इंडिया टुडे ग्रुप ने रुचिका मेहता की जिम्मेदारियां बढ़ाते हुए उन्हें इंडिया टुडे स्पाइस की एडिटर नियुक्त किया है। वह हेलो! इंडिया और ब्राइड्स टुडे की एडिटर भी हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) ने रुचिका मेहता (Ruchika Mehta) की जिम्मेदारियां बढ़ाते हुए उन्हें इंडिया टुडे स्पाइस (India Today Spice) की एडिटर नियुक्त किया है। वह अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के तहत हेलो! इंडिया (Hello! India) और ब्राइड्स टुडे (Brides Today) की एडिटर भी हैं।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब इंडिया टुडे ग्रुप अपने लग्जरी और लाइफस्टाइल पोर्टफोलियो (Luxury and Lifestyle Portfolio) को मजबूत कर रहा है। इसमें इंडिया टुडे स्पाइस के साथ हार्पर्स बाजार इंडिया (Harper’s Bazaar India), कॉस्मोपॉलिटन इंडिया (Cosmopolitan India), हेलो! इंडिया और ब्राइड्स टुडे शामिल हैं।
नई जिम्मेदारी के साथ रुचिका मेहता ग्रुप के लग्जरी और लाइफस्टाइल बिजनेस के तहत तीन पब्लिकेशंस की एडिटोरियल डायरेक्शन (Editorial Direction) संभालेंगी।
यह बदलाव इंडिया टुडे ग्रुप की व्यापक लीडरशिप रिस्ट्रक्चरिंग (Leadership Restructuring) का हिस्सा है। ग्रुप अपने प्रीमियम पब्लिशिंग बिजनेस (Premium Publishing Business) की ग्रोथ को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है, जिसे नए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज (Intellectual Properties), बढ़े हुए कमर्शियल अवसरों और प्रिंट व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से बढ़ते रेवेन्यू योगदान का समर्थन मिल रहा है।
इंडिया टुडे ग्रुप ने कमलिनी चटर्जी की जिम्मेदारियां बढ़ाते हुए उन्हें लग्जरी और लाइफस्टाइल पोर्टफोलियो के पांचों ब्रांड्स की सेल्स लीडरशिप की जिम्मेदारी सौंपी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) ने वाइस प्रेसिडेंट–सेल्स कमलिनी चटर्जी (Kamalinee Chatterjee) की जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं। अब वह ग्रुप के लग्जरी और लाइफस्टाइल पोर्टफोलियो (Luxury and Lifestyle Portfolio) के सभी पांच ब्रांड्स की सेल्स लीडरशिप संभालेंगी।
नई जिम्मेदारी के तहत कमलिनी चटर्जी अब हार्पर्स बाजार इंडिया (Harper’s Bazaar India), कॉस्मोपॉलिटन इंडिया (Cosmopolitan India), हेलो! इंडिया (Hello! India) और ब्राइड्स टुडे (Brides Today) के साथ इंडिया टुडे स्पाइस (India Today Spice) की सेल्स भी देखेंगी।
इंडिया टुडे स्पाइस के पोर्टफोलियो में शामिल होने के साथ कमलिनी सभी पांचों ब्रांड्स की सेल्स को एक कंसोलिडेटेड सेल्स लीडरशिप स्ट्रक्चर (Consolidated Sales Leadership Structure) के तहत लीड करेंगी।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब इंडिया टुडे ग्रुप अपने लग्जरी और लाइफस्टाइल बिजनेस को मजबूत कर रहा है। इस बिजनेस में नए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज (Intellectual Properties), व्यापक कमर्शियल अवसरों और प्रिंट व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से बढ़े रेवेन्यू योगदान के जरिए हाल के वर्षों में ग्रोथ देखने को मिली है।
कमलिनी चटर्जी की बढ़ी हुई जिम्मेदारियां इंडिया टुडे ग्रुप की व्यापक लीडरशिप रिस्ट्रक्चरिंग (Leadership Restructuring) का हिस्सा हैं। इसका उद्देश्य ग्रुप के लग्जरी और लाइफस्टाइल बिजनेस की कमर्शियल ग्रोथ को आगे बढ़ाना है।
शशांक डबराल को पारस बिल्डटेक में हेड ऑफ सेल्स नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट में छह वर्षों से अधिक समय तक रीजन हेड सेल्स रहे।
