सोशल मीडिया पर ‘Live Trading’ के झांसे से सावधान, SEBI ने निवेशकों को किया अलर्ट

SEBI ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहे ‘Live Trading’ या ‘Real-Time Trading’ से जुड़े सेशन और उनके आधार पर दिए जा रहे निवेश सुझावों को देखकर तुरंत निवेश का फैसला न लें।

Last Modified:
Wednesday, 19 August, 2026
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शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए सेबी (SEBI) ने एक अहम चेतावनी जारी की है। बाजार नियामक ने निवेशकों से कहा है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे ‘Live Trading’ या ‘Real-Time Trading’ से जुड़े सेशन और उनके आधार पर दिए जा रहे निवेश सुझावों को देखकर तुरंत निवेश का फैसला न लें।

सेबी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुछ लोग खुद को शेयर बाजार का एक्सपर्ट बताकर लाइव ट्रेडिंग सेशन करते हैं। इन सेशन में वे लोगों को बताते हैं कि किस शेयर या इंडेक्स में कब खरीदारी करनी है, कब बेचने का समय है, कौन सी ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी अपनानी है और किस तरह की पोजीशन लेनी चाहिए।

नियामक को आशंका है कि ऐसे मामलों में बिना रजिस्ट्रेशन के Investment Advisory Services भी दी जा सकती हैं।

लाइव ट्रेडिंग में दिखाते हैं अपनी ‘परफॉर्मेंस’

सेबी ने कहा है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर लाइव सेशन के दौरान खुद भी ट्रेडिंग करने का दावा करते हैं। इस दौरान वे अपनी ट्रेडिंग परफॉर्मेंस, लाइव मार्केट डेटा, मार्केट पैटर्न और संभावित टारगेट दिखाते हैं। ऐसे सेशन को बड़ी संख्या में लोग देखते हैं। लाइव वीडियो के साथ चैट भी चलती रहती है, जहां दर्शक सवाल पूछते हैं और ट्रेडिंग से जुड़े सुझाव मांगते हैं।

सेबी के मुताबिक, इन्हीं चैट्स के जरिए अनरजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी सर्विस देने या उसका लेन-देन करने की संभावना भी रहती है।

30 दिन पुराने डेटा को लेकर क्या है नियम?

सेबी की यह चेतावनी उसके मई में जारी किए गए एक सर्कुलर के बाद आई है। इस सर्कुलर में इन्वेस्टर एजुकेशन और अवेयरनेस के लिए मार्केट प्राइस डेटा शेयर करने को लेकर नियम तय किए गए थे।

नियमों के तहत निवेशकों को शिक्षित करने के उद्देश्य से मार्केट प्राइस डेटा साझा किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 दिन का अंतर होना चाहिए। इसके अलावा इस तरह की जानकारी देने के बदले किसी तरह का Monetary Incentive भी नहीं दिया जा सकता।

यानी किसी व्यक्ति को निवेश शिक्षा के नाम पर बिल्कुल ताजा या लाइव शेयर भाव दिखाकर उसके आधार पर भविष्य की कीमत का अनुमान लगाने या निवेश की सलाह देने की अनुमति नहीं है।

सिर्फ एजुकेशन के नाम पर भी नहीं दी जा सकती सलाह

सेबी ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ Investor Education का काम करता है, तो वह किसी सिक्योरिटी के पिछले 30 दिनों के मार्केट प्राइस डेटा का इस्तेमाल करके उसके भविष्य के भाव का संकेत नहीं दे सकता। वह इस आधार पर किसी शेयर या सिक्योरिटी को खरीदने, बेचने या उसमें निवेश करने की सलाह या सुझाव भी नहीं दे सकता।

Live Market Data शेयर करने पर भी रोक

नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि Live Market Data को सामान्य तौर पर कोई भी संस्था अपनी मर्जी से शेयर नहीं कर सकती।

ऐसा डेटा सिर्फ उन परिस्थितियों में साझा किया जा सकता है, जब यह Securities Market के व्यवस्थित संचालन से जुड़ा हो या किसी Regulatory Requirement को पूरा करने के लिए जरूरी हो।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

सेबी ने निवेशकों से सोशल मीडिया पर लाइव या रियल-टाइम ट्रेडिंग की रणनीति बताने वाले लोगों के दावों से सावधान रहने को कहा है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की ओर से दिखाए जा रहे लाइव मुनाफे, ट्रेडिंग स्क्रीन या बाजार के संभावित लक्ष्य देखकर निवेश का फैसला न लें।

नियामक ने कहा है कि निवेशकों को अपने निवेश के फैसले खुद सोच-समझकर और पूरी जानकारी हासिल करने के बाद लेने चाहिए। निवेश से जुड़ी सेवाओं के लिए केवल सेबी में पंजीकृत संस्थाओं और मध्यस्थों से ही संपर्क करना चाहिए।

सेबी ने यह भी कहा है कि शेयर बाजार में लेन-देन करते समय निवेशकों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसे बिना रजिस्ट्रेशन वाले लोगों या संस्थाओं से निवेश संबंधी सलाह लेने से बचना चाहिए।

सोशल मीडिया पर ट्रेडिंग कंटेंट को लेकर बढ़ी चिंता

आज यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग लाइव ट्रेडिंग और शेयर बाजार से जुड़े कंटेंट शेयर करते हैं। कई लोग लाइव मार्केट मूवमेंट के दौरान अपने ट्रेड भी दिखाते हैं और दर्शकों को खरीद-बिक्री के संकेत देते हैं।

सेबी की ताजा चेतावनी का मकसद निवेशकों को ऐसे कंटेंट से जुड़े जोखिमों के प्रति जागरूक करना है। नियामक का संदेश साफ है- सिर्फ किसी व्यक्ति की लाइव ट्रेडिंग या कथित मुनाफे की स्क्रीन देखकर उसके बताए ट्रेड पर पैसा न लगाएं।

शेयर बाजार में निवेश हमेशा जोखिम के साथ आता है और निवेशकों को किसी भी सलाह या दावे पर भरोसा करने से पहले यह जरूर देखना चाहिए कि सलाह देने वाला व्यक्ति या संस्था सेबी के साथ रजिस्टर्ड है या नहीं।

 

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Eros International Media को जून तिमाही में ₹10.43 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा

फिल्म और मीडिया कंपनी Eros International Media की वित्तीय मुश्किलें अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं।

Last Modified:
Wednesday, 19 August, 2026
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फिल्म और मीडिया कंपनी Eros International Media की वित्तीय मुश्किलें अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं। कंपनी ने 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में कंसोलिडेटेड स्तर पर ₹10.43 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा दर्ज किया है। वहीं, कंपनी के ऑडिटर ने उसकी कारोबार जारी रखने की क्षमता को लेकर Material Uncertainty जताई है।

कंपनी के मुताबिक, कारोबार को आगे जारी रखने के लिए उसे अपनी फिल्म और म्यूजिक लाइब्रेरी के अधिकारों से कमाई करने, गैर-जरूरी संपत्तियां बेचने और दूसरे रणनीतिक कदमों के जरिए फंड जुटाने की जरूरत है। Eros International Media के बोर्ड ने 14 अगस्त को जून तिमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी।

