एमेजॉन (Amazon) के संस्थापक और अरबपति कारोबारी जेफ बेजोस ने पहली बार प्रोफेशनल स्पोर्ट्स ओनरशिप की दुनिया में कदम रखा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एमेजॉन (Amazon) के संस्थापक और अरबपति कारोबारी जेफ बेजोस ने पहली बार प्रोफेशनल स्पोर्ट्स ओनरशिप की दुनिया में कदम रखा है। The Athletic की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेफ बेजोस उस कंसोर्टियम का हिस्सा बन गए हैं, जिसने इंग्लिश फुटबॉल क्लब Liverpool Football Club में करीब 38 फीसदी की अल्पांश हिस्सेदारी (Minority Stake) खरीदी है।
इस डील के बाद जेफ बेजोस के निवेश पोर्टफोलियो में एक बड़ा स्पोर्ट्स एसेट जुड़ गया है। हालांकि, इस निवेश से Liverpool के मौजूदा नियंत्रण में कोई बदलाव नहीं होगा।
1892 Holdings के जरिए किया गया निवेश
यह निवेश 1892 Holdings के जरिए किया गया है। इस ग्रुप की अगुवाई अमित भाटिया कर रहे हैं, जो पहले Queens Park Rangers के को-ऑनर रह चुके हैं। कंसोर्टियम में बेजोस के अलावा फेसबुक के सह-संस्थापक Eduardo Saverin का फैमिली ऑफिस और Mittal Family Trusts भी शामिल हैं।
इस ग्रुप ने Liverpool में करीब 38 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की है। हालांकि, क्लब की कमान अभी भी Fenway Sports Group (FSG) के पास ही रहेगी। FSG Liverpool का मौजूदा बहुमत शेयरधारक है और क्लब के रोजमर्रा के संचालन पर उसका नियंत्रण जारी रहेगा।
जेफ बेजोस बोर्ड में शामिल नहीं होंगे
जेफ बेजोस इस निवेश में K5 Sports के जरिए शामिल हुए हैं। हालांकि, दूसरे कुछ निवेशकों के विपरीत बेजोस Liverpool के बोर्ड में खुद कोई पद नहीं संभालेंगे।
निवेश समझौते के तहत K5 Sports के Bryan Baum और Elaine Saverin, अमित भाटिया के साथ Liverpool के बोर्ड में शामिल होंगे। वहीं, अमित भाटिया को क्लब का वाइस चेयरमैन बनाए जाने की भी बात कही गई है।
Liverpool में कंसोर्टियम की हिस्सेदारी को लेकर पहले कई तरह के अनुमान सामने आए थे। शुरुआती रिपोर्टों में यह हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी से एक-तिहाई के बीच बताई जा रही थी।
हालांकि, अब सामने आई जानकारी के मुताबिक कंसोर्टियम की हिस्सेदारी करीब 38 फीसदी है, जो पहले लगाए जा रहे अनुमानों से ज्यादा है।
फिलहाल Liverpool का टेकओवर नहीं
इस डील का मतलब यह नहीं है कि Liverpool का टेकओवर हो गया है। FSG क्लब का बहुमत शेयरधारक बना रहेगा और क्लब के संचालन की जिम्मेदारी भी उसी के पास होगी।
FSG के मुताबिक, इस निवेश का मकसद Liverpool की लंबी अवधि की ग्रोथ को सपोर्ट करना है। साथ ही, इससे क्लब के ओनरशिप स्ट्रक्चर में बिजनेस, टेक्नोलॉजी और निवेश के क्षेत्र का अनुभव रखने वाले नए निवेशक भी जुड़ेंगे।
हालांकि, समझौते में 1892 Holdings को अगले 12 महीनों के भीतर Liverpool में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी हासिल करने का विकल्प दिया गया है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि क्लब का टेकओवर तय हो गया है या भविष्य में ऐसा होना ही है।
Liverpool पर भरोसा दिखाता है निवेश
अमित भाटिया ने कहा है कि कंसोर्टियम का यह निवेश Liverpool और क्लब के मौजूदा नेतृत्व में उसके भरोसे को दिखाता है।
वहीं, Jeff Bezos के लिए यह डील उनके निवेश पोर्टफोलियो को एक बड़े स्पोर्ट्स एसेट से जोड़ती है। साथ ही, यह प्रोफेशनल स्पोर्ट्स ओनरशिप में उनकी पहली बड़ी एंट्री है।
दुनिया भर में टेक्नोलॉजी और बिजनेस से जुड़े बड़े निवेशकों की स्पोर्ट्स में दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में Liverpool में Bezos की एंट्री भी इसी बदलते ट्रेंड का हिस्सा मानी जा रही है।
अमेरिका में मीडिया और सरकार के बीच चल रही खींचतान अब कोर्ट तक पहुंच गई है। Disney और उसकी ABC यूनिट ने अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका में मीडिया और सरकार के बीच चल रही खींचतान अब कोर्ट तक पहुंच गई है। Disney और उसकी ABC यूनिट ने अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। दोनों कंपनियों ने कोर्ट से ABC के आठ स्टेशनों के ब्रॉडकास्ट लाइसेंस की समय से पहले की जा रही समीक्षा को रोकने की मांग की है।
Disney और ABC का आरोप है कि लाइसेंस रिव्यू की इस प्रक्रिया का इस्तेमाल नेटवर्क पर उसके प्रोग्रामिंग और एडिटोरियल फैसलों को लेकर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। कंपनियों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन FCC की लाइसेंसिंग पावर का इस्तेमाल ABC के न्यूज और एंटरटेनमेंट कंटेंट को लेकर बदले की कार्रवाई के तौर पर कर रहा है।
कोर्ट से कार्रवाई रोकने की मांग
Disney और ABC ने वॉशिंगटन की एक अमेरिकी जिला अदालत में यह मुकदमा दायर किया है। कंपनियों ने कोर्ट से Temporary Restraining Order (TRO) जारी करने की मांग की है, ताकि ABC के लाइसेंस रिन्यूअल की मौजूदा कार्यवाही को रोका जा सके और FCC को इस मामले में सुनवाई तय करने से भी रोका जाए।
कंपनियों के मुताबिक, इन लाइसेंस रिव्यू को लेकर आम लोगों से राय और टिप्पणियां लेने की प्रक्रिया इसी महीने की शुरुआत में खत्म हो चुकी है। अब FCC किसी भी समय आगे की कार्रवाई कर सकता है।
फ्री स्पीच के अधिकार का दिया हवाला
Disney और ABC ने अपनी याचिका में अमेरिकी संविधान के First Amendment का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि FCC की कार्रवाई उनके फ्री स्पीच के अधिकार का उल्लंघन करती है।
