विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर जुटे पर्यावरणविद, उठाया ये बड़ा मुद्दा

रिवर कनेक्ट अभियान के तहत आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा, हमें अपनी पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डालने का कोई अधिकार नहीं है

Last Modified:
Wednesday, 05 June, 2019
Environment Day

विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर चार जून को रिवर कनेक्ट अभियान के तहत ‘यमुना कैसे बचे’  को लेकर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में यमुना की वर्तमान दुर्दशा पर चिंतन कर शासन-प्रशासन से इसे बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गयी।

वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का कहना था कि यमुना की दुर्दशा किसी से छुपी नहीं है। पूरी यमुना सूखी हुई है। जो थोड़ा-बहुत पानी दिखाई दे रहा है, वह वास्तव में दुर्गंध युक्त मलमूत्र वाला नालों का पानी है। उन्होंने मांग उठाई कि इस दिशा में राष्ट्रीय नदी नीति व राष्ट्रीय नदी आयोग बना कर जिम्मेदारी निश्चित की जाए, जिससे नदियों में वर्ष भर पानी रह सके।

डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि शासन-प्रशासन समय रहते यमुना नदी को बचाने के लिए मजबूत कदम उठाये, अन्यथा यह नदी इतिहास बनकर महज किताबों में कैद हो जाएगी। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता रंजन शर्मा ने कहा कि आज आगरा को स्मार्ट सिटी बनाने कि चर्चा ज़ोर-शोर से की जा रही है, परंतु इस जीवनदायनी नदी की दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं है, जबकि हर दृष्टि से इस नदी का साफ व स्वच्छ होना परम आवश्यक है।

शैलेन्द्र नरवार का कहना था, ‘आज हमने यमुना को अपने स्वार्थ के चलते महज मैला ढोने वाली माल गाड़ी बना दिया है, हमें अपनी पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डालने का कोई अधिकार नहीं है।’ संगोष्ठी में मुख्य रूप से बृज खंडेलवाल, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, रंजन शर्मा, शैलेन्द्र नरवार, श्रवण कुमार, डॉ. हरेन्द्र गुप्ता, पद्मिनी अयर, राजीव गुप्ता, विशाल झा, चतुर्भुज तिवारी, दीपक राजपूत, दिनेश यादव आदि सम्मिलित हुए।

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नई पीढ़ी के जज्बातों का 'आईना' है वरिष्ठ पत्रकार जयंती रंगनाथन का यह उपन्यास

पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में लेखिका व वरिष्ठ पत्रकार जयंती रंगनाथन के नए उपन्यास का लोकार्पण किया गया

Last Modified:
Friday, 24 January, 2020
Jayanti Ranganathan

पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में लेखिका व वरिष्ठ पत्रकार जयंती रंगनाथन के नए उपन्यास 'एफ.ओ.जिंदगी’ (F.O. Zindagi) का लोकार्पण किया गया। इस उपन्यास का प्रकाशन वाणी प्रकाशन के उपक्रम नाइन बुक्स ने किया है। जयंती रंगनाथन का यह उपन्यास नई पीढ़ी के प्रेम, गेम और जिंदगी पर आधारित है। उपन्यास के लोकार्पण के मौके पर एफ.ओ. जिंदगी से मिलेनियल्स और जेनरेशन स्कॉवयर जेड का संबंध बताते हुए जयंती रंगनाथन का कहना था कि उनकी पीढ़ी और नई पीढ़ी की सोच अलग है।

लोकार्पण समारोह में प्रसिद्ध कवि अशोक चक्रधर, लेखिका क्षमा शर्मा और एंकर व मीडियाकर्मी रितुल जोशी मौजूद थीं। क्षमा शर्मा ने उपन्यास के शीर्षक में शामिल एफओ शब्द को नई पीढ़ी के जीवन से जुड़ा बताया। वहीं, अशोक चक्रधर ने पुस्तक से संबंधित ‘फालतू ओवरसेंसिटव’ शब्द का महत्व बताया। रितुल जोशी का कहना था कि लेखिका ने बड़ी ही चतुराई से नई पीढ़ी के जज्बातों का वर्णन किया है। वाणी प्रकाशन की निर्देशक अदिति माहेश्वरी गोयल ने बताया कि नई पीढ़ी की जरूरतें और समझ कितनी तेजी से बदलती जा रही हैं।