ऑडिटर ने Going Concern को लेकर जताई चिंता: कंपनी के ऑडिटर Haribhakti & Co. LLP ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी के सामने ऐसी महत्वपूर्ण अनिश्चितताएं हैं, जो उसके कारोबार को आगे जारी रखने की क्षमता पर सवाल खड़े करती हैं। हालांकि, कंपनी ने अपने वित्तीय नतीजे Going Concern Basis यानी कारोबार के आगे भी जारी रहने की धारणा पर तैयार किए हैं।

ऑडिटर के मुताबिक, कंपनी का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपनी फिल्म और म्यूजिक लाइब्रेरी के अधिकारों से कितनी जल्दी कमाई कर पाती है, गैर-जरूरी संपत्तियों का इस्तेमाल कर फंड जुटा पाती है और ग्रुप कंपनियों से बकाया रकम वसूल पाती है।

स्टैंडअलोन स्तर पर भी ₹7.43 करोड़ का घाटा: कंपनी के स्टैंडअलोन नतीजों की बात करें तो Eros International Media को जून तिमाही में ₹7.43 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा हुआ है। फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी की नेटवर्थ पूरी तरह खत्म हो चुकी है। इसके अलावा कुछ मौकों पर कंपनी की ओर से वैधानिक देनदारियों यानी Statutory Dues के भुगतान में भी डिफॉल्ट हुआ है। कंपनी ने कहा है कि उसने अपनी Liquidity स्थिति सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें Borrowing Facilities में बदलाव, खर्चों में कटौती और फिल्म-म्यूजिक लाइब्रेरी से ज्यादा से ज्यादा कमाई करने की कोशिश शामिल है।

ग्रुप कंपनियों से बड़ी रकम वसूलनी बाकी: Eros के सामने एक बड़ी चुनौती ग्रुप कंपनियों से बकाया रकम की वसूली भी है। कंपनी के पास Eros Worldwide FZE से ₹166.58 करोड़ की नेट ट्रेड रिसीवेबल्स हैं। इसमें ₹321.55 करोड़ की ट्रेड पेयेबल्स को एडजस्ट किया गया है। इसके अलावा Eros International Limited UK से ₹81.84 करोड़ और Eros International USA Inc. से ₹35.66 करोड़ की रकम भी कंपनी को लेनी है। इन बकाया रकम को देखते हुए कंपनी ने 30 जून 2026 तक नेट ट्रेड रिसीवेबल्स पर ₹286.46 करोड़ का Expected Credit Loss Provision बनाया है।

RBI से भी मांगी गई अनुमति: Eros ने अपने अधिकृत डीलर्स के जरिए Reserve Bank of India (RBI) से भी संपर्क किया है। कंपनी ने बकाया एक्सपोर्ट इनवॉयस की वसूली में हुई देरी को माफ करने, ट्रेड पेयेबल्स को रिसीवेबल्स के साथ एडजस्ट करने और Eros Worldwide FZE से मिलने वाली ₹166.58 करोड़ की नेट रकम के रेमिटेंस की अनुमति मांगी है। हालांकि, इन मंजूरियों से कंपनी की वित्तीय स्थिति पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

 ₹1,016 करोड़ के Content Advances पर SEBI की नजर: कंपनी की मुश्किलें सिर्फ वित्तीय दबाव तक सीमित नहीं हैं। उसके खिलाफ SEBI से जुड़े मामले भी चल रहे हैं। ऑडिटर की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक कंपनी की ओर से कुछ पक्षों को दिए गए ₹1,016.01 करोड़ के Content Advances SEBI की जांच और जांच से जुड़े दूसरे मामलों के दायरे में हैं। ये मामले SEBI के Confirmatory Order में भी शामिल हैं। ऑडिटर ने कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन कार्यवाहियों का जून तिमाही के वित्तीय नतीजों पर संभावित असर बताना संभव नहीं है।

 कंपनी ने कहा है कि वह SEBI की ओर से जारी Show-Cause Notice से जुड़े मामले में लगातार जानकारी, स्पष्टीकरण और दस्तावेज हासिल करने की कोशिश कर रही है। यह मामला Securities Appellate Tribunal (SAT) के सामने भी चल रहा है और 17 अगस्त 2026 को इसकी आगे की सुनवाई तय थी।

Film और Music Library से कमाई पर बड़ा दांव: मौजूदा वित्तीय दबाव से निकलने के लिए Eros अब अपनी सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक यानी फिल्म और म्यूजिक कंटेंट लाइब्रेरी को कमाई का प्रमुख जरिया बनाने की कोशिश कर रही है। कंपनी ने कहा है कि वह अपनी फिल्म और म्यूजिक लाइब्रेरी को लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट के जरिए Monetise करने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही कंपनी ग्रुप कंपनियों से बकाया रकम वसूलने और दूसरे रणनीतिक विकल्पों पर भी काम कर रही है। ऑडिटर ने भी साफ किया है कि कंपनी के कारोबार को आगे जारी रखने की क्षमता इन उपायों की सफलता पर काफी हद तक निर्भर है।

ऑडिटर कंसोलिडेटेड नतीजों पर निष्कर्ष नहीं दे पाए: कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों की समीक्षा के दौरान ऑडिटर को कुछ मामलों में पर्याप्त और उचित सबूत नहीं मिल पाए। इसके कारण ऑडिटर ने कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों पर निष्कर्ष देने में असमर्थता जताई है। इनमें Colour Yellow Production Private Limited से जुड़ा मामला भी शामिल है। यह कंपनी Eros की एक सब्सिडियरी है, लेकिन जून तिमाही के कंसोलिडेटेड नतीजों में इसे शामिल नहीं किया गया। इसका कारण कंपनी के मैनेजमेंट और कंट्रोल को लेकर चल रहा विवाद बताया गया है। यह मामला फिलहाल NCLAT के सामने है।

लागत घटाने और कैश बचाने की कोशिश: कंपनी ने अपनी Liquidity सुधारने के लिए खर्चों में कटौती और कैश बचाने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा Borrowing Facilities को Restructure करने और उपलब्ध फिल्म-म्यूजिक कंटेंट से ज्यादा से ज्यादा Revenue हासिल करने की कोशिश की जा रही है। कंपनी का कहना है कि वह वित्तीय और नियामकीय चुनौतियों के बावजूद सामान्य तरीके से कारोबार जारी रखे हुए है और संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करती रहेगी।

