लॉकडाउन के बीच रीडर्स तक पहुंचने के लिए बंगाली मैगजींस ने अपनाई ये स्ट्रैटेजी

महामारी बन चुके कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग धंधों पर विपरीत असर पड़ा है

Last Modified:
Thursday, 23 April, 2020
Magazines

महामारी बन चुके कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू लॉकडाउन के कारण जहां तमाम उद्योग धंधों पर विपरीत असर पड़ा है, वहीं मीडिया संस्थान अपने कंज्यूमर्स से जुड़े रहने के लिए तमाम नए तरीके तलाश रहे हैं।  

सबसे ज्यादा चुनौती प्रिंट मीडिया के सामने है, क्योंकि लॉकडाउन के कारण उनका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क काफी प्रभावित हुआ है। जो पाठक सुबह अखबार और साप्ताहिक मैगजींस पढ़ने के आदी थे, वे अब डिजिटल वर्जन से इनकी कमी पूरी कर रहे हैं। ऐसे कई प्रिंट प्लेयर्स हैं जो यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पाठकों तक उनके सभी एडिशन पहुंचें, एबीपी ग्रुप भी इस दिशा में काफी कुछ कर रहा है।  

लॉकडाउन शुरू होने से लेकर अब तक एबीपी प्राइवेट लिमिटेड (ABP Pvt Ltd) द्वारा पब्लिश की जाने वालीं सभी बंगाली मैगजींस (Sananda, Desh, Boier Desh, Anandamela और Anandalok) के लेटेस्ट इश्यू को ई-मैगजींस के रूप में फ्री में उपलब्ध कराया गया है। इन्हें मैगजीन के ऐप (ABP MAGS) पर मुफ्त में पढ़ा जा सकता है।  

दरअसल, इन पब्लिकेशंस का अपना अलग पाठक वर्ग है और जब पब्लिशर्स ने मैगजींस के प्रिंट वर्जन को अस्थायी तौर पर बंद करने का निर्णय लिया तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि कैसे इसका त्वरित विकल्प तलाशा जाए, ताकि पाठकों तक मैगजींस पहुंच सकें। पब्लिशर्स के अनुसार, दूसरी बड़ी समस्या ये थी कि पाठक डिजिटल रूप से इन्हें पढ़ने के आदी नहीं थे।

कंपनी के एक प्रवक्ता के अनुसार, ‘इसके लिए हमने ट्रेनिंग देनी शूरू की और पाठकों में ई-मैगजींस की आदत डालने में सहायता के लिए टेलिफोन नंबर जारी किए हैं।’

एबीपी मैनेजमेंट ने इस दौरान कैसे पाठकों तक अपनी पहुंच बनाई, इस बारे में प्रवक्ता ने कहा, ‘लॉक़ाउन के कारण हम चूंकि मैगजींस को प्रिंट करने में असमर्थ थे। इसके बावजूद हम अपने पाठकों तक पहुंचना चाहते थे। इसलिए हमने ये निर्णय लिया। ये सभी मैगजींस काफी लोकप्रिय हैं और इनमें ऐसा कंटेंट है जो एक इश्यू से दूसरे इश्यू में जारी रहता है।’

यह पूछे जाने पर कि कोविड-19 का दौर गुजर जाने के बाद डिजिटल उपभोग पर क्या असर पड़ेगा, प्रवक्ता ने कहा, ‘कोविड-19 का दौर गुजर जाने के बाद प्रिंट और डिजिटल दोनों का मिला-जुला रूप देखने को मिल सकता है। अभी तो देखो और इंतजार करने वाली स्थिति है।’

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जानें, समाचार पत्रों में विज्ञापनों पर असम की पिछली सरकार ने कितने किए खर्च

सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली असम की पिछली सरकार ने पांच साल में समाचार पत्रों में विज्ञापनों पर किए इतने खर्च

Last Modified:
Thursday, 15 July, 2021
newspaper

सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली असम की पिछली सरकार ने पांच साल में समाचार पत्रों में विज्ञापनों पर 82.59 करोड़ रुपए खर्च किए। राज्य की विधानसभा को बुधवार को इसकी जानकारी दी गई।

