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पिच सीएमओ समिट 2016 : ब्रैंड मैनेजर्स की जगह कंटेंट मैनेजर्स का है जमाना
पिच सीएमओ समिट 2016 : ब्रैंड मैनेजर्स की जगह कंटेंट मैनेजर्स का है जमाना
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप (exchange4media Group) की वार्षिक पिच सीएमओ समिट (annual Pitch CMO Summit) चार मार्च को मुंबई के ग्रैंड हयात होटल में हुई। कार्यक्रम में आयोजक की भूमिका दैनिक भास्कर ने जबकि प्रायोजक की भूमिका कलर्स ने निभाई।
एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप की मार्केटिंग मैगजीन पिच (Pitch) द्वारा इस समिट का
समाचार4मीडिया ब्यूरो
10 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप (exchange4media Group) की वार्षिक पिच सीएमओ समिट (annual Pitch CMO Summit) चार मार्च को मुंबई के ग्रैंड हयात होटल में हुई। कार्यक्रम में आयोजक की भूमिका दैनिक भास्कर ने जबकि प्रायोजक की भूमिका कलर्स ने निभाई।
एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप की मार्केटिंग मैगजीन पिच (Pitch) द्वारा इस समिट का आयोजन कराया जाता है। इसमें मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़े दिग्गज शामिल होते हैं। हर साल इस समिट का एजेंडा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मार्केटिंग पर रहता है और इस बात पर भी चर्चा की जाती है कि इस बदलते माहौल में भारतीय बाजार में बेस्ट मार्केटिंग किस प्रकार की जा सकती है।
मुंबई में हुए कार्यक्रम में इंडस्ट्री के दिग्गजों ने बदलते माहौल में मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। इस कार्यक्रम में इंडस्ट्री के कुछ ऐसे टॉप सीएमओ भी शामिल थे, जिनका पिछले साल इंडस्ट्री में उल्लेखनीय योगदान रहा है।
आईटीसी (ITC) के चीफ एग्जिक्यूटिव (पर्सनल केयर) संदीप कौल ने 'Changing Face of Brand Experience' विषय पर अपने विचार रखे। इसमें उन्होंने ब्रैंड मैनेजर के आगे आ रहीं नई जिम्मेदारियों का जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने ब्रैंड के बारे में कुछ मानदंडों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि मीडिया का प्रभाव जारी है, टॉप एंड (top-end) उपभोक्ता विभिन्न विज्ञापनों को नजरअंदाज कर वापसी की लड़ाई लड़़ रहे हैं और उनका विखंडन हो रहा है।
कौल ने कहा, ‘व्यक्ति के पास हर समय ज्ञान और आंकड़ों को जानने का अवसर रहता है लेकिन इनमें से बहुत सी चीजों को हम नहीं समझ पाते हैं।’ उन्होंने कुछ उदाहरणों के जरिये देश की क्षमता और चुनौतियों के बारे में भी प्रकाश डाला। इसमें उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की आबादी ब्राजील जितनी है और यहां की ग्रॉस स्टेट डॉमेस्टिक प्रॉडक्ट (GSDP) नेपाल की है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनसंख्या जापान के बराबर है और यहां की जीएसडीपी वियतनाम जितनी है। कौल ने कहा, ‘प्रत्येक व्यक्ति के पास कुछ न कुछ खास है लेकिन किसी भी राज्य के पास सबकुछ नहीं है। यह चुनौती न सिर्फ मार्केटर्स के लिए है बल्कि समाज के रूप में लोगों के लिए भी है।’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि हम करीब आठ प्रतिशत की अपरस्फीति (deflation) भी देख चुके हैं, जिसका मतलब है कि ब्रैंड को ज्यादा कीमत पर बेचना होगा।