Going Concern Warning बनी सबसे बड़ी चिंता: Eros के लिए सबसे बड़ी चिंता फिलहाल ऑडिटर की Going Concern Warning है। स्टैंडअलोन कंपनी का ₹7.43 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा, पूरी तरह खत्म हो चुकी नेटवर्थ और कुछ मौकों पर Statutory Dues के भुगतान में डिफॉल्ट—इन सभी को ऑडिटर ने महत्वपूर्ण अनिश्चितताओं से जोड़ा है। वहीं, ग्रुप स्तर पर ₹10.43 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा भी कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव को दिखाता है। अब Eros की आगे की स्थिति इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि कंपनी फिल्म और म्यूजिक लाइब्रेरी से कितनी तेजी से पैसा जुटाती है, बकाया रकम कितनी वसूल कर पाती है और गैर-जरूरी संपत्तियों से कितनी Liquidity हासिल करती है। फिलहाल कंपनी कारोबार जारी रखे हुए है, लेकिन वित्तीय दबाव, ग्रुप से बकाया रकम, SEBI से जुड़े मामले और ऑडिटर की Going Concern Warning ने Eros के सामने चुनौतियां काफी बढ़ा दी हैं।

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ABVP से BJP की राष्ट्रीय मीडिया टीम तक, जानिए कौन हैं सिद्धार्थ यादव

सुप्रीम कोर्ट में वकालत से जुड़े सिद्धार्थ यादव को BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी, UCL और SRCC से पढ़ाई के साथ ABVP से भी रहा जुड़ाव

Last Modified:
Tuesday, 18 August, 2026
Sidharth Yadav

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में सिद्धार्थ यादव को मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी मिली है। राष्ट्रीय मीडिया कन्वेनर अनिल बलूनी के साथ आशीष ऊषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव इस टीम का हिस्सा होंगे।

सिद्धार्थ यादव की पेशेवर पहचान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता के तौर पर है। वह BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर भी सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहे हैं और राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं।

सिद्धार्थ यादव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे हैं। वह पूर्व में ABVP के मीडिया इंचार्ज की भूमिका भी निभा चुके हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से LLB और LLM किया है। इसके अलावा उन्हेंने University College London (UCL) और श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से पढ़ाई की है।

कानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत को अपना पेशा बनाया। इसके साथ BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर वह पार्टी के राजनीतिक पक्ष को मीडिया के सामने रखते रहे हैं। अब BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में उन्हें मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी मिली है।

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मध्य प्रदेश की मीडिया कमान से BJP की राष्ट्रीय टीम तक, जानिए आशीष ऊषा अग्रवाल का सफर

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में मध्य प्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल को अहम जिम्मेदारी दी है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया को-कन्वेनर बनाया है।

Last Modified:
Tuesday, 18 August, 2026
Ashish Agrawal

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में मध्य प्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल को अहम जिम्मेदारी दी है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया को-कन्वेनर बनाया है। राष्ट्रीय मीडिया कन्वेनर अनिल बलूनी के साथ आशीष ऊषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव अब BJP की राष्ट्रीय मीडिया टीम का हिस्सा होंगे। मध्य प्रदेश BJP की मीडिया व्यवस्था में लंबे समय से जिम्मेदारी संभाल रहे आशीष ऊषा अग्रवाल के लिए यह जिम्मेदारी प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाले उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

आशीष ऊषा अग्रवाल मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं। उनका राजनीतिक सफर ग्वालियर से जुड़ा रहा है और 2010 से वह ग्वालियर में पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। पार्टी की मीडिया व्यवस्था में भी उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं। 17 अगस्त 2017 से 13 अगस्त 2021 तक प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट, 14 अगस्त 2021 से 29 अप्रैल 2023 तक प्रदेश प्रवक्ता और 29 अप्रैल 2023 से प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर वह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

ग्वालियर से शुरू हुआ राजनीतिक सफर: आशीष ऊषा अग्रवाल का बीजेपी से जुड़ाव ग्वालियर से रहा है। उपलब्ध प्रोफाइल के मुताबिक, वर्ष 2010 से वह ग्वालियर में पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। छात्र जीवन से ही वह धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे।

राजनीति में सक्रिय होने के साथ उनकी भूमिका धीरे-धीरे पार्टी के मीडिया और राजनीतिक संवाद से जुड़ती गई। 2017 में उन्हें BJP मध्य प्रदेश में प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता बनाया और आगे चलकर प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी। यह क्रम उनके राजनीतिक सफर में लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों को दिखाता है।

मीडिया पैनलिस्ट से प्रदेश मीडिया प्रभारी तक: BJP मध्य प्रदेश की मीडिया व्यवस्था में आशीष ऊषा अग्रवाल की जिम्मेदारियों का क्रम उनके प्रोफाइल में स्पष्ट रूप से दर्ज है। 17 अगस्त 2017 से 13 अगस्त 2021 तक उन्होंने प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर काम किया। इसके बाद 14 अगस्त 2021 से 29 अप्रैल 2023 तक प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाली। 29 अप्रैल 2023 से वह मध्य प्रदेश BJP के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं।

प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर उनकी भूमिका पार्टी के राजनीतिक और सार्वजनिक संवाद से जुड़ी रही है। विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर BJP का पक्ष मीडिया के सामने रखने के साथ-साथ पार्टी की मीडिया गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी भी उनके काम का हिस्सा रही है।

चुनावी दौर में मीडिया प्रबंधन का अनुभव: प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर आशीष ऊषा अग्रवाल की भूमिका चुनावी दौर में भी महत्वपूर्ण रही है। 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान BJP ने सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मीडिया संयोजकों की नियुक्ति की थी।

उस समय प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर आशीष अग्रवाल ने विधानसभा स्तर पर मीडिया व्यवस्था से जुड़ी नियुक्तियों की जानकारी साझा की थी। चुनाव के दौरान पार्टी के मीडिया नेटवर्क को विधानसभा स्तर तक मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संवाद को व्यवस्थित करना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा रहा।

शिक्षा और पेशेवर जीवन: राजनीतिक जिम्मेदारियां संभालने से पहले आशीष ऊषा अग्रवाल का पेशेवर अनुभव कॉरपोरेट क्षेत्र से भी जुड़ा रहा है। उनके प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने 2003 से 2010 तक ICICI Bank और उसके समूह में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। शिक्षा की बात करें तो उन्होंने चेन्नई के Great Lakes Institute of Management से MBA किया है। इसके अलावा जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से MA (Social Work & Extension Education) और B.Com की डिग्री हासिल की है। कॉरपोरेट क्षेत्र के अनुभव के बाद उनका सार्वजनिक जीवन राजनीतिक संगठन और मीडिया प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ा।

सामाजिक और सेवा गतिविधियों से भी जुड़ाव: आशीष ऊषा अग्रवाल छात्र जीवन से ही धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपनी माता जी की स्मृति में मुरार मुक्तिधाम के जीर्णोद्धार का कार्य करवाया। इसके अलावा वंचित वर्गों को वित्तीय सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराने की पहल के साथ वह सामाजिक समरसता, धार्मिक आयोजनों और सेवा कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। उनकी सामाजिक गतिविधियों का जुड़ाव खास तौर पर ग्वालियर से रहा है, जहां से उनका राजनीतिक और सामाजिक सफर आगे बढ़ा।

