होम / मीडिया फोरम / ‘इरशाद भाई के शब्दों में जो सच्चाई थी, उनका किरदार भी उतना ही सच्चा लगता था’
‘इरशाद भाई के शब्दों में जो सच्चाई थी, उनका किरदार भी उतना ही सच्चा लगता था’
मशहूर शायर इरशाद खान सिकंदर को श्रद्धांजलि देते हुए लेखक-डायरेक्टर अविनाश दास ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक भावुक पोस्ट लिखी है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
उर्दू शायरी, थिएटर और गीत लेखन की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने वाले मशहूर शायर इरशाद खान सिकंदर का 18 मई को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। करीब 42 वर्षीय इरशाद खान को शाम करीब छह बजे हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उनका इंतकाल हो गया। उनके असमय निधन से साहित्य, रंगमंच और सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर तमाम लेखकों, कलाकारों और प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।
उनकी याद में लेखक-डायरेक्टर अविनाश दास ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक भावुक पोस्ट लिखी है। उन्होंने लिखा है, ‘अरसा बाद एक शख़्स अच्छा लगने लगा था। हम दिल्ली जाते थे, तब मिलते थे। वह मुंबई आते थे, तब मिलते थे। एक बार इंदौर में भी हमने बहुत ख़ास पल बिताये। सादगी और जोश का सुंदर संगम। लेकिन वह शख़्स चला गया। इरशाद ख़ान सिकंदर हमसे सात साल छोटे थे, लेकिन उनका ज़ेहन उम्रदराज़ था। उनका एक शेर है,
अभी ये शाम को क्या हो गया है
अभी मैं दिन में था अच्छा भला तो
कल शाम उनकी मृत्यु के समाचार ने अंदर से तोड़ दिया। वह शायरी में आंसुओं का तर्जुमा करते थे। उनका ही शेर है,
बाग़ था कुछ पल में सहरा हो गया
आंधियों का फ़र्ज़ पूरा हो गया
बुझ गये आंखों के सब रौशन दिये
आज दिल का बंद कमरा हो गया
पांच-छह सालों में हम ज़्यादा क़रीब आये थे। उनके शब्दों में जो सच्चाई थी, उनका किरदार भी उतना ही सच्चा लगता था। अलविदा इरशाद भाई। यह हमारी एक तस्वीर है और इस तस्वीर में आपकी हंसी के क्या कहने! माशाअल्लाह!!’
अरसा बाद एक शख़्स अच्छा लगने लगा था। हम दिल्ली जाते थे, तब मिलते थे। वह मुंबई आते थे, तब मिलते थे। एक बार इंदौर में भी हमने बहुत ख़ास पल बिताये। सादगी और जोश का सुंदर संगम। लेकिन वह शख़्स चला गया। इरशाद ख़ान सिकंदर हमसे सात साल छोटे थे, लेकिन उनका ज़ेहन उम्रदराज़ था। उनका एक शेर… pic.twitter.com/xaVeKRPqd7
— Avinash Das (@avinashonly) May 19, 2025
टैग्स