धड़ाधड़ रीजनल चैनल खुलने के पीछे ये है ‘असली वजह’: वासिंद्र मिश्र

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 16 फरवरी को नोएडा के...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 26 February, 2019
Last Modified:
Tuesday, 26 February, 2019
Vasindra Mishra

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 16 फरवरी को दिए गए। इनबा के 11वां एडिशन के तहत नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में एक समारोह में ये अवॉर्ड्स दिए गए। कार्यक्रम से पहले आयोजित NewsNextConference के अंतगर्त कई पैनल डिस्कशन भी हुए, जिसके द्वारा लोगों को मीडिया के दिग्गजों के विचारों को सुनने का मौका मिला।

ऐसे ही एक पैनल का विषय ‘रीजनल मीडिया: खतरा, खबरें और कमाई’ रखा गया था, जिसमें मीडिया के दिग्गजों ने अपने विचार व्यक्त किए। समाचार4मीडिया डॉट कॉम के एग्जिक्यूटिव एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने बतौर सेशन चेयर इसे मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘नेटवर्क18’ (हिंदी नेटवर्क) के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री, सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क’ के ग्रुप एडिटर मनोज मनु, ‘जनतंत्र टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ वासिंद्र मिश्र, इंडिया न्यूज’ के चीफ एडिटर (मल्टीमीडिया) अजय शुक्ल, ‘पीटीसी नेटवर्क’ के मैनेजिंग डायरेक्टर-प्रेजिडेंट रबिंद्र नारायण और ‘बीबीसी गुजराती’ के एडिटर अंकुर जैन शामिल रहे।

पैनल डिस्कशन के दौरान अभिषेक मेहरोत्रा द्वारा रीजनल मीडिया पर खतरे के बारे में पूछे जाने पर वासिंद्र मिश्र का कहना था, ‘मुझे लगता है कि यदि आप खबर तक सीमित हैं, खबर को निष्पक्षता से दिखा रहे हैं और उसके पीछे आपका कोई स्वार्थ अथवा एजेंडा नहीं है तो किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है। खतरे की शुरुआत तभी होती है, जब आप खबर में अपना पर्सनल एजेंडा डालने की कोशिश करते हैं या किसी के कहने पर किसी के एजेंडा को अपने माध्यम से आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, तभी खतरा होता है। सबसे बड़ा खतरा पॉलिटिक्स की ओर है अथवा जो सरकारें बन रही हैं और बिगड़ रही हैं, उनसे है। आज सरकारी स्तर पर जीरो टॉलरेंस की स्थिति हो गई है।’

वासिंद्र मिश्र का कहना था, ‘जब हमने अपने करियर की शुरुआत की थी, तो उस समय विचारधारा की पत्रकारिता होती थी और वैचारिक प्रतिबद्धता की बात कही जाती थी, लेकिन उस समय टॉलरेंस भी था। यानी जो लोग आपकी विचारधारा को फॉलो नहीं करते थे, उनको भी नौकरी अथवा अपना कारोबार करने का पूरा अधिकार होता था। उस समय सत्ता में बैठी हुई पार्टी अपनी विचारधारा के विरोधी लोगों को भी बिजनेस करने अथवा अपना काम करने की छूट देती थी। धीरे-धीरे कुछ वर्षों से यह देखने को मिल रहा है कि अगर आप एक विचारधारा विशेष को फॉलो कर रहे हैं, तब तो आपको बिजनेस करने का अधिकार है, नौकरी करने का भी अधिकार है अपना एजेंडा भी आगे बढ़ाने का अधिकार है। आपको संस्थान से भी सपोर्ट मिलेगा और राजनीतिक संगठनों का भी सपोर्ट मिलेगा। अगर आप थोड़ा भी क्रिटिकल होने की कोशिश करेंगे या थोड़ा आब्जेक्टिव होने की कोशिश करेंगे, तो आपके खिलाफ इतनी तरह की कार्रवाई शुरू कर दी जाएंगी कि जो स्थानीय गुंडे हैं, वो तो बाद में आएंगे, जो ‘सरकारी गुंडे’ हैं, वही आकर जीना हराम कर देते हैं और आप एक छोटा बिजनेस भी नहीं कर पाते हैं, मीडिया बिजनेस चलाना तो बहुत बड़ी बात है।’

वासिंद्र मिश्र का यह भी कहना था, ‘हैरेसमेंट का तरीका यह नहीं है कि कोई सड़क पर जाते समय आपकी गाड़ी रोक दे अथवा आपकी पिटाई करवा दे। बल्कि हैरेसमेंट का तरीका ये है कि जब आप लाइसेंस के लिए अप्लाई करते हैं तो आपको लाइसेंस नहीं मिलेगा। अगर लाइसेंस मिल भी गया तो आपको न्यूजप्रिंट का कोटा अलॉट नहीं होगा। यदि न्यूजप्रिंट का कोटा अलॉट हो गया तो आपके अखबार/चैनल का इम्पैनलमेंट नहीं होगा। इम्पैनलमेंट के बिना आपको किसी भी तरह का सरकारी अथवा कॉरपोरेट विज्ञापन नहीं मिलेगा। तो जब आपको किसी भी तरह की सरकारी मदद अथवा सरकारी सुविधा नहीं मिलेगी और आपको एक लीगल तरीके से बिजनेस करने की इजाजत नहीं मिलेगी, तो आप सबसे बड़े पीड़ित हो जाते हैं।’

यह पूछे जाने पर कि आज के समय में नेशनल मीडिया अपने आप को रीजनल मीडिया के रूप में विस्तार दे रहा है। जितने बड़े मीडिया ग्रुप हैं, सब अपने रीजनल चैनल लेकर आ रहे हैं। एक तरफ तो सब कह रहे हैं कि इसमें कमाई नहीं है, इसके बावजूद रीजनल मीडिया का इतनी तेजी से विस्तार क्यों हो रहा है? आखिर जब कमाई नहीं है और खतरा भी ज्यादा है तो ऐसा क्या है कि सब रीजनल मीडिया की ओर भाग रहे हैं?

इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं इससे पहले दो मल्टीचैनल ऑर्गनाइजेशन में काम कर चुका हूं, जिनके 16 चैनल और 20 चैनल हुआ करते थे। उस समय जब हम रेवेन्यू का मंथली अथवा क्वार्टरली रिव्यू किया करते थे, तो वो चैनल घाटे में चलते दिखाई देते थे, लेकिन यदि हम कुल रेवेन्यू यानी EBIDTA (earnings before interest, tax, depreciation and amortization) देखते थे तो वो कई क्षेत्रीय भाषा के चैनल फायदे में चलते दिखाई देते थे।। ऐसे में मैंने अपने सेल्स हेड से जब पूछा कि यहां मंथली तो घाटा दिखाते हो, जबकि क्वार्टरली दिखाते हो कि इतने का प्रॉफिट है, जबकि हिंदी रीजनल चैनल सभी घाटे में दिखाई देते हैं, आखिर इसका क्या कारण है? इस पर उनका कहना था कि हमें कनाडा से रेवेन्यू आता है। इसलिए इस तरह के चैनल वहां की सरकार कि चिंता नहीं करते हैं, क्योंकि इनको बाहर से बहुत रेवेन्यू आता है। लेकिन, यही अगर हिंदी रीजनल चैनल में बिजनेस करेंगे तो इन्हें स्थानीय नेताओं की ‘चमचागिरी’ करनी होगी। इसके लिए इन चैनलों को वहां के लोकल केबल आपरेटर, जिसका वहां पर एकछत्र राज्य है, उसकी भी हां में हां मिलानी होगी, नहीं तो वो उनका चैनल नहीं लगने देगा।’

वासिंद्र मिश्र ने कहा, ‘एक नेशनल चैनल पंजाब में अपना पंजाबी चैनल लॉन्च करना चाहता था। वह बहुत बड़ा मीडिया हाउस है। उन्होंने सबकुछ सेटअप लगा लिया। यानी स्टूडियो बना लिया और नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी हो गई, लेकिन वहां का केबल ऑपरेटर तैयार नहीं हुआ, क्योंकि वहां की सरकार उस नेशनल चैनल से नाराज थी और वह केबल ऑपरेटर उस समय के सत्तारूढ़ दल के साथ जुड़ा हुआ था। ऐसे में वह नेशनल चैनल वहां पर अपना रीजनल चैनल लॉन्च नहीं कर पाया। उसे अपना स्टूडियो बंद कर वापस दिल्ली लौटकर आना पड़ा। तो रीजनल चैनलों की ये हालत है। चाहे पंजाब हो, तमिलनाडु हो, कर्नाटक हो या हैदराबाद हो, चैनलों को वहां की सरकार की ‘दया’ पर निर्भर रहना पड़ता है। इसमें पंजाबी चैनल अपवाद हैं, क्योंकि पंजाबी का रेवेन्यू मॉडल अलग है।’ वासिंद्र मिश्र  ने कहा, ‘जो लोग मल्टीलैंग्वेज चैनल चलाते रहे हैं, उनको शायद पता होगा कि यदि आप पंजाबी चैनल चला रहे हैं तो आपको अपने देश अथवा राज्य से जितना रेवेन्यू मिलता है, उससे सौ गुना ज्यादा ओवरसीज बिजनेस से मिलता है। इस तरह के ट्रेंड को पंजाबी चैनल तो अफोर्ड कर सकते हैं, लेकिन अन्य नहीं।’

मीडिया में सोर्स ऑफ रेवेन्यू के बारे में वासिंद्र मिश्र का कहना था, ‘पहले इसमें पारंपरिक रूप से चार तरीके थे। जिनमें रिटेल एडवर्टाइजमेंट, कॉरपोरेट एडवर्टाइजमेंट, गवर्नमेंट एडवर्टाइजमेंट और चौथा इवेंट शामिल होता था। इसके अलावा पांचवां रेवेन्यू का सबसे बड़ा जरिया रियल एस्टेट था। ‘नोटबंदी’ और ‘जीएसटी’ जैसी नई व्यवस्था आने के बाद कॉरपोरेट विज्ञापन काफी प्रभावित हुए। इससे कॉरपोरेट विज्ञापनों का 50 प्रतिशत रेवेन्यू कम हो गया। ऐसे में रेवेन्यू के मामले में रियल एस्टेट बेकार हो गया। बिल्डर जब अपना पैसा नहीं निकाल पा रहा है तो ऐसे में वह बिजनेस क्या देगा। अब रिटेल ऐड और सरकारी ऐड की बात करें तो जीएसटी की वजह से रिटेल ऐड भी बंद हो गया तो ऐसे में कुल दारोमदार सरकारी बिजनेस पर है। सरकारों को भी ये बात पता है और वे यही चाहती भी थीं कि मीडिया उनके सामने घुटने टेककर रहे। उनके हिसाब से खबरे छापे। अगर खबर नहीं छपेगी तो वे विज्ञापन रोक देते हैं। यह आज से नहीं, बल्कि बहुत पुराना फंडा है। कुछ सरकारें सीधे ऐसा करती हैं, तो कुछ घुमा-फिराकर ऐसा करती हैं।’

