लैंगिक समानता और मानवाधिकार अविभाज्य, आधारभूत और बिना शर्त हैं, यह कहना है संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य अधिकार पर विशेष प्रतिवेदक, डॉ. त्लालेंग मोफ़ोकेंग का।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
शोभा शुक्ला, सिटीजन न्यूज़ सर्विस।।
लैंगिक समानता और मानवाधिकार अविभाज्य, आधारभूत और बिना शर्त हैं, यह कहना है संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य अधिकार पर विशेष प्रतिवेदक, डॉ. त्लालेंग मोफ़ोकेंग का। यदि सतत विकास लक्ष्यों पर सबके लिए खरा उतरना है तो हमें सभी लक्ष्यों पर खरा उतरना होगा। यदि सरकारें चंद लक्ष्यों की ओर कार्य करेंगी और बाक़ी को नज़रअंदाज़ करेंगी, तो हम सभी लक्ष्यों पर असफल होंगे क्योंकि सतत विकास लक्ष्य तो एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
आईपीपीएफ की डॉ. हरज्योत खोसा ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान, समाज के हाशिए पर रह रहे समुदाय के लोगों ने सबसे अधिक त्रासदी झेली क्योंकि वह स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और जेंडर न्याय संबंधित सभी तरह की सेवाओं से वंचित हो गए थे। कोविड के दौरान महिला हिंसा बढ़ रही थी। यदि हम समाज के हाशिए पर रह रहे लोगों को स्वास्थ्य व्यवस्था को परिवर्तित और सुधारने में शामिल करेंगे तो ही वह जेंडर न्याय और मानवाधिकार के मापदंडों ने अनुकूल बन सकेगी। वह 78वें विश्व स्वास्थ्य असेंबली के दौरान जिनेवा में आयोजित एक विशेष सत्र को संबोधित कर रही थीं। इस सत्र को आयोजित करने में ग्लोबल सेंटर फॉर हेल्थ डिप्लोमेसी एंड इंक्लूज़न, सीएनएस, आईपीपीएफ, आदि संगठनों का योगदान रहा।
क्या स्वास्थ्य प्रणाली जेंडर संवेदनशील है? डॉ. हरज्योत खोसा ने कहा कि यह विवेचना करनी चाहिए कि क्या हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था जेंडर संवेदनशील है? क्या वह सिर्फ़ 'पारंपरिक रूप से सही' शादीशुदा महिला और पुरुष के लिए संवेदनशील है और बाक़ी विभिन्न जेंडर के लोगों के लिए या जिन्होंने शादी या बच्चे न करने का निर्णय लिए है, उनके लिए भी संवेदनशील है? स्वास्थ्य व्यवस्था में भी पित्तरात्मकता व्याप्त है इसीलिए इसका ईमानदारी से मूल्यांकन कर के इसको सुधारने की ज़रूरत है जिससे कि कोई भी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।
डोमिनिकन रिपब्लिक के डॉ. एलिज़र लपोट्स एब्रो जो हेल्थ हॉरिज़न्स से जुड़े हैं, ने कहा कि उनके मरीज़ों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था इसलिए मना कर दी जाती है क्योंकि या तो वह स्थानीय भाषा नहीं बोलतीं या फिर उनके पास नागरिकता के पूरे दस्तावेज़ नहीं हैं। डॉ. एलिज़र के एक महिला मरीज़ को सर्वाइकल कैंसर का इलाज सरकारी अस्पताल में मना हो गया क्योंकि उसको स्थानीय भाषा नहीं आती थी। जब, अनुवादक साथ गया तो सरकारी अस्पताल ने कहा कि नागरिकता के दस्तावेज़ के बिना कैंसर का इलाज नहीं मिलेगा।
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज या यूएचसी का क्या मायने हैं यदि हम भेदभाव करेंगे और जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों को नहीं देंगे?
