धड़ाधड़ रीजनल चैनल खुलने के पीछे ये है ‘असली वजह’: वासिंद्र मिश्र

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 16 फरवरी को नोएडा के...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 26 February, 2019
Last Modified:
Tuesday, 26 February, 2019
Vasindra Mishra

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 16 फरवरी को दिए गए। इनबा के 11वां एडिशन के तहत नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में एक समारोह में ये अवॉर्ड्स दिए गए। कार्यक्रम से पहले आयोजित NewsNextConference के अंतगर्त कई पैनल डिस्कशन भी हुए, जिसके द्वारा लोगों को मीडिया के दिग्गजों के विचारों को सुनने का मौका मिला।

ऐसे ही एक पैनल का विषय ‘रीजनल मीडिया: खतरा, खबरें और कमाई’ रखा गया था, जिसमें मीडिया के दिग्गजों ने अपने विचार व्यक्त किए। समाचार4मीडिया डॉट कॉम के एग्जिक्यूटिव एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने बतौर सेशन चेयर इसे मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘नेटवर्क18’ (हिंदी नेटवर्क) के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री, सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क’ के ग्रुप एडिटर मनोज मनु, ‘जनतंत्र टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ वासिंद्र मिश्र, इंडिया न्यूज’ के चीफ एडिटर (मल्टीमीडिया) अजय शुक्ल, ‘पीटीसी नेटवर्क’ के मैनेजिंग डायरेक्टर-प्रेजिडेंट रबिंद्र नारायण और ‘बीबीसी गुजराती’ के एडिटर अंकुर जैन शामिल रहे।

पैनल डिस्कशन के दौरान अभिषेक मेहरोत्रा द्वारा रीजनल मीडिया पर खतरे के बारे में पूछे जाने पर वासिंद्र मिश्र का कहना था, ‘मुझे लगता है कि यदि आप खबर तक सीमित हैं, खबर को निष्पक्षता से दिखा रहे हैं और उसके पीछे आपका कोई स्वार्थ अथवा एजेंडा नहीं है तो किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है। खतरे की शुरुआत तभी होती है, जब आप खबर में अपना पर्सनल एजेंडा डालने की कोशिश करते हैं या किसी के कहने पर किसी के एजेंडा को अपने माध्यम से आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, तभी खतरा होता है। सबसे बड़ा खतरा पॉलिटिक्स की ओर है अथवा जो सरकारें बन रही हैं और बिगड़ रही हैं, उनसे है। आज सरकारी स्तर पर जीरो टॉलरेंस की स्थिति हो गई है।’

वासिंद्र मिश्र का कहना था, ‘जब हमने अपने करियर की शुरुआत की थी, तो उस समय विचारधारा की पत्रकारिता होती थी और वैचारिक प्रतिबद्धता की बात कही जाती थी, लेकिन उस समय टॉलरेंस भी था। यानी जो लोग आपकी विचारधारा को फॉलो नहीं करते थे, उनको भी नौकरी अथवा अपना कारोबार करने का पूरा अधिकार होता था। उस समय सत्ता में बैठी हुई पार्टी अपनी विचारधारा के विरोधी लोगों को भी बिजनेस करने अथवा अपना काम करने की छूट देती थी। धीरे-धीरे कुछ वर्षों से यह देखने को मिल रहा है कि अगर आप एक विचारधारा विशेष को फॉलो कर रहे हैं, तब तो आपको बिजनेस करने का अधिकार है, नौकरी करने का भी अधिकार है अपना एजेंडा भी आगे बढ़ाने का अधिकार है। आपको संस्थान से भी सपोर्ट मिलेगा और राजनीतिक संगठनों का भी सपोर्ट मिलेगा। अगर आप थोड़ा भी क्रिटिकल होने की कोशिश करेंगे या थोड़ा आब्जेक्टिव होने की कोशिश करेंगे, तो आपके खिलाफ इतनी तरह की कार्रवाई शुरू कर दी जाएंगी कि जो स्थानीय गुंडे हैं, वो तो बाद में आएंगे, जो ‘सरकारी गुंडे’ हैं, वही आकर जीना हराम कर देते हैं और आप एक छोटा बिजनेस भी नहीं कर पाते हैं, मीडिया बिजनेस चलाना तो बहुत बड़ी बात है।’

वासिंद्र मिश्र का यह भी कहना था, ‘हैरेसमेंट का तरीका यह नहीं है कि कोई सड़क पर जाते समय आपकी गाड़ी रोक दे अथवा आपकी पिटाई करवा दे। बल्कि हैरेसमेंट का तरीका ये है कि जब आप लाइसेंस के लिए अप्लाई करते हैं तो आपको लाइसेंस नहीं मिलेगा। अगर लाइसेंस मिल भी गया तो आपको न्यूजप्रिंट का कोटा अलॉट नहीं होगा। यदि न्यूजप्रिंट का कोटा अलॉट हो गया तो आपके अखबार/चैनल का इम्पैनलमेंट नहीं होगा। इम्पैनलमेंट के बिना आपको किसी भी तरह का सरकारी अथवा कॉरपोरेट विज्ञापन नहीं मिलेगा। तो जब आपको किसी भी तरह की सरकारी मदद अथवा सरकारी सुविधा नहीं मिलेगी और आपको एक लीगल तरीके से बिजनेस करने की इजाजत नहीं मिलेगी, तो आप सबसे बड़े पीड़ित हो जाते हैं।’

