आहा में एवीपी और हेड ऑफ मार्केटिंग बनीं मेघा सोनी

रीजनल ओटीटी प्लेटफॉर्म आहा ने मेघा सोनी को एवीपी और हेड ऑफ मार्केटिंग नियुक्त किया है। वह ब्रांड, कंटेंट मार्केटिंग, ऑडियंस एंगेजमेंट और क्षेत्रीय कैंपेन का नेतृत्व करेंगी।

Last Modified:
Friday, 30 October, 2026
aha


रीजनल ओटीटी प्लेटफॉर्म आहा (aha) ने मेघा सोनी (Megha Soni) को एवीपी और हेड ऑफ मार्केटिंग (AVP and Head of Marketing) नियुक्त किया है। मेघा ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर पोस्ट के जरिए नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।

मेघा ने अपनी पोस्ट में कहा कि मार्केटिंग के क्षेत्र में यात्राओं से लेकर स्क्रीन पर मार्केटिंग कहानियां पेश करने तक का सफर उनके लिए दिलचस्प बदलाव है। उन्होंने आहा से एवीपी और हेड ऑफ मार्केटिंग के तौर पर जुड़ने पर उत्साह जताया।

उन्होंने कहा कि नई इंडस्ट्री, नई टीम और मनोरंजन की एक नई दुनिया को जानने का मौका मिल रहा है। आहा 3.0 के नए रूप, बेहतर व्यूइंग एक्सपीरियंस और आने वाले नए शोज के साथ उनका यह जुड़ाव खास समय पर हुआ है।

नई भूमिका में मेघा आहा की ब्रांड और कंटेंट मार्केटिंग रणनीति का नेतृत्व करेंगी। उनका फोकस ओरिजिनल कंटेंट को बढ़ावा देने, दर्शकों के साथ मजबूत जुड़ाव बनाने और तेलुगु व तमिल बाजारों में सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक कैंपेन चलाने पर होगा।

मेघा इससे पहले अभिबस (AbhiBus) के साथ काम कर चुकी हैं। इससे पहले वह मुरुगप्पा ग्रुप (Murugappa Group), एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज (Amway India Enterprises) और जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स (Gemini Edibles & Fats) से भी जुड़ी रही हैं।

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धीरज कुमार बने टीडीआई इंफ्राटेक के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट

टीडीआई इंफ्राटेक ने धीरज कुमार को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-मार्केटिंग नियुक्त किया है। वह ब्रांड मार्केटिंग, डिजिटल और पब्लिक रिलेशंस संभालेंगे और कंपनी की मार्केटिंग रणनीति को आगे बढ़ाएंगे।

Last Modified:
Friday, 30 October, 2026
dheerajkumar

टीडीआई इंफ्राटेक (TDI Infratech) ने धीरज कुमार (Dheeraj Kumar) को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-मार्केटिंग (Senior Vice President-Marketing) नियुक्त किया है। उन्हें ब्रांड मैनेजमेंट, मार्केटिंग कम्युनिकेशंस, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और कस्टमर एंगेजमेंट का 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

नई भूमिका में धीरज कुमार कंपनी के ब्रांड मार्केटिंग, डिजिटल और पब्लिक रिलेशंस (Public Relations) कार्यों का नेतृत्व करेंगे। उनका फोकस टीडीआई इंफ्राटेक की ब्रांड पोजिशनिंग मजबूत करने, कॉरपोरेट विजिबिलिटी बढ़ाने और कंपनी के कारोबारी उद्देश्यों के अनुरूप इंटीग्रेटेड मार्केटिंग रणनीतियां तैयार करने पर होगा।

धीरज कुमार को रणनीतिक ब्रांड बिल्डिंग, इंटीग्रेटेड मार्केटिंग कम्युनिकेशंस और ऑडियंस एंगेजमेंट में व्यापक अनुभव है। उन्होंने अलग-अलग उद्योगों में काम करते हुए मार्केटिंग रणनीतियां तैयार करने, डिजिटल पहलों को आगे बढ़ाने और ग्राहकों पर केंद्रित ब्रांड अनुभव विकसित करने का काम किया है।

टीडीआई इंफ्राटेक में वह प्रभावी मार्केटिंग पहलों के जरिए कंपनी की बाजार मौजूदगी बढ़ाने, ऑडियंस के साथ मजबूत जुड़ाव बनाने और कंपनी के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर ध्यान देंगे।

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नवेंदु श्रीवास्तव ने जेएसडब्ल्यू पेंट्स में संभाली नई जिम्मेदारी

