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कृषि कानून वापस लेने के समय पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने उठाया सवाल, की ये मांग
प्रधानमंत्री ने आखिरकार किसानों की मांग मान ली और एक साल से किसान आंदोलन की वजह बने तीनों नए कृषि कानून वापस ले लिए हैं। वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने इस फैसले का स्वागत किया
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार किसानों की मांग मान ली और पिछले एक साल से किसान आंदोलन की वजह बने तीनों नए कृषि कानून वापस ले लिए हैं। शुक्रवार को देश के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने यह बड़ा ऐलान किया।
सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा है। ऐसे अपने 18 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने यह साफ कर दिया कि केंद्र इन तीनों कानूनों को वापस ले रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि हम किसानों को समझा नहीं सके इसलिए इन कानूनों को वापस ले रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि कानून वापस ले रहे हैं लेकिन इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से शुद्ध, किसानों के हित की बात, हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए। कृषि अर्थशास्त्रियों ने, वैज्ञानिकों ने, प्रगतिशील किसानों ने भी उन्हें कृषि कानूनों के महत्व को समझाने का भरपूर प्रयास किया।
उन्होंने आगे कहा- हमारी सरकार, किसानों के कल्याण के लिए, खासकर छोटे किसानों के कल्याण के लिए, देश के कृषि जगत के हित में, देश के हित में, गांव गरीब के उज्जवल भविष्य के लिए, पूरी सत्य निष्ठा से, किसानों के प्रति समर्पण भाव से, नेक नीयत से ये कानून लेकर आई थी।
इस बीच वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापस लेने के फैसले का स्वागत किया। लेकिन उन्होंने न केवल इस फैसले के समय पर सवाल उठाया बल्कि यह मांग भी कि आंदोलन के दौरान जिन किसानों का आर्थिक नुकसान हुआ, जिनकी जान गयी उसकी भरपाई भी की जाए।
राजेश बादल ने कहा, ‘सब कुछ लुटाकर होश में आए, तो क्या आए। सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की है। इस फैसले का स्वागत है, लेकिन यह भी अपेक्षा है कि आइंदा वो ऐसे फैसले नहीं ले, जिससे कि देश की आर्थिक रफ्तार, कृषि उत्पादन सब कुछ ठहर जाए। अपने बेअकल सलाहकारों को सत्ता से दूर रखे। जान, माल का जो नुकसान किसानों ने उठाया है, उसकी भरपाई कौन करेगा? सरकार को एक मुश्त प्रति किसान पच्चीस लाख क्षतिपूर्ति के देना चाहिए। वह भी सरकारी फंड से नही, बल्कि भारतीय जनता पार्टी को अपनी पार्टी फंड से देना चाहिए। सवाल तो यह भी है कि यदि उत्तरप्रदेश में चुनाव नहीं होते तो भी क्या सरकार यह निर्णय लेती?’
यहां देख सकते हैं कि और क्या कुछ कहा वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने:
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