कंपनियों का आरोप है कि प्रशासन ABC पर उसकी प्रोग्रामिंग को लेकर कुछ मांगें मानने के लिए दबाव बना रहा है। ABC के ऐसा करने से इनकार करने के बाद उसके खिलाफ नियामकीय कार्रवाई की जा रही है।
Jimmy Kimmel को लेकर भी विवाद
ABC के इन आठ स्टेशनों के लाइसेंस की समीक्षा का आदेश उस समय आया, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ABC से लेट-नाइट होस्ट Jimmy Kimmel को हटाने की मांग की थी। ट्रंप लंबे समय से उन ब्रॉडकास्टर्स और कार्यक्रमों की आलोचना करते रहे हैं, जिनकी खबरों या कंटेंट से वह सहमत नहीं हैं। उन्होंने कई मौकों पर FCC से ABC के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की है।
यही वजह है कि Disney और ABC का आरोप है कि लाइसेंसिंग प्रक्रिया को मीडिया की एडिटोरियल स्वतंत्रता पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
सार्वजनिक एयरवेव्स के कारण FCC के पास लाइसेंसिंग अधिकार
इस पूरे विवाद की जड़ ब्रॉडकास्ट लाइसेंस से जुड़े FCC के अधिकारों में है। अमेरिका में टीवी स्टेशन सार्वजनिक एयरवेव्स का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए FCC के पास उनके ब्रॉडकास्ट लाइसेंस से जुड़े नियामकीय अधिकार हैं।
हालांकि, किसी स्टेशन का लाइसेंस रद्द किया जाना बेहद दुर्लभ है। इसके बावजूद इन लाइसेंस रिव्यू ने चिंता बढ़ा दी है कि कहीं नियामकीय शक्तियों का इस्तेमाल ब्रॉडकास्टर्स के एडिटोरियल और प्रोग्रामिंग फैसलों को प्रभावित करने के लिए तो नहीं किया जा रहा।
वहीं, ब्रॉडकास्टर्स को अपने प्रसारित किए जाने वाले कंटेंट को लेकर First Amendment के तहत व्यापक सुरक्षा हासिल है।
ABC और ट्रंप के बीच पहले भी हो चुका है टकराव
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप और ABC के बीच इस तरह का विवाद सामने आया है। इससे पहले नवंबर में भी ट्रंप ने ABC के लाइसेंस रद्द करने की मांग की थी।
उस समय वह ABC News के एक संवाददाता के सवाल से नाराज थे। संवाददाता ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman से वर्ष 2018 में वॉशिंगटन पोस्ट के कॉलमनिस्ट जमाल खशोगी की हत्या को लेकर सवाल पूछा था। ट्रंप ने उस सवाल को “insubordinate” यानी अनुशासनहीन बताया था।
‘The View’ भी FCC की जांच के दायरे में
FCC अलग से ABC के लोकप्रिय डे-टाइम टॉक शो The View की भी जांच कर रहा है। इस कार्यक्रम में अक्सर अमेरिकी राजनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है।
FCC ने कहा है कि यह कार्यक्रम संभावित तौर पर उन संघीय नियमों के दायरे में आ सकता है, जिनके तहत ब्रॉडकास्टर्स को राजनीतिक उम्मीदवारों को समान अवसर उपलब्ध कराने होते हैं।
अब कोर्ट में तय होगी बड़ी लड़ाई
Disney और ABC की इस याचिका के बाद ABC के ब्रॉडकास्ट लाइसेंस का मामला सीधे कोर्ट के सामने पहुंच गया है। अब यह विवाद सिर्फ लाइसेंस रिन्यूअल की सामान्य नियामकीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है।
मामला अब इस बड़े सवाल से जुड़ गया है कि ब्रॉडकास्टर्स पर सरकार और रेगुलेटर की निगरानी की सीमा कहां तक हो सकती है और एडिटोरियल स्वतंत्रता की सीमा कहां से शुरू होती है।
इस मुकदमे का नतीजा अमेरिका में ब्रॉडकास्ट मीडिया और सरकार के बीच संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि इससे यह भी तय हो सकता है कि FCC की लाइसेंसिंग शक्तियों का इस्तेमाल किस हद तक किसी नेटवर्क की प्रोग्रामिंग और एडिटोरियल फैसलों को लेकर किया जा सकता है।
कंपनी ने 17 अगस्त 2026 को Beijing स्थित Blue Intelligence Cloud Innovation Technology (Beijing) Co., Ltd. के साथ रणनीतिक अधिग्रहण के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘Baosheng Media Group Holdings Limited’ ने AI आधारित डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 17 अगस्त 2026 को Beijing स्थित Blue Intelligence Cloud Innovation Technology (Beijing) Co., Ltd. के साथ रणनीतिक अधिग्रहण के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है।
इस समझौते के तहत Baosheng Media Group की योजना Blue Intelligence Cloud Innovation Technology में 40% हिस्सेदारी खरीदने की है। कंपनी के मुताबिक, यह निवेश उसे AI आधारित मार्केटिंग और नई पीढ़ी की डिजिटल मार्केटिंग सेवाओं के कारोबार को मजबूत करने में मदद करेगा।
स्वतंत्र रूप से काम करती रहेगी कंपनी: इस डील को ‘रणनीतिक निवेश और स्वतंत्र संचालन’ मॉडल के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। यानी अगर यह सौदा पूरा होता है, तो Blue Intelligence Cloud Innovation Technology अपनी अलग कंपनी के तौर पर काम करती रहेगी और उसके रोजमर्रा के कारोबार में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों के पास बाकी 60% हिस्सेदारी बनी रहेगी।
AI और डेटा के जरिए मार्केटिंग को मजबूत करने की तैयारी: Baosheng Media Group का कहना है कि यह निवेश उसकी अगली पीढ़ी की मार्केटिंग सेवाओं को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी Blue Intelligence Cloud की AI आधारित तकनीक और क्षमताओं का इस्तेमाल अपने मार्केटिंग कारोबार को बेहतर बनाने के लिए करना चाहती है। Blue Intelligence Cloud की प्रमुख क्षमताओं में AI इंटेलिजेंट मार्केटिंग, AI के जरिए कंटेंट तैयार करना, यूजर डेटा का विश्लेषण और AI आधारित ऑपरेशंस शामिल हैं। दोनों कंपनियां मिलकर ब्रांड कम्युनिकेशन, ट्रैफिक लाने और ग्राहकों को वास्तविक खरीदारी तक पहुंचाने जैसी मार्केटिंग सेवाओं को और बेहतर बनाने पर काम कर सकती हैं।
