IIMC में संवाद और विमर्श का माध्यम बनेगा हिंदी पखवाड़ा

हिंदी दिवस से की जाएगी कार्यक्रमों की शुरुआत, कोविड-19 महामारी के कारण बदली परिस्थितियों के बावजूद इस पखवाड़े के आयोजन को लेकर उत्साह और उमंग में कोई कमी नहीं है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 14 September, 2020
Last Modified:
Monday, 14 September, 2020
IIMC

देश का प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्‍थान’ (आईआईएमसी) हर बार की तरह इस वर्ष भी हिंदी पखवाड़े का आयोजन नए अंदाज और नए कलेवर के साथ कर रहा है। कोविड-19 महामारी के कारण बदली परिस्थितियों के बावजूद इस पखवाड़े के आयोजन को लेकर उत्‍साह और उमंग में कोई कमी नहीं है। 14 से 28 सितंबर 2020 तक मनाए जाने वाले इस पखवाड़े का शुभारंभ और समापन राष्‍ट्रीय स्‍तर के दो महत्‍वपूर्ण विमर्शों के आयोजन से होने जा रहा है, जिनमें सात राज्‍यों के विद्वान अपने विचार प्रकट करेंगे। यह जानकारी आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने दी।

प्रो. द्विवेदी ने बताया कि पखवाड़े का शुभारंभ 14 सितंबर को ‘भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद’ विषय पर वेबिनार से होगा। इस वेबिनार में जनसत्‍ता के पूर्व संपादक एवं माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्‍युतानंद मिश्र मुख्‍य अतिथि होंगे। भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद पर होने वाले इस विमर्श में गुजराती भाषा के ‘साप्‍ताहिक साधना’ के प्रबंध संपादक मुकेश शाह, हैदराबाद से प्रकाशित होने वाले उर्दू दैनिक ‘डेली सियासत’ के संपादक अमीर अली खान तथा कोलकाता प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष स्‍नेहशीष सुर अपने विचार प्रकट करेंगे।

आईआईएमसी के महानिदेशक ने बताया कि पखवाड़े का समापन ‘राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय भाषाएं’ विषय पर वेबिनार से होगा। इस वेबिनार में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री मुख्‍य अतिथि होंगे, जबकि अध्‍यक्षता महात्‍मा गांधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा करेंगे। इस वेबिनार के अन्‍य वक्‍ताओं में नवभारत टाइम्‍स– मुंबई (महाराष्‍ट्र) के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, दैनिक जागरण, नई दिल्‍ली  के सह-संपादक अनंत विजय और पुड्डूचेरी विश्‍वविद्यालय, पुड्डूचेरी के हिंदी विभाग के अध्‍यक्ष डॉ. सी जयशंकर बाबू शामिल हैं।

प्रो. द्विवेदी ने हिंदी पखवाड़े के आयोजन के बारे में विस्‍तार से चर्चा करते हुए कहा कि लंबे अर्से से भारतीय भाषाओं के बीच अंतर-संवाद, अनुवाद, साहित्यिक और सांस्‍कृतिक संचार को बढ़ावा देने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने की आवश्‍यकता महसूस की जाती रही है। चूंकि हिंदी देश में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है, ऐसे में यह भारतीय भाषाओं के बीच अतंर-संवाद का प्रबल माध्यम सिद्ध हो सकती है। इस अंतर-संवाद से न सिर्फ राष्ट्रीय एकता की भावना और भाषाई सद्भावना को बढ़ावा मिलेगा, अपितु हमारी भारतीय भाषाओं को भी सम्मान मिलेगा।

उन्‍होंने कहा कि हाल ही में घोषित राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में भारत सरकार ने भारतीय भाषाओं के सम्मान के लिए विशेष कदम उठाए हैं। अंतत: भारतीय भाषाओं की प्रगति से ही राष्ट्र गौरव, और समाज के आत्मविश्वास एवं स्‍वाभिमान में भी वृद्धि होगी। भारतीय भाषाओं को सम्‍मान मिलने से न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव हो सकते हैं, अपितु इससे रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो सकती है। इसलिए संस्‍थान इस वर्ष हिंदी पखवाड़े को भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाने की भावना से मनाने जा रहा है।

