि, 36 महीनों के अनिवार्य निर्बाध और नियमित प्रकाशन की अवधि के मामले में कुछ श्रेणियों के लिए 6 महीने तक छूट दी जा सकती है।

यही नहीं, पब्लिकेशन को यथोचित मानक का पालन करने की भी जरूरत है। बीओसी में संबद्धता के लिए नए आवेदन साल में दो बार (फरवरी और अगस्त) किए जा सकते हैं। इन आवेदनों पर पैनल सलाहकार समिति (PAC) द्वारा विचार किया जाएगा, जिनकी बैठक वर्ष में दो बार होगी। बीओसी द्वारा जारी किए जाने वाले विज्ञापनों की दरें रेट स्ट्रक्चर कमेटी (Rate Structure Committee) की सिफारिशों के आधार पर तय की जाएंगी। ये दरें पब्लिकेशन के प्रमाणिक सर्कुलेशन से संबंधित होंगी।

महारत्न और नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSUs) के लिए विज्ञापन की दरें बीओसी की सामान्य दरों से डेढ़ गुना होंगी। दरों में संशोधन के बाद से यह तीन साल के लिए वैध होंगी।  

गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि जिन समाचार पत्रों का सर्कुलेशन ABC (ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन)/ RNI (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) से सत्यापित होता है और जो जारी विज्ञापनों में पारदर्शिता व जवाबदेही लाते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए बीओसी कुछ तय मानदंडों के आधार पर एक मार्किंग सिस्टम का सहारा लेगी। इसके बाद अखबार द्वारा प्राप्त किए गए मार्क्स के आधार पर मध्यम और बड़ी कैटेगरी के लिए विज्ञापन जारी करेगी।

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‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादन मंडल में बड़े बदलाव, ये बने संपादक

अंग्रेजी हुकूमत में तमाम बंदिशों के बीच हिंदी साहित्य के स्‍वर्णिम इतिहास की पठकथा लिखने वाली ‘सरस्वती पत्रिका’ के संपादक मंडल में कई बड़े बदलाव हुए हैं।

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Monday, 24 January, 2022
SaraswatiPtrika5465

अंग्रेजी हुकूमत में तमाम बंदिशों के बीच हिंदी साहित्य के स्‍वर्णिम इतिहास की पठकथा लिखने वाली ‘सरस्वती पत्रिका’ के संपादन मंडल में कई बड़े बदलाव हुए हैं। इंडियन प्रेस के निदेशक सुप्रतीक घोष के अनुसार साहित्यकार रविनंदन सिंह और पत्रिका के सहायक संपादक अनुपम परिहार को पत्रिका के संपादन का दायित्व सौंपा गया है।

वहीं, निवर्तमान संपादक डॉ. देवेन्द्र शुक्ल को पत्रिका के संरक्षक मंडल में शामिल किया गया है।

गौरवपूर्ण अतीत को संजोने वाली पत्रिका का त्रैमासिक प्रकाशन इंडियन प्रेस द्वारा किया जाता है। गुलामी की बेडियों में जकड़े भारत को भाषिक व सांस्कृतिक स्वतंत्रता दिलाने के लिए करीब 121 वर्ष पहले 1900 में सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ था। जून 1980 में आर्थिक कारणों से पत्रिका का प्रकाशन बंद हो गया था।

सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन संस्थापक बाबू चिंतामणि घोष ने जनवरी 1900 में आरंभ कराया। इसके संपादक मंडल में श्याम सुंदर दास, किशोरीलाल गोस्वामी, बाबू कार्तिक प्रसाद खत्री, जगन्नाथदास रत्नाकर, बाबू राधाकृष्ण दास थे। पत्रिका का संपादन 1901 में श्यामसुंदर दास को मिला। इन्होंने बिना पारिश्रमिक लिए काम किया।