प्रश्नकाल के दौरान ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक करीम उद्दीन बरभुया के एक सवाल का जवाब देते हुए, सूचना एवं जनसंपर्क (आईपीआर) मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि वे विज्ञापन राज्य की विभिन्न भाषाओं के 41 समाचार पत्रों में प्रकाशित किए गए थे।

एक संबंधित प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि आईपीआर विभाग ने असमिया भाषा में 13 समाचार पत्रों को सूचीबद्ध किया है, इसके बाद अंग्रेजी में नौ और बांग्ला व हिंदी में छह-छह समाचार पत्र सूचीबद्ध हैं।

हजारिका ने कहा कि सरकार के पास समाचार पत्रों के प्रबंधन द्वारा बताए गए सर्कुलेशन के आंकड़ों की पड़ताल करने का कोई तंत्र नहीं है, लेकिन इस पर विचार चल रहा है।

मंत्री ने सदन को बताया, 'पत्रों को प्रकाशित करने के लिए आवश्यक अखबारी कागज से जीएसटी एकत्र करने की कोई नीति नहीं है। हालांकि, सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है।'

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अमेरिका समेत 21 देशों ने इस अखबार के बंद का किया विरोध

हॉन्गकॉन्ग (Hong Kong) में एपल डेली को बलपूर्वक बंद कराए जाने और प्रशासन के अखबार के कर्मचारियों को गिरफ्तार करने के खिलाफ बीस से अधिक देशों ने चिंता जताई है।

Last Modified:
Monday, 12 July, 2021
Newspaper

हॉन्गकॉन्ग (Hong Kong) में लागू हुए नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSL) की बड़ी कीमत वहां के एक अखबार ने चुकानी पड़ी है। दरअसल, यहां के लोकतंत्र समर्थक दैनिक अखबार ‘एपल डेली’ को चीन की दमनकारियों नीतियों से परेशान होकर अपना प्रकाशन बंद करना पड़ा। 24 जून को अखबार का आखिरी एडिशन छापा गया। अब अखबार को बलपूर्वक बंद कराए जाने और प्रशासन के अखबार के कर्मचारियों को गिरफ्तार करने के खिलाफ बीस से अधिक देशों ने चिंता जताई है।

मीडिया फ्रीडम कोएलेशन में शामिल ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, आइसलैंड, डेनमार्क, नीदरलैंड, न्यूजलैंड, इटली, जापान और ब्रिटेन समेत 21 देशों की सरकारों की ओर से जारी बयान में इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की गई है।

मीडिया फ्रीडम कोएलेशन में शामिल सदस्यों ने कहा कि पत्रकारिता को दबाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उपयोग एक गंभीर और नकारात्मक कदम है, जो हॉन्गकॉन्ग की उच्च स्तर की स्वायत्तता और हॉन्गकॉन्ग में लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता को कमजोर करता है, जैसा कि हॉन्गकॉन्ग के मूल कानून और चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा में प्रदान किया गया है।  

बयान में कहा गया है कि ‘एपल डेली’ के खिलाफ की गई कार्रवाई हॉन्गकॉन्ग में बढ़ी हुई मीडिया सेंसरशिप को दर्शाता है, जिसमें सार्वजनिक प्रसारक की स्वतंत्रता पर दबाव और पत्रकारों के खिलाफ हॉन्गकॉन्ग के अधिकारियों द्वारा हाल ही में कानूनी कार्रवाई शामिल है।

पिछले महीने ही एपल डेली ने अपने अंतिम संस्करण में बताया था कि उन पर दबाव डालकर उन्हें अखबार का प्रकाशन बंद करने के लिए विवश किया गया है। इस अखबार के संपादकों पर हॉन्गकॉन्ग के पिछले साल लागू नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। पिछले कुछ समय से हॉन्गकॉन्ग में चीनी शासन के दबाव में मीडिया पर सख्ती की जा रही है।