इन विमर्शों के अतिरिक्‍त इस हर साल की तरह इस बार भी हिंदी पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं की प्रदर्शनी, निबंध प्रति‍योगिता, हिंद टिप्पणी एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिता, हिंदी काव्य पाठ प्रतियोगिता, हिंदी टंकण प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस बार पखवाड़े के दौरान ही भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षुओं के लिए कार्यशाला का आयोजन भी किया जा रहा है, ताकि उन्हें रोजमर्रा के सरकारी कामकाज को हिंदी में करने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जा सके। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि संस्‍थान की कोशिश है कि यह हिंदी पखवाड़ा कर्मकांड मात्र तक सीमित न रह जाए, बल्कि संवाद और विमर्श का प्रबल माध्‍यम सिद्ध हो।

 

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35 दिवंगत पत्रकारों के परिवारों को मिलेगी वित्तीय मदद, केंद्र ने दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने 35 दिवंगत पत्रकारों के परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Monday, 04 July, 2022
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केंद्र सरकार ने 35 दिवंगत पत्रकारों के परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बता दें कि इनमें से 16 पत्रकारों की जान कोविड की वजह से गई थी।

एक सरकारी बयान के मुताबिक, परिवारों को पांच लाख रुपए तक की सहायता दी जाएगी। सूचना-प्रसारण मंत्रालय में सचिव अपूर्वा चंद्रा की अध्यक्षता वाली पत्रकार कल्याण योजना समिति (जेडब्ल्यूएससी) ने स्थाई विकलांगता से पीड़ित दो पत्रकारों और गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे पांच पत्रकारों को भी सहायता देने की सिफारिश की है। यह अनुशंसा जेडब्ल्यूएस दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई है।

समिति ने बैठक के दौरान कुल 1.81 करोड़ रुपए की सहायता राशि स्वीकृत की है। इस योजना के तहत अब तक कोविड-19 के कारण जान गंवाने वाले 123 पत्रकारों के परिवारों को सहायता प्रदान की जा चुकी है।

जेडब्ल्यूएससी की बैठक में पीआईबी के प्रधान महानिदेशक जयदीप भटनागर, सूचना-प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव विक्रम सहाय के साथ-साथ समिति के पत्रकार प्रतिनिधि संतोष ठाकुर, अमित कुमार, उमेश्वर कुमार, सरजना शर्मा, राज किशोर तिवारी और गणेश बिष्ट शामिल हुए।

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पाकिस्तानी सेना की आलोचना करने को लेकर पत्रकार पर हमला

पाकिस्तान के लाहौर में वरिष्ठ पत्रकार अयाज आमिर पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने हमला कर दिया।

Last Modified:
Saturday, 02 July, 2022
AyazMir454

पाकिस्तान के लाहौर में वरिष्ठ पत्रकार अयाज आमिर पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने हमला कर दिया। यह घटना तब हुई है जब एक दिन पहले उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य जनरलों को ‘प्रॉपर्टी डीलर’ बताया था। इस हमले में अज्ञात हमलावरों ने वरिष्ठ पत्रकार अयाज आमिर के साथ मारपीट करने के साथ ही उनका मोबाइल भी छीन लिया, यह हमला लाहौर में ‘दुनिया न्यूज’ (Duniya News) कार्यालय के बाहर किया गया, जिसकी अब हर कोई कड़े शब्दों में आलोचना और निंदा कर रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार अयाज आमिर के साथ हुई इस हिंसा की जानकारी पत्रकार साबुख सैयद ने एक ट्वीट की जरिए दी। उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा है कि वरिष्ठ पत्रकार अयाज आमिर को दुनिया न्यूज चैनल के ऑफिस के बाहर कुछ अज्ञात हमालवरों ने पीटा, इस दौरान उन्होंने अयाज पर कई थप्पड़ भी जड़े और उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया।

73 वर्षीय आमिर एक संस्था के टीवी कार्यक्रम के प्रसारण के बाद घर लौट रहे थे, तभी अज्ञात लोगों ने उन्हें रोका। उन्होंने दावा किया कि उन्हें कार से बाहर खींचा गया और उनसे मारपीट की गयी। आमिर के चेहरे पर खरोंचे आयी हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि नकाबपोश बदमाशों ने न केवल उन पर हमला किया और उनके कपड़े फाड़े, बल्कि वे उनका मोबाइल फोन और पर्स भी ले लिए गए। भीड़भाड़ वाली सड़क पर लोगों के इकट्ठा होने के बाद हमलावर वहां से भाग निकले।

