धड़ाधड़ रीजनल चैनल खुलने के पीछे ये है ‘असली वजह’: वासिंद्र मिश्र

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 16 फरवरी को नोएडा के...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 26 February, 2019
Last Modified:
Tuesday, 26 February, 2019
Vasindra Mishra

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 16 फरवरी को दिए गए। इनबा के 11वां एडिशन के तहत नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में एक समारोह में ये अवॉर्ड्स दिए गए। कार्यक्रम से पहले आयोजित NewsNextConference के अंतगर्त कई पैनल डिस्कशन भी हुए, जिसके द्वारा लोगों को मीडिया के दिग्गजों के विचारों को सुनने का मौका मिला।

ऐसे ही एक पैनल का विषय ‘रीजनल मीडिया: खतरा, खबरें और कमाई’ रखा गया था, जिसमें मीडिया के दिग्गजों ने अपने विचार व्यक्त किए। समाचार4मीडिया डॉट कॉम के एग्जिक्यूटिव एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने बतौर सेशन चेयर इसे मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘नेटवर्क18’ (हिंदी नेटवर्क) के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री, सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क’ के ग्रुप एडिटर मनोज मनु, ‘जनतंत्र टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ वासिंद्र मिश्र, इंडिया न्यूज’ के चीफ एडिटर (मल्टीमीडिया) अजय शुक्ल, ‘पीटीसी नेटवर्क’ के मैनेजिंग डायरेक्टर-प्रेजिडेंट रबिंद्र नारायण और ‘बीबीसी गुजराती’ के एडिटर अंकुर जैन शामिल रहे।

पैनल डिस्कशन के दौरान अभिषेक मेहरोत्रा द्वारा रीजनल मीडिया पर खतरे के बारे में पूछे जाने पर वासिंद्र मिश्र का कहना था, ‘मुझे लगता है कि यदि आप खबर तक सीमित हैं, खबर को निष्पक्षता से दिखा रहे हैं और उसके पीछे आपका कोई स्वार्थ अथवा एजेंडा नहीं है तो किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है। खतरे की शुरुआत तभी होती है, जब आप खबर में अपना पर्सनल एजेंडा डालने की कोशिश करते हैं या किसी के कहने पर किसी के एजेंडा को अपने माध्यम से आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, तभी खतरा होता है। सबसे बड़ा खतरा पॉलिटिक्स की ओर है अथवा जो सरकारें बन रही हैं और बिगड़ रही हैं, उनसे है। आज सरकारी स्तर पर जीरो टॉलरेंस की स्थिति हो गई है।’

वासिंद्र मिश्र का कहना था, ‘जब हमने अपने करियर की शुरुआत की थी, तो उस समय विचारधारा की पत्रकारिता होती थी और वैचारिक प्रतिबद्धता की बात कही जाती थी, लेकिन उस समय टॉलरेंस भी था। यानी जो लोग आपकी विचारधारा को फॉलो नहीं करते थे, उनको भी नौकरी अथवा अपना कारोबार करने का पूरा अधिकार होता था। उस समय सत्ता में बैठी हुई पार्टी अपनी विचारधारा के विरोधी लोगों को भी बिजनेस करने अथवा अपना काम करने की छूट देती थी। धीरे-धीरे कुछ वर्षों से यह देखने को मिल रहा है कि अगर आप एक विचारधारा विशेष को फॉलो कर रहे हैं, तब तो आपको बिजनेस करने का अधिकार है, नौकरी करने का भी अधिकार है अपना एजेंडा भी आगे बढ़ाने का अधिकार है। आपको संस्थान से भी सपोर्ट मिलेगा और राजनीतिक संगठनों का भी सपोर्ट मिलेगा। अगर आप थोड़ा भी क्रिटिकल होने की कोशिश करेंगे या थोड़ा आब्जेक्टिव होने की कोशिश करेंगे, तो आपके खिलाफ इतनी तरह की कार्रवाई शुरू कर दी जाएंगी कि जो स्थानीय गुंडे हैं, वो तो बाद में आएंगे, जो ‘सरकारी गुंडे’ हैं, वही आकर जीना हराम कर देते हैं और आप एक छोटा बिजनेस भी नहीं कर पाते हैं, मीडिया बिजनेस चलाना तो बहुत बड़ी बात है।’

