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पत्रकार को अपराधी समझ बैठी दिल्ली पुलिस, माफी के बाद भी उठे सिस्टम पर सवाल
नोएडा सेक्टर-38 के एक पेट्रोल पंप पर गुरुवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब दिल्ली पुलिस की साइबर सेल टीम ने एक वरिष्ठ पत्रकार राहुल साहा को एक साइबर अपराधी समझकर जबरन कार से बाहर खींचने की कोशिश की।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
नोएडा सेक्टर-38 के एक पेट्रोल पंप पर गुरुवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब दिल्ली पुलिस की साइबर सेल टीम ने एक वरिष्ठ पत्रकार राहुल साहा को एक साइबर अपराधी समझकर जबरन कार से बाहर खींचने की कोशिश की। उनके साथ मौजूद पत्नी और 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की पत्रकार अयंतीका पाल ने घटना का वीडियो बनाकर पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पुलिस की इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि बाहरी दिल्ली के प्रेम नगर थाने में दर्ज एक मामले से जुड़ी है, जिसकी जांच भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 61(2) के तहत चल रही थी। पुलिस टीम मोबाइल सिग्नल ट्रैकिंग के जरिए हरियाणा के बहादुरगढ़ निवासी एक संदिग्ध ‘राहुल’ की तलाश में थी। सिग्नल नोएडा के एक पेट्रोल पंप पर मिलने के बाद टीम वहां पहुंची, जहां उन्हें कार में बैठे एक शख्स का हुलिया संदिग्ध से मेल खाता हुआ लगा।
पुलिस के अनुसार, जब टीम ने उस व्यक्ति से पहचान पत्र दिखाने को कहा, तो वह बहस करने लगे। बाद में उनकी पहचान 'मनीकंट्रोल' से जुड़े पत्रकार राहुल साहा के रूप में हुई।
हालांकि, प्रत्यक्षदर्शी अयंतीका पाल के मुताबिक, पुलिसकर्मी साधारण कपड़ों में थे और पहचान दिखाए बिना जबरदस्ती राहुल को कार से निकालने लगे। उन्होंने दावा किया कि एक पुरुष कांस्टेबल ने महिला कांस्टेबल से कहा, “खींचो इसको पीछे से!” और बार-बार प्रेस कार्ड दिखाने व स्पष्टीकरण देने के बावजूद पुलिस उन्हें नहीं सुन रही थी।
HARASSMENT. TRAUMA.
— ayantika pal (@AyantikaTOI) June 19, 2025
When some officers claiming to be of @DelhiPolice cyber cell tried to KIDNAP us in broad daylight.
Here's what happened today that has left me and my husband (@rahoolism) traumatized. pic.twitter.com/DLdZuYPMfh
Why me @DelhiPolice? https://t.co/L8Ko3O7Yqq
— Rahul Saha (@rahoolism) June 19, 2025
राहुल और अयंतीका, दोनों पश्चिम बंगाल मूल के हैं और नोएडा में कार्यरत हैं। अयंतीका ने NDTV से बातचीत में कहा, “यदि हमारे पास प्रेस आईडी और कैमरा न होता, तो शायद हम इस वक्त थाने में होते।” उन्होंने सवाल उठाया कि “जिनके पास यह सुरक्षा कवच नहीं है, उनका क्या होता?”
पुलिस की गलती स्पष्ट होने के बाद सब-इंस्पेक्टर ऋतु डांगी ने मौके पर ही लिखा माफीनामा सौंपा। बाद में शाहदरा जिले के डीसीपी प्रशांत गौतम ने आधिकारिक बयान में स्वीकार किया कि यह एक 'गलत पहचान' का मामला था और पुलिस टीम ने मौके पर माफी मांग ली थी। उन्होंने यह भी कहा कि “इस दौरान किसी तरह का बल प्रयोग या दुर्व्यवहार नहीं किया गया।”
हालांकि, वायरल वीडियो और घटनास्थल पर मौजूद पत्रकारों के बयान इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। अयंतीका का कहना है, “यह सिर्फ माफी से खत्म नहीं होता। यह बताता है कि सिस्टम में ट्रेनिंग और जवाबदेही की कितनी कमी है।”
दिल्ली पुलिस ने आंतरिक रूप से एक नोट बनाकर मामले को बंद करने का संकेत दिया है, लेकिन यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली, बल्कि उन मानकों पर भी सवाल उठा रही है जिन पर नागरिकों की स्वतंत्रता और सम्मान टिका होता है।
इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि जब तक सिस्टम में जवाबदेही नहीं होगी, तब तक आम नागरिक ‘गलत पहचान’ का आसान शिकार बने रहेंगे।
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