भारत में पायरेसी एक बड़ी समस्या है। फिल्म सिनेमाघरों में पहुंचे उससे पहले ही उसका HD प्रिंट मोबाइल स्क्रीन पर घूमने लगता है।
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Vikas Saxena
कितना बड़ा है यह नुकसान?
EY और इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) की रिपोर्ट "The Rob Report" (अक्टूबर 2024) के अनुसार, 2023 में भारत की पायरेसी अर्थव्यवस्था का आकार ₹22,400 करोड़ था। यह आंकड़ा भारत के मीडिया एवं एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की कुल आय में चौथे सबसे बड़े हिस्से के बराबर है। इसमें से ₹13,700 करोड़ का नुकसान सिनेमा हॉल की पायरेसी से और ₹8,700 करोड़ का नुकसान सीधे OTT कंटेंट की पायरेसी से हुआ। इसके अलावा सरकार को GST के रूप में ₹4,300 करोड़ का संभावित नुकसान अलग से हुआ।
Media Partners Asia (MPA), IP House और Confederation of Indian Industry (CII) की संयुक्त रिपोर्ट (मई 2025) के अनुसार, 2024 में करीब 9 करोड़ (90 मिलियन) भारतीय यूजर्स ने पायरेटेड वीडियो कंटेंट देखा, जिससे लगभग 1.2 अरब डॉलर (करीब ₹10,000 करोड़) का राजस्व नुकसान हुआ। यह भारत के वैध वीडियो उद्योग की कुल आय का 10% है।
OTT सेक्टर पर बात करें तो उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि सिर्फ OTT मार्केट को हर साल ₹8,000 से ₹11,000 करोड़ का नुकसान पायरेसी से होता है। यह OTT कंटेंट क्रिएटर्स और फंडर्स की संभावित आय का 10 से 25 प्रतिशत है। Broadcasters और distributors की मानें तो पायरेसी उनकी कुल आय का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खा जाती है।
अगर यही रफ्तार जारी रही तो 2029 तक पायरेसी यूजर्स की संख्या 15.8 करोड़ तक पहुंच सकती है और संचयी नुकसान 2.4 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। MUSO की 2024 Piracy Trends and Insights Report (जून 2025) के अनुसार भारत अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पायरेसी ट्रैफिक स्रोत है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक पायरेसी ट्रैफिक में भारत की हिस्सेदारी 8.12% है।
टेलीग्राम- पायरेसी का नया अड्डा
कुछ साल पहले तक पायरेसी का मतलब था Torrent साइट्स और Illegal Streaming Websites। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। आज टेलीग्राम पायरेसी का सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक जरिया बन चुका है।
पायरेसी का एक और बड़ा जरिया है Illegal Streaming Sites- ये फिशिंग साइट्स, OTT प्लेटफॉर्म्स की नकल करके यूजर्स को आकर्षित करती हैं और मुफ्त में पायरेटेड कंटेंट दिखाती हैं। AI आधारित टूल से ये साइट्स DRM (Digital Rights Management) को बाइपास करने की कोशिश करती हैं।
रिलीज के कुछ घंटों में लीक-"Day 1 Piracy"
पायरेसी का सबसे खतरनाक रूप है "Day 1 Piracy"- यानी फिल्म या वेब सीरीज रिलीज होते ही उसे इंटरनेट पर फ्री में उपलब्ध करा देना।
Pushpa 2: The Rule (दिसंबर 2024): अल्लू अर्जुन की इस ब्लॉकबस्टर फिल्म का लीक उसी दिन शुरू हो गया जब यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई यानी 5 दिसंबर 2024 को। TamilYogi, Ibomma, Tamilblasters, 9xMovies, Bolly4u समेत दर्जनों साइट्स पर यह 480p से लेकर 1080p तक कई रिजॉल्यूशन में उपलब्ध हो गई। इसके बाद 20 दिसंबर को Ultra HD प्रिंट भी लीक हो गया यानी रिलीज के सिर्फ 15 दिन में। पहले हफ्ते में ही इस फिल्म ने बहुत बड़ा कलेक्शन किया और तेजी से ₹1,000 करोड़ क्लब के करीब पहुंची , फिर भी रिलीज के दिन से ही पायरेसी जारी रही।
OTT कंटेंट की "Day 1 Piracy" और भी खतरनाक है। Ultra Media & Entertainment Group के COO राजत अग्रवाल के अनुसार, पायरेटेड कंटेंट अक्सर हाई-प्रोफाइल रिलीज के कुछ घंटों के अंदर ऑनलाइन आ जाता है। ChanaJor के फाउंडर और CEO प्रताप जैन कहते हैं कि DRM होने के बावजूद कंटेंट रिकॉर्ड करके अपलोड हो जाता है और लिंक Takedown Teams के एक्शन लेने से पहले ही लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं।
कौन देखता है पायरेटेड कंटेंट?
EY-IAMAI की रिपोर्ट के अनुसार भारत के 51 प्रतिशत मीडिया उपभोक्ता पायरेटेड सोर्स से कंटेंट देखते हैं। Streaming Services पायरेसी में सबसे आगे है- 63% पायरेटेड कंटेंट Streaming के जरिए देखा जाता है, इसके बाद Mobile Apps का स्थान है (16%), और Social Media व Torrents मिलकर 21% हिस्सा रखते हैं।
पायरेटेड कंटेंट देखने वाले 76 प्रतिशत लोग 19 से 34 साल की उम्र के हैं। महिलाएं ज्यादातर OTT Shows देखना पसंद करती हैं जबकि पुरुष पुरानी फिल्में और क्लासिक्स पायरेटेड रूप में देखते हैं। 40% पायरेटेड कंटेंट हिंदी में देखा जाता है, जबकि अंग्रेजी कंटेंट की हिस्सेदारी 31% है। एक औसत भारतीय हर हफ्ते 9 घंटे पायरेटेड कंटेंट देखने में बिताता है।
दिलचस्प बात यह है कि 64 प्रतिशत पायरेटेड कंटेंट उपभोक्ताओं ने माना कि अगर उन्हें बिना पैसे के, विज्ञापनों के साथ कंटेंट मिल जाए तो वे अधिकृत चैनल्स (authorized चैनल्स) पर जाएंगे। 70 प्रतिशत ने कहा कि वे OTT सब्सक्रिप्शन नहीं खरीदना चाहते। Tier-I शहरों के यूजर पुरानी फिल्में पायरेटेड तरीके से देखते हैं जबकि Tier-II शहरों में हाल ही में रिलीज हुई फिल्में पायरेट की जाती हैं।
सरकार के नियम क्या कहते हैं?