ग्वालियर के प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं: आशीष ऊषा अग्रवाल ग्वालियर के प्रतिष्ठित HG Group परिवार से आते हैं। छात्र जीवन से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहने के बाद उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया और फिर BJP की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। इस तरह उनके सार्वजनिक जीवन में पेशेवर अनुभव के साथ सामाजिक और राजनीतिक जुड़ाव भी लगातार बना रहा।

अब प्रदेश से राष्ट्रीय मीडिया टीम तक: BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में आशीष ऊषा अग्रवाल को मीडिया को-कन्वेनर बनाए जाने के साथ उनकी जिम्मेदारी का दायरा मध्य प्रदेश से आगे बढ़ गया है। आशीष ऊषा अग्रवाल के अब तक के सफर को देखें तो BJP में उनकी राजनीतिक भूमिका लगातार मीडिया और कम्युनिकेशन के इर्द-गिर्द विकसित हुई है। 2010 से ग्वालियर में पार्टी की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़ने के बाद 2017 में वह प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट बने। इसके बाद प्रदेश प्रवक्ता और फिर 2023 से प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस दौरान उन्हें पार्टी के राजनीतिक संवाद, मीडिया प्रबंधन और चुनावी गतिविधियों से जुड़े काम का अनुभव मिला। अब राष्ट्रीय मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी के साथ उनके इस सफर का दायरा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। 

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प्रदीप भंडारी: चुनावी विश्लेषण से BJP की राष्ट्रीय मीडिया टीम तक, यूं बनाई खास पहचान

जाने-माने चुनाव विश्लेषक, वरिष्ठ टीवी पत्रकार और लेखक प्रदीप भंडारी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक (National Media Co-Convener) नियुक्त किया है।

Last Modified:
Tuesday, 18 August, 2026
Pradeep Bhandari

जाने-माने चुनाव विश्लेषक, वरिष्ठ टीवी पत्रकार और लेखक प्रदीप भंडारी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में अहम जिम्मेदारी मिली है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक (National Media Co-Convener) नियुक्त किया है। राष्ट्रीय मीडिया संयोजक अनिल बलूनी के साथ अब वह पार्टी की राष्ट्रीय मीडिया टीम का हिस्सा होंगे। इससे पहले जुलाई 2024 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी थी।

प्रदीप भंडारी ‘जन की बात’ के फाउंडर और CEO हैं और चुनावी विश्लेषण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखते हैं। ग्राउंड सर्वे और चुनावी आंकड़ों के जरिए मतदाताओं का मूड समझने वाले भंडारी टीवी पत्रकारिता और एंकरिंग से लेकर लेखन तक सक्रिय रहे हैं। वह इंडिया न्यूज (India News) में न्यूज डायरेक्टर और रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क (Republic Media Network) में कंसल्टिंग एडिटर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, जबकि जी न्यूज (Zee News) में कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। चुनावी विश्लेषण के अपने अनुभव को उन्होंने किताबों के जरिए भी सामने रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनकी दो किताबें—‘Modi Vijaygatha 2019’ और ‘Modi 3.0: Bigger, Higher, Stronger’—चर्चा में रही हैं।

चुनावी विश्लेषण से बनी पहचान: प्रदीप भंडारी की पहचान एक चुनाव विश्लेषक के तौर पर मजबूत हुई। ‘जन की बात’ के जरिए उन्होंने चुनावी सर्वे और ग्राउंड रिपोर्टिंग को अपने काम का अहम हिस्सा बनाया। मतदाताओं के बीच जाकर उनके मुद्दों, प्राथमिकताओं और राजनीतिक सोच को समझना उनके चुनावी विश्लेषण की खासियत रही है। उनके चुनावी काम में ग्राउंड रिपोर्टिंग और पब्लिक ओपिनियन को आंकड़ों के साथ जोड़ने पर खास जोर रहा है ।यही अनुभव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पेशेवर पहचान बना। चुनावी नतीजों से पहले मतदाताओं के मूड और राजनीतिक रुझानों को समझने की उनकी कोशिशों ने उन्हें चुनावी विश्लेषण के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम बनाया।

‘जन की बात’ से बनाई अलग पहचान: प्रदीप भंडारी ने ‘जन की बात’ (Jan Ki Baat) को एक स्वतंत्र पब्लिक ओपिनियन और चुनाव विश्लेषण प्लेटफॉर्म के तौर पर खड़ा किया। चुनावों के दौरान ग्राउंड सर्वे, ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल के जरिए मतदाताओं के मूड को समझना इसके काम का अहम हिस्सा रहा है। ‘जन की बात’ के जरिए भंडारी ने चुनावी आंकड़ों को जमीन पर मौजूद राजनीतिक माहौल से जोड़ने की कोशिश की। अलग-अलग राज्यों के चुनावों में ग्राउंड पर जाकर मतदाताओं से बातचीत और उनके राजनीतिक रुझानों को समझने का यह मॉडल उनकी पहचान का अहम हिस्सा बना।

चुनावी विश्लेषण से किताबों तक का सफर: चुनावी राजनीति पर अपने अनुभव और विश्लेषण को प्रदीप भंडारी ने किताबों के जरिए भी सामने रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा और चुनावी सफलता उनके लेखन का प्रमुख विषय रही है। उनकी किताब ‘Modi Vijaygatha 2019’ 2019 के लोकसभा चुनाव और नरेंद्र मोदी की राजनीतिक सफलता के विश्लेषण पर केंद्रित है। इसके बाद उनकी दूसरी किताब ‘Modi 3.0: Bigger, Higher, Stronger’ सामने आई। यह किताब 2024 के लोकसभा चुनाव, भारतीय मतदाताओं के व्यवहार और नरेंद्र मोदी की राजनीतिक लोकप्रियता को चुनावी विश्लेषण के नजरिए से समझने की कोशिश करती है। ‘Modi 3.0’ में भंडारी ने भारतीय मतदाताओं के मूड और चुनावी रुझानों को समझने के अपने अनुभव को पुस्तक के रूप में पेश किया है। इस तरह उनका लेखन भी उनके चुनावी विश्लेषण और ग्राउंड अनुभव से सीधे जुड़ा नजर आता है।

पत्रकारिता से राजनीति तक बदला प्रोफेशनल ट्रैक: प्रदीप भंडारी के करियर में बड़ा बदलाव जुलाई 2024 में आया, जब BJP ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया। पार्टी की ओर से जारी नियुक्ति पत्र में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से उनकी नियुक्ति की जानकारी दी गई थी। राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने के बाद उनकी भूमिका सिर्फ चुनाव विश्लेषक या टीवी पत्रकार तक सीमित नहीं रही। वह BJP के राष्ट्रीय राजनीतिक संचार का औपचारिक हिस्सा बन गए और मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखने लगे। यह उनके प्रोफेशनल सफर का महत्वपूर्ण मोड़ था। जिस राजनीतिक परिदृश्य और मतदाता के मूड का वह पत्रकार और चुनाव विश्लेषक के तौर पर विश्लेषण करते रहे थे, अब उसी राजनीतिक व्यवस्था में वह एक राजनीतिक दल के आधिकारिक प्रवक्ता के तौर पर सक्रिय हो गए।

