करीब दो दिन पूर्व मध्य प्रदेश में हाईवे पर नर्मदा नदी के पुल पर पुलिस को कार में एक युवती का शव बरामद हुआ था। बाद में उसकी पहचान अनिभा केवट (25) के रूप में हुई थी।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो
मध्य प्रदेश में युवती की हत्या के आरोप में फरार चल रहे फर्जी पत्रकार के मामले में नया मोड़ आ गया है। दरअसल, अब आरोपी फर्जी पत्रकार का शव बरामद हुआ है। पुलिस के अनुसार सोमवार को उसका शव तिलवारा घाट के पास पानी में मिला है। बता दें कि करीब दो दिन पूर्व मध्य प्रदेश में हाईवे पर नर्मदा नदी के पुल पर पुलिस को कार में एक युवती का शव बरामद हुआ था। बाद में उसकी पहचान पेटीएम कंपनी की एम्प्लॉयी अनिभा केवट (25) के रूप में हुई थी।
कार की तलाशी में पुलिस को एक पिस्टल, एक कारतूस का खोखा, एक निजी न्यूज चैनल की माइक आइडी भी मिली थी। इसके साथ ही प्रेस लिखा एक परिचय पत्र भी मिला था, जिसमें बादल पटेल निवासी बिलपुरा अंकित है।
आरोप था कि बादल पटेल नामक इस युवक ने अनिभा की हत्या की है और वह युवती के शव को वहां छोड़ गया था। जांच में पुलिस के पता चला था कि अनिभा की हत्या त्रिकोणीय प्रेम संबंधों में की गई है। घटना के बाद से बादल फरार चल रहा था। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
गौरतलब है कि पुलिस ने कुछ महीनों पूर्व इलाके में चल रहे फर्जी पत्रकारों के गिरोह का पर्दाफाश किया था। बादल भी इसी गिरोह का सदस्य था। इस मामले में उसकी गिरफ्तारी भी हुई थी और वह जेल भी गया था। पुलिस के अनुसार, बादल की अनिभा से दोस्ती थी। बादल के जेल जाने के बाद अनिभा की दोस्ती किसी कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत एक युवक से हो गई थी।
जेल से बाहर आने के बाद बादल को जब इस बात का पता चला तो वह भड़क गया और उसने उक्त युवक की पिटाई भी कर दी थी। कुछ दिनों के बाद कंपनी ने उक्त मैनेजर का भोपाल ट्रांसफर कर दिया, इसके बाद भी वह अनिभा के संपर्क में था।
पुलिस के अनुसार, इसी बात से गुस्सा होकर बादल अपने साथ दोस्त की कार में अनिभा को घुमाने की बात कहकर ले गया और गोली मारकर उसकी हत्या करने के बाद फरार हो गया। अब बादल का शव मिलने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल अस्पताल पहुंचाकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
Amagi Media Labs ने बताया है कि Law&Crime ने अपने Court TV चैनल के लाइव ब्रॉडकास्ट और Free Ad-supported Streaming TV (FAST) ऑपरेशन को Amagi CLOUDPORT पर शिफ्ट कर दिया है।
by
Vikas Saxena
Amagi Media Labs ने बताया है कि Law&Crime ने अपने Court TV चैनल के लाइव ब्रॉडकास्ट और Free Ad-supported Streaming TV (FAST) ऑपरेशन को Amagi CLOUDPORT पर शिफ्ट कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, इस बदलाव से Court TV के ब्रॉडकास्ट, स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी ऑपरेशन को एक ही क्लाउड प्लेटफॉर्म पर लाने में मदद मिली है।
Law&Crime ने Court TV का अधिग्रहण करने के बाद इसके ऑपरेशन को अपने स्तर पर लाने की प्रक्रिया शुरू की थी। कंपनी के पास इस पूरी व्यवस्था को बिना लाइव प्रोग्रामिंग में किसी रुकावट के बदलने के लिए सिर्फ पांच महीने का समय था। Amagi के क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म ने इस बदलाव को तेजी से पूरा करने में मदद की।
Amagi के अनुसार, पहले Court TV के अलग-अलग ऑपरेशनल सिस्टम और मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भरता थी। CLOUDPORT के जरिए इन कामों को एक ही ऑटोमेटेड क्लाउड प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। इसके अलावा, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव कवरेज के दौरान जरूरी वर्कफ्लो को बेहतर तरीके से संभालने के लिए कस्टम ऑटोमेशन भी तैयार किया गया। अब Court TV के लाइव ऑपरेशन Amagi की AI आधारित मैनेज्ड सर्विस प्लेटफॉर्म Amagi Intella के जरिए मैनेज किए जा रहे हैं।
Court TV हर सप्ताह के दिनों में करीब 10 घंटे का लाइव प्रोग्रामिंग कंटेंट प्रसारित करता है। इस लाइव कंटेंट को बाद में वीकेंड सिंडिकेशन के लिए अपने आप दोबारा तैयार किया जाता है। कंपनी के मुताबिक, इसके लिए अब मैनुअल तरीके से कंटेंट को दोबारा तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती।