यह पूछे जाने पर कि आज के समय में नेशनल मीडिया अपने आप को रीजनल मीडिया के रूप में विस्तार दे रहा है। जितने बड़े मीडिया ग्रुप हैं, सब अपने रीजनल चैनल लेकर आ रहे हैं। एक तरफ तो सब कह रहे हैं कि इसमें कमाई नहीं है, इसके बावजूद रीजनल मीडिया का इतनी तेजी से विस्तार क्यों हो रहा है? आखिर जब कमाई नहीं है और खतरा भी ज्यादा है तो ऐसा क्या है कि सब रीजनल मीडिया की ओर भाग रहे हैं?

इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं इससे पहले दो मल्टीचैनल ऑर्गनाइजेशन में काम कर चुका हूं, जिनके 16 चैनल और 20 चैनल हुआ करते थे। उस समय जब हम रेवेन्यू का मंथली अथवा क्वार्टरली रिव्यू किया करते थे, तो वो चैनल घाटे में चलते दिखाई देते थे, लेकिन यदि हम कुल रेवेन्यू यानी EBIDTA (earnings before interest, tax, depreciation and amortization) देखते थे तो वो कई क्षेत्रीय भाषा के चैनल फायदे में चलते दिखाई देते थे।। ऐसे में मैंने अपने सेल्स हेड से जब पूछा कि यहां मंथली तो घाटा दिखाते हो, जबकि क्वार्टरली दिखाते हो कि इतने का प्रॉफिट है, जबकि हिंदी रीजनल चैनल सभी घाटे में दिखाई देते हैं, आखिर इसका क्या कारण है? इस पर उनका कहना था कि हमें कनाडा से रेवेन्यू आता है। इसलिए इस तरह के चैनल वहां की सरकार कि चिंता नहीं करते हैं, क्योंकि इनको बाहर से बहुत रेवेन्यू आता है। लेकिन, यही अगर हिंदी रीजनल चैनल में बिजनेस करेंगे तो इन्हें स्थानीय नेताओं की ‘चमचागिरी’ करनी होगी। इसके लिए इन चैनलों को वहां के लोकल केबल आपरेटर, जिसका वहां पर एकछत्र राज्य है, उसकी भी हां में हां मिलानी होगी, नहीं तो वो उनका चैनल नहीं लगने देगा।’

वासिंद्र मिश्र ने कहा, ‘एक नेशनल चैनल पंजाब में अपना पंजाबी चैनल लॉन्च करना चाहता था। वह बहुत बड़ा मीडिया हाउस है। उन्होंने सबकुछ सेटअप लगा लिया। यानी स्टूडियो बना लिया और नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी हो गई, लेकिन वहां का केबल ऑपरेटर तैयार नहीं हुआ, क्योंकि वहां की सरकार उस नेशनल चैनल से नाराज थी और वह केबल ऑपरेटर उस समय के सत्तारूढ़ दल के साथ जुड़ा हुआ था। ऐसे में वह नेशनल चैनल वहां पर अपना रीजनल चैनल लॉन्च नहीं कर पाया। उसे अपना स्टूडियो बंद कर वापस दिल्ली लौटकर आना पड़ा। तो रीजनल चैनलों की ये हालत है। चाहे पंजाब हो, तमिलनाडु हो, कर्नाटक हो या हैदराबाद हो, चैनलों को वहां की सरकार की ‘दया’ पर निर्भर रहना पड़ता है। इसमें पंजाबी चैनल अपवाद हैं, क्योंकि पंजाबी का रेवेन्यू मॉडल अलग है।’ वासिंद्र मिश्र  ने कहा, ‘जो लोग मल्टीलैंग्वेज चैनल चलाते रहे हैं, उनको शायद पता होगा कि यदि आप पंजाबी चैनल चला रहे हैं तो आपको अपने देश अथवा राज्य से जितना रेवेन्यू मिलता है, उससे सौ गुना ज्यादा ओवरसीज बिजनेस से मिलता है। इस तरह के ट्रेंड को पंजाबी चैनल तो अफोर्ड कर सकते हैं, लेकिन अन्य नहीं।’