वासिंद्र मिश्र के अनुसार, ‘आज की तारीख में चाहे नेशनल चैनल हो अथवा रीजनल चैनल हो, सभी की निर्भरता सरकारी बिजनेस पर है। फिर चाहे वो प्रिंट हो अथवा टेलिविजन। रही बात नेशनल चैनलों के रीजनल मीडिया की तरफ जाने की तो इस तरह उन्हें सरकारों के साथ ट्यूनिंग में आसानी होती है। इसके अलावा उन्हें डबल स्टैंडर्ड मेंटेन करने में भी सुविधा होती है। वो पीआर की जितनी भी स्टोरी होती हैं, उन्हें रीजनल में चलवा लेते हैं और नेशनल में चार लोग बैठकर स्टूडियो से दिन भर पाकिस्तान के खिलाफ ‘बम’ फेंकते रहते हैं। हालांकि ऐसे कई पत्रकारों ने कभी बॉर्डर भी नहीं देखा होगा, लेकिन स्टूडियो में बैठकर वो पूरे पाकिस्तान को ‘नेस्तनाबूद’ कर देते हैं और कहते हैं कि वे पेड न्यूज नहीं चलाते हैं। मेरा कहना है कि उन्हें पेड न्यूज चलाने की जरूरत क्या है। उनका रीजनल प्लेटफॉर्म है, जिस पर दिनभर वे यही चलाते हैं। इसलिए उनके लिए जरूरी है कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म चाहिए, जहां पर वे सरकार और राजनीतिक दलों को खुश करके पैसे भी लें और नेशनल लेवल पर ऐसा प्लेटफॉर्म चाहिए, जिससे वे अपना एजेंडा बैलेंस करते रहें।’

आप ये पूरी चर्चा नीचे विडियो पर क्लिक कर भी देख सकते हैं-

 

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‘इश्क मुबारक’ लिखने पर चर्चा में आए पत्रकार कुलदीप राघव, मिलेगा ये सम्मान

‘टाइम्सख नाउ’ हिंदी में प्रिंसिपल करेसपॉन्डेंट कुलदीप को यह सम्मान उत्तटर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यसनाथ के हाथों दिया जाएगा

Last Modified:
Friday, 07 August, 2020
Kuldeep Raghav

हिंदुस्तानी अकादमी, प्रयागराज की ओर से गुरु गोरक्षनाथ शिखर सम्मान समेत आठ पुरस्कारों की घोषणा बृहस्पतिवार को कर दी गई। प्रतिवर्ष दिए जाने वाले इन सम्‍मानों में  पत्रकार कुलदीप राघव को उनके उपन्‍यास ‘इश्क मुबारक’ के लिए 11 हजार रुपये का हिंदुस्तानी अकादमी युवा लेखन सम्मान (कथा) प्रदान किया जाएगा। कुलदीप राघव पूर्व में नरेंद्र मोदी- एक शोध एवं आईलवयू (उपन्‍यास) जैसी पुस्‍तकें लिख चुके हैं। इससे पहले उन्‍हें 100 इंस्‍पारिंग ऑथर्स ऑफ इंडिया अवॉर्ड से नवाजा गया था। रेडग्रैक बुक्‍स द्वारा प्रकाशित कुलदीप राघव का उपन्यास ‘इश्‍क मुबारक’ इसी वर्ष जनवरी में रिलीज हुआ था और यह अमेजॉन बेस्‍ट सेलर उपन्यास बना। इस उपन्यास की पांच हजार से अधिक प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं।

मूलरूप से खुर्जा के रहने वाले कुलदीप वर्तमान में नोएडा में रहते हैं और ‘टाइम्‍स नाउ’ हिंदी में प्रिंसिपल करेसपॉन्डेंट हैं। हिंदुस्‍तानी अकादमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने गुरुवार को पुरस्‍कारों की घोषणा करते हुए बताया कि कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद चयनित रचनाकारों को मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ सम्मानित करेंगे।

इस बार अकादमी की ओर से दिए जाने वाले सबसे प्रतिष्ठित गुरु गोरक्षनाथ शिखर सम्मान को गोरखपुर के डॉ प्रदीप कुमार राव को प्रदान किया जाएगा। राव को उनकी कृति ‘गुरु गोरक्षनाथ एवं आदिकालीन साहित्य’ पर कार्य के लिए पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। 2.50 लाख रुपये का गोस्वामी तुलसी दास सम्मान ‘रामचरित मानस की पांडुलिपियां’ पुस्तक के लिए संयुक्त रूप से पांडुलिपि विशेषज्ञ उदयशंकर दुबे व बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो विजयनाथ मिश्र को प्रदान किया जाएगा। इसी तरह ‘धर्मचक्र’ पुस्तक पर दो लाख रुपये का भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान शहर के ही डॉ विजयानंद को दिया जाएगा।

इसी तरह ‘हिंदी भाषा के आयाम’ पुस्तक पर दो लाख रुपये का महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान मऊ के डॉ सर्वेश पांडेय को देने का निर्णय लिया गया है। एक लाख रुपये का फिराक गोरखपुरी सम्मान अंबेडकर नगर के रामसहाय मिश्र कोमल शास्त्री को दिया जाएगा। यह सम्मान उन्हें उनकी कृति ‘वक्त के बाजार में’ के लिए प्रदान किया जाएगा। इसी तरह इस बार का कुंभनदास ब्रजभाषा सम्मान हाथरस के भोजराज सिंह भोज को देने का निर्णय लिया गया है। यह पुरस्कार उनको ‘अन्नदाता-किसान’ पुस्तक के लिए दिया जाएगा। लखनऊ की गरिमा सक्सेना को उनकी काव्य रचना ‘मैं छिपा सूरज कहां’ के लिए 11 हजार रुपये के हिंदुस्तानी अकादमी युवा लेखन सम्मान(कविता) से नवाजा जाएगा।

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दूरदर्शन की इस कवरेज का 200 से ज्यादा चैनल्स ने किया लाइव प्रसारण, जमकर हो रही तारीफ

5 अगस्त को अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लिए भूमि पूजन समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। इस मौके पर तमाम विशेष अतिथियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमिपूजन किया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 August, 2020
Last Modified:
Thursday, 06 August, 2020
Doordarshan