प्रसिद्ध लेखिका ममता कालिया का कहना था, ‘उपन्यास एफओ जिंदगी पढ़ने के बाद ऐसा लग रहा है जैसे किसी सुपर फास्ट गाड़ी में सफर पूरा किया है। इसकी कहानी थोड़े से किरदारों में गुंथी हुई है।पात्र नजदीक आने में देर नहीं लगाते तो दूर जाने में भी रफ्तार बनाये रहते हैं।इरा और गौरव का प्यार,विवाह और संघर्ष आज के प्रेमियों का जीवन चक्र लगता है।‘

उनका यह भी कहना था, ‘उपन्यास की त्वरा और ऊर्जा काबिले तारीफ है। हम आसानी से इस नतीजे पर पहुंच सकते हैं कि अब वह समय आ गया है, जब हम साफ-साफ कह सकें कि हिंदी में कहानी लिखने वाले तो बहुत होंगे किंतु कहानी कहने वाले,जयंती रंगनाथन की तरह बिरले हैं।’ पाठकों ने भी इस उपन्यास के काफी बेहतरीन बताया।

ऐसी ही एक युवा पाठक अंजलि ने फेसबुक पर टिप्पणी करते हुए लिखा, ‘तेज भागती, भगाती एक बढ़िया किताब। कहीं दुनिया को भाड़ में झोंकते हीरो हीरोइन हैं, तो कहीं कई भाड़ से गुजरने के बाद अपना संतुलन तलाश करती जिंदगी। बिलकुल आज के युवाओं की तरह। किताब। ना फालतू इमोशनल करती है, ना लापरवाह होने देती है। ना अटकाती है, न अटकने देती है। ना टिककर रोने का समय देती है, ना खुलकर हंसने का। एक के बाद एक कुछ न कुछ होता चला जाता है, बिल्कुल जिंदगी की तरह। ये किताब फास्ट ट्रैक पर भागते कुछ युवाओं की दौड़ है, जिसमें कुछ उनके अपने कंट्रोल में है तो बहुत कुछ आउट ऑफ कंट्रोल। बेहद आसान भाषा में युवा मन को भी खूब पकड़ा है, जो इस किताब की यूएसपी है। समझदारों को इति, श्रुति या गौरव, तीनों ही मूर्ख लगे।लगते रहें, उन्हें किसकी परवाह। यही उनकी क्रांति है, जो देर सवेर अपना संतुलन भी ढूंढ़ लेती है।

इस उपन्यास की कीमत 299 रुपए है। अमेजॉन पर किंडल और पेपर बैक संस्करण दोनों उपलब्ध हैं। अमेजॉन पर इस उपन्यास को ऑर्डर करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शुक्ला

रिश्तेदार के विवाह समारोह में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ के रायपुर गए हुए थे , वहीं हुआ निधन

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 January, 2020
Last Modified:
Wednesday, 22 January, 2020
Arvind Shukla

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शुक्ला का शनिवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 57 वर्षीय अरविंद शुक्ला का निधन छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ, जहां वह रिश्तेदार के विवाह समारोह में भाग लेने के लिए गए हुए थे। रविवार को लखनऊ के भैंसाकुंड बैकुंठधाम में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

अरविंद शुक्ला के परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। छोटी बेटी अंबिका ने उन्हें मुखाग्नि दी। अरविंद शुक्ल इंदौर व लखनऊ से प्रकाशित साप्ताहिक समाचार पत्र 'स्पूतनिक' के संपादक थे। साथ ही हिंदी न्यूज पोर्टल 'वेबदुनिया' के साथ भी लंबे समय तक जुड़े रहे। इसके अलावा वह लखनऊ में हजरतगंज नरही स्थित सहाय सिंह बालिका इंटर कालेज के मैनेजर एवं ‘उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ (उपजा) की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष भी रहे।

