कोरोना के संबंध में पत्रकार ने किया ये ट्वीट, पुलिस ने दिखाया हवालात का रास्ता

पुलिस ने लगाया गलत जानकारी फैलाने का आरोप, कोर्ट ने दी सशर्त जमानत

Last Modified:
Thursday, 30 April, 2020
Journalist Arrest

कोरोना के बारे में पुलिस की तार्किकता को लेकर सवाल उठाने वाले एक पत्रकार को गिरफ्तार करने का मामला सामने आया है। यह मामला अंडमान निकोबार का है। बाद में पत्रकार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई है।

दरअसल, जुबैर अहमद नामक पत्रकार ने 27 अप्रैल को एक ट्वीट कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उन परिवारों को भी होम क्वारंटाइन कर दिया है, जिन्होंने इस वायरस से संक्रमित अपने परिवार के सदस्य से फोन पर बात की थी।

इसके बाद पुलिस पूछताछ के लिए जुबैर को अपने साथ ले गई और बाद में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने जुबैर अहमद पर ‘अफवाह’ फैलाने समेत अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया है। अहमद साप्ताहिक समाचार पत्र ’लाइट ऑफ अंडमान’ के संपादक है, जो अब ऑनलाइन पब्लिश होता है।

इससे पहले 26 अप्रैल को किए गए एक अन्य ट्वीट में जुबैर अहमद ने कहा था, ‘ कोविड-19 की वजह से क्वारंटाइन किए गए लोगों से अपील है कि वह अपने परिचितों से फोन पर बात न करें। फोन कॉल के आधार पर लोगों की पहचान की जा रही है और उन्हें क्वारंटाइन किया जा रहा है।’

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जुबैर अहमद का कहना है कि उन्होंने एक न्यूज पढ़ी थी, जिसमें कहा गया था कि एक परिवार को इसलिए क्वारंटाइन किया जा रहा था, क्योंकि उस परिवार ने कोरोनावायरस (कोविड-19) पॉजिटिव अपने एक रिश्तेदार से टेलिफोन पर बात की थी। इस स्टोरी को पढ़ने के बाद उन्होंने ट्विटर पर इस बारे में स्थानीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था। जुबैर का कहना है कि पुलिस ने 27 अप्रैल की शाम को उन्हें बुलाया और उनका फोन जब्त कर उनके खिलाफ गैर जमानती अपराध दर्ज कर लिया। उन्हें लॉकअप में 15 घंटे तक रखा गया। इसके बाद अहमद को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें सशर्त जमानत मिल गई।  

वहीं, पुलिस का कहना है कि जुबैर लोगों के बीच गलत जानकारी फैला रहे थे। मीडिया रिपोर्ट में डीजीपी दीपेंद्र पाठक के हवाले से यह भी कहा गया है कि जुबैर के खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि वह कोविड-19 से निपटने के लिए किए जा रहे प्रशासन के प्रयासों को लेकर गलत खबर फैला रहे थे। डीजीपी का यह भी कहना था कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तमाम सरकारी विभाग कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

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पत्रकारों पर हमले की बढ़ती घटनाओं का मीडिया संगठनों ने किया कड़ा विरोध, रखी ये मांग

पत्रकारों पर हो रहे हमलों की ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ और ‘जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Attack

रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों पर हो रहे हमले की ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (Journalist Association of India) और ‘जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (Journalists Federation of India) ने कड़े शब्दों में निंदा की है। ताजा मामला अरुणाचल प्रदेश का है, जहां कुछ लोगों ने रिपोर्टिंग के लिए गए एक पत्रकार पर हमला कर दिया था। 

बताया जाता है कि न्यूज वेबसाइट ‘ज्योलू न्यूज’ (Gyoloo News) में कार्यरत पत्रकार होफे दादा (Hofe Dada) पिछले दिनों लेखी गांव में ‘एसएमएस स्मेलटर्स लिमिटेड’ (SMS Smelters Ltd) कंपनी पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से चार लोगों ने उन्हें टोका और उनमें से एक व्यक्ति ने दादा को थप्पड़ मार दिया। आरोप यह भी है कि उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि दादा को वरिष्ठ पत्रकार तोंगम रीना की तरह अंजाम भुगतना पड़ेगा, जिन्हें वर्ष 2012 में गोली मारी गई थी। इस मामले में दादा ने निर्जुली पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने होफे दादा पर हमले के मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपित का नाम नांगराम टापू है और वह ‘एसएमएस स्मेलटर्स लिमिटेड’ कंपनी का सिक्योरिटी ऑफिसर है।

‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (JAI) के सेक्रेट्री जनरल एच.के. सेठी का कहना है, ‘इन दिनों मीडिया पर हमले के साथ-साथ उसे डराने-धमकाने के प्रयास के मामले बढ़ रहे हैं और सरकार को सभी मीडियाकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को जांच में तेजी लानी चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए कि दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई हो सके।

वहीं, ‘जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (Journalists Federation of India) ने भी इस घटना का विरोध किया है। फेडरेशन का कहना है, ‘होफे दादा पर हमले ने साबित कर दिया है कि देश में पत्रकारों को तुरंत बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने और आपराधिक न्याय प्रणाली को ज्यादा जवादेब बनाए जाने की जरूरत है। फेडरेशन विभिन्न निकायों और सरकारों से मांग करता है कि यह सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक न्याय प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए कि पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान किसी तरह का भय न रहे।’

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पत्रकार की मौत पर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जताया गहरा दुख, दिया ये बयान

दिल्ली में सोमवार को हुई युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत पर ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ ने गहरा दुख जताया है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
JAI

दिल्ली में सोमवार को हुई युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत पर ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (Journalist Association of India) ने गहरा दुख जताया है। ‘दिल्ली जनर्लिस्ट एसोसिएशन’ (JAI) की ओर से किए गए ट्वीट में संस्था के सेक्रेट्री जनरल एच.के. सेठी का कहना है, ‘युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत से मैं काफी दुखी व स्तब्ध हूं। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मेरी संवेदनाएं तरुण सिसोदिया के परिवार के साथ हैं। भगवान उनके परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।’

बता दें कि दिल्ली स्थित ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (एम्स) की चौथी मंजिल से कूदकर सोमवार को तरुण सिसोदिया (34) ने आत्महत्या कर ली थी। तरुण दिल्ली में दैनिक भास्कर अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत थे और भजनपुरा इलाके में रहते थे।

यह भी पढ़ें: दिल्ली में कोरोना से मौत के आंकड़ों का 'खुलासा' करने वाले पत्रकार ने मौत को लगाया गले

तरुण पिछले दिनों कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आ गए थे। इस कारण इलाज के लिए उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले तरुण के परिवार में पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं।

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शराब पीकर हंगामा करने से रोका तो पत्रकार का कर दिया ये हाल

रॉड से किए गए हमले में पत्रकार के हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2020
Dhananjay Pratap

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार की रात शराब पीने और उपद्रव करने से रोकने पर पत्रकार पर हमला करने के मामले में तीन आरोपितों को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मोहित, अनमोल और चिराग के रूप में हुई है। बताया जाता है कि मोहित सक्सेना प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है, जबकि अनमोल और चिराग इंजीनियरिंग के छात्र हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल में अयोध्या नगर निवासी धनंजय प्रताप सिंह एक अखबार में कार्यरत हैं। शनिवार की रात इलाके में कुछ लोग शराब पीकर हंगामा कर रहे थे। इस बात का विरोध करने पर उन लोगों ने रॉड से धनंजय प्रताप सिंह पर हमला कर दिया। इस हमले में धनंजय घायल हो गए। उनके हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। अस्पताल में भर्ती धनंजय की हालत स्थिर बनी हुई है।  

बता दें कि कुछ दिनों पूर्व ही शराब के लिए रुपये न देने पर कुछ बदमाशों ने दो छात्रों की हत्या कर दी थी। राज्य में खराब कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए विपक्ष ने सरकार पर तमाम आरोप लगाए थे। अब धनंजय प्रताप सिंह के हमलावरों की गिरफ्तारी होने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है।

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दिल्ली में कोरोना से मौत के आंकड़ों का 'खुलासा' करने वाले पत्रकार ने मौत को लगाया गले

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की चौथी मंजिल से कूदकर सोमवार को एक पत्रकार ने आत्महत्या कर ली।