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रियल एस्टेट कंपनी पारस बिल्डटेक (Paras Buildtech) ने शशांक डबराल (Shashank Dabral) को हेड ऑफ सेल्स (Head of Sales) नियुक्त किया है। अपनी नई जिम्मेदारी में वह कंपनी की ग्रोथ इनिशिएटिव्स (Growth Initiatives) को लीड करेंगे और मार्केट प्रेजेंस (Market Presence) बढ़ाने के साथ रेवेन्यू (Revenue) को आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं को तैयार और लागू करेंगे।
इससे पहले डबराल आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट (Aditya Birla Real Estate) में नॉर्थ के रीजन हेड - सेल्स (Region Head - Sales, North) के पद पर छह वर्षों से अधिक समय तक कार्यरत रहे। इससे पहले उन्होंने गोदरेज प्रॉपर्टीज (Godrej Properties) के साथ करीब साढ़े तीन साल तक काम किया है।
पारस बिल्डटेक में डबराल की जिम्मेदारी कंपनी की सेल्स ग्रोथ को मजबूत करने, बाजार में मौजूदगी बढ़ाने और रेवेन्यू ग्रोथ के लिए प्रभावी प्रक्रियाएं विकसित करने पर रहेगी।
PVR INOX Limited ने गुरुग्राम के DLF Summit Plaza में अपना नया 3-स्क्रीन मल्टीप्लेक्स शुरू किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
PVR INOX Limited ने गुरुग्राम के DLF Summit Plaza में अपना नया 3-स्क्रीन मल्टीप्लेक्स शुरू किया है। कंपनी ने 17 सितंबर 2026 को इसकी जानकारी दी। यह नया सिनेमाघर गोल्फ कोर्स रोड पर स्थित है और इसमें दर्शकों के आराम के साथ बेहतर सिनेमा अनुभव पर खास ध्यान दिया गया है।
इस नए मल्टीप्लेक्स के शुरू होने के साथ PVR INOX के पास अब भारत और श्रीलंका के 114 शहरों में 357 जगहों पर कुल 1,792 स्क्रीन हो गई हैं। कंपनी के मुताबिक, यह देश का सबसे बड़ा मल्टीप्लेक्स नेटवर्क है।
352 प्रीमियम सीटों से लैस है मल्टीप्लेक्स
नए मल्टीप्लेक्स में तीन ऑडिटोरियम हैं, जिनमें कुल 352 प्रीमियम Sapphire सीटें लगाई गई हैं। इन सीटों पर लेदर जैसी फिनिश दी गई है। सीटों के बीच 650 मिलीमीटर की दूरी और आगे-पीछे सीटों के बीच 1,500 मिलीमीटर की जगह रखी गई है, जिससे दर्शकों को बैठने के लिए ज्यादा व्यक्तिगत जगह और आराम मिल सके।
तीनों स्क्रीन में 4K डिजिटल लेजर प्रोजेक्शन, Dolby 7.1 सराउंड साउंड और Next-Gen 3D की सुविधा है। कंपनी के अनुसार, इससे दर्शकों को साफ तस्वीर, बेहतर आवाज और ज्यादा वास्तविक सिनेमा अनुभव मिलेगा।
खास डिजाइन पर भी दिया गया ध्यान
मल्टीप्लेक्स के तीनों ऑडिटोरियम को अलग-अलग रंगों की थीम में सजाया गया है, जिससे हर स्क्रीन की अपनी अलग पहचान नजर आती है। घुमावदार दीवारों, बेहतर ऑडियो फैसिलिटी और रोशनी वाले पैनल के जरिए स्क्रीन को अलग पहचान देने की कोशिश की गई है।
मल्टीप्लेक्स की लॉबी भी इसका खास हिस्सा है। इसे सामान्य सिनेमा लॉबी की तरह न बनाकर एक ऐसे सामाजिक स्थान के रूप में तैयार किया गया है, जहां दर्शक फिल्म शुरू होने से पहले या बाद में बैठकर समय बिता सकें।यहां लटकती हुई रोशनी, कैफे जैसी बैठने की व्यवस्था और अलग सामाजिक क्षेत्र बनाए गए हैं। हरियाली और प्राकृतिक तत्वों का भी इस्तेमाल किया गया है। गर्म रोशनी के साथ आरामदायक माहौल तैयार किया गया है।
लॉबी में पुराने दौर के प्रोजेक्टर की क्रोम-प्लेटेड स्थापना भी की गई है, जो यहां आने वाले दर्शकों के लिए एक खास आकर्षण है। मेटल की सजावट, अलग-अलग बनावट और गर्म रंगों के इस्तेमाल से पूरे स्थान को आधुनिक और प्रीमियम रूप देने की कोशिश की गई है।
PVR INOX Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय कुमार बिजली ने कहा कि गुरुग्राम भारत की महत्वाकांक्षा, ऊर्जा और आधुनिक जीवनशैली को दिखाने वाला शहर है। DLF Summit Plaza में नए मल्टीप्लेक्स की शुरुआत आधुनिक दर्शकों की जीवनशैली के अनुरूप बेहतर सिनेमा अनुभव देने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दिखाती है। उन्होंने कहा कि DLF5 और Golf Course Road के बीच स्थित यह मल्टीप्लेक्स आराम, डिजाइन, तकनीक और हॉस्पिटैलिटी को एक साथ लाता है और गुरुग्राम के लिए मनोरंजन का एक नया स्थान तैयार करता है।