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देशभक्ति के रंग में डूबा ‘ये गुलिस्तां हमारा’, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

दिल्ली स्थित राजेंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली समेत देश भर के कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्तांओं ने हिस्सा लिया

Last Modified:
Monday, 20 January, 2020
Gulistan Event

दिल्ली स्थित राजेंद्र भवन में शनिवार को ‘ये गुलिस्तां हमारा’ नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली समेत देश भर के कई सामाजिक कार्यकर्तांओं ने हिस्सा लिया। समारोह में नव्या सर्जना और कल्याणम् संस्था के बच्चों ने जहां देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियां दी, वहीं बाल नृत्यांगना वान्या सिंह ने ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा पर’ नृत्य पेश कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में नेत्रहीन गायक ने देशभक्ति के गीत की प्रस्तुति के जरिये लोगों को भाव विह्वल कर दिया। वहीं, इटावा से आए ‘इटावा सफारी’ फिल्म के कलाकार गौरव पुरवाल ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

देवभूमि इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल व एआर फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के उन सामाजिक कार्यकर्तांओं को सम्मानित भी किया गया, जिन्होंने देश और समाज की बेहतरी की दिशा में अपना योगदान दिया है।

सम्मानित होने वाले सामाजिक कार्यकर्तांओं में यूपी मतदान अभियान के ब्रैंड एंबेसडर राकेश यादव रोशन, सामाजिक सरोकारों को लेकर चाय पर चर्चा प्रोग्राम करने वाले कानपुर के पीएसआईटी के मीडिया मैनेजर अवधेश यादव और उन्नाव के पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता ऋषि मिश्रा प्रमुख रहे। इसके साथ ही समारोह में मुरादाबाद से आये सामाजिक कार्यकर्ता तौसीब सुल्तान, लखनऊ से आए वसीम एथलीट, हैदराबाद से आए टीवी पत्रकार न्यूज 18 राजस्थान के एंकर माजिद अंसारी को उनकी एंकरिंग के लिए सम्मानित किया गया। अमर उजाला हल्द्वानी की ईवेंट ऑर्गनाइजर मानसी खुब्ले ने भी कार्यक्रम में गीत पेश किया। जल बचाओ अभियान पर किए गए प्रयास के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया।

ईवेंट जर्नलिज्म की अवधारणा पर पिछले पांच साल से काम कर रहे दिल्ली में टीवी के वरिष्ठ पत्रकार अमर आनंद ने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की थी। ईवेंट जर्नलिज्म का ये बत्तीसवां आयोजन था। मुख्य अतिथि बिहार भवन के रेजिडेंट कमिश्नर विपिन कुमार थे, जबकि अति विशिष्ट अतिथियों में मिसेज सेंट्रल एशिया व सामाजिक कार्यकर्ता माया सिंह, नेशनन यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय सचिव राकेश थपलियाल, फिल्म प्रोड्यूसर शैलेंद्र पांडेय,  जी हिंदुस्तान के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर मुकुंद शाही, सहारा समय चैनल की दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान की हेड गरिमा सिंह,  अखिल भारतीय महिला विश्वकर्मा महासंघ की अध्यक्ष पुष्पा शर्मा जांगिड़ समेत कई गणमान्य अतिथि इस समारोह का हिस्सा रहे।

कार्यक्रम को तैयार करने में एआर फाउंडेशन की अध्यक्ष नीलिमा ठाकुर, देवभूमि इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल प्रीति पाठक, कल्याणम् की अध्यक्ष अंजना अजुम समेत नितिन त्यागी, वरुण श्रीवास्तव, अंकित गुप्ता और इम्तियाज अंसारी ने अपना योगदान दिया। एचएनएन चैनल इस कार्यक्रम का टीवी पार्टनर, जबकि दैनिक लोकसत्य प्रिंट पार्टनर था।

