अब कतारों में खड़े हैं, लेने झलक बस आपकी

इस कविता के माध्यम से लेखिका ने शिकायत व मनुहार भरे लहजे में मन के भावों को व्यक्त करने का प्रयास किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 October, 2019
Last Modified:
Tuesday, 01 October, 2019
Kamini Kamayani


डॉ. कामिनी कामायनी।। इस मसर्रत का सबब नजरे इनायत आपकी, कितने मुद्दत से मिले, खातिर करूं क्या आपकी। क्या मुनासिब ये नहीं कि पहलूनशीं हम भी बनें,...
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