Last Modified:
Monday, 06 July, 2020
Suicide

दिल्ली स्थित ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (एम्स) की चौथी मंजिल से कूदकर सोमवार को एक पत्रकार ने आत्महत्या कर ली। पत्रकार की पहचान तरुण सिसोदिया के रूप में हुई है। करीब 34 वर्षीय तरुण दिल्ली में दैनिक भास्कर अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत थे। तरुण पिछले दिनों कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आ गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के भजनपुरा निवासी तरुण को 24 जून को एम्स के ट्रॉमा सेंटर की चौथी मंजिल पर स्थित कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया था। सोमवार की दोपहर करीब दो बजे तरुण एम्स की चौथी मंजिल से कूद गए। इस घटना में वह बुरी तरह घायल हो गए। गंभीर हालत में तरुण को आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

बताया जाता है कि मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले तरुण पिछले दिनों कोरोना की चपेट में आ गए थे, जिस कारण वह काफी तनाव में चल रहे थे। करीब तीन साल पहले ही तरुण की शादी हुई थी। उनके दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की उम्र 2 साल है और दूसरे की उम्र मात्र कुछ ही महीने है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह काफी दिनों से अपने घर पर ही थे। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को लेकर ही रिपोर्टिंग की थी। अपनी खबर में तरुण ने बताया था कि दिल्ली सरकार कह रही है कि अब तक 982 मौत कोरोना से हुई है, जबकि 1500 से ज्यादा डेडबॉडी का अंतिम संस्कार श्मशान और कब्रिस्तानों में हो चुका है। तरुण द्वारा पिछले दिनों किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

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दुनिया को अलविदा कह गए सीनियर फोटो जर्नलिस्ट संजय त्रिपाठी

हिन्दुस्तान, कानपुर में कार्यरत संजय त्रिपाठी आनन्देश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए गए थे, वहीं दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
Sanjay Tripathi

हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ में कानपुर में कार्यरत वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट संजय त्रिपाठी का शुक्रवार को निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार कानपुर के भैरव घाट पर किया गया।

संजय त्रिपाठी शुक्रवार की सुबह आनन्देश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए गए थे। जैसे ही उन्होंने भगवान के आगे मत्था टेका, उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और वह गिर पड़े। आनन-फानन में संजय को हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जाता है कि कानपुर के चौबेपुर में गुरुवार की देर रात हुई घटना की कवरेज संजय ने ही की थी। इस घटना में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। 

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कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन से जुड़े पूर्व बाल मजदूर को मिला ब्रिटेन का ये प्रतिष्ठित अवॉर्ड

सामाजिक सरोकार के लिए गिरिडीह जिले के दुलिया करमबाल गांव के आदिवासी युवा नीरज मुर्मू को ग्रेट ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2020
neeraj45454

सामाजिक सरोकार के लिए गिरिडीह जिले के दुलिया करमबाल गांव के आदिवासी युवा नीरज मुर्मू को ग्रेट ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। 21 वर्षीय मुर्मू को यह सम्मान गरीब और हाशिए के बच्‍चों को शिक्षित करने के लिए दिया गया है।

बता दें कि नीरज मुर्मू कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन (KSCF) द्वारा संचालित गिरिडीह जिले के दुलिया करमबाल मित्र ग्राम के पूर्व बाल मजदूर थे।

इस अवॉर्ड से हर साल 09 से 25 उम्र की उम्र के उन बच्‍चों और युवाओं को सम्‍मानित किया जाता है, जिन्‍होंने अपनी नेतृत्‍व क्षमता का परिचय देते हुए सामाजिक बदलाव में असाधारण योगदान दिया हो।

नीरज दुनिया के उन 25 बच्‍चों में शामिल हैं जिन्‍हें इस गौरवशाली अवॉर्ड से सम्‍मानित किया गया। नीरज के प्रमाणपत्र में इस बात का विशेष रूप से उल्‍लेख है कि दुनिया बदलने की दिशा में उन्होंने नई पीढ़़ी को प्रेरित और गोलबंद करने का महत्वपूर्ण काम किया है। कोरोना महामारी सकंट की वजह से उन्हें यह अवॉर्ड डिजिडल माध्यम द्वारा आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया।  