5 अगस्त को अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लिए भूमि पूजन समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। इस मौके पर तमाम विशेष अतिथियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमिपूजन किया। पीएम मोदी द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के लिए हुए भूमि पूजन का प्रसारण दूरदर्शन ने किया और खास बात यह है कि दूरदर्शन के लिए 200 से अधिक टीवी चैनल्स ने इसका लाइव प्रसारण किया। इसकी जानकारी खुद प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शशि शेखर वेम्पति ने ट्वीट करके दी है। 

बता दें कि आयोजन की लाइव स्ट्रीमिंग ‘डीडी नेशनल’ और ‘डीडी न्यूज’ पर प्रसारित की गई है। दूरदर्शन के इस लाइव कवरेज के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए गए थे। कमेंट्री के जरिए बकायदा लोगों को एक-एक विधि और स्थान के बारे में जानकारी दी जा रही थी। सोशल मीडिया पर दूरदर्शन की इस कवरेज की जमकर तारीफ हो रही है।

 

 

 

इस लाइव प्रसारण को लेकर एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। ऐसा पहली बार हुआ है जब तमिल के छह बड़े टीवी चैनल ने अयोध्या में पीएम मोदी के भाषण का लाइव प्रसारण किया है। इसकी जानकारी तमिल समाचार पत्रिका के संपादक एस. गुरुमूर्ति ने ट्वीट करके दी है।

 

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200 से अधिक चैनल्स ने किया दूरदर्शन की इस कवरेज का लाइव प्रसारण, हो रही तारीफ

5 अगस्त को अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लिए भूमि पूजन समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। इस मौके पर तमाम विशेष अतिथियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमिपूजन किया।

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Published - Thursday, 06 August, 2020
Last Modified:
Thursday, 06 August, 2020
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5 अगस्त को अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लिए भूमि पूजन समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। इस मौके पर तमाम विशेष अतिथियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमिपूजन किया। पीएम मोदी द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के लिए हुए भूमि पूजन का प्रसारण दूरदर्शन ने किया और खास बात यह है कि दूरदर्शन के लिए 200 से अधिक टीवी चैनल्स ने इसका लाइव प्रसारण किया। इसकी जानकारी खुद प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शशि शेखर वेम्पति ने ट्वीट करके दी है। 

बता दें कि आयोजन की लाइव स्ट्रीमिंग ‘डीडी नेशनल’ और ‘डीडी न्यूज’ पर प्रसारित की गई है। दूरदर्शन के इस लाइव कवरेज के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए गए थे। कमेंट्री के जरिए बकायदा लोगों को एक-एक विधि और स्थान के बारे में जानकारी दी जा रही थी। सोशल मीडिया पर दूरदर्शन की इस कवरेज की जमकर तारीफ हो रही है।

 

 

 

इस लाइव प्रसारण को लेकर एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। ऐसा पहली बार हुआ है जब तमिल के छह बड़े टीवी चैनल ने अयोध्या में पीएम मोदी के भाषण का लाइव प्रसारण किया है। इसकी जानकारी तमिल समाचार पत्रिका के संपादक एस. गुरुमूर्ति ने ट्वीट करके दी है।

 

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IMPACT की 50 प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में इंडिया टुडे ग्रुप की कली पुरी ने मारी बाजी

पांच अगस्त की शाम पांच बजे से वर्चुअल रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में इस लिस्ट से पर्दा उठाया गया। अनुप्रिया आचार्य, फे डिसूजा, शीरीन भान, स्वाति भट्टाचार्य आदि ने इस लिस्ट में बनाई अपनी जगह

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2020
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2020
Impact

एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) समूह की जानी-मानी वीकली मैगजीन ‘इम्पैक्ट’ (IMPACT) द्वारा मीडिया, एडवर्टाइजमेंट और मार्केटिंग में इस साल अपनी खास पहचान बनाने वाली 50 महिलाओं की लिस्‍ट (IMPACT’s 50 Most Influential Women, 2020) से पांच अगस्त को पर्दा उठ गया। पांच अगस्त की शाम पांच बजे से वर्चुअल रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में इस लिस्ट से पर्दा उठाया गया।

इस साल इस लिस्ट में ‘इंडिया टुडे’ (India Today) समूह की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने पहला स्थान हासिल किया। इस कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर ‘&TV’ रहा। इस साल इस लिस्ट में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहा। इतने वर्षों में पहली बार 19 नई प्रविष्टियों (entrants) को जगह मिली। इस साल भी इस लिस्ट में पिछले साल की तरह मीडिया कंपनियों से जुड़ी 14 महिलाओं को जगह मिली। 23 महिलाएं विभिन्न एजेंसियों जैसे-क्रिएटिव, पीआर, डिजिटल, डिजाइन और रिसर्च से जुड़ी हैं। बाकी 20 अन्य महिलाएं मार्केटिंग पृष्ठभूमि से जुड़ी हैं, जबकि पिछले साल मार्केटिंग से 13 महिलाएं इस लिस्ट में शामिल थीं। इस लिस्ट में शामिल 57 महिलाओं (संयुक्त विजेता भी शामिल) के साथ जूरी ने पांच महिलाओं को ‘स्पेशल मेंशन’ (Special Mention) के लिए चुना। 