नवेंदु श्रीवास्तव ने जेएसडब्ल्यू पेंट्स में मार्केटिंग मैनेजर की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह एशियन पेंट्स में डिविजनल सर्विस एग्जीक्यूटिव के पद पर सात साल से अधिक समय तक काम कर चुके हैं।

Last Modified:
Thursday, 29 October, 2026
jswpaints

नवेंदु श्रीवास्तव (Navendu Srivastava) ने जेएसडब्ल्यू पेंट्स (JSW Paints) में मार्केटिंग मैनेजर (Marketing Manager) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपने नए पद की जानकारी साझा की।

श्रीवास्तव ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि मैंने जेएसडब्ल्यू पेंट्स में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।”

जेएसडब्ल्यू पेंट्स से पहले श्रीवास्तव एशियन पेंट्स (Asian Paints) के साथ जुड़े हुए थे, जहां वह डिविजनल सर्विस एग्जीक्यूटिव (Divisional Service Executive) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने जनवरी 2019 में एशियन पेंट्स के साथ अपना सफर शुरू किया था और कंपनी में सात साल से अधिक समय तक काम किया।

इससे पहले श्रीवास्तव कॉफी डे बेवरेजेज (Coffee Day Beverages) और महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) के साथ भी काम कर चुके हैं।

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संतोष कुमार बने आईबीएम इंडिया के ग्रोथ मार्केटिंग प्रमुख

संतोष कुमार ने आईबीएम में भारत और दक्षिण एशिया के लिए ग्रोथ मार्केटिंग प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इकोसिस्टम मार्केटिंग लीडर की भूमिका में थे।

Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
santoshkumar

संतोष कुमार (Santosh Kumar) ने आईबीएम (IBM) में भारत और दक्षिण एशिया के लिए ग्रोथ मार्केटिंग प्रमुख (Growth Marketing Head) की जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

इससे पहले कुमार सितंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक आईबीएम में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए इकोसिस्टम मार्केटिंग लीडर (Ecosystem Marketing Leader) रहे। इस भूमिका में उन्होंने पूरे क्षेत्र में पार्टनर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ काम किया।

कुमार दिसंबर 2020 में दोबारा आईबीएम से जुड़े थे। शुरुआत में उन्होंने मार्केटिंग ट्रांसफॉर्मेशन लीडर की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने कंट्री डिमांड स्ट्रैटेजी लीडर, आईएसए; रीजनल इकोसिस्टम एंड अलायंस मार्केटिंग लीडर और इकोसिस्टम मार्केटिंग लीडर-सैल, बिल्ड, रिक्रूट, एपीएसी जैसी भूमिकाएं निभाईं। उनके काम में एशियाई बाजारों के लिए मार्केटिंग ऑपरेशंस, डिमांड जनरेशन और पार्टनर मार्केटिंग शामिल रहा।

आईबीएम में दोबारा शामिल होने से पहले कुमार अक्टूबर 2018 से दिसंबर 2020 तक एक्सिसकेड्स (AXISCADES) में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer) रहे। इस दौरान उन्होंने मार्केटिंग के साथ कंपनी के ग्लोबल ब्रांड को नए सिरे से पेश करने की जिम्मेदारी संभाली।

इससे पहले जून 2017 से अक्टूबर 2018 तक उन्होंने एल्गोनॉमी (Algonomy) में परफॉर्मेंस मार्केटिंग लीडर (Performance Marketing Leader) के तौर पर काम किया। यहां उनकी जिम्मेदारियों में डिमांड जनरेशन और टारगेटेड मार्केटिंग शामिल थी।

आईबीएम में अपने पहले कार्यकाल के दौरान मई 2010 से जून 2017 तक कुमार ने कैंपेन प्लानर, प्रोग्राम मैनेजर-बिजनेस एनालिटिक्स और मैनेजर-मार्केटिंग जैसे पदों पर काम किया। इस दौरान उन्होंने कैंपेन प्लानिंग, एग्जीक्यूशन, परफॉर्मेंस एनालिसिस और डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े काम संभाले।

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डेलीहंट की पैरेंट कंपनी वर्स इनोवेशन की वैल्यूएशन 90 फीसदी घटी

बैली गिफोर्ड ने वर्स इनोवेशन की वैल्यूएशन घटाकर 576 मिलियन डॉलर की, जो 2022 की 5 अरब डॉलर की पीक वैल्यूएशन से करीब 90 फीसदी कम है, कंपनी चुनौतियों से जूझ रही है।

Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
dailyhunt

ब्रिटिश निवेश कंपनी बैली गिफोर्ड (Baillie Gifford) ने बेंगलुरु स्थित वर्स इनोवेशन (VerSe Innovation) की अनुमानित वैल्यूएशन घटाकर 576 मिलियन डॉलर कर दी है। वर्स इनोवेशन न्यूज एग्रीगेटर डेलीहंट (Dailyhunt) की पैरेंट कंपनी है। 2022 में कंपनी की पीक वैल्यूएशन 5 अरब डॉलर थी। इसके मुकाबले मौजूदा वैल्यूएशन करीब 90 फीसदी कम है।

बैली गिफोर्ड द्वारा मैनेज किए जाने वाले शिहैलियन फंड (Schiehallion Fund) ने 31 अगस्त तक वर्स इनोवेशन में अपनी 1.3 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू 7.47 मिलियन डॉलर आंकी है। जनवरी के मुकाबले इस निवेश की वैल्यू 27 फीसदी घट चुकी है, जबकि पिछले 19 महीनों में इसमें करीब 80 फीसदी की गिरावट आई है।

यह अनुमानित वैल्यूएशन कंपनी के किसी नए फंडिंग राउंड पर आधारित नहीं है। यह बैली गिफोर्ड की ओर से उसके निवेश की वैल्यू के आकलन पर आधारित है। कंपनी ने वैल्यूएशन घटाने के पीछे कारोबार के संचालन से जुड़ी चुनौतियों और समान लिस्टेड कंपनियों की कम हुई बाजार कीमत को वजह बताया है।

वर्स इनोवेशन का ऑपरेशनल रेवेन्यू वित्त वर्ष 2026 में 40 फीसदी घटकर 1,162 करोड़ रुपये रह गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 1,930 करोड़ रुपये था। हालांकि, खर्चों में कमी के चलते कंपनी का नेट लॉस 28 फीसदी घटकर 699 करोड़ रुपये रह गया।

कंपनी को कारोबार के अलग-अलग हिस्सों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। भारत में रियल-मनी गेमिंग (Real-Money Gaming) पर प्रतिबंध का असर डेलीहंट के विज्ञापन कारोबार पर पड़ा। वहीं, वर्स की एडटेक कंपनी वैल्यूलीफ (Valueleaf) की ग्रोथ भी धीमी हुई।

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रोनाल्ड ओमान बने एचएसबीसी प्राइवेट बैंक के ग्लोबल हेड ऑफ मार्केटिंग

एचएसबीसी प्राइवेट बैंक ने रोनाल्ड ओमान को ग्लोबल हेड ऑफ मार्केटिंग नियुक्त किया है। ओमान 2 नवंबर से नई भूमिका संभालेंगे और वैश्विक मार्केटिंग रणनीति की जिम्मेदारी देखेंगे।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
hsbc

एचएसबीसी प्राइवेट बैंक (HSBC Private Bank) ने रोनाल्ड ओमान (Ronald Oman) को ग्लोबल हेड ऑफ मार्केटिंग नियुक्त किया है। वह 2 नवंबर से नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

ओमान के पास इन्वेस्टमेंट बैंकिंग (Investment Banking), एसेट मैनेजमेंट (Asset Management) और प्राइवेट बैंकिंग (Private Banking) में मार्केटिंग का 25 साल का अनुभव है। वह यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका (EMEA) तथा एशिया में 15 साल से ज्यादा समय तक सीनियर लीडरशिप भूमिकाओं में काम कर चुके हैं।

इससे पहले ओमान यूरोपीय एसेट मैनेजर अमुंडी (Amundi) से जुड़े थे। यहां उन्होंने दो साल तक अल्टरनेटिव्स और प्राइवेट एसेट्स के लिए ग्लोबल हेड ऑफ मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशन की जिम्मेदारी संभाली। नई भूमिका में वह एचएसबीसी प्राइवेट बैंक की ग्लोबल मार्केटिंग स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करेंगे। उनका फोकस ग्राहकों को उपयोगी जानकारी, नए अवसरों और वित्तीय समाधानों से जोड़ने पर रहेगा।

अमुंडी से पहले ओमान ने जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) में 14 साल से ज्यादा समय बिताया। इस दौरान उन्होंने प्राइवेट बैंकिंग कारोबार में कई सीनियर मार्केटिंग पद संभाले। जुलाई 2021 से सितंबर 2024 तक वह ईएमईए प्राइवेट बैंक के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रहे और ईएमईए मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य भी थे।

इससे पहले वह हेड ऑफ एक्विजिशन मार्केटिंग और हेड ऑफ प्रोडक्ट मार्केटिंग की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उन्होंने इन्वेस्टमेंट्स मार्केटिंग से जुड़ी लीडरशिप भूमिकाओं में भी काम किया है।

