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जीवन के कई 'रंगों' का सार है युवा पत्रकार हिमानी का ये कथा संग्रह
बीते दस सालों से मीडिया की दुनिया में कार्यरत पत्रकार और लेखिका हिमानी का लघु कथा संग्रह 'नमक' इन दिनों चर्चा में है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
अमृत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार।।
बीते दस सालों से मीडिया की दुनिया में कार्यरत पत्रकार और लेखिका हिमानी का लघु कथा संग्रह 'नमक' इन दिनों चर्चा में है। इस कथा संग्रह की टैगलाइन है जिंदगी को चाहिए 'नमक'। इस टैगलाइन का पूरा सार कथा संग्रह की छोटी-छोटी कहानियों में मिलता है।
इन कहानियों को इस तरह शब्दों में पिरोया गया है कि हर एक कहानी अपनी ही जिंदगी में घटता हुए एक पल मालूम होती है। किसी भी कहानी में किसी भी किरदार को कोई नाम नहीं दिया गया है। हर कहानी में एक लड़का है या एक लड़की या फिर दो लड़कियों की बातचीत।
संवाद की शैली में लिखी गई ये कहानियां कहीं-कहीं आम बातचीत जैसी लगती हैं और कहीं-कहीं कम शब्दों में ताउम्र के लिए एक गहरा असर छोड़ जाती हैं। कथा संग्रह 'नमक' में 80 कहानियां हैं। इन कहानियों को पढ़ते हुए अक्सर चंद्रधर शर्मा गुलेरी की मशहूर कहानी ‘उसने कहा था’ की याद आती है, जिसके संवाद सीधे दिल पर असर करते हैं और फिर पूरी कहानी चाहे भूल भी जाएं, वो संवाद कभी भी यादाश्त से गायब नहीं होते। इस कथा संग्रह में भी ऐसे कई संवाद हैं।
'मैं आज तक कभी इतना रॉन्गसाइड नहीं चली, जितना तुमने मुझे चलवा दिया
न सड़क पर, न जिंदगी में।'
कहानी 'रॉन्गसाइड' से
पता है ऑर्गेज्म क्या होता है? लड़की ने पूछा
'मेरे लिए तो तुम्हारा खुश होना ऑर्गेज्म होता है... 'लड़के ने जवाब दिया।
कहानी 'ऑर्गेज्म' से
'यहां बहुत ज्यादा गर्मी है। चटक धूप रहती है। घर से बाहर निकलने को जी ही नहीं चाहता। मुझे गर्मी बिलकुल पसंद नहीं है।' लड़के ने खत में लिखा
'इस पर परेशान क्यों होना, मौसम तो बदलते रहते हैं।' लड़की ने जवाब भेजा
कहानी 'मौसम' में
'तुम्हारा जाना मेरे लिए कयामत जैसा था।
और तुम्हारा न जा पाना, तुम्हारे लिए कयामत जैसा होता।
मैंने अपनी कयामत बुला ली।' लड़की ने कहा।
कहानी 'कयामत' से
80 कहानियों की इस किताब को सात भागों में बांटा गया है। हर भाग के साथ चित्रकार प्रीतिमा वत्स ने चित्रांकन के जरिये दो लोगों के बीच के संबंधों को दिखाने की कोशिश की है। शुरुआती भाग में बेहद मासूम से पलों की कहानियां हैं, तो आखिरी भागों में दर्द और पीड़ा के लम्हों में छिपे प्यार की तड़प को दिखाने वाली कहानियां। कुछ लोग इन कहानियों को लप्रेक शैली से जोड़ सकते हैं, लेकिन इन कहानियों को पढ़ने के बाद ये लप्रेक से ज्यादा छायाचित्र की तरह लगते हैं, जिन्हें पढ़ने का अनुभव पाठक को नई सी ताजगी देता है।
वक्त की कमी के चलते अक्सर किताबें पढ़ने का शौक पूरा न कर पाने वाले लोगों के लिए ये किताब बिलकुल सही है। अगर हिसाब-किताब के अंदाज में बताया जाए तो इस कथा संग्रह की 80 कहानियों को पढ़ने के लिए सिर्फ 80 मिनट चाहिए, लेकिन बदले में ये कहानियां जीवन भर के लिए एक खास अहसास दे जाती हैं।
कथा संग्रह का नाम ‘नमक’ रखे जाने के पीछे की एक वजह इसकी शीर्षक कहानी नमक से भी समझ आती है और दूसरी वजह को लेखिका ने किताब की भूमिका में बहुत खूबसूरती से बयां किया है, जिसे पढ़ते ही किताब को पढ़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने में काफी मदद मिलती है।
इस किताब को Authors pride publication ने पब्लिश किया है। 100 पृष्ठों वाली इस किताब की कीमत 125 रुपए रखी गई है।
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