इस लिस्ट को तैयार करने के लिए एक जूरी का गठन किया गया था। मैडिसन वर्ल्ड (Madison World) के चेयरमैन और एमडी सैम बलसारा के नेतृत्व में गठित जूरी के सदस्यों में विभिन्न इंडस्ट्री के बड़े-बड़े दिग्गजों को शामिल किया गया, जिनमें ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Zee Entertainment Enterprises Ltd) के चीफ पीपुल ऑफिसर अनिमेश कुमार, ‘विक्तान ग्रुप’ (Vikatan Group) के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. श्रीनिवासन, डेलना अवारी एंड कंसल्टेंट्स (Delna Avari & Consultants) की फाउंडर डेलना अवारी, ‘वायकॉम18’ (Viacom18) के अंग्रेजी मनोरंजन समूह (English Entertainment cluster) के प्रमुख फरजाद पालिया, ‘क्वोरा’ (Quora) के जनरल मैनेजर गुरमीत सिंह, ‘मैक्केन वर्ल्डग्रुप इंडिया’ (Mccann Worldgroup India) के एमडी व वाइस चेयरमैन पार्थ सिन्हा,  अरुमुगम एंड कंसल्टेंट्स की फाउंडर पुनीता अरुमुगम, ‘हवास ग्रुप इंडिया’ (Havas Group India) के सीईओ राणा बरुआ, ‘वायकॉम18’ की रीजनल एंटरटेनमेंट क्लस्टर के हेड रवीश कुमार, ‘एसके एंड एसोसिएट्स’ (SK & Associates) की फाउंडर व सीईओ शालिनी कामत,  ‘जी5 इंडिया’ (Zee5 India) के सीईओ तरुण कात्याल और जुलाई तक ‘हेड्रिक एंड स्ट्रगल’ (Heidrick & Struggles) कंपनी के प्रमुख (ग्लोबल कंज्यूमर मार्केट्स) विक्रम छाछी शामिल रहे।

बता दें कि यह इस कार्यक्रम का नौवां एडिशन था। इंपैक्ट द्वारा यह लिस्ट जारी करने की शुरुआत वर्ष 2012 में की गई थी, जिसमें देश की ऐसी महिलाओं को स्थान दिया जाता है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर अपने-अपने फील्ड में खास पहचान बनाई है और दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत्र बनी हैं। इस लिस्ट की पूर्व में विजेता रहीं महिलाओं पर नजर डालें तो इनमें ‘गोदरेज इंडस्ट्रीज’ (Godrej Industries) की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ ब्रैंड ऑफिसर तान्या डबास (2019), ‘पारले एग्रो’ (Parle Agro) की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर नादिया चौहान (2018), ‘मिस मालिनी एंटरटेनमेंट’ (MissMalini Entertainment) की फाउंडर और क्रिएटिव डायरेक्टर मालिनी अग्रवाल (2017), ‘बालाजी टेलिफिल्म्स’ (Balaji Telefilms) की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और क्रिएटिव डायरेक्टर एकता कपूर (2016), ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर कीर्तिगा रेड्डी (2015), मार्केटिंग कंसल्टेंट और बिजनेस ऑथर रामा बीजापुरकर (2014), ‘एचटी मीडिया ग्रुप’ (HT Media Group) की चेयरपर्सन और एडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतिया (2013) और ‘ब्रिटेनिया’ (Britannia) की तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर विनीता बाली (2012) का नाम शामिल है।

विजेताओं की पूरी लिस्ट आप यहां देख सकते हैं।

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EORtv ने लॉन्च किया वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म EORtok, यूजर्स को दिया ये मौका  

देश में चीन ऐप के बैन के बाद कई भारतीय यूजर्स इसके ऑप्शन तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में ईओआरटीवी (EORtV) ने लॉन्च किया है वीडियो शेयरिंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2020
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2020
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देश में चीन ऐप के बैन के बाद कई भारतीय यूजर्स इसके ऑप्शन तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में ईओआरटीवी (EORtV) ने लॉन्च किया है वीडियो शेयरिंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ईओआरटीओके (EORtOK), जोकि टिकटॉक ऐप की तरह ही है।

बता दें कि EORtV ने यूजर्स को अपनी आगामी वेब सीरीज के जरिए डेब्यू करने का भी मौका दिया है। EORtOK नवोदित कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का एक अनूठा प्लेटफॉर्म है। इसे हुनरमंद लोगों को उनके शौक और जुनून की राह पर आगे बढ़ने में मदद करने के लिहाज से डिजाइन किया गया है। यह उन लोगों के लिए एकदम उपयुक्त मंच के रूप में काम करता है जो किसी खास क्षेत्र में अपने हुनर और खूबियों का प्रदर्शन करना चाहते हैं। यही नहीं, इसके चुने हुए यूजर्स को EORtV की आगामी ओरिजिनल वेब सीरीज में काम करने का मौका भी मिलेगा।

EORtOK ऐप टिकटॉक ऐप्लिकेशन के समान ही है, जो यूजर्स को बेहद शानदार फिल्टर्स और गेम्स के साथ शॉर्ट वीडियो रिकॉर्ड करने और शेयर करने की सुविधा देता है। यह यूजर्स को ढेर सारे शॉर्ट वीडियो ब्राउज करने, उन्हें डाउनलोड करने, लाइक करने और शेयर करने सहित कई तरह के मौके देता है।

इसके अलावा, यह डायरेक्ट मैसेज फीचर के जरिए लोगों से जुड़ने के लिए एक प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराता है।

EORtOK एंड्रॉयड डिवाइसों पर उपलब्ध है और जल्द ही इसका ios संस्करण भी आ जाएगा। यूजर्स जैसे ही नियम और शर्तों से सहमति प्रदान करते हैं, EORtV पेज पर एक आइकॉन EORtOK मिलता है। उस पर क्लिक करके यूजर्स अपने वीडियो अपलोड करना शुरू कर सकते हैं। यह उन्हें ढेर सारे शॉर्ट वीडियो ब्राउज करने, उन्हें डाउनलोड करने, लाइक करने समेत कई अन्य फीचर्स उपलब्ध कराता है।