मीडिया में सोर्स ऑफ रेवेन्यू के बारे में वासिंद्र मिश्र का कहना था, ‘पहले इसमें पारंपरिक रूप से चार तरीके थे। जिनमें रिटेल एडवर्टाइजमेंट, कॉरपोरेट एडवर्टाइजमेंट, गवर्नमेंट एडवर्टाइजमेंट और चौथा इवेंट शामिल होता था। इसके अलावा पांचवां रेवेन्यू का सबसे बड़ा जरिया रियल एस्टेट था। ‘नोटबंदी’ और ‘जीएसटी’ जैसी नई व्यवस्था आने के बाद कॉरपोरेट विज्ञापन काफी प्रभावित हुए। इससे कॉरपोरेट विज्ञापनों का 50 प्रतिशत रेवेन्यू कम हो गया। ऐसे में रेवेन्यू के मामले में रियल एस्टेट बेकार हो गया। बिल्डर जब अपना पैसा नहीं निकाल पा रहा है तो ऐसे में वह बिजनेस क्या देगा। अब रिटेल ऐड और सरकारी ऐड की बात करें तो जीएसटी की वजह से रिटेल ऐड भी बंद हो गया तो ऐसे में कुल दारोमदार सरकारी बिजनेस पर है। सरकारों को भी ये बात पता है और वे यही चाहती भी थीं कि मीडिया उनके सामने घुटने टेककर रहे। उनके हिसाब से खबरे छापे। अगर खबर नहीं छपेगी तो वे विज्ञापन रोक देते हैं। यह आज से नहीं, बल्कि बहुत पुराना फंडा है। कुछ सरकारें सीधे ऐसा करती हैं, तो कुछ घुमा-फिराकर ऐसा करती हैं।’

वासिंद्र मिश्र के अनुसार, ‘आज की तारीख में चाहे नेशनल चैनल हो अथवा रीजनल चैनल हो, सभी की निर्भरता सरकारी बिजनेस पर है। फिर चाहे वो प्रिंट हो अथवा टेलिविजन। रही बात नेशनल चैनलों के रीजनल मीडिया की तरफ जाने की तो इस तरह उन्हें सरकारों के साथ ट्यूनिंग में आसानी होती है। इसके अलावा उन्हें डबल स्टैंडर्ड मेंटेन करने में भी सुविधा होती है। वो पीआर की जितनी भी स्टोरी होती हैं, उन्हें रीजनल में चलवा लेते हैं और नेशनल में चार लोग बैठकर स्टूडियो से दिन भर पाकिस्तान के खिलाफ ‘बम’ फेंकते रहते हैं। हालांकि ऐसे कई पत्रकारों ने कभी बॉर्डर भी नहीं देखा होगा, लेकिन स्टूडियो में बैठकर वो पूरे पाकिस्तान को ‘नेस्तनाबूद’ कर देते हैं और कहते हैं कि वे पेड न्यूज नहीं चलाते हैं। मेरा कहना है कि उन्हें पेड न्यूज चलाने की जरूरत क्या है। उनका रीजनल प्लेटफॉर्म है, जिस पर दिनभर वे यही चलाते हैं। इसलिए उनके लिए जरूरी है कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म चाहिए, जहां पर वे सरकार और राजनीतिक दलों को खुश करके पैसे भी लें और नेशनल लेवल पर ऐसा प्लेटफॉर्म चाहिए, जिससे वे अपना एजेंडा बैलेंस करते रहें।’

आप ये पूरी चर्चा नीचे विडियो पर क्लिक कर भी देख सकते हैं-

 

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भोपाल में पत्रकार के कोरोना संक्रमित होने का आया दूसरा मामला

केके सक्सेना के बाद भोपाल के एक और पत्रकार के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है। संबंधित पत्रकार एक स्थानीय न्यूज चैनल से जुड़ा हुआ है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
covid19

केके सक्सेना के बाद भोपाल के एक और पत्रकार के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है। संबंधित पत्रकार एक स्थानीय न्यूज चैनल से जुड़ा हुआ है। इसी के साथ राजधानी में कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़कर 91 हो गई है। फिर एक पत्रकार के कोरोना की चपेट में आने से अन्य पत्रकारों में चिंता का माहौल है। खासतौर पर वे पत्रकार घबराए हुए हैं, जिनकी हाल-फिलहाल ही सम्बंधित पत्रकार से मुलाकात हुई थी। इसके साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा भी खड़ा हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों को बाइट, विज़ुअल आदि के लिए जगह -जगह घूमना पड़ रहा है। इसके चलते उनके कोरोना प्रभावित होने का खतरा ज्यादा है। जिस पत्रकार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, वह भी शहर के प्रभावित क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए गए थे।

एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए न्यूज़ चैनलों के संपादकों को अपने व्यावसायिक रवैये को कुछ समय के लिए किनारे रखना चाहिए। बाइट और विज़ुअल के नाम पर पत्रकारों एवं फोटो जर्नलिस्ट को शहर भर में दौड़ाया जाता है। उन्हें ऐसे इलाकों में भी जाना होता है, जहां कोरोना पॉजिटिव मामले अधिक हैं। यदि इस बारे में गंभीरता से नहीं सोचा गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है।