जनवरी 1903 में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने पत्रिका का संपादन शुरू किया। आचार्य महावीर ने सरस्वती के जरिए खड़ी बोली को नई ऊचाइयां प्रदान की। फिर 1921 से 1925 तक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, 1927 में पं. देवीदत्त शुक्ल, 1928 में पुन: पदुमलाल पुन्ना बख्शी, 1929 से 1946 तक पं. देवीदत्त शुक्ल संपादक रहे। फिर 1946 में उमेशचंद्र मिश्र व देवीदयाल चतुर्वेदी 'मस्त' संपादक बने। उमेशचंद्र बाद में हट गए और देवीदयाल चतुर्वेदी 1955 तक संपादक रहे। 1956 से 1976 तक श्रीनारायण चतुर्वेदी 'भइया साहब' संपादक थे। जून 1980 में धनाभाव के चलते पत्रिका का प्रकाशन बंद हो गया। उस समय निशीथ राय संपादक थे। इसके बाद जनवरी 2020 में पत्रिका का पहला अंक प्रकाशित किया गया।

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प्रेस परिषद ने प्रिंट मीडिया को दी सलाह, कहा- ऐसी चीजों से बनाए दूरी

यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 20 January, 2022
Last Modified:
Thursday, 20 January, 2022
PCI

यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ऐसे में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले, भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने प्रिंट मीडिया को ‘पेड न्यूज’ प्रकाशित करने से बचने की सलाह दी है। साथ ही प्रिंट मीडिया से उसके द्वारा निर्धारित पत्रकारिता आचरण के मानदंडों का पालन करने की भी सलाह दी है।

प्रेस परिषद ने प्रिंट मीडिया से ऐसी कोई भी खबर या अन्य सामग्री नहीं छापने को कहा जो जन प्रतिनिधि अधिनियम 1951 का उल्लंघन करती हो।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 10 फरवरी से सात मार्च के बीच विधानसभा चुनाव होने हैं और मतों की गिनती 10 मार्च को होगी।

पीसीआई ने एक बयान में कहा, ‘भारत में चुनाव हमारे लोकतंत्र की रीढ़ हैं और मीडिया पर सभी संबंधित जानकारी को जनता तक पहुंचाने की भारी जिम्मेदारी है।’

उसने चुनाव की कवरेज के संबंध में प्रिंट मीडिया को नौ बिंदुओं वाले परामर्श में कहा है, ‘भारतीय प्रेस परिषद मीडिया को सलाह देती है कि पेड न्यूज पर जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 126 और पत्रकारिता आचरण के मानदंड -2020 का उल्लंघन न करें।’

पीसीआई ने अपने परामर्श में प्रिंट मीडिया से निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सभी आदेशों और निर्देशों का पालन करने को कहा है जो समय-समय पर जारी किए जाते हैं।

परिषद ने प्रिंट मीडिया से कहा कि वह मतदान के अंतिम 48 घंटे के दौरान चुनाव से संबंधित किसी तरह की सामग्री का अखबारों में प्रकाशन नहीं करें और इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर जनप्रतिनिधि कानून की धारा 126 के तहत दो साल तक की सज़ा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

पीसीआई ने कहा कि कोई भी समाचार पत्र मतदान की अंतिम तारीख तक ‘एक्जिट-पोल’ सर्वेक्षण प्रकाशित नहीं करेगा, चाहे वे कितने भी वास्तविक क्यों न हों।

उसने कहा कि सांप्रदायिक या जाति के आधार पर चुनाव प्रचार नियमों के तहत प्रतिबंधित है और परिषद ने प्रिंट मीडिया को उन खबरों से बचने की सलाह दी जो धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर लोगों के बीच दुश्मनी या नफरत की भावनाओं को बढ़ावा देती हों।

उसने कहा कि मीडिया किसी भी उम्मीदवार या पार्टी के खिलाफ अपुष्ट आरोपों का प्रकाशन नहीं करे।

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वॉट्सऐप ग्रुप्स में दैनिक भास्कर समूह के ई-पेपर्स सर्कुलेट करने पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने वॉट्सऐप को दैनिक भास्कर के ई-पेपर प्रसारित करने वाले वॉट्सऐप समूहों को ब्लॉक या बंद करने का निर्देश दिया है। अब दो मई को होगी मामले की सुनवाई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 28 December, 2021
Last Modified:
Tuesday, 28 December, 2021
Dainik Bhaskar Group