वासिंद्र मिश्र का यह भी कहना था, ‘हैरेसमेंट का तरीका यह नहीं है कि कोई सड़क पर जाते समय आपकी गाड़ी रोक दे अथवा आपकी पिटाई करवा दे। बल्कि हैरेसमेंट का तरीका ये है कि जब आप लाइसेंस के लिए अप्लाई करते हैं तो आपको लाइसेंस नहीं मिलेगा। अगर लाइसेंस मिल भी गया तो आपको न्यूजप्रिंट का कोटा अलॉट नहीं होगा। यदि न्यूजप्रिंट का कोटा अलॉट हो गया तो आपके अखबार/चैनल का इम्पैनलमेंट नहीं होगा। इम्पैनलमेंट के बिना आपको किसी भी तरह का सरकारी अथवा कॉरपोरेट विज्ञापन नहीं मिलेगा। तो जब आपको किसी भी तरह की सरकारी मदद अथवा सरकारी सुविधा नहीं मिलेगी और आपको एक लीगल तरीके से बिजनेस करने की इजाजत नहीं मिलेगी, तो आप सबसे बड़े पीड़ित हो जाते हैं।’

यह पूछे जाने पर कि आज के समय में नेशनल मीडिया अपने आप को रीजनल मीडिया के रूप में विस्तार दे रहा है। जितने बड़े मीडिया ग्रुप हैं, सब अपने रीजनल चैनल लेकर आ रहे हैं। एक तरफ तो सब कह रहे हैं कि इसमें कमाई नहीं है, इसके बावजूद रीजनल मीडिया का इतनी तेजी से विस्तार क्यों हो रहा है? आखिर जब कमाई नहीं है और खतरा भी ज्यादा है तो ऐसा क्या है कि सब रीजनल मीडिया की ओर भाग रहे हैं?

इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं इससे पहले दो मल्टीचैनल ऑर्गनाइजेशन में काम कर चुका हूं, जिनके 16 चैनल और 20 चैनल हुआ करते थे। उस समय जब हम रेवेन्यू का मंथली अथवा क्वार्टरली रिव्यू किया करते थे, तो वो चैनल घाटे में चलते दिखाई देते थे, लेकिन यदि हम कुल रेवेन्यू यानी EBIDTA (earnings before interest, tax, depreciation and amortization) देखते थे तो वो कई क्षेत्रीय भाषा के चैनल फायदे में चलते दिखाई देते थे।। ऐसे में मैंने अपने सेल्स हेड से जब पूछा कि यहां मंथली तो घाटा दिखाते हो, जबकि क्वार्टरली दिखाते हो कि इतने का प्रॉफिट है, जबकि हिंदी रीजनल चैनल सभी घाटे में दिखाई देते हैं, आखिर इसका क्या कारण है? इस पर उनका कहना था कि हमें कनाडा से रेवेन्यू आता है। इसलिए इस तरह के चैनल वहां की सरकार कि चिंता नहीं करते हैं, क्योंकि इनको बाहर से बहुत रेवेन्यू आता है। लेकिन, यही अगर हिंदी रीजनल चैनल में बिजनेस करेंगे तो इन्हें स्थानीय नेताओं की ‘चमचागिरी’ करनी होगी। इसके लिए इन चैनलों को वहां के लोकल केबल आपरेटर, जिसका वहां पर एकछत्र राज्य है, उसकी भी हां में हां मिलानी होगी, नहीं तो वो उनका चैनल नहीं लगने देगा।’

वासिंद्र मिश्र ने कहा, ‘एक नेशनल चैनल पंजाब में अपना पंजाबी चैनल लॉन्च करना चाहता था। वह बहुत बड़ा मीडिया हाउस है। उन्होंने सबकुछ सेटअप लगा लिया। यानी स्टूडियो बना लिया और नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी हो गई, लेकिन वहां का केबल ऑपरेटर तैयार नहीं हुआ, क्योंकि वहां की सरकार उस नेशनल चैनल से नाराज थी और वह केबल ऑपरेटर उस समय के सत्तारूढ़ दल के साथ जुड़ा हुआ था। ऐसे में वह नेशनल चैनल वहां पर अपना रीजनल चैनल लॉन्च नहीं कर पाया। उसे अपना स्टूडियो बंद कर वापस दिल्ली लौटकर आना पड़ा। तो रीजनल चैनलों की ये हालत है। चाहे पंजाब हो, तमिलनाडु हो, कर्नाटक हो या हैदराबाद हो, चैनलों को वहां की सरकार की ‘दया’ पर निर्भर रहना पड़ता है। इसमें पंजाबी चैनल अपवाद हैं, क्योंकि पंजाबी का रेवेन्यू मॉडल अलग है।’ वासिंद्र मिश्र  ने कहा, ‘जो लोग मल्टीलैंग्वेज चैनल चलाते रहे हैं, उनको शायद पता होगा कि यदि आप पंजाबी चैनल चला रहे हैं तो आपको अपने देश अथवा राज्य से जितना रेवेन्यू मिलता है, उससे सौ गुना ज्यादा ओवरसीज बिजनेस से मिलता है। इस तरह के ट्रेंड को पंजाबी चैनल तो अफोर्ड कर सकते हैं, लेकिन अन्य नहीं।’