गौरतलब है कि कोरोना से बचाव के लिए बड़े मीडिया संस्थान तमाम उपाय कर रहे हैं। कुछ चैनलों ने अपने माइक के डंडे की लम्बाई को बढ़ा दिया है, ताकि बाइट लेने के दौरान संक्रमण के जोखिम को कम से कम किया जा सके। वहीं, न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने अपने माइक को मास्क पहनाया है। लेकिन छोटे संस्थान इसे लेकर ज्यादा गंभीर नहीं हैं। भोपाल में पत्रकार के कोरोना संक्रमित होने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले वरिष्ठ पत्रकार केके सक्सेना कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां से पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें छुट्टी मिल गई है।     

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‘TV9 भारतवर्ष’ से जुड़े आशुतोष त्रिपाठी, संभालेंगे यह जिम्मेदारी

देश के अग्रणी न्यूज नेटवर्क में से एक TV9 ग्रुप से खबर है कि यहां आशुतोष त्रिपाठी को नियुक्त किया गया है।

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Published - Wednesday, 08 April, 2020
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Wednesday, 08 April, 2020
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देश के अग्रणी न्यूज नेटवर्क में से एक TV9 ग्रुप से खबर है कि यहां आशुतोष त्रिपाठी को नियुक्त किया गया है। ‘TV9 भारतवर्ष’ में उन्हें उत्तर और पश्चिम बंगाल के लिए सेल्स का वाइस प्रेजिडेंट बनाया गया है। अपनी इस भूमिका में, त्रिपाठी रेवन्यू बढ़ाने पर जोर देंगे, साथ ही रेवन्यू के अन्य नॉन-ट्रेडिशनल स्ट्रीम्स के लिए भी काम करेंगे।

अपनी नियुक्ति पर, आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि वह इस मौके को एक चुनौती के रूप में लेने के लिए बहुत ही उत्साहित हैं। जहां न्यूज जॉनर पहले से ही बेहतर स्थिति में है, वहीं TV9 अलग और अनूठे तरीके से नई कहानियों/शो को प्रजेंट करने के लिए तैयार है। चैनल टैग लाइन ‘फिक्र आपकी, परवाह देश की’ के साथ एक नए रूप में दिखाई देगा। ऐसे समय पर जब देश में लॉकडाउन है, COVID-19 महामारी के दौरान TV9 सोशल मैसेजेस और प्रोमोज के जरिए बचाव और सुरक्षा कैसे करें, इसे लेकर अपने दर्शकों को जागरुक कर रहा है।

उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने TV9 के प्रोमो के प्रसारण की सराहना की, जिसमें दिखाया गया था कि 5 अप्रैल को अपने घर/बालकनी को 9 बजे 9 मिनट के लिए रोशन करें।  

त्रिपाठी ने जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। उन्हें मीडिया में सेल्स का 15 से भी ज्यादा वर्षों का अनुभव है। वे इससे पहले ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने साढ़े छह साल ऐड सेल्स में काम किया। इसके अलावा उन्होंने ‘इंडिया टीवी’, ‘रेडियो मिर्ची’ में भी काम किया है।

 

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कोरोना संकट के बीच ‘राहत’ पहुंचाने के लिए SONY ने उठाया ये बीड़ा

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा देशभर में किए गए लॉकडाउन को देखते हुए ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ (SPNI) ने बड़ा निर्णय लिया है

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Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
SONY PICTURES

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा देशभर में किए गए लॉकडाउन को देखते हुए ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ (SPNI) ने मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों (daily wage workers) को सपोर्ट करने के लिए 100 मिलियन रुपए के योगदान का निर्णय लिया है।   

बता दें कि कोरोनावायरस के कारण टीवी, सिनेमा शो और फिल्म प्रॉडक्शन का काम 20 मार्च से ठहर गया है। ऐसे में मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर बेरोजगारी से जूझ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर दैनिक वेतनभोगी वर्कर्स और उनके परिवार पर पड़ा है। ऐसे लोगों की मदद के लिए नेटवर्क संबंधित श्रमिक संगठनों की मदद से इन वर्कर्स से संपर्क कर उन्हें मुफ्त में कूपन उपलब्ध करा रहा है। इन कूपन की मदद से ये वर्कर्स और उनका परिवार चुने गए रिटेल स्टोर्स से खाना और रोजमर्रा की अन्य जरूरी चीजें ले सकते हैं।

नेटवर्क अपने विभिन्न प्रॉडक्शन हाउस के साथ मिलकर वहां कार्यरत दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों को एक महीने की सैलरी देने के लिए भी काम कर रहा है। इसके अलावा नेटवर्क ने ‘स्वदेश फाउंडेशन’ की ओर से शुरू किए गए ‘स्वदेश कोविड फंड’ (Swades COVID Fund) में भी अपना योगदान दे रहा है।     