दिल्ली हाईकोर्ट ने तमाम वॉट्सऐप ग्रुप्स के द्वारा ‘दैनिक भास्कर ग्रुप्स’ के अखबारों के ई-पेपर्स प्रसारित करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने वॉट्सऐप को निर्देशित किया है कि दैनिक भास्कर समूह के ई-पेपर्स प्रसारित करने वाले वॉट्सऐप ग्रुप्स को ब्लॉक किया जाए या उन्हें बंद किया जाए।

बता दें कि वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिये ई-पेपर्स को गैरकानूनी तरीके से प्रसारित करने के खिलाफ दैनिक भास्कर समूह ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने डीबी कॉर्प लिमिटेड (दैनिक भास्कर समूह) के पक्ष में अंतरिम आदेश पारित किया है। अब इस मामले में दो मई 2022 को सुनवाई होगी।

बताया जाता है कि अपने फैसले में हाई कोर्ट ने उन वॉट्सऐप ग्रुप्स के एडमिन को भी नोटिस जारी किया है, जो दैनिक भास्कर समूह के ई-पेपर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अवैध रूप से प्रसारित कर रहे हैं। इन वॉट्सऐप ग्रुप्स के एडमिन की पहचान उनके मोबाइल नंबर से हुई है। हाई कोर्ट ने केंद्रीय दूरसंचार विभाग और केंद्र सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है।

गौरतलब है कि दैनिक भास्कर समूह सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिये अपनी आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल एप पर ई-पेपर्स देखने की सुविधा मुहैया कराता है। समूह का कहना है कि इन ई-पेपर्स को बिना पूर्व अनुमति के अन्य माध्यमों या प्लेटफार्म्स पर प्रसारित करना गैरकानूनी है।

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‘Indian Newspaper Society’ के प्रेजिडेंट बने मोहित जैन, कार्यकारिणी में शमिल हैं ये नाम

‘द इकनॉमिक टाइम्स’ (The Economic Times) के मोहित जैन को ‘इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी’ (INS) का प्रेजिडेंट चुना गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 27 December, 2021
Last Modified:
Monday, 27 December, 2021
INS Mohit Jain

‘द इकनॉमिक टाइम्स’ (The Economic Times) के मोहित जैन को ‘इंडियन न्‍यूजपेपर सोसायटी’ (INS) का प्रेजिडेंट चुना गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई ‘आईएनएस’ की 82वीं वार्षिक आम बैठक में यह निर्णय लिया गया। उन्हें ‘हेल्थ एंड द एंटीसैप्टिक’ (Health & The Antiseptic) के एल. आदिमूलम की जगह ये जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनका यह चुनाव वर्ष 2021-22 के लिए किया गया है।

इसके साथ ही ‘आईएनएस’ की नई कार्यकारिणी में ‘साक्षी’ के के. राजा प्रसाद रेड्डी को डिप्टी प्रेजिडेंट, ‘आज समाज’ के राकेश शर्मा को वाइस प्रेजिडेंट और ‘अमर उजाला’ के तन्मय माहेश्वरी को मानद कोषाध्यक्ष चुना गया है। वहीं मैरी पॉल को सेक्रेट्री-जनरल की जिम्मेदारी दी गई है।

इस मीटिंग के दौरान ए. आदिमूलम ने अखबारों के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ‘मीडिया काफी महत्वपूर्ण है। समाज के चौथे स्तंभ के रूप में अखबार लोकतंत्र के संरक्षक हैं। यह हमारे देश के साथ-साथ दुनिया में बड़े पैमाने पर होने वाली दैनिक घटनाओं के बारे में प्रामाणिक समाचारों के साथ जनता को अच्छी तरह से सूचित करते हैं।’

आदिमूलम ने कहा कि ‘आईएनएस’कुछ विचारों और उद्देश्यों के साथ स्थापित की गई थी। उन्होंने कहा, ‘अगर हम एक ही दृष्टि और उद्देश्य के साथ एकजुट होते हैं तो बड़े पैमाने पर उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।’