BJP की राष्ट्रीय मीडिया टीम में नई भूमिका: अब BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में उन्हें राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था में अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक, जबकि प्रदीप भंडारी के साथ आशीष उषा अग्रवाल और सिद्धार्थ यादव को मीडिया सह-संयोजक बनाया गया है। इस नई जिम्मेदारी के साथ प्रदीप भंडारी का BJP में संगठनात्मक और राजनीतिक संचार से जुड़ा दायरा और बढ़ गया है। राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर जहां उनकी भूमिका पार्टी का राजनीतिक पक्ष मीडिया के सामने रखने की थी। 

चुनावी मैदान से राष्ट्रीय मीडिया रणनीति तक: प्रदीप भंडारी का सफर पत्रकारिता से शुरू होकर चुनावी विश्लेषण, ग्राउंड सर्वे, टीवी पत्रकारिता, एंकरिंग और लेखन से गुजरते हुए राजनीति तक पहुंचा है। ‘जन की बात’ ने उन्हें चुनावी विश्लेषण के क्षेत्र में अलग पहचान दी, जबकि टीवी पत्रकारिता ने उन्हें बड़े राजनीतिक मुद्दों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अनुभव दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखी उनकी किताबों ने उनके चुनावी और राजनीतिक विश्लेषण को एक अलग मंच दिया। जुलाई 2024 में BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने के बाद उनके करियर ने पत्रकारिता से राजनीति की ओर औपचारिक मोड़ लिया और अब राष्ट्रीय मीडिया टीम में सह-संयोजक की जिम्मेदारी उनके इस सफर का नया पड़ाव है। चुनावी मैदान में मतदाताओं की नब्ज पढ़ने से शुरू हुआ प्रदीप भंडारी का सफर अब BJP की राष्ट्रीय मीडिया व्यवस्था तक पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि चुनावी विश्लेषण, ग्राउंड सर्वे, टीवी पत्रकारिता, एंकरिंग और लेखन का अनुभव अब पार्टी की राष्ट्रीय मीडिया रणनीति में उनके काम आएगा। 

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BJP की नई मीडिया टीम गठित, जानिए किसे मिली जगह

भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में अपनी नई मीडिया टीम का ऐलान कर दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 18 August, 2026
BJP

भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में अपनी नई मीडिया टीम का ऐलान कर दिया है। पार्टी की नई व्यवस्था में उत्तराखंड के गढ़वाल से लोकसभा सांसद अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया कन्वेनर की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ आशीष उषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को मीडिया को-कन्वेनर बनाया गया है। 

आइए, अब डालते हैं इन प्रमुख चेहरों पर एक नजर

अनिल बलूनी (राष्ट्रीय मीडिया कन्वेनर)

अनिल बलूनी उत्तराखंड की गढ़वाल लोकसभा सीट से BJP के सांसद हैं। वह इससे पहले BJP के राष्ट्रीय मीडिया और प्रवक्ता से जुड़े अहम दायित्व संभाल चुके हैं। मार्च 2017 से वह पार्टी की राष्ट्रीय मीडिया व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। नई राष्ट्रीय टीम में भी उन्हें मीडिया कन्वेनर की जिम्मेदारी दी गई है।

आशीष उषा अग्रवाल (मीडिया को-कन्वेनर)

आशीष उषा अग्रवाल मध्य प्रदेश BJP के मीडिया प्रभारी हैं। उनके सार्वजनिक प्रोफाइल में भी उन्हें BJP मध्य प्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर दर्ज किया गया है। अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रदीप भंडारी  (मीडिया को-कन्वेनर)

प्रदीप भंडारी BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और पत्रकार तथा चुनावी विश्लेषक के तौर पर भी सक्रिय रहे हैं। वह Jan Ki Baat के संस्थापक और संपादक हैं। BJP ने जुलाई 2024 में उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया था। वह विभिन्न चुनावों के दौरान सर्वे और चुनावी विश्लेषण के लिए भी जाने जाते हैं। नई टीम में उन्हें मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी दी गई है।

सिद्धार्थ यादव  (मीडिया को-कन्वेनर)

सिद्धार्थ यादव BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहे हैं। वह सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हैं और राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं। नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व में वह ‘एबीवीपी’ के मीडिया इंचार्ज भी रहे हैं।

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ब्लूमबर्ग मीडिया छोड़ने की तैयारी में सुनीता राजन

सुनीता राजन (Sunita Rajan) पांच साल से ज्यादा समय तक ब्लूमबर्ग मीडिया (Bloomberg Media) में एशिया पैसिफिक मीडिया सेल्स एंड मार्केटिंग की मैनेजिंग डायरेक्टर रहने के बाद विदाई लेने की तैयारी में हैं।

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
sunitarajan

सुनीता राजन (Sunita Rajan) ब्लूमबर्ग मीडिया (Bloomberg Media) से विदाई लेने की तैयारी में हैं। एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) की रिपोर्ट के मुताबिक, वह पांच साल से ज्यादा समय तक कंपनी में एशिया पैसिफिक मीडिया सेल्स एंड मार्केटिंग की मैनेजिंग डायरेक्टर रहीं। सिंगापुर में स्थित राजन ने जनवरी 2021 में ब्लूमबर्ग मीडिया जॉइन किया था।

अपने कार्यकाल के दौरान राजन ने ब्लूमबर्ग मीडिया के डिजिटल प्रोडक्ट्स, ब्लूमबर्ग टेलीविजन, ब्लूमबर्ग रेडियो, ब्लूमबर्ग लाइव इवेंट्स और ब्लूमबर्ग बिजनेसवीक व ब्लूमबर्ग ग्रीन जैसे प्रिंट ब्रांड्स से जुड़े विज्ञापन राजस्व और क्लाइंट मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाली।

उन्होंने एशिया पैसिफिक क्षेत्र में सेल्स और मार्केटिंग टीमों का नेतृत्व करने के साथ क्रॉस-प्लेटफॉर्म कमर्शियल पहलों को भी आगे बढ़ाया। राजन की अगली पेशेवर पारी को लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। उनके आखिरी कार्यदिवस या संभावित उत्तराधिकारी के बारे में भी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्ट के लिए एक्सचेंज4मीडिया ने ब्लूमबर्ग से संपर्क किया था, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

मीडिया सेल्स और कमर्शियल क्षेत्र में राजन का करियर तीन दशक से ज्यादा लंबा रहा है। ब्लूमबर्ग से पहले उन्होंने करीब छह साल सीएनएन इंटरनेशनल कमर्शियल (CNN International Commercial) के साथ काम किया, जहां उन्होंने एशिया पैसिफिक में विज्ञापन बिक्री और मार्केटिंग पार्टनरशिप का नेतृत्व किया।