PVR INOX के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर संजीव कुमार ने कहा कि भारत में मनोरंजन का माहौल बदल रहा है और दर्शक अब सिर्फ फिल्म देखने की जगह से ज्यादा की उम्मीद कर रहे हैं। वे ऐसे अनुभव चाहते हैं, जहां जुड़ाव, खोज और मनोरंजन के पल मिल सकें। उन्होंने कहा कि DLF Summit Plaza का नया मल्टीप्लेक्स एक पूरी तरह से मनोरंजन और आराम के स्थान के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें बेहतर डिजाइन, प्रीमियम आराम और सामाजिक माहौल को ध्यान में रखा गया है।
PVR INOX Limited भारत की सबसे बड़ी फिल्म प्रदर्शन कंपनियों में से एक है। कंपनी भारत और श्रीलंका के 114 शहरों में 357 जगहों पर 1,792 स्क्रीन संचालित करती है। कंपनी का गठन 2023 में PVR Limited और INOX Leisure Limited के विलय के बाद हुआ था। दोनों कंपनियां देश के स्थापित सिनेमा ब्रैंड्स में शामिल रही हैं।
PVR INOX नई तकनीक, अगली पीढ़ी के सिनेमा फॉर्मेट और बेहतर दर्शक अनुभव में निवेश कर रही है। कंपनी के नेटवर्क में बच्चों के लिए बनाए गए ऑडिटोरियम, आधुनिक प्रोजेक्शन और साउंड तकनीक, अलग-अलग तरह के खाने-पीने के विकल्प, फिल्म और गैर-फिल्म कार्यक्रमों के साथ प्रीमियम बड़ी स्क्रीन भी शामिल हैं।
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग के बजाय सभी वैध विकल्पों पर विचार करने को कहा है। नोएल एन टाटा ने पुरानी स्वामित्व व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) ने टाटा संस (Tata Sons) को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध (Publicly Listed) करने के अलावा सभी उपलब्ध विकल्पों पर तत्काल विचार करने को कहा है। यह फैसला 11 सितंबर 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) से मिले संचार के बाद हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक (Board Meeting) में चर्चा के दौरान सामने आया।
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा (Noel N Tata) ने बैठक में ट्रस्ट्स के पुराने रुख को दोहराया। उन्होंने टाटा संस और टाटा समूह (Tata Group) की एक सदी से ज्यादा पुरानी स्वामित्व व्यवस्था (Ownership Structure) को बनाए रखने पर जोर दिया।
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की लिस्टिंग (Listing) पर सहमति नहीं दी है। बोर्ड ने तय किया कि केवल सार्वजनिक लिस्टिंग पर निर्भर रहने के बजाय सभी वैध विकल्पों का विस्तार से अध्ययन किया जाए। इसकी रिपोर्ट और सिफारिशें बोर्ड के सामने रखी जाएंगी। इसके बाद अलग बैठक में आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
टाटा संस का बोर्ड मार्च 2024 में दिवंगत रतन टाटा (Ratan Tata) के मार्गदर्शन में सर्वसम्मति से कंपनी को गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) बनाए रखने का फैसला कर चुका था। जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (Sir Dorabji Tata Trust) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) ने भी सर्वसम्मति से कंपनी को गैर-सूचीबद्ध रखने के प्रस्ताव पारित किए थे।
नोएल एन टाटा ने कहा कि टाटा समूह की स्थापना राष्ट्रीय सेवा के उद्देश्य से कारोबार के माध्यम से हुई थी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट आधारित स्वामित्व व्यवस्था से मिलने वाले लाभांश (Dividend) से अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और शोध कार्यों को सहायता मिलती है।