यूजर डेटा से बढ़ेगी मार्केटिंग की क्षमता: इस साझेदारी का एक अहम हिस्सा यूजर डेटा और उसके व्यवहार का विश्लेषण भी होगा। यूजर्स के व्यवहार और उनकी पसंद से जुड़े डेटा का इस्तेमाल करके कंपनियां यह समझने की कोशिश करेंगी कि किस तरह संभावित ग्राहकों तक ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचा जाए। इससे कस्टमर एक्विजिशन की लागत कम करने और लीड को ग्राहक में बदलने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कंटेंट और मार्केटिंग में बढ़ेगा ऑटोमेशन: Baosheng का फोकस मार्केटिंग के ऐसे मॉडल पर भी है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा काम तकनीक और AI के जरिए ऑटोमेट किया जा सके। कंपनी का मानना है कि इससे अभी होने वाले कई मैनुअल और ज्यादा समय लेने वाले कामों को कम किया जा सकता है। AI के जरिए कंटेंट तैयार करने, ग्राहकों से जुड़ने और मार्केटिंग कैंपेन को ऑप्टिमाइज करने जैसी प्रक्रियाओं को ज्यादा तेज और प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा, दोनों कंपनियां AI मार्केटिंग टूल्स, AI आधारित कंटेंट एप्लिकेशन और ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से कस्टम टेक्नोलॉजी विकसित करने के मौके भी तलाशेंगी।
फिलहाल यह गैर-बाध्यकारी समझौता: हालांकि, अभी यह डील पूरी तरह फाइनल नहीं हुई है। मौजूदा MoU एक गैर-बाध्यकारी समझौता है। अब Baosheng Media Group Blue Intelligence Cloud की विस्तृत जांच यानी Due Diligence करेगी। इस जांच में कंपनी के कारोबार, AI तकनीक, बौद्धिक संपदा (IP), ग्राहकों से जुड़े संसाधन, मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट, वित्तीय और टैक्स स्थिति के साथ-साथ संभावित जोखिमों की जांच की जाएगी। कंपनी के मुताबिक, यह Due Diligence MoU के प्रभावी होने की तारीख से लगभग 30 कारोबारी दिनों में पूरी होने की उम्मीद है। हालांकि, दोनों पक्षों की सहमति से इसकी अवधि में बदलाव किया जा सकता है।
डील की अंतिम शर्तें बाद में तय होंगी: इस जांच के पूरा होने के बाद ही डील की अंतिम कीमत, भुगतान की शर्तें, सौदा पूरा करने की प्रक्रिया, कॉरपोरेट गवर्नेंस और प्रदर्शन से जुड़ी शर्तों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए दोनों कंपनियों को आगे चलकर अंतिम और बाध्यकारी समझौतों पर हस्ताक्षर करने होंगे। यानी फिलहाल 40% हिस्सेदारी खरीदने की योजना सामने आई है, लेकिन वास्तविक लेनदेन अंतिम समझौतों और Due Diligence के नतीजों पर निर्भर करेगा।
AI कंपनी OpenAI ने अपनी लीडरशिप टीम में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने डाली रेजिक (Dali Rajic) को नया चीफ रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) नियुक्त करने का ऐलान किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
AI कंपनी OpenAI ने अपनी लीडरशिप टीम में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने डाली रेजिक (Dali Rajic) को नया चीफ रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) नियुक्त करने का ऐलान किया है। वह OpenAI की ग्लोबल रेवेन्यू ऑर्गनाइजेशन की कमान संभालेंगे। वहीं, दिसंबर 2025 में CRO नियुक्त की गईं Denise Dresser अब कंपनी से विदा लेंगी।
Denise कुछ समय तक ट्रांजिशन पीरियड में कंपनी के साथ काम करेंगी और बिजनेस टीम को ग्राहकों से जुड़े काम में सहयोग देंगी। इसके बाद वह दूसरे अवसरों की तलाश करेंगी।
ग्लोबल स्तर पर रेवेन्यू बढ़ाने की जिम्मेदारी
डाली रेजिक की मुख्य जिम्मेदारी OpenAI के कारोबार को अगले चरण में तेजी से बढ़ाने के लिए मजबूत रेवेन्यू सिस्टम तैयार करना होगी। कंपनी के मुताबिक, डाली रेजिक को दुनियाभर में बड़े और तेजी से बढ़ते रेवेन्यू संगठनों को संभालने का लंबा अनुभव है।
वह डेटा और आंकड़ों पर आधारित तरीके से रेवेन्यू टीम चलाने के लिए जाने जाते हैं। बड़े कॉरपोरेट ग्राहकों के साथ-साथ टेक्निकल ग्राहकों को प्रोडक्ट बेचने का भी उन्हें अच्छा अनुभव है।
डाली रेजिक हाल ही में Wiz में प्रेजिडेंट और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के पद पर थे। Wiz का हाल ही में Google ने अधिग्रहण किया है। इससे पहले वह Zscaler में प्रेजिडेंट और COO रह चुके हैं। इसके अलावा AppDynamics में उन्होंने चीफ कस्टमर व रेवेन्यू ऑफिसर की जिम्मेदारी भी संभाली है।
Greg Brockman ने Denise के योगदान को सराहा
OpenAI के प्रेजिडेंट व को-फाउंडर ग्रेग ब्रॉकमैन ने Denise Dresser के काम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि AI अब धीरे-धीरे हर तरह के काम और बिजनेस के वर्कफ्लो का हिस्सा बन रहा है और दुनिया एक ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां कंप्यूटिंग और AI की भूमिका बेहद अहम होगी।
उन्होंने कहा कि Denise ने कंपनी के कारोबार के एक महत्वपूर्ण दौर में रेवेन्यू ऑर्गनाइजेशन को लीड किया और टीम को इस मुकाम तक पहुंचाने में काफी मेहनत की। अब AI को लोगों और बिजनेस के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने के लिए कंपनी अपने सिस्टम को बड़े स्तर पर विकसित कर रही है।
Brockman के मुताबिक, कंपनी अब तक मिली सीख को एक ऐसे सिस्टम में बदलना चाहती है, जिसे बड़े स्तर पर लगातार और बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। इसी काम में डाली रेजिक Rajic की भूमिका अहम होगी।