इस बारे में ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ एनपी सिंह का कहना है, ‘इस वैश्विक महामारी को देखते हुए दुनियाभर के लोग एक साथ मिलकर आगे आ रहे हैं, ताकि इस संकट से छुटकारा पाया जा सके। इस महामारी का मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है, जिसमें बड़ी संख्या दैनिक वेतनभोगी वर्कर्स की है। ऐसे में एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ संस्थान होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन लोगों को मदद पहुंचाएं, जिन्होंने नेटवर्क की सफलता में अपना अमूल्य योगदान दिया है।’

इसके अलावा नेटवर्क की ओर से सभी ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) और केबल ऑपरेटर्स पर ‘सोनी पल’ (Sony PAL) चैनल व्युअर्स के लिए दो महीने तक मुफ्त उपलब्ध कराया गया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि लॉकडाउन के कारण घरों में बैठे व्युअर्स को एंटरटेनमेंट में किसी तरह की कमी नहीं आए। इसके अलावा नेटवर्क के विभिन्न चैनल्स पर लोगों को जागरूकता संदेश देने वाले कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं।

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विडियो कांफ्रेंसिंग मीडिया से मुखातिब हुए CM योगी, कही ये बात

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना वायरस के कारण चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन के बीच मंगलवार शाम मीडिया से विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की।

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Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
yogi

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए पूरा देश मिलकर जंग लड़ रहा है। इस जंग में मीडिया की भूमिका भी अहम है और वह भी अपना पूरा सहयोग दे रहा है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना वायरस के कारण चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन के बीच मंगलवार शाम मीडिया से विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की। इस दौरान सीएम योगी ने मीडिया के काम की सराहना की।

उन्होंने कहा कि कोरोना से लड़ाई में शासन, प्रशासन और आमजन की सहभागिता के साथ ही मीडिया की भूमिका भी बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को सफल बनाने और कोरोना से बचने व रोकथाम में मीडिया जनता को भली-भांति जागरूक कर सकता है। उन्होंने कहा कि अभी तक मीडिया ने अपना पूरा सहयोग दिया है और उम्मीद है कि भविष्य में भी मीडिया अपनी सकारात्मक भूमिका का निर्वहन करता रहेगा।

योगी ने कहा कि मीडियाकर्मियों को फेक न्यूज, अफवाह और अलगाववाद जैसी खबरों से सजग रहना चाहिए। उन्होंने स्वअनुशासन और सोशल डिस्टेंसिंग पर जोर देते हुए कहा कि इसका कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। मीडिया को भी इसके प्रति जागरुकता में सरकार का सहयोग करना चाहिए।

इस दौरान योगी ने मीडियाकर्मियों के साथ कोरोना से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों व सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों को भी साझा किया।

विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सीएम योगी ने पत्रकारों से सुझाव भी मांगे। पत्रकारों ने लॉकडाउन खुलने की समय सीमा, कम्युनिटी किचन, सर्विलांस बढ़ाने, जनसहभागिता आदि से संबंधित सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण सुझावों पर गंभीरता से अमल करने का आश्वासन भी दिया है। योगी ने कहा कि लॉकडाउन कब खुलेगा इस पर 11-12 अप्रैल को केंद्र से बातचीत करने के बाद ही फैसला किया जाएगा।

वहीं मुख्यमंत्री ने कोरोना को लेकर कोई खबर प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की अपील भी की।

बता दें कि शाम पांच बजे मुख्ययमंत्री विडियो कांफ्रेंसिंग पर लाइव आए थे। उनसे बात करने के लिए मीडियाकर्मियों को एनआईसी के विडियो कांफ्रेंस हाल में बुलाया गया था। मुख्यमंत्री ने करीब 40 मिनट तक बात की। समय के अभाव का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह क्षमा चाहते हैं कि सभी लोगों से बात नहीं कर सकते। इस मौके पर डीएम कुमार प्रशांत, एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी और मीडिया कर्मी मौजूद रहे।

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सोनिया गांधी के इस सुझाव पर NBA ने जताई नाराजगी, रखी ये बात

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने मीडिया पर सरकारी विज्ञापनों के बारे में दिए गए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाव का विरोध किया है

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उस सुझाव को पुरजोर तरीके से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाने की बात कही है।

इस बारे में ‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा का कहना है, ’ऐसे समय में जब मीडियाकर्मी अपनी जान की परवाह न करते हुए महामारी के बीच न्यूज कवर कर अपनी राष्ट्रीय ड्यूटी निभा रहे हैं, कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से इस तरह का बयान काफी हतोत्साहित करने वाला है।’  