उनके अनुसार, लिस्टिंग से इस व्यवस्था और समूह के मूल चरित्र पर असर पड़ सकता है। टाटा ट्रस्ट्स ने सभी कानूनी और पारदर्शी विकल्पों (Legal and Transparent Options) पर विचार करने की बात कही है।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में अब्दुल वदूद साजिद ने विद्यार्थियों से संवाद किया और पत्रकारिता में सवालों के तेवर, व्यवहार तथा सीखने की जरूरत बताई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication) के जनसंचार विभाग में बुधवार को विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दैनिक ‘इंकलाब’ (Inquilab) के संपादक अब्दुल वदूद साजिद (Abdul Wadud Sajid) ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया और पत्रकारिता में अपने चार दशक के अनुभव साझा किए।
कर्नल गद्दाफी और सद्दाम हुसैन जैसे वैश्विक नेताओं के इंटरव्यू (Interview) का अनुभव साझा करते हुए साजिद ने कहा कि असली पत्रकार वही है जो बिना किसी पूर्वग्रह या पूरी तैयारी के भी परिस्थितियों को संभालने का हुनर रखता हो। पत्रकार को हर घटना से लगातार सीखते रहना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक रहने की सलाह देते हुए कहा कि समय का पहिया घूमता रहता है और अच्छा-बुरा दौर आता-जाता रहता है। मुख्यधारा की मीडिया (Mainstream Media) में किसी स्थिति से लोग खुश या नाराज हो सकते हैं, लेकिन पत्रकार को किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए।
साजिद ने आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए विद्यार्थियों से कहा कि अकेले होने पर आईने के सामने खड़े होकर खुद से कहें कि ‘मुझे सब कुछ आता है।’ वहीं दूसरे व्यक्ति से बातचीत के दौरान व्यवहार और भाव हमेशा सीखने वाला होना चाहिए।
इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) में सवालों के लहजे और गरिमा पर उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की एक पत्रकार वार्ता का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आजकल प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार सवाल पूछते नहीं, बल्कि ‘दागते’ हैं। सवाल पूछने और दागने में बहुत फर्क है। सवाल सख्त और तीखे हो सकते हैं, लेकिन पत्रकार का लहजा हमेशा नरम और शालीन होना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस का मतलब बहस या लड़ाई करना नहीं है।
स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Struggle) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के आजादी के आंदोलन में उर्दू पत्रकारिता ने बागी पत्रकारिता की भूमिका निभाई थी।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. संजय द्विवेदी, सहायक प्राध्यापक डॉ. लाल बहादुर ओझा, एडजंक्ट प्रोफेसर गिरीश उपाध्याय, डॉ. गरिमा पटेल, डॉ. शलभ श्रीवास्तव, डॉ. बबिता रानी घोष, डॉ. उदित्य सिंह सेंगर सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इस अवसर पर विद्यार्थी विनम्र तिवारी ने विभाग की ओर से पुस्तकें भेंट कर अब्दुल वदूद साजिद का स्वागत किया।
पंकज कालरा को जी म्यूजिक कंपनी में डायरेक्टर-मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए नई भूमिका साझा की। इससे पहले वह सारेगामा इंडिया में मार्केटिंग संभाल रहे थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी म्यूजिक कंपनी (Zee Music Company) ने पंकज कालरा को डायरेक्टर-मार्केटिंग (Director - Marketing) नियुक्त किया है। कालरा ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
