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बदलती शिफ्ट्स में काम कर रहे पत्रकारों के लिए है ये खबर
लगातार बदलती शिफ्ट में नौकरी करने वालों के लिए यह खबर काफी चिंताजनक
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
लगातार बदलती शिफ्ट में नौकरी करने वालों के लिए यह खबर काफी चिंताजनक है। दरअसल, आजकल कई निजी कंपनियों में चौबीसों घंटे काम होता है। मीडिया भी इससे अछूता नहीं हैं। तमाम मीडिया संस्थान चौबीसों घंटे खुले रहते हैं और उनमें लगातार काम होता रहता है। जाहिर है, ऐसे में यहां काम करने वालों की शिफ्ट भी बदलती रहती है। कभी उन्हें सुबह की शिफ्ट में तो कुछ दिनों बाद रात की शिफ्ट में ड्यूटी करनी पड़ती है। इस तरह की शिफ्ट में काम करने वालों को मोटापे और डायबिटीज का रिस्क ज्यादा बना रहता है। यही नहीं, उन्हें कई तरह की दिमागी बीमारियां भी घेर सकती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं ने इस बारे में रिसर्च की तो कई चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आए। इस रिसर्च में पता चला कि जो लोग लगातार बदलती शिफ्ट में काम करते हैं, उनमें रात की शिफ्ट में काम न करने वालों अथवा सुबह नौ से पांच बजे वाली शिफ्ट में काम करने वालों की तुलना में अवसाद और चिंता की आशंका 33 प्रतिशत ज्यादा थी।
28 हजार 438 प्रतिभागियों की जांच के बाद रिसर्च में यह भी पता चला कि शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित होने की आशंका भी 28 प्रतिशत ज्यादा होती है।
इस रिसर्च में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि जब काम के दौरान बार-बार शिफ्ट बदलती है तो सोने-जागने की आदत पर इसका काफी असर पड़ता है और शरीर इस बदलाव को झेल नहीं पाता। इससे व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है। इसके अलावा उसके मूड में भी बदलाव आने लगता है और सामाजिक रूप से भी वह खुद को अलग-थलग पाने लगता है।
इस रिसर्च में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार शिफ्ट में बदलाव होने से हमारे सोने और जागने की आदत पर असर पड़ता है। हमारा शरीर सोने-जागने की आदत में बार-बार हो रहे इस बदलाव को नहीं झेल पाता, जिससे व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ जाता है। इसके अलावा यह मूड में बदलाव और सामाजिक अलगाव का कारण भी बनता है।
वहीं, जापान में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि बदलती शिफ्ट में काम करने वाले लोगों को दिन में काम करने वालों की तुलना में डायबिटीज होने का खतरा 50 प्रतिशत ज्यादा था। इसके अलावा अन्य तरह की समस्याएं जैसे- हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और कोलेस्ट्राल बढ़ने की समस्याएं भी उनमें ज्यादा पाई गईं।
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