डाली रेजिक बोले- AI की पूरी क्षमता ग्राहकों तक पहुंचाना लक्ष्य
नए CRO डाली रेजिक ने कहा कि OpenAI के पास शानदार टेक्नोलॉजी और ऐसे प्रोडक्ट्स हैं, जिन्हें दुनिया भर में एक अरब से ज्यादा लोग पहले ही पसंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में AI को लेकर जबरदस्त मांग है और वह OpenAI की मौजूदा रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए टीम का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित हैं।
उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य कंपनी की रेवेन्यू ऑर्गनाइजेशन को लीड करते हुए ग्राहकों को AI की पूरी क्षमता का फायदा उठाने में मदद करना है।
OpenAI में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब कंपनी AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अपने बिजनेस और एंटरप्राइज कारोबार को तेजी से विस्तार देने पर फोकस कर रही है। डाली रेजिक Rajic के सामने अब इसी विस्तार को एक मजबूत और ग्लोबल रेवेन्यू सिस्टम में बदलने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
पैरामाउंट स्काईडांस कॉर्पोरेशन ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की प्रस्तावित डील को लेकर सिनेमाघरों को बड़ा भरोसा देने की तैयारी की है।
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पैरामाउंट स्काईडांस कॉर्पोरेशन ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की प्रस्तावित डील को लेकर सिनेमाघरों को बड़ा भरोसा देने की तैयारी की है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पैरामाउंट बड़े थिएटर ऑपरेटर्स के साथ तीन साल का समझौता करने की पेशकश कर रही है। इसके तहत कंपनी हर साल कम से कम 30 फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज करने का वादा करेगी।
प्रस्तावित समझौते AMC Entertainment Holdings और Cineworld Group की Regal Cinemas के साथ किए जाने हैं। इसके मुताबिक पैरामाउंट की फिल्में रिलीज के बाद कम से कम 45 दिनों तक सिर्फ सिनेमाघरों में उपलब्ध रहेंगी। इस दौरान उन्हें स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर नहीं लाया जाएगा। इसके अलावा फिल्मों को कम से कम 90 दिनों तक स्ट्रीमिंग सर्विस से दूर रखने की शर्त भी शामिल होगी।
वादे को कानूनी रूप देने की तैयारी
पैरामाउंट के सीईओ डेविड एलिसन पहले ही सार्वजनिक तौर पर सिनेमाघरों में फिल्मों की रिलीज जारी रखने का वादा कर चुके हैं। अब कंपनी इसी वादे को औपचारिक समझौते के जरिए लिखित रूप देने की तैयारी कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पैरामाउंट अपने वादे पूरे नहीं करती है तो प्रस्तावित समझौते में जुर्माने या अन्य पेनल्टी का प्रावधान भी हो सकता है।
$110 अरब की डील को लेकर विवाद
Paramount का यह कदम ऐसे समय आया है, जब Warner Bros. Discovery को करीब 110 अरब डॉलर में खरीदने की उसकी योजना को लेकर अमेरिका में कानूनी चुनौती चल रही है।
अमेरिका के 12 राज्यों ने इस डील को रोकने के लिए एंटीट्रस्ट केस दायर किया है। राज्यों का आरोप है कि इस विलय से David Ellison को फिल्म इंडस्ट्री पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है। उनका यह भी कहना है कि इससे फिल्मों का प्रोडक्शन कम हो सकता है, जिसका असर इंडस्ट्री में नौकरियों पर भी पड़ सकता है।
पैरामाउंट ने इस मामले में कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोन्टा (Rob Bonta) से बातचीत की मांग की है। इसी मामले की सुनवाई मार्च में होने वाली है।
AMC और Regal डील के समर्थन में
प्रस्तावित फिल्म रिलीज समझौते ऐसे समय में सामने आए हैं, जब फिल्म एग्जिबिशन इंडस्ट्री में पैरामाउंट-वार्नर ब्रदर्स की इस डील के समर्थन में लेख लिखा है। वहीं Regal के सीईओ Eduardo Acuna ने कहा है कि लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई से फिल्म बिजनेस को नुकसान हो सकता है।
हालांकि, थिएटर ऑपरेटर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था Cinema United अभी भी इस डील का विरोध कर रही है।
Ellison लगातार बना रहे हैं इंडस्ट्री में समर्थन
पैरामाउंट के सीईओ डेविड एलिसन पिछले कई महीनों से थिएटर चेन और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ बातचीत कर रहे हैं, ताकि वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के साथ प्रस्तावित डील के लिए समर्थन जुटाया जा सके।
डेविड एलिसन का लगातार कहना है कि Paramount और Warner Bros. के एक साथ आने से फिल्मों का प्रोडक्शन कम नहीं, बल्कि बढ़ सकता है। उन्होंने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखे एक लेख में भी कहा था कि फिल्मों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इस डील के केंद्र में है।
हॉलीवुड के एक हिस्से को भरोसा नहीं
हालांकि, हॉलीवुड के कुछ हिस्सों में पैरामाउंट के इस दावे को लेकर अभी भी संदेह है। यूनियनों, प्रोड्यूसर्स, टेक्निकल वर्कर्स और वकीलों ने सवाल उठाया है कि क्या दोनों कंपनियों के विलय के बाद भी फिल्म प्रोडक्शन का स्तर बना रहेगा।
इसके लिए वॉल्ट डिज्नी और 20th Century Fox की डील का उदाहरण भी दिया जा रहा है। उस समय प्रोडक्शन बनाए रखने के वादे किए गए थे, लेकिन बाद में दोनों कंपनियों के एक साथ आने के बाद फिल्मों का आउटपुट कम हो गया था।
करीब $50 अरब का कर्ज लेने की तैयारी