करियर के शुरुआती दौर में ओमान सोसाइटी जेनरल कॉरपोरेट एंड इन्वेस्टमेंट बैंकिंग (Société Générale Corporate and Investment Banking) में ग्लोबल इक्विटीज एंड डेरिवेटिव्स सॉल्यूशंस के लिए ग्लोबल हेड ऑफ कॉरपोरेट कम्युनिकेशन रहे। उन्होंने अमुंडी एसेट मैनेजमेंट (Amundi Asset Management) में भी ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल मार्केटिंग और कम्युनिकेशन से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं।

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इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग बनाम पारंपरिक विज्ञापन: ब्रैंड को कहां मिल रहा ज्यादा फायदा?

इसी वजह से जहां एक तरफ टेलीविजन, अखबार और रेडियो जैसे पारंपरिक माध्यम अहम बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया क्रिएटर्स के जरिए प्रचार करने का चलन भी बढ़ रहा है।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
Influencer8748

विज्ञापन की दुनिया में कंपनियों के सामने अब सिर्फ अपने ब्रैंड को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की चुनौती नहीं है, लेकिन वे यह भी जानना चाहती हैं कि विज्ञापन पर खर्च किए गए पैसे से कितने नए ग्राहक मिल रहे हैं और सेल्स में कितना इजाफा हो रहा है। इसी वजह से जहां एक तरफ टेलीविजन, अखबार और रेडियो जैसे पारंपरिक माध्यम अहम बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया क्रिएटर्स के जरिए प्रचार करने का चलन भी बढ़ रहा है।

सितंबर और अक्टूबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत का विज्ञापन बाजार डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ रहा है और ब्रैंड क्रिएटर साझेदारी को भी ज्यादा गंभीरता से ले रहे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग हर कंपनी के लिए पारंपरिक विज्ञापन से ज्यादा फायदेमंद है। दोनों माध्यमों की उपयोगिता कंपनी के लक्ष्य, बजट, ग्राहक और विज्ञापन के नतीजों पर निर्भर करती है।

भारत का विज्ञापन बाजार कितना बड़ा हो रहा है?

18 सितंबर 2026 को प्रकाशित DCODE 2.0 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का कुल विज्ञापन बाजार 2025 के अनुमानित 1.85 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026 में 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में 2025 के विज्ञापन खर्च में डिजिटल माध्यमों की हिस्सेदारी 60 फीसदी, टेलीविजन की 26 फीसदी और प्रिंट की 10 फीसदी बताई गई है। 2026 के लिए कुल विज्ञापन बाजार में करीब 9.7 फीसदी की बढ़त का अनुमान लगाया गया है। 

यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए। डिजिटल विज्ञापन में सोशल मीडिया विज्ञापन के अलावा सर्च विज्ञापन, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्रचार, कनेक्टेड टीवी और दूसरे डिजिटल माध्यम भी शामिल हैं। इसलिए डिजिटल विज्ञापन की 60 फीसदी हिस्सेदारी को इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की हिस्सेदारी नहीं माना जा सकता।

14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित TAM AdEx के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जुलाई से 28 सितंबर 2026 के बीच डिजिटल विज्ञापन गतिविधि का सूचकांक पिछले साल के आधार 100 से बढ़कर 124.5 हो गया। यानी इसमें 24.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इसी अवधि में टेलीविजन का सूचकांक 91.4 और प्रिंट का 94.7 रहा। रेडियो का सूचकांक 101.1 था। 

ये आंकड़े विज्ञापन गतिविधि में बदलाव दिखाते हैं, न कि विज्ञापन दरों, कंपनियों की कमाई या इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के निवेश पर रिटर्न को। इसलिए इनके आधार पर सीधे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ब्रैंड ने टेलीविजन से बजट निकालकर क्रिएटर्स को देना शुरू कर दिया है।

इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर ब्रैंड का कितना भरोसा बढ़ा?