भारत में पायरेसी रोकने के लिए कई कानून हैं, लेकिन हाल के सालों में इन्हें और सख्त किया गया है। खास तौर पर 2023 में हुए बदलाव के बाद अब नियम पहले से ज्यादा मजबूत हो गए हैं।
सबसे अहम है Cinematograph (Amendment) Act, 2023। इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति थिएटर में बैठकर मोबाइल या किसी भी डिवाइस से फिल्म रिकॉर्ड करता है, तो वह सीधा अपराध माना जाएगा। इसी तरह किसी फिल्म की बिना इजाजत कॉपी दिखाना या शेयर करना भी गैरकानूनी है।
इसमें सजा भी तय है- कम से कम 3 महीने से लेकर 3 साल तक की जेल हो सकती है। जुर्माना कम से कम ₹3 लाख और फिल्म की कुल लागत का 5% तक हो सकता है। यानी अगर फिल्म ₹500 करोड़ की है, तो जुर्माना ₹25 करोड़ तक जा सकता है।
इसके अलावा Information Technology Act, 2000 भी पायरेसी रोकने में अहम भूमिका निभाता है। इसके तहत सरकार टेलीग्राम या इंटरनेट कंपनियों जैसे प्लेटफॉर्म्स को आदेश दे सकती है कि वे गैरकानूनी कंटेंट हटाएं। अब तो यह भी तय किया गया है कि ऐसे कंटेंट को 48 घंटे के अंदर हटाना होगा।
वहीं Copyright Act, 1957 के तहत अगर कोई जानबूझकर पायरेसी करता है, तो उसे 6 महीने से 3 साल तक की जेल और ₹50,000 से ₹2 लाख तक जुर्माना हो सकता है। अगर कोई बार-बार ऐसा करता है, तो सजा और बढ़ जाती है—कम से कम 1 साल की जेल और ₹1 लाख तक का जुर्माना।
साथ ही, नए IT नियमों के मुताबिक अगर किसी प्लेटफॉर्म को कोर्ट या सरकार की तरफ से नोटिस मिलता है, तो उसे 36 घंटे के अंदर कार्रवाई करनी होती है।
सरकार और कोर्ट की बड़ी कार्रवाइयां
मार्च 2026- भारत की सबसे बड़ी टेलीग्राम कार्रवाई
11 मार्च 2026 को भारत सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी एकल एंटी-पायरेसी कार्रवाई की। IT Act की Section 79(3)(b) के तहत टेलीग्राम को 3,142 पायरेसी चैनल्स बंद करने का आदेश दिया गया। ये चैनल्स JioCinema और Amazon Prime Video समेत कई OTT प्लेटफॉर्म्स का अनअधिकृत कंटेंट शेयर (anauthorized कंटेंट share) कर रहे थे। इसके साथ ही Internet Service Providers के जरिए करीब 800 पायरेसी वेबसाइट्स भी ब्लॉक की गईं। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने इसकी जानकारी लोकसभा में दी। यह सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत बड़े स्तर पर की गई पहली प्रवर्तन कार्रवाई थी।
दिल्ली हाई कोर्ट- Dynamic+ Injunction
पायरेसी से निपटने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक खास तरीका अपनाया, जिसे “Dynamic Injunction” कहा जाता है। इसकी शुरुआत 2019 में हुई थी।
इसका फायदा यह है कि अगर किसी पायरेसी वेबसाइट को ब्लॉक करने का आदेश मिल जाता है, तो बाद में उसी वेबसाइट के नए-नए वर्जन (mirror sites) को ब्लॉक कराने के लिए बार-बार कोर्ट जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ नई वेबसाइट का लिंक (URL) बताकर उसे ब्लॉक कराया जा सकता है।
अब 2026 में इसे और मजबूत बनाते हुए “Dynamic+ Injunction” शुरू किया गया है। इस नए सिस्टम में कंटेंट बनते ही उसकी सुरक्षा शुरू हो जाती है। यानी अगर कोई नई पायरेसी वेबसाइट बनती है, तो उसे जल्दी से ब्लॉक किया जा सकता है, चाहे उसका नाम कुछ भी हो। इंटरनेट कंपनियों (ISP) को ऐसे नए डोमेन 72 घंटे के अंदर बंद करने होते हैं।
इसमें बड़ी कंपनियों जैसे Warner Bros., Netflix, Disney, Apple और Crunchyroll को राहत मिली है। IPL 2026 के दौरान भी इस नियम का इस्तेमाल हुआ, जहां लाइव मैच की पायरेसी करने वाली वेबसाइट्स और ऐप्स को तुरंत (real-time) ब्लॉक किया गया।
जमीनी हकीकत- कानून बने, असर कम
यहां सबसे कड़वा सच सामने आता है। नियम मजबूत हुए हैं, कोर्ट सक्रिय है, सरकार ने March 2026 में ऐतिहासिक कार्रवाई भी की, लेकिन जमीनी स्तर पर पायरेसी में कोई खास कमी नहीं आई।
MPA-CII-IP House की रिपोर्ट खुद कहती है कि कानूनी ढांचे मौजूद हैं, लेकिन स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रवर्तन एजेंसियों में कॉपीराइट कानूनों को प्राथमिकता देने की इच्छाशक्ति कम है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि Cinematograph Act में कैमकॉर्डर से शूट करने वाले को पकड़ने का प्रावधान तो है, लेकिन असल में "किसने लीक किया" यह पता लगाना बेहद मुश्किल है और अभियोजन पक्ष शायद ही कभी यह साबित कर पाता है।
टेलीग्राम पर 3,142 चैनल्स बंद हुए, लेकिन उनकी जगह नए चैनल्स तुरंत बन जाते हैं। 800 पायरेसी वेबसाइट्स ब्लॉक हुईं, लेकिन वे नए डोमेन के साथ वापस आ गईं। Dynamic Injunctions काम करते हैं, लेकिन VPNs और Proxies के जरिए लोग इन्हें bypass कर लेते हैं। VPN भारत में legal है, इसका इस्तेमाल कोई अपराध नहीं, लेकिन पायरेटेड कंटेंट तक पहुंचने के लिए VPN का उपयोग उतना ही illegal है जितना सीधे पायरेटेड साइट से देखना।
इंडस्ट्री विशेषज्ञ मानते हैं कि पायरेसी का असली हल है- OTT Theatrical Window को कम रखना। तमिल फिल्म प्रोड्यूसर्स काउंसिल (TFPC) ने अप्रैल 2026 में एक प्रस्ताव पास किया कि मौजूदा 28 दिन (4 हफ्ते) की OTT विंडो जारी रहनी चाहिए। Theatre owners की Association ने इसे बढ़ाकर 56 दिन (8 हफ्ते) करने की मांग की थी, जिसका TFPC ने विरोध किया। TFPC का तर्क है: OTT window जितनी लंबी होगी, पायरेसी की विंडो उतनी बड़ी होगी। अगर लीगल स्ट्रीम जल्दी नहीं आती, तो दर्शक पायरेटेड कंटेंट की तरफ जाते हैं।
आगे क्या?
MUSO की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, JioFiber और Airtel Xstream के जरिए एक साथ (बंडल में) OTT सर्विस देना पिछले दो सालों में पायरेसी कम करने वाले गिने-चुने असरदार कदमों में से एक रहा है। Jio करीब 16 और Airtel 25 से अधिक OTT प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच देता है। जब कंटेंट सस्ता और आसानी से लीगल रूप में मिलता है, तो पायरेसी कम होती है।
MPA-CII रिपोर्ट के मुताबिक, अगर एंटी-पायरेसी के उपाय सही तरीके से लागू किए जाएं, तो 2025 से 2029 के बीच 1,58,000 से ज्यादा सीधी और परोक्ष नौकरियां पैदा हो सकती हैं। साथ ही, इंडस्ट्री में करीब 50 करोड़ डॉलर (0.5 बिलियन डॉलर) का अतिरिक्त कंटेंट निवेश भी आ सकता है। सरकार की दृष्टि से, भारत की M&E इंडस्ट्री 2025 में 9% ग्रोथ के साथ ₹2.78 लाख करोड़ तक पहुंची (FICCI-EY Report, मार्च 2026), लेकिन पायरेसी इस ग्रोथ को लगातार कमजोर करती है।
OTT और टेलीग्राम पायरेसी आज भारत के एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। ₹22,400 करोड़ का सालाना नुकसान, 9 करोड़ पायरेसी यूजर्स, दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा पायरेसी बाजार, और रिलीज के कुछ घंटों में लीक होती फिल्में- यह सब मिलकर एक ऐसी समानांतर इकनॉमी बना रहे हैं जो न सिर्फ प्रोड्यूसर्स और प्लेटफॉर्म्स को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि लेखकों, तकनीशियनों और हजारों इंडस्ट्री वर्कर्स की रोजी-रोटी भी छीनती है।
मार्च 2026 की टेलीग्राम कार्रवाई और दिल्ली हाई कोर्ट के Dynamic+ Injunction जैसे कदम सही दिशा में हैं। लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर कानून लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं बढ़ेगी, जब तक कानूनी कंटेंट सस्ता और आसानी से उपलब्ध नहीं होगा, और जब तक लोगों में जागरूकता नहीं आएगी- तब तक यह लड़ाई अधूरी ही रहेगी।