पब्लिक सर्विसेज इंटरनेशनल के बाबा आए ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली मृत्यु में से 13% सिर्फ़ असुरक्षित गर्भपात के कारण होती हैं। दो-तिहाई स्वास्थ्य-कर्मी महिला हैं पर कई देशों की कानून और व्यवस्था ने सुरक्षित गर्भपात पर प्रतिबंध लगा रखा है।
लेप्रोसी (कुष्ठ रोग), जेंडर न्याय, मानवाधिकार और सतत विकास: लेप्रोसी या कुष्ठ रोग, जिसे "हैनसेन रोग" के नाम से भी जाना जाता है, एक पुरानी बीमारी है जो सदियों से मानव इतिहास का हिस्सा रही है और कलंक तथा गलत धारणाओं में लिपटी हुई है। यह एक दीर्घकालिक संक्रामक रोग है जो माइको-बैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु के कारण होता है।
कुष्ठ रोग का इलाज मल्टी-ड्रग थेरेपी (बहु-औषधि चिकित्सा) से संभव है। रोग की गंभीरता को देखते हुए यह इलाज 1 से लेकर 2 वर्षों तक चल सकता है। लेकिन अगर इस रोग का शुरुआती चरण में पता नहीं लगाया जाता और इलाज नहीं किया जाता है, तो प्रभावित व्यक्ति में स्थायी विकलांगता और विकृति हो सकती है, जिनके चलते समुदाय में ऐसे व्यक्तियों और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति भेदभाव व्याप्त होता है। यदि कुष्ठ रोग की जल्दी जांच हो, सही इलाज बिना-विलंब मिले, तो शारीरिक विकृति भी नहीं होती और सही इलाज शुरू होने के 72 घंटे बाद से रोग फैलना भी बंद हो जाता है।
तब क्यों कुष्ठ रोगियों को भेदभाव और शोषण झेलना पड़ता है? कुष्ठ रोग का इलाज पूरा कर चुकी सुश्री माया रनवाड़े जो एसोसिएशन फॉर पीपल अफेक्टेड बाय लेप्रोसी की अध्यक्ष हैं, ने कहा कि कुष्ठ रोग से गुज़र चुकी लड़कियों और महिलाओं को अनेक गुणा अधिक शोषण और भेदभाव झेलना पड़ता है। इसी शोषण और भेदभाव के कारण लोग स्वास्थ्य सेवा से लाभान्वित नहीं हो पाते।
माया रनवाड़े का कहना है कि कुष्ठ रोग से प्रभावित महिलाओं को अनेक संघर्ष करने पड़ते हैं। पित्तरात्मक सामाजिक व्यवस्था के कारण उनको अधिक झेलना पड़ता है। कार्यस्थल तक पर पुरुषों की तुलना में उनको कम दिहाड़ी या दैनिक आय मिलती है। यदि कुष्ठ रोग से प्रभावित महिलाओं की ज़िंदगी सुधारनी है तो जेंडर-आधारिक अन्याय भी समाप्त करने होंगे।
भारत में एचआईवी के साथ जीवित लोगों के संगठन (नेशनल कोएलिशन ऑफ़ पीपल लिविंग विथ एचआईवी इन इंडिया) की सह-संस्थापिका और पूर्व अध्यक्ष दक्षा पटेल ने सराहा कि भारत सरकार ने एचआईवी के साथ जीवित लाखों लोगों को जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएं मुहैया करवायी हैं, अनेक सरकारी एचआईवी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों के कारण लोग स्वस्थ और भरपूर जीवन जी पा रहे हैं। परंतु उनकी अपील है कि एचआईवी के साथ जीवित लोगों को भी सरकारी सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज योजनाओं के तहत लाभार्थी बनाया जाये जिससे कि एचआईवी के अलावा अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी उन्हें सम्मान और अधिकार स्वरूप समय से मिल सकें।
अफगानिस्तान में मानवाधिकार और मानवीय संकट के खतरे सभी के लिए गहरा रहे हैं, लेकिन महिलाओं समेत जेंडर विविध लोगों की स्थिति और भी गंभीर है। उन्हें तालिबान अधिकारियों से हिंसा, और यहां तक कि मौत, का भी गंभीर खतरा है।
अफ़ग़ानी महिलाओं की स्थिति भी बहुत दयनीय है। अफ़गानिस्तान की एक समलैंगिक महिला परवीन ने अपनी हृदय विदारक कहानी सुनाते हुए कहा कि उन्हें लगातार उत्पीड़न और जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
वह मार्च 2025 का एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन था जब परवीन और उनकी प्रेमिका मरियम ने एक ट्रांसजेंडर दोस्त मावे के साथ अफ़ग़ानिस्तान छोड़ के ईरान जाने की कोशिश की। लेकिन मामला उलट गया। तालिबान ने मरियम और मावे को पकड़ कर हिरासत में ले लिया और तब से वे कैद में हैं। सौभाग्य से परवीन हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच से गुजरने में सफल रही क्योंकि उसका भाई उसके पुरुष संरक्षक के रूप में उसे अनुमति देने हेतु हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गया। जब तक तालिबान परवीन की तलाश में हवाई अड्डे पर पहुंचे, तब तक उसका विमान उड़ान भर चुका था।
तालिबान परवीन की तलाश कर रहे हैं। लेकिन वह अपनी लड़ाई जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्प है क्योंकि वह नहीं चाहती कि भविष्य में किसी अन्य जेंडर विविध व्यक्ति को तकलीफ़ उठानी पड़े।
परवीन के सहयोगी नेमत सादत हैं, जो रोशनिया (जेंडर विविध अफ़गानों की सहायता के लिए समर्पित एक नेटवर्क है) के अध्यक्ष हैं। नेमत उन पहले अफ़गानों में से एक हैं जिन्होंने 2013 में खुले तौर पर अपने समलैंगिक होने की बात स्वीकार की थी और जेंडर विविध लोगों के अधिकारों के लिए अभियान चलाया।