14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित इंडियन इन्फ्लुएंसर गवर्निंग काउंसिल (IIGC) की रिपोर्ट में 100 से ज्यादा ब्रैंड और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स के सर्वे का हवाला दिया गया। इसके मुताबिक, कंपनियों के मार्केटिंग बजट का 15 से 25 फीसदी हिस्सा क्रिएटर आधारित गतिविधियों की ओर जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ब्रैंड अब क्रिएटर्स को केवल प्रचार करने वाले चेहरे के बजाय उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने, उत्पाद के प्रति रुचि पैदा करने और सेल्स में मदद करने वाले साझेदार के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, यह आंकड़ा सर्वे में शामिल ब्रैंड के बजट से जुड़ा है। इसे पूरे भारतीय विज्ञापन बाजार में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की हिस्सेदारी नहीं माना जाना चाहिए।  

क्रिएटर मार्केटिंग की खासियत यह है कि कंपनियां अपने उत्पाद के हिसाब से सही दर्शक वर्ग तक पहुंच सकती हैं। उदाहरण के लिए, सौंदर्य उत्पाद बेचने वाली कंपनी मेकअप से जुड़े वीडियो बनाने वाले क्रिएटर के साथ काम कर सकती है। इसी तरह, मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी तकनीक की जानकारी देने वाले क्रिएटर को चुन सकती है।

इस तरीके से विज्ञापन को उस वर्ग तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जिसकी उत्पाद में पहले से दिलचस्पी है। लेकिन इसका फायदा तभी सामने आएगा, जब दर्शक विज्ञापन देखने के बाद उत्पाद में रुचि लें और खरीदारी भी करें।

लंबे समय की साझेदारी पर बढ़ रहा जोर

क्रिएटर मार्केटिंग में अब केवल एक पोस्ट या रील बनवाने के बजाय लंबे समय तक साझेदारी करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मई 2026 में जारी Kofluence की वार्षिक रिपोर्ट में शामिल सर्वे के मुताबिक, 62.1 फीसदी ब्रैंड प्रोफेशनल्स ने माना कि लंबे समय की क्रिएटर साझेदारी एक बार के अभियान के मुकाबले बेहतर निवेश रिटर्न दे सकती है। रिपोर्ट में 76.6 फीसदी ब्रैंड द्वारा इन्फ्लुएंसर्स के साथ साझेदारी वाले विज्ञापन चलाने की जानकारी भी दी गई।  

यहां भी आंकड़ों का सही मतलब समझना जरूरी है। 62.1 फीसदी का आंकड़ा उन ब्रैंड प्रोफेशनल्स की राय बताता है, जो लंबे समय की साझेदारी को बेहतर मानते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियों को 62.1 फीसदी ज्यादा सेल्स या मुनाफा मिला है। इसी तरह, 76.6 फीसदी का आंकड़ा साझेदारी वाले विज्ञापनों के इस्तेमाल से जुड़ा है, न कि उनकी सफलता की दर से।

लंबे समय की साझेदारी का फायदा यह हो सकता है कि दर्शक किसी क्रिएटर के जरिए एक ही ब्रैंड को बार-बार देखें और उसके उत्पादों को बेहतर तरीके से समझें। फिर भी, बार-बार दिखने से सेल्स बढ़ना तय नहीं है। उत्पाद की गुणवत्ता, कीमत, ग्राहक की जरूरत और खरीदारी का अनुभव भी उतने ही जरूरी हैं।

क्रिएटर की फीस कितनी है? एक तय दर बताना मुश्किल

इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की लागत समझने में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि सभी क्रिएटर्स की फीस एक जैसी नहीं होती। किसी क्रिएटर के फॉलोअर्स ज्यादा हो सकते हैं, लेकिन उसके वीडियो पर प्रतिक्रिया कम मिलती हो। दूसरी तरफ, छोटा क्रिएटर किसी खास क्षेत्र, भाषा या ग्राहक वर्ग में मजबूत पकड़ रख सकता है।

फीस तय करते समय फॉलोअर्स की संख्या के अलावा वीडियो की पहुंच, दर्शकों की सक्रियता, सामग्री बनाने का खर्च, प्लेटफॉर्म, अभियान की अवधि और ब्रैंड को सामग्री के दोबारा इस्तेमाल के अधिकार जैसे पहलू भी मायने रखते हैं।

इस रिसर्च के लिए सितंबर और अक्टूबर 2026 में प्रकाशित ऐसी कोई व्यापक, स्वतंत्र दर-सूची प्रमाणित नहीं हुई, जो भारत में अलग-अलग श्रेणियों के क्रिएटर्स की वास्तविक फीस का तुलनीय औसत बताती हो। इसलिए किसी खास क्रिएटर के लिए तय रकम या औसत फीस का दावा करना उचित नहीं होगा।

ब्रैंड के लिए जरूरी है कि वह सिर्फ कम फीस देखकर क्रिएटर न चुने। उसे यह भी देखना चाहिए कि उस खर्च से कितने सही दर्शकों तक पहुंचा जा सकेगा और अभियान से कितने ग्राहक मिलने की संभावना है।