नए प्लेटफॉर्म पर चैनल लाइव करने से पहले Amagi ने Court TV की प्लेलिस्ट, मेटाडेटा फीड और डिस्ट्रीब्यूशन एंडपॉइंट्स की पुराने सिस्टम के साथ टेस्टिंग की। आखिरी चरण में कुछ तैयारियों को लेकर चिंता सामने आने पर Amagi ने अतिरिक्त सपोर्ट दिया। कंपनी ने 10 दिनों तक विशेष तकनीकी सहायता दी और पहले सप्ताह के लिए एक ऑनबोर्डिंग विशेषज्ञ को साइट पर भी तैनात किया।
Amagi का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद Court TV को उसके सभी डाउनस्ट्रीम प्लेटफॉर्म पर लाइव सर्विस में किसी रुकावट के बिना नए सिस्टम पर माइग्रेट कर दिया गया।
Law&Crime के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर Debasish Mishra ने कहा कि Court TV को संभालने के लिए कंपनी के पास पांच महीने का समय था और इसमें किसी तरह के डाउनटाइम की गुंजाइश नहीं थी। उनके मुताबिक, Amagi ने जरूरत के हिसाब से अपनी योजना में बदलाव किया और पूरी माइग्रेशन प्रक्रिया के दौरान टीम के साथ मिलकर काम किया। इससे अब Law&Crime को ब्रॉडकास्ट, FAST और स्ट्रीमिंग में अपने विस्तार के साथ ऑपरेशन को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा स्केलेबल इंफ्रास्ट्रक्चर मिला है।
वहीं, Amagi के को-फाउंडर और प्रेसिडेंट-ग्लोबल बिजनेस Srinivasan KA ने कहा कि लाइव ऑपरेशन को बिना किसी रुकावट के माइग्रेट करने के लिए काफी सटीक योजना और क्रियान्वयन की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि CLOUDPORT पर ब्रॉडकास्ट और FAST को एक साथ लाने और रोजमर्रा के शेड्यूलिंग व प्लेआउट को ऑटोमेट करने से Court TV की टीम को ऑपरेशनल काम के बजाय प्रोग्रामिंग पर ज्यादा ध्यान देने में मदद मिलेगी।
Amagi का ग्लोबल कारोबार
2008 में स्थापित Amagi Media Labs एक क्लाउड आधारित SaaS प्लेटफॉर्म है, जो मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियों के लिए ब्रॉडकास्टिंग, स्ट्रीमिंग और कंटेंट मोनेटाइजेशन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराता है। कंपनी का प्लेटफॉर्म मीडिया कंपनियों को पारंपरिक ब्रॉडकास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश किए बिना केबल, OTT और FAST प्लेटफॉर्म पर लाइव, लीनियर और ऑन-डिमांड कंटेंट लॉन्च, मैनेज, डिस्ट्रीब्यूट और मोनेटाइज करने में मदद करता है।
कंपनी के मुताबिक, Amagi 40 से ज्यादा देशों में 300 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए 9,000 से ज्यादा चैनल डिलीवरी मैनेज करती है।
Law&Crime और Court TV
Law&Crime ट्रू क्राइम और कानूनी मामलों से जुड़ा मल्टी-प्लेटफॉर्म कंटेंट ब्रैंड है, जिसकी स्थापना ABC News के चीफ लीगल एनालिस्ट डैन एब्राम्स ने की थी। Court TV के अधिग्रहण के बाद Law&Crime के प्लेटफॉर्म पर लाइव कोर्टरूम कवरेज, कानूनी विश्लेषण, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग, डॉक्यूमेंट्री और ओरिजिनल प्रोग्रामिंग को शामिल किया गया है।
दोनों ब्रैंड ब्रॉडकास्ट, FAST, स्ट्रीमिंग, डिजिटल और सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकी न्याय व्यवस्था से जुड़ा कंटेंट दर्शकों तक पहुंचाते हैं। कंपनी के अनुसार, Law&Crime और Court TV की वैश्विक पहुंच लाखों दर्शकों तक है, जबकि इनके YouTube चैनलों पर 1.2 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।
भारतीय पत्रकारिता के जाने-माने नाम शेखर गुप्ता का आज जन्मदिन है। करीब पांच दशक के उनके पत्रकारिता करियर में रिपोर्टिंग, संपादन और मीडिया संस्थान खड़ा करने के कई अहम पड़ाव रहे हैं।
by
Samachar4media Bureau
भारतीय पत्रकारिता के जाने-माने नाम शेखर गुप्ता आज 69 साल के हो गए हैं। करीब पांच दशक के उनके पत्रकारिता करियर में रिपोर्टिंग, संपादन और मीडिया संस्थान खड़ा करने के कई अहम पड़ाव रहे हैं। प्रिंट पत्रकारिता से शुरू हुआ उनका सफर टेलीविजन और फिर डिजिटल मीडिया तक पहुंचा। बदलते मीडिया दौर के साथ खुद को ढालते हुए उन्होंने पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई।
शेखर गुप्ता का जन्म 1957 में हुआ। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की और 1977 में द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) के चंडीगढ़ संस्करण में बतौर जूनियर रिपोर्टर अपने करियर की शुरुआत की। महज तीन साल बाद, 23 साल की उम्र में उन्हें पूर्वोत्तर भारत भेजा गया। उस समय यह इलाका जातीय संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा था।