रजत शर्मा की ओर से कहा गया है, ‘एक तरफ तो आर्थिक मंदी की वजह से पहले ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में काफी गिरावट आई है, दूसरी तरफ लॉकडाउन में सभी इंडस्ट्री और बिजनेस बंद होने के कारण भी यह आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इसके अलावा न्यूज चैनल्स अपने रिपोर्टर्स और प्रॉडक्शन स्टाफ की सुरक्षा पर काफी ज्यादा खर्च कर रहे हैं। ऐसे में सरकार एवं सरकारी उपक्रमों द्वारा मीडिया विज्ञापनों पर दो साल के लिए प्रतिबंध लगाने का सुझाव न केवल मीडिया को बीमार करने वाला है, बल्कि यह पूरी तरह से मनमाना है ’

रजत शर्मा की ओर से यह भी कहा गया है, ‘स्वस्थ और फ्री मीडिया के हित में ‘एनबीए’ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से प्रधानमंत्री को सरकार द्वारा मीडिया को दिए जाने वाले एडवर्टाइजमेंट पर दो साल के लिए रोक लगाने के सुझाव को वापस लेने की मांग करता है।’

गौरतलब है कि पीएम मोदी को दिए अपने पत्र में सोनिया गांधी ने सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाकर यह पैसा कोरोनावायरस से पैदा हुए संकट से निपटने में लगाने को कहा है।

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इस ग्रुप से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर, मिली बड़ी जिम्मेदारी

वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर को लेकर हाल ही में समाचार4मीडिया ने अपने उच्च स्तरीय स्रोतों से खबर दी थी कि वह जल्द ही इंडिया टुडे ग्रुप में वरिष्ठ पद पर जॉइन कर सकते हैं।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
milind

वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर को लेकर हाल ही में समाचार4मीडिया ने अपने उच्च स्तरीय स्रोतों से खबर दी थी कि वह जल्द ही इंडिया टुडे ग्रुप में वरिष्ठ पद पर जॉइन कर सकते हैं। बता दें कि अब इस खबर पर मुहर लग गई है। वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर ने तक चैनल्स (Tak Channels) के मैनेजिंग एडिटर के रूप में ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप जॉइन कर लिया है। वे वाइस चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर कली पुरी को रिपोर्ट करेंगे।

ये भी पढ़ें- मिलिंद खांडेकर अब इस ग्रुप से कर सकते हैं नई पारी की शुरुआत

खांडेकर के कंधों पर न्यूज और रीजनल के सभी तक चैनल्स की जिम्मेदारी होगी। वे नोएडा के फिल्म सिटी स्थित आईटीजी मीडियाप्लेक्स से ही अपना योगदान देंगे।

खांडेकर इसके पहले  ‘बीबीसी (इंडिया)’ में बतौर डिजिटल एडिटर कार्यरत थे। 13 मार्च को उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से बीबीसी से अलग होने की जानकारी साझा की थी। इस ट्वीट में खांडेकर ने कहा था, ‘बीबीसी इंडिया के साथ मेरा सफर काफी बेहतर रहा। इस दौरान कई नई चीजें सीखने का मौका भी मिला। भारत में बीबीसी ने काफी विस्तार किया है और मैं काफी सौभाग्यशाली हूं जो इसका हिस्सा रहा। मैं अपने सभी साथियों को धन्यवाद देता हूं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। अपने अगले कदम के बारे में मैं जरूर जानकारी दूंगा।’

ये भी पढ़ें- BBC India के डिजिटल एडिटर मिलिंद खांडेकर ने लिया ये बड़ा फैसला

गौरतलब है कि मिलिंद खांडेकर बीबीसी से पहले एबीपी न्यूज के साथ जुड़े हुए थे। अगस्त, 2018 की शुरुआत में एबीपी न्यूज में अपनी 14 साल की लंबी पारी को विराम दिया था। वे यहां मैनेजिंग एडिटर पद पर कार्यरत थे।  2016 में उनका कद बढ़ाकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई थी। एबीपी न्यूज नेटवर्क में उनका योगदान हिंदी चैनल के साथ शुरू हुआ और धीरे-धीरे एबीपी न्यूज नेटवर्क के डिजिटल और क्षेत्रीय (बंगाली, मराठी और गुजराती) चैनलों की ओर भी बढ़ा।

2016 में ही मिलिंद खांडेकर को टीवी न्यूज इंडस्ट्री के प्रतिष्ठित अवॉर्ड एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड (enba) के तहत बेस्ट एडिटर कैटेगरी के लिए भी चुना गया था।