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इस राज्य में अखबार वितरकों की सरकार ने ली सुध, दिया ये तोहफा

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रदेश के अखबार वितरकों (हॉकर्स) को विशेष कोविड सहायता राशि प्रदान की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 24 December, 2021
Last Modified:
Friday, 24 December, 2021
hawkers

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रदेश के अखबार वितरकों (Hawkers) को विशेष कोविड सहायता राशि प्रदान की। दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा करते हुए इन अखबार वितरकों के बैंक खाते में सहायता राशि ट्रांसफर की। साथ ही अखबार वितरकों को असंगठित सामाजिक सुरक्षा योजना में शामिल करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री के इस जनहित कदम का ओडिशा के तमाम अखबार वितरकों ने स्वागत करने के साथ ही उन्हें धन्यवाद भी दिया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल युग में भी अखबार की महत्ता कम नहीं हुई है और हॉकर, अखबार एवं पाठक के बीच का सेतु है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कोविड महामारी में हर वर्ग के साथ अखबार वितरक भी प्रभावति हुए हैं। ऐसे में ओडिशा सरकार ने आज राज्य के अखबार वितरकों उनका हक प्रदान किया है। अखबार वितरकों को विशेष कोविड सहायता राशि प्रदान करने के साथ ही इन्हें सामाजिक सुरक्षा योजना में शामिल किया गया है। सूचना ए​वं जनसंपर्क विभाग की तरफ से प्रदेश में पंजीकृत 7300 अखबार वितरकों के खाते में 6 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड सहायता राशि के साथ अखबार वितरकों के लिए दुर्घटना संबन्धित मृत्यु होने पर 2 लाख रुपए की सहायता राशि के साथ ही स्वभाविक मृत्यु होने पर 1 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। दुर्घटना के कारण पूरी तरह से अक्षम हो जाने वाले हॉकर को डेढ़ लाख रुपए की सहयाता सरकार की तरफ से देने की व्यवस्था की गई है। दुर्घटना में आंशिक रूप से घायल अखबार को 80 हजार रुपए और एक अंग गंवाने वाले व्यक्ति को 40 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के कारण आम लोगों की तरह अखबार वितरक भी आर्थिक असुविधा का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सभी पंजीकृत हॉकर अर्थात अखबार वितरकों को हमारी सरकार ने यह सहायता राशि देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के राहत कोष से यह सहयाता राशि दी जाएगी। इसके अलावा अखबार वितरक को काम करने में असुविधा ना हो इसके लिए प्रत्येक जिले में वर्कसेड बनाया जाएगा। यह वर्कसेड गृह एवं नगर विकास विभाग की तरफ से तैयार किया जाएगा।

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India Today समूह से जुड़े युवा पत्रकार प्रशांत श्रीवास्तव, मिली यह जिम्मेदारी

युवा पत्रकार प्रशांत श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ समूह के साथ अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने ‘इंडिया टुडे‘ मैगजीन में बतौर स्पेशल करेसपॉन्डेंट (उत्तर प्रदेश ब्यूरो) जॉइन किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 20 December, 2021
Last Modified:
Monday, 20 December, 2021
Prashant Srivastava

युवा पत्रकार प्रशांत श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ (India Today)  समूह के साथ अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने ‘इंडिया टुडे‘ (India Today) मैगजीन में बतौर स्पेशल करेसपॉन्डेंट (उत्तर प्रदेश ब्यूरो) जॉइन किया है।

प्रशांत श्रीवास्तव इससे पहले करीब तीन साल से ‘द प्रिंट‘ (The Print) में बतौर स्टेट करेसपॉन्डेंट (उत्तर प्रदेश ब्यूरो) अपनी भूमिका निभा रहे थे।