असम में उनकी रिपोर्टिंग, जिसमें नेल्ली नरसंहार भी शामिल था, ने उनके पत्रकारिता के नजरिए को गहराई से प्रभावित किया। इसी दौर की रिपोर्टिंग आगे चलकर उनकी पहली किताब ‘Assam: A Valley Divided’ का आधार बनी, जो 1984 में प्रकाशित हुई।
शुरुआती दौर में ही शेखर गुप्ता ने कठिन और चुनौतीपूर्ण असाइनमेंट करने वाले रिपोर्टर के रूप में पहचान बनाई। राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी विशेष रुचि रही और वह घटनाओं को केवल सरकारी बयानों के आधार पर समझने के बजाय जमीन पर जाकर देखने और समझने पर जोर देते रहे।
दुनिया की बड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग: इंडिया टुडे (India Today) में रिपोर्टर और संपादक के तौर पर शेखर गुप्ता ने 20वीं सदी के आखिरी दशकों की कई महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया। इनमें ऑपरेशन ब्लू स्टार, श्रीलंका के तमिल उत्तर में उग्रवाद, तियानमेन स्क्वायर का छात्र विद्रोह, बर्लिन की दीवार का गिरना, पहला खाड़ी युद्ध और अफगानिस्तान का संघर्ष शामिल रहे।
उन्होंने पाकिस्तान से भी बड़े पैमाने पर रिपोर्टिंग की और भारत में LTTE के प्रशिक्षण शिविरों का पता लगाया। उस दौर में 24 घंटे चलने वाले न्यूज चैनल और सोशल मीडिया नहीं थे। ऐसे समय में किसी संघर्ष क्षेत्र तक पहुंचना, प्रत्यक्ष जानकारी जुटाना और भरोसेमंद सूत्र विकसित करना पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी।
द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) में लंबी पारी: संघर्ष और फील्ड रिपोर्टिंग से आगे शेखर गुप्ता ने खुद को एक मजबूत संपादकीय नेतृत्वकर्ता के तौर पर भी स्थापित किया। वह दोबारा द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) से जुड़े और करीब 19 वर्षों तक इसके एडिटर-इन-चीफ रहे। इसके साथ ही उन्होंने 13 वर्षों तक चीफ एग्जिक्यूटिव की जिम्मेदारी भी संभाली।
द इंडियन एक्सप्रेस में उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय मीडिया तेजी से बदल रहा था। टेलीविजन न्यूज का विस्तार हो रहा था, निजी पूंजी का प्रवेश बढ़ रहा था और इंटरनेट पारंपरिक मीडिया के लिए नई चुनौती बनकर सामने आ रहा था। इस दौर में शेखर गुप्ता की पहचान ऐसे संपादक के रूप में बनी, जो रिपोर्टिंग की ताकत और पत्रकारिता की विश्वसनीयता को खास महत्व देते थे।
‘National Interest’ से बनी अलग पहचान: उनका साप्ताहिक कॉलम ‘National Interest’ भी उनकी पत्रकारिता का अहम हिस्सा रहा। इसमें उन्होंने राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और समाज से जुड़े मुद्दों को एक साथ देखने की कोशिश की। उनके लेखों के चयन को बाद में ‘Anticipating India’ नाम से किताब के रूप में प्रकाशित किया गया। यह कॉलम शेखर गुप्ता की पहचान का एक स्थायी हिस्सा बन गया। इसमें उनका अंदाज विश्लेषणात्मक और स्पष्ट रहा और कई बार उनके विचारों पर असहमति भी देखने को मिली।
‘Walk the Talk’ ने टेलीविजन पर बनाई पहचान: टेलीविजन के दौर में शेखर गुप्ता को एक नई पहचान NDTV 24x7 के कार्यक्रम ‘Walk the Talk’ से मिली। 2003 से 2017 के बीच उन्होंने इस कार्यक्रम में राजनीति, कारोबार, सिनेमा, खेल और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी 600 से अधिक हस्तियों से बातचीत की।
कार्यक्रम का अंदाज भी अपने आप में अलग था। मेहमान के साथ चलते हुए बातचीत करने का यह फॉर्मेट सरल दिखाई देता था, लेकिन इसकी खासियत तैयारी, सवालों के बाद किए जाने वाले फॉलो-अप और मेहमानों से सहज तरीके से बातचीत निकालने में थी। बाद में इन बातचीत का एक संग्रह ‘Walk the Talk: Decoding Politicians’ नाम से प्रकाशित हुआ।
संपादक से मीडिया उद्यमी तक: 2014 में द इंडियन एक्सप्रेस से अलग होने के बाद शेखर गुप्ता कुछ समय के लिए India Today Group से वाइस चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ के तौर पर जुड़े। लेकिन उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कुछ वर्षों बाद आया, जब उन्होंने एक बड़े पारंपरिक न्यूज संस्थान का नेतृत्व करने के बाद डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा।