Sun TV Network ने तेजी से बढ़ते माइक्रो-ड्रामा और शॉर्ट-फॉर्म एंटरटेनमेंट सेगमेंट में कदम रखा है। कंपनी ने अपने मौजूदा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Sun NXT के अंदर ही Sun NXT Shorts लॉन्च किया है।
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Samachar4media Bureau
Sun TV Network ने तेजी से बढ़ते माइक्रो-ड्रामा और शॉर्ट-फॉर्म एंटरटेनमेंट सेगमेंट में कदम रखा है। कंपनी ने अपने मौजूदा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Sun NXT के अंदर ही Sun NXT Shorts लॉन्च किया है। इसका फोकस खास तौर पर मोबाइल पर कंटेंट देखने वाले Gen Z और युवा दर्शकों पर है।
Sun NXT Shorts में ओरिजिनल शॉर्ट-फॉर्म सीरीज के साथ डब की गई इंटरनेशनल सीरीज और Sun TV Network की पुरानी फिल्मों व टीवी सीरियल्स को नए शॉर्ट फॉर्मेट में पेश किया जाएगा।
चार भाषाओं में मिलेगा कंटेंट
Sun NXT Shorts पर कंटेंट तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में उपलब्ध होगा। कंपनी का कहना है कि इसका मकसद ऐसे दर्शकों तक पहुंचना है जो मोबाइल, टीवी और दूसरे डिजिटल स्क्रीन पर कम समय में मनोरंजन कंटेंट देखना पसंद करते हैं।
खास बात यह है कि Sun TV Network ने इसके लिए कोई अलग ऐप लॉन्च नहीं किया है। कंपनी ने Sun NXT के अंदर ही Shorts सेक्शन शुरू किया है। इससे उसे अपने मौजूदा सब्सक्राइबर्स और विशाल कंटेंट लाइब्रेरी का फायदा मिलेगा।
पुराने कंटेंट को भी मिलेगा नया अंदाज
Sun TV Network अपने पुराने कंटेंट को भी नए फॉर्मेट में पेश करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी की लाइब्रेरी में मौजूद फिल्मों और लोकप्रिय Sun TV सीरियल्स को रीमास्टर, रिसाइज और री-एडिट किया जाएगा। लंबी फिल्मों और टीवी एपिसोड को छोटे और तेज रफ्तार वाले एपिसोड में बदला जाएगा, ताकि दर्शक इन्हें कम समय में आसानी से देख सकें।
Sun NXT पर फिलहाल 65,000 घंटे से ज्यादा का मल्टीलिंगुअल कंटेंट मौजूद है। ऐसे में कंपनी के पास Shorts के लिए कंटेंट का एक बड़ा भंडार पहले से उपलब्ध है।
‘दर्शक कंटेंट अलग तरीके से देख रहे हैं’
Sun TV Network की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर काव्या मारन ने कहा कि दर्शक सिर्फ ज्यादा कंटेंट नहीं देख रहे हैं, बल्कि उसे देखने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। अब लोग अलग-अलग स्क्रीन पर छोटे-छोटे समय में कंटेंट देखना पसंद कर रहे हैं और वे आसान व तेज अनुभव चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि Sun NXT Shorts इसी बदलते व्यूइंग पैटर्न को ध्यान में रखकर कंपनी की रणनीतिक पहल है।
भारत में बढ़ रहा है माइक्रो-ड्रामा का चलन
भारत में OTT और एंटरटेनमेंट कंपनियां तेजी से माइक्रो-ड्रामा और वर्टिकल शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट पर प्रयोग कर रही हैं। स्मार्टफोन पर कम समय में कंटेंट देखने की आदत बढ़ने के साथ इस तरह के फॉर्मेट की लोकप्रियता भी बढ़ रही है।
खास तौर पर युवा दर्शक छोटे और तेजी से आगे बढ़ने वाले वीडियो और एपिसोड पसंद कर रहे हैं। ऐसे में पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स के लिए भी यह अपने पुराने कंटेंट को नए तरीके से इस्तेमाल और कमाई करने का मौका बन गया है।
टीवी सीरियल्स और फिल्मों को छोटे एपिसोड में बदलने के अलावा कंपनियां मोबाइल दर्शकों के लिए नए ओरिजिनल शॉर्ट-फॉर्म शो भी तैयार कर रही हैं।
मारन ग्रुप से जुड़ी एक और माइक्रो-ड्रामा पहल
Sun TV Network का यह कदम ऐसे समय आया है जब KadhaiShorts नाम का एक मल्टीलिंगुअल माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म भी लॉन्च हो चुका है। इसे पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन के बेटे करण दयानिधि मारन ने शुरू किया है। इस तरह मारन ग्रुप से जुड़े कारोबार की ओर से शॉर्ट-फॉर्म एंटरटेनमेंट और माइक्रो-ड्रामा सेगमेंट में यह एक और अहम पहल है।
युवा दर्शकों को जोड़ने की कोशिश
Sun TV Network के पास क्षेत्रीय भाषाओं में बड़ा कंटेंट कलेक्शन और कई लोकप्रिय टीवी फ्रेंचाइजी हैं। कंपनी अब इसी ताकत का इस्तेमाल युवा दर्शकों को अपने साथ जोड़ने के लिए करना चाहती है।
Sun NXT Shorts के जरिए कंपनी पारंपरिक टीवी, Connected TV और मोबाइल स्क्रीन के बीच बदलते व्यूइंग पैटर्न को पकड़ने की कोशिश कर रही है। अगर दर्शकों को यह नया फॉर्मेट पसंद आता है, तो Sun TV Network के लिए अपने पुराने कंटेंट से नए दर्शक और नई कमाई दोनों हासिल करने का रास्ता खुल सकता है।
Netflix एक बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रहा है। The New York Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Netflix अपने ऐप पर दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की सर्विस भी उपलब्ध कराने की संभावना तलाश रहा है।
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Samachar4media Bureau
स्ट्रीमिंग की दुनिया में Netflix एक बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रहा है। The New York Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Netflix अपने ऐप पर दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की सर्विस भी उपलब्ध कराने की संभावना तलाश रहा है। इनमें Peacock और Fox One जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, अभी यह सिर्फ शुरुआती बातचीत और आंतरिक चर्चा के स्तर पर है। Netflix ने किसी भी प्लेटफॉर्म के साथ डील की पुष्टि नहीं की है।
Netflix का बदल सकता है मॉडल
अब तक Netflix का मुख्य फोकस अपने खुद के Originals और दूसरे लाइसेंस्ड कंटेंट को दर्शकों तक पहुंचाने पर रहा है। लेकिन नए मॉडल के तहत यूजर्स Netflix के ऐप से ही दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को सब्सक्राइब कर सकते हैं या उन प्लेटफॉर्म का कुछ कंटेंट Netflix के इंटरफेस पर देख सकते हैं।
अगर ऐसा होता है तो Netflix सिर्फ एक स्ट्रीमिंग सर्विस नहीं रहेगा, बल्कि कई स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को एक जगह लाने वाले मार्केटप्लेस की तरह काम कर सकता है।
यह मॉडल कुछ हद तक Amazon Prime Video और Roku के मॉडल जैसा होगा, जहां यूजर्स एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग स्ट्रीमिंग सर्विस को खोज और सब्सक्राइब कर सकते हैं।
Peacock और Fox One पर नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, Netflix की चर्चाओं में Peacock और Fox One का नाम सामने आया है। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि इनमें से किसी प्लेटफॉर्म के साथ Netflix की डील जल्द होने वाली है।
कंपनी किस तरह का कमर्शियल मॉडल अपनाएगी, यानी सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई कैसे बांटी जाएगी या दूसरे प्लेटफॉर्म की सर्विस Netflix ऐप में किस तरह दिखाई जाएगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
फ्रांस में पहले ही शुरू हो चुका है टेस्ट
Netflix इस तरह के मॉडल को पूरी तरह नया नहीं मान रहा है। कंपनी ने जून में फ्रांस में ब्रॉडकास्टर TF1 के लाइव चैनल और स्ट्रीमिंग कंटेंट को अपने ऐप में शामिल किया था।
Netflix के को-सीईओ ग्रेग पीटर्स ने जुलाई में कंपनी की अर्निंग्स कॉल के दौरान बताया था कि TF1 के साथ शुरुआती नतीजे अच्छे रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि अगर इस तरह की साझेदारी Netflix, उसके यूजर्स और पार्टनर्स के लिए फायदेमंद रहती है तो कंपनी दूसरे बाजारों में भी ऐसे मॉडल पर विचार कर सकती है।