नेमत ने बताया "हमारे पास 1,000 से ज़्यादा जेंडर विविध लोगों की सूची है जो अभी भी अफ़गानिस्तान में रह रहे हैं। आज तक हमने 265 लोगों को पश्चिमी देशों और ओमान में सुरक्षित पहुचाने में मदद की है और हमें उम्मीद है कि परवीन भी सुरक्षित जगह पर पहुँच जाएँगी, हालाँकि अभी उनका भविष्य बहुत अनिश्चित लग रहा है।"
दक्षिण सूडान में चल रही लड़ाई और कलह ने जेंडर विविध समुदाय, एचआईवी के साथ जीवित लोगों, यौनकर्मी, और विकलांग व्यक्ति जैसे हाशिए पर रह रहे लोगों को आघात पहुंचाया है। उन्हें शारीरिक हिंसा, घरेलू हिंसा और यौन शोषण का सामना करना पड़ रहा है।
दक्षिण सूडान में महिला अधिकारों पर कार्यरत और डबल्यूईसीएसएस की अध्यक्ष रेचल अडाऊ के अनुसार साउथ सूडान की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली टूट रही है। मातृ और बाल स्वास्थ्य सेवाएं बहुत बुरी स्थिति में हैं। संक्रामक रोगों का जोखिम भी बढ़ गया है। अभी दक्षिण सूडान में नदी के दूषित पानी के कारण हैजा का प्रकोप फैला हुआ है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। संघर्ष के कारण खाद्य असुरक्षा होने से युवतियों तथा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं और पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण और एनीमिया अधिक है। लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर भी बहुत अधिक है। इन सबके परिणामस्वरूप मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी पैदा हो रही हैं।
दक्षिण सूडान में दो न्यायिक प्रणालियाँ हैं - संविधान और प्रथागत पारंपरिक कानून। परंपरा के अनुसार, पुरुष ही कमाते हैं। महिलाओं के पास संसाधनों तक पहुंच नहीं है, निर्णय लेने की पहुंच नहीं है, नेतृत्व में उनकी कोई आवाज़ नहीं है क्योंकि उन्हें अल्पसंख्यक माना जाता है। संविधान के अनुसार दक्षिण सूडान में सभी महिलाओं को समान अधिकार हैं, लेकिन वे कानूनों के खराब क्रियान्वयन के कारण उनका प्रयोग करने में असमर्थ हैं। उदाहरण के लिए, भले ही उनके पास संपत्ति रखने का कानूनी अधिकार है , लेकिन अक्सर उन्हें इस अधिकार से वंचित कर दिया जाता है। साथ ही महिला हिंसा के अपराधियों को सज़ा नहीं मिलती।
क्या सरकारें अगले माह जेंडर न्याय और स्वास्थ्य अधिकार पर ठोस निर्णय लेंगी? जुलाई 2025 में भारत समेत दुनिया के सभी देश, संयुक्त राष्ट्र उच्च-स्तरीय राजनीतिक फोरम में सतत विकास लक्ष्यों पर हुई प्रगति का मूल्यांकन करेंगे - इनमें जेंडर और स्वास्थ्य से संबंधित लक्ष्य प्रमुख हैं। आशा है कि सभी सरकारें, मानवाधिकार के पक्ष्य में ठोस निर्णय लेंगी।
(शोभा शुक्ला, सीएनएस (सिटीज़न न्यूज़ सर्विस) की संस्थापिका-संपादिका हैं और लखनऊ-स्थित लोरेटो कॉलेज की भौतिकी विज्ञान की सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षिका हैं। उनको ‘एक्स’ पर पढ़ें: @Shobha1Shukla)
वर्टिव (Vertiv) ने राघवेंद्र काले (Raghavendra Kale) को भारत के लिए Channel Leader नियुक्त किया है। वह कंपनी की चैनल रणनीति, पार्टनर नेटवर्क और बाजार विस्तार का नेतृत्व करेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वर्टिव (Vertiv) ने राघवेंद्र काले (Raghavendra Kale) को प्रमोट करते हुए भारत (India) के लिए चैनल लीडर (Channel Leader) नियुक्त किया है। वह कंपनी की चैनल रणनीति, पार्टनर नेटवर्क और बाजार विस्तार को नई दिशा देने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
वर्टिव इंडिया (Vertiv India) में वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स (Vice President-Sales) प्रशांत भाटिया (Prashant Bhatia) ने कहा कि राघवेंद्र काले का कंपनी के साथ सफर उनकी प्रतिबद्धता, मजबूत निष्पादन क्षमता और पार्टनर सफलता पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भारत में कंपनी के विस्तार के साथ चैनल नेटवर्क विकास का प्रमुख आधार बनेगा और काले का नेतृत्व पार्टनर एंगेजमेंट को मजबूत करने के साथ नए व्यावसायिक अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
करीब तीन दशकों के अनुभव वाले राघवेंद्र काले (Raghavendra Kale) ने उद्योग में गहरी विशेषज्ञता और मजबूत पार्टनर नेटवर्क विकसित किया है। अपनी नई नियुक्ति से पहले वह वर्टिव (Vertiv) में वेस्ट जोन (West Zone) के डायरेक्टर (Director) के रूप में कार्यरत थे।
नई जिम्मेदारी पर राघवेंद्र काले ने कहा कि भारत में मजबूत और स्केलेबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) की मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वह कंपनी के पार्टनर्स के साथ मिलकर नवाचार को बढ़ावा देने, बाजार में पहुंच का विस्तार करने और ग्राहकों के लिए अधिक मूल्य सृजित करने की दिशा में काम करेंगे।