वहीं, कुछ दिन पहले ही चीन के विदेश मंत्रालय ने हॉन्गकॉन्ग के लोकतंत्र समर्थक एपल डेली अखबार को बंद करने पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बयान से नाराजगी जताते हुए कहा था कि अमेरिका को देश के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा था कि हॉन्गकॉन्ग चीन के आंतरिक मामलों के अंतर्गत आता है।

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इन अखबारों से हुआ सरकारी खजाने को नुकसान, BOC के अधिकारियों के खिलाफ CBI एक्शन

सीबीआई का आरोप है कि इन अखबारों को दिए गए विज्ञापनों से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का घाटा हुआ।

Last Modified:
Monday, 12 July, 2021
CBI

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित तौर पर गलत और जाली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी विज्ञापनों के लिए अखबारों को सूचीबद्ध करने को लेकर ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (बीओसी) के अज्ञात अधिकारियों के साथ हरीश लांबा, आरती लांबा और अश्विनी कुमार के विरुद्ध मामला दर्ज किया है।

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद एजेंसी ने आरोप लगाया है कि बीओसी के अज्ञात अधिकारियों ने लांबा के साथ मिलकर ‘अर्जुन टाइम्स’, ‘हेल्थ ऑफ भारत’ और ‘दिल्ली हेल्थ’ के दो-दो संस्करणों (छह अखबार) को गलत और जाली दस्तावेज के आधार पर सूचीबद्ध किया। बीओसी को पहले विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) के नाम से जाना जाता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एजेंसी ने 30 अगस्त 2019 को की गई संयुक्त औचक जांच के आधार पर प्रारंभिक पड़ताल शुरू की थी। जांच में सामने आया था कि डीएवीपी के मानकों के अनुरूप नहीं होने के बावजूद इन अखबारों को सूचीबद्ध किया गया था और इसमें निदेशालय के अज्ञात अधिकारी शामिल थे।

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सरकारी विज्ञापन लेने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रमाण पत्रों समेत गलत दस्तावेज विभाग में सौंपे गए। सीबीआई का आरोप है कि इन अखबारों को दिए गए विज्ञापनों से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का घाटा हुआ।

एजेंसी ने कहा कि जिन अखबारों के पते दिए गए थे उन पर प्रकाशन का कोई काम नहीं होता था। जांच के दौरान एजेंसी ने पाया कि अर्जुन टाइम्स ने 2017 में जो कागजात सौंपे थे उसमें अश्विनी कुमार को प्रकाशक और हरीश लांबा को इस अखबार का मालिक बताया गया था।

सीबीआई का आरोप है कि यह अखबार फर्जी तरीके से डीएवीपी के साथ सूचीबद्ध हो गए और उन्हें 2016 से 2019 के बीच 62.24 लाख रुपए के विज्ञापन मिले।

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India Today ग्रुप ने सौरव मजूमदार को सौंपी इस पत्रिका की जिम्मेदारी

इंडिया टुडे ग्रुप ने अपनी इस पत्रिका के नए संपादक के तौर पर सौरव मजूमदार को नियुक्त किया है

Last Modified:
Thursday, 08 July, 2021
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इंडिया टुडे (India Today) ग्रुप  ने अपनी ‘बिजनेस टुडे’ पत्रिका के नए संपादक के तौर पर सौरव मजूमदार को नियुक्त किया है।

मजूमदार ने तीन दशकों के अपने लंबे करियर में देश के कुछ बड़े मीडिया हाउस के साथ काम किया है। उनके पास सभी प्लेटफॉर्म को लीड करने का अनुभव है।

शुरुआत में ही उन्हें ‘द फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ और ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ जैसे बड़े ब्रैंड्स के साथ काम करने का मौका मिला। अपनी सबसे हालिया भूमिका में वह फॉर्च्यून (Fortune) और फोर्ब्स (Forbes) के भारतीय संस्करणों के संपादक थे। इससे पहले मजूमदार एंत्रप्रेन्योर (Entrepreneur) के एडिटर-इन-चीफ थे।

आईटीजी (ITG) में अपनी नई भूमिका के बारे में उन्होंने कहा, ‘एक ऐसे संगठन से जुड़ना वास्तव में मेरे लिए खुशी की बात है, क्योंकि मुझे लगता है कि पत्रकारिता का स्वर्ण मानक है- इंडिया टुडे ग्रुप।’