Warner Bros. Discovery को खरीदने के लिए पैरामाउंट को भारी कर्ज भी लेना पड़ेगा। कंपनी करीब 50 अरब डॉलर का कर्ज लेने की तैयारी में है। इतने बड़े कर्ज को संभालने के लिए कंपनी को बड़े स्तर पर कॉस्ट कटिंग और खर्च में बचत करनी पड़ सकती है। इसी वजह से फिल्म इंडस्ट्री में यह चिंता भी है कि क्या कंपनी लंबे समय तक हर साल 30 फिल्मों की रिलीज का वादा निभा पाएगी।
डील में पहले ही हो चुकी है देरी
पैरामाउंट व वार्नर की डील को पहले ही कई अड़चनों का सामना करना पड़ा है। एक तरफ अमेरिकी राज्यों का एंटीट्रस्ट केस है, वहीं राइटर्स गिल्ड ऑफ अमेरिका (WGA) की ओर से अलग मुकदमा भी किया गया है।
पैरामाउंट को पहले उम्मीद थी कि यह डील सितंबर के अंत तक पूरी हो जाएगी। लेकिन देरी के कारण Warner Bros. को 1 अरब डॉलर से ज्यादा की लेट फीस देनी पड़ सकती है।
डेविड एलिसन इस डील के लिए हॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। हॉलीवुड एजेंट Ari Emanuel भी सार्वजनिक तौर पर इस सौदे का समर्थन कर चुके हैं।
कुल मिलाकर, सिनेमाघरों के साथ 30 फिल्मों और 45 दिनों की एक्सक्लूसिव थिएट्रिकल रिलीज का प्रस्ताव पैरामाउंट के लिए सिर्फ बिजनेस डील नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री और थिएटर मालिकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश भी है कि वार्नर ब्रदर्स के साथ विलय के बाद भी बड़े पर्दे पर फिल्मों की सप्लाई कम नहीं होगी।
पाकिस्तान सरकार ने देश में काम कर रहे विदेशी मीडिया संगठनों और उनसे जुड़े पत्रकारों के लिए नए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पाकिस्तान सरकार ने देश में काम कर रहे विदेशी मीडिया संगठनों और उनसे जुड़े पत्रकारों के लिए नए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद विदेशी मीडिया के कामकाज को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है, लेकिन प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों ने इसे स्वतंत्र पत्रकारिता पर नई पाबंदी करार दिया है।
नई गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेशी मीडिया के लिए काम करने वाले पाकिस्तानी पत्रकार, फ्रीलांसर, स्ट्रिंगर, फिक्सर और अन्य सहयोगियों को सूचना मंत्रालय के एक्सटर्नल पब्लिसिटी विंग में पंजीकरण और मान्यता (Accreditation) करानी होगी। इसके अलावा, इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर किसी भी रिपोर्टिंग असाइनमेंट पर जाने से पहले सरकारी मंजूरी भी लेनी होगी।
हाल ही में सूचना मंत्रालय ने इस्लामाबाद में मौजूद विदेशी पत्रकारों को व्हाट्सएप संदेश भेजकर याद दिलाया था कि इन तीन शहरों से बाहर रिपोर्टिंग, शूटिंग या कंटेंट तैयार करने के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना अनिवार्य है। पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में काम कर रहे पत्रकारों से भी आवश्यक मंजूरी लेने के बाद ही रिपोर्टिंग करने को कहा गया।
हालांकि, सूचना मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा कि इन नियमों का उद्देश्य मीडिया की आजादी पर रोक लगाना नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, यह केवल पंजीकरण और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को स्पष्ट और जवाबदेह बनाने के लिए है तथा यह किसी भी पत्रकार की आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं है।
दूसरी ओर, ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP), कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) और पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (PFUJ) समेत कई पत्रकार संगठनों ने इन नियमों की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा, स्वतंत्र रिपोर्टिंग प्रभावित होगी और विदेशी मीडिया के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से निष्पक्ष खबरें जुटाना और मुश्किल हो जाएगा।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और हाल के दिनों में वहां की घटनाओं की विदेशी मीडिया कवरेज को लेकर सरकार और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के बीच मतभेद भी देखने को मिले हैं।
पैरामाउंट-स्काईडांस और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के प्रस्तावित विलय (Merger) को लेकर अब एक नया विवाद सामने आया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पैरामाउंट-स्काईडांस और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के प्रस्तावित विलय (Merger) को लेकर अब एक नया विवाद सामने आया है। इस बार मामला इतिहास से जुड़े दुर्लभ टीवी न्यूज आर्काइव तक पहुंच का है। डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले प्रड्यूसर्स का कहना है कि यदि यह डील मंजूर हो जाती है, तो दुनिया के दो सबसे बड़े टीवी न्यूज आर्काइव एक ही कंपनी के नियंत्रण में आ जाएंगे। इससे ऐतिहासिक फुटेज तक पहुंच सीमित होने का खतरा पैदा हो सकता है।
'आर्काइवल प्रड्यूसर्स अलायंस' (Archival Producers Alliance), जो अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के 650 से अधिक आर्काइव विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करता है, ने ब्रिटेन की संस्कृति मंत्री लीजा नैंडी से इस प्रस्तावित विलय की औपचारिक जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर सरकार इस डील पर ऐसी शर्तें भी लगाए, जिससे ऐतिहासिक न्यूज फुटेज तक सभी की पहुंच बनी रहे।