फिलहाल इस मामले में अब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान भी सामने आए हैं और उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए इसकी निंदा की है और मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, 'आज लाहौर में वरिष्ठ पत्रकार अयाज आमिर के खिलाफ हुई हिंसा की मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं।'

उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा 'पत्रकारों, राजनेताओं, नागरिकों के खिलाफ हिंसा और फर्जी प्राथमिकी के साथ पाकिस्तान सबसे खराब तरह के फासीवाद में उतर रहा है। जब राज्य सभी नैतिक अधिकार खो देता है तो वह हिंसा का सहारा लेता है।'

गौरतलब है कि गुरुवार को ‘सत्ता परिवर्तन और पाकिस्तान पर उसका परिणाम’ विषय पर इस्लामाबाद में एक संगोष्ठि में आमिर ने शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान पर पाकिस्तान की राजनीति में उसकी भूमिका को लेकर निशाना साधा। संगोष्ठि में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान भी शामिल हुए थे। उन्होंने सैन्य जनरलों को ‘प्रॉपर्टी डीलर’ बताया था और मोहम्मद अली जिन्ना और आलम इकबाल की तस्वीरें हटाकर उनकी जगह ‘प्रॉपर्टी डीलर्स’ की तस्वीरें लगाने का सुझाव दिया था।

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पुलिस ने मांगी मोहम्मद जुबैर की न्यायिक हिरासत, विदेशी कनेक्शन का दावा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर और हिंसा भड़काने के आरोपी मोहम्मद जुबैर को शनिवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया।

Last Modified:
Saturday, 02 July, 2022
Zubair5478

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर और हिंसा भड़काने के आरोपी मोहम्मद जुबैर को शनिवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। चार दिन की रिमांड पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से उसकी न्यायिका हिरासत मांगी है।

वहीं, मोहम्मद जुबैर के वकील ने मोहम्मद जुबैर की जमानत के लिए याचिका दायर की है।

दिल्‍ली पुलिस की तरफ से विशेष लोक अभियोजक (स्‍पेशल पब्लिक प्रोसीक्‍यूटर) अतुल श्रीवास्‍तव ने बताया कि जुबैर के खिलाफ एफआईआर में तीन और धाराएं जोड़ी गई हैं। अब IPC की धारा 120B (आपराधिक साजिश) और 201 (सबूत नष्ट करने- फोन को फॉर्मेट करने और ट्वीट डिलीट करने) व FCRA की धारा 35 के तहत भी जांच होगी।

पुलिस ने एफआईआर में विदेशी अनुदान (नियमन) अधिनियम 2010 की धारा जोड़ते हुए आरोप लगाया है कि मोहम्मद जुबैर के मामले में साजिश रची गई और सबूतों को नष्ट किया गया। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी को विदेशों से डोनेशन मिला है। 

पुलिस के अनुसार, 'जिस दिन जुबैर फोन लेकर स्‍पेशल सेल के ऑफिस आए, उसका एनालिसिस किया गया। पता चला कि उस दिन से पहले तक वह दूसरा सिम यूज कर रहे थे। जब उन्‍हें नोटिस मिला तो उन्‍होंने वही सिम निकाला और नए फोन में डाल दिया।  

दिल्‍ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि यदि आप दूसरे देश के व्‍यक्ति से दान वगैरह लेते हैं तो यह उल्‍लंघन है। CDS एनालिसिस के अनुसार, ‘जुबैर ने रेजर गेटवे के जरिए पाकिस्‍तान, सीरिया से पैसा लिया है जिसके बारे में और जांच की जरूरत है।’

पुलिस की दलीलों के जवाब में जुबैर की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि पूरी कवायद 'दुर्भावना' के चलते की जा रही है। उन्‍होंने IPC की धारा 153A और 295 में दर्ज पहली FIR पर भी सवाल उठाए। ग्रोवर ने पूछा कि 'क्‍या मोबाइल फोन या सिम कार्ड बदलना अपराध है? क्‍या फोन को रीफॉरमेट करना अपराध है? या चालाक होना अपराध है? इंडियन पीनल कोड के तहत इनमें से कुछ भी अपराध नहीं है। अगर आप किसी को पसंद नहीं करते तो ठीक है, लेकिन आप उस व्‍यक्ति को चालाक बताकर संदेह नहीं कर सकते।'