मीडिया में सोर्स ऑफ रेवेन्यू के बारे में वासिंद्र मिश्र का कहना था, ‘पहले इसमें पारंपरिक रूप से चार तरीके थे। जिनमें रिटेल एडवर्टाइजमेंट, कॉरपोरेट एडवर्टाइजमेंट, गवर्नमेंट एडवर्टाइजमेंट और चौथा इवेंट शामिल होता था। इसके अलावा पांचवां रेवेन्यू का सबसे बड़ा जरिया रियल एस्टेट था। ‘नोटबंदी’ और ‘जीएसटी’ जैसी नई व्यवस्था आने के बाद कॉरपोरेट विज्ञापन काफी प्रभावित हुए। इससे कॉरपोरेट विज्ञापनों का 50 प्रतिशत रेवेन्यू कम हो गया। ऐसे में रेवेन्यू के मामले में रियल एस्टेट बेकार हो गया। बिल्डर जब अपना पैसा नहीं निकाल पा रहा है तो ऐसे में वह बिजनेस क्या देगा। अब रिटेल ऐड और सरकारी ऐड की बात करें तो जीएसटी की वजह से रिटेल ऐड भी बंद हो गया तो ऐसे में कुल दारोमदार सरकारी बिजनेस पर है। सरकारों को भी ये बात पता है और वे यही चाहती भी थीं कि मीडिया उनके सामने घुटने टेककर रहे। उनके हिसाब से खबरे छापे। अगर खबर नहीं छपेगी तो वे विज्ञापन रोक देते हैं। यह आज से नहीं, बल्कि बहुत पुराना फंडा है। कुछ सरकारें सीधे ऐसा करती हैं, तो कुछ घुमा-फिराकर ऐसा करती हैं।’

वासिंद्र मिश्र के अनुसार, ‘आज की तारीख में चाहे नेशनल चैनल हो अथवा रीजनल चैनल हो, सभी की निर्भरता सरकारी बिजनेस पर है। फिर चाहे वो प्रिंट हो अथवा टेलिविजन। रही बात नेशनल चैनलों के रीजनल मीडिया की तरफ जाने की तो इस तरह उन्हें सरकारों के साथ ट्यूनिंग में आसानी होती है। इसके अलावा उन्हें डबल स्टैंडर्ड मेंटेन करने में भी सुविधा होती है। वो पीआर की जितनी भी स्टोरी होती हैं, उन्हें रीजनल में चलवा लेते हैं और नेशनल में चार लोग बैठकर स्टूडियो से दिन भर पाकिस्तान के खिलाफ ‘बम’ फेंकते रहते हैं। हालांकि ऐसे कई पत्रकारों ने कभी बॉर्डर भी नहीं देखा होगा, लेकिन स्टूडियो में बैठकर वो पूरे पाकिस्तान को ‘नेस्तनाबूद’ कर देते हैं और कहते हैं कि वे पेड न्यूज नहीं चलाते हैं। मेरा कहना है कि उन्हें पेड न्यूज चलाने की जरूरत क्या है। उनका रीजनल प्लेटफॉर्म है, जिस पर दिनभर वे यही चलाते हैं। इसलिए उनके लिए जरूरी है कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म चाहिए, जहां पर वे सरकार और राजनीतिक दलों को खुश करके पैसे भी लें और नेशनल लेवल पर ऐसा प्लेटफॉर्म चाहिए, जिससे वे अपना एजेंडा बैलेंस करते रहें।’

आप ये पूरी चर्चा नीचे विडियो पर क्लिक कर भी देख सकते हैं-

 

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जानें, पत्रकारों के लिए टोल फ्री करने की मांग पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की लगातार समीक्षा करने में लगे हुए हैं और अलग-अलग राज्यों में जाकर जमीनी हालात का जायजा ले रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 September, 2021
Last Modified:
Saturday, 18 September, 2021
Nitin Gadkari

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की लगातार समीक्षा करने में लगे हुए हैं और अलग-अलग राज्यों में जाकर जमीनी हालात का जायजा ले रहे हैं। इसी कड़ी में वह हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का दौरा कर चुके हैं और लगातार मीडिया के माध्यम से समीक्षा की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

इसी बीच गुरुवार को राजस्थान के दौसा में आयोजित नितिन गड़करी की प्रेस वार्ता के दौरान एक पत्रकार ने उनके एक ऐसा सवाल पूछा कि उसका जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। दरअसल, पत्रकार ने सड़कों को पत्रकारों के लिए टोल फ्री करने की मांग की तो नितिन गड़करी ने बड़े शालीन लहजे में न सिर्फ मना कर दिया बल्कि उसका कारण भी बताया।

गडकरी ने जवाब देते हुए कहा, ‘मैं फोकट क्लास का समर्थक नहीं हूं और ये धंधा अब बंद है।’ मंत्री ने साफ किया कि अच्छी सड़क चाहिए तो पैसा देना पड़ेगा।‘ आपको बता दें कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा में लगने वाला समय 24 घंटे से कम होकर करीब 12 घंटे रह जाएगा। एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की न्यूनतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। सड़क मंत्रालय इसे बढ़ाकर 120 किलोमीटर प्रति घंटा करने पर विचार कर रहा है।