बढ़ती स्ट्रीमिंग फीस के बीच बड़ा कदम
Netflix का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब दर्शकों के लिए स्ट्रीमिंग मार्केट काफी बिखर गया है। अलग-अलग कंटेंट के लिए लोगों को कई OTT प्लेटफॉर्म के सब्सक्रिप्शन लेने पड़ते हैं।
उदाहरण के लिए, Peacock ने हाल ही में अपने अलग-अलग प्लान की कीमतें बढ़ाई हैं। उसका Ad-supported Select प्लान अब 8.99 डॉलर प्रति महीने, प्रीमियम प्लान 12.99 डॉलर और प्रीमियम प्लस प्लान 19.99 डॉलर का हो गया है।
ऐसे में अगर Netflix एक ही ऐप के जरिए कई स्ट्रीमिंग सर्विस तक पहुंच देने लगता है तो यूजर्स के लिए कंटेंट ढूंढना और अलग-अलग सेवाओं को मैनेज करना आसान हो सकता है।
Netflix बना सकता है बड़ा Streaming Hub
Netflix लगातार अपने प्लेटफॉर्म को सिर्फ फिल्मों और सीरीज देखने की जगह से आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है। कंपनी भारत में भी अपने कंटेंट पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है और इस महीने साउथ इंडियन कंटेंट पर खास फोकस बढ़ाया है। इसके अलावा Netflix विज्ञापन कारोबार और यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने के दूसरे तरीकों पर भी काम कर रहा है।
फिलहाल दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को अपने ऐप में शामिल करने का विचार शुरुआती चरण में है। लेकिन अगर Netflix इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो उसका ऐप सिर्फ Netflix Originals और लाइसेंस्ड कंटेंट तक सीमित नहीं रहेगा। वह कई स्ट्रीमिंग सेवाओं को एक जगह लाने वाला बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है।
इससे Netflix का मुकाबला Amazon और Roku जैसे एक ही जगह पर कई स्ट्रीमिंग सेवाएं उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म से बढ़ सकता है। साथ ही, स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री में एक ही प्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा सेवाएं देने की होड़ भी तेज हो सकती है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) ने OTT प्लेटफॉर्म्स को ड्रग्स और नशीले पदार्थों से जुड़े सीन को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है।
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Samachar4media Bureau
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) ने OTT प्लेटफॉर्म्स को ड्रग्स और नशीले पदार्थों से जुड़े सीन को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने कहा है कि जब भी किसी OTT कंटेंट में नशीले पदार्थों के सेवन या इस्तेमाल को दिखाया जाए, उस दौरान दर्शकों को ड्रग्स के नुकसान के बारे में चेतावनी देना जरूरी होगा।
मंत्रालय ने 24 अगस्त 2026 को जारी एडवाइजरी में कहा कि यह चेतावनी साफ, पढ़ने योग्य और प्रमुख तरीके से दिखाई जानी चाहिए, ताकि दर्शक इसे आसानी से देख और समझ सकें।
स्क्रीन पर दिखाना होगा यह चेतावनी संदेश
OTT प्लेटफॉर्म्स को ड्रग्स के सेवन वाले सीन के दौरान यह चेतावनी दिखाने के लिए कहा गया है: “Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No to Drugs.” यानी इसका मतलब है कि अवैध नशीले पदार्थ स्वास्थ्य को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा का कारण बन सकते हैं। ड्रग्स को 'ना' कहें।
मंत्रालय के मुताबिक, चेतावनी का फॉन्ट, रंग और आकार ऐसा होना चाहिए, जिसे दर्शक आसानी से पढ़ सकें। साथ ही इसे स्क्रीन पर पर्याप्त समय तक दिखाना होगा, ताकि इसका संदेश प्रभावी तरीके से दर्शकों तक पहुंच सके।
2024 की एडवाइजरी का भी दिया हवाला
मंत्रालय ने अपनी नई एडवाइजरी में 26 नवंबर 2024 को जारी की गई पिछली एडवाइजरी का भी हवाला दिया है। उस समय OTT प्लेटफॉर्म्स को फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य कंटेंट में नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस के चित्रण को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी।
प्लेटफॉर्म्स से कहा गया था कि ऐसे कंटेंट में Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 (NDPS Act) के प्रावधानों का पालन किया जाए। इसके अलावा जहां जरूरी हो, वहां सही कंटेंट क्लासिफिकेशन, चेतावनी और डिस्क्लेमर भी दिए जाएं।
मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म्स को यह भी सलाह दी थी कि वे ड्रग्स के इस्तेमाल से होने वाले खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए पब्लिक हेल्थ मैसेज और डिस्क्लेमर को शामिल करने पर विचार करें।
OTT प्लेटफॉर्म्स के Code of Ethics का भी जिक्र
नई एडवाइजरी में मंत्रालय ने Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए बनाए गए Code of Ethics का भी उल्लेख किया है।
इसके मुताबिक, डिजिटल पब्लिशर्स को ऐसा कोई कंटेंट ट्रांसमिट, पब्लिश या प्रदर्शित नहीं करना चाहिए, जो मौजूदा कानूनों के तहत प्रतिबंधित हो या किसी सक्षम अदालत के आदेश के खिलाफ हो।
24 अगस्त 2026 या उसके बाद जारी कंटेंट पर लागू होगी एडवाइजरी
मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि 24 अगस्त 2026 या उसके बाद प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित या रिलीज किए जाने वाले सभी संबंधित कंटेंट में इन निर्देशों का पालन किया जाए। मंत्रालय का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य दर्शकों के बीच ड्रग्स के खतरों को लेकर जागरूकता बढ़ाना और OTT प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदार सामाजिक संदेश को बढ़ावा देना है।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
मंत्रालय के निर्देशों का पालन नहीं करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ Food Safety and Standards Act नहीं, बल्कि लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की बात कही गई है। यहां मुख्य रूप से डिजिटल कंटेंट और नशीले पदार्थों से जुड़े कानूनों का पालन महत्वपूर्ण होगा।
यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स पर फिल्मों, वेब सीरीज और दूसरे डिजिटल कंटेंट की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का फोकस अब केवल कंटेंट की उपलब्धता पर नहीं, बल्कि ड्रग्स जैसे संवेदनशील विषयों के चित्रण और उससे जुड़े सामाजिक संदेश पर भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
भारत में कंटेंट देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है और माइक्रोड्रामा अब सिर्फ एक नया ट्रेंड नहीं रह गया है। यह लोगों के रोजमर्रा के मनोरंजन का हिस्सा बनता जा रहा है।
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Samachar4media Bureau
भारत में कंटेंट देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है और माइक्रोड्रामा अब सिर्फ एक नया ट्रेंड नहीं रह गया है। यह लोगों के रोजमर्रा के मनोरंजन का हिस्सा बनता जा रहा है। ShareChat और Moj ने Kantar के साथ मिलकर ‘State of Microdrama in India’ रिपोर्ट जारी की है, जिसमें माइक्रोड्रामा के बढ़ते चलन, दर्शकों की पसंद और विज्ञापन के लिए इसकी संभावनाओं का खुलासा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 80% दर्शक माइक्रोड्रामा पसंद कर रहे हैं, जबकि 86% दर्शक रोजाना 15 मिनट से ज्यादा समय इसे देखने में बिताते हैं। वहीं, 54% दर्शक दोबारा माइक्रोड्रामा देखने के लिए लौटते हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह फॉर्मेट अब लोगों के लिए सिर्फ नया या आकर्षक कंटेंट नहीं, बल्कि नियमित मनोरंजन का हिस्सा बन चुका है।