दरअसल, इस विलय के बाद CNN और CBS News के विशाल न्यूज आर्काइव एक ही कंपनी के पास आ जाएंगे। CNN के पास पिछले 45 वर्षों की वैश्विक खबरों से जुड़ी 40 लाख से अधिक वीडियो और अन्य सामग्री मौजूद है। वहीं, CBS News के पास करीब 85 वर्षों का ब्रॉडकास्ट फुटेज है, जिसमें कई ऐसे वीडियो भी शामिल हैं जो कभी प्रसारित नहीं हुए, साथ ही बड़ी मात्रा में बी-रोल (B-roll) फुटेज भी मौजूद है। दोनों को मिलाकर यह दुनिया के सबसे बड़े निजी टीवी न्यूज आर्काइव में शामिल होंगे।
डॉक्यूमेंट्री प्रड्यूसर्स का कहना है कि युद्ध, चुनाव, नागरिक अधिकार आंदोलनों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं जैसे विषयों पर फिल्में बनाने के लिए वे अक्सर इन आर्काइव से लाइसेंस लेकर फुटेज का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है कि अगर इन दोनों आर्काइव का नियंत्रण एक ही कंपनी के हाथ में चला गया, तो वही तय करेगी कि किसे ऐतिहासिक फुटेज मिलेगी और किसे नहीं। ऐसे में कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी फिल्मों का निर्माण प्रभावित हो सकता है, क्योंकि इन फुटेज के विकल्प बहुत कम हैं।
यह चिंता ऐसे समय सामने आई है, जब ब्रिटेन सरकार पहले ही इस प्रस्तावित डील के मीडिया क्षेत्र पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठा चुकी है। जून में सरकार ने दोनों कंपनियों को भेजे गए पत्र में कहा था कि इस विलय के बाद पहली बार CNN और CBS News के आर्काइव एक ही मालिक के नियंत्रण में आ जाएंगे। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समाचार, बच्चों के टीवी कार्यक्रमों और स्ट्रीमिंग सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का भी उल्लेख किया था।
आर्काइवल प्रड्यूसर्स अलायंस ने यह भी दावा किया कि पहले भी कई बार फिल्म प्रड्यूसर्स को कुछ ऐतिहासिक फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई, क्योंकि आशंका थी कि उनका इस्तेमाल सैन्य अभियानों या सार्वजनिक हस्तियों को अलग नजरिए से दिखाने के लिए किया जा सकता है। संगठन का कहना है कि यदि मीडिया क्षेत्र में इस तरह का एकीकरण बढ़ता है, तो भविष्य में इस तरह की पाबंदियां और बढ़ सकती हैं। इससे उन डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के निर्माण पर असर पड़ेगा, जो दुर्लभ और ऐतिहासिक न्यूज फुटेज पर आधारित होती हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पैरामाउंट के एक प्रवक्ता ने डॉक्यूमेंट्री प्रड्यूसर्स की इस मांग पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
उधर, ब्रिटेन सरकार Enterprise Act 2002 के तहत इस प्रस्तावित विलय की शुरुआती समीक्षा कर रही है, जिसके 7 अगस्त तक पूरी होने की उम्मीद है। फिलहाल नियामक संस्थाएं प्रतिस्पर्धा (Competition) और मीडिया विविधता (Media Plurality) से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं। वहीं, डॉक्यूमेंट्री प्रड्यूसर्स का कहना है कि इस डील के व्यावसायिक प्रभावों के साथ-साथ ऐतिहासिक न्यूज आर्काइव तक खुली और निष्पक्ष पहुंच बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
Paramount Skydance और Warner Bros Discovery के बीच प्रस्तावित 110 अरब डॉलर के मर्जर (विलय) को फिलहाल जून 2027 तक के लिए टाल दिया गया है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Paramount Skydance और Warner Bros Discovery के बीच प्रस्तावित 110 अरब डॉलर के मर्जर (विलय) को फिलहाल जून 2027 तक के लिए टाल दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की एक अदालत में इस सौदे के खिलाफ चल रही कानूनी चुनौती के चलते दोनों कंपनियों ने आपसी सहमति से इस प्रक्रिया को फिलहाल रोकने का फैसला किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मर्जर के खिलाफ अमेरिका के 12 राज्यों और Writers Guild of America (WGA) ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि अगर यह सौदा पूरा होता है तो मीडिया इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा कम हो जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को कम विकल्प मिलेंगे और मनोरंजन सेवाओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हाल ही में यूरोपीय नियामकों (European Regulators) ने कुछ शर्तों के साथ इस मर्जर को मंजूरी दे दी थी। मंजूरी की शर्तों के तहत Paramount को यूरोप में Universal Pictures के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही फिल्म वितरण (Distribution) व्यवस्था खत्म करनी होगी।
मर्जर पर रोक लगने के बाद इस मामले से जुड़े आपातकालीन न्यायिक (Emergency Court) मामले भी फिलहाल वापस ले लिए गए हैं।
हालांकि, कानूनी अड़चनों के बावजूद Paramount Skydance और Warner Bros Discovery का मानना है कि यह मर्जर भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। कंपनियों का कहना है कि इस सौदे से वे वैश्विक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स और बड़ी टेक कंपनियों के साथ बेहतर तरीके से मुकाबला कर सकेंगी, जो आज मनोरंजन उद्योग में तेजी से अपना दबदबा बढ़ा रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Paramount ने इस समझौते को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा है कि अब मामले की पूरी सुनवाई (Full Trial) का रास्ता साफ हो गया है। कंपनी को भरोसा है कि अदालत में पेश किए जाने वाले सबूत यह साबित करेंगे कि यह मर्जर प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स—तीनों के हित में है।