उनकी नियुक्ति पर बोलते हुए इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन कली पुरी ने कहा, ‘कभी कभार ऐसा होता है कि व्यापार क्षेत्र बिना कुछ किए  बदलाव के दौर से गुजरता है। ऐसे घबराहट भरे माहौल में, वास्तविक पत्रकार और वास्तविक विचार ही दुनिया को नया रूप देते हैं। हम सबसे विश्वसनीय पत्रकारों, एक पुरानी विरासत और वास्तव में ओमनी प्लेटफॉर्म मल्टीमीडिया बिजनेस टुडे के अनुभव के साथ इस परिवर्तनकारी यात्रा के किनारे पर आकर खुश हैं।

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‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को भारत में चाहिए ऐसा पत्रकार, पर विवादों में आ गईं उसकी शर्तें

अपने जॉब कंटेंट को लेकर अमेरिका का मशहूर अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) विवादों में है।

Last Modified:
Saturday, 03 July, 2021
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अकसर ही यह देखने को मिला है कि पश्चिमी मीडिया भारत की छवि खराब करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता है, फिर चाहे वह कोविड हो, किसान आंदोलन हो, चीन के साथ सीमा विवाद हो या फिर भारत में होने वाले कोई दंगे हों। इस बार फिर ऐसा ही कुछ हुआ है, जिसकी सोशल मीडिया पर अवहेलना हो रही है।

दरअसल अपने जॉब कंटेंट को लेकर अमेरिका का मशहूर अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) विवादों में है। सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं के मुताबिक, न्यूयॉर्क टाइम्स भारत में ऐसे पत्रकार ढूंढ रहा है, जो दुष्प्रचार का एजेंडा चलाने में उसकी पूरी मदद कर सके और इसके लिए उसने आवेदन आमंत्रित किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अखबार ने 1 जुलाई 2021 को लिंक्डइन पर जॉब पोस्ट की। ये जॉब दिल्ली में साउथ एशिया बिजनेस संवाददाता के लिए है। इस पोस्ट में हायरिंग की शर्तें बेहद आपत्तिजनक हैं, जिसे देखकर ऐसा लगता है जैसे बिना हिंदू विरोधी हुए या फिर एंटी मोदी हुए वहां जॉब पाना बेहद मुश्किल है। 

आवेदन में लिखा है कि अभ्यर्थी ऐसा हो जो भारत सरकार के विरुद्ध लिख सके और सत्ता बदली की उनकी कोशिशों में अपना योगदान दे सके। पत्रकारों के लिए दिए गए आवेदन में 'एंटी मोदी' के साथ-साथ 'एंटी इंडिया' और 'हिंदू विरोधी' सोच उजागर की गई है।

इस पोस्ट में यह भी लिखा गया है कि वैसे तो भारत जनसंख्या के मामले में चीन को टक्कर दे रहा है, लेकिन फिर भी विश्व मंच पर बड़ी आवाज बनने की महत्वाकांक्षा रखे हुए है।

इसमें आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चीन के खिलाफ कार्रवाई को भारत का एक ड्रामा कहा गया है जो उनके मुताबिक सीमा और राष्ट्रीय राजधानियों के भीतर चल रहा है।

विवादित जॉब पोस्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के पीएम मोदी देश के हिंदू बहुमत पर केंद्रित होकर आत्मनिर्भर भारत और मजबूत राष्ट्रवाद की वकालत करते हैं। इस लाइन को लेकर भी अब सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या न्यूयॉर्क टाइम्स को ये दिक्कत है कि भारत आत्मनिर्भर हो रहा है या ये समस्या है कि पीएम भारत को आत्मनिर्भर बनाने में प्रयासरत हैं और वो चीन से घटते व्यापार से तिलमिलाया हुआ है।

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि पिछले 4 सालों में न्यूयॉर्क टाइम्स को चीन की ओर से 50 हजार डॉलर के विज्ञापन मिले हैं। इसीलिए चीन और उसके हमदर्द न्यूयॉर्क टाइम्स को भारत से इतना दर्द है।   