विज्ञापन के लिए भी माइक्रोड्रामा बना मजबूत प्लेटफॉर्म
रिपोर्ट में माइक्रोड्रामा को ब्रैंड्स के लिए भी एक प्रभावी विज्ञापन माध्यम बताया गया है। इसके मुताबिक, माइक्रोड्रामा में विज्ञापन देखने वाले दर्शकों में 84% ब्रैंड रिकॉल और 82% खरीदारी की इच्छा (Purchase Intent) दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े पारंपरिक शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट के मुकाबले बेहतर हैं। यानी माइक्रोड्रामा न सिर्फ दर्शकों को जोड़ रहा है, बल्कि ब्रैंड्स को भी अपनी बात ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाने का मौका दे रहा है।
सोशल मीडिया फीड से मिल रहा है माइक्रोड्रामा
माइक्रोड्रामा की लोकप्रियता बढ़ने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, 77% दर्शक सोशल मीडिया फीड के जरिए माइक्रोड्रामा खोजते हैं।
इससे पता चलता है कि सोशल मीडिया सिर्फ कंटेंट देखने का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि नए कंटेंट फॉर्मेट को दर्शकों तक पहुंचाने का एक बड़ा जरिया भी बन चुका है।
सिर्फ कम आय वाले दर्शकों तक सीमित नहीं
माइक्रोड्रामा को लेकर यह धारणा भी टूट रही है कि इसे मुख्य रूप से कम आय वाले या कैजुअल दर्शक देखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 68% माइक्रोड्रामा दर्शक ऐसे परिवारों से आते हैं, जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है।
इसके अलावा, 64% दर्शक साल में दो से ज्यादा बार यात्रा करते हैं, जबकि 63% के पास अपना घर है। यानी माइक्रोड्रामा देखने वाले दर्शकों का आधार काफी व्यापक है और इसमें अलग-अलग आर्थिक वर्गों के लोग शामिल हैं।
ज्यादा देखने वाले दर्शक ऑनलाइन ज्यादा खर्च करते हैं
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि माइक्रोड्रामा के ज्यादा कंटेंट देखने वाले दर्शक हर महीने ऑनलाइन कम सक्रिय दर्शकों की तुलना में ज्यादा खर्च करते हैं।
इससे संकेत मिलता है कि जैसे-जैसे दर्शक माइक्रोड्रामा की एपिसोडिक कहानियों से ज्यादा जुड़ते हैं, वैसे-वैसे प्लेटफॉर्म, क्रिएटर्स और ब्रैंड्स के लिए इस फॉर्मेट की व्यावसायिक संभावनाएं भी बढ़ती जाती हैं।
शॉर्ट वीडियो की सुविधा और लंबी कहानी का मजा
ShareChat और Moj की Chief Business Officer Neha Markanda ने कहा कि माइक्रोड्रामा अब एक अलग एंटरटेनमेंट कैटेगरी के रूप में विकसित हो रहा है।
उनके मुताबिक, दर्शक सिर्फ छोटे वीडियो नहीं चाहते, बल्कि ऐसी कहानियां पसंद कर रहे हैं जो मोबाइल पर आसानी से देखी जा सकें और साथ ही उनमें लंबी कहानी जैसा जुड़ाव और भावनात्मक गहराई भी हो।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में माइक्रोड्रामा क्रिएटर्स को ज्यादा बेहतर कहानियां बनाने, ब्रैंड्स को कहानी के जरिए दर्शकों से जुड़ने और प्लेटफॉर्म्स को लंबे समय तक ऑडियंस एंगेजमेंट बढ़ाने के नए मौके दे सकता है।
भारत के डिजिटल कंटेंट बाजार में बड़ा बदलाव
Kantar South Asia के मीडिया व एनालिटिक्स के हेड इबू इसाक (Ebu Isaac) ने कहा कि रिसर्च के दौरान माइक्रोड्रामा का तेजी से उभरना भारत के डिजिटल कंटेंट लैंडस्केप में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल पर बार-बार कंटेंट देखने की आदत और एपिसोडिक कहानियों के आकर्षण ने माइक्रोड्रामा के लिए मजबूत एंगेजमेंट तैयार किया है। आने वाले समय में यह कैटेगरी लोगों के मनोरंजन के तरीके और ब्रैंड्स के लिए दर्शकों का ध्यान खींचने की रणनीति को बदल सकती है।
14 शहरों में हुई स्टडी
‘State of Microdrama in India’ रिपोर्ट के लिए 4 से 25 मई 2026 के बीच देश के 14 शहरों में 1,045 लोगों के बीच क्वांटिटेटिव स्टडी की गई।
इसमें 18 से 44 साल की उम्र के स्मार्टफोन और सोशल मीडिया यूजर्स को शामिल किया गया। रिसर्च में अलग-अलग NCCS A, B और C सेगमेंट के लोगों को शामिल किया गया।
विज्ञापन की प्रभावशीलता और दर्शकों का ध्यान समझने के लिए 21 से 29 मई 2026 के बीच 450 लोगों के साथ अलग से Attention Module भी किया गया। इसमें माइक्रोड्रामा, लॉन्ग-फॉर्म कंटेंट और शॉर्ट वीडियो/रील्स में दर्शकों के ध्यान की तुलना की गई।
माइक्रोड्रामा के लिए बढ़ रहे हैं नए मौके
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि माइक्रोड्रामा अब सिर्फ छोटे-छोटे वीडियो का फॉर्मेट नहीं रह गया है। कहानी, मोबाइल की सुविधा और लगातार नए एपिसोड देखने की आदत इसे तेजी से लोकप्रिय बना रही है।
ऐसे में आने वाले समय में क्रिएटर्स के लिए नई कहानियां बनाने, प्लेटफॉर्म्स के लिए यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने और ब्रैंड्स के लिए कहानी के जरिए ग्राहकों से जुड़ने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
मीडिया और एंटरटनमेंट कंपनियां अब ऐसी सुविधाओं पर ज्यादा निवेश कर रही हैं, जिनसे सुनने और देखने में परेशानी वाले लोगों के लिए (Accessibility Features) OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखना आसान हो सके।
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Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत की मीडिया और एंटरटनमेंट कंपनियां अब ऐसी सुविधाओं पर ज्यादा निवेश कर रही हैं, जिनसे सुनने और देखने में परेशानी वाले लोगों के लिए (Accessibility Features) OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखना आसान हो सके। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी OTT प्लेटफॉर्म के लिए प्रस्तावित दिशानिर्देशों ने इंडस्ट्री को स्ट्रीमिंग सेवाओं को ज्यादा समावेशी बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया है।
हालांकि प्रस्तावित दिशानिर्देशों में इन सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का रोडमैप दिया गया है, लेकिन देश के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पहले ही उपशीर्षक और बंद कैप्शन से आगे बढ़कर पहुंच आसान बनाने वाली सुविधाओं का विस्तार कर रहे हैं। कंपनियां अब इसे केवल नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं, बल्कि अपने प्रॉडक्ट को बेहतर बनाने और दूसरों से अलग पहचान देने वाली सुविधा के रूप में देख रही हैं। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कई भाषाओं में इंटरफेस, सांकेतिक भाषा की व्याख्या और आवाज के जरिए कंटेंट खोजने जैसी सुविधाओं को प्लेटफॉर्म में शामिल किया जा रहा है।
यह बदलाव दिखाता है कि पहले पहुंच आसान बनाने वाली सुविधाओं को केवल नियमों का पालन करने के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब इन्हें प्रॉडक्ट डिजाइन, यूजर्स एक्सपीरियंस और कंटेंट खोजने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से फरवरी में जारी प्रस्तावित दिशानिर्देशों में OTT प्रकाशकों को चरणबद्ध तरीके से अपनी कंटेंट को ज्यादा सुलभ बनाने के लिए कहा गया है। इसके तहत बंद कैप्शन, ऑडियो विवरण और भारतीय सांकेतिक भाषा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके यूजर इंटरफेस सहायक तकनीकों को समर्थन दें। ढांचे के तहत प्लेटफॉर्म को ऐसी कंटेंट की पहचान करने और समय के साथ उसे दर्शकों के लिए आसानी से खोजने योग्य बनाने पर भी काम करना होगा।