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पत्रकारों के हित में तेलंगाना सरकार ने खोला योजनाओं का ‘पिटारा'

राज्य के वित्त मंत्री टी.हरीश राव ने कहा है कि पत्रकारों के लिए जो तेलगंना सरकार ने किया है, वैसा किसी और राज्य में नहीं हुआ है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 September, 2021
Last Modified:
Friday, 17 September, 2021
Media

पत्रकारों के लिए यह काफी अच्छी खबर है। दरअसल, तेलंगाना सरकार ने 42 करोड़ रुपये का पत्रकार कल्याण कोष (Journalist Welfare Fund) बनाया है। राज्य के वित्त मंत्री टी.हरीश राव ने यह घोषणा की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा है कि पत्रकारों के लिए जो तेलगंना सरकार ने किया है, वैसा किसी और राज्य में नहीं हुआ है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि कोविड-19 से प्रभावित हुए पत्रकारों को राज्य सरकार 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद देगी। इसके अलावा मृतक पत्रकार के परिवार को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि उनके बाद उनके परिवार का सही से पालन पोषण हो सके। ऐसे पत्रकारों के परिवारों को उनके बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति के साथ पेंशन भी प्रदान की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में एक योजना तैयार की जा रही है और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जल्द ही इस पर फैसला लेंगे। आदर्श पत्रकार आवासीय कॉलोनी बनाने का आश्वासन देते हुए हरीश राव ने यह भी कहा कि हुस्नाबाद प्रेस क्लब में प्रेस बैठक आयोजित करने के तहत मीटिंग हॉल बनाने के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत किए जाएंगे।

एमएलए वी. सतीश कुमार के साथ उन्होंने हुसैनाबाद मंडल के किशन नगर में 40 डबल बेडरूम हाउस के निर्माण का शिलान्यास किया। हरीश राव ने कहा कि अगले कुछ दिनों में लोगों की जमीन पर डबल बेडरूम हाउस बनाने का काम शुरू हो जाएगा। इस दिशा में योजना तैयार की जा रही है। वह चाहते हैं कि किसानों को मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहण का काम एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए।

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अशोक कुरियन और मनीष चोखानी के योगदान को Zee एंटरटेनमेंट ने सराहा, कही ये बात

कंपनी द्वारा ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ को दी गई सूचना के अनुसार दोनों डायरेक्टर्स ने निजी कारणों व अपने अन्य हितों के मद्देनजर इस्तीफा देने का फैसला किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 September, 2021
Last Modified:
Friday, 17 September, 2021
Zee

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) के निदेशक मंडल ने अपने पूर्व नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर्स अशोक कुरियन (Ashok Kurien) और मनीष चोखानी (Manish Chokhani) के खिलाफ कुछ प्रॉक्सी सलाहकार फर्मों द्वारा लगाए गए आरोपों की कड़ी निंदा की है।

‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ (BSE) को दी गई सूचना में कंपनी का कहना है कि दोनों डायरेक्टर्स ने निजी कारणों व अन्य हितों के मद्देनजर अपने पदों से इस्तीफा दिया है। चोखानी और कुरियन के मार्गदर्शन में बोर्ड के सभी सदस्यों के साथ शेयरधारकों का हित हमेशा कंपनी के लिए सर्वोपरि रहा है और वह गवर्नेंस और पारदर्शिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के उक्त नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर्स के योगदान की निंदा करने वाली बातें निराधार हैं और उद्योग की अपर्याप्त समझ से उत्पन्न होती हैं। कमेटी मेंबर्स और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा लिए गए निर्णयों को बिना किसी आधार के इन डायरेक्टर्स के खिलाफ गलत तरीके से परिभाषित किया गया है। कंपनी के प्रति योगदान के लिए अशोक कुरियन और मनीष चोखानी दोनों का ‘जी’ बहुत आभारी है। टीम के लिए उनका मार्गदर्शन हमेशा मूल्यवान रहा है, जिसने ‘जी’ को नई ऊंचाइयों को छूने और अपने सभी हितधारकों को साल दर साल अधिक से अधिक मूल्य प्रदान करने में सक्षम बनाया है। उनके निर्देशन में कंपनी ने शेयरधारकों के लिए अधिक पारदर्शिता लाने के तहत लगातार कई पहल की हैं।

