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पीएम संग अरनब के इंटरव्यू पर वरिष्ठ पत्रकारों ने दी अपनी राय...

अभिषेक मेहरोत्रा ।। आज सुबह से ही प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर अरनब गोस्वामी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लिया गया इंटरव्यू चर्चा में है। ये देश के किसी भी प्रधानमंत्री द्वारा किसी निजी टीवी चैनल को दिया गया पहला इंटरव्यू है। इस इंटरव्यू के बारे में हमने

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

अभिषेक मेहरोत्रा ।।

आज सुबह से ही प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर अरनब गोस्वामी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लिया गया इंटरव्यू चर्चा में है। ये देश के किसी भी प्रधानमंत्री द्वारा किसी निजी टीवी चैनल को दिया गया पहला इंटरव्यू है। इस इंटरव्यू के बारे में हमने देश के प्रतिष्ठित पत्रकारों से बात की। पढ़िए इस इंटरव्यू पर उनकी प्रतिक्रिया...

आलोक मेहता, प्रधान संपादक, आउटलुक(हिंदी): पहले तो मैं स्वागत करता हूं प्रधानमंत्री की इस पहल का कि उन्होंने किसी सरकारी चैनल के बजाए इस बार निजी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के साथ बात की। अरनब गोस्वामी को ये बड़ा मौका मिला, पर ये इंटरव्यू कुछ ज्यादा ही सोफिस्टिकेटेड लगा। मैं मानता हूं कि आप प्रधानमंत्री के साथ आक्रामक भाषा में बात नहीं कर सकते हैं, पर उनसे तमाम ऐसे विषयों पर सवाल पूछना ही चाहिए जो देश में चर्चा का विषय है। इंटरव्युअर सवाल पूछना का अपना काम करें, प्रधानमंत्री अगर असहज होंगे तो जवाब देने से मना कर सकते थे। इस इंटरव्यू को देखकर लग रहा था कि दोनों तरफ से संतुलन बनाया जा रहा है। सुरक्षित भाव से बातचीत हो रही थी। वैसे प्रधानमंत्री का इंटरव्यू के दौरान ये कहना कि वे सिर्फ चुनाव के समय ही राजनीति सोचते हैं, ये शब्द भी एक राजनेता के लिए पराकाष्ठा की सीमा से ज्यादा लग रहे थे। इस इंटरव्यू में और खुलापन होना चाहिए था, प्रधानमंत्री को खुंद अरनब से कहना चाहिए कि आप हर तरह का सवाल पूछिए, मैं आपके जरिए देश की जनता को हर बात का जवाब दूंगा। ऐसा करने से दोनों की साख बढ़ती।

राजीव सचान, असोसिएट एडिटर, दैनिक जागरण:  मेरा कहना है कि ये कहना कि अरनब गोस्वामी ने प्रधानमंत्री मोदी से ये सवाल, वो फलां सवाल नहीं पूछा, इसके लिए उनकी आलोचना की जाए, न्यायसंगत नहीं है। इस इंटरव्यू को लेकर बेवजह की नुक्ताचीनी की जा रही है। कुछ कह रहे है कि दिल्ली सरकार के संबंध में अरनब ने कोई सवाल नहीं पूछा, तो इस देश में 29 राज्य है, फिर तो 29 सवाल तो राज्यों के ही पूछे जाने चाहिए। ये इंटरव्यू लेने वाला का अधिकार है कि वे किस तरह के सवालों को महत्व देता है। जब भी कोई पत्रकार कोई बड़ा इंटरव्यू लेता है तो उसकी कोशिश होती है कि उसका इंटरव्यू हेडलाइन भी बने। ऐसे में पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध, काला धन, स्वामी को लेकर पूछे गए सवाल आदि रेलिवेंट थे, जिसके जवाब आज हेडलाइन के तौर पर दिखे भी है। ऐसे में ये इंटरव्यू कसौटी पर खरा उतरा है। कई पत्रकार सिर्फ इस चिढ में कि ये इंटरव्यू उन्हें नहीं दिया गया और अरनब को दिया गया, इसलिए इसकी बेवजह आलोचना कर रहे हैं। अगर काला धन, डिफॉल्टर्स पर सरकार का रुख जैसे अहम विषय छूट जाते तो कहा जाता कि इनके बारे में क्यों नहीं सवाल पूछा गया। हां प्रधानमंत्री का ये कहना कि मीडिया के डर के कारण आजकल नेताओं के बीच हास्य कम हुआ है, उचित ही है। आजकल मीडिया जिस तरह से तमाम बयानों और मुहावरों को लेकर अपनी अपरिपक्ता दिखा रही है वे स्वंय मीडिया के लिए ही खतरनाक है। किसी भी बात को संपूर्ण परिपेक्ष्य में न समझकर सिर्फ उसमें से सनसनी ढूंढना, कई पत्रकारों की फितरत बन गई है। मोदी ने एक बार कहावत के तौर पर कहा कि 56 इंच का सीना जिसका अर्थ होता है कि साहसी होना पर एक मीडिया हाउस के रिपोर्टर ने उनके टेलर से बात कर लिखा कि उनका सीना तो 44 इंच का है, अब ऐसे में अगर हम मुहावरों और कहावतों को भी अर्थ नहीं समझ पा रहे हैं, तो ये मीडिया की ही इम्मैच्युरिटी को दर्शा रहा है।

प्रमोद जोशी, पूर्व संपादक, हिन्दुस्तान (दिल्ली): मेरी समझ से प्रधानमंत्री का ये इंटरव्यू कई शर्तों के बाद हुआ होगा। अरनब इंटरव्यू के दौरान कुछ ज्यादा ही सॉफ्ट दिख रहे थे। पर देश के तेज-तर्रात पत्रकार अरनब को प्रधानमंत्री ने इंटरव्य के लिए चुना, ये स्वागतयोग्य है। वैसे मैने पहले भी कई प्रधानमंत्रियों के साथ होने वाले इंटरव्यू को करीब से देखा है, तो ये कह सकता हूं कि मीडिया, सरकार और सिस्टम की वास्तविकता यही है कि इस तरह की इंटरव्यू तभी संभव है, जब दोनों पक्ष कुछ शर्तों को मानते हैं।

अनुरंजन झा, वरिष्ठ पत्रकार

कल से कई तड़प रहे हैं ... इंटरव्यू लेते वक्त अरनब ने मोदी को गरियाया क्यों नहीं...? हड़काया क्यों नहीं...? देश के प्रधानमंत्री का इंटरव्यू करते हुए मर्यादा का ख्याल रखा अरनब ने... कुछ सवाल छूट गए हों तो आप कर लो ... किसने रोका है...?


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