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इस मंच पर हुआ राजीव गुप्ता का सम्मान, मिला टॉप लीडरशिप अवॉर्ड

दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में 17 व 18 जनवरी 2020 को आयोजित किया गया कार्यक्रम

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 January, 2020
Last Modified:
Saturday, 18 January, 2020
Award

दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में 17 व 18 जनवरी 2020 को 21वीं नेशनल मैनेजमेंट समिट (National Management Summit) का आयोजन किया गया। ‘Top Rankers Management Club’ की ओर से आयोजित इस समिट में विभिन्न इंडस्ट्रीज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दिग्गजों को अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

इसी के तहत कार्यक्रम में राजीव गुप्ता को ‘TOP RANKERS EXCELLENCE AWARD for STRATEGIC LEADERSHIP ’ से सम्मानित किया गया। एमबीए में गोल्ड मेडलिस्ट राजीव गुप्ता इन दिनों बिरला टेक्सटाइल मिल्स, बद्दी (हिमाचल प्रदेश) में एग्जिक्यूटिव प्रेजिडेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राजीव गुप्ता को टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करने का 26 साल से ज्यादा का अनुभव है।

बता दें कि ‘Top Rankers’ के वीके सूद पिछले 20 वर्षों से इस तरह का आयोजन कर रहे हैं। कार्यक्रम में पद्मश्री प्रीतम सिंह और ‘लार्सन एंड टूब्रो’ (Larsen & Toubro) के योगी श्रीराम जैसी हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में चीफ गेस्ट ‘एयर इंडिया’ के सीएमडी अश्विनी लोहानी थे और गेस्ट ऑफ ऑनर ‘एलआईसी’ के एमडी विपिन आनंद थे।

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पंजाब केसरी के संपादक अश्विनी कुमार चोपड़ा के बारे में आई ये बुरी खबर

कैंसर से पीड़ित अश्विनी कुमार चोपड़ा कुछ समय से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 January, 2020
Last Modified:
Saturday, 18 January, 2020
Ashwini Kumar Chopra

हिंदी अखबार ‘पंजाब केसरी’ के निदेशक एवं संपादक और बीजेपी के पूर्व सांसद अश्विनी कुमार चोपड़ा का निधन हो गया है। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शनिवार को अंतिम सांस ली। 63 वर्षीय अश्विनी कुमार चोपड़ा लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। वह छह जनवरी 2020 से इस अस्पताल में भर्ती थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन पुत्र हैं।

बता दें कि अश्विनी कुमार चोपड़ा 2014 से 2019 तक करनाल से भाजपा सांसद रहे थे। 2014 में बीजेपी के टिकट से चुनावी मैदान में उतरे अश्विनी कुमार ने करनाल से दो बार कांग्रेस के सांसद रहे अरविंद कुमार को करारी शिकस्त दी थी। 2019 में बीजेपी फिर से उन्हें टिकट देना चाहती थी, लेकिन अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अश्विनी कुमार चोपड़ा ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। अश्विनी कुमार चोपड़ा के निधन पर पत्रकारों समेत तमाम राजनेताओं ने अपना दुख व्यक्त किया है।

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दिल्ली पत्रकार संघ के चुनाव में इन पत्रकारों के नाम पर लगी मुहर

‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट’ (इंडिया) से संबद्ध ‘दिल्ली पत्रकार संघ’ की नई कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 January, 2020
Last Modified:
Saturday, 18 January, 2020
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‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट’ (इंडिया) से संबद्ध ‘दिल्ली पत्रकार संघ’ (DELHI JOURNALISTS ASSOCIATION) की नई कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया है। नई कार्यकारिणी के गठन के लिए नाम वापसी के बाद चुनाव अधिकारी रास बिहारी ने सभी पदों पर निर्विरोध चुनाव की घोषणा की। इसके तहत ‘खेल टुडे’ के संपादक राकेश थपलियाल को अध्यक्ष, ‘दैनिक भास्कर’ के राजनीतिक संपादक केपी मलिक को 'महासचिव' और ‘राष्ट्रीय समाचार’ के संपादक नरेश गुप्ता को दिल्ली पत्रकार संघ के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ‘देशबन्धु’ के राष्ट्रीय ब्यूरो चीफ कुमार पंकज को उपाध्यक्ष चुना गया है।