हिंदी और अंग्रेजी दोनो ही भाषाओं में बराबर की पकड़ होने के बावजूद भी मिलिंद खांडेकर ने शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता की ओर अपना रुख किया। मिलिंद ने पत्रकारिता में अपनी शुरुआत 1992 से ‘नवभारत टाइम्स’ के साथ की। नवभारत में उन्होंने सब-एडिटर और रिपोर्टर के रूप में काम किया। 1995 तक वे यहां रहे। तीन साल काम करने के बाद वे ‘आजतक’ के साथ जुड़ गए। आजतक में उन्होंने कुछ समय तक रिपोर्टर की भूमिका निभाई, जिसके बाद कई विभिन्न पदों पर काम करते हुए वे यहां एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर बन गए और बाद में उन्होंने वेस्टर्न ब्यूरो ऑपरेशन की भी कमान संभाली। 2004 में मिलिंद ने 'आजतक' को अलविदा कह दिया और तब स्टार न्यूज यानी आज के 'एबीपी न्यूज' के साथ जुड़ गए थे। तब से वे एमसीसीएस (एबीपी चैनल का संचालन करने वाली कंपनी) में बतौर मैनेजिंग एडिटर की भूमिका निभा रहे थे।

मिलिंद ने किताब 'दलित करोड़पति-15 प्रेरणादायक कहानियां' भी लिखी । इसमें 15 कहानियां है, जिनमें 15 दलित उद्योगपतियों के संघर्ष को शॉर्ट स्टोरीज की शक्ल में प्रस्तुत किया गया है। ये कहानियां दलित करोड़पतियों की है,जिन्होंने शून्य से शुरू कर कामयाबी के नए आयाम रचे, जिनके पास पेन की निब बदलने के लिए पैसे नहीं थे आज उनकी कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में है, लेकिन उन्होंने ये कामयाबी कैसे हासिल की, क्या मुश्किलें आई और उन्होंने इन मुश्किलों पर कैसे फतह हासिल की।  

पत्रकारिता जगत में उन्हें दो दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रतिष्ठित टाइम्स सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज से की है। 1991 में हिंदी में बेस्ट ट्रेनी के लिए उन्हें ‘राजेन्द्र माथुर अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया था।

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मीडिया के खिलाफ जमीयत ने उठाया ये कदम, लगाया नफरत फैलाने का आरोप

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
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मीडिया जिस तरह से तब्लीगी जमात मामले को लेकर रिपोर्टिंग कर रहा है, उसे लेकर अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सुप्रीम का दरवाजा खटखटाया है। उसने देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के लिए तब्लीगी जमात के लोगों को जिम्मेदार ठहराने पर मीडिया के खिलाफ यह याचिका दायर की है।

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के इस संगठन ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। इस संगठन ने कहा कि इस मुद्दे को ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे मुसलमान कोरोना फैलाने की मुहिम चला रहे हैं। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से इस तरह की मीडिया कवरेज पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से मीडिया और सोशल मीडिया में झूठी खबर फैलाने वालों पर कार्रवाई का आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

अपनी याचिका में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कोर्ट से केंद्र सरकार को दुष्प्रचार रोकने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश देने की अपील भी की है।

जमीयत के वकील एजाज मकबूल ने दायर की गई याचिका में कहा कि तब्लीगी के कार्यक्रम में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया में कई तरह के विडियो और फेक न्यूज शेयर की जा रही हैं, जिनसे मुस्लिमों की छवि खराब हो रही है। इनसे तनाव बढ़ सकता है, जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र और मुस्लिमों की जान पर खतरा है। साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन भी है।

संगठन ने याचिका में यह भी कहा है कि एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में देश के एक बड़े समुदाय को समाज से अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है। उसके आर्थिक बहिष्कार की बातें कही जा रही हैं। इससे न सिर्फ समाज में नफरत फैलेगी बल्कि कोरोना के खिलाफ साझा लड़ाई भी कमजोर पड़ेगी, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल देते हुए तुरंत सुनवाई करे।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, उसमें तब्लीगी जमात में शामिल लोगों और मौलाना साद को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस मामले में मौलाना साद के समर्थन में मौलाना अली कादरी सामने आए और उन्होंने न्यूज चैनल्स और उससे जुड़े पत्रकारों को धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि कुछ टीवी पत्रकार जमात के खिलाफ साजिश कर रहे हैं, वे ऐसा करना बंद कर दे नहीं तो उनके रिपोर्टर्स का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' (NBA) ने इस धमकी को संजीदगी से लिया और उनकी ओर से एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया कि  न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा  की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है।’  

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है।  

बता दें कोरोना वायरस के संक्रमण को तेजी से फैलने से रोकने के लिए तब्लीगी जमात और उनके संपर्क में आए 25 हजार लोगों को पूरे देश में क्वारंटाइन किया गया है।  इसके साथ ही तब्लीगी जमात के लोग हरियाणा के जिन 5 गांवों में गए थे, उन गांवों को भी सील कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी बताया कि तब्लीगी जमात के कुल 2,083 विदेशी सदस्यों में से 1,750 सदस्यों को अभी तक ब्लैक लिस्ट में डाला जा चुका है। मालूम हो कि देशभर में अभी तक 4067 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इस महामारी से अब तक 109 लोगों की मौत हो चुकी है।

   

