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अमेरिकी मीडिया कंपनियों को लेकर चीन ने चली ये जवाबी चाल
अमेरिका ने पहले चीन के चार शीर्ष सरकारी मीडिया संस्थानों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र करार दिया और ‘विदेशी मिशन’ की श्रेणी में डाल दिया था। अब चीन ने इसका जवाब दिया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
अमेरिका ने हाल ही में चीन के चार शीर्ष सरकारी मीडिया संस्थानों पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र करार दिया और ‘विदेशी मिशन’ की श्रेणी में डाल दिया था। लिहाजा इसे देखते हुए अब चीन ने एसोसिएट प्रेस सहित चार अमेरिकी मीडिया कंपनियों से उनके कर्मचारियों और कारोबार की जानकारी मांगी है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उसने यह कदम अमेरिका द्वारा चीन के मीडिया संस्थानों पर की गई कार्रवाई के विरोध में उठाया है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बुधवार को घोषणा की कि ‘एसोसिएट प्रेस’ (एपी), ‘यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल’, ‘सीबीएस’ और ‘नेशनल पब्लिक रेडियो’ के पास अपने कर्मचारियों, वित्तीय परिचालन, अचल संपत्ति व कुछ अन्य मामलों की जानकारी देने के लिए सात दिन का समय है।
झाओ ने अपनी नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘यह रेखांकित करना जरूरी है कि चीन द्वारा उठाया गया उपरोक्त कदम पूरी तरह से वैध रक्षात्मक कार्रवाई है। अमेरिका ने चीनी मीडिया एजेंसियों पर अपने देश में बिना कारण दमनात्मक कार्रवाई कर उसे इसके लिए मजबूर किया है।’
झाओ ने कहा, 'हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह अपनी गलती को सुधारे और चीनी मीडिया संस्थानों का राजनीतिक दमन रोक और उन पर लगाए गए अनुचित प्रतिबंधों को हटाए।'
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से चीन और अमेरिका एक-दूसरे के मीडिया संस्थानों और उनके कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले अमेरिका ने चीन के चार मीडिया संस्थानों को ‘विदेशी मिशन’ का दर्जा दे दिया था। इससे पहले वह फरवरी में भी पांच चीनी मीडिया संस्थानों को ‘विदेश मिशन’ का दर्जा दे चुका था। उधर, मार्च में चीन ने अमेरिका के दो दर्जन पत्रकारों को निष्कासित कर दिया था, जिन पत्रकारों को देश छो़ड़ने के लिए कहा गया था, उनमें ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’, ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के रिपोर्टर थे। इतना ही नहीं ‘वाइस ऑफ अमेरिका’ और ‘टाइम’ मैगजीन को चीन में अपने कार्यों के बारे में विवरण देने को कहा गया था। चीन की इस कार्रवाई के बाद वॉशिंगटन ने चीन के चार मीडिया संस्थानों को अपने कर्मचारियों को कम करने का आदेश दिया था।
वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों में आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर भी पहले से तनातनी चल रही है। माना जा रहा है कि अब इस कदम से यह तनातनी और बढ़ेगी।
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