वहीं, जुबैर की ओर से पेश हुईं वरिष्‍ठ एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने अतुल श्रीवास्‍तव की दलीलों पर कहा कि 'इस केस में विभिन्‍न अदालतों की ओर से बनाई गईं गाइडलाइंस का माखौल बनाया जा रहा है।' ग्रोवर ने कहा कि ट्वीट 2018 का है। वह ट्वीट एंड्रॉयड फोन से किया गया, पर इन्‍होंने लैपटॉप सीज कर लिया। जुबैर की वकील ने कहा कि 'मेरा फोन किसी बाइक सवार ने छीन लिया था। कोई हैरानी की बात नहीं। 2021 में शिकायत दर्ज कराई। दस्‍तावेज मौजूद हैं।' ग्रोवर ने कहा कि एक फिल्‍म सीन को सेंसिटिव बताकर पेश किया जा रहा है, वैसे ट्वीट्स अब भी ट्विटर पर हैं। 40 साल तक फिल्‍म से कोई दिक्‍कत नहीं हुई और अब एक फॉलोवर वाले अनाम अकाउंट के टैग करने पर केस हो गया।

अदालत ने दिल्‍ली पुलिस से पूछा कि आप किस आधार पर और न्‍यायिक हिरासत चाहते हैं। स्‍पेशल पब्लिक प्रोसीक्‍यूटर ने डोनेशंस का जिक्र किया और कहा कि उन्‍हें विदेशी चंदों के बारे में और जानकारी के लिए जुबैर के फोन की जरूरत है। अतुल श्रीवास्‍तव ने कहा कि समय बेहद महत्‍वपूर्ण है। अदालत ने जब पूछा कि कितना समय चाहिए तो अतुल श्रीवास्‍वत ने कहा कि बैंक ट्रांजेक्‍शंस वह नाम दिखाते हैं जहां रकम आई। उन्‍होंने कहा कि हमें 3-4 दिन चाहिए। अदालत ने कहा कि वह लंच के बाद आदेश सुनाएगी।

जुबैर को 27 जून को दिल्ली पुलिस ने एक ट्वीट के जरिए धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसी दिन निचली अदालत ने एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। एक दिन की हिरासत में पूछताछ के बाद अदालत में पेश किए जाने पर मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने उसकी हिरासत चार दिनों के लिए बढ़ा दी थी। 

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ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र ने कही ये बात

भारत में ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी को लेकर अब संयुक्त राष्ट्र का बयान सामने आया है।

Last Modified:
Thursday, 30 June, 2022
Zubair454

भारत में ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी को लेकर अब संयुक्त राष्ट्र का बयान सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र महासविच एंटोनियो गुटेरस के प्रवक्ता ने मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए कहा, पत्रकार जो कुछ भी लिखते हैं, ट्वीट करते हैं या कहते हैं, उसके लिए उन्हें जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। यह आवश्यक है कि लोगों को निडर होकर अपनी बात कहने की अनुमति दी जाए।

बता दें कि, मोहम्मद जुबैर को 2018 के एक मामले में सोमवार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर हिंदू देवता के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट करने का आरोप है। 

जुबैर की गिरफ्तारी संबंधी एक सवाल पर पाकिस्तानी पत्रकार को जवाब देते हुए प्रवक्ता स्टीफेन दुजारिक ने कहा, ‘दुनिया में कहीं पर भी यह बेहद जरूरी है कि लोगों को खुलकर अपनी कहने की अनुमति दी जाए। पत्रकारों को मुक्त होकर और किसी भय के बिना अपनी बात कहने की इजाजत होनी चाहिए।’

दरअसल, एक पाकिस्तानी पत्रकार ने पूछा था कि क्या वह जुबैर की रिहाई का आह्वान करते हैं, इसके जवाब में दुजारिक ने कहा, ‘पत्रकार जो कुछ भी कहते हैं, लिखते हैं या ट्वीट करते हैं इसके लिए उन्हें जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। यह दुनिया में हर जगह लागू होता है।’