कंपनी का यह भी कहना है कि मामले का अंतिम समाधान निकालने का सबसे तेज रास्ता अदालत में पूरी सुनवाई ही है।
गौरतलब है कि अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने इस मर्जर को जून में मंजूरी दे दी थी। लेकिन राज्यों और राइटर्स गिल्ड की कानूनी चुनौती के चलते अब इस बहुचर्चित सौदे पर अंतिम फैसला आने में अभी समय लगेगा।
दुनिया की दिग्गज एंटरटेनमेंट कंपनी Disney की हालिया छंटनी का असर उसके स्पोर्ट्स नेटवर्क ESPN पर भी पड़ा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की दिग्गज एंटरटेनमेंट कंपनी Disney की हालिया छंटनी का असर उसके स्पोर्ट्स नेटवर्क ESPN पर भी पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने एडिटोरियल और ऑन-एयर दोनों तरह की नौकरियों में कटौती की है।
नौकरी गंवाने वालों में SportsCenter के लंबे समय से जुड़े एंकर और Baseball Tonight के होस्ट कार्ल रावेच (Karl Ravech) भी शामिल हैं, जो 1993 से ESPN के साथ काम कर रहे थे। इसके अलावा पूर्व NFL खिलाड़ी और फुटबॉल विश्लेषक रायन क्लार्क (Ryan Clark) भी कंपनी छोड़ रहे हैं। वह पिछले दस साल से अधिक समय से ESPN से जुड़े हुए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स केअनुसार, ESPN में सबसे ज्यादा असर पर्दे के पीछे काम करने वाले एम्प्लॉयीज (Behind-the-scenes Staff) पर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह छंटनी मुख्य रूप से इस साल NFL Network के अधिग्रहण के बाद हुए पुनर्गठन से जुड़ी है।
ESPN के चेयरमैन जिमी पिटारो (Jimmy Pitaro) ने एम्प्लॉयीज को भेजे गए एक संदेश में कहा कि पिछले कुछ महीनों में NFL Network की संपत्तियों को ESPN में सफलतापूर्वक शामिल करने की दिशा में काफी प्रगति हुई है। इस दौरान कंपनी ने अपनी टीमों, संसाधनों और संगठनात्मक ढांचे की विस्तार से समीक्षा की, ताकि भविष्य के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार की जा सके।
उन्होंने कहा कि इसी प्रक्रिया के चलते कंपनी को कुछ कठिन फैसले लेने पड़े और कई पदों पर असर पड़ा है। पिटारो ने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रभावित एम्प्लॉयीज के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाएगा और इस बदलाव के दौरान उन्हें हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि हालांकि अधिकांश छंटनी NFL Network के एकीकरण से जुड़ी है, लेकिन कंपनी के अन्य विभागों में भी कुछ एम्प्लॉयीज की नौकरियां प्रभावित हुई हैं।
दरअसल, Disney ने इस साल की शुरुआत से ही अपने कारोबार का पुनर्गठन शुरू कर दिया था। जनवरी में कंपनी ने अपने सभी मार्केटिंग विभागों को चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) असद अयाज के नेतृत्व में एकीकृत किया था। उस समय भी कई एम्प्लॉयीज की छंटनी हुई थी।
वहीं, Pixar में भी एम्प्लॉयीज की नौकरी गई है। खास बात यह है कि यह छंटनी ऐसे समय हुई है, जब स्टूडियो के लिए 2026 बॉक्स ऑफिस के लिहाज से काफी सफल रहा। 'Hoppers' और 'Toy Story 5' जैसी फिल्मों की बदौलत Pixar की फिल्मों ने दुनियाभर में करीब 1.4 अरब डॉलर की टिकट बिक्री दर्ज की।
इसके बावजूद Disney लागत कम करने और अपने नए कारोबारी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए एम्प्लॉयीज की संख्या घटाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
यूरोपीय संघ (EU) ने टेक दिग्गज Google पर बड़ा शिकंजा कसते हुए उस पर 890 मिलियन यूरो (करीब 1 अरब डॉलर) का जुर्माना लगाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यूरोपीय यूनियन (EU) ने टेक दिग्गज Google पर बड़ा शिकंजा कसते हुए उस पर 890 मिलियन यूरो (करीब 1 अरब डॉलर) का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई डिजिटल मार्केट्स एक्ट (Digital Markets Act-DMA) के तहत की गई है। इसी के साथ Google इस नए कानून के तहत जुर्माना झेलने वाली पहली बड़ी टेक कंपनियों में शामिल हो गई है।
यूरोपीय कमिशन (European Commission) ने Google पर दो अलग-अलग मामलों में जुर्माना लगाया है। यूरोपीय कमिशन का आरोप है कि कंपनी ने अपने सर्च इंजन और Play Store के जरिए प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन किया।
सर्च रिजल्ट में अपने ही प्रोडक्ट्स को दिया फायदा
कुल जुर्माने में से 460 मिलियन यूरो Google के सर्च बिजनेस से जुड़ा है। यूरोपीय कमिशन का कहना है कि Google ने अपने Shopping, Hotels, Travel और Sports जैसे प्रोडक्ट्स और सेवाओं को सर्च रिजल्ट में प्राथमिकता दी, जबकि प्रतिस्पर्धी कंपनियों की सेवाओं को कम महत्व दिया गया।
यूरोपीय कमिशन के मुताबिक, इस तरह का व्यवहार निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के खिलाफ है।
Play Store को लेकर भी लगा जुर्माना
दूसरे मामले में Google पर 430 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया गया। यूरोपीय कमिशन का आरोप है कि Google ने ऐप डेवलपर्स को यह खुलकर बताने की अनुमति नहीं दी कि यूजर्स Play Store के बाहर दूसरी वेबसाइटों या ऐप स्टोर्स से कम कीमत पर सेवाएं या ऐप खरीद सकते हैं।
यूरोपीय कमिशन का मानना है कि इससे ऐप डेवलपर्स और उपभोक्ताओं, दोनों के विकल्प सीमित हुए।
60 दिन में नियम मानने का आदेश