पहुंच आसान बनाना अब प्रॉडक्ट रणनीति का हिस्सा
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नियामक ढांचे ने तकनीक, कंटेंट और प्रॉडक्ट टीमों के बीच पहुंच आसान बनाने को लेकर बातचीत तेज कर दी है। अब OTT कंपनियां किसी कार्यक्रम या फिल्म के जारी होने के बाद इन सुविधाओं को जोड़ने के बजाय प्रॉडक्ट तैयार करने के दौरान ही इन्हें शामिल कर रही हैं।
उदाहरण के तौर पर, जियोस्टार का कहना है कि पहुंच आसान बनाना अब उसके स्ट्रीमिंग अनुभव को तैयार करने का एक बुनियादी सिद्धांत बन गया है।
जियोहॉटस्टार के मुख्य प्रॉडक्ट अधिकारी भरत राम ने कहा, "जियोस्टार में पहुंच आसान बनाना कोई ऐसी सुविधा नहीं है जिसे हम बाद में जोड़ते हैं, बल्कि यह एक डिजाइन सिद्धांत है, जो तय करता है कि हम अपने प्रॉडक्ट्स और अनुभवों को कैसे तैयार करते हैं।"
प्लेटफॉर्म पहले से ही 12 भाषाओं में प्रमुख खेल आयोजनों के साथ भारतीय सांकेतिक भाषा की व्याख्या और ऑडियो विवरण की सुविधा देता है। कई फिल्में और धारावाहिक भी ऑडियो विवरण और बंद कैप्शन के साथ उपलब्ध हैं।
राम ने कहा कि कंपनी मिशन एक्सेसिबिलिटी और इंडिया साइनिंग हैंड्स जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर अपने प्रॉडक्ट्स में पहुंच आसान बनाने वाली सुविधाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। साथ ही इन सुविधाओं को प्लेटफॉर्म की मूल तकनीकी व्यवस्था में भी शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "OpenAI के साथ हमारी साझेदारी अलग-अलग यूजर्स की जरूरतों के लिए कंटेंट खोजने की प्रक्रिया को ज्यादा सहज और बातचीत जैसी बनाने में मदद कर रही है।"
कंपनी अलग तरह से सोचने और सीखने वाले यूजर्स के लिए भी सुविधाएं विकसित करने में निवेश कर रही है। इससे पता चलता है कि पहुंच को अब केवल नियमों का पालन करने के बजाय समावेशी डिजाइन के व्यापक नजरिए से देखा जा रहा है।
राम के मुताबिक, पहुंच आसान बनाने के लिए मूल रूप से विकसित की गई कई सुविधाओं, जैसे उपशीर्षक, कई भाषाओं का अनुभव और आवाज के जरिए कंटेंट खोजने की सुविधा ने सभी दर्शकों के देखने के अनुभव को बेहतर बनाया है।
उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे भारत का पहुंच संबंधी तंत्र विकसित हो रहा है, हम स्ट्रीमिंग के भविष्य को सिर्फ ज्यादा व्यक्तिगत बनाने के बजाय डिजाइन के स्तर पर समावेशी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
प्लेटफॉर्म उपशीर्षक से आगे बढ़कर कर रहे नए प्रयोग
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया से पता चलता है कि नियमों का पालन अब केवल अनिवार्य पहुंच संबंधी सुविधाओं तक सीमित नहीं है।
नेटफ्लिक्स का कहना है कि उसके दुनियाभर के करीब एक-तिहाई सदस्य कंटेंट खोजने और देखने के लिए पहले से ही पहुंच संबंधी सुविधाओं और उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। इससे पता चलता है कि ये सुविधाएं अब मुख्यधारा का हिस्सा बन चुकी हैं।
पिछले एक साल में स्ट्रीमिंग कंपनी ने पहुंच संबंधी सुविधाओं में अपना निवेश काफी बढ़ाया है। केवल 2025 में ही उसने 34 भाषाओं में 13,000 घंटे से ज्यादा ऑडियो विवरण जोड़े। यह साल-दर-साल 30 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि है।
उसके संग्रह में अब 30 से ज्यादा भाषाओं में उपशीर्षक, सुनने में परेशानी वाले लोगों के लिए उपशीर्षक, ऑडियो विवरण और डबिंग की सुविधा उपलब्ध है।
कंपनी ने "भाषा के आधार पर खोज" सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए सदस्य अलग-अलग उपकरणों पर खोज पट्टी से भाषा के साथ-साथ पहुंच संबंधी सुविधाओं के आधार पर भी फिल्में और कार्यक्रम खोज सकते हैं।
यह सुविधा दिखाती है कि अब पहुंच को सिर्फ कंटेंट चलाने तक सीमित रखने के बजाय उसे खोजने की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
नेटफ्लिक्स के देखने के आंकड़े भी इस बदलाव को दिखाते हैं। करीब एक दशक पहले मंच पर गैर-अंग्रेजी भाषा की कंटेंट कुल देखने का 10 प्रतिशत से भी कम थी। आज यह एक-तिहाई से ज्यादा है। वहीं 2025 में करीब 70 प्रतिशत देखने का हिस्सा ऐसे सदस्यों का था, जिन्होंने अपने देश के बाहर बनाई गई कंटेंट देखी।
कंपनी ने नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के साथ मिलकर विशेष स्क्रीनिंग भी आयोजित की हैं, जिनमें पहले से शामिल ऑडियो विवरण की सुविधा थी।
नेटफ्लिक्स की मूल कंटेंट में दृष्टिबाधित दर्शकों के लिए चेहरे के भाव, जगह और दृश्यों में बदलाव जैसी दृश्य चीजों का वर्णन करने वाली आवाज भी शामिल होती है। इसके अलावा मंच स्क्रीन रीडर, सहायक सुनने वाले उपकरण और अपनी जरूरत के अनुसार बदले जा सकने वाले उपशीर्षकों को भी समर्थन देता है।
सोनी और जी भी पहुंच संबंधी योजना के साथ आगे बढ़ रहे
अन्य प्रसारक और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी बदलते नियामक माहौल के साथ पहुंच संबंधी सुविधाओं को मजबूत कर रहे हैं।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क की डिजिटल सेवाओं, जिनमें सोनीलिव और क्रंचीरोल शामिल हैं, के लिए तैयार योजना में सहायक तकनीकों के साथ बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है। इसमें बेहतर स्क्रीन रीडर समर्थन, कीबोर्ड से संचालन, रंगों के अंतर को बेहतर करना और सभी के लिए आसान इंटरफेस डिजाइन शामिल हैं।
कंपनी प्रॉडक्ट तैयार करने की प्रक्रिया में ही पहुंच संबंधी सुविधाओं को शामिल करने पर जोर दे रही है। इसके लिए लगातार परीक्षण और यूजर्स की प्रतिक्रिया का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि इसे केवल एक बार की नियम पालन प्रक्रिया न माना जाए।
वहीं जी एंटरटेनमेंट का कहना है कि वह मंत्रालय की ओर से तय समय-सारणी के अनुसार पहुंच संबंधी सुविधाएं लागू कर रहा है।
कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, "एक जिम्मेदार इंडस्ट्री पार्टनर के तौर पर जी, सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों का पालन कर रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रयास कर रहा है कि उसके कंटेंट प्रस्ताव सभी मंचों पर हर उपभोक्ता के लिए आसानी से उपलब्ध हों।"
उन्होंने कहा, "हम मंत्रालय की ओर से तय समय-सारणी के अनुसार नई पहुंच संबंधी सुविधाओं को शामिल करने की प्रक्रिया में हैं। हम एक सही मायने में समावेशी और सुलभ एंटरटनमेंट व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि हमारी आकर्षक कंटेंट देश के हर दर्शक के लिए बिना किसी रुकावट के उपलब्ध हो सके।"
नियमों का पालन बढ़ा रहा नए प्रयोगों का दायरा
इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों का कहना है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्तावित दिशानिर्देशों ने पहुंच संबंधी सुविधाओं के लिए एक साझा ढांचा तैयार किया है और कंपनियों को नए प्रयोग करने की गुंजाइश भी दी है।
उपशीर्षक और ऑडियो विवरण से आगे बढ़कर प्लेटफॉर्म अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंटेंट खोज, कई भाषाओं में संचालन, बातचीत के जरिए खोज, पहुंच संबंधी संकेतक और यूजर की जरूरत के अनुसार बदले जा सकने वाले इंटरफेस में भी निवेश कर रहे हैं।
मंत्रालय के ढांचे में प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि सुलभ कंटेंट को संकेतकों, फिल्टर और खोज सुविधा के जरिए आसानी से खोजा जा सके। साथ ही पहुंच संबंधी क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