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के चेयरमैन गोपालन का कहना है, ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड का बोर्ड सर्वसम्मति से उनकी सराहना करता है। बोर्ड ने अशोक कुरियन और मनीष चोखानी के कंपनी के साथ जुड़ने के दौरान उनके पेशेवर आचरण की सराहना की है।  कंपनी के बोर्ड में ऐसे सम्मानित सदस्यों का होना हमारा सौभाग्य रहा है और कंपनी के प्रति उनका योगदान काफी महत्वपूर्ण है। मीडिया इंडस्ट्री की गहरी समझ और अनुभव के द्वारा अशोक कुरियन ने कंपनी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इंडस्ट्री में उनकी 35 वर्षों की विशेषज्ञता ने ‘जी’ को एक अग्रणी एंटरटेनमेंट ब्रैंड और एक क्रिएटिव कंटेंट कंपनी के रूप में न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।’

गोपालन के अनुसार, ‘देश के सम्मानित वित्तीय विशेषज्ञों और निवेशकों में शुमार मनीष चोखानी के चतुर प्रबंधन कौशल के साथ-साथ उनकी विश्लेषणात्मक क्षमताओं का बोर्ड के लिए जबरदस्त मूल्य रहा है। चोखानी ने अपने शानदार प्रदर्शन के द्वारा उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करके सफलता की नई ऊंचाइयां प्राप्त करने के लिए लीडरशिप टीम का मार्गदर्शन किया है। पूरे ‘जी’ परिवार की ओर से मैं कुरियन और चोखानी को उनके मार्गदर्शन और समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं, और हम भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं देते हैं। बोर्ड के पुनर्गठन की प्रक्रिया में कुरियन और चोखानी ने अहम योगदान दिया है, जिससे प्रतिष्ठित इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के शामिल होने से यह और मजबूत हुआ है। पुनर्गठित बोर्ड में काफी प्रतिभाशाली और अनुभवी नाम शामिल हैं, जो कंपनी को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने में अपनी भूमिका निभाएंगे।’

कॉरपोरेट क्षेत्र के दो प्रतिष्ठित नाम कुरियन और चोखानी कई प्रमुख कंपनियों के सलाहकार रहे हैं। कंपनी का बोर्ड अपने सभी पूर्व और वर्तमान सदस्यों द्वारा निभाई गई भूमिका की दृढ़ता से सराहना करता है, कंपनी के निर्माण में और इसे ऊंचाइयों पर पहुंचाने में उनके अमूल्य समर्थन की सराहना करता है।

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इस बड़े पद पर Viacom18 से जुड़े अनिल जयराज

‘वायकॉम18’ को जॉइन करने से पहले अनिल जयराज करीब साढ़े छह साल से ‘स्टार स्पोर्ट्स’ (Star Sports) में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट (Ad Sales) के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 September, 2021
Last Modified:
Friday, 17 September, 2021
Anil Jayaraj

मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी ‘वायकॉम18’ (Viacom 18) ने अनिल जयराज को सीईओ (स्पोर्ट्स) के पद पर नियुक्त किया है। वह खेल संपत्तियों (sports properties) के अधिग्रहण (acquisition), प्रसारण (broadcasting) और मुद्रीकरण (broadcasting) में कंपनी का नेतृत्व करेंगे। ‘वायकॉम18’ को जॉइन करने से पहले अनिल जयराज करीब साढ़े छह साल से ‘स्टार स्पोर्ट्स’ (Star Sports) में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट (Ad Sales) के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

अनिल जयराज की नियुक्ति के बारे में ‘नेटवर्क18’ (Network18) के चेयरमैन आदिल जैनुलभाई का कहना है, ‘देश में एक प्रमुख मीडिया और एंटरटेनमेंट नेटवर्क के रूप में वायकॉम18 सभी प्लेटफार्म्स पर अपनी पेशकश कर रहा है। हमारा मानना है कि अपने 800 मिलियन से ज्यादा व्युअर्स को संपूर्ण मनोरंजन देने के हमारे वादे में स्पोर्ट्स भी एक महत्वपूर्ण श्रेणी है। अपने विशाल अनुभव के साथ अनिल हमारे नवीनतम स्पोर्ट्स वर्टिकल का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।’

वहीं, अनिल जयराज का कहना है, ‘भारत में खेल आयोजन केवल एक या दो खेलों में आगे बढ़े हैं। दर्शकों के बीच नए प्रतिस्पर्धी खेलों के प्रति रुझान बढ़ रहा है। मैं स्पोर्ट्स कैटेगरी में वायकॉम18 नेटवर्क को आगे बढ़ाने को लेकर उत्साहित हूं।’

बता दें कि जयराज के नेतृत्व में ‘स्टार स्पोर्ट्स’ का विज्ञापन राजस्व (ad revenue) वर्ष 2015 में प्रति वर्ष 1000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2021 में 3000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।‘स्टार’ से पहले अनिल जयराज ‘पिडिलाइट’ (Pidilite) में बतौर चीफ मार्केटिंग ऑफिसर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

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The Quint में इस बड़े पद से संजय पुगलिया ने दिया इस्तीफा