ज्यादा व्यूज का मतलब ज्यादा सेल्स नहीं

इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की सफलता मापने में लाइक, कमेंट और वीडियो के व्यूज सबसे आसानी से दिखाई देने वाले आंकड़े हैं। लेकिन ये अपने आप में सेल्स का प्रमाण नहीं हैं।

मान लीजिए, किसी क्रिएटर के वीडियो को पांच लाख लोगों ने देखा, लेकिन उससे बहुत कम ऑर्डर मिले। वहीं किसी छोटे क्रिएटर के वीडियो को 50 हजार लोगों ने देखा और उससे ज्यादा खरीदारी हुई। ऐसी स्थिति में केवल व्यूज के आधार पर पहले अभियान को सफल कहना सही नहीं होगा।

कंपनियों को यह भी पता लगाना चाहिए कि कितने लोगों ने लिंक पर क्लिक किया, कितने ग्राहकों ने खरीदारी की और एक नया ग्राहक हासिल करने में कितना खर्च आया। इसके लिए अलग-अलग लिंक, कूपन कोड, सेल्स के आंकड़े और अभियान से पहले तथा बाद के प्रदर्शन की तुलना की जा सकती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी अभियान पर एक लाख रुपये खर्च हुए और उससे तीन लाख रुपये की सेल्स हुई, तो विज्ञापन खर्च के मुकाबले सेल्स तीन गुना है। लेकिन इसका मतलब तीन गुना मुनाफा नहीं है। उत्पाद की लागत, छूट, डिलीवरी, रिटर्न और अन्य खर्च घटाने के बाद ही असली कमाई का पता चलेगा।

साथ ही, यह देखना भी जरूरी है कि अभियान से वास्तव में नई सेल्स हुई या उन ग्राहकों ने ही खरीदारी की, जो पहले से उत्पाद खरीदने वाले थे। इस अंतर को समझे बिना विज्ञापन के वास्तविक योगदान का सही आकलन करना मुश्किल है।

पारंपरिक विज्ञापन को नजरअंदाज करना सही नहीं

टेलीविजन, अखबार और रेडियो की अपनी ताकत है। ये माध्यम बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने, किसी नए उत्पाद की जानकारी देने और ब्रैंड की पहचान बनाने में उपयोगी हो सकते हैं। बड़े स्तर पर उत्पाद लॉन्च करने वाली कंपनियों के लिए व्यापक पहुंच अब भी महत्वपूर्ण है।

दूसरी तरफ, क्रिएटर उत्पाद का इस्तेमाल करके दिखा सकता है, उसके बारे में विस्तार से समझा सकता है और दर्शकों के सवालों का जवाब दे सकता है। इससे ग्राहक को उत्पाद के बारे में जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।

कई ब्रैंड के लिए दोनों माध्यमों को साथ इस्तेमाल करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, कोई कंपनी टीवी विज्ञापन से अपने नए उत्पाद की जानकारी बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाए और फिर क्रिएटर्स के जरिए उसके इस्तेमाल और खूबियों को समझाए। इसके बाद कंपनी सेल्स और ग्राहक हासिल करने की लागत के आधार पर अलग-अलग माध्यमों के योगदान का आकलन कर सकती है।

हालांकि, ऐसे संयुक्त अभियान में यह तय करना आसान नहीं होता कि सेल्स का कितना हिस्सा टीवी विज्ञापन, क्रिएटर की सामग्री या दूसरे माध्यमों से आया। इसलिए कंपनियों को केवल अनुमान के बजाय ट्रैकिंग और नियंत्रित परीक्षणों की मदद लेनी चाहिए।

ब्रैंड को कहां मिल रहा ज्यादा फायदा?

सितंबर और अक्टूबर 2026 में प्रकाशित आंकड़े भारत के विज्ञापन बाजार में डिजिटल माध्यमों की मजबूत भूमिका और क्रिएटर साझेदारी में ब्रैंड की बढ़ती दिलचस्पी दिखाते हैं। लेकिन उपलब्ध आंकड़े यह साबित नहीं करते कि इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग हर स्थिति में पारंपरिक विज्ञापन से ज्यादा सेल्स या मुनाफा देती है।

अगर कंपनी का लक्ष्य कम समय में बड़ी आबादी तक पहुंचना और ब्रैंड की पहचान मजबूत करना है, तो टेलीविजन, प्रिंट और दूसरे व्यापक माध्यम उपयोगी हो सकते हैं। वहीं, किसी खास ग्राहक वर्ग तक पहुंचने, उत्पाद को समझाने और डिजिटल सेल्स के नतीजों को मापने के लिए क्रिएटर मार्केटिंग बेहतर विकल्प बन सकती है।