मूल रूप से बरेली के रहने वाले प्रशांत श्रीवास्तव को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब आठ साल का अनुभव है। पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘न्यूज नेशन‘ (News Nation) के साथ की थी। इसके बाद वह ‘नवभारत टाइम्स’ (NBT) से जुड़ गए। फिर ‘राजस्थान पत्रिका‘ (Rajasthan Patrika) और ‘द प्रिंट‘ से होते हुए अब ‘इंडिया टुडे’ (India Today)  समूह में पहुंचे हैं।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो प्रशांत श्रीवास्तव ने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और लखनऊ यूनिवर्सिटी से एमए (पॉलिटिकल साइंस) की डिग्री ली है। समाचार4मीडिया की ओर से प्रशांत श्रीवास्तव को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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वकील के खिलाफ अपमानजनक लेख लिखना संपादक को पड़ा भारी, भुगतनी होगी ये सजा

सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ साप्ताहिक अखबार के संपादक डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी को किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 December, 2021
Last Modified:
Saturday, 18 December, 2021
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एक वकील के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक लेख लिखना संपादक को इस कदर भारी पड़ गया कि उन्हें अब एक महीने जेल की सजा भुगतनी होगी। दरअसल, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ साप्ताहिक अखबार के संपादक डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी को किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। उन्हें एक वकील के खिलाफ मानहानिकारक लेखों के लिए कारावास की सजा सुनाई गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि एक महीने की जेल एक उदार सजा है।

चीफ जस्टिस एन.वी. रमण, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। 

हाई कोर्ट ने शेट्टी की याचिका को केवल आंशिक रूप से अनुमति दी थी और उनकी सजा को एक वर्ष से घटाकर एक महीना कर दिया था। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील संजय एम नुली से कहा कि उन्हें सजा भुगतने दें। पीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, 'आपने किसी को 'तीसरे दर्जे का वकील' कहा। आप इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हो और दावा करते हो कि तुम पत्रकार हो। यह किस तरह की पत्रकारिता है?

चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच में शामिल जस्टिस हिमा कोहली ने कहा, 'अपने लेख की भाषा देखो।' सजा को 'उदार' बताते हुए सीजेआई ने कहा, 'यह पीत पत्रकारिता है। यह उदारता है कि केवल एक महीने की कैद दी गई है।'

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि हाई कोर्ट के आदेश ने प्रेस की स्वतंत्रता और जानने के अधिकार का उल्लंघन किया है, जिसे संविधान के अनुच्छेद-19 (1) (ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आंतरिक हिस्से के रूप में मान्यता दी गई है।   

याचिकाकर्ता कन्नड़ साप्ताहिक अखबार ‘तुंगा वर्थे’ के मालिक, प्रकाशक व संपादक हैं। 2008 में वकील टीएन रत्नराज के खिलाफ लेखों की एक श्रृंखला प्रकाशित की थी और वकील के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था।

  

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भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले एडिटर ने किया रिटायरमेंट का ऐलान

अपने विवादित बयानों, लेखों और ट्वीट की वजह से वह हमेशा चर्चा में बने रहते थे। वह अकसर भारत को जंग की धमकी देता रहता था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 December, 2021
Last Modified:
Friday, 17 December, 2021
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चीन में सरकार का मुखपत्र माने जाने वाले दैनिक अखबार ‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ के संपादक (एडिटर) हू शिजिन ने रिटायर होने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो (Vibo) पर किया।

शिजिन के वीबो पर दो करोड़ 40 लाख फॉलोवर हैं। उन्होंने कहा कि वह रिटायर भले ही हो रहे हैं लेकिन वह आगे भी अपनी विशेष टिप्पणी ग्लोबल टाइम्स में लिखते रहेंगे। हू शिजिन ने लिखा, 'मैं जारी रखूंगा... हर चीज मैं कम्युीनिस्टि पार्टी की खबरों के लिए करता रहूंगा।'

‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ चीन की सत्‍तारूढ़ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का अखबार माना जाता है। कभी लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले हू शिजिन ‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ का एडिटर बनने के बाद जहरीले बयान देने लगा। शिजिन साल 2005 में ग्‍लोबल टाइम्‍स का एडिटर बना था। ग्‍लोबल टाइम्‍स और सोशल मीडिया के जरिए हू शिजिन ने चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में बहुत आक्रामक होकर चीन के झूठे राष्‍ट्रवाद को बढ़ावा देने का काम किया। भारत समेत दुनियाभर के देशों के खिलाफ हू शिजिन ट्विटर पर जहर उगलता रहता था। इसी वजह से उसे 'ट्रोल किंग' कहा जाता था।