यह बदलाव इस बात में भी दिखाई दे रहा है कि स्ट्रीमिंग कंपनियां आज पहुंच को किस तरह देख रही हैं। अब इसे पर्दे के पीछे नियमों का पालन करने वाली व्यवस्था के बजाय प्लेटफॉर्म के पूरे अनुभव का हिस्सा बनाया जा रहा है। कंपनियां सिफारिश करने वाली व्यवस्थाओं को बेहतर कर रही हैं, कंटेंट से जुड़ी जानकारी बढ़ा रही हैं और अलग-अलग जरूरत वाले यूजर्स के लिए संचालन को ज्यादा आसान बना रही हैं।
नई पीढ़ी की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से इन प्रयासों को और तेजी मिलने की उम्मीद है। इससे स्वचालित उपशीर्षक, ऑडियो विवरण, भाषा अनुवाद और आवाज के जरिए बातचीत को बेहतर बनाया जा सकता है।
पूरी इंडस्ट्री्ट्री में हो रहा बदलाव
भारत के OTT इंडस्ट्री के लिए पहुंच आसान बनाना अब सिर्फ नियामक नियमों का पालन करने की मजबूरी नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने का एक तरीका भी बनता जा रहा है।
दिव्यांग लोगों के लिए शुरुआत में विकसित की गई सुविधाएं- जैसे उपशीर्षक, कई भाषाओं वाले इंटरफेस, आवाज के जरिए संचालन और बातचीत के जरिए कंटेंट खोजने की सुविधा- अब आम दर्शकों के बीच भी तेजी से इस्तेमाल हो रही हैं। इसकी वजह यह है कि लोग अलग-अलग उपकरणों, भाषाओं और परिस्थितियों में कंटेंट देख रहे हैं।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्तावित दिशानिर्देशों ने भले ही इस बदलाव को शुरू करने के लिए नियामक दबाव दिया हो, लेकिन इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया बताती है कि इससे कहीं बड़ा बदलाव हो रहा है।
जैसे-जैसे स्ट्रीमिंग सेवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, कंपनियां यह समझ रही हैं कि अगली बड़ी चुनौती सिर्फ बेहतर और प्रीमियम कंटेंट तैयार करना नहीं है। अब यह भी जरूरी है कि हर दर्शक के लिए कंटेंट सुलभ हो, उसे आसानी से खोजा जा सके और हर व्यक्ति उसे बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल कर सके।
हिन्दुस्तान टाइम्स (HT) मीडिया समूह के OTT प्लेटफॉर्म OTTplay के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) इंदरप्रीत सिंह ने कंपनी छोड़ दी है।
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हिन्दुस्तान टाइम्स (HT) मीडिया ग्रुप के OTT प्लेटफॉर्म OTTplay के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) इंदरप्रीत सिंह ने कंपनी छोड़ दी है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिए साझा की।
इंदरप्रीत सिंह ने लिखा कि आज हिन्दुस्तान टाइम्स में उनका आखिरी दिन है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान Mint Premium, HT Premium और OTTplay जैसे तीन अलग-अलग बिजनेस वेंचर्स पर काम किया। उनके मुताबिक, इन तीनों प्लेटफॉर्म को शुरुआत से तैयार किया गया, कई चुनौतियों का सामना किया गया और समय-समय पर उन्हें नए सिरे से विकसित भी किया गया।
उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स ने उन्हें यह सिखाया कि किसी बिजनेस को बड़े स्तर तक कैसे पहुंचाया जाए, ग्राहकों को लंबे समय तक कैसे जोड़ा जाए और ऐसे दर्शकों के लिए कैसे काम किया जाए, जो सिर्फ उसी कंटेंट के लिए भुगतान करते हैं जिसे वे वास्तव में मूल्यवान मानते हैं।
इंदरप्रीत सिंह ने अपनी पोस्ट में अपनी टीम, कंपनी के नेतृत्व और बिजनेस पार्टनर्स का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सफर अकेले संभव नहीं था। टीम ने हर विचार पर खुलकर चर्चा की, नेतृत्व ने नए आइडियाज पर भरोसा जताया और पार्टनर्स ने हर कदम पर साथ दिया।
गौरतलब है कि इंदरप्रीत सिंह का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ महीने पहले Hindustan Media Ventures Limited (HMVL) ने अपने OTT एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म OTTplay के लिए नए सब्सक्रिप्शन पैक बंद करने का फैसला किया था। कंपनी ने 31 मार्च 2026 से नए सब्सक्रिप्शन ऑफर रोक दिए थे और कहा था कि वह इस बिजनेस की दीर्घकालिक संभावनाओं की समीक्षा कर रही है।
इंदरप्रीत सिंह ने दिसंबर 2020 में HT Media जॉइन किया था। लगभग साढ़े पांच साल के कार्यकाल के बाद अब उन्होंने कंपनी से विदाई ले ली है।
केंद्र सरकार ने अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म को भारत में आम लोगों की पहुंच से बाहर कर दिया है।
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केंद्र सरकार ने अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म को भारत में आम लोगों की पहुंच से बाहर कर दिया है। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसा कंटेंट दिखाया जा रहा था, जो देश के कानूनों का उल्लंघन करता था।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन OTT प्लेटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल इंटरमीडियरी के खिलाफ कार्रवाई की गई, वे सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 67 और 67A, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 और महिलाओं के अशोभनीय प्रतिनिधित्व (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4 का उल्लंघन करते पाए गए।
मंत्री ने कहा कि इन कानूनों के तहत अश्लील कंटेंट का प्रकाशन या प्रसारण और महिलाओं का अशोभनीय चित्रण प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई।
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री कानून के दायरे में होनी चाहिए और किसी भी तरह के अश्लील या अवैध कंटेंट को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी उद्देश्य से पिछले दो वर्षों के दौरान 50 OTT प्लेटफॉर्म्स को भारत में ब्लॉक किया गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल माहौल बनाए रखने के लिए भविष्य में भी कानून का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म Z5 Global के लिए कृष्णेंदु चक्रवर्ती को एशिया पैसिफिक (APAC) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है।
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म Z5 Global के लिए कृष्णेंदु चक्रवर्ती को एशिया पैसिफिक (APAC) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के जरिए कंपनी अपने ग्लोबल डिजिटल कारोबार को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Z5 की मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
नई जिम्मेदारी में कृष्णेंदु चक्रवर्ती Z5 Global के चीफ बिजनेस ऑफिसर सिजू प्रभाकरण को रिपोर्ट करेंगे। वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्लेटफॉर्म की ग्रोथ स्ट्रैटेजी को आगे बढ़ाने, नए सब्सक्राइबर जोड़ने, राजस्व बढ़ाने, रणनीतिक साझेदारियां करने और नए बाजारों में विस्तार की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस नियुक्ति पर खुशी जताते हुए सिजू प्रभाकरण ने कहा कि APAC क्षेत्र Z5 के लिए सबसे संभावनाओं वाले बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि अनुभवी नेतृत्व को टीम में शामिल करना कंपनी की वैश्विक विकास रणनीति का अहम हिस्सा है। उनके मुताबिक, कृष्णेंदु की पार्टनरशिप और ऑडियंस एंगेजमेंट में विशेषज्ञता अंतरराष्ट्रीय बाजारों में Z5 की मौजूदगी को और मजबूत करेगी।