मालूम हो कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की उपलब्धि को न्यूयॉर्क टाइम्स हमेशा खारिज करता रहा है। भारत के महत्वाकांक्षी स्पेस कार्यक्रम के बाद NYT ने एक नस्लवादी कार्टून छाप दिया था और बाद में इसके लिए माफी भी मांगी थी।

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200 साल का हुआ यह समाचार पत्र, मुंबई से है खास जुड़ाव

देश का सबसे पुराना समाचार पत्र ‘मुंबई समाचार’ (Mumbai Samachar) ने अपनी स्थापना के 200वें साल में प्रवेश कर लिया है

Last Modified:
Thursday, 01 July, 2021
Newspaper

देश का सबसे पुराना समाचार पत्र ‘मुंबई समाचार’ (Mumbai Samachar) ने अपनी स्थापना के 200वें साल में प्रवेश कर लिया है। दक्षिण मुंबई में ‘फोर्ट’ परिसर के बीचों-बीच स्थित ‘रेड हाउस’ नामक एक गहरे लाल रंग की इमारत में इस अखबार का दफ्तर है। इस अखबार को 1822 में पारसी विद्वान फर्दुनजी मर्जबान (Fardoonji Murazban) ने शुरू किया था। बताया जाता है कि यह देश का सबसे पुराना लगातार प्रकाशित होने वाला अखबार है।

इसे ‘बॉम्बे समाचार’ के नाम से एक साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू किया गया था। उस समय इसे पाठकों को मुख्य रूप से जहाजों की आवाजाही और वस्तुओं के बारे में सूचित करने के लिए शुरू किया गया था और धीरे-धीरे यह ऐसे समाचार पत्र के रूप में विकसित हो गया, जिसमें व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। शुरुआत के 10 वर्ष तक एक साप्ताहिक समाचार पत्र रहा, इसके बाद इसे द्वि-साप्ताहिक और 1855 से दैनिक कर दिया गया। तमाम हाथों से होते हुए 1933 में इस अखबार का संचालन कामा फैमिली के हाथों में आया। समाचार पत्र के निदेशक होर्मसजी कामा (Hormusji Cama) का कहना है कि अखबार ने 20 साल पहले एक शोध किया और पाया कि यह भारत का सबसे पुराना प्रकाशन है और दुनिया का चौथा सबसे पुराना प्रकाशन है, जो अब भी काम कर रहा है। उन्होंने कहा, 'जब तक आपकी विषय वस्तु की मांग है, तब तक आप टिके रहेंगे।' उन्होंने कहा, ‘एक समाचार पत्र के तौर पर हम 200 वर्षों से जीवित हैं। यह गर्व की बात है। आप जानते हैं कि हममें से कोई भी, यहां तक ​​कि प्रिंट मीडिया भी नहीं बचेगा। लेकिन उम्मीद है कि मुंबई समाचार अपने 300 साल भी पूरे करेगा।’   

गैर-लाभकारी निजी समाचार सहकारी संगठन ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (पीटीआई) के निदेशक मंडल के सदस्य कामा ने बताया कि कई कारणों से अखबार ने अपने कवर की कीमत बढ़ाकर 10 रुपए प्रति कॉपी कर दी और यह सिर्फ सबसे पुराना ही नहीं, बल्कि कोरोना वायरस महामारी के बीच सबसे महंगे अखबारों में से भी एक है।

उन्होंने कहा कि महामारी से पहले इसकी बिक्री 1.5 लाख थी, जिसमें भले ही गिरावट आई है, लेकिन इसके पाठकों की बदौलत यह उन कुछ समाचार पत्रों में शामिल है, जिन्होंने वित्त वर्ष 2020-21 में लाभ अर्जित किया।

कामा ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव को सीमित करने के लिए मुंबई समाचार ने अपने कवर की कीमत में दो रुपए की वृद्धि की, पृष्ठों की संख्या कम कर दी और वरिष्ठ प्रबंधन के वेतन में कटौती की। उन्होंने बताया कि समाचार पत्र के 150 कर्मियों में से किसी एक को भी वैश्विक महामारी के दौरान नौकरी से निकाला नहीं गया।