2017 में द प्रिंट (ThePrint) की शुरुआत के साथ शेखर गुप्ता ने खुद को मीडिया उद्यमी के रूप में भी स्थापित किया। यह वह समय था जब डिजिटल मीडिया तेजी से विस्तार कर रहा था और न्यूज की पहुंच, वीडियो की खपत तथा दर्शकों की पसंद तेजी से बदल रही थी। ThePrint को राजनीति, नीति, शासन और सामाजिक बदलाव से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित किया गया। शेखर गुप्ता ने इस मंच के जरिए डिजिटल दौर में भी पत्रकारिता के मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया।
‘Cut the Clutter’ से डिजिटल दर्शकों तक पहुंचे: ThePrint के साथ शेखर गुप्ता ने खुद भी नए डिजिटल फॉर्मेट अपनाए। उनका नियमित एक्सप्लेनेशन वीडियो शो ‘Cut the Clutter’ डिजिटल दर्शकों के बीच उनकी विश्लेषणात्मक शैली का प्रमुख माध्यम बना। इस कार्यक्रम में नक्शों, ऐतिहासिक संदर्भों, आंकड़ों, रिपोर्टिंग और टिप्पणी के जरिए मौजूदा घटनाओं को समझाने की कोशिश की जाती है। वहीं ‘Off the Cuff’ ने उनकी लंबे इंटरव्यू वाली शैली को डिजिटल दौर में आगे बढ़ाया। आज शेखर गुप्ता ThePrint के Founder, Editor-in-Chief और Chairman हैं। प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया—तीनों दौर में उनकी मौजूदगी उन्हें भारतीय पत्रकारिता के उन चुनिंदा संपादकों में शामिल करती है, जिन्होंने मीडिया के बदलते स्वरूप के साथ खुद को लगातार बदला है।
मिल चुके हैं कई सम्मान: शेखर गुप्ता को पत्रकारिता के क्षेत्र में कई सम्मान मिल चुके हैं। इनमें Inlaks Young Journalist of the Year Award, G.K. Reddy Award for Journalism, Fakhruddin Ali Ahmed Memorial Award for National Integration और वर्ष 2009 में मिला पद्म भूषण शामिल हैं।
वह एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Editors Guild of India) के प्रेजिडेंट के तौर पर भी दो कार्यकाल, 2018 से 2020 के बीच, अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। करीब पांच दशक तक सार्वजनिक जीवन और पत्रकारिता में सक्रिय रहने वाले किसी भी संपादक की तरह शेखर गुप्ता के विचारों और संपादकीय फैसलों पर प्रशंसा के साथ आलोचना भी हुई है। इसके बावजूद वह सार्वजनिक बहस का लगातार हिस्सा बने रहे हैं।
उनके पूरे करियर में एक चीज लगातार दिखाई देती है-रिपोर्टर का नजरिया। अखबारों का दौर बदला, टेलीविजन आया, डिजिटल प्लेटफॉर्म ने न्यूज के वितरण का तरीका बदल दिया और पत्रकार खुद मीडिया ब्रांड बनने लगे। शेखर गुप्ता ने इन सभी बदलावों के बीच अपने पत्रकारिता के मूल को बनाए रखा।
पढ़ना, सूत्रों से संपर्क बनाए रखना, घटनाओं के पीछे का संदर्भ समझना और खबर को बड़े ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखना उनकी पत्रकारिता की खासियतों में शामिल रहा है। जन्मदिन के मौके पर शेखर गुप्ता का यह सफर सिर्फ उनके पदों या उनके द्वारा बनाए गए संस्थानों की वजह से ही उल्लेखनीय नहीं है, बल्कि उस जिज्ञासा और खुद को लगातार नए रूप में ढालने की क्षमता के लिए भी खास है, जिसने उनके भीतर के रिपोर्टर को आज तक जीवित रखा है।
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने Amazon, Swiggy Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिया है।
by
Samachar4media Bureau
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने Amazon, Swiggy Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरे (Datura) के फल और बीजों को इंसानों के खाने के लिए खाद्य उत्पाद के तौर पर लिस्ट किए जाने के बाद की गई है।
विभाग ने मामले की जांच के बाद यह कदम उठाया। अधिकारियों के मुताबिक, धतूरे के फल और बीज जहरीले होते हैं और इनका सेवन लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
ऑनलाइन बिक रहे थे धतूरे के फल और बीज
नियामक आदेश के मुताबिक, जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि तीनों प्लेटफॉर्म पर धतूरे के फल और बीज बिक्री के लिए उपलब्ध थे। इनमें से कुछ पैकेट पर FSSAI के फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर भी दर्ज थे। जांच के दौरान अधिकारियों को कुछ गोदामों में धतूरे के फल और बीजों से भरे पैकेट भी मिले। इन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बिक्री और वितरण के लिए रखा गया था।
तुरंत लिस्टिंग हटाने का आदेश