यह ऐप यूजर्स एक्सपीरियंस का भी ख्याल रखता है और तेजी से अपलोड तथा डाउनलोड को मुमकिन बनाता है। इसे अत्याधुनिक और तमाम सुविधाओं से लैस बनाया गया है। यूजर्स अपने EORtOK खाते में पहले से तैयार वीडियो अपलोड कर सकते हैं, उन्हें रोटेट या क्रॉप कर सकते हैं, और यहां तक कि प्लेबैक की रफ्तार भी बदल सकते हैं। ऐप पर वीडियो एडिटिंग, लाइव स्ट्रीमिंग, सोशल शेयरिंग, साउंडट्रैक्स, क्यूआर कोड स्कैनर, डुएट ऑप्शन और जियोलोकेशन समेत कई अन्य सेवाएं उपलब्ध हैं।

यह ऐप इस्तेमाल में एकदम आसान है। इस पर यूजर्स जिन अन्य यूजर्स के हर वीडियो को लाइक, कमेंट और शेयर करने में सक्षम हैं, उनकी क्लिप्स से गुजरते हुए स्क्रॉल कर सकते हैं। इसके साथ ही वे उन्हें पोस्ट करने वाले यूजर की प्रोफाइल भी देख सकते हैं। यह ऐप यूजर्स को 10/15/30/60 सेकंड तक के वीडियो अपलोड करने की सुविधा देता है।

वीडियो क्रिएटर्स के लिए एक और अहम फायदा है और वह है उन टूल्स की संख्या जिन्हें वे वीडियो बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें 30 से ज्यादा फिल्टर हैं और आपके वीडियो में डालने के लिए साउंड्स को सर्च करने की क्षमता भी है। इसमें यूजर्स को ‘रिस्पॉन्स’ वीडियो के जरिए या ‘डुएट्स’ के माध्यम से अन्य यूजर्स के साथ जुड़ने और घुलने-मिलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है - उपयोगकर्ता वीडियो डुप्लीकेट कर सकते हैं और खुद को एड कर सकते हैं।

इस ऐप पर हैशटैग्स एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां, हैशटैग वास्तव में विभिन्न ‘चैलेंज,’ या जोक्स, अथवा रिपीटिंग फॉर्मेट्स के लिए एक असली, फंक्शनल ऑर्गनाइजिंग प्रिंसिपल के रूप में मौजूद हैं। निर्बाध इंटरफेस उपयोगकर्ताओं के लिए फिल्टर्स की लंबी-चौड़ी कतार का इस्तेमाल करते हुए रचनात्मक ढंग से वीडियो बनाने और एडिट करने के लिहाज से एक ऐड-ऑन है।

EORtV के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर दीपक पांडेय कहते हैं, ‘दो ऐप्स को एकीकृत करने वाला भारत के पहले प्लेटफॉर्म को पेश करते हुए हमें बेहद खुशी है। हमारी मंशा इसे एक बेहतरीन भारतीय ऐप बनाने की है, जिस पर उपयोगकर्ता ज्यादा से ज्यादा लाइक्स, कमेंट्स और फॉलोअर्स पाने के लिए अपने वीडियो स्टेटस शेयर कर सकते हैं। हम अपनी आगामी ओरिजिनल वेब सीरीज में काम करने के लिए प्रतिभाशाली यूजर्स का चयन भी करेंगे। जल्द ही हम EORtV पर एग्री-टीओके के रूप में कृषि के साथ रिश्ता बनाने वाले हैं।’

EORtV के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. कौशिक इज़ारदार का कहना है, 'हम ईओआरटीओके को जेनरेशन ज़ेड के लिए इंटरनेट कल्चर और सोशल इंटरैक्शन की खास जगह बनाने के लिए काम कर रहे हैं। यहां यूजर्स एक्टिंग, सिंगिंग, म्यूजिक पर डांस से जुड़े टैंलेंट हंट ऑडिशंस में हिस्सा ले रहे हैं, अपने कॉमेडिक स्किट का प्रदर्शन कर रहे हैं, और समाज को लेकर विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी राय साझा कर रहे हैं। ईओआरटीओके सोशल मीडिया ऐप भारत को प्रतिभाओं का पावरहाउस बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को साकार करने की दिशा में एक कदम है। EORtOK उन प्रतिभाओं को पहचानने और कामयाबी दिलाने के लिए एक छोटी कोशिश है। यह उन्हें आगे लेकर आएगा।’

 

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पत्रकार की हत्या के दो दिन बाद अब इस अखबार के दफ्तर पर चलीं गोलियां

गनीमत रही कि इस गोलीबारी में कोई घायल नहीं हुआ। दरअसल, कोरोनावायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण हमले के समय अखबार के दफ्तर में कोई नहीं था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2020
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2020
Firing

देश-विदेश में पत्रकारों व मीडिया संस्थानों पर हमले की खबरें आए दिन सुनने को मिलती हैं। इसी कड़ी में अब एक घटना और जुड़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेक्सिको सिटी के इगुआला (Iguala) शहर में मंगलवार को अज्ञात हमलावरों ने एक अखबार के कार्यालय पर गोलीबारी कर दी। इससे दो दिन पूर्व ही शहर में एक अन्य अखबार के पत्रकार व उसकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘Diario de Iguala’ नामक अखबार के दफ्तर पर हुए इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ है। अखबार का कहना है कि कोरोनावायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से अखबार के दफ्तर में उस दौरान कोई नहीं था।  

अखबार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वह क्राइम और हिंसा से जुड़ी स्टोरीज पब्लिश नहीं करता है और इस हमले का उसके एडिटोरियल कंटेंट से कोई लेना-देना नहीं है। इस मामले में आंतरिक सचिव ओल्गा सैंचेज़ कोर्डेरो (Olga Sánchez Cordero) ने एक ट्वीट कर कहा है, ‘हम इस हमले की निंदा करते हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक शांति की गारंटी देना मैक्सिकन सरकार की प्राथमिकता है।’  