वर्तमान में, मुंबई के अलावा चार अन्य केंद्रों में भी अखबार का एक दैनिक संस्करण निकालते हैं। मुंबई समाचार एक पंचांग (ज्योतिषीय पंचांग) भी प्रकाशित करता है।

इस बारे में अखबार के एडिटर नीलेश दवे (Nilesh Dave) का कहना है कि मुंबई समाचार का हिस्सा बनना उनके जीवन का सपना रहा है। वर्ष 2003 में इस अखबार को जॉइन करने वाले दवे का कहना है, ‘महामारी के दौरान प्रिंट इंडस्ट्री को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। लोगों का भरोसा आज भी अखबारों पर कायम है, क्योंकि प्रिंट ही ऐसा माध्यम है, जहां पर आप फेक न्यूज नहीं फैला सकते हैं।’

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26 साल पुराना अखबार हुआ बंद, लोगों ने यूं दी विदाई

गुरुवार को इस अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया गया, तो वहीं इसके एक संपादकीय लेखक को रविवार की रात हवाईअड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया

Last Modified:
Monday, 28 June, 2021
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हॉन्गकॉन्ग का 26 साल पुराना लोकतंत्र समर्थक अखबार एप्पल डेली (Apple Daily) बंद हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को उसका आखिरी संस्करण प्रकाशित हुआ। स्टाफ का उत्साह बढ़ाने के लिए लोग बारिश के बीच रात से ही अखबार के दफ्तर के बाहर पहुंचने लगे थे। देखते ही देखते सुबह 8 बजे तक अखबार की 10 लाख प्रतियां बिक गईं।

एप्पल डेली के लास्ट एडिशन में फ्रंट पेज पर एक स्टाफ के समर्थकों की तरफ हाथ हिलाते हुए फोटो थी, जिसमें इसकी हेडलाइन थी- ‘हॉन्गकॉन्ग निवासियों ने बारिश में दर्द भरा अलविदा कहा।’ वहीं, अखबार को देशभर के लोगों ने भावनात्मक विदाई दी।

बता दें कि ये अखबार हर दिन 80 हजार प्रतियां प्रकाशित करता था। ग्लोबल टाइम्स से अखबार के ग्राफिक्स डिजाइनर डिक्शन एनजी ने कहा- ‘आज हमारा अंतिम दिन और ये आखिरी संस्करण है. इसके खत्म होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि हॉन्गकॉन्ग में प्रेस की स्वतंत्रता खत्म हो रही है।’

गुरुवार को इस अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया गया, तो वहीं इसके एक संपादकीय लेखक को रविवार की रात हवाईअड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह शहर से जाने का प्रयास कर रहे थे।

स्थानीय समाचार-पत्र ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ और ऑनलाइन समाचार संगठन ‘सिटिजन न्यूज’ ने अज्ञात सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि संपादकीय लेखक फंग वाई कोंग को राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए विदेशी साठगांठ करने के संदेह पर गिरफ्तार किया गया।

स्थानीय मीडिया में आई खबरों के अनुसार फंग को जब गिरफ्तार किया गया उस वक्त वह संभवत: ब्रिटेन के लिए रवाना हो रहे थे। पुलिस ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत रविवार रात हवाईअड्डे पर 57 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था लेकिन उसकी पहचान नहीं बताई।

फंग दो हफ्तों के भीतर गिरफ्तार किए गए एप्पल डेली के सातवें कार्यकारी है। हॉन्गकॉन्ग के अधिकारी अर्ध स्वायत्त शहर में असहमति की आवाजों को दबा रहे हैं, शहर की अधिकतर प्रख्यात लोकतंत्र समर्थक हस्तियों को गिरफ्तार कर रहे हैं और विधायिका से विपक्षी आवाजों को बाहर रखने के लिए हॉन्गकॉन्ग के चुनाव कानूनों में सुधार कर रहे हैं।