इससे पहले वह 16 साल से ज्यादा समय तक बीबीसी वर्ल्डवाइड एशिया (BBC Worldwide Asia) से जुड़ी रहीं। यहां उन्होंने एशिया और ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में विज्ञापन बिक्री की जिम्मेदारी संभाली और बीबीसी वर्ल्ड न्यूज, बीबीसी डॉट कॉम और लोनली प्लैनेट जैसी कमर्शियल प्रॉपर्टीज के लिए विज्ञापन राजस्व बढ़ाने में भूमिका निभाई।

करियर की शुरुआत में राजन ने चैनल वी (Channel V) और स्टार टीवी (Star TV) के साथ भी काम किया। चैनल वी में वह मार्केटिंग डायरेक्टर और रीजनल सेल्स मैनेजर रहीं, जबकि स्टार टीवी में उन्होंने एशिया में सैटेलाइट टेलीविजन के शुरुआती विस्तार के दौर में सेल्स से जुड़ी भूमिकाएं निभाईं।

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महाराष्ट्र FDA ने Blinkit, Zepto और Instamart के 14 लाइसेंस किए सस्पेंड

महाराष्ट्र FDA ने Blinkit, Zepto और Instamart के 14 लाइसेंस किए सस्पेंड

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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महाराष्ट्र में क्विक-कॉमर्स कंपनियों Blinkit, Zepto और Instamart की फूड सेफ्टी को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। महाराष्ट्र फूड व ड्रग एडमिनेस्ट्रेश (FDA) ने इन प्लेटफॉर्म से जुड़े 14 फूड बिजनेस प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं। जांच के दौरान कई जगह एक्सपायर्ड खाद्य सामान, कॉकरोच, खराब स्टोरेज, तापमान में गड़बड़ी और साफ-सफाई से जुड़ी कमियां मिलीं।

यह कार्रवाई 13 अगस्त 2026 को पूरे महाराष्ट्र में चलाए गए एक राज्यव्यापी निरीक्षण अभियान के बाद की गई। FDA अधिकारियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खाने-पीने की चीजों को स्टोर करने, बेचने और डिलीवर करने वाले 86 प्रतिष्ठानों की जांच की।

जांच के बाद 60 सुधार नोटिस जारी किए गए, जबकि एक प्रतिष्ठान को कुछ समय के लिए अपना ऑपरेशन बंद करने का निर्देश दिया गया। हालांकि, इस अभियान के दौरान किसी भी लाइसेंस को पूरी तरह कैंसल नहीं किया गया।

Blinkit, Zepto और Instamart के लाइसेंस सस्पेंड 

FDA के मुताबिक, सस्पेंड किए गए 14 लाइसेंस में Blinkit के 5, Zepto के 5 और Instamart के 2 प्रतिष्ठान शामिल हैं। इसके अलावा Bhagwati Stores के एक आउटलेट और Swinsta Ent Pvt Ltd के एक प्रतिष्ठान का लाइसेंस भी सस्पेंड किया गया है।

जांच के दौरान अधिकारियों ने फूड स्टोरेज, तापमान, साफ-सफाई, कीट नियंत्रण, फूड हैंडलर्स की हाइजीन और FIFO/FEFO जैसे नियमों के पालन की जांच की। इसके अलावा फूड सेफ्टी से जुड़े रिकॉर्ड और जरूरी लाइसेंस को प्रमुखता से प्रदर्शित करने की स्थिति भी देखी गई।

FDA ने कहा कि जहां गंभीर नियम उल्लंघन मिले, वहां लाइसेंस सस्पेंड करने की कार्रवाई की गई।

पुणे में Zepto के स्टोर पर एक्सपायर्ड सामान मिला

पुणे के लोहेगांव स्थित Zepto आउटलेट में जांच के दौरान कुछ खाद्य उत्पाद अपनी तय ‘Use By’ डेट पार कर चुके थे। अधिकारियों ने यह भी पाया कि सामान को व्यवस्थित रखने के लिए FIFO/FEFO प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा था।

इसके अलावा स्टोरेज की स्थिति साफ-सुथरी नहीं थी, कीट नियंत्रण की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी और फूड हैंडलर्स की व्यक्तिगत स्वच्छता में भी गंभीर कमियां मिलीं।

FDA के मुताबिक, सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद इस प्रतिष्ठान का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया।

पुणे के वारजे जकात नाका स्थित Swinsta Ent Pvt Ltd के प्रतिष्ठान में भी गंभीर कमियां मिलीं। यहां कॉकरोच का प्रकोप, फ्रोजेन फूड के लिए कोल्ड चेन बनाए रखने में परेशानी, तापमान नियंत्रण में कमी और साफ-सफाई तथा pest management से जुड़ी खामियां पाई गईं।

मुंबई के Blinkit स्टोर्स में भी मिली गड़बड़ियां

मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित एक Blinkit फैसिलिटी में चिलर रूम का तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसे FDA ने निर्धारित स्तर से ज्यादा बताया।

जांच में यह भी सामने आया कि करीब 40 फूड हैंडलर्स की मेडिकल जांच नहीं हुई थी और इससे जुड़े रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे।

कुछ कर्मचारी बिना हेडकवर, एप्रन और ग्लव्स के काम करते मिले। स्टोरेज एरिया भी व्यवस्थित नहीं था। वहां खराब या जंग लगे रैक मिले और शाकाहारी, मांसाहारी, पका हुआ और डेयरी सामान अलग-अलग रखने की व्यवस्था में भी कमी पाई गई।

FDA ने कर्मचारियों की ट्रेनिंग और फूड सेफ्टी की निगरानी में भी कमियां बताईं।

घाटकोपर में Blinkit स्टोर सिर्फ 46% स्कोर कर पाया

मुंबई के घाटकोपर स्थित एक अन्य Blinkit फैसिलिटी में ड्रेनेज और कचरा निपटाने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं मिली। फ्रोजेन फूड के तापमान में भी समस्या थी और खुले खाद्य पदार्थ रखे जाने वाले क्षेत्र में लाइटिंग से जुड़ी कमियां पाई गईं।

हाउसकीपिंग भी खराब मिली। इस फैसिलिटी को जांच में 74 में से 34 अंक यानी 46% मिले और इसे नॉन-कम्पलेंट माना गया।

Zepto और Instamart की फैसिलिटीज में भी कमियां

Mulund स्थित Zepto फैसिलिटी में कचरा निपटाने, तापमान नियंत्रण, लाइटिंग और अलग-अलग सामान रखने की व्यवस्था में कमियां मिलीं। साफ-सफाई भी ठीक नहीं थी और FSSAI लाइसेंस प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं किया गया था।

इस यूनिट को 180 में से 81 अंक यानी 45% मिले और इसे भी नॉन-कम्पलेंट घोषित किया गया।

वहीं Goregaon की Zepto Gola Unit की दोबारा जांच में तापमान नियंत्रण, लाइटिंग, फूड स्टोरेज, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं मिलीं। यूनिट ने 142 में से 98 अंक यानी 70% हासिल किए, लेकिन फिर भी इसे नॉन-कम्पलेंट की कैटेगरी में रखा गया।