डिस्काउंट अर्थात छूट के बारे में उन्होंने कहा, ‘सिर्फ डिस्काउंट ही देश के लिए और यहां की जनता के लिए इसका जवाब नहीं है। यदि हम अपने देश में ज्यादा उत्पादन करते हैं तो हमें इसे देश में ज्यादा बेचने की भी जरूरत है।’ इस अवसर पर उन्होंने आईटीसी (ITC) में इस्तेमाल हो रहे एनसीवी समीकरण (NCV equation) का उदाहरण भी दिया।
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से सादगी के साथ कुछ नया करने को कहा। कौल के अनुसार, किसी भी प्रॉडक्ट में तीन गुण जरूर होने चाहिए। यह प्रासंगिक होना चाहिए, खास होना चाहिए और इसमें कुछ ऐसा होना चाहिए जिसके बारे में लोग बात करें।
उन्होंने कहा, ‘हमें अपने ढांचे और संबंधों को एक बार फिर से देखने की जरूरत है। हमारी सभी लेयर्स हमें नीचे की ओर ले जा रही हैं जहां पर निर्णय लेने के लिए कई लोग मौजूद हैं। ईको सिस्टम को तैयार करने के लिए ब्रैंड को एजेंसियों के साथ की गई अपनी पार्टनरशिप पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि प्रतिभा यहीं पनपती है। बेहतर टीम ही ब्रैंड को बेहतर बना सकती है।’
डिजिटल और कंटेंट के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘डिजिटल के द्वारा ब्रैंड के लिए आप विभिन्न लोगों से विभिन्न भाषाओं में बात कर सकते हैं। अब समय ब्रैंड मैनेजर की जगह कंटेंट मैनेजर बनने का है। बिना कंटेंट के हम ज्यादा समय तक नहीं चल सकते हैं। ब्रैंड मैनेजर की भूमिका भी काफी बड़ी है और आज के समय में उसे ज्यादा से ज्यादा बिंदुओं पर ध्यान देना है।’
कौल के प्रजेंटेशन के बाद मेडिसन वर्ल्ड (Madison World) के ग्रुप सीईओ विक्रम सखूजा के साथ सवाल-जवाब (Q&A) का संक्षिप्त दौर भी चला।
सखूजा ने कौल से पूछा कि कैसे कोई ब्रैंड फंक्शनल से भावनात्मक लाभ उठा सकता है और कैसे कोई व्यक्ति सच्चाई (authenticity) के साथ इसे प्राप्त कर सकता है। इस पर कौल ने जवाब दिया कि यदि ब्रैंड सच्चा (genuine) नहीं होगा तो वह लोगों के बारे में ध्यान नहीं देगा। उन्होंने कहा कि उद्देश्यों को सीमित रखना भी बेहतर था।
कौल ने कहा कि किसी भी योजना में थोड़ा-थोड़ा दोनों को शामिल करना होगा। इसमें मीडिया का सहयोग लिया जा सकता है और उसे विस्तार दिया जा सकता है।
मल्टीमीडिया और इंटीग्रेटेड प्लान के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सखूजा ने कहा कि हालांकि प्रत्येक व्यक्ति इनके बारे में बात करता है, लेकिन अधिकांश टीवी की ओर रुख करते है। वहीं कौल ने माना कि यह एक विरोधाभास था। उनके अनुसार, ब्रैंड टेलिविजन की तरफ मुड़ जाते हैं और उसमें निवेश शुरू कर देते हैं। डिजिटल में जब एक पाइंट पर पहुंचने के बाद उन्हें लगता है कि उनके द्वारा किए गए वादों की डिजिटल मीडियम पर पड़ताल हो रही है और वह सही नहीं हैं तो वे वापस टीवी पर आ जाते हैं। यही वह माध्यम है जिसके बारे में वे कुछ न कुछ तो समझ सकते हैं। यही कारण है कि साल के अंत तक बजट का अधिकांश हिस्सा टीवी की ओर आ जाता है।
क्या ब्रैंड के पास कंज्यूमर से विभिन्न तरह से संपर्क करने की क्षमता होती है, के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘यह बहुत कुछ तकनीक पर निर्भर है। हालांकि हमारी इच्छा बहुत होती है लेकिन क्या हम सार्थक बातचीत कर सकते हैं।’
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ब्रैंड को अपने आप पर थोड़ा विश्वास बनाए रखने की जरूरत है और उसे रिस्क भी उठाना होगा। हमें चट्टान पर चढ़ना सीखना होगा। हो सकता है कि हर बार हमें चट्टान की ऊंचाई का पता न लगे।
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