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सोशल मीडिया पर ‘भिड़े’ RJ रौनक और गिन्नी, इस तरह उलझ पड़े 'फैन'
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए हमले को लेकर देश में गुस्सा है और यह...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए हमले को लेकर देश में गुस्सा है और यह गुस्सा सोशल मीडिया पर भी जमकर बयां किया जा रहा है। ‘एनडीटीवी’ की पत्रकार निधि सेठी इस विषय पर विवादित टिप्पणी को लेकर निलंबन