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इस खुलासे के बाद न्यूज एंकर्स व रिपोर्टर्स को मिल रहीं धमकियां, NBA ने जताया विरोध

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से इस बारे में एक पत्र भी जारी किया गया है

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने विभिन्न न्यूज चैनल्स में काम कर रहे एंकर्स और पत्रकारों के खिलाफ समाज के एक खास वर्ग के लोगों द्वारा दुर्व्यवहार और धमकियों का सहारा लेने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है।

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा कोरोनावायरस (कोविड-19) के प्रसार में तबलीगी जमात की भूमिका को उजागर किया गया है, तब से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के खिलाफ इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।

रजत शर्मा द्वारा जारी इस पत्र में यह भी कहा गया है कि न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

रजत शर्मा की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया है, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है। इस महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू किए गए लॉकडाउन के बीच इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने काफी उल्लेखनीय काम किया है और हमेशा सही, निष्पक्ष और संतुलित रिपोर्टिंग की है। कोरोनावायरस जैसी महामारी को लेकर टीवी पर होने वाली डिबेट्स में भी समाज को सभी वर्गों को उचित व बराबर का प्रतिनिधित्व दिया गया है।’   

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है। पत्र में एनबीए की ओर से यह भी कहा गया है कि ऐसे नेता सामने आएं और कोरोनावायरस को फैलाने में तबलीगी जमात की भूमिका को लेकर अपना रुख साफ करें।

 

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कोरोना पीड़ित महिला पत्रकार से अंजाने में हो गई बड़ी 'गलती', खामियाजा भुगत रहे कई लोग

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
Cororna Virus

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है। ऐसा ही एक मामला अमेरिका के न्यूजर्सी का सामने आया है, जहां कोरोना संक्रमित महिला पत्रकार की वजह से कम से कम सात लोग इस बीमारी से संक्रमित हो गए, जिनमें से तीन लोगों की मौत भी चुकी है। दरअसल, ये सभी लोग पत्रकार की मां की बर्थडे पार्टी में शामिल हुए थे और वहीं से पत्रकार द्वारा यह संक्रमण उनमें फैल गया।

‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार ने इस बात को खुद स्वीकार किया है। हालांकि, पत्रकार का यह भी कहना है कि यह सब ‘अनजाने’ में हुआ। इस बारे में महिला पत्रकार का कहना है कि घटना के वक्त उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि न्यूयॉर्क में कोरोना के मामलों की रिपोर्टिंग करने के दौरान वह खुद इस महामारी से संक्रमित हो चुकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में बतौर रेडियो रिपोर्टर काम करने वाली इस पत्रकार ने अपनी 90 साल की मां का बर्थडे मनाने के लिए आठ मार्च को पार्टी आयोजित की थी। चर्च में हुई इस पार्टी में कुल 25 लोग शामिल हुए थे। पार्टी के अगले दिन पत्रकार की मां बीमार हो गई थीं, हालांकि, उन्हें कुछ दिन बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। इसके बाद जब पत्रकार का कोरोना वायरस टेस्ट किया गया तो वह पॉजिटिव निकला। बाद में पता चला कि उस पार्टी में शामिल तीन लोगों की मौत हो गई है और कम से कम 4 अन्य लोग पॉजिटिव निकले हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पत्रकार के माता-पिता और 56 वर्षीय एक अन्य रिश्तेदार भी कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुका है। हालांकि, यह रिश्तेदार बर्थडे पार्टी में शामिल नहीं हुआ था।

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मोरारी बापू ने पीएम की मुहिम के लिए मांगा जनसहयोग, NewsX ने शेयर किया विडियो

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
MORARI BAPU PM MODI

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है। उन्होंने लोगों से भी प्रधानमंत्री की इस मुहिम में शामिल होने और रविवार पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक अपने घर की सभी लाइटें बंद कर बॉलकनी में खड़े होकर दीया, मोमबत्ती अथवा मोबाइल की फ्लैशलाइट से रोशनी करने की अपील की है।

इस बारे में अंग्रेजी न्यूज चैनल न्यूजएक्स (NewsX) ने अपने ट्विटर हैंडल पर मोरारी बापू का विडियो शेयर किया है। इस विडियो में मोरारी बापू का कहना है, ‘मैं आपसे एक विनय करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि रविवार पांच अप्रैल की रात ठीक नौ बजे नौ मिनट के लिए अपने आंगन में, अपनी बालकनी में यानी जहां और जैसी स्थिति उपयुक्त हो, घर की सभी लाइटें बंद करके दीप जलाएं, मोमबत्ती जलाएं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इस राष्ट्रीय बात को सभी लोग स्वीकार करके बिना चूके करें। यह एक साधु की भी विनती है, श्रद्धा है। सब ऐसा करेंगे।’

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्वीट पर रिट्वीट कर कहा है कि पूज्य मोरारी बापू के इस संदेश में देशवासियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।  

 

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