इनके अलावा उषा पाहवा, ज्ञानेंद्र सिंह, सुजान सिंह को निर्विरोध उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित घोषित किया गया है। सचिव पद की जिम्मेदारी हीरेंद्र राठौर, रणवीर सिंह और जीएन शर्मा को सौंपी गई है। वहीं, कार्यकारिणी सदस्य के लिए आनन्द राणा, अशोक किंकर, फजले गुफरान, नफे राम यादव, अशोक बर्थवाल, संजय गुप्ता, सुनील बाल्यान, सुभाष चंद्र, राहुल कौशिक, अंजलि भाटिया, राजेश कुमार भसीन, प्रोबीर कुमार दत्ता , मनोज कुमार दीक्षित, दीप्ती अंगरिश और अमित कुमार को चुना गया है।

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार-लेखक आई.वी. बाबू दास

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक आई.वी. बाबू दास का शुक्रवार को निधन हो गया। दास ‘थलसमय’ (Thalasamayam) समाचार पत्र के डिप्टी एडिटर थे।

Last Modified:
Friday, 17 January, 2020
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वरिष्ठ पत्रकार और लेखक आई.वी. बाबू दास का शुक्रवार को निधन हो गया। दास ‘थलसमय’ (Thalasamayam) समाचार पत्र के डिप्टी एडिटर थे। दास ने केरल के कोझीकोड के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली, जहां उनका पीलिया का इलाज चल रहा था।

दास ने 'मलयालम वर्णिका' (Malayalam Varika) मैगजीन में असिसटेंट एडिटर के तौर पर भी काम किया है। इसके अलावा वे मलयालम अखबार 'मंगलम' (Mangalam) के डिप्टी एडिटर और 'देशाभीमनी' (Deshabhimani) के एडिटर के पद पर भी काम कर चुके हैं। कालीकट विश्वविद्यालय (Calicut University) के पत्रकारिता विभाग में वे यूजी बोर्ड ऑफ स्टडीज के सदस्य भी रह चुके हैं।

दास का जन्म 1965 में थलसेरी में मोकेरी के पास हुआ था। वे आई.वी. दास के बेटे थे, जो सीपीएम स्टेट कमेटी के मेंबर और साप्ताहिक अखबार 'देशाभीमनी' (Deshabhimani) और सुशीला के संपादक  रह चुके थे।

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रिपोर्टर बना 'शहंशाह', फिर खींची तलवार और दागा सवाल

न्यूज चैनल के रिपोर्टर अमीन हफीज सुर्खियों में है। इस बार वे एक स्टोरी के लिए वो शहंशाह बनकर लाइव रिपोर्टिंग करते दिखाई दे रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 15 January, 2020
Last Modified:
Wednesday, 15 January, 2020
reporter

पत्रकारिता के क्षेत्र में किसी खबर की रिपोर्टिंग करना बेहद ही संजीदा काम है, लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में कुछ रिपोर्टर्स कई बार इसमें तड़का डालते नजर आते हैं। एक बार फिर जियो न्यूज चैनल के रिपोर्टर अमीन हफीज सुर्खियों में है। इस बार वे एक स्टोरी के लिए वो शहंशाह बनकर लाइव रिपोर्टिंग करते दिखाई दे रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस वीडियो को पाकिस्तान के एक जर्नलिस्ट ने ट्विटर पर शेयर किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि अमीन हफीज ने राजाओं की तरह कपड़े पहने हुए हैं और पगड़ी लगाई हुई है। वे किसी महल की छत पर खड़े हैं। ऑन एयर होते ही वह तलवार निकालकर हवा में लहराते हैं और फिर पूछते हैं कि उनके इस महल में शादी का आयोजन किसने कराया। वे इस विडियो में सवाल उठा रहे हैं कि ऐतिहासिक महलों में शादी होनी चाहिए या नहीं?    