हू शिजिन अपने विवादित बयानों, लेखों और ट्वीट की वजह से चर्चा में बने रहते थे। वह अकसर भारत को जंग की धमकी देता रहता था। एक ट्वीट में हू शिजिन ने कहा था, 'PLA (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) ने पठारी इलाके में तिब्बत मिलिटरी कमांड की लाइव-फायर ड्रिल का वीडियो रिलीज किया। PLA ने हवाई टुड़कियों के साथ भी ड्रिल की। हां, ये सभी चीन-भारत के हालात की ओर लक्षित हैं। भारतीय सेना या तो उकसाना बंद करे या हारने के लिए तैयार रहें।'

शिजिन ने एक अन्‍य ट्वीट में कहा था, 'अगर पैंगॉन्ग झील में कोई विवाद है तो उसका अंत सिर्फ भारतीय सेना की नई हार में होगा। पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर चीन का वास्तविक नियंत्रण है। 1962 में चीन की सेना ने भारत की सेना को यहां हराया था। इस बार भारतीय सेना यथास्थिति को बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। मुझे उम्मीद है कि भारत वही गलती नहीं दोहराएगा।'

पिछले साल उन्‍होंने अमेरिका के साथ कोरोना के उत्‍पत्ति की जांच करने मांग करने पर ऑस्‍ट्रेलिया की तुलना जूते में चिपके च्यूइंग गम से की थी।

 

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'द पायनियर' मामले में इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं NCLAT में हुईं खारिज

नौ महीने से अधिक समय तक मामले की सुनवाई के बाद NCLAT ने आखिरकार सभी तीनों अपीलों को 'गैर-रखरखाव योग्य' मानते हुए खारिज कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 December, 2021
Last Modified:
Friday, 17 December, 2021
The Pioneer

‘नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल’ (NCLAT) ने गुरुवार को कुशान मिश्रा, प्रशांत तिवारी और नरेंद्र कुमार द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इन याचिकाओं में 19 जनवरी 2021 के ‘नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल’ (NCLT) के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसने ‘द पायनियर’ अखबार का प्रबंधन करने वाले बोर्ड को निलंबित कर दिया गया था।

इसका मतलब यह है कि अब सेंट्रल बैंक की अध्यक्षता में लेनदारों की समिति, जिसने कंपनी को नौ करोड़ रुपये का कर्ज दिया है, अब इसके परिचालन को टेकओवर कर लेगी और अखबार के लिए नए निवेशकों की तलाश करेगी।

बता दें कि पायनियर को प्रिंट और पब्लिश करने वाली कंपनी ‘CMYK Printech Limited’ के एडिटोरियल डायरेक्टर्स में से एक अमित गोयल ने 2.5 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के लिए ‘एनसीएलटी‘ का रुख किया था। जब चंदन मित्रा, उनके बेटे कुशान मिश्रा और अन्य पारिवारिक सदस्यों द्वारा संचालित इस कंपनी ने इस रकम का भुगतान करने से इनकार कर दिया तो ‘एनसीएलटी‘ ने बोर्ड को निलंबित कर कंपनी परिचालन के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया था।

इसके बाद चंदन मित्रा (जिनका सितंबर में निधन हो गया है), कुशान मित्रा, प्रशांत तिवारी और हरनंदन प्रकाशन के प्रकाशक नरेंद्र कुमार ने ‘एनसीएलटी‘ के आदेश को खारिज करने के लिए विभिन्न आधारों पर ‘एनसीएलएटी‘ में अपील दायर की थी।

नौ महीने से अधिक समय तक मामले की सुनवाई के बाद NCLAT ने आखिरकार सभी तीनों याचिकाओं को 'गैर-रखरखाव योग्य' (non maintainable) मानते हुए खारिज कर दिया है।