केंद्र सरकार ने प्रस्तावित दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 के तहत मौजूदा लाइसेंसधारकों को स्वैच्छिक माइग्रेशन का विकल्प देने की घोषणा की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित 'दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026' का उद्देश्य भारत के प्रसारण क्षेत्र के लिए एक एकीकृत और सरल नियामक ढांचा तैयार करना है। लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण मंत्री 'अश्विनी वैष्णव' ने बताया कि नए नियम लागू होने के बाद मौजूदा लाइसेंसधारकों को तुरंत नई व्यवस्था अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उन्हें स्वैच्छिक (Voluntary) आधार पर नई प्राधिकरण व्यवस्था में शामिल होने का विकल्प मिलेगा, जबकि वे चाहें तो अपने मौजूदा लाइसेंस के तहत भी काम जारी रख सकेंगे।
मंत्री ने कहा कि यह मसौदा नियम टेलीविजन और रेडियो प्रसारण से जुड़े विभिन्न नियमों और दिशानिर्देशों को एकीकृत कर एक समान नियामक प्रणाली तैयार करेगा। इसके तहत सैटेलाइट टीवी अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग, डायरेक्ट-टू-होम (DTH), हेडएंड-इन-द-स्काई (HITS), निजी एफएम रेडियो, सामुदायिक रेडियो और इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) जैसी छह अलग-अलग व्यवस्थाओं को एक ही नियमावली के अंतर्गत लाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे अनुपालन प्रक्रिया आसान होगी और कारोबार करने में सुविधा बढ़ेगी।
सरकार ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य देशभर में, विशेषकर दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में, टेलीविजन और रेडियो सेवाओं की पहुंच का विस्तार करना है। मंत्री ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जैसे जिलों में भी प्रसारण सेवाओं में सुधार की संभावना जताई। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत तैयार किए गए इन नियमों पर सरकार ने 27 जुलाई तक उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। माना जा रहा है कि स्वैच्छिक माइग्रेशन की नीति अपनाकर सरकार प्रसारण उद्योग में बिना किसी बड़े व्यवधान के चरणबद्ध तरीके से नए नियामक ढांचे को लागू करना चाहती है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने देशभर के उभरते डिजिटल क्रिएटर्स को मंच देने के लिए 'Gems of India' Challenge का पायलट चरण शुरू कर दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने देशभर के उभरते डिजिटल क्रिएटर्स को मंच देने के लिए 'Gems of India' Challenge का पायलट चरण शुरू कर दिया है। इस पहल में YouTube और Meta को इकोसिस्टम पार्टनर बनाया गया है, जो अपने-अपने क्रिएटर नेटवर्क के जरिए इस अभियान को देशभर में पहुंचाने में सहयोग करेंगे।
यह कार्यक्रम Waves OTT प्लेटफॉर्म के MyWAVES सेक्शन के तहत चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं और डिजिटल क्रिएटर्स को अपने जिले की संस्कृति, विरासत, पर्यटन, परंपराओं, इतिहास और खास उपलब्धियों को छोटे वीडियो के जरिए दुनिया के सामने लाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने कहा कि भारत के हर जिले की अपनी एक अलग कहानी है और 'Gems of India' उन कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने का एक मंच है। उन्होंने कहा कि यह पहल न सिर्फ युवाओं की रचनात्मकता को बढ़ावा देगी, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता को भी सामने लाएगी।
इस प्रतियोगिता के लिए 1 अगस्त से 31 अगस्त के बीच 1 से 3 मिनट की अवधि वाले वीडियो Waves OTT के MyWAVES प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जा सकेंगे।
पायलट चरण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, गोवा और लद्दाख को शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम को प्रसार भारती, माय भारत (My Bharat) और संबंधित राज्य व जिला प्रशासन के सहयोग से लागू किया जाएगा। स्थानीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थान भी इसमें क्रिएटर्स को जोड़ने और कंटेंट तैयार करने में सहयोग करेंगे।
प्रतियोगिता में तीन स्तरों पर पुरस्कार दिए जाएंगे। जिला स्तर पर प्रत्येक जिले के 20 तक विजेताओं को 50-50 हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा। राज्य स्तर के विजेताओं को 2 लाख रुपये, जबकि राष्ट्रीय स्तर के विजेताओं को 5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
जिला और राज्य प्रशासन इस कार्यक्रम के संचालन, क्रिएटर्स तक पहुंच बनाने और एंट्री के मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं, संस्कृति, विरासत, पर्यटन, मीडिया और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों की जूरी विजेताओं का चयन करेगी।
मंत्रालय का कहना है कि पायलट चरण से मिले अनुभव के आधार पर इस पहल को आगे चलकर देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा मजबूत डिजिटल क्रिएटर नेटवर्क तैयार करना है, जो भारत की स्थानीय कहानियों, संस्कृति और विरासत को दुनिया तक पहुंचा सके।
सरकार का मानना है कि यह पहल डिजिटल इंडिया और ऑरेंज इकोनॉमी के विजन को आगे बढ़ाने के साथ-साथ देश की क्रिएटिव इकोनॉमी को मजबूत करने और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभाएगी।