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग ने तीनों कंपनियों को धतूरे को इंसानों के खाने के लिए बेचने वाली सभी लिस्टिंग और विज्ञापन तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कंपनियों को धतूरे के फल और बीजों को खाद्य उत्पाद के तौर पर दिखाने, बेचने या वितरित करने पर रोक लगा दी गई है।
विक्रेताओं और सप्लायर्स पर भी कार्रवाई
यह कार्रवाई केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। विभाग ने इन उत्पादों से जुड़े विक्रेताओं और सप्लायर्स के लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन को भी सस्पेंड करने का आदेश दिया है। संबंधित राज्य और केंद्रीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भी इन विक्रेताओं और प्रतिष्ठानों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
कंपनियों को दिया गया जवाब देने का मौका
जांच के दौरान कंपनियों को अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया गया था। आदेश के मुताबिक, Amazon ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया, जबकि Swiggy Instamart ने नोटिस के बाद की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
वहीं, BigBasket ने बताया कि उसने धतूरे के फल बेचना बंद कर दिया है। कंपनी ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे उत्पादों की लेबलिंग में साफ तौर पर 'मानव सेवन के लिए नहीं' (Not for human consumption) लिखा जाएगा। हालांकि, खाद्य सुरक्षा विभाग ने कंपनियों की ओर से दिए गए जवाब और स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना।
अगले आदेश तक जारी रहेगा सस्पेंशन
तीनों प्लेटफॉर्म के फूड लाइसेंस का सस्पेंशन अगले आदेश तक लागू रहेगा। कंपनियों को विभाग के निर्देशों का पालन करने की रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसके बाद अलग से सुनवाई और आदेश की प्रक्रिया पूरी होने पर ही सस्पेंड किए गए लाइसेंस को बहाल करने पर विचार किया जाएगा।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
कर्नाटक की इस कार्रवाई से ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले खाद्य उत्पादों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। खासकर ऐसे मामलों में यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां उत्पाद थर्ड-पार्टी विक्रेताओं के जरिए प्लेटफॉर्म पर बेचे जाते हैं और उनके स्टोरेज या डिलीवरी के लिए प्लेटफॉर्म से जुड़े नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनियां उसके निर्देशों का उल्लंघन करती हैं तो Food Safety and Standards Act, 2006 और संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
बढ़ते ऑनलाइन ग्रॉसरी बाजार के बीच कार्रवाई
भारत में ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे प्लेटफॉर्म अब सिर्फ पैकेज्ड फूड ही नहीं, बल्कि कई तरह के खाद्य और घरेलू उत्पाद भी ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। कर्नाटक की यह कार्रवाई दिखाती है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियामक अब डिजिटल मार्केटप्लेस पर मौजूद लिस्टिंग और उनके पीछे काम करने वाली सप्लाई चेन पर भी नजर रख रहे हैं।
टेकमैग्नेट आज SEO, PPC, कंटेंट मार्केटिंग और वेब डेवलपमेंट जैसी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी को गूगल प्रीमियर पार्टनर (Google Premier Partner) के रूप में भी पहचान मिली है।
by
Samachar4media Bureau
डिजिटल मार्केटिंग की दुनिया में करीब दो दशक से सक्रिय सरवेश बागला (Sarvesh Bagla) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने 2006 में टेकमैग्नेट (Techmagnate) की शुरुआत की थी और समय के साथ इसे भारत की जानी-मानी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों में शामिल किया।
टेकमैग्नेट आज SEO, PPC, कंटेंट मार्केटिंग और वेब डेवलपमेंट जैसी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी को गूगल प्रीमियर पार्टनर (Google Premier Partner) के रूप में भी पहचान मिली है। बागला के नेतृत्व में एजेंसी को विभिन्न इंडस्ट्री ट्रैकर्स ने भारत की प्रमुख SEO और डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों में जगह दी है।