इस बीच, एक गैर सरकारी संगठन ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) ने भी जुबैर की गिरफ्तारी की निंदा की है। वॉशिंगटन में सीपीजे के एशिया कार्यक्रम समन्वयक स्टीवन बटलर ने कहा, ‘पत्रकार मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी से भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का स्तर और नीचे चला गया है। सरकार ने सांप्रदायिक मुद्दों से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने वाले प्रेस के सदस्यों के लिए एक असुरक्षित शत्रुतापूर्ण माहौल बना दिया है।’

उन्होंने कहा, ‘अधिकारियों को तत्काल और बिना किसी शर्त के जुबैर को रिहा करना चाहिए और उन्हें बिना किसी दखलंदाजी के अपनी पत्रकारिता करने देना चाहिए।’

जुबैर की गिरफ्तारी से पहले गुजरात पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को, 2002 गुजरात दंगों के सिलसिले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए अदालत में गलत साक्ष्य पेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था ने सामाजिक कार्यकर्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त की है और उन्हें तत्काल रिहा करने की मांग की है।

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घर के दरवाजे पर पत्रकार की गोली मारकर हत्या

घटना के दौरान अपनी 23 वर्षीय बेटी के साथ घर से कहीं जा रहे थे पत्रकार। हमले में बेटी हुई घायल

Last Modified:
Thursday, 30 June, 2022
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देश-दुनिया में पत्रकारों पर हमले की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। अब इस तरह की खबर मैक्सिको से आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्वोत्तर मैक्सिको में बुधवार को एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।

बताया जाता है कि करीब 47 वर्षीय एंटोनियो डी ला क्रूज (Antonio de la Cruz) नामक पत्रकार करीब तीन दशक से एक स्थानीय अखबार ‘एक्सप्रेसो’ (Expreso) में कार्यरत थे। वह अमेरिकी सीमा पर तमाउलिपास (Tamaulipas) राज्य की राजधानी स्यूदाद विक्टोरिया (Ciudad Victoria) में रहते थे। यह क्षेत्र संगठित अपराध से जुड़ी हिंसा की चपेट में है।

घटना के दौरान वह अपनी 23 वर्षीय बेटी के साथ घर से कहीं जा रहे थे। तभी अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा उन्हें घर के दरवाजे पर ही गोली मार दी गई। हमले में एंटोनियो डी ला क्रूज की मौत हो गई, जबकि उनकी बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एंटोनियो डी ला क्रूज की हत्या के साथ ही इस देश में इस वर्ष मारे गए पत्रकारों की संख्या 12 हो गई है।

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इस मंच पर हुआ पत्रकारों का सम्मान, तमाम हस्तियों ने की शिरकत

पूर्व सांसद व बॉलीवुड अभिनेत्री जयाप्रदा ने मीडिया में उत्कृष्ट योगदान के लिए सहारा न्यूज नेटवर्क के रमेश अवस्थी को बेस्ट मीडिया ग्रुप एडिटर के खिताब से नवाजा

Last Modified:
Tuesday, 28 June, 2022
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दिल्ली-एनसीआर के रेडिसन ब्लू होटल में AVIVA की ओर से ‘द गोल्डन स्टार आइकन अवॉर्ड’ का आयोजन किया गया, जहां देश की नामी-गिरामी हस्तियां शामिल हुईं।

26 जून रविवार को आयोजित समारोह में भारतीय फिल्म जगत की अभिनेत्री जयाप्रदा, बंगाल में भाजपा के वरिष्ठ नेता व पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अनुपम हाजरा, राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल, विधायक सुनील शर्मा, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, पूर्व विधायक ददन यादव और तमाम बड़ी हस्तियों ने शिरकत की।

पूर्व सांसद व बॉलीवुड अभिनेत्री जयाप्रदा ने मीडिया में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘सहारा न्यूज नेटवर्क’ के ग्रुप एडिटर रमेश अवस्थी को ‘बेस्ट मीडिया ग्रुप एडिटर’ का अवॉर्ड दिया। साथ ही ‘न्यूज24’ को सबसे ज्यादा भरोसेमंद चैनल का अवॉर्ड मिला, तो वहीं मीडिया जगत में ‘फास्टेस्ट ग्रोइंग’ के अवॉर्ड से ‘हिंदी खबर’ न्यूज चैनल को नवाजा गया, जबकि ‘न्यूज इंडिया’ के वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी को भी सम्मानित किया गया।

वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह को ‘अमेंडमेंट्स डिफेंस जर्निलस्ट’ खिताब से नवाजा गया। वहीं, पत्रकार रामवीर सुतार को ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से नवाजा गया है। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों के 50 से अधिक लोगों को भी सम्मानित किया गया है।

इस मौके पर फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा ने कहा कि इस तरह के आयोजन से लोगों का आत्मविश्वास बढ़ता है और बेहतर करने की इच्छा जागृत होती है और इन सबसे देश एक बड़े मुकाम की ओर आगे बढ़ता है।

‘द गोल्डन स्टार अवॉर्ड’ को पिछले सात सालों से AVIVA की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य देश में काम करने वाले उन तमाम लोगों को सम्मानित करना है, जो समाज को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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21 साल की न्यूज एंकर बनीं गांव की सरपंच, चुनाव में दी 8 उम्मीदवारों को शिकस्त

मध्‍य प्रदेश के उज्जैन जिले से सामने आई है, जहां महज 21 साल की लक्षिका डागर अपने गांव की सरपंच बन गई हैं।

Last Modified:
Tuesday, 28 June, 2022
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युवा पीढ़ी ग्‍लैमर की दुनिया से निकलकर अब समाजसेवा की तरफ न सिर्फ कदम बढ़ा रही है बल्‍क‍ि सफल भी हो रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल मध्‍य प्रदेश के उज्जैन जिले से सामने आई है, जहां महज 21 साल की लक्षिका डागर अपने गांव की सरपंच बन गई हैं।

लक्षिका ने रेडियो जॉकी और न्‍यूज एंकर होने के बावजूद समाजसेवा को चुना और 21 साल की उम्र में गांव की सरपंच बन गई हैं। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने उज्जैन जिले के चिंतामन जवासिया पंचायत में 487 मतों से सरपंच पद का चुनाव जीत लिया है। हालांकि, राज्य चुनाव आयोग ने उनको अभी जीत का प्रमाण पत्र नहीं दिया है। अब उनके गांव-घर में उत्साह और उमंग का माहौल है।

लक्षिता ने मास्टर्स उच्च शिक्षा में एमए मास कॉम की पढ़ाई की है। वह लोकल न्यूज चैनल में एंकर व रेडियो जॉकी का काम कर चुकी हैं।  

जब गांव की सीट एससी के लिए आरक्षित हुई तो लक्षिका ने लक्ष्य तय कर फॉर्म भरा और ऐतिहासिक जीत हासिल की। अब लक्षिता का लक्ष्य है कि वो गांव के लिए स्ट्रीट लाइट (बिजली) पानी, नाली, आवास विहीन लोगों के लिए आवास के लिए प्राथमिकता से कार्य करेगी। खास बात यह कि लक्षिका का 27 जून सोमवार को जन्मदिन था। जन्मदिन से एक दिन पहले की ये जीत लक्षिका के लिए किसी तोहफे से कम नहीं।

दरअसल, चिंतामण जवासिया गांव उज्जैन जनपद में आता है और शहर से 10 किलोमीटर करीब दूरी पर ही है जहां की आबादी 3265 के करीब है। गांव से इस एससी सीट पर कुल 8 महिलाओं ने फॉर्म भरा था लेकिन ग्रामीणों ने सबसे ज्यादा शिक्षित व कम उम्र की युवती पर भरोसा जताया। लक्षिका को 487 मत मिले और विजयी घोषित हुई। लक्षिका का पूरा नाम लक्षिका डागर है। उसके पिता दिलीप डागर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में रीजनल अधिकारी के पद पर हैं। मां, भाई और बहन ने लक्षिका को जितवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

लक्षिका लोकल न्यूज चैनल में एंकर व एफएम रेडियो में रेडियो जॉकी भी रह चुकी हैं।  मास कॉम व फैशन डिजाइन का कोर्स कर चुकी लक्षिका ग्रामीणों से जुड़ी रही और एक नया इतिहास रच दिया। जीत का विजय जुलूस भी ग्रामीणों ने देर रात निकाला और खूब स्वागत किया।