Andheri स्थित Instamart फैसिलिटी में कुछ फूड पैकेट सीधे फर्श पर रखे मिले। यहां स्टोरेज स्पेस कम था और खाने के सामान तथा पैकेजिंग मटेरियल के बीच पर्याप्त जगह नहीं थी। तापमान, लाइटिंग, साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता में भी कमियां मिलीं।

इस फैसिलिटी को 140 में से 76 अंक यानी 55% मिले और इसे नॉन-कम्पलेंट माना गया।

डिलीवरी राइडर्स की भी जांच

FDA की कार्रवाई सिर्फ dark stores और स्टोरेज फैसिलिटीज तक सीमित नहीं रही। अधिकारियों ने Satara जिले के Karad में Blinkit स्टोर से जुड़े दोपहिया डिलीवरी ऑपरेशन की भी जांच की। इस दौरान 125 दोपहिया डिलीवरी राइडर्स की जांच की गई। FDA के मुताबिक, राइडर्स के पास पहचान पत्र और मेडिकल फिटनेस रिकॉर्ड नहीं थे।

अधिकारियों ने यह भी पाया कि मुख्य फूड बिजनेस का FSSAI लाइसेंस डिलीवरी कार्ट, बैग या बॉक्स पर प्रदर्शित नहीं किया गया था। 

इन कमियों को देखते हुए FDA ने संबंधित कंपनी को दोपहिया वाहनों के जरिए डिलीवरी से जुड़ी गतिविधियां तब तक रोकने का निर्देश दिया है, जब तक कमियों को दूर नहीं कर लिया जाता।

Food Safety Act के तहत हुई कार्रवाई

महाराष्ट्र FDA ने कहा है कि यह कार्रवाई Food Safety and Standards Act, 2006 और इसके तहत बनाए गए नियमों और रेगुलेशंस के तहत की गई है।

रेगुलेटर ने ऑनलाइन फूड बिक्री और डिलीवरी से जुड़े सभी कारोबारों को फूड सेफ्टी, साफ-सफाई और खाद्य पदार्थों के सही स्टोरेज से जुड़े तय नियमों का पालन करने को कहा है। इस कार्रवाई से साफ है कि महाराष्ट्र FDA अब क्विक-कॉमर्स कंपनियों के उन स्टोर्स और डिलीवरी नेटवर्क पर भी सख्ती बढ़ा रहा है, जहां से ग्राहकों तक सीधे खाने-पीने की चीजें पहुंचाई जाती हैं।

 

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‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव एंड शक्ति अवॉर्ड्स 2026’ में दिखी महिला नेतृत्व की ताकत

कार्यक्रम में 32 सत्रों के दौरान 80 से ज्यादा वक्ताओं ने अपनी बात रखी, जबकि 80 से अधिक महिला अचीवर्स को उनके योगदान और असाधारण यात्राओं के लिए सम्मानित किया गया।

Last Modified:
Sunday, 16 August, 2026
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नई दिल्ली के द इंपीरियल होटल, जनपथ में आयोजित ‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव एंड शक्ति अवॉर्ड्स 2026’ में राजनीति, सार्वजनिक जीवन, मनोरंजन, चिकित्सा, सशस्त्र बलों, उद्यमिता और जमीनी स्तर पर काम कर रहीं महिलाओं के योगदान और नेतृत्व को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में 32 सत्रों के दौरान 80 से ज्यादा वक्ताओं ने अपनी बात रखी, जबकि 80 से अधिक महिला अचीवर्स को उनके योगदान और असाधारण यात्राओं के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख केंद्र ‘नमो शक्ति ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मिशन’ रहा, जिसका उद्देश्य एआई आधारित, विकिरण-मुक्त और संपर्क रहित तकनीक के जरिए देशभर की महिलाओं तक स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग पहुंचाना है। इस पहल के तहत ‘नमो शक्ति रथ’ नाम की एआई-सक्षम मोबाइल मेडिकल वैन के जरिए देश के शहरों, कस्बों और गांवों तक गैर-आक्रामक और विकिरण-मुक्त थर्मल इमेजिंग तकनीक पहुंचाई जा रही है।

कॉन्क्लेव में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान, केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री जयंत चौधरी, दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, डॉ. शशि थरूर, सचिन पायलट, स्मृति ईरानी, कृति खरबंदा समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।

महिला सशक्तिकरण पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि महिलाओं को पुरुषों से सशक्त होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाएं जीवन का आधार हैं और उन्हें कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार स्वयं सहायता समूहों जैसे माध्यमों के जरिए महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कल्याणकारी योजनाओं में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण का मतलब लाभार्थियों को पूरी निर्णय लेने की क्षमता देना है, ताकि वे योजनाओं के डिजाइन से लेकर नवाचार तक सक्रिय भागीदार और प्रेरक शक्ति बन सकें।

दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि महिलाएं सैन्य सेवा, शासन, कारोबार, विज्ञान समेत जीवन के हर क्षेत्र में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल भागीदार नहीं हैं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था को आकार देने वाली प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला सशक्तिकरण को परिवार की पारंपरिक सीमाओं को पार कर स्वतंत्र फैसले लेने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण तब है, जब कोई बेटी अपने परिवार की पहली सदस्य बनकर अपनी पसंद का करियर चुनने जैसा कोई बड़ा फैसला लेती है।

डॉ. शशि थरूर ने कहा कि महिलाएं संसद में अलग तरह के अनुभव और संवेदनाएं लेकर आती हैं, जिससे देश समृद्ध होता है। वहीं स्मृति ईरानी ने महिला मतदाताओं की बदलती भूमिका पर बात करते हुए कहा कि आज महिलाएं स्वतंत्र मतदाता समूह के रूप में पहचानी जाती हैं और उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल महिलाओं की अपेक्षाओं को नजरअंदाज करते हैं, उन्हें महिलाओं का समर्थन खोने का जोखिम रहता है।

सचिन पायलट ने उन महिलाओं से प्रेरणा लेने की बात कही, जिन्होंने स्थापित सीमाओं को चुनौती देते हुए अपने लिए नई राह बनाई।

अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को सम्मान: कार्यक्रम में जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं, उद्यमियों, वर्दी में सेवाएं देने वाली महिलाओं और सार्वजनिक जीवन, चिकित्सा, कला एवं मनोरंजन से जुड़ी महिलाओं को सम्मानित किया गया।

राज्यसभा सांसद और ‘वी वुमन वांट’ तथा ‘नमो शक्ति मिशन’ के संस्थापक कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रभावशाली नेतृत्व को पहचान देना और अगली पीढ़ी की महिला नेताओं के लिए मंच तैयार करना है। उन्होंने कहा कि ‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव’ और ‘शक्ति अवॉर्ड्स’ समाज में महिला नेताओं की विविध भूमिकाओं का उत्सव हैं और यह ‘नमो शक्ति मिशन’ के स्तन कैंसर स्क्रीनिंग अभियान के उद्देश्य से भी जुड़ा है।