बागला की शैक्षणिक पृष्ठभूमि गणित और टेक्नोलॉजी से जुड़ी रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से गणित में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट से मास्टर्स ऑफ इंफॉर्मेशन सिस्टम्स और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से मास्टर्स ऑफ साइंस इन इंफॉर्मेशन नेटवर्किंग की पढ़ाई की।
उद्यमिता की दुनिया में आने से पहले वह अमेरिका में वेरिजॉन (Verizon) के साथ सॉफ्टवेयर और सिस्टम्स आर्किटेक्ट के तौर पर काम कर चुके हैं। उन्होंने WFM India की सह-स्थापना की और ब्लॉगर्स व कंटेंट क्रिएटर्स के लिए BlogX भी शुरू किया।
उनके करियर की खास उपलब्धियों में बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv) के साथ किया गया काम भी शामिल है। कंपनी के मुताबिक, टेकमैग्नेट की टीम ने कैंपेन शुरू होने के करीब 18 महीनों के भीतर ‘पर्सनल लोन’ जैसे प्रतिस्पर्धी कीवर्ड पर ब्रांड को शीर्ष रैंकिंग तक पहुंचाने में मदद की।
आज टेकमैग्नेट BFSI, हेल्थकेयर, ऑटोमोटिव और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों के लिए डिजिटल मार्केटिंग समाधान उपलब्ध करा रही है। एक सिस्टम आर्किटेक्ट से डिजिटल मार्केटिंग उद्यमी तक बागला का सफर एजेंसी इंडस्ट्री में उनकी अलग पहचान को दर्शाता है।
खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है।
by
Samachar4media Bureau
खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। इसके अलावा दमन की SDP Industries Pvt Ltd को अपने घी उत्पादों की बिक्री करने से रोक दिया गया है।
FSSAI ने रविवार को बताया कि Marche Retail के परिसर में निरीक्षण और उसके बाद की जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों से जुड़े कई मामलों में कमियां पाई गईं।
कई स्तरों पर मिली कमियां
नियामक के मुताबिक, Marche Retail के यहां मिली कमियां सिर्फ किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं थीं। जांच में प्रतिष्ठान के डिजाइन और संचालन से जुड़े नियमों, साफ-सफाई, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, फूड हैंडलर्स की ट्रेनिंग और जरूरी रिकॉर्ड रखने से जुड़े नियमों में भी खामियां सामने आईं।
FSSAI ने इन कमियों को खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन से जुड़ी गंभीर चूक के तौर पर देखा और इसके बाद कंपनी के लाइसेंस को 30 दिनों के लिए निलंबित करने की कार्रवाई की।
SDP Industries के घी की बिक्री पर रोक
इसके साथ ही FSSAI ने SDP Industries Pvt Ltd, जो दमन में स्थित है, के घी उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगा दी है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई प्रवर्तन कार्रवाई का हिस्सा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में SDP Industries के मामले में उल्लंघन की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
FSSAI की ताजा कार्रवाई से साफ है कि खाद्य नियामक अब सिर्फ उत्पादों की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, कर्मचारियों की ट्रेनिंग, व्यक्तिगत स्वच्छता और जरूरी रिकॉर्ड रखने जैसे नियमों के पालन पर भी सख्ती से नजर रख रहा है।
Dream11 अपने पहले वाले Real-Money Gaming (RMG) मॉडल से फोकस हटाकर अब स्पोर्ट्स फैंस के लिए कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले पर ज्यादा ध्यान देगी।
by
Samachar4media Bureau
फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म Dream11 अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करता नजर आ रहा है। कंपनी ने यूजर्स को बताया है कि वह अपने पहले वाले Real-Money Gaming (RMG) मॉडल से फोकस हटाकर अब स्पोर्ट्स फैंस के लिए कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले पर ज्यादा ध्यान देगी। हालांकि, प्लेटफॉर्म पर फ्री कंटेस्ट जारी रहेंगे।
Dream11 ने यूजर्स को भेजे एक नोटिफिकेशन में कहा है कि वह नए फोकस के साथ खुद को स्पोर्ट्स फैंस के लिए 'सिंगल डेस्टिनेशन' के तौर पर तैयार कर रहा है। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि यूजर्स फ्री कंटेस्ट में हिस्सा लेना जारी रख सकते हैं। इसके साथ ही Dream11 ने बताया कि जिन यूजर्स की एक्टिव सब्सक्रिप्शन फीस है, उसे 72 घंटे के भीतर रिफंड कर दिया जाएगा।
क्या Dream11 बंद हो रहा है?