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मीडिया से बातचीत को लेकर राजस्थान यूनिवर्सिटी ने लिया यू-टर्न

राजस्थान यूनिवर्सिटी में कर्मचारियों और शिक्षकों की मीडिया से बातचीत पर लगी पाबंदी अब हटा ली  गई है।

Last Modified:
Tuesday, 28 June, 2022
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राजस्थान यूनिवर्सिटी में कर्मचारियों और शिक्षकों की मीडिया से बातचीत पर लगी पाबंदी अब हटा ली  गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार नीलिमा तक्षक ने लिखित आदेश जारी कर शिक्षकों और कर्मचारियों को मीडिया और सोशल मीडिया से दूरी बनाने की बात कही थी, जिस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रोक लगा दी है।

कुलपति प्रो. राजीव जैन ने रजिस्ट्रार नीलिमा तक्षक के आदेशों को वापस लेने के आदेश जारी कर दिए हैं। कुलपति प्रो. जैन ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार हर व्यक्ति को है, राजस्थान यूनिवर्सिटी एक संवैधानिक संस्था है ऐसे में हर व्यक्ति अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है, जिस पर इस तरह से रोक नहीं लगाई जा सकती। हालांकि यह फैसला शिक्षकों, कार्मिकों और छात्रसंगठनों द्वारा किए विरोध प्रदर्शन के बाद लिया गया है।

गौरतलब है कि कुछ मीडिया घरानों में राजस्थान यूनिवर्सिटी के विजुअल आर्ट विभाग की बदहाली की खबरें प्रसारित और प्रसारित हुई थीं, जिसके बाद यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार नीलिमा तक्षक ने एक आदेश जारी कर कार्मिकों, अधिकारियों और शिक्षकों के मीडिया से बात करने पर रोक लगा दी थी।

रजिस्ट्रार नीलिमा तक्षक द्वारा जारी आदेश में लिखा था कि विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, महाविद्यालयों और अन्य इकाइयों में कार्यरत विश्वविद्यालय के अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना सोशल मीडिया, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सूचना और जानकारियां दी जा रही है, जो नियम विरुद्ध है। विश्वविद्यालय हैण्ड बुक पार्ट-2 वॉल्यूम-3 में अध्यादेश - 360 (ई) के अन्तर्गत निम्न प्रावधान वर्णित है कि बिना सूचना और सक्षम अधिकारी की अनुमति के सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में कोई भी सूचना या जानकारी प्रेषित नहीं की जा सकती है। यदि विश्वविद्यालय का कोई भी शिक्षक, अधिकारी या कर्मचारी ऐसा कृत्य करता है तो वह विश्वविद्यालय नियमों के विरुद्ध माना जाएगा।

हालांकि इस आदेश के जारी होने के बाद यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों के साथ ही ABVP और NSUI ने भी यूनिवर्सिटी प्रशासन के इस आदेश का विरोध शुरू कर दिया था, जिसके बाद यूनिर्विसिटी प्रशासन को इस फैसले पर रोक लगानी पड़ी।

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'नैक' की दिशा में MCU के लिए प्रेरक होगी इंडिया टुडे की रैंकिंग: प्रो. केजी सुरेश

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय देश के टॉप 10 जनसंचार कॉलेजेस में शुमार हो गया है।

Last Modified:
Monday, 27 June, 2022
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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय देश के टॉप 10 जनसंचार कॉलेजेस में शुमार हो गया है। इंडिया टुडे द्वारा देश कई जनसंचार संस्थान, विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजेस की रैंकिंग की गई थी जिसमें पत्रकारिता विश्वविद्यालय को इंडिया टुडे ने  वर्ष 2022 में टॉप 10 की लिस्ट में शामिल किया है। पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के.जी. सुरेश ने इस रैंकिंग पर  खुशी जताते हुए कहा कि अकादमिक उन्नयन की दिशा में हमारे द्वारा किये जा रहे लगातार प्रयास का ही ये परिणाम है कि हम टॉप 10 में आए हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ये 'नैक' (National Assessment and Accreditation Council) की दिशा में विश्वविद्यालय के लिये प्रेरक होगा। प्रो. सुरेश ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय की गिनती देश के बेहतरीन विश्वविद्यालयों में होगी। कुलपति ने कहा कि यह बहुत ही खुशी और हर्ष की बात है कि हमारा पत्रकारिता विश्वविद्यालय पहली बार देश के टॉप 10 में आया है।