बता दें कि इससे पहले रविवार को इगुआला स्थित एक रेस्टोरेंट में डिनर कर रहे एक पत्रकार पाब्लो मोरुगारेस  (Pablo Morrugares) और उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मोरुगारेस ‘P.M Noticias Guerrero’ नामक वेबसाइट के डायरेक्टर थे, जो राज्य में होने वाली गैंग वॉर पर लगातार रिपोर्ट पब्लिश करती रहती है। बताया जाता है कि वर्ष 2016 में भी मोरुगारेस और उनकी पत्नी पर हमला हुआ था, जिसमें वह बच गए थे। इसके बाद उन्हें पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।

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A+E Networks | TV18 में करिश्मा धवन की नियुक्ति, संभालेंगी ये पद

करिश्मा धवन ने अपनी पहली पारी में नेटवर्क18 में बारह साल बिताए हैं। वे टीम मैनेजमेंट और बिजनेस डेवलपमेंट में अपनी स्किल के लिए जानी जाती हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2020
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2020
Dhawan

‘ए+ई नेटवर्क । टीवी18’ (A+E Networks | TV18) में करिश्मा धवन रेवन्यू हेड का पदभार संभालेंगी। इसके अलावा वे नेटवर्क की एंटरटेनमेंट क्लस्टर की प्रभारी होंगी। वे ‘ए+ई नेटवर्क । टीवी18’ (A+E Networks | TV18) के मैनेजिंग व नेटवर्क18 के ब्रॉडकास्ट के सीईओ अविनाश कौल को रिपोर्ट करेंगी।

उनकी नियुक्ति को लेकर अविनाश कौल ने कहा, ‘करिश्मा एक दशक से अधिक समय से नेटवर्क18 परिवार का हिस्सा रही हैं और उनका एक बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि विभिन्न माध्यमों में उनके अनुभव का हमें लाभ मिलेगा और हम अपने ब्रैंड्स को लगातार आगे बढ़ाते रहेंगे और एंटरटेनमेंट जॉनर में लीडरशिप हासिल करेंगे।’

धवन ने अपनी पहली पारी में नेटवर्क18 में बारह साल बिताए हैं। वे टीम मैनेजमेंट और बिजनेस डेवलपमेंट में अपनी स्किल के लिए जानी जाती हैं। अब वे ‘ए+ई नेटवर्क । टीवी18’ (A+E Networks | TV18) ब्रैंड्स में डिस्प्ले एंड फोकस सेल्स की जिम्मेदारी संभालेंगी।

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अभिव्यक्ति की आजादी और अवमानना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण व ‘तहलका’ मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल के मामले की सुनवाई कर रही थी सुप्रीम कोर्ट की बेंच

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2020
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2020
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और ‘तहलका’ मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को स्पष्ट किया कि अगर वह उनके स्पष्टीकरण या माफी को स्वीकार नहीं करता है तो दोनों के खिलाफ 2009 के आपराधिक अवमानना के मामले की सुनवाई की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशांत भूषण को नसीहत देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी और अवमानना में बारीक अंतर है। दरअसल, प्रशांत भूषण ने ‘तहलका’ मैगजीन को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 16 जीफ जस्टिसों पर तमाम आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2009 में प्रशांत भूषण और तरुण तेजपाल के खिलाफ अवमानना के नोटिस जारी किए थे।

अब मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण के वकील ने पक्ष रखा, जबकि तरुण तेजपाल ने माफी मांग ली। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कोर्ट को प्रशांत भूषण और तेजपाल से अभी तक किसी भी तरह का स्पष्टीकरण अथवा माफीनामा नहीं मिला है और इसे स्वीकार करने या नहीं करने के बारे में वह अपना आदेश सुनाएगा। बेंच अब ये तय करेगी कि दोनों की माफी स्वीकार की जाए या फिर उन पर अवमानना की कार्रवाई हो।

सुनवाई के दौरान भूषण की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन का कहना था कि इसमें बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी भी है और न्यायालय की अवमानना भी है। पीठ ने कहा, ‘आप बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के लिये खड़े हुये हैं लेकिन हो सकता है कि आप अवमानना की बारीक लाइन लांघ गये हों। हम इस व्यवस्था की गरिमा की रक्षा कैसे करें? मैं न्याय मित्र के रूप में आपसे जानना चाहता हूं ताकि हम इस टकराव को टाल सकें। हमें आप कुछ सुझाव दीजिये क्योंकि यह व्यवस्था आपकी भी है।’ पीठ का यह भी कहना था कि वह बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी पर किसी तरह का अंकुश नहीं लगाना चाहती लेकिन अवमानना के लिये बहुत बारीक लाइन है।

बता दें कि शुक्रवार को प्रशांत भूषण, वरिष्ठ पत्रकार एन राम और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी द्वारा एक याचिका दायर कर अवमानना कानून में सेक्शन 2(c)(i) की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत उन्हें बोलने की आजादी है। इस पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशांत भूषण से कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी और अवमानना के बीच बारीक अंतर है। वहीं इससे पहले 22 जुलाई को बेंच ने न्यायपालिका के कथित अपमान को लेकर किए गए प्रशांत भूषण के दो ट्वीट्स का स्वत: संज्ञान लिया था। उस दौरान बेंच ने कहा था कि प्रथम दृष्टया उनके बयानों से न्यायिक प्रशासन की बदनामी हुई है।

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जानें, इन तीन महीनों में जागरण प्रकाशन का कैसा रहा हाल

‘जागरण प्रकाशन’ समूह ने इस साल जून में समाप्त हुई पहली तिमाही (Q1FY21) के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं।

