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जन्मदिन विशेष : प्रेरक व्यक्तित्व हैं डॉ. कमलकिशोर गोयनका
वरिष्ठ साहित्यकार व दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी-प्राध्यापक और लगभग 60 पुस्तकों के लेखक-संपादक डॉ. कमलकिशोर गोयनका का 80वां ...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
वरिष्ठ साहित्यकार, प्रेमचंद-विशेषज्ञ व दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी-प्राध्यापक और लगभग 60 पुस्तकों के लेखक-संपादक डॉ. कमलकिशोर गोयनका का 80वां जन्मदिन समारोह 12 अक्टूबर को दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग-स्थित प्रवासी-भवन-सभागार में आर्यावर्त साहित्य-संस्कृति-संस्थान, नई दिल्ली की ओर से मनाया गया।
दिल्ली, एनसीआर तथा हरियाणा के अन्य स्थलों से आए साहित्यकारों, साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों और अनेक संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने डॉ. गोयनका को स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध नाटककार दयाप्रकाश सिन्हा ने की। उन्होंने डॉ. गोयनका से अपने 30 वर्ष पुराने संबंधों की बातों को याद करते हुए कहा कि गोयनका निरंतर कार्य करने वाले लेखक हैं। वे स्वयं तो लिखते ही हैं, दूसरों को भी लेखन के लिए प्रेरित करते रहते हैं और अनेक विषयों का भी सुझाव देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद-साहित्य पर कार्य कर गोयनका जी ने एक इतिहास बनाया है और अनेक मानदंड निर्धारित किए हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड और इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष डॉ. रामशरण गौड़ ने डॉ. गोयनका द्वारा किए गए कार्यों को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणाप्रद बताया। उन्होंने डॉ. गोयनका को जीवेम शरदः शतम की शुभकामना दी।
दिल्ली विश्वविद्यालय में सिंधी के प्रोफेसर डॉ. रवि टेक चंदानी ने कहा कि डॉ. गोयनका अपने पास आने वाले लोंगो को सदैव आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद पर इन्होंने जितना काम किया है, उससे लोग प्रेमचंद के परिवार के सदस्यों को कम और डॉ. गोयनका को ज्यादा खोजने लगे हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर डॉ. अवनिजेश अवस्थी ने कहा कि गोयनका जी बहुत ही विषम परिस्थितियों में राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए संघर्ष करते रहे और वे उसमें सफल रहे हैं।पीजीडीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश अग्रवाल ने कहा कि हम उस पीढ़ी के व्यक्ति हैं, जिसने सदैव गोयनका जी से बहुत कुछ सीखा है. उन्होंने गांधी के पत्रकारिता विषयक और प्रेमचंद पर किए गए उनके कार्यों को महत्वपूर्ण बताया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी की प्रोफेसर डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि डॉ. गोयनका छोटे शहर बुलंदशहर से चलकर दिल्ली आए और यहां अनेक संघर्ष करते हुए सम्मानजनक स्थान बनाया है। इसमें देश, समाज और राष्ट्र के प्रति इनकी निष्ठा और कठिन परिश्रम इनका संबल रहा। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नारायण कुमार ने कहा कि डॉ. गोयनका का एक पक्ष अंतरराष्ट्रीय है, उन्होंने प्रवासी साहित्य पर काफी कार्य किया है और इसके लिए दुनिया भर के लेखक और साहित्यिक समाज इनका आदर करता है। उन्होंने 'गांधी हिंदी-भाषा-लिपि विचार कोष' को उनकी प्रमुख शोध कृति बताया।
डॉ. उमाशंकर मिश्र ने विशेषरूप से पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर किए गए उनके कार्यों को रेखांकित किया। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ.अरुण कुमार भगत ने डॉ. गोयनका के अभिवावकत्व रूप की चर्चा करते हुए कहा कि वे नई पीढ़ी की पढ़ाई-लिखाई से लेकर रोजगार तक की चिंता करते हैं और सबको उचित परामर्श और सहयोग देते हैं।
प्रो. भगत ने कहा कि हम जैसे अनेकों युवकों को वे राष्ट्रहित में लेखन और कर्म करने की प्रेरणा देते हैं। कवि-लेखक डॉ. रमाकांत शर्मा ने अपनी काव्य-पंक्तियों से डॉ. गोयनका जी को 80वें जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए कहा, 'जिनके पावन प्यार का कहीं ओर न छोर, सबके हितचिंतक सदा गुरुवर कमलकिशोर।
डॉ. कमलकिशोर गोयनका ने कहा कि मैं अपने परिवार की सारी संपदा छोड़कर दिल्ली आ गया इस संकल्प को लेकर कि मुझे प्रोफेसर बनना है और ईश्वर ने मुझे उसमें सफलता दी। उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रवादी विचारकों-लेखकों का काफी विरोध होता रहा है, किन्तु मेरे जैसे कुछ लेखकों ने उसकी परवाह नहीं की और अपने लेखन में लगे रहे। उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं 100 वर्षों तक जीना चाहता हूं, पर काम करते हुए।
इस अवसर पर ऑथर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के महासचिव डॉ. शिवशंकर अवस्थी, साहित्य समन्वय मंच के अध्यक्ष श्री रामगोपाल शर्मा, हिन्दुस्तानी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक तथा सलाहकार विजय कुमार राय, केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली केंद्र के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा, उत्कर्ष साहित्यिक संस्था कानपुर के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप दीक्षित, प्रभात प्रकाशन के स्वामी प्रभात कुमार, यश पब्लिकेशन के स्वामी शांतिस्वरूप शर्मा, सुलभ इंटरनेशनल के प्रतिनिधि डॉ. अशोक कुमार ज्योति, वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सविता चड्ढा, साहित्य अकादेमी के संपादक कुमार अनुपम, अधिवक्ता शंकर कुमार झा, चन्दन कुमार, डॉ. शिवानंद तिवारी, राष्ट्रीय उर्दू विकास परिषद् के अध्यक्ष डॉ. अकील अहमद, कथाकार श्री इंद्रेश राजपूत, डॉ. सुधीर रिंटन, डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र मौजूद रहे।
कार्यक्रम में डॉ. सौरव मालवीय,डॉ. राकेश योगी, कमल सन्देश पत्रिका के सहायक संपादक संजीव सिन्हा, डॉ. मणिकांत ठाकुर, बीरेंद्र चौधरी, प्रभात मिश्र, डॉ. जीतेन्द्र वीर कालरा, डॉ. लहरीराम मीणा आदि के साथ केंद्रीय हिंदी संस्थान, दिल्ली केंद्र माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म की छात्र -छात्राओं ने शॉल, माला, पुष्पगुच्छ एवं उपहार भेंट कर डॉ. गोयनका जी को 80वें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का प्रारम्भ सरस्वती जी के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ हुआ, जिसका संचालन डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने किया।
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