‘क्विंट’ से पहले संजय पुगलिया ‘सीएनबीसी आवाज’ में बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 September, 2021
Last Modified:
Friday, 17 September, 2021
Sanjay Pugalia

मीडिया इंडस्ट्री में जाना-पहचाना नाम संजय पुगलिया के बारे में बड़ी खबर है। खबर यह है कि संजय पुगलिया ने ‘क्विंट डिजिटल मीडिया‘ (Quint Digital Media Ltd) में प्रेजिडेंट के पद से इस्तीफा दे दिया है। ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ (BSE) को दी गई सूचना में कंपनी ने इस खबर की पुष्टि की है।  

‘क्विंट‘ को जॉइन करने से पहले संजय पुगलिया ‘सीएनबीसी आवाज’ (CNBC Awaaz) में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इसके अलावा वह तमाम चैनल्स में प्रमुख भूमिकाएं निभा चुके हैं।

संजय पुगलिया को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 25 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह प्रिंट के साथ-साथ टीवी पत्रकारिता में भी काम कर चुके हैं। पूर्व में संजय पुगलिया ‘द टाइम्स ग्रुप’ (The Times Group), ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ (Business Standard), ‘आजतक’ (AajTak), ‘जी न्यूज’(Zee News), ‘स्टार न्यूज’(Star News) और ‘सीएनबीसी आवाज’(CNBC Awaaz) में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

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Zee Media से जुड़े रजनीश आहूजा, मिली बड़ी जिम्मेदारी

इससे पहले ‘एबीपी नेटवर्क’ में बतौर सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस) अपनी भूमिका निभा रहे थे रजनीश आहूजा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 15 September, 2021
Last Modified:
Wednesday, 15 September, 2021
RAJNISH AHUJA

‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) ने रजनीश आहूजा को एडिटर (जी न्यूज) और सीसीओ (India.com websites) के पद पर नियुक्त किया है। वह नोएडा से अपना कामकाज संभालेंगे

कंपनी की ओर से जारी स्टेटमेंट के अनुसार, अपनी इस भूमिका में आहूजा चैनल और वेबसाइट्स के लिए न्यूज ऑपरेशंस और एडिटोरियल स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करेंगे। उनके कंधों पर चैनल और वेबसाइट्स के प्रदर्शन को और बेहतर करने की जिम्मेदारी होगी। वह ‘जी न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी को रिपोर्ट करेंगे।

गौरतलब है कि रजनीश आहूजा ने कुछ समय पूर्व ही ‘एबीपी नेटवर्क’ (ABP Network) से इस्तीफा दे दिया था। उस समय वह इस नेटवर्क में बतौर सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस) अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। तभी यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह ‘जी न्यूज’ (Zee News) के साथ अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं और यहां वह एडिटोरियल में बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे। इस नियुक्ति के बाद अब उन कयासों पर विराम लग गया है।

बता दें कि पिछले साल अगस्त में रजनीश आहूजा को एबीपी नेटवर्क में ‘कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस’ ( Corporate Communications) के हेड की जिम्मेदारी दी गई थी। समझा जाता है कि रेटिंग में कमी के चलते उन्हें साइडलाइन कर दिया गया था, जिससे वह नाखुश थे। 

रजनीश आहूजा एबीपी नेटवर्क के साथ करीब 14 साल से जुड़े हुए थे। पिछले ढाई दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे रजनीश एबीपी से पहले 'आजतक' चैनल का हिस्सा हुआ करते थे। वह वहां इनपुट टीम में अहम जिम्मेदारी निभाते थे। देश की प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी 'एएनआई' (ANI) को एक मुकाम तक पहुंचाने में भी रजनीश की अहम भूमिका रही है।

पूर्व में वह ‘डीडी न्यूज’ (DD News), ‘आईटीवी नेटवर्क’ (ITV Network) और ‘रॉयटर्स’ (Reuters) में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स से पत्रकारिता की डिग्री ली है। आहूजा को ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) समेत तमाम अवॉर्ड्स मिल चुके हैं।

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फर्जी खबरों से निपटने के लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने अब उठाया ये कदम

सोशल मीडिया का चलन जिस तेजी से बढ़ा है, उसी के साथ इस पर फर्जी खबरों की बीमारी भी बढ़ती गई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 15 September, 2021
Last Modified:
Wednesday, 15 September, 2021
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सोशल मीडिया का चलन जिस तेजी से बढ़ा है, उसी के साथ इस पर फर्जी खबरों की बीमारी भी बढ़ती गई। लेकिन अभी तक इतनी ही तेज गति से इसे रोकने की दिशा में कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया। पर अब लगता है कि सरकार ने थोड़ी जागरूकता दिखाई है। लिहाजा इसी कड़ी में केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच टेलीग्राम का सहारा लिया है। फर्जी खबरों से निपटने के लिए मंगलवार को मंत्रालय ने टेलीग्राम पर अपना अकाउंट शुरू किया है। इसे ‘पीआईबी फैक्ट चेक’ के तौर पर शुरू किया गया है, जो टेलीग्राम पर चैनल शुरू करने वाली कुछ सरकारी संस्थाओं में से एक है। इसका उद्देश्य केंद्र से संबंधित सूचना की पुष्टि करना और उसे यूजर्स तक पहुंचाना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले तथ्यों की जांच के नाम पर टेलीग्राम पर फर्जी चैनल चल रहे थे। पीआईबी (पत्र सूचना कार्यालय) ने इन फर्जी चैनलों को हटवा दिया। ‘पीआईबी फैक्ट चेक’ केंद्र सरकार का तथ्यों की जांच करने वाला इकलौता माध्यम है, जिसकी स्थापना नवंबर 2019 में हुई थी।