कालरा ने पोस्ट में लिखा कि वह जी म्यूजिक कंपनी में डायरेक्टर-मार्केटिंग के तौर पर नई जिम्मेदारी शुरू करने को लेकर खुश हैं। जी म्यूजिक कंपनी से पहले कालरा सारेगामा इंडिया (Saregama India) में चीफ मैनेजर-मार्केटिंग (Chief Manager-Marketing) के पद पर कार्यरत थे। वह चार साल से ज्यादा समय तक सारेगामा के साथ जुड़े रहे।
सारेगामा से पहले कालरा ने हंगामा (Hungama) में पांच साल से ज्यादा समय तक काम किया। अपने करियर में वह 9एक्स मीडिया (9X Media) के साथ भी काम कर चुके हैं।
बीसीसीआई ने आईपीएल 2027 के मिनी ऑक्शन को भारत में कराने का फैसला किया है। तीन साल बाद विदेशी आयोजन का सिलसिला खत्म होगा, जबकि इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर फैसला टल गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) यानी बीसीसीआई (BCCI) ने आईपीएल 2027 (IPL 2027) के मिनी ऑक्शन (Mini Auction) को भारत में कराने का फैसला किया है। इसके साथ ही तीन साल से चले आ रहे विदेशी वेन्यू (Overseas Venue) के सिलसिले पर भी रोक लगेगी। हालांकि, इम्पैक्ट प्लेयर नियम (Impact Player Rule) के भविष्य पर फैसला फिलहाल टाल दिया गया है।
ये फैसले 15 सितंबर को हुई आईपीएल गवर्निंग काउंसिल (IPL Governing Council) की बैठक में लिए गए। हालांकि, बीसीसीआई ने अभी उस भारतीय शहर का नाम तय नहीं किया है, जहां मिनी ऑक्शन आयोजित किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेन्यू तय करने में होटल की उपलब्धता और दूसरी लॉजिस्टिक जरूरतों (Logistical Requirements) को ध्यान में रखा जाएगा।
फ्रेंचाइजियों (Franchises) की ओर से विदेशी मिनी ऑक्शन के लिए बड़ी टीम डेलिगेशन (Team Delegation) को विदेश ले जाने से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर चिंताएं सामने आती रही हैं। ऑक्शन के लिए सीनियर मैनेजमेंट और कोचिंग स्टाफ के साथ यात्रा, होटल, स्थानीय परिवहन और दूसरी ऑपरेशनल व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं।
भारत में ऑक्शन की वापसी से इन लॉजिस्टिक जरूरतों को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा। आईपीएल का मिनी ऑक्शन आखिरी बार 2023 में भारत के कोच्चि में हुआ था। इसके बाद दुबई, जेद्दा और अबू धाबी में लगातार तीन ऑक्शन आयोजित किए गए।
बीसीसीआई ने अभी ऑक्शन की सटीक तारीख भी घोषित नहीं की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, होटल की उपलब्धता वेन्यू चुनने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसकी एक वजह यह भी है कि ऑक्शन की तैयारी अक्टूबर से दिसंबर के बीच भारत के पीक वेडिंग सीजन (Peak Wedding Season) के साथ हो रही है।
समारोह में प्रसिद्ध गायिका ज्योति नूरां ने अपनी दमदार और सुरीली प्रस्तुति से दर्शकों का मनोरंजन किया। वहीं, शिखा खरे और उनकी टीम ने ‘रिद्म विदआउट बॉर्डर्स’ नाम से फ्यूजन डांस प्रस्तुति दी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के पब्लिक ब्रॉडकास्टर दूरदर्शन (Doordarshan) ने मंगलवार को मंडी हाउस स्थित दूरदर्शन भवन में अपना 67वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर संगीत, नृत्य और मनोरंजन से सजे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष समारोह की थीम ‘दूरदर्शन@67– कल भी अपना, आज भी अपना’ रही।
समारोह में प्रसिद्ध गायिका ज्योति नूरां ने अपनी दमदार और सुरीली प्रस्तुति से दर्शकों का मनोरंजन किया। वहीं, शिखा खरे और उनकी टीम ने ‘रिद्म विदआउट बॉर्डर्स’ नाम से फ्यूजन डांस प्रस्तुति दी।
यह कार्यक्रम दूरदर्शन की छह दशकों से ज्यादा लंबी यात्रा और दर्शकों की कई पीढ़ियों के साथ उसके जुड़ाव का प्रतीक था। इस कार्यक्रम में दूरदर्शन के आने वाले धारावाहिक ‘संस्कार’ और ‘सुराग 2.0’ के साथ-साथ कुछ पुराने लोकप्रिय शो से जुड़ी हस्तियों के साथ बातचीत भी शामिल थी। इनमें के.सी. बोकाडिया, महेश ठाकुर, अमन वर्मा, दर्शन जरीवाला, पंकज बेरी, सुदेश बेरी, साई केतन राव, जिज्ञासा सिंह और रेहान शाहरुख मिर्जाबेग आदि शामिल थे।
