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राष्ट्रवादी मीडिया ने किया ‘कश्मीर चलो’ का आह्वान
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। दुनिया में कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। लेकिन बीते कुछ दिनों से यहां हालात ठीक नहीं हैं। आतंकी बुरहान की मौत के बाद लागातार हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। आतंकी भारत से कश्मीर की आजादी के लिए घाटी में जिहाद का नारा बुलंद कर रहे हैं। कश
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया में कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। लेकिन बीते कुछ दिनों से यहां हालात ठीक नहीं हैं। आतंकी बुरहान की मौत के बाद लागातार हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। आतंकी भारत से कश्मीर की आजादी के लिए घाटी में जिहाद का नारा बुलंद कर रहे हैं। कश्मीर के हालातों को देखते हुए अब राष्ट्रवादी मीडिया ‘कश्मीर चलो’ का आह्वान करने जा रहा है, ताकि यहां पर शांति बनाई जा सके। इसके तहत पत्रकार और देश के जाने माने खिलाड़ियों का एक दल भी कश्मीर की ओर रुख करेगा।
यह दल 15 अगस्त को लाल चौक पर तिरंगा फहराएगा और यहां से आमजन को संबोधित करेगा। इसके बाद प्रधानमंत्री को एक पत्रक सौंपा जाएगा। पत्रकारों ने आमजन से भी कश्मीर साथ चलने की अपील की है।
इसी के मद्देनजर वरिष्ठ खेल पत्रकार पदमपति शर्मा ने प्रधानमंत्री के नाम एक खुला खत लिखा है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं:
श्रीयुत नरेंद्र दामोदर दास मोदी प्रधान मंत्री भारत सरकार नयी दिल्ली
मान्यवर,
पत्रकारिता की चार दशकीय यात्रा के बाद भी इस प्रश्न से बार बार रूबरू होना पड़ता है कि हम पेशेवरों की वास्तविक भूमिका क्या है ? देश के प्रति हमारी भी कोई जिम्मेदारी है क्या, या हमारे हिस्से सिर्फ राजनैतिक ठेकेदारों की देश के नाम पर की जा रही सार्थक कोशिशों या खिलवाड़ों को भिन्न चश्में से समाचार का जामा पहनाना ही रह गया है ? लगता तो यही है कि हम भी उतने ही स्वदेशी हैं, उतने ही भारतवंशी हैं, जितने बाकी उद्योग धंधे वाले. एक पत्रकार जिस जिले में काम करता है, वह उस जिले को ही देश नहीं मानता. उसे पूरा अहसास है कि जिले का पिता प्रदेश है और हम सभी का माई बाप स्वदेश है. हमें महज राष्ट्रवादी मत कहिए, हमें संप्रभु स्वदेशी कहिए.
हमारे देश और भारत माता के कान में इन दिनों तकलीफ है.भौगोलिक मानचित्र को देखें तो शरीर का वह अभिन्न अंग 'कान' कश्मीर है. कान में जलन है, चुभन है, असहनीय वेदना है और उससे खून बह रहा है. स्वाभाविक ही है कि पूरा शरीर प्रभावित होगा. भारत माता के संपूर्ण शरीर के अंगों में व्याप्त गहन पीड़ा दूर करने में 'समाज चिकित्सक' पत्रकारों की एक बड़ी भूमिका है. पत्रकार संवेदना व्यक्त कर सकता है कि नहीं, यह तो पता नहीं पर वह व्यथित तो हो ही सकता है.
कश्मीर के गर्भ से निकली मिलिटेंसी के खाद पानी का नापाक प्रयोग कभी बर्दाश्त के दायरे में रहा. मगर आज सीधे सीधे हमारे बच्चों को आतंक का मादक द्रव्य पाकिस्तान ने खिलाना शुरू कर दिया है. पता नहीं राजनेता निजी हित के पैमाने पर इसे क्या मानते हैं. मगर हम पत्रकारों और खिलाड़ियों का यह मानना है कि हमारी युवा पौध को मौत का सामान नहीं चाहिए, उसे जिंदगी का पैगाम चाहिए. हम पत्रकारों ने विभिन्न खेलों के स्वनामधन्य खिलाड़ियों के साथ मिल कर तय किया है कि हम अपने संवेगों की मृत संजीवनी के साथ 15 अगस्त 2016 को पूरे देश से चल कर श्रीनगर पहुंचे और कश्मीर को बताएं - " देश मिट्टी से निर्मित नहीं भावनाओं से है बना, टूटने पर टूटने का भान होना चाहिए, देश के हर व्यक्ति में अभिमान होना चाहिए, नित वंदेमातरम का गान होना चाहिए.
हम कलम के सिपाही हैं. इसलिए जुल्म का सिर उठने पर तलवार नहीं उठाते. हम कभी नहीं भूले कि मादर-ए-तालीम के पैदल अपने फाजिल अल्फाजों के जरिए ही फ्रांसीसी क्रांति की पटकथा लिखी गयी थी. उसी तरह कश्मीर में भी अलगाववादी हरकतों पर हम समझदारी की चादर तानेगें, घाव भरेंगे और फिर सबके साथ कश्मीरी या डोंगरी में गुनगुनाएंगें - " हिंदी है हम, वतन है हिंदोस्तां हमारा."
मोदी जी हम पत्रकारों के पीछे आम जन भी होंगे पर अनुशासित. विश्वास कीजिए कि हम किसी भी तरह की उत्तेजना नहीं फैलाएंगे. इस पत्र के माध्यम से हमने सबसे पहले आपको सूचित करना अपना धर्म समझा. यदि प्रशासन ने हमारी भावनाओं में छिपी सदाशयता को समझा तो ठीक, लेकिन यदि हमें गिरफ्तार किया गया तो हम प्रतिरोध भी नहीं करेंगे. हम शांति के लिए जा रहे हैं, अशांति फैलाने नहीं. हमें पूर्ण विश्वास है कि इस अभियान को सफल बनाने में आपकी सकारात्मक सजग भूमिका होगी. वंदे मातरम
नोट : मोदीजी हम किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े है . हम किसी पत्रकार संघटन के छतरी तले यह अभियान नहीं करने जा रहे . हम वो पत्रकार और खिलाड़ी हैं जो चीजों को चश्मे से नहीं देखते. निष्पक्षता ही हमारी थाती है. व्हाट्सप पर हमारे तीन ग्रुप क्रमश: स्पोर्ट्स, स्पोर्टिंग बाहुबली और चौपाल हैं. इनसे सैकड़ो पत्रकार और खिलाड़ी जुड़े हैं. इन्हीं की ओर से देश हित में यह अनुष्ठान किया जाना है.
भवदीय
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