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दुनिया को अलविदा कह गए जाने-माने लेखक व पत्रकार डॉ. सूर्यकांत बाली
डॉ. सूर्यकांत बाली ने अपने लेखन और पत्रकारिता के माध्यम से भारतीय संस्कृति और राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. बाली के निधन पर साहित्य और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
जाने-माने लेखक और प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सूर्यकांत बाली जी का निधन हो गया है। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। डॉ. सूर्यकांत बाली ने अपने लेखन और पत्रकारिता के माध्यम से भारतीय संस्कृति और राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. बाली के निधन पर साहित्य और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है।
‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (आरएसएस) समेत तमाम लोगों व संगठनों ने डॉ. सूर्यकांत बाली के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है और ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने के साथ ही शोक संतप्त परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने लिखा है, ‘प्रख्यात लेखक, साहित्यकार डा. सूर्यकांत बाली जी के देहावसान का दुःखद समाचार है। डॉक्टर सूर्यकांत बाली ने अपने प्रखर राष्ट्रवादी चिंतन से हिन्दी साहित्य का पोषण किया। उनकी रचनाओं से साहित्यिक व पत्रकारिता के क्षेत्र में नई रोशनी आयी। हिंदी और संस्कृत भाषा के वे मूर्धन्य ज्ञाता थे। डॉ. बाली की विद्वत्ता के प्रति आदर व सम्मान से मैं नतमस्तक हूँ। उनकी स्मृति में भावपूर्ण श्रद्धांजलि समर्पित करता हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान करें। उनके परिवारजनों एवं मित्रों को मेरी गहरी संवेदनाएं। ईश्वर शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करे। ॐशान्तिः॥’
प्रख्यात लेखक, साहित्यकार डा. सूर्यकांत बाली जी के देहावसान का दुःखद समाचार है। डॉक्टर सूर्यकांत बाली ने अपने प्रखर राष्ट्रवादी चिंतन से हिन्दी साहित्य का पोषण किया। उनकी रचनाओं से साहित्यिक व पत्रकारिता के क्षेत्र में नई रोशनी आयी। हिंदी और संस्कृत भाषा के वे मूर्धन्य ज्ञाता थे।… pic.twitter.com/0KIfNwcwbi
— RSS (@RSSorg) April 7, 2025
वहीं, राज्यसभा सांसद प्रो. राकेश सिन्हा ने डॉ. सूर्यकांत बाली को श्रद्धांजलि देते हुए ‘एक्स’ पर लिखा है, ‘सूर्यकांत बाली जी ने अपनी लेखनी से राष्ट्रीय चिंतन को श्रेष्ठ तरीक़े से आगे बढ़ाया । दिल्ली विश्वविद्यालय में रामजस कॉलेज के शिक्षक, नवभारत टाइम्स के संपादक और फिर स्वतंत्र लेखन उनके बौद्धिक जीवन का हिस्सा रहा। उनका निधन दुखदायी है। विनम्र श्रद्धांजलि ।ॐ शांति’
सूर्यकांत बाली जी ने अपनी लेखनी से राष्ट्रीय चिंतन को श्रेष्ठ तरीक़े से आगे बढ़ाया । दिल्ली विश्वविद्यालय में रामजस कॉलेज के शिक्षक , नव भारत टाइम्स के संपादक और फिर स्वतंत्र लेखन उनके बौद्धिक जीवन का हिस्सा रहा ।उनका निधन दुखदायी है । विनम्र श्रद्धांजलि ।ॐ शांति
— Prof Rakesh Sinha (@RakeshSinha01) April 7, 2025
बता दें कि सूर्यकांत बाली का जन्म नौ नवंबर, 1943 को मुलतान (अविभाज्य भारत) में हुआ था। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने हंसराज कॉलेज से बी.ए. ऑनर्स (अंग्रेजी), एम.ए. (संस्कृत) और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से ही संस्कृत भाषाविज्ञान में पी-एच.डी. की। इसके बाद उन्होंने खुद को अध्ययन-अध्यापन और लेखन से खुद को जोड़ लिया।
उन्होंने राजनीतिक लेखन पर केंद्रित दो किताबें- ‘भारत की राजनीति के महाप्रश्न’ और ‘भारत के व्यक्तित्व की पहचान’ लिखीं। इसके अलावा उन्होंने भारतीय पुराविद्या पर तीन किताबें-‘Contribution of Bhattoji Dikshit to Sanskrit Grammar (Ph.D. Thisis)’, ‘Historical and Critical Studies in the Atharvaved (Ed)’ और महाभारत केंद्रित पुस्तक ‘महाभारतः पुनर्पाठ’ लिखीं। उन्होंने वैदिक कथारूपों को हिंदी में पहली बार दो उपन्यासों ‘तुम कब आओगे श्यावा’ तथा ‘दीर्घतमा’ के रूप में प्रस्तुत किया।
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