Dream11 के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या कंपनी अपना पेड गेमिंग बिजनेस पूरी तरह बंद करने जा रही है या फिर प्लेटफॉर्म का नया वर्जन तैयार किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी के नोटिफिकेशन में प्लेटफॉर्म को बंद करने की बात नहीं कही गई है।
फिलहाल कंपनी के संदेश से इतना साफ है कि उसके पुराने मॉडल में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। पेड कंटेस्ट और सब्सक्रिप्शन को पीछे किया जा रहा है, जबकि फ्री कंटेस्ट, स्पोर्ट्स कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
Online Gaming Act के बीच आया बदलाव
Dream11 का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत का ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर रेगुलेटरी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। Online Gaming Act, 2025 के बाद रियल-मनी ऑनलाइन गेमिंग को लेकर देश में नियम काफी सख्त हुए हैं।
इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ रही है। इन मामलों में यह तय होना है कि स्किल और चांस दोनों तरह के पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स पर लागू प्रतिबंध आगे भी जारी रहेगा या नहीं। ऐसे माहौल में Dream11 का अपने पुराने रियल-मनी मॉडल से फोकस हटाना इंडस्ट्री के लिए अहम माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज
Dream11 के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि कंपनी अपने पुराने बिजनेस मॉडल को छोड़ रही है, जबकि कुछ का कहना है कि Dream11 अब खुद को सोशल गेमिंग और स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म के तौर पर नए सिरे से पेश कर सकता है।
इस बदलाव का असर पूरे फैंटेसी स्पोर्ट्स सेक्टर पर पड़ने को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि अगर भारत में रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स का कारोबार काफी कम होता है, तो खिलाड़ी विदेशी या ऑफशोर गेमिंग सेवाओं की तरफ जा सकते हैं। वहीं, कुछ लोग पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय स्पष्ट रेगुलेशन की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक प्रतिक्रिया में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या यह Dream11 के पुराने मॉडल के अंत की शुरुआत है। फैंटेसी स्पोर्ट्स में मनोरंजन और मुकाबले के साथ पैसे जीतने का मौका भी होता था, लेकिन रेगुलेटरी बहस के दौरान इसे लेकर जुए से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं।
फिलहाल बंद नहीं, लेकिन दिशा जरूर बदली
फिलहाल Dream11 की तरफ से आया संदेश कंपनी के बंद होने के बजाय बिजनेस मॉडल में बदलाव की ओर इशारा करता है। सब्सक्रिप्शन फीस को 72 घंटे के भीतर रिफंड करने और फ्री कंटेस्ट जारी रखने की बात के साथ कंपनी अब स्पोर्ट्स फैंस को जोड़ने, कंटेंट और सोशल गेमिंग पर ज्यादा ध्यान देती नजर आ रही है। यानी Dream11 के अगले दौर में फोकस रियल-मनी दांव के बजाय स्पोर्ट्स फैनडम और एंगेजमेंट पर रहने वाला है।
एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के जाने-माने नाम बॉबी पवार ने अपने रचनात्मक सफर का एक नया अध्याय शुरू किया है। कविता संग्रह का लॉन्च 21 अगस्त को हुआ, जिसमें एडवर्टाइजिंग व मार्केटिंग जगत के दिग्गज मौजूद रहे।
by
Samachar4media Bureau
एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के जाने-माने नाम बॉबी पवार ने अपने रचनात्मक सफर का एक नया अध्याय शुरू किया है। उन्होंने अपना पहला कविता संग्रह ‘An Empty Heart Is a Loaded Gun’ लॉन्च किया है।
पुस्तक का लॉन्च 21 अगस्त को हुआ, जिसमें एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग जगत के प्रमुख लोग मौजूद रहे। यह पुस्तक कविता के जरिए भावनाओं, रिश्तों, पहचान और मानवीय अनुभवों जैसे विषयों को सामने लाती है।
भारत और अमेरिका में एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में काम कर चुके बॉबी पवार ने अपने करियर की शुरुआत Ogilvy India से की थी। इसके बाद उन्होंने DDB Mudra, JWT और Publicis जैसी प्रमुख एजेंसियों में वरिष्ठ क्रिएटिव लीडरशिप भूमिकाएं निभाईं।
बॉबी पवार ने नवंबर 2023 तक हवास (Havas) में चेयरमैन और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने एक स्वतंत्र क्रिएटिव के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की और अब अपना कविता संग्रह लॉन्च किया है।
एनडीटीवी के सीईओ राहुल कंवल ने बताया कि मजबूत मीडिया संस्थान बनाने के लिए लीडर को दूसरे पत्रकारों को आगे बढ़ने और चमकने की जगह देनी चाहिए।
by
Samachar4media Bureau
एनडीटीवी (NDTV) के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल (Rahul Kanwal) ने मीडिया संस्थान खड़ा करने की अपनी नेतृत्व सोच साझा की है। एक्सचेंज4मीडिया के साथ हालिया बातचीत में उन्होंने प्रणय रॉय (Prannoy Roy), अरुण पुरी (Aroon Purie) और राघव बहल (Raghav Bahl) जैसे मीडिया उद्यमियों का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे समय तक टिकने वाले संस्थान वही बना पाते हैं, जहां नेतृत्व दूसरे पत्रकारों और एडिटोरियल ब्रांड्स को उभरने का अवसर देता है।
राहुल कंवल ने बताया कि वह रोजाना प्राइम-टाइम शो की एंकरिंग से जानबूझकर दूर रहते हैं। उनके मुताबिक एडिटर-इन-चीफ को जरूरत पड़ने पर खुद पीछे हटना चाहिए, ताकि न्यूज़रूम में दूसरे लोगों को भी अपनी पहचान बनाने का मौका मिले।