वहीं, इस अखबार के बंद होने पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) ने इसे हॉन्गकॉन्ग और दुनियाभर में मीडिया की आजादी के लिए एक दुखद दिन करार दिया। व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्र भाषण को दंडित करने वाले कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के माध्यम से गिरफ्तारी, धमकियों और जबरदस्ती करके बीजिंग ने स्वतंत्र मीडिया को दबाने व असहमतिपूर्ण विचारों को चुप कराने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग किया है।

राष्ट्रपति बाइडन ने कहा, ‘स्वतंत्र मीडिया लचीला और समृद्ध समाजों में एक अहम भूमिका निभाता है. पत्रकार सच बोलने वाले होते हैं जो नेताओं को जवाबदेह ठहराते हैं और सूचनाओं को स्वतंत्र रूप से मुहैया कराते रहते हैं. अब इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक हॉन्गकॉन्ग में और दुनिया भर में उन जगहों पर है जहां लोकतंत्र खतरे में है।’

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन से स्वतंत्र प्रेस को निशाना बनाना बंद करने और हिरासत में लिए गए पत्रकारों व मीडिया अधिकारियों को रिहा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का काम अपराध नहीं है। बाइडन ने कहा, ‘हॉन्गकॉन्ग में लोगों को प्रेस की स्वतंत्रता का अधिकार है। इसके बजाय, बीजिंग बुनियादी स्वतंत्रता से इनकार कर रहा है और हॉन्गकॉन्ग की स्वायत्तता व लोकतांत्रिक संस्थानों और प्रक्रियाओं पर हमला कर रहा है, जो इसके अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के साथ असंगत है।’ 

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महामारी के खिलाफ ‘जंग’ में यूं अपनी भागीदारी निभा रहा प्रभात खबर

बिहार, झारखंड और कोलकाता में किया गया सात लाख से ज्यादा फेस मास्क का वितरण, अखबार की ओर से मुफ्त वैक्सीनेशन कैंप भी लगाए जा रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 28 June, 2021
Prabhat Khabar

पूर्वी भारत का प्रमुख हिंदी दैनिक प्रभात खबर (Prabhat Khabar) इस महामारी के दौरान समाज के सभी वर्गों के साथ खड़ा है और अपने सामाजिक दायित्व को निभाते हुए बिहार और झारखंड के लोगों के लिए सुरक्षा और कल्याण को समर्थन व बढ़ावा देने के लिए अपना योगदान दे रहा है।

महामारी के दौरान अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाते हुए प्रभात खबर लोगों को फेस मास्क के महत्व के बारे में जागरूक कर रहा है। यही नहीं, प्रभात खबर द्वारा पाठकों को फेस मास्क का वितरण भी किया जा रहा है। इसके तहत 22 जून को बिहार के समस्त एडिशंस में और 27 जून को झारखंड व कोलकाता में अपने पाठकों के लिए सात लाख से ज्यादा फेस मास्क का वितरण किया गया।

यही नहीं, इस दौरान प्रभात खबर द्वारा अपने हॉकर्स के परिवारों के लिए मुफ्त में राशन का वितरण भी किया गया। इस दौरान कोविड-19 के संक्रमण से बचाने के लिए प्रभात खबर ने अपने सभी पब्लिशिंग सेंटर्स पर समस्त एम्प्लॉयीज, हॉकर्स और पार्टनर्स को मुफ्त में सैनिटाइजर्स और फेस मास्क भी उपलब्ध कराए। यही नहीं, देश में आक्सीजन कंसंट्रेटर की कमी को देखते हुए बिहार और झारखंड के सरकारी अस्पतालों में इन्हें उपलब्ध कराया गया। प्रभात खबर द्वारा उपलब्ध कराए गए आक्सीजन कंसंट्रेटर्स की मदद से तमाम लोगों की जिंदगी बचाई जा सकी।   

इसके साथ ही अखबार द्वारा पाठकों, हॉकर्स और पार्टनर्स व उनके परिवारों के लिए समय-समय पर अपने सभी पब्लिकेशन सेंटर्स और यूनिट्स में वैक्सीनेशन कैंप भी लगाए जा रहे हैं। इस बारे में प्रभात खबर की ओर से कहा गया है कि 37 वर्षों से अखबार समाज के साथ हर कदम पर खड़ा रहा है और भविष्य में भी इस तरह अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन करता रहेगा।