आखिरकार, ब्रैंड को यह नहीं देखना चाहिए कि किस माध्यम पर ज्यादा व्यूज आए या किसकी पहुंच बड़ी है। उसे यह समझना होगा कि किस माध्यम ने नए ग्राहक दिलाए, ग्राहक हासिल करने की लागत कितनी रही और कारोबार को कितना अतिरिक्त फायदा मिला। विज्ञापन की सफलता का असली पैमाना खर्च के मुकाबले मिलने वाला वास्तविक परिणाम है, न कि केवल लोकप्रियता।

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गो क्विक में आशीमा चौधरी की नियुक्ति : संभाली ब्रांड मैनेजर की जिम्मेदारी

गो क्विक ने आशीमा चौधरी को ब्रांड मैनेजर नियुक्त किया है। इससे पहले वह डब्ल्यूपीपी में एसोसिएट बिजनेस डायरेक्टर-रणनीति एवं प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रही थीं और करीब पांच साल जुड़ी रहीं।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
gokwik

गो क्विक (GoKwik) ने आशीमा चौधरी (Ashima Chaudhary) को ब्रांड मैनेजर के पद पर नियुक्त किया है। चौधरी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने गो क्विक में ब्रांड मैनेजर के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। इस नए सफर और आगे आने वाले अवसरों को लेकर उत्साहित हूं।”

इससे पहले चौधरी डब्ल्यूपीपी (WPP) में एसोसिएट बिजनेस डायरेक्टर-रणनीति एवं प्लानिंग के पद पर काम कर रही थीं। वह करीब पांच साल तक डब्ल्यूपीपी से जुड़ी रहीं। उन्होंने दिसंबर 2021 में बिजनेस मैनेजर-रणनीति एवं प्लानिंग के तौर पर कंपनी के साथ अपना सफर शुरू किया था।

अपने करियर में चौधरी मार्श इंडिया (Marsh India) और ईटेबल (Eatable) के साथ भी काम कर चुकी हैं।

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नील मूर्ति बने रिपलिंग के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर

नील मूर्ति को रिपलिंग में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर बनाया गया है। इससे पहले वह कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट-ग्रोथ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने गोल्डबेली और अन्य संगठनों में भी काम किया है।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
rippling

नील मूर्ति (Neel Murthy) को रिपलिंग (Rippling) में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर बनाया गया है। पदोन्नति से पहले वह कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट-ग्रोथ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

रिपलिंग से जुड़ने से पहले मूर्ति गोल्डबेली (Goldbelly) और सेफ डिपॉजिट बॉक्स इंश्योरेंस कवरेज एलएलसी (Safe Deposit Box Insurance Coverage, LLC) समेत कई संगठनों के साथ काम कर चुके हैं।

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तरुणदीप सिंह राणा ने एल्केम लैबोरेटरीज में संभाली नई जिम्मेदारी

तरुणदीप सिंह राणा ने एल्केम लैबोरेटरीज में हेड – कंज्यूमर बिजनेस की जिम्मेदारी संभाली है। उनके पास कंज्यूमर हेल्थकेयर, मार्केटिंग, सेल्स और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन का 25 वर्षों से अधिक अनुभव है।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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तरुणदीप सिंह राणा ने एल्केम लैबोरेटरीज (Alkem Laboratories) में हेड – कंज्यूमर बिजनेस के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उनके पास कंज्यूमर हेल्थकेयर, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, मार्केटिंग और सेल्स, कमर्शियल एक्सीलेंस, बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन, एचसीपी आउटरीच और पीएंडएल मैनेजमेंट में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

एल्केम से जुड़ने से पहले तरुणदीप जाइडस हेल्थकेयर लिमिटेड (Zydus Healthcare Limited) में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। जाइडस से पहले उन्होंने सन फार्मा कंज्यूमर हेल्थकेयर (Sun Pharma Consumer Healthcare) में कई महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिकाएं संभालीं।

इससे पहले वह डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (Dr. Reddy’s Laboratories) से जुड़े थे, जहां उन्होंने कंपनी के ग्लोबल ओटीसी (OTC) कारोबार का नेतृत्व किया। इसके अलावा उन्होंने हमदर्द लैबोरेटरीज (Hamdard Laboratories) में भी काम किया।