समारोह का संचालन नमिता सचदेवा और अभिनेता-हास्य कलाकार अली असगर ने किया। दोनों ने अपनी प्रस्तुति और संवाद से कार्यक्रम को मनोरंजक बनाए रखा।
छह दशक से अधिक की यात्रा: दूरदर्शन छह दशकों से अधिक समय से भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। बदलते मीडिया परिदृश्य के साथ दूरदर्शन ने नई तकनीकों और डिजिटल मंचों को अपनाया है, लेकिन अपनी विशिष्ट पहचान और सार्वजनिक सेवा की भूमिका को कायम रखा है। 15 सितंबर, 1959 को दिल्ली में दूरदर्शन ने प्रायोगिक टेलीविजन प्रसारण शुरू किया था।
On the occasion of Doordarshan’s 67th Foundation Day, the team of Suraag 2.0 shared a special moment with Director General, Doordarshan, Rina Sonowal Kouli, DDG, Chandrashekhar, and ADG, Content Sourcing, Dinesh Pratap Singh.#67thDDFoundationDay #Doordarshan67 #DDturns67… pic.twitter.com/qhlRBDljrQ
— Doordarshan National दूरदर्शन नेशनल (@DDNational) September 15, 2026
उत्तर प्रदेश के चर्चित यूट्यूबर अनुराग द्विवेदी ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में हैं।
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उत्तर प्रदेश के चर्चित यूट्यूबर अनुराग द्विवेदी ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में हैं। ED की यह जांच पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में 2022 में सामने आए एक कथित अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़ी है। जांच के दौरान एजेंसी को अनुराग द्विवेदी के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़े लोगों के बैंक खातों में पैसों के लेन-देन की जानकारी मिली।
ED के मुताबिक, जांच में सामने आया कि कथित अवैध बेटिंग ऐप्स से मिले पैसों को म्यूल बैंक अकाउंट्स और हवाला नेटवर्क के जरिए आगे भेजा गया। एजेंसी का आरोप है कि इस रकम का कुछ हिस्सा अनुराग द्विवेदी से जुड़ी कंपनियों और उनके परिवार के सदस्यों के खातों में पहुंचा, जिसके पीछे कोई वैध कारोबारी आधार नहीं था।
2022 के बेटिंग मामले से जुड़ा है केस
ED की जांच पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से दर्ज एक FIR से शुरू हुई थी। एजेंसी के मुताबिक, सिलीगुड़ी से एक ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क चलाया जा रहा था, जिसमें म्यूल बैंक अकाउंट्स, Telegram चैनल और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच के दौरान ED ने अनुराग द्विवेदी पर अवैध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के प्रचार में भूमिका निभाने का आरोप लगाया। एजेंसी का कहना है कि उन्हें कथित बेटिंग से हुई कमाई का हिस्सा अलग-अलग माध्यमों से मिला।
कई शहरों में हुई थी छापेमारी
ED ने दिसंबर 2025 में लखनऊ, उन्नाव और दिल्ली में अनुराग द्विवेदी से जुड़े 10 ठिकानों पर तलाशी ली थी। एजेंसी की प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस दौरान करीब 20 लाख रुपये नकद, दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। चार महंगी गाड़ियां भी जब्त की गईं, जिनमें Lamborghini Urus, Mercedes, Ford Endeavour और Mahindra Thar शामिल थीं।
ED ने यह भी कहा था कि जांच में दुबई में रियल एस्टेट निवेश से जुड़े दस्तावेज मिले और हवाला चैनलों के इस्तेमाल के संकेत मिले। इसके अलावा करीब 3 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस, इंश्योरेंस पॉलिसी और अन्य चल संपत्तियों को फ्रीज किया गया था।
बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने इस मामले में करीब ₹23.7 करोड़ की चल संपत्तियां अटैच/फ्रीज की थीं और कोलकाता की विशेष PMLA अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की जा चुकी है। मामले में जांच अभी जारी है।
सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं अनुराग
अनुराग द्विवेदी क्रिकेट और क्रिकेटर्स से जुड़ा कंटेंट बनाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फॉलोइंग है और वह ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स और गेमिंग से जुड़े रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपना 26वां जन्मदिन भी मनाया और सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्नाव और नवाबगंज के कुछ रेस्टोरेंट्स में अपने फॉलोअर्स के लिए खाने का इंतजाम करने की जानकारी दी थी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ED की ओर से लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं; मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि मौत से पहले मीडिया को दिया गया कथित बयान अपने आप ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ नहीं माना जा सकता और इसके आधार पर FIR दर्ज कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि मौत से कुछ समय पहले किसी व्यक्ति की ओर से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को दिया गया कथित बयान, जिसमें उसने पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया हो, इस स्तर पर अपने आप ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ यानी मृत्यु पूर्व बयान नहीं माना जा सकता। ऐसे बयान के आधार पर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
जस्टिस हिमांशु जोशी ने यह टिप्पणी दिवंगत बंशीलाल कुशवाहा की पत्नी की याचिका खारिज करते हुए की। पत्नी का आरोप था कि अप्रैल 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके पति के साथ मारपीट की थी, जिसके बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
कोर्ट ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने दिवंगत व्यक्ति की ओर से दिया गया कथित बयान इस स्तर पर निर्णायक रूप से डाइंग डिक्लेरेशन नहीं माना जा सकता, जिससे एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देना जरूरी हो जाए।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि मीडिया के सामने दिए गए कथित बयान की वास्तविकता और उसकी कानूनी अहमियत को कानून के मुताबिक साबित करना होगा। कोर्ट के अनुसार, ये ऐसे मामले हैं जिनमें सबूत की जरूरत होगी।
क्या है मामला
मामला 16 अप्रैल 2020 का है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, बंशीलाल गाय को चारा खिलाकर खेत से लौट रहे थे। इसी दौरान जबलपुर के गोरा बाजार थाने में तैनात पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। उन्हें चोटें आईं और अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चार दिन बाद उनकी मौत हो गई।
बंशीलाल की पत्नी का कहना था कि मौत से पहले उनके पति ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बात की थी और कथित तौर पर उन पुलिसकर्मियों के नाम भी बताए थे, जिन्हें वह मारपीट के लिए जिम्मेदार मानते थे। पत्नी ने इस बयान को डाइंग डिक्लेरेशन की प्रकृति वाला सबूत बताते हुए इसके अलावा तस्वीरें, अखबारों की कटिंग, मर्ग सूचना, पंचनामा, अस्पताल के रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अधिकारियों के सामने रखी।
जिला प्रशासन ने परिवार को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि भी दी थी। याचिकाकर्ता ने 12 जून और 25 जून 2020 को पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत की, लेकिन उसके मुताबिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