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बीट रिपोर्टिंग और एडिटिंग के अहम पहलुओं से रूबरू कराती इस किताब का हुआ विमोचन

ऑनलाइन रूप से हुए एक कार्यक्रम में तमाम शिक्षाविदों और पत्रकारों की मौजूदगी में इस बुक का विमोचन किया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 December, 2021
Last Modified:
Friday, 17 December, 2021
pro Surabhi Dahia

देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) में अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग की कोर्स डायरेक्टर प्रोफेसर सुरभि दहिया और शंभु दास द्वारा संपादित किताब ‘बीट रिपोर्टिंग एंड एडिटिंग, डिजिटल युग में पत्रकारिता’ (Beat Reporting and Editing: Journalism in the Digital Age) लॉन्च हो गई है।

16 दिसंबर को ऑनलाइन रूप से हुए एक कार्यक्रम में तमाम शिक्षाविदों और पत्रकारों की मौजूदगी में इस बुक का विमोचन किया गया। इस मौके पर ‘बिजनेस स्टैंडर्ड‘ के संपादकीय निर्देशक, ए.के. भट्टाचार्य ने कहा कि यह पुस्तक 21वीं सदी के दूसरे दशक में पत्रकारिता की पृष्ठभूमि में परिचायक होगी। पत्रकारिता जगत में यह बहुचर्चित पुस्तक संरक्षित करने योग्य है और इसका जबरदस्त अभिलेखनीय मूल्य है।

वहीं, ‘बीएजी’ ग्रुप की चेयरपर्सन व मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराधा प्रसाद ने कहा कि पुस्तक ने उन्हें बहुत प्रभावित किया है, क्योंकि इसमें पत्रकारिता के व्यापक पहलुओं को शामिल किया गया है, जो उभरते पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

‘एच.टी’ के संपादक सुकुमार रंगनाथन का कहना था कि इस पुस्तक में मुख्य पत्रकारिता बीट्स, पत्रकारिता के नए रूपों को शामिल किया गया है और पत्रकारिता शिक्षा में ज्ञानावरोध को भरने के लिए चीजों को परिपेक्ष्य में रखा गया है।

इस मौके पर अन्य प्रख्यात प्रवक्ताओं में शामिल ‘आईआईएमसी‘ के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, ‘आई.ए.एम.सी.आर ‘ की उपाध्यक्ष प्रो. ऊषा रमन, बिल हिंचबर्गर, प्रो. सुनीलकांत बेहरा, विवेक मेहरा और सिद्धार्थ मिश्रा ने अकादमिक ज्ञान संग्रह के रूप में पुस्तक के दायरे के बारे में बात की और इसे नए युग की पत्रकारिता की बाइबल के रूप में संदर्भित किया।

किताब की संपादक प्रो. सुरभि दहिया और शंभु दास साहू का मानना है कि इस पुस्तक का उद्देश्य उभरते पत्रकारों को अपने संबंधित क्षेत्र में सीखने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए पत्रकारिता में विभिन्न विषयगत विशेषज्ञता से संबंधित उपकरणों और सर्वोत्तम अनुभवों को प्रकाशित करने का एक प्रयास है।

इस किताब में 48 अध्याय हैं। इसमें व्यापक रूप से ग्रामीण रिपोर्टिंग, कहानी कथन, फोटो पत्रकारिता और कार्टूनिंग, सोशल मीडिया रिपोर्टिंग, झूठी खबर और नकली समाचार, समाधान आधारित पत्रकारिता पर विशेष अध्यायों के अलावा रक्षा, राजनीति, न्यायालय, अपराध, खेल और मनोरंजन जैसे पारंपरिक बीट्स को व्यापक रूप से शामिल कर आने वाले समय को भी समाहित किया गया है। इस युग की पत्रकारिता और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस, ब्लोकचेन, बॉड्स, पोडकास्ट, मोबाइल पत्रकारिता, ड्रोन पत्रकारिता और भारत में डेटा पत्रकारिता जैसे विषयों को भी इसमें शामिल किया गया है।

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