यहां पुराने और स्थापित ब्रांड्स को दोबारा मजबूत करने, कारोबार बढ़ाने और बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों का नेतृत्व करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अपने करियर के दौरान तरुणदीप ने भारत के साथ-साथ उभरते बाजारों में स्थापित ब्रांड्स और नए कारोबार को विकसित किया है। उन्होंने उपभोक्ता-केंद्रित ब्रांड निर्माण के साथ कमर्शियल लीडरशिप और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन को जोड़कर कारोबार को आगे बढ़ाने का काम किया है।

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एंड्रयू कैट्ज बने जेनरस ब्रांड्स के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर

एंड्रयू कैट्ज ने जेनरस ब्रांड्स में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली है। वह कंपनी के कंज्यूमर ब्रांड्स की मार्केटिंग लीड करेंगे और ब्रांड रणनीति, क्रिएटिव और परफॉर्मेंस मार्केटिंग संभालेंगे।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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एंड्रयू कैट्ज (Andrew Katz) ने जेनरस ब्रांड्स (Generous Brands) में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर यानी सीएमओ (CMO) की नई जिम्मेदारी संभाली है। वह कंपनी के कंज्यूमर ब्रांड्स के पूरे पोर्टफोलियो में मार्केटिंग संगठन का नेतृत्व करेंगे।

इसमें बोल्टहाउस फार्म्स (Bolthouse Farms), हेल्थ-एड (Health-Ade), इवोल्यूशन फ्रेश (Evolution Fresh) और सांबाजॉन (SAMBAZON) जैसे ब्रांड शामिल हैं।

नई भूमिका में कैट्ज ब्रांड स्ट्रैटेजी, कंज्यूमर इनसाइट्स, क्रिएटिव और परफॉर्मेंस मार्केटिंग की देखरेख करेंगे। इन सभी क्षेत्रों को एक साथ लाकर उनका फोकस कंपनी के पूरे पोर्टफोलियो में ग्रोथ को बढ़ाने पर रहेगा।

जेनरस ब्रांड्स से पहले कैट्ज अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2026 तक एथलेटिक ब्रूइंग कंपनी (Athletic Brewing Company) में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रहे। उनके कार्यकाल के दौरान कंपनी के नॉन-अल्कोहलिक क्राफ्ट बीयर ब्रांड को बढ़ाने पर खास फोकस रहा। वर्ष 2022 से 2025 के बीच कंपनी ने सालाना रेवेन्यू में 38 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वृद्धि दर दर्ज की।

एथलेटिक ब्रूइंग में कैट्ज की जिम्मेदारियों में ब्रांड इन्वेस्टमेंट, कंज्यूमर सेगमेंटेशन, क्रिएटिव स्ट्रैटेजी और मार्केटिंग एनालिटिक्स शामिल रहे। उन्होंने मार्केटिंग मेजरमेंट से जुड़ी क्षमताएं भी विकसित कीं, जिनमें मार्केटिंग मिक्स मॉडलिंग, ब्रांड हेल्थ ट्रैकिंग, क्रिएटिव इवैल्यूएशन और मल्टी-टच एट्रिब्यूशन शामिल थे।

कैट्ज ने कई कैंपेन का नेतृत्व किया और लाइव नेशन (Live Nation) तथा प्रीमियर लैक्रोस लीग (Premier Lacrosse League) के साथ पार्टनरशिप विकसित की। इसके अलावा नेटफ्लिक्स (Netflix) और आयरनमैन (Ironman) के साथ प्रोडक्ट कोलैबोरेशन में भी उनकी भूमिका रही।

एथलेटिक ब्रूइंग से पहले कैट्ज ने 2018 से 2021 तक वर्चुअल फिटनेस प्लेटफॉर्म इंस्ट्रक्टर (Instructrr) की स्थापना की और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में इसका नेतृत्व किया। इससे पहले वह हेनेकेन (Heineken) में डॉस इक्विस (Dos Equis) के वाइस प्रेसिडेंट ऑफ मार्केटिंग रहे। यहां उन्होंने कंपनी के ‘मोस्ट इंटरेस्टिंग मैन’ कैंपेन के खत्म होने के बाद ब्रांड की नई पहचान और स्ट्रैटेजिक दिशा तय करने में भूमिका निभाई।

उनके शुरुआती करियर में अमेरिकन एक्सप्रेस (American Express) और पेप्सिको (PepsiCo) में मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग से जुड़ी लीडरशिप भूमिकाएं शामिल रहीं। अमेरिकन एक्सप्रेस में उन्होंने ब्रांड और कस्टमर एक्विजिशन स्ट्रैटेजी के साथ वॉलमार्ट (Walmart) के साथ साझेदारी में विकसित फाइनेंशियल सर्विस प्रोडक्ट ब्लूबर्ड (Bluebird) की लॉन्चिंग पर काम किया।

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