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‘वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम शर्मा ने जो बीज बोया, आज वह वटवृक्ष है’
माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पहले कुलपति (महानिदेशक) डॉ. राधेश्याम शर्मा को किया गया याद
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) के संस्थापक महानिदेशक राधेश्याम शर्मा को याद किया गया। डॉ. शर्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए विश्वविद्यालय एवं सप्रे संग्रहालय की ओर से मंगलवार को 'स्मरण डॉ. राधेश्याम शर्मा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति दीपक तिवारी का कहना था, विश्वविद्यालय की स्थापना को 30 वर्ष होने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय की यह यात्रा उत्कृष्टता की ओर है। आज विश्वविद्यालय ने जो प्रगति की है, वह जिस वटवृक्ष के रूप में हमें दिखाई पड़ रहा है, उसका बीज स्वर्गीय राधेश्याम शर्मा जैसे मूर्धन्य पत्रकार ने बोया था। वे विश्वविद्यालय के संस्थापक महानिदेशक रहे हैं। वह जिस समन्वय की दृष्टि को लेकर चले थे, विश्वविद्यालय उसी सोच पर आगे बढ़ रहा है।‘
तिवारी का कहना था, ‘विश्वविद्यालय की संकल्पना के अनुरूप हम सब विचारधाराओं को साथ लेकर चल रहे हैं। विश्वविद्यालय लगातार उत्कृष्टता के लिए प्रयासरत है। विश्वविद्यालय का जोर गुणवत्तापूर्ण शोधकार्य पर है। हम प्रयास करेंगे कि स्वर्गीय राधेश्याम शर्मा की पत्रकारिता पर भी पीएचडी हो।’
इस मौके पर डॉ. शर्मा को याद करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का ढांचा बेशक अरविन्द चतुर्वेदी ने खड़ा किया, लेकिन उसकी आत्मा राधेश्याम शर्मा बने। विश्वविद्यालय को विस्तार देने में वह सभी को साथ लेकर चले। वह इस विश्वविद्यालय को भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता का तीर्थ बनाना चाहते थे। सप्रे संग्रहालय के संस्थापक विजयदत्त श्रीधन का कहना था कि राधेश्याम शर्मा सदैव सबकी फिक्र करते थे। सब पत्रकारों को जोड़ कर रखने का प्रयास करते थे।
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार लज्जाशंकर हरदेनिया ने बताया कि किस प्रकार एक सच्चे पत्रकार को अपनी विचारधारा और अपने प्रोफेशन को अलग-अलग रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि राधेश्याम शर्मा की सबसे बड़ी विशेषता थी कि वह खबर को सूंघने की क्षमता रखते थे। उन्होंने विभिन्न समाचार-पत्रों को नई पहचान दी। विश्वविद्यालय के पूर्व रैक्टर ओपी दुबे ने कहा कि राधेश्याम शर्मा सिर्फ मूर्धन्य पत्रकार ही नहीं, बल्कि बहुत अच्छे इंसान भी थे।
विश्वविद्यालय की पूर्व प्राध्यापिका दविंदर कौर उप्पल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राधेश्याम शर्मा सबको स्नेह देते थे। उनका व्यक्तित्व बहुत सहज था। वे छोटे से कर्मचारी को भी पूरा सम्मान देते थे। वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत नायडू ने कहा कि विचारधारा को लेकर राधेश्याम जी कभी कर्कश नहीं रहे। आज उनके जैसे लोगों की कमी है। वे ऐसे व्यक्तित्व थे कि उनके साथ बैठ लिए तो लगता था कि जैसे एकाध किताब पढ़ ली हो। राधेश्याम शर्मा के रिश्तेदार हर्ष शर्मा ने भी उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला और उनके साथ अपने निजी अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का संचालन प्रो. संजय द्विवेदी ने किया। सहायक कुलसचिव विवेक सावरीकर ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर नगर के प्रबुद्ध नागरिक, पत्रकार एवं विश्वविद्यालय के कर्मचारी, अधिकारी एवं शिक्षक मौजूद रहे।
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