यूरोपीय कमिशन ने Google को निर्देश दिया है कि वह 60 दिनों के भीतर अपने सिस्टम में जरूरी बदलाव करे और DMA के नियमों का पालन सुनिश्चित करे। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है तो उस पर आगे भी अतिरिक्त आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
Google ने फैसले का किया विरोध
Google ने इस फैसले पर असहमति जताई है और संकेत दिए हैं कि वह इसे अदालत में चुनौती दे सकती है।
Google के ग्लोबल अफेयर्स के प्रेजिडेंट केंट वॉकर ने कहा कि यूरोपीय संघ की शर्तें लागू होने से कंपनी को अपने कुछ लोकप्रिय फीचर्स हटाने पड़ सकते हैं। उनका दावा है कि इससे Google Search की रियल-टाइम क्षमताएं प्रभावित होंगी और Google Play की सुरक्षा व्यवस्था भी कमजोर हो सकती है।
कंपनी का कहना है कि यह फैसला यूरोप के उपभोक्ताओं और कारोबारों के हित में नहीं है।
EU बोला- सभी को मिलना चाहिए बराबर मौका
यूरोपीय कमिशन की कार्यकारी उपाध्यक्ष टेरेसा रिबेरा ने कहा कि डिजिटल बाजार में सफलता किसी कंपनी की गुणवत्ता के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि इस आधार पर कि वह किसी बड़े सर्च इंजन की मालिक है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को हमेशा यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनके पास खरीदारी के अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं, चाहे वे Google के प्लेटफॉर्म के बाहर ही क्यों न हों।
Google पर पहले भी लग चुके हैं भारी जुर्माने
यह Google के खिलाफ यूरोपीय संघ की पहली कार्रवाई नहीं है। पिछले करीब 20 वर्षों में EU, Google पर 10 अरब यूरो से अधिक का जुर्माना लगा चुका है। नया फैसला यह संकेत देता है कि यूरोपीय संघ Digital Markets Act को सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर पूरे यूरोप में सर्च इंजन और ऐप स्टोर के काम करने के तरीके पर पड़ सकता है। इससे प्रतिस्पर्धी कंपनियों और ऐप डेवलपर्स को ज्यादा अवसर मिल सकते हैं, जबकि Google को अपने कारोबार के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है।
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google में एक बार फिर कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google में एक बार फिर कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कंपनी के 4,500 से अधिक कर्मचारियों ने एक याचिका (पिटीशन) पर हस्ताक्षर कर प्रबंधन से मांग की है कि भविष्य में अगर छंटनी होती है तो कर्मचारियों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
द जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान के तहत कर्मचारियों ने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित माउंटेन व्यू मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के CEO सुंदर पिचाई और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को यह याचिका सौंपी। इस दौरान कर्मचारियों ने ऐसे पोस्टर भी उठाए जिनमें नौकरी की सुरक्षा बढ़ाने और छंटनी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की गई।
छंटनी पर पूरी रोक नहीं, बल्कि स्पष्ट नियमों की मांग
कर्मचारियों ने भविष्य में छंटनी पूरी तरह रोकने की मांग नहीं की है। उनका कहना है कि अगर कर्मचारियों की संख्या कम करनी ही पड़े, तो उसके लिए पहले से तय और पारदर्शी नियम होने चाहिए।
याचिका में मांग की गई है कि छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को कम से कम वही सेवरेंस पैकेज (मुआवजा) मिले, जैसा कंपनी ने जनवरी 2023 में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी के दौरान दिया था।
इसके अलावा कर्मचारियों ने सुझाव दिया है कि किसी भी अनिवार्य छंटनी से पहले कंपनी स्वैच्छिक निकास (Voluntary Exit) का विकल्प दे, ताकि इच्छुक कर्मचारी पहले खुद आगे आ सकें।
परफॉर्मेंस रेटिंग सिस्टम में बदलाव की भी मांग
कर्मचारियों ने Google के GRAD Performance Evaluation System पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों की रेटिंग तयशुदा कोटे के आधार पर नहीं, बल्कि उनके वास्तविक काम और प्रदर्शन के आधार पर होनी चाहिए।
सेवरेंस भुगतान का तरीका बदलने की मांग
याचिका में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों को एकमुश्त सेवरेंस राशि देने के बजाय उन्हें कुछ समय तक कंपनी के पेरोल पर बने रहने का विकल्प दिया जाए। इससे उन्हें कंपनी की स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं मिलती रहेंगी और खासकर अमेरिका में वर्क वीजा पर काम कर रहे कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
AI में निवेश के बीच जारी है छंटनी
गौरतलब है कि Google ने 2023 में करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसके बाद भी Google Cloud समेत कई विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम की गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर लगातार कर्मचारियों की छंटनी हो रही है। इससे कर्मचारियों के बीच भविष्य को लेकर असमंजस बढ़ रहा है।
Alphabet Workers Union का मिला समर्थन
इस अभियान को Alphabet Workers Union का भी समर्थन मिला है। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है और ऐसे समय में मजबूत सुरक्षा उपाय जरूरी हैं, ताकि संगठन में बदलाव के दौरान कर्मचारियों को स्थिरता मिल सके।
यूनियन के मुताबिक, यह याचिका कंपनी प्रबंधन को सौंप दी गई है और Google नेतृत्व को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। खबर लिखे जाने तक कंपनी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।