उल्लेखनीय है कि 2021 में इंडिया टुडे की रैंकिंग में एमसीयू 12 वें स्थान पर था, इस वर्ष जारी प्रवीणता की सूची में विश्वविद्यालय टॉप 10 में आ गया है। देश में टॉप 10 में नाम आने पर पत्रकारिता विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल है।

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जानी मानी पत्रकार वर्तिका नंदा ने इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया देश का प्रतिनिधित्व

जेल सुधार एक्टिविस्ट वर्तिका नंदा ने कार्यक्रम में अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा, ‘नमस्ते! मैं वर्तिका नंदा हूं, जो जेल की सलाखों के पीछे 'इंद्रधनुषी रंग' (rainbows) बिखेरने का प्रयास कर रही हूं।’

Last Modified:
Saturday, 25 June, 2022
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जानी-मानी पत्रकार और जेल सुधार एक्टिविस्ट वर्तिका नंदा ने नार्वे की राजधानी ओस्लो में 15 जून को आयोजित पहले ‘अंतरराष्ट्रीय जेल रेडियो सम्मेलन‘ (International Prison Radio Conference) में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

‘तिनका तिनका’ फाउंडेशन की संस्‍थापिका वर्तिका नंदा ने कार्यक्रम में अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा, ‘नमस्ते! मैं वर्तिका नंदा हूं, जो जेल की सलाखों के पीछे 'इंद्रधनुषी रंग' (rainbows) बिखेरने का प्रयास कर रही हूं।’  

‘प्रिजन रेडियो एसोसिएशन’ (Prison Radio Association) ने ‘नॉर्वेजियन सुधार सेवाओं‘ (Norwegian Correctional Services) के निदेशालय के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जेलों के मानवीकरण और कैदियों के पुनर्वास में जेल रेडियो के महत्व पर वैश्विक जानकारी और अनुभव साझा करना था।

अपने करीब 30 मिनट के संबोधन में वर्तिका नंदा ने भारत में जेल रेडियो और अपने गैर-लाभकारी संगठन ‘तिनका तिनका फाउंडेशन’ द्वारा आगरा और देहरादून की जिला जेलों के साथ-साथ हरियाणा की आठ जेलों में लागू जेल रेडियो पहल के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने बताया कि ‘तिनका तिनका‘ फाउंडेशन के तत्वावधान में 100 से अधिक कैदियों को रेडियो जॉकी (आरजे) के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। जेल रेडियो प्रशिक्षण और इसके कार्यान्वयन के दौरान लगभग एक दर्जन गाने जारी किए गए हैं।

इसके साथ ही वर्तिका नंदा ने 'जेल सुधारों के तिनका मॉडल' के बारे में भी बताया, जो मीडिया की शक्ति और रचनात्मकता के इस्तेमाल से जेल के कैदियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास है। इस दौरान उन्होंने अपने प्रयासों में सरकारी अधिकारियों से मिले समर्थन का भी उल्लेख किया।

नंदा ने समाज के समग्र प्रगतिशील विकास के लिए सलाखों के पीछे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि ‘तिनका तिनका‘ जेल रेडियो की मदद से जेलों में कैदियों के जीवन के बारे में बाहरी दुनिया को संवेदनशील बनाने की कोशिश कर रहा है।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में ओस्लो जेल के दौरे के साथ उसमें जेल रेडियो परियोजना के बारे में प्रतिनिधियों को जानने-समझने का मौका मिला। कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने इस दौरान जेल रेडियो परियोजनाओं से संबंधित तमाम पहलुओं पर भी अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों के बीच एक आम सहमति थी कि जेल रेडियो दुनिया भर में लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्रता को मजबूत कर सकता है।

बता दें कि वर्तिका नंदा दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज में पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष हैं और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपराध बीट की प्रमुख पत्रकार रही हैं। उनके कामों को दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस में शामिल किया जा चुका है। भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें 2014 में स्त्री शक्ति पुरस्कार दिया था।

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