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आम बैठक में ZEEL के MD पुनीत गोयनका को कुछ शेयरधारकों का मिला समर्थन

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लि. (ZEEL) के बोर्डरूम में इस समय कोहराम मचा हुआ है। कंपनी के दो बड़े शेयर होल्डर्स कंपनी के वर्तमान बोर्ड में बदलाव चाहते हैं।

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Published - Wednesday, 15 September, 2021
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Wednesday, 15 September, 2021
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लि. (ZEEL) के बोर्डरूम में इस समय कोहराम मचा हुआ है। कंपनी के दो बड़े शेयर होल्डर्स कंपनी के वर्तमान बोर्ड में बदलाव चाहते हैं। इन शेयर होल्डर्स ने मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका को बोर्ड से हटाने की मांग की है। इन दोनों कंपनियों की ZEEL की चुकता शेयर पूंजी में 17.88 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

ये दो कंपनियां हैं- ‘इनवेस्को डेवलपिंग मार्केट्स फंड’ (पूर्व में इनवेस्को ओपन हीमर डेवलपिंग मार्केट्स फंड) और ‘ओएफआई ग्लोबल चाइना फंड एलएलसी’। इन दोनों ही कंपनियों ने ZEEL के एमडी व सीईओ पुनीत गोयनका को, जिनके परिवार की कंपनी में 3.99% हिस्सेदारी है, डायरेक्टर पद से हटाने के लिये शेयरधारकों की इमरजेंसी बैठक बुलायी थी। इस बैठक में उनके अलावा, मनीष चोखानी और अशोक कुरियन को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के पद से हटाने की भी मांग की गयी थी। हालांकि, चोखानी और कुरियन दोनों पहले ही बोर्ड से इस्तीफा दे चुके हैं।

मीडिया समूह ZEEL की मैनेटमेंट टीम को मंगलवार को हुई वार्षिक आम बैठक (AGM) में कुछ शेयरधारकों के एक वर्ग का समर्थन प्राप्त हुआ है।  

इस आम बैठक के दौरान एक शेयरधारक ने टिप्पणी की कि इनवेस्को और ओएफआई ग्लोबल को इस बैठक में आना चाहिए और अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि वे गोयनका को क्यों हटाना चाहते हैं।

शेयरधारक ने कहा, ‘इनवेस्को को कुछ समस्याएं हो रही हैं। यदि उन्हें कोई दिक्कत है, तो उन्हें हमें विश्वास में लेना चाहिए। साथ ही उन्हें इस बैठक में आकर बताना चाहिए कि कंपनी में क्या गलत है। मुझे आशा है कि इनवेस्को मेरी बात को सुन रहा है। उन्हें सिर्फ शेयरहोल्डिंग के जरिए ताकत नहीं दिखानी चाहिए। उन्हें भी शेयरधारकों के पास वापस आना चाहिए और समझाना चाहिए कि हम उन्हें वोट क्यों देना चाहें। हम खुल के विचार रखेंगे और हम मेरिट्स के आधार पर निर्णय लेंगे।’

वर्चुअल मीटिंग के दौरान एक अन्य शेयरधारक ने कहा कि 2.50 रुपए प्रति शेयर का डिविडेंड अच्छा है। हम सही दिशा में जा रहे हैं। कंपनी ने अपने शेयरधारकों को पुरस्कृत किया है। मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि आप भविष्य में भी ऐसा ही करेंगे।

एक अल्पसंख्यक शेयरधारक ने कहा, ‘हम आपके साथ हैं, और आपको हमारा पक्का समर्थन है।’

कुछ शेयरधारकों ने अल्पांश शेयरधारकों को विश्वास में लेने से इनकार करने के लिए इनवेस्को की आलोचना की। एक अन्य शेयरधारक ने कहा, ‘हम इनवेस्को के साथ कभी नहीं खड़े होंगे। इनवेस्को को हमें विश्वास में लेना होगा और फिर हम इसके बारे में (ईजीएम प्रस्तावों) पर विचार करेंगे।’