कंवल ने एनडीटीवी (NDTV) में प्रणय रॉय के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि वह दूसरे पत्रकारों की लोकप्रियता को लेकर असुरक्षित नहीं थे। उनके दौर में राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai), बरखा दत्त (Barkha Dutt) और अरनब गोस्वामी (Arnab Goswami) जैसे पत्रकारों ने अपनी अलग पहचान बनाई।
इसी तरह उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) के अरुण पुरी का उदाहरण दिया, जिन्होंने प्रभु चावला (Prabhu Chawla) और शेखर गुप्ता (Shekhar Gupta) जैसे संपादकीय चेहरों को आगे बढ़ने की जगह दी। राघव बहल के नेटवर्क18 (Network18) का उल्लेख करते हुए भी उन्होंने मजबूत प्रतिभाओं के साथ संस्थान बनाने की इसी सोच को रेखांकित किया।
कंवल ने कहा कि उनकी अपनी नेतृत्व शैली भी ऐसे लोगों को साथ लाने पर आधारित है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में उनसे ज्यादा सक्षम हों। उनके मुताबिक, “आपसे बेहतर लोग ही किसी मूल्यवान संस्थान के निर्माण में योगदान देते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई लीडर असुरक्षा की भावना से अपने से कम सक्षम लोगों को नियुक्त करता रहेगा, तो वह कभी एक महान संगठन नहीं बना पाएगा।
मोहित चेरियन फरवरी 2020 से डियाजियो इंडिया के साथ जुड़े हुए हैं। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ब्रांड मार्केटिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
by
Samachar4media Bureau
डियाजियो इंडिया (Diageo India) ने मोहित चेरियन को कैटेगरी डायरेक्टर (Category Director) के पद पर प्रमोट किया है। इससे पहले वह कंपनी में सीनियर जनरल मैनेजर, ब्रांड मार्केटिंग के तौर पर कार्यरत थे और BII Scotches के मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
मोहित चेरियन फरवरी 2020 से डियाजियो इंडिया के साथ जुड़े हुए हैं। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ब्रांड मार्केटिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। नई जिम्मेदारी में चेरियन डियाजियो इंडिया के कैटेगरी से जुड़े बिजनेस और ब्रांड मार्केटिंग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
डियाजियो इंडिया में शामिल होने से पहले चेरियन आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल (Aditya Birla Fashion and Retail) के साथ काम कर चुके हैं। वहां उनकी अंतिम भूमिका असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ मार्केटिंग - Allen Solly की थी।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार और आजतक व गुड न्यूज टुडे की सीनियर मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह का आज जन्मदिन है।
by
Samachar4media Bureau
वरिष्ठ टीवी पत्रकार और आजतक व गुड न्यूज टुडे की सीनियर मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह का आज जन्मदिन है। भारतीय मीडिया जगत में श्वेता सिंह एक जाना-पहचाना नाम हैं। बेबाक अंदाज़, गहरी समझ और पेशेवर दक्षता ने उन्हें लाखों दर्शकों की पहली पसंद बना दिया है। जटिल मुद्दों को सहज भाषा में समझाने की उनकी क्षमता और प्रभावशाली एंकरिंग शैली ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।
लगातार मेहनत और समर्पण के दम पर उन्होंने पत्रकारिता में नए मानक स्थापित किए हैं। करीब दो दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय श्वेता पिछले करीब दो दशक से ‘आजतक’ परिवार का हिस्सा हैं। उनके लंबे अनुभव और संतुलित प्रस्तुति ने उन्हें न्यूज रूम से लेकर दर्शकों तक हर जगह विशेष स्थान दिलाया है।
टीवी न्यूज़ की लगभग हर विधा में दक्ष श्वेता सिंह को अब तक सर्वश्रेष्ठ एंकर, सर्वश्रेष्ठ प्रड्यूसर और सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टर जैसे सम्मान मिल चुके हैं। साल 2016 में उन्होंने अलग-अलग आयोजनों में एक ही वर्ष में 12 अवॉर्ड हासिल कर इतिहास रच दिया था। यह उपलब्धि अब तक पत्रकारिता जगत में मिसाल मानी जाती है।
न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्पेस में उनके अनुकरणीय योगदान और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए श्वेता सिंह को प्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2023 में ‘बेस्ट एंकर–हिंदी’ कैटेगरी में गोल्ड मेडल से नवाजा जा चुका है।
वर्तमान में श्वेता सिंह आजतक पर रात 8 बजे प्रसारित होने वाले प्रमुख शो ‘ख़बरदार’ (Khabardar) की एंकरिंग करती हैं। यह शो उनकी संवाद क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और दर्शकों से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है।
राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीति, बिज़नेस, खेल और मनोरंजन—हर विषय पर उनकी पकड़ समान रूप से मजबूत है। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग हो या एंकरिंग, दर्शक उन्हें भरोसे के साथ देखते हैं। मशहूर टॉक शो ‘सीधी बात’ की मेजबानी से लेकर स्पेशल प्रोग्राम्स तक, उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से हर मंच पर अपनी छाप छोड़ी है।
श्वेता सिंह ने हमेशा पत्रकारिता को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की तरह निभाया है। उनकी निर्भीकता और सटीक विश्लेषण ने उन्हें अलग पहचान दी है। यही वजह है कि वह देश की चुनिंदा पत्रकारों में गिनी जाती हैं, जिनकी बात दर्शक न केवल सुनते हैं, बल्कि उस पर भरोसा भी करते हैं।