इसके बाद उन्होंने जबलपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत का रुख किया और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की। मजिस्ट्रेट ने पुलिस रिपोर्ट मंगाने और मर्ग जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों पर विचार करने के बाद 13 सितंबर 2021 को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। इसके बजाय अदालत ने मामले को सीआरपीसी की धारा 200 के तहत शिकायत के रूप में आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
इस आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को भी जबलपुर के द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 17 फरवरी 2022 को खारिज कर दिया।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने दोनों आदेशों को हाई कोर्ट में चुनौती दी। उनकी ओर से वकील अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने दलील दी कि निचली अदालतों ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री, खासकर दिवंगत के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने दिए गए बयान को सही तरीके से नहीं देखा।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर की गई थी। उनका कहना था कि तस्वीरें, मेडिकल दस्तावेज और जिला प्रशासन की ओर से दी गई अनुग्रह राशि पुलिस की ओर से मारपीट के आरोपों का समर्थन करते हैं।
वहीं, जवाब देने वाले पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने हाई कोर्ट को बताया कि मामले की कई स्तरों पर जांच हो चुकी है। उनके मुताबिक मर्ग जांच के दौरान जांच की गई, संबंधित लोगों के बयान लिए गए, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सामग्री की जांच हुई और मेडिकल व फोरेंसिक रिपोर्ट भी हासिल की गईं।
जवाब देने वाले पक्ष ने यह भी बताया कि मामले में मजिस्ट्रेट जांच और विभागीय जांच भी हुई थी। दोनों जांच में पुलिसकर्मियों की ओर से मारपीट के आरोप की पुष्टि नहीं हुई।
‘बीमारी की वजह से भी हो सकता है खून’
जवाब देने वाले पक्ष ने मेडिकल सबूतों का भी हवाला दिया। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद एनएससीबी मेडिकल कॉलेज, जबलपुर के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग की राय का उल्लेख किया। इसमें कहा गया था कि कोई चोट नहीं थी और खून आना किडनी, फेफड़ों या लिवर की बीमारी के कारण भी हो सकता है।
जवाब देने वाले पक्ष के अनुसार, फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट में किसी रासायनिक जहर की मौजूदगी नहीं मिली। हाई कोर्ट ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मामले में मौजूद अलग-अलग सामग्री का नए सिरे से आकलन करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से दी गई 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि को आरोपों के समर्थन में सबूत मानने की दलील को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि केवल इस भुगतान से यह साबित नहीं होता कि मौत हत्या की वजह से हुई या इसमें पुलिसकर्मियों की भूमिका थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर के आरोप पर भी हाई कोर्ट ने कहा कि यह एक विवादित तथ्य है और इसके समर्थन में कोई ठोस सामग्री पेश नहीं की गई है। वहीं, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जवाब देने वाले पक्ष ने मेडिकल राय, FSL रिपोर्ट और जांच रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी थीं।
हालांकि, हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि याचिकाकर्ता के पास कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा है।