शेयरधारक तमाल मजूमदार ने मैनेजमेंट से अशोक कुरियन और मनीष चोखानी के इस्तीफे के पीछे ‘वास्तविक कारण’ के बारे में पूछा। चोखानी और कुरियन ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर  इस्तीफा देने की पीछे की वजह कोविड के बाद बदले हालातों को बताया था।

वहीं, एक शेयरधारक ने कंपनी से संबंधित पार्टियों से ड्यूज की रिकवरी की स्थिति के बारे में पूछा। उन्होंने कहा, ‘बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को हटाने के लिए पिछले 24 घंटों में जो कुछ हुआ उसे देखते हुए, मुझे लगता है कि यह सही कदम है। तथ्य यह भी है कि शेयर बाजार ने इस तरह के कदम का स्वागत किया है और यह कॉर्पोरेट गवर्नेंस की स्थिति का ही असर है।’

वहीं, चल रहे बोर्डरूम झगड़े के बीच, इक्का-दुक्का निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के 50,00,000 (5 मिलियन) शेयर 220.44 रुपये पर खरीदे हैं। झुनझुनवाला ने रेयर एंटरप्राइजेज के जरिए 110.22 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

बोफा सिक्योरिटीज और राकेश झुनझुनवाला के स्वामित्व वाली रेयर एंटरप्राइजेज ने मंगलवार को जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के शेयर खरीदे। बोफा ने 236 रुपए प्रति शेयर के हिसाब 48.6 करोड़ शेयर (0.51 प्रतिशत हिस्सेदारी) 114.9 करोड़ रुपए में खरीदी, जबकि रेयर ने 50 लाख शेयर (0.52 प्रतिशत हिस्सेदारी) 220 रुपए की कीमत के हिसाब से 110.2 करोड़ रुपए में खरीदी। ये दोनों सौदे एनएसई पर हुए, जहां जी के 5,200 करोड़ रुपए मूल्य के शेयरों की अदला-बदली हुई। इस शेयर ने दिन के कारोबार में 270.9 रुपए की ऊंचाई को छुआ। जून 2021 की तिमाही के अंत में जी में बोफा की हिस्सेदारी 1.03 प्रतिशत थी। 

बता दें कि NSE पर जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज का शेयर मंगलवार को 40.06% बढ़कर 261.7 रुपए पर बंद हुआ।

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ZOMATO के को-फाउंडर गौरव गुप्ता ने दिया इस्तीफा

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी ‘जोमैटो’ (Zomato) के को-फाउंडर गौरव गुप्ता ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

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Published - Tuesday, 14 September, 2021
Last Modified:
Tuesday, 14 September, 2021
Gaurav Gupta Zomato

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी ‘जोमैटो’ (Zomato) के को-फाउंडर गौरव गुप्ता ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह खबर सामने आई है। गौरव गुप्ता करीब छह साल से इस कंपनी से जुड़े हुए थे और यहां सप्लाई हेड थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वह अपना वेंचर शुरू कर सकते हैं।  

गुप्ता ने वर्ष 2015 में  बतौर टेबल रिजर्वेशन हेड ‘जोमैटो’ जॉइन की थी। वर्ष 2018 में उन्हें प्रमोशन देकर चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और वर्ष 2019 में को-फाउंडर बनाया गया था।

बता दें कि हाल ही में ‘जोमैटो’ ने ग्रॉसरी डिलीवरी (grocery delivery) सर्विस और न्यूट्रास्युटिकल बिजनेस (Nutraceutical business) से बाहर निकलने का फैसला किया था। इसके कुछ दिनों बाद ही गुप्ता के इस्तीफे की खबर आई है। गुप्ता द्वारा शुरू किए गए ये बिजनेस कथित तौर पर बहुत अच्छा नहीं कर रहे थे।

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ZEE एंटरटेनमेंट में इस बड़े पद से मनीष चोखानी और अशोक कुरियन ने दिया इस्तीफा

कंपनी की 14 सितंबर को होने वाली 39वीं वार्षिक आम बैठक से पहले दोनों का इस्तीफा सामने आया है।

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Published - Tuesday, 14 September, 2021
Last Modified:
Tuesday, 14 September, 2021
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'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) में नॉन एग्जिक्यूटिव नॉन इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स मनीष चोखानी (Manish Chokhani) और अशोक कुरियन (Ashok Kurien) ने अपने पद से तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

कंपनी ने ‘बॉंम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ (BSE) को यह जानकारी दी है। कंपनी ने बताया है कि चोखानी और कुरियन के इस्तीफे का पत्र उन्हें आज मिल गया है।

कंपनी के अनुसार, इस लेटर में चोखानी ने अपने इस्तीफे का कारण कोविड के बाद बदली हुई परिस्थितियों और दृष्टिकोण को बताया है, जबकि कुरियन ने बताया है कि उन्होंने अपने पूर्व के बिजनेस के कारण इस्तीफा दिया है।

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