देखें विडियो-

गौरतलब है कि इसके पहले भी अमीन हफीज चर्चाओं में आ चुके हैं। दिसंबर 2018 में लाहौर से उन्होंने गधे पर बैठकर लाइव रिपोर्टिंग की थी। मुद्दा था गधे के कारोबार का तेजी से बढ़ना, जिसमें वे कहते दिखाई दिए थे कि इंसान और गधे का रिश्ता तो सदियों पुराना है, मगर लाहौर में गधों का कारोबार अचानक चमक उठने से गधे पालने वाले लोग खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। हफीज एक बार फिर अपनी रिपोर्टिंग के लिए सोशल मीडिया की चर्चा बटोर रहे हैं।

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‘वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम शर्मा ने जो बीज बोया, आज वह वटवृक्ष है’

माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पहले कुलपति (महानिदेशक) डॉ. राधेश्याम शर्मा को किया गया याद

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 14 January, 2020
Last Modified:
Tuesday, 14 January, 2020
Radheyshyam-Sharma

मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) के संस्थापक महानिदेशक राधेश्याम शर्मा को याद किया गया। डॉ. शर्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए विश्वविद्यालय एवं सप्रे संग्रहालय की ओर से मंगलवार को 'स्मरण डॉ. राधेश्याम शर्मा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति दीपक तिवारी का कहना था, विश्वविद्यालय की स्थापना को 30 वर्ष होने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय की यह यात्रा उत्कृष्टता की ओर है। आज विश्वविद्यालय ने जो प्रगति की है, वह जिस वटवृक्ष के रूप में हमें दिखाई पड़ रहा है, उसका बीज स्वर्गीय राधेश्याम शर्मा जैसे मूर्धन्य पत्रकार ने बोया था। वे विश्वविद्यालय के संस्थापक महानिदेशक रहे हैं। वह जिस समन्वय की दृष्टि को लेकर चले थे, विश्वविद्यालय उसी सोच पर आगे बढ़ रहा है।‘

तिवारी का कहना था, ‘विश्वविद्यालय की संकल्पना के अनुरूप हम सब विचारधाराओं को साथ लेकर चल रहे हैं। विश्वविद्यालय लगातार उत्कृष्टता के लिए प्रयासरत है। विश्वविद्यालय का जोर गुणवत्तापूर्ण शोधकार्य पर है। हम प्रयास करेंगे कि स्वर्गीय राधेश्याम शर्मा की पत्रकारिता पर भी पीएचडी हो।’

इस मौके पर डॉ. शर्मा को याद करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का ढांचा बेशक अरविन्द चतुर्वेदी ने खड़ा किया, लेकिन उसकी आत्मा राधेश्याम शर्मा बने। विश्वविद्यालय को विस्तार देने में वह सभी को साथ लेकर चले। वह इस विश्वविद्यालय को भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता का तीर्थ बनाना चाहते थे। सप्रे संग्रहालय के संस्थापक विजयदत्त श्रीधन का कहना था कि राधेश्याम शर्मा सदैव सबकी फिक्र करते थे। सब पत्रकारों को जोड़ कर रखने का प्रयास करते थे।

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार लज्जाशंकर हरदेनिया ने बताया कि किस प्रकार एक सच्चे पत्रकार को अपनी विचारधारा और अपने प्रोफेशन को अलग-अलग रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि राधेश्याम शर्मा की सबसे बड़ी विशेषता थी कि वह खबर को सूंघने की क्षमता रखते थे। उन्होंने विभिन्न समाचार-पत्रों को नई पहचान दी। विश्वविद्यालय के पूर्व रैक्टर ओपी दुबे ने कहा कि राधेश्याम शर्मा सिर्फ मूर्धन्य पत्रकार ही नहीं, बल्कि बहुत अच्छे इंसान भी थे।