Last Modified:
Tuesday, 04 August, 2020
Jagran

‘जागरण प्रकाशन’ (Jagran Prakashan) समूह ने इस साल जून में समाप्त हुई पहली तिमाही (Q1FY21) के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। इन नतीजों के अनुसार इसका समेकित कुल राजस्व (Consolidated net revenue) पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY20) में 584.28 करोड़ रुपये से साल दर साल (yoy) 67.3 प्रतिशत घटकर 191.09 करोड़ रुपये हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोटे तौर पर कोविड-19 के कारण देश में हुए लॉकडाउन के कारण कुल रेवेन्यू प्रभावित हुआ है।

‘Earnings before interest, tax, depreciation and amortization’ (EBITDA) की बात करें तो इसमें बहुत ज्यादा यानी निगेटिव में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY20) में जहां यह 141.1 करोड़ रुपये था, वहीं इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY21) में साल दर साल (yoy) 124.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 34.23 करोड़ रुपये रह गया।

इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY21) में कंपनी को समेकित कुल नुकसान (consolidated net loss) 44.31 करोड़ रुपये का हुआ जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY20) में कंपनी ने 65.75 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया था। ऐसे में कुल लाभ का अंतर (net profit margin) इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में निगेटिव पर आ गया और यह साल दर साल (yoy) घटकर 23.19 दर्ज किया गया। पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में कुल लाभ का अंतर (net profit margin) 11.25 प्रतिशत था।  

कंपनी के विज्ञापन राजस्व (print, radio & digital) की बात करें तो इस तिमाही में साल दर साल (YoY) 74.8 प्रतिशत की कमी आई है और यह घटकर 108.7 करोड़ रुपये रह गया है। अन्य परिचालन राजस्व में भी साल दर साल 81.3 प्रतिशत की कमी आई है और यह 8.27 करोड़ रुपये रह गया है। प्रिंट के विज्ञापन राजस्व में साल दर साल 75.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 86.0 करोड़ रुपये रह गया है, जबकि सर्कुलेशन रेवेन्यू में साल दर साल (YoY) 32.1 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 74 करोड़ रुपये रह गया है।

हालांकि, प्रिंट के सर्कुलेशन और ऐड रेवेन्यू में पहली तिमाही में महीना दर महीना (month on month) क्रमिक सुधार देखा गया है। जून में कोविड-19 से पहले के मुकाबले ऐड रेवेन्यू 35 प्रतिशत और सर्कुलेशन रेवेन्यू 80 प्रतिशत वापस आ गया। सर्कुलेशन रेवेन्यू में साल दर साल (YoY) 31.8 प्रतिशत की कमी आई और यह 108.6 करोड़ के मुकाबले घटकर 74 करोड़ रुपये रह गया।  

इस तिमाही के दौरान डिजिटल रेवेन्यू तुलनात्मक रूप से लचीला बना रहा और इसमें साल दर साल 15.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 9.2 करोड़ रुपये रहा। तमाम डिजिटल पहल जैसे- दैनिक जागरण और मिड-डे के ई-पेपर फॉर्मेट को सबस्क्रिप्शन के तहत लाया गया। इसके अलावा यूनिक यूजर बेस में 107 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 108 मिलियन हो गया, जिसने परिचालन घाटे (operating losses) को पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में दो करोड़ रुपये से इस तिमाही में एक करोड़ रुपये तक लाने में कम करने में मदद की।

म्यूजिक ब्रॉडकास्ट की बात करें तो इस तिमाही में रेवेन्यू में साल दर साल (YoY) 79.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 14.3 करोड़ रुपए रहा और पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में  22.4 रुपये EBITDA के मुकाबले 15.3 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग लॉस दर्ज किया गया।   

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एडिटर की गिरफ्तारी से भारतीय पत्रकार संघ खफा, की तुरंत रिहा करने की मांग

दक्षिण कश्मीर की न्यूज वेबसाइट ‘द कश्मीरियत’ के एडिटर काजी शिब्ली को पुलिस के साइबर अपराध विभाग द्वारा पूछताछ के बाद सोमवार को हिरासत में लिया गया

Last Modified:
Tuesday, 04 August, 2020
editor54

दक्षिण कश्मीर की न्यूज वेबसाइट ‘द कश्मीरियत’ के एडिटर काजी शिब्ली को पुलिस के साइबर अपराध विभाग द्वारा पूछताछ के बाद सोमवार को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उन्हें श्रीनगर के केंद्रीय कारागार में भेज दिया गया है।

काजी शिब्ली पर आपराधिक दंड संहिता की धारा 107 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

वहीं दूसरी तरफ, भारतीय पत्रकार संघ (IJU) ने संपादक काजी शिब्ली को तुरंत हिरासत से रिहा किए जाने की मांग की है।

अनंतनाग निवासी शिब्ली को शुक्रवार को श्रीनगर पुलिस ने पेश होने के लिए समन जारी किया था। शिब्ली अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ पुलिस के समक्ष पेश हुए और पूछताछ के बाद नये शहर के शेरगारी थाना में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। सोमवार को शिब्ली को श्रीनगर केंद्रीय कारागार भेज दिया गया।

हालांकि अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि केंद्रीय कारागार में भेजे जाने से पूर्व शिब्ली को किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था या नहीं।

IJU ने उल्लेख किया है कि पिछले साल जुलाई के अंत में जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती किए जाने के बारे में एक ट्वीट करने के बाद, शिब्ली को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत नौ महीने के लिए यूपी के बरेली जेल में बंद कर दिया गया था। बाद में उन्हें देशभर की अलग-अलग जेलों में रखा गया था। हालांकि, उन्हें इस साल 13 अप्रैल को रिहा कर दिया गया था।

एक बयान में, IJU के अध्यक्ष गीतार्थ पाठक और IJU की महासचिव सबीना इंद्रजीत ने गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा कि पिछले साल 5 अगस्त के बाद से जब से अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया गया था, तब से जम्मू-कश्मीर के अधिकारी लगातार पब्लिक सेफ्टी एक्ट का दुरुपयोग कर रहे हैं।

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