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RNI की इस पॉलिसी के खिलाफ ‘ट्राईसिटी टुडे’ ने खटखटाया इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा
डिजिटल मीडिया स्टार्टअप ‘ट्राईसिटी टुडे‘ (Tricity Today) ने ‘रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया‘ (RNI) की एक पॉलिसी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
डिजिटल मीडिया स्टार्टअप ‘ट्राईसिटी टुडे‘ (Tricity Today) ने ‘रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया‘ (RNI) के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दरअसल, इस डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ने ‘आरएनआई‘ की मौजूदा पॉलिसी को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है, जिस पर ‘आरएनआई‘ की ओर से हाई कोर्ट में जवाब दाखिल किया गया है।
गौरतलब है कि ‘ट्राईसिटी टुडे‘ अनुभवी पत्रकारों और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों का एक समूह है। करीब छह साल पुराने इस न्यूज मीडिया स्टार्टअप ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। मसलन, नोएडा में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर ‘ट्राईसिटी टुडे‘ ने एक सर्वे किया था। इसके परिणामों के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पुलिस व्यवस्था का विस्तार उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज शहरों में किया। ‘ट्राईसिटी टुडे‘ ने ग्रेटर नोएडा के चिटहेरा गांव में हुए भूमि घोटाले का खुलासा किया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस ने यशपाल तोमर नाम के भूमाफिया पर कार्रवाई की और उसकी 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की संपत्ति जब्त की गई हैं।
‘ट्राईसिटी टुडे‘ के संपादक राकेश त्यागी ने बताया, ‘हमारा न्यूज स्टार्टअप जल्दी ही दिल्ली-एनसीआर के बाद चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश में विस्तार करने जा रहा है। ‘ट्राईसिटी टुडे‘ देश में अकेला ऐसा मीडिया हाउस है, जिसके पास इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर विशेषज्ञ पत्रकारों की टीम है। इनमें पंकज पाराशर, महकार भाटी और अनिका गुप्ता जैसे अनुभवी जर्नलिस्ट हैं।‘
राकेश त्यागी के अनुसार, ‘ट्राईसिटी टुडे अभी पूरी तरह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है। समसामयिक विषयों पर त्रैमासिक मैगजीन के विशेष संस्करण प्रकाशित होते हैं। हमने करीब तीन साल पहले आरएनआई से न्यूज पेपर प्रकाशित करने के लिए टाइटल मांगा था। आरएनआई ने हमें अपनी उस पॉलिसी का हवाला देते हुए टाइटल देने से इनकार कर दिया, जो हमारे आवेदन करने के बाद अस्तित्व में आई थी।‘ राकेश त्यागी कहते हैं, ‘जिस पॉलिसी के आधार पर हमारा आवेदन रद्द किया गया है, उसे दरकिनार करके हमारे बाद सैकड़ों टाइटल रजिस्टर्ड किए गए हैं। यह आरएनआई की 'पिक एंड चूज' पॉलिसी है, जिसे हमने अदालत में चुनौती दी है।‘
राकेश त्यागी कहते हैं, ‘हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हमें पूरा भरोसा है कि अदालत देश के मीडिया और खासतौर से हमारे जैसे नवोदित स्टार्टअप्स के लिए अच्छा फैसला देगी।‘
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