विश्वविद्यालय की पूर्व प्राध्यापिका दविंदर कौर उप्पल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राधेश्याम शर्मा सबको स्नेह देते थे। उनका व्यक्तित्व बहुत सहज था। वे छोटे से कर्मचारी को भी पूरा सम्मान देते थे। वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत नायडू ने कहा कि विचारधारा को लेकर राधेश्याम जी कभी कर्कश नहीं रहे। आज उनके जैसे लोगों की कमी है। वे ऐसे व्यक्तित्व थे कि उनके साथ बैठ लिए तो लगता था कि जैसे एकाध किताब पढ़ ली हो। राधेश्याम शर्मा के रिश्तेदार हर्ष शर्मा ने भी उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला और उनके साथ अपने निजी अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का संचालन प्रो. संजय द्विवेदी ने किया। सहायक कुलसचिव विवेक सावरीकर ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर नगर के प्रबुद्ध नागरिक, पत्रकार एवं विश्वविद्यालय के कर्मचारी, अधिकारी एवं शिक्षक मौजूद रहे।

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उप्र क्वानक्रीडो संघ में अहम भूमिका निभाएंगे युवा पत्रकार प्रदीप रावत

वाराणसी के निजी होटल में आयोजित बैठक में उत्तर प्रदेश क्वानक्रीडो संघ का किया गया गठन

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 14 January, 2020
Last Modified:
Tuesday, 14 January, 2020
Qwankido

मार्शल आर्ट को उत्तर प्रदेश में बढ़ावा देने की पहल के तहत उत्तर प्रदेश क्वानक्रीडो संघ का गठन किया गया है। वाराणसी के निजी होटल में आयोजित बैठक में भारतीय क्वानक्रीडो फेडरेशन के ऑब्जर्वर राजेश कुमार सैनी के समक्ष सर्वसम्मति से इसका गठन किया गया। नवगठित उत्तर प्रदेश क्वानक्रीडो संघ में वाराणसी के नगर आयुक्त गौरांग राठी को अध्यक्ष, गाजीपुर के अमित कुमार सिंह को सचिव व विजय कमल साहनी को कोषाध्यक्ष चुना गया।

इसके साथ ही डॉ. नितिन कुमार शर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, जियाउल असमत व दिलीप सिंह को उपाध्यक्ष, सत्यवर्धन सिंह व भुवनेश शर्मा को संयुक्त सचिव, युवा पत्रकार प्रदीप कुमार रावत को मुख्य प्रवक्ता, ओम प्रकाश गुप्ता को तकनीकी निदेशक, रेखा मौर्या को वूमैन सेल, एक्यूब जावेद खान को आईटी सेल व आशुतोष सिंह को अध्यक्ष (एथलीट कमीशन) पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वहीं, डॉ.आशीष मिश्रा, इसरार अली,संदीप रावत, अनुज कुमार पांडेय,मयंक भारती और राहुल यादव को कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित किया गया है। इस बीच तमाम पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने क्वानक्रीडो को पारदर्शी बनाने के लिए सुझाव भी रखे, जिन पर गौरांग राठी ने चर्चा कर अमल करने का आश्वासन दिया।

बताया जाता है कि क्वानक्रीडो को हरियाणा ओलंपिक एसोसिएशन ने मान्यता दे रखी है। वहां सरकार द्वारा अन्य खेलों की तरह सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। फिलहाल उत्तर प्रदेश क्वानक्रीडो संघ महाराष्ट्र के औरंगाबाद में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए तैयारियों में जुट गया है, जिसमें राज्य संघ के बैनर तले टीम जाएगी। जल्द ही उत्तर प्रदेश के 30 से अधिक जनपदों में क्वानक्रीडो संघ के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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