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नए स्वरूप में नजर आएंगी IIMC की ये दो मैगजींस

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इन दोनों शोध पत्रिकाओं को किया रीलॉन्च

Last Modified:
Friday, 25 June, 2021
Relaunch

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को 'भारतीय जनसंचार संस्थान' (IIMC) की प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं 'कम्युनिकेटर' और 'संचार माध्यम' को रिलांच किया। कार्यक्रम में विशेष तौर पर मौजूद 'आईआईएमसी' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि 'कम्युनिकेटर' का प्रकाशन वर्ष 1965 से और 'संचार माध्यम' का प्रकाशन वर्ष 1980 से किया जा रहा है।

यूजीसी-केयर लिस्ट में शामिल इन शोध पत्रिकाओं में संचार, मीडिया और पत्रकारिता से संबंधित सभी प्रकार के विषयों पर अकादमिक शोध और विश्लेषण प्रकाशित किए जाते हैं। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जनसंचार और पत्रकारिता पर प्रकाशित पुस्तकों के अलावा सामाजिक कार्य, एंथ्रोपोलोजी, कला आदि पर प्रकाशित पुस्तकों की समीक्षा भी पत्रिकाओं में प्रकाशित की जाती है। इसके अलावा ऐसे तथ्यपूर्ण शोध-पत्र भी शामिल किये जाते हैं, जिनका संबंध किसी नई तकनीक के विकास से है।

बता दें कि ‘आईआईएमसी’ के प्रकाशन विभाग द्वारा 'कम्युनिकेटर' का प्रकाशन वर्ष में चार बार और 'संचार माध्यम' का प्रकाशन दो बार किया जाता है। 'कम्युनिकेटर' के संपादक प्रो. (डॉ.) वीरेंद्र कुमार भारती और 'संचार माध्यम' के संपादक प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार हैं।

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Pioneer अखबार के प्रिंटर एंड पब्लिशर के पद से चंदन मित्रा ने दिया इस्तीफा

वरिष्ठ पत्रकार चंदन मित्रा ने ’पायनियर’ (Pioneer) अखबार के प्रिंटर और पब्लिशर के पद से इस्तीफा दे दिया है।

Last Modified:
Friday, 25 June, 2021
Chandan Mitra

वरिष्ठ पत्रकार चंदन मित्रा ने ’पायनियर’ (Pioneer) अखबार के प्रिंटर और पब्लिशर के पद से इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह ’हरनंदन पब्लिकेशंस’ (Harnandan Publications) के नरेंद्र कुमार ने ले ली है। बताया जाता है कि चंदन मित्रा ने खुद ‘नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल’ (The National Company Law Tribunal) द्वारा 19 जनवरी 2021 को नियुक्त आईआरपी (Interim Resolution Professional) रंजीत कुमार को नरेंद्र कुमार का नाम सुझाया था।  

बता दें कि ’पायनियर ’ दिवालियेपन की कार्यवाही का सामना कर रहा है। 19 जनवरी 2021 को ’एनसीएलटी’ ने ’पायनियर’ अखबार को प्रिंट और पब्लिश करने वाली कंपनी ‘CMYK Printech Limited’ के बोर्ड को निलंबित कर इसके स्थान पर आईआरपी को नियुक्त कर दिया था। इसके बाद चंदन मित्रा ने कंपनी के बोर्ड को निलंबित करने के ‘एनसीएलटी; के आदेश के खिलाफ ‘अपीलीय न्यायाधिकरण’ (appellate tribunal) में अपील की थी।

हालांकि, 22 जून 2021 को चंदन मित्रा ने अपनी अपील वापस ले ली, जिससे लेनदारों की समिति यानी कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) के गठन का मार्ग लगभग साफ हो गया है। हालांकि, इस मामले में चंदन मित्रा के बेटे की अपील अभी लंबित है।

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