गरीब आदिवासी परिवार का नीरज 10 साल की उम्र में ही परिवार का पेट पालने के लिए अभ्रक खदानों में बाल मजदूरी करने लगा। लेकिन, बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के कार्यकर्ताओं ने जब उसे बाल मजदूरी से मुक्‍त कराया, तब उनकी दुनिया ही बदल गई। गुलामी से मुक्त होकर नीरज सत्यार्थी आंदोलन के साथ मिलकर बाल मजदूरी के खिलाफ अलख जगाने लगे। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझा और लोगों को समझा-बुझा कर उनके बच्चों को बाल मजदूरी से छुड़ाकर स्कूलों में दाखिला कराया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई जारी रखते हुए नीरज ने गरीब बच्चों के लिए अपने गांव में एक स्‍कूल की स्‍थापना की है, जिसके माध्यम से वह तकरीबन 200 बच्‍चों को समुदाय के साथ मिलकर शिक्षित करने में जुटे हुए हैं। नीरज ने 20 बाल मजदूरों को भी अभ्रक खदानों से मुक्‍त कराया है।

डायना अवॉर्ड मिलने पर नीरज कहते हैं, ‘इस अवॉर्ड ने मेरी जिम्‍मेदारी को और बढ़ा दिया है। मैं उन बच्‍चों को स्‍कूल में दाखिला दिलाने के काम में और तेजी लाऊंगा, जिनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई है। साथ ही अब मैं बाल मित्र ग्राम के बच्‍चों को भी शिक्षित करने पर अपना ध्‍यान केंद्रित करूंगा।’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं, ‘नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्‍यार्थी मेरे आदर्श हैं और उन्‍हीं के विचारों की रोशनी में मैं बच्चों को शिक्षित और अधिकार संपन्‍न बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा हूं।’

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अमेरिकी मीडिया कंपनियों को लेकर चीन ने चली ये जवाबी चाल

अमेरिका ने पहले चीन के चार शीर्ष सरकारी मीडिया संस्थानों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र करार दिया और ‘विदेशी मिशन’ की श्रेणी में डाल दिया था। अब चीन ने इसका जवाब दिया है।

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2020
china

अमेरिका ने हाल ही में चीन के चार शीर्ष सरकारी मीडिया संस्थानों पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र करार दिया और ‘विदेशी मिशन’ की श्रेणी में डाल दिया था। लिहाजा इसे देखते हुए अब चीन ने एसोसिएट प्रेस सहित चार अमेरिकी मीडिया कंपनियों से उनके कर्मचारियों और कारोबार की जानकारी मांगी है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उसने यह कदम अमेरिका द्वारा चीन के मीडिया संस्थानों पर की गई कार्रवाई के विरोध में उठाया है।

ये भी पढ़ें: निशाने पर आया चीनी मीडिया, 'विदेशी मिशन' पर हैं ये संगठन

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बुधवार को घोषणा की कि ‘एसोसिएट प्रेस’ (एपी), ‘यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल’, ‘सीबीएस’ और ‘नेशनल पब्लिक रेडियो’ के पास अपने कर्मचारियों, वित्तीय परिचालन, अचल संपत्ति  व कुछ अन्य मामलों की जानकारी देने के लिए सात दिन का समय है।

झाओ ने अपनी नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘यह रेखांकित करना जरूरी है कि चीन द्वारा उठाया गया उपरोक्त कदम पूरी तरह से वैध रक्षात्मक कार्रवाई है। अमेरिका ने चीनी मीडिया एजेंसियों पर अपने देश में बिना कारण दमनात्मक कार्रवाई कर उसे इसके लिए मजबूर किया है।’

झाओ ने कहा, 'हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह अपनी गलती को सुधारे और चीनी मीडिया संस्थानों का राजनीतिक दमन रोक और उन पर लगाए गए अनुचित प्रतिबंधों को हटाए।'

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से चीन और अमेरिका एक-दूसरे के मीडिया संस्थानों और उनके कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले अमेरिका ने चीन के चार मीडिया संस्थानों को ‘विदेशी मिशन’ का दर्जा दे दिया था। इससे पहले वह फरवरी में भी पांच चीनी मीडिया संस्थानों को ‘विदेश मिशन’ का दर्जा दे चुका था। उधर, मार्च में चीन ने अमेरिका के दो दर्जन पत्रकारों को निष्कासित कर दिया था, जिन पत्रकारों को देश छो़ड़ने के लिए कहा गया था, उनमें ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’, ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के रिपोर्टर थे। इतना ही नहीं ‘वाइस ऑफ अमेरिका’ और ‘टाइम’ मैगजीन को चीन में अपने कार्यों के बारे में विवरण देने को कहा गया था। चीन की इस कार्रवाई के बाद वॉशिंगटन ने चीन के चार मीडिया संस्थानों को अपने कर्मचारियों को कम करने का आदेश दिया था।

वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों में आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर भी पहले से तनातनी चल रही है। माना जा रहा है कि अब इस कदम से यह तनातनी और बढ़ेगी।  

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पत्रकार के साथ हुई इस घटना की मीडिया संगठनों ने की निंदा, उठाई ये मांग

इस पूरी घटना की निंदा करते हुए मीडिया संगठनों का कहना है कि इस तरह की तमाम शिकायतें पहले भी प्राप्त हुई हैं।

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
HOFE DADA

अरुणाचल प्रदेश में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार पर हुए हमले की ‘द अरुणाचल प्रेस क्लब’ (The Arunachal Press Club), ‘द अरुणाचल प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स’ (the Arunachal Pradesh Union of Working Journalists), ‘द अरुणाचल इलेक्ट्रॉनिक एंड डिजिटल मीडिया एसोसिएशन’ (the Arunachal Electronic & Digital Media Association) और ‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ (IJU) ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

बताया जाता है कि न्यूज वेबसाइट ‘ज्योलू न्यूज’ (Gyoloo News) में कार्यरत पत्रकार होफे दादा (Hofe Dada) सोमवार को लेखी गांव में ‘एसएमएस स्मेलटर्स लिमिटेड’ (SMS Smelters Ltd) कंपनी पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से चार लोगों ने उन्हें टोका और उनमें से एक व्यक्ति ने दादा को थप्पड़ मार दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब दादा ने पीटे जाने का कारण पूछा तो उन व्यक्तियों ने कथित रूप से दादा से सवाल किया कि क्यों पत्रकार बार-बार कंपनी पर सवाल क्यों खड़े करते हैं।    

दादा ने उनसे कहा कि वह तो सिर्फ ऐसे मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे लोग प्रभावित हैं। इसके बाद दादा को वह परिसर छोड़ने के लिए कहा गया, साथ ही चेतावनी दी गई कि ऐसा न करने पर उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। आरोप यह भी है कि उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि दादा को वरिष्ठ पत्रकार तोंगम रीना की तरह अंजाम भुगतना पड़ेगा, जिन्हें वर्ष 2012 में गोली मारी गई थी। इस मामले में दाकान ने निर्जुली पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

इस पूरी घटना की निंदा करते हुए मीडिया संगठनों का कहना है कि इस तरह की तमाम शिकायतें पहले भी प्राप्त हुई हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश पुलिस से इस पूरे मामले की जांच करने की अपील की है। ‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ (IJU) का कहना है कि पुलिस को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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ABP न्यूज नेटवर्क के इस चैनल ने पूरे किए 15 साल, यूं बनाई लोगों के दिलों में जगह

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ का बंगाली न्यूज चैनल ‘एबीपी आनंद’ अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रहा है।

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
ABP News Network

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ABP News Network) का बंगाली न्यूज चैनल ‘एबीपी आनंद’ (ABP Ananda) अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रहा है। अपनी शुरुआत से ही यह चैनल स्थानीय और ऑनग्राउंड रिपोर्टिंग में आगे रहा है, बल्कि बंगाल के लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाने में भी कामयाब रहा है। इस समय में चैनल ने बेस्ट बंगाल के मार्केट में अपनी मजबूत ब्रैंड इक्विटी तैयार की है। चैनल ने ब्रॉडकास्‍ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया की रेटिंग में लगातार सात हफ्ते तक नंबर वन रहने के बाद इस संख्या को लगातार न सिर्फ बनाए रखने बल्कि आगे बढ़ाने की योजना भी बनाई है। टॉप फाइव बांग्ला न्यूज चैनल्स की बार्क की वीकली लिस्ट में लगातार दिखाई देने वाले पांच चैनलों में से, एबीपी आनंद सबसे अधिक सुसंगत और सबसे ज्यादा देखा जाने वाला रहा है।