ऑस्ट्रेलिया के ब्रॉडकास्टर नेटवर्क टेन (Network Ten) न्यूज प्रोडक्शन और विज्ञापन बिक्री (Advertising Sales) को आउटसोर्स करने पर विचार कर रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऑस्ट्रेलिया (Australia) के प्रमुख ब्रॉडकास्टर नेटवर्क टेन (Network Ten) अपने न्यूज प्रोडक्शन (News Production) और विज्ञापन बिक्री (Advertising Sales) को आउटसोर्स करने की संभावना पर विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी घटती दर्शक संख्या और बदलती मीडिया खपत की आदतों के बीच अपने परिचालन ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेटवर्क टेन (Network Ten) अपने न्यूज बुलेटिन्स (News Bulletins) के प्रोडक्शन को किसी प्रतिद्वंद्वी टेलीविजन नेटवर्क (Television Network) को सौंपने के लिए बातचीत कर रहा है। इसके अलावा कंपनी अपने विभिन्न चैनलों की विज्ञापन बिक्री की जिम्मेदारी भी किसी बाहरी एजेंसी या साझेदार को देने के विकल्प पर विचार कर रही है।
बताया जा रहा है कि युवा दर्शकों के तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (Digital Platforms) और अन्य ऑनलाइन समाचार स्रोतों की ओर रुख करने के कारण Network Ten की दर्शक संख्या लगातार प्रभावित हुई है। इसी बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए कंपनी अपने संचालन को अधिक प्रभावी और लागत-कुशल बनाने के विकल्प तलाश रही है।
हालांकि, प्रस्तावित बदलावों ने कंपनी के न्यूज, करंट अफेयर्स (Current Affairs) और एडवरटाइजिंग सेल्स (Advertising Sales) विभागों में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि आउटसोर्सिंग योजना लागू होती है तो इसका असर इन विभागों की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की भूमिकाओं पर पड़ सकता है।
एजेंटिक एआई (Agentic AI) आधारित प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म प्रोकोल (Procol) ने शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) को Chief Marketing Officer (CMO) नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एजेंटिक एआई (Agentic AI) आधारित प्रोक्योरमेंट और फाइनेंस प्लेटफॉर्म प्रोकोल (Procol) ने शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) को चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer-CMO) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की वैश्विक मार्केटिंग, ब्रांड और कम्युनिकेशंस रणनीति का नेतृत्व करेंगे। साथ ही अमेरिका (United States) सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी की मौजूदगी मजबूत करने पर भी उनका विशेष फोकस रहेगा।
शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) कंपनी की मार्केट पोजिशनिंग (Market Positioning) को मजबूत करने, प्रोक्योरमेंट टेक्नोलॉजी (Procurement Technology) क्षेत्र में Procol की नेतृत्वकारी पहचान स्थापित करने और वैश्विक विस्तार की रणनीति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अपनी नियुक्ति पर शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) ने कहा कि Procol ने Agentic AI प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोक्योरमेंट के काम करने के तरीके को नए सिरे से परिभाषित किया है और उनका लक्ष्य कंपनी की बाजार में मौजूदगी को मजबूत करना, एंटरप्राइज लीडर्स के साथ गहरा जुड़ाव बनाना और भारत (India) तथा वैश्विक बाजारों में AI-संचालित प्रोक्योरमेंट को लेकर Procol की नेतृत्वकारी भूमिका को स्थापित करना है।
नई जिम्मेदारी के तहत शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) ग्राहक जुड़ाव (Customer Engagement) को मजबूत करने, ब्रांड और डिमांड जनरेशन (Demand Generation) अभियानों का विस्तार करने तथा प्रमुख एंटरप्राइज बाजारों में Procol की उपस्थिति बढ़ाने पर काम करेंगे। कंपनी का मानना है कि उनकी रणनीतिक नेतृत्व क्षमता उसके दीर्घकालिक वैश्विक विकास लक्ष्यों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इससे पहले नबील ए. खान (Nabeel A. Khan) सऊदी अरब (Saudi Arabia) में मदरसन ग्रुप (Motherson Group) के कंट्री हेड (Country Head) भी रह चुके हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस क्षेत्र के वरिष्ठ पेशेवर नबील ए. खान (Nabeel A. Khan) ने रेनॉल्ट इंडिया (Renault India) में डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट एवं हेड – पीआर, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस एंड पब्लिक अफेयर्स (Deputy Vice President & Head – PR, Corporate Communications and Public Affairs) के पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, वह अब एक नई मीडिया और डीप-टेक कम्युनिकेशंस (Deep-Tech Communications) प्लेटफॉर्म का नेतृत्व करने जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नई भूमिका नबील ए. खान (Nabeel A. Khan) के करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। हालांकि, नई संस्था या प्लेटफॉर्म के नाम का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।
