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सरकार-सेना में टकराव की खबर देने वाले पत्रकार पर आ पड़ी मुसीबत...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। दुनिया भर में अकसर ये देखने को मिला है कि जिन पत्रकारों की कलम ने राज्य की नीतियों की आलोचना की है उन्हें हुकूमतों ने दबाने और धमकाने की कोशिश की है। ऐसा ही एक ताजा मामला पाकिस्तान में देखने को मिला है। पाकिस्तान सरकार की गोपनीय बैठक की खबर
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया भर में अकसर ये देखने को मिला है कि जिन पत्रकारों की कलम ने राज्य की नीतियों की आलोचना की है उन्हें हुकूमतों ने दबाने और धमकाने की कोशिश की है। ऐसा ही एक ताजा मामला पाकिस्तान में देखने को मिला है। पाकिस्तान सरकार की गोपनीय बैठक की खबर छापने वाले पाकिस्तानी पत्रकार सिरिल अलमिदा मुश्किल में पड़ गए हैं। उनके देश छोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
‘द डॉन’ में सिरिल अलमिदा जो कि असिस्टेंट एडिटर के पद पर हैं, उन्होंने एक ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। सेरिल ने ट्वीट किया कि उन्हें पाक की 'एग्जिट कंट्रोल लिस्ट' में उस समय रख दिया गया जब कुछ दिनों पहले उन्होंने सरकार और सेना के मतभेदों से जुड़ी एक फ्रंट पेज स्टोरी की थी।
I am told and have been informed and have been shown evidence that I am on the Exit Control List.
— cyril almeida (@cyalm) October 10, 2016
सिरिल ने खुद पर किसी बड़े संकट का अंदेशा भी जताया है। ट्विटर के जरिए उन्होंने आशंका जताई है कि 24 घंटे से एक्जिट कंट्रोल लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद उनके खिलाफ अब सरकार कोई भी बुरा कदम उठा सकती है।
Am concerned, possibly convinced, more than 24hrs after the travel ban was imposed that govt is planning to take further, uglier actions. — cyril almeida (@cyalm) October 11, 2016
बता दें कि सिरिल अलमिदा की 6 अक्टूबर को डॉन अखबार के फ्रंट पेज पर एक खबर छपी थी, जिसमें उन्होंने पाक सरकार और सेना-आईएसएआई के बीच एक बैठक होने का बात कही थी, जिसमें भारत के ‘सर्जिकल स्ट्राइक्स’ और पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग होने का जिक्र था। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया था कि- पाक सरकार ने आईएसआई से कहा था कि आतंकी समूहों को उसके समर्थन के कारण देश वैश्विक रूप से अलग-थलग पड़ रहा है। अगर उसकी दखलअंदाजी जारी रही तो हालात और बिगड़ेंगे।
अपनी रिपोर्ट में उन्होंने यह भी बताया था कि पाकिस्तान के राजनेताओं और फौजी अफसरों के बीच तनाव का माहौल भी बन गया है।
हालांकि पाकिस्तान की सरकार ने इस खबर का पुरजोर तरीके खंडन किया था और इसे बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया था, लेकिन अखबार के संपादक की ओर से सिरिल का समर्थन करते हुए यही कहा गया था कि उन्होंने जो लिखा उसकी सत्यता की जांच-परख की गई थी। जिसके बाद बौखलाई पाक सरकार ने अलमिदा के देश छोड़ने पर रोक लगा दी।
हालांकि इसके बाद अलमिदा ने उनके देश से बाहर जाने पर लगाई रोक पर कहा, ‘मैं इस खबर से दुखी और परेशान हूं। मेरा देश छोड़कर कहीं जाने का कोई इरादा नहीं है। यह (पाकिस्तान) मेरा घर है।
Puzzled, saddened. Had no intention of going anywhere; this is my home. Pakistan.
— cyril almeida (@cyalm) October 11, 2016
पाकिस्तानी मीडिया का एक धड़ा तो अलमिदा के खिलाफ खड़ा दिख रहा है। एक अखबार ने तो उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ को एजेंट तक करार दिया। पाकिस्तान के कई पत्रकारों ने अलमिदा के साथ-साथ डॉन को भी दंडित करने की जरूरत जताई, लेकिन पत्रकार नजम सेठी, पूर्व राजनायिक हुसैन हक्कानी आदि ने उन पर पाबंदी की निंदा की है।
वहीं पाकिस्तान के कई बड़े पत्रकार इसे लेकर लगातार अपना विरोध जता रहे हैं। जियो टीवी के हामिद मीर ने कहा कि किस सरकारी अधिकारी ने बैठक की बातें लीक कीं? उसका नाम ईसीएल लिस्ट में शामिल क्यों नहीं है? किसने जुर्म किया? पत्रकार या अधिकारी?
वहीं इस बीच, ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ (सीपीजे) ने पाकिस्तान से अलमिदा पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध को तत्काल हटाने का अनुरोध किया है।
अलमिदा पर पाबंदी की चौतरफा आलोचना इसलिए भी हो रही है क्योंकि इससे अल्पसंख्यक समुदाय में गलत संदेश गया है। अलमिदा गोवा मूल के कैथोलिक ईसाई भी हैं। उनके पूर्वज गोवा के रहने वाले थे जो विभाजन से पहले ही कराची चले गए थे।
यह वो वक्त था जब कराची 'बॉम्बे प्रेसिडेंसी' का हिस्सा हुआ करता था। भारत के विभाजन के बाद उनके परिवार ने कराची में ही रहने का फैसला किया। कराची में गोवा से जाकर बस चुके लोगों की अपनी बड़ी कॉलोनी थी, जो आज भी है, लेकिन वहां अब चंद ईसाई ही बचे हैं। गोवा कला व साहित्य सम्मलेन 2015 के दौरान 'टाइम्स आफ इंडिया' अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने गोवा कनेक्शन का जिक्र किया था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की है, लेकिन उन्हें यह पेशा रास नहीं आया इसलिए पत्रकारिता में आ गए।
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