बताया जाता है कि अपने तमाम यादगार शोज की बदौलत यह चैनल अपने व्युअर्स की खासी पसंद रहा है और दर्शकों तक पहुंच के मामले में 13 हफ्तों तक लगातार (Source: BARC, TG - NCCS 2+, Mkt- WB, Wk 12-24’2020, Cume. Reach in Cr.) पूरे पश्चिम बंगाल में नंबर वन चैनल रहा है। चैनल के अनुसार, इसने न सिर्फ जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (GECs) को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि न्यूज ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में भी काफी बेहतर कर रहा है।

चैनल की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, तमाम मुश्किलों के दौरान यह लोगों के साथ मिलकर खड़ा रहा है और उन्हें दुख व संकट से निकालने में मदद की है। यही नहीं, देश-दुनिया में कहर बरपा रहे कोविड-19 के दौरान भी यह चैनल लोगों को देश-दुनिया के साथ उनके जिलों/कस्बों से जुड़े न्यूज अपडेट्स देने में भी आगे रहा है।  

इसके अलावा, महामारी के दौरान विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हाल ही में ‘एबीपी आनंद’ ने राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के साथ-साथ आईसीएसई (ICSE) और आइएससी (ISC) के नौवीं और 12वीं कक्षाओं के छात्रों के लिए वर्चुअल कक्षाएं प्रसारित की हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार, एबीपी आनंद के कुछ लोकप्रिय कार्यक्रमों में ‘खैबर पास फूड फेस्टिवल’ (Khaibar Pass Food Festival) शामिल है। यह कोलकाता के सबसे बड़े ऑनग्राउंड फूड फेस्टिवल्स में शामिल है जो बंगाल के फूड कल्चर को दर्शाता है। इसकी सफलता ने नॉर्थ बंगाल, साउथ बंगाल और नॉर्थ 24 परगनाओं में तीन अन्य खैबर पास कार्यक्रम (Khaibar Pass Events) का मार्ग प्रशस्त किया। इसके अलावा बंगाल की जानी-मानी हस्तियों को सम्मानित करने के लिए एक अवॉर्ड शो सेरा बंगाली (Sera Bangali) और विभिन्न विषयों पर लोगों को गहराई से जानकारी देने के लिए एक डिबेट शो ‘जुक्ती टोको’ (Jukti-Tokko) भी इसकी पेशकश में शामिल है। बताया जाता है कि इन स्पेशल पहल के जरिये ‘एबीपी आनंद’ कोलकाता में घर-घर में जाना माना नाम और देशभर के बंगाली ऑडियंस का सबसे विश्वासपात्र बन गया है।

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कोरोना ने छीन ली इस टीवी पत्रकार की जिंदगी

मुख्यमंत्री सहायता कोष से पत्रकार के परिजनों को दी जाएगी पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
E Velmurugan

देश में कोरोनावयरस (कोविड-19) पीड़ितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस महामारी की चपेट में आकर अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं तमाम लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। कोविड-19 की चपेट में आने वालों में तमाम मीडियाकर्मी भी शामिल हैं।

कोविड-19 की चपेट में आकर जान गंवाने वालों की लिस्ट में एक नाम और शामिल हो गया है। दरअसल, तमिलनाडु के एक न्यूज चैनल में सीनियर वीडियोग्राफर के तौर पर कार्यरत ई वेलमुरूगन (E Velmurugan) का कोविड-19 की चपेट में आकर निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,  तकरीबन 41 वर्षीय वेलमुरूगन चेन्नई स्थित राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल (RGGGH) में भर्ती थे, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें 14 जून को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।  

ई वेलमुरूगन के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा है। वेलमुरूगन के निधन के बाद मुख्यमंत्री ईके पलनीस्वानी, उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और डीएमके प्रेजिडेंट एमके स्टालिन समेत तमाम राजनेताओं और पत्रकारों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

यही नहीं, ईके पलनीस्वानी ने मुख्यमंत्री राहत कोष से वेलमुरूगन के परिवार को पांच लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। वहीं तीन अन्य मंत्रियों सी विजयभास्कर, डी जयकुमार और कादंबर सी राजू ने भी घोषणा की है कि वे पीड़ित पत्रकार के परिवार को अपनी जेब से 50-50 हजार रुपए देंगे। वेलमुरूगन की पत्नी राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में कॉन्ट्रैक्ट पर नर्स का काम करती हैं, उनकी नौकरी को सरकार ने स्थायी कर दिया है।

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