कृष्णेंदु चक्रवर्ती के पास 21 साल से अधिक का नेतृत्व अनुभव है। उन्होंने डिजिटल मीडिया, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) बिजनेस, स्पोर्ट्स, कंज्यूमर टेक्नोलॉजी और पारंपरिक मीडिया जैसे क्षेत्रों में काम किया है। Z5 से जुड़ने से पहले वह Meta में कार्यरत थे, जहां उन्होंने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में क्रिएटर पार्टनरशिप का नेतृत्व किया और भारत में स्पोर्ट्स पार्टनरशिप की जिम्मेदारी भी संभाली।
कंपनी का कहना है कि यह नियुक्ति उसकी उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह डिजिटल कारोबार को मुनाफे वाला और बड़े स्तर पर विस्तार योग्य (Scalable) बनाना चाहती है। भारत और विदेशी बाजारों में मजबूत नेतृत्व के जरिए कंपनी डिजिटल मनोरंजन के बढ़ते अवसरों का फायदा उठाने और लंबी अवधि में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों की बढ़ती मांग को देखते हुए Z5 अब मजबूत नेतृत्व, रणनीतिक साझेदारियों और नए बाजारों में बेहतर पहुंच के दम पर अपनी वैश्विक मौजूदगी को और विस्तार देने की तैयारी में है।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, लेकिन जी एंटरटेनमेंट (Zee) अब इस साझेदारी को लंबे समय तक आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
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फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, लेकिन जी एंटरटेनमेंट (Zee) अब इस साझेदारी को लंबे समय तक आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी के CEO पुनीत गोयनका ने फीफा (FIFA) के साथ अपनी साझेदारी को भारत में फुटबॉल के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है और कहा है कि यह सफर अभी सिर्फ शुरू हुआ है।
19 जुलाई 2026 को फीफा टीम को लिखे एक पत्र में पुनीत गोयनका ने कहा कि इस साझेदारी की बदौलत फुटबॉल का रोमांच देशभर के करोड़ों दर्शकों तक पहुंचा है। उनका मानना है कि इससे भारत में फुटबॉल के लिए मजबूत माहौल तैयार करने में भी मदद मिली है।
गोयनका ने कहा कि Zee का लक्ष्य सिर्फ टूर्नामेंट का प्रसारण करना नहीं है, बल्कि फुटबॉल को भारत की खेल संस्कृति का अहम हिस्सा बनाना भी है। उन्होंने भरोसा जताया कि कंपनी आने वाले वर्षों में भी फीफा के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत करेगी और फुटबॉल से जुड़े कंटेंट में निवेश जारी रखेगी।
उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और पूरी फीफा टीम का आभार जताते हुए कहा कि उनके भरोसे और सहयोग से यह साझेदारी सफल रही।
पुनीत गोयनका ने दर्शकों और सब्सक्राइबर्स का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल के प्रति लोगों के उत्साह ने Zee को बेहतर से बेहतर देखने का अनुभव देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही विज्ञापनदाताओं, डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स, सहयोगी कंपनियों और अन्य व्यावसायिक साझेदारों का भी उन्होंने आभार व्यक्त किया।
उन्होंने फुटबॉल एक्सपर्ट्स और प्रेजेंटर्स की भी सराहना की, जिनकी विश्लेषणात्मक प्रस्तुति और कवरेज ने खेल को भारतीय दर्शकों के और करीब पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
अपने संदेश में गोयनका ने Zee की टीम की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने एक बड़े विजन को सफल प्रसारण अभियान में बदलकर दिखाया और इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि Zee भारत में नई पीढ़ी के फुटबॉल प्रशंसकों को प्रेरित करने और इस खेल के विकास में लगातार योगदान देता रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन भारत भी फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करेगा और दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर अपनी जगह बनाएगा।
मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि वैश्विक खेल आयोजनों के प्रसारण के जरिए ब्रॉडकास्टर्स दर्शकों और सब्सक्राइबर आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में Zee के लिए फीफा के साथ यह साझेदारी सिर्फ प्रसारण अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ाने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का भी अहम हिस्सा है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने अपने अब तक के सबसे बड़े मल्टी-लिंगुअल कंटेंट लाइनअप की घोषणा की है।
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Samachar4media Bureau
ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने अपने अब तक के सबसे बड़े मल्टी-लिंगुअल कंटेंट लाइनअप की घोषणा की है। कंपनी आने वाले समय में हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी, मलयालम, कन्नड़ और बांग्ला समेत सात भाषाओं में नई वेब सीरीज, फिल्में, लाइव स्पोर्ट्स, एनीमेशन और बच्चों के लिए खास कार्यक्रम पेश करेगी। इसके साथ ही कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंटेंट पर भी जोर दे रही है।
ZEE5 का कहना है कि उसका मकसद अलग-अलग भाषाओं में दर्शकों को उनकी पसंद का मनोरंजन उपलब्ध कराना है। इसके लिए कंपनी ने कई बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ साझेदारी की है।
हिंदी कंटेंट में दर्शकों को कई नई ओरिजिनल सीरीज देखने को मिलेंगी। इनमें पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली के जीवन से प्रेरित 'कांबली', 'द स्कैम: लीक्ड', 'कॉफी किंग', आर. माधवन द्वारा होस्ट किया जाने वाला 'जीना इसी का नाम है 2.0' और मशहूर 'जी हॉरर शो' की वापसी शामिल है। वहीं लोकप्रिय सीरीज 'रंगबाज' का चौथा सीजन, 'जनावर 2' और 'बकैती' का दूसरा सीजन भी दर्शकों के सामने आएगा।
फिल्मों की बात करें तो ZEE5 कई बड़े सितारों की फिल्में भी लेकर आ रहा है। इनमें वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मौनी रॉय की 'है जवानी तो इश्क होना है', बॉबी देओल और सान्या मल्होत्रा की 'बंदर', कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता', मृणाल ठाकुर और हुमा कुरैशी की 'पूजा मेरी जान' तथा वाणी कपूर की 'सर्वगुण संपन्न' जैसी फिल्में शामिल हैं।
क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट पर भी कंपनी का खास फोकस रहेगा। तमिल में नई वेब सीरीज और फिल्में, तेलुगु में नई ओरिजिनल सीरीज और टॉक शो, कन्नड़ में 'बिटकॉइन स्कैम' और 'ऑपरेशन बंगारा', मलयालम में नई फिल्में और रैप बैटल शो, मराठी में नई सीरीज और फिल्मों के साथ-साथ बांग्ला में भी कई लोकप्रिय फ्रेंचाइजी नए सीजन के साथ लौटेंगी।
मनोरंजन के अलावा ZEE5 लाइव स्पोर्ट्स पर भी बड़ा दांव लगाने जा रहा है। प्लेटफॉर्म पर FIFA, बुंडेसलीगा, ILT सीजन-5 और तमिलनाडु कबड्डी जैसे खेल आयोजनों का प्रसारण भी किया जाएगा।
बच्चों के लिए भी कंपनी ने कई नए कार्यक्रमों की घोषणा की है। इनमें 'शिवलोक के कुंडक्का मंडक्का', 'गरुड़- एक योद्धा की गाथा', 'विक्रम बेताल', 'राम-अंजनेय युद्ध', 'टेल्स ऑफ कृष्णा' और 'बैंडबुध और बुदबक 2.0' जैसे शो शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए भारतीय पौराणिक कथाओं और लोककथाओं को आधुनिक अंदाज में बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।
ZEE5 का मानना है कि ओटीटी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच क्षेत्रीय भाषाओं, लोकप्रिय फ्रेंचाइजी, लाइव स्पोर्ट्स और नई तकनीकों पर निवेश भविष्य की जरूरत है। इसी रणनीति के तहत कंपनी अपने कंटेंट पोर्टफोलियो को और मजबूत कर रही है, ताकि देशभर के दर्शकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर विविध और गुणवत्तापूर्ण मनोरंजन मिल सके।