द संडे गार्जियन फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. ऐश्वर्या शर्मा ने कहा कि इस मंच ने वर्षों से महिला उपलब्धियों की प्रेरक कहानियों को सामने लाने का काम किया है और इन महिलाओं के काम, ऊर्जा, उत्साह और उद्देश्य को दर्शकों तक पहुंचाना सम्मान की बात रही है।

नमो शक्ति मिशन ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: कॉन्क्लेव में ‘नमो शक्ति ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मिशन’ पर विशेष ध्यान दिया गया। इसे दुनिया का सबसे बड़ा स्तन कैंसर स्क्रीनिंग अभियान बताया गया है। इस अभियान ने मार्च 2026 में 24 घंटे में सबसे अधिक स्तन कैंसर स्क्रीनिंग करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

मिशन के शुरुआती महीनों में 1.5 लाख से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और 3,000 से अधिक ऐसे संभावित मामलों की पहचान की गई है, जिनमें शुरुआती पहचान से जान बचाई जा सकती है। इसके लिए ‘थर्मलिटिक्स’ नाम की एआई आधारित थर्मल इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो दर्द रहित और विकिरण-मुक्त स्क्रीनिंग उपलब्ध कराती है।

2018 में हुई थी ‘वी वुमन वांट’ पहल की शुरुआत: ‘वी वुमन वांट’ पहल की शुरुआत 2018 में हुई थी और इसकी मेजबानी न्यूजएक्स करता है। यह मंच महिलाओं से जुड़े मुद्दों और महिला नेतृत्व वाले विकास पर केंद्रित है। इसके कार्यक्रमों में एसिड अटैक सर्वाइवर्स, वर्दी में काम करने वाली महिलाएं, न्यायविद, उद्यमी, राजनेता, फैक्ट्री वर्कर्स, पुलिसकर्मी और जमीनी स्तर पर काम करने वाले सामुदायिक नेताओं की कहानियां सामने लाई गई हैं।

इस वार्षिक कॉन्क्लेव के दिल्ली और मुंबई में 2021 से अब तक छह संस्करण आयोजित हो चुके हैं। वहीं ‘शक्ति अवॉर्ड्स’ की शुरुआत 2021 में हुई थी। इन पुरस्कारों के जरिए देशभर की उन महिलाओं को सम्मानित किया जाता है, जिनके नेतृत्व और असाधारण जीवन की कहानियों ने सामाजिक प्रभाव पैदा किया है। सम्मान पाने वालों में मछुआरा समुदाय की महिलाएं, ड्रोन दीदियां, आशा कार्यकर्ता, महिला अधिकार कार्यकर्ता, सशस्त्र बलों और रेलवे में कार्यरत महिलाएं, ऑटो चालक, उद्यमी, डिजाइनर, कारोबारी नेता, कंटेंट क्रिएटर और बॉलीवुड से जुड़ी हस्तियां शामिल रही हैं।

कार्यक्रम की खास झलकियां आप यहां देख सकते हैं।

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हिंदुस्तान टाइम्स’ के इतिहास में याद किए जाएंगे आर. सुकुमार : वीर सांघवी

वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी (Vir Sanghvi) ने हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) के एडिटर-इन-चीफ आर. सुकुमार (R Sukumar) के योगदान की सराहना की है।

Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
veersanghvi

वरिष्ठ पत्रकार और फूड क्रिटिक वीर सांघवी (Vir Sanghvi) ने हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) के एडिटर-इन-चीफ आर. सुकुमार (R Sukumar) की जमकर तारीफ की है। सुकुमार के पद से हटने के फैसले के बाद सांघवी ने उनके योगदान को अखबार के इतिहास के महत्वपूर्ण दौर में से एक बताया है।

एचटी मीडिया ग्रुप (HT Media Group) ने हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स के संपादकीय नेतृत्व में बदलाव की घोषणा की है। इसके तहत कुणाल प्रधान (Kunal Pradhan) 1 अक्टूबर 2026 को संगठन से जुड़ेंगे और एक्टिंग एडिटर-इन-चीफ (Acting Editor-in-Chief) की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद नवंबर के मध्य में वह एडिटर-इन-चीफ का पद संभालेंगे। यह जिम्मेदारी फिलहाल आर. सुकुमार के पास है, जिन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया है।

सुकुमार की तारीफ करते हुए वीर सांघवी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हिंदुस्तान टाइम्स और भारतीय अखबारों के इतिहास में उसकी खास जगह की परवाह करने वाला हर व्यक्ति सुकुमार का आभारी है। उन्होंने कहा कि सुकुमार ने अखबार को स्थिर करने और उसे बेहतर तरीके से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सांघवी ने सुकुमार के काम करने के तरीके की भी सराहना की। उन्होंने उनके नेतृत्व को बेहतर समझ, क्षमता, शालीनता और निष्पक्षता से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि अखबार चलाना राजनीतिक और आर्थिक दबावों के बीच आसान काम नहीं है। ऐसे माहौल में भी सुकुमार ने अखबार की गुणवत्ता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

वीर सांघवी ने कहा कि जब हिंदुस्तान टाइम्स के इतिहास को लिखा जाएगा, तब सुकुमार का योगदान उसके महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सुकुमार को अखबार के बेहतरीन संपादकों में से एक के तौर पर याद किया जाएगा।

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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट देंगी इस्तीफा

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (Karoline Leavitt) महीने के अंत में पद छोड़ेंगी। वह परिवार और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताना चाहती हैं।

Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
Karoline Leavitt

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। व्हाइट हाउस (White House) की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (Karoline Leavitt) इस महीने के अंत में अपना पद छोड़ देंगी। उन्होंने यह फैसला परिवार और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए लिया है।

कैरोलिन लेविट 28 साल की उम्र में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनी थीं और इस पद पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद उनकी विदाई की जानकारी दी और उन्हें अपने प्रशासन की एक महत्वपूर्ण नेता बताया।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि लेविट महीने के अंत में प्रेस सचिव की जिम्मेदारी छोड़ेंगी, ताकि वह अपने छोटे बच्चों और परिवार के साथ ज्यादा समय बिता सकें। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले को समझते और इसका सम्मान करते हैं।

प्रेस सचिव पद छोड़ने के बाद भी लेविट ट्रंप के साथ जुड़ी रहेंगी। ट्रंप के मुताबिक, वह उनकी सीनियर एडवाइजर (Senior Adviser) के तौर पर काम करेंगी और रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) में भी प्रभावशाली भूमिका निभाती रहेंगी।

कैरोलिन लेविट ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी प्रेस टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। इसके बाद ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उन्हें व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनाया गया। प्रेस सचिव के तौर पर उन्होंने ट्रंप प्रशासन की नीतियों और फैसलों को मीडिया के सामने रखने में अहम भूमिका निभाई। अब पद छोड़ने के बाद भी उनका ट्रंप प्रशासन से जुड़ाव बना रहेगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि लेविट उनके साथ आगामी मिडटर्म चुनाव (Midterm Elections) की रणनीति में काम करेंगी। उनके जाने के बाद व्हाइट हाउस में प्रेस सचिव की जिम्मेदारी कौन संभालेगा, इसे लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

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