रेनॉल्ट इंडिया (Renault India) में अपने कार्यकाल के दौरान नबील ए. खान ने कई प्रमुख उत्पाद लॉन्च किये, ब्रांड प्रतिष्ठा (Reputation) अभियानों और पब्लिक अफेयर्स (Public Affairs) पहलों का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में अपनी कॉर्पोरेट छवि और सार्वजनिक संवाद को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
इससे पहले नबील ए. खान (Nabeel A. Khan) सऊदी अरब (Saudi Arabia) में मदरसन ग्रुप (Motherson Group) के कंट्री हेड (Country Head) भी रह चुके हैं। वहां उन्होंने सरकारी स्तर की जटिल भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय संचालन का नेतृत्व किया, जिससे उन्हें वैश्विक स्तर पर रणनीतिक और परिचालन अनुभव प्राप्त हुआ।
कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस, पब्लिक अफेयर्स और ब्रांड रणनीति में लंबे अनुभव के साथ नबील ए. खान (Nabeel A. Khan) अब मीडिया और डीप-टेक कम्युनिकेशंस क्षेत्र में नई पहल का नेतृत्व करेंगे।
बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, ITT दस्तावेज 4 अगस्त तक खरीदा जा सकता है। टेंडर से जुड़े स्पष्टीकरण (Clarifications) मांगने की अंतिम तिथि 5 अगस्त निर्धारित की गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India-BCCI) ने अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आयोजनों के टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स (Title Sponsorship Rights) के लिए बोली प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड ने इच्छुक कंपनियों और संस्थाओं से प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के तहत आवेदन आमंत्रित करने के लिए इनविटेशन टू टेंडर (Invitation to Tender-ITT) जारी किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीसीसीआई (BCCI) और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC FIRST Bank) के बीच मौजूदा टाइटल स्पॉन्सरशिप समझौता जल्द समाप्त होने वाला है। इसके बाद बोर्ड नए स्पॉन्सर के चयन के लिए खुली बोली प्रक्रिया अपनाएगा।
बीसीसीआई (BCCI) ने बताया कि ITT दस्तावेज में बोली जमा करने और उसके मूल्यांकन से जुड़ी सभी शर्तें और नियम शामिल हैं। इच्छुक पक्ष 1 लाख रुपये के गैर-वापसी योग्य शुल्क (Non-refundable Fee) और लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) का भुगतान कर टेंडर दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं।
बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, ITT दस्तावेज 4 अगस्त तक खरीदा जा सकता है। टेंडर से जुड़े स्पष्टीकरण (Clarifications) मांगने की अंतिम तिथि 5 अगस्त निर्धारित की गई है, जबकि अंतिम बोलियां 13 अगस्त तक जमा की जा सकेंगी।
नई टाइटल स्पॉन्सरशिप के तहत चयनित कंपनी को बीसीसीआई (BCCI) के घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंटों और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से जुड़ी ब्रांडिंग और नामकरण अधिकार प्राप्त होंगे। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद बोर्ड अपने अगले टाइटल स्पॉन्सर की आधिकारिक घोषणा करेगा।
सोशल मीडिया पर बढ़ती खाद्य उत्पादों से जुड़ी शिकायतों के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों को गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया पर बढ़ती खाद्य उत्पादों से जुड़ी शिकायतों के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों (Food Business Operators-FBOs) को गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, FSSAI ने कंपनियों से कहा है कि वे खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करें, अपने आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) को मजबूत बनाएं, डिजिटल ट्रैसेबिलिटी (Digital Traceability) सिस्टम अपनाएं और उपभोक्ताओं के साथ ज्यादा पारदर्शी तरीके से जानकारी साझा करें।
FSSAI एक डिजिटल ट्रैसेबिलिटी फ्रेमवर्क भी तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी खाद्य उत्पाद में गड़बड़ी या मिलावट की शिकायत सामने आती है, तो उसके स्रोत का जल्द पता लगाया जा सके और जरूरत पड़ने पर प्रभावित उत्पादों को बाजार से तुरंत वापस मंगाया जा सके।
नियामक का मानना है कि इस तकनीक की मदद से खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की बेहतर निगरानी हो सकेगी और खाद्य जनित बीमारियों (Foodborne Illness) के मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, FSSAI ने इन शिकायतों के आधार पर कई खाद्य कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भी जारी किए हैं।
इसके अलावा, FSSAI ने एनर्जी ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों और मादक पेय (Alcoholic Beverages) से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज की है। इन पर भ्रामक दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं।
FSSAI ने खाद्य कारोबारियों से कहा है कि वे अपने गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को और मजबूत करें तथा सभी नियामकीय मानकों का पूरी तरह पालन करें। प्राधिकरण का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और भरोसे की रक्षा के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना सबसे जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब खाद्य सुरक्षा की निगरानी केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेगी। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनियों को यह भी साबित करना होगा कि उनका उत्पाद कहां से आया, किस प्रक्रिया से गुजरा और सुरक्षित तरीके से उपभोक्ता तक कैसे पहुंचा।
FSSAI का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में खाद्य कंपनियों के लिए केवल अच्छा उत्पाद बनाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को डिजिटल रूप से ट्रैक करने और उपभोक्ताओं के प्रति पारदर्शिता बनाए रखने पर भी बराबर ध्यान देना होगा।
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुमार जैन के पद छोड़ने के बाद रेल मंत्रालय ने राहुल हिमालियन को कंपनी के CMD का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुमार जैन के पद छोड़ने के बाद रेल मंत्रालय ने राहुल हिमालियन को कंपनी के CMD का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। उनकी नियुक्ति 20 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है। फिलहाल वह IRCTC में डायरेक्टर (टूरिज्म एंड मार्केटिंग) के पद पर कार्यरत हैं और अब अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ-साथ CMD का अतिरिक्त दायित्व भी निभाएंगे।
IRCTC ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में बताया कि यह बदलाव SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के तहत किया गया है। कंपनी सचिव एवं अनुपालन अधिकारी सुमन कालरा ने 20 जुलाई 2026 को इसकी आधिकारिक जानकारी साझा की।
26 साल से अधिक का रेलवे अनुभव
राहुल हिमालियन 1999 बैच के इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (IRTS) के वरिष्ठ अधिकारी हैं। उन्हें भारतीय रेलवे और IRCTC में 26 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। वह 16 फरवरी 2024 से IRCTC के बोर्ड का हिस्सा हैं और टूरिज्म, मार्केटिंग, आईटी, मानव संसाधन, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक उपलब्धियां भी शानदार
राहुल हिमालियन का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी काफी प्रभावशाली रहा है। वह द लॉरेंस स्कूल में हेड बॉय और बेस्ट स्टूडेंट रहे। इसके बाद उन्होंने एनआईटी हमीरपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया, जहां उन्हें गोल्ड मेडल मिला।
उन्होंने आगे आईआईटी दिल्ली से एमटेक किया और 10 में 10 सीजीपीए हासिल किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल' से भी सम्मानित किया गया।
निभाएंगे दोहरी जिम्मेदारी
CMD का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद राहुल हिमालियन अब IRCTC के प्रशासन, संचालन, रणनीतिक फैसलों और व्यावसायिक गतिविधियों का नेतृत्व करेंगे। साथ ही वह डायरेक्टर (टूरिज्म एंड मार्केटिंग) के रूप में अपनी मौजूदा जिम्मेदारियां भी जारी रखेंगे।
IRCTC के लिए अहम बदलाव
IRCTC भारतीय रेलवे की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग, खानपान सेवाएं, पर्यटन पैकेज और रेल नीर पैकेज्ड पेयजल जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाओं का संचालन करती है। ऐसे में कंपनी के शीर्ष नेतृत्व में यह बदलाव संगठन की भावी रणनीति और संचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिर्फ 100 रुपये प्रति माह में 10,000 से अधिक लाइव टीवी चैनल और प्रीमियम OTT कंटेंट उपलब्ध कराने वाली एक अवैध IPTV सेवा के करीब 5,000 सब्सक्राइबर होने का मामला सामने आया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
सिर्फ 100 रुपये प्रति माह में 10,000 से अधिक लाइव टीवी चैनल और प्रीमियम OTT कंटेंट उपलब्ध कराने वाली एक अवैध IPTV सेवा के करीब 5,000 सब्सक्राइबर होने का मामला सामने आया है। इसके बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित डिजिटल पायरेसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
बताया जा रहा है कि OM IPTV नाम की यह सेवा बिना किसी अधिकृत अनुमति के JioStar और कई अन्य कंटेंट मालिकों के कॉपीराइट वाले लाइव टीवी चैनल, फिल्में, JioStar Originals और अन्य प्रीमियम कंटेंट का अवैध प्रसारण कर रही थी।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म बेहद कम कीमत वाले सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रहा था। करीब 100 रुपये प्रति माह की फीस लेकर इसने तेजी से लगभग 5,000 यूजर्स का ग्राहक आधार तैयार कर लिया।
इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि कम कीमत पर चलने वाले अवैध IPTV प्लेटफॉर्म वैध स्ट्रीमिंग और पे-टीवी सेवाओं के लिए बड़ा व्यावसायिक खतरा बनते जा रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म आधिकारिक सब्सक्रिप्शन की तुलना में बेहद कम कीमत पर हजारों प्रीमियम चैनल और ऑन-डिमांड कंटेंट उपलब्ध कराकर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं।
यह जांच JioStar की शिकायत के आधार पर शुरू हुई। शिकायत मिलने के बाद 29 मई 2026 को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 61(2) और 3(5), कॉपीराइट एक्ट की धारा 63 और 65, तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की धारा 66D के तहत एफआईआर दर्ज की।
100 रुपये की सदस्यता, हजारों सब्सक्राइबर्स
जांच अधिकारियों के मुताबिक, OM IPTV ने बेहद सस्ते मासिक सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए अपना कारोबार खड़ा किया। इस सदस्यता के तहत यूजर्स को 10,000 से अधिक लाइव टीवी चैनलों के साथ-साथ हजारों वीडियो-ऑन-डिमांड (VOD) टाइटल, फिल्में, प्रीमियम स्पोर्ट्स प्रसारण और ओरिजिनल प्रोग्रामिंग तक पहुंच दी जाती थी।
हालांकि इसकी मासिक फीस करीब 100 रुपये थी, जो वैध टीवी और OTT सेवाओं की तुलना में काफी कम है, लेकिन करीब 5,000 सब्सक्राइबर होने से यह साफ होता है कि यह एक बड़े व्यावसायिक पायरेसी कारोबार का रूप ले चुका था।
मीडिया कंपनियां लंबे समय से चेतावनी देती रही हैं कि इस तरह की अवैध IPTV सेवाएं प्रीमियम स्पोर्ट्स, मनोरंजन चैनलों और OTT लाइब्रेरी को एक ही पैकेज में बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराकर वैध कंपनियों की सब्सक्रिप्शन आय को नुकसान पहुंचा रही हैं।
जांच में सामने आई पायरेसी नेटवर्क की पूरी सप्लाई चेन
एफआईआर दर्ज होने के बाद JioStar लगातार जांच एजेंसियों को दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध कराता रहा, जिससे दिल्ली क्राइम ब्रांच को IPTV डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने में मदद मिली।
जांच में पहली बड़ी सफलता 12 जून को मिली, जब अधिकारियों ने OM TV से जुड़े अंकित बंसल को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान बंसल ने कथित तौर पर बताया कि वह हरियाणा के नरेंद्र सिंह से OM IPTV के सब्सक्रिप्शन हासिल करता था और बाद में उन्हें अंतिम ग्राहकों तक पहुंचाता था।
इस खुलासे के बाद जांच केवल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि अवैध IPTV सब्सक्रिप्शन उपलब्ध कराने वाली पूरी डिस्ट्रीब्यूशन सीरीज तक पहुंच गई।
हरियाणा में कार्रवाई
जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 15 जुलाई को हरियाणा के रेवाड़ी में दूसरी बड़ी कार्रवाई की। अधिकारियों ने नरेंद्र सिंह से जुड़े ठिकानों की तलाशी ली, वहां के ऑपरेशन की जांच की और फोरेंसिक जांच के लिए मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण जब्त किए।
जांच के अनुसार, नरेंद्र सिंह प्लेटफॉर्म का मुख्य संचालक नहीं, बल्कि IPTV सब्सक्रिप्शन का रीसेलर प्रतीत होता है। उन्हें नोटिस जारी कर 17 जुलाई को दिल्ली क्राइम ब्रांच के सामने पेश होकर जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।
पायरेसी के पूरे कारोबार पर कार्रवाई
इस मामले में की गई कार्रवाई यह संकेत देती है कि अब एंटी-पायरेसी अभियान केवल अवैध स्ट्रीमिंग वेबसाइटों को ब्लॉक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन पूरे व्यावसायिक नेटवर्क को खत्म करने पर ध्यान दिया जा रहा है, जिनके जरिए इस तरह की सेवाएं संचालित होती हैं।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि OM IPTV वेबसाइट, एप्लिकेशन, सब्सक्रिप्शन क्रेडेंशियल और भुगतान प्रणाली जैसे व्यवस्थित IPTV ढांचे के जरिए कॉपीराइट वाले कंटेंट तक अवैध पहुंच बेचकर कमाई कर रहा था।
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल प्लेटफॉर्म संचालकों को ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े वितरकों और रीसेलर्स को भी निशाना बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य पूरी पायरेसी वैल्यू चेन को बाधित करना है।
ब्रॉडकास्टर्स का मानना है कि बेहद कम कीमत वाले सब्सक्रिप्शन, हजारों भुगतान करने वाले ग्राहकों और विशाल कंटेंट लाइब्रेरी के कारण IPTV पायरेसी अब केवल कॉपीराइट उल्लंघन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े और तेजी से बढ़ते व्यावसायिक कारोबार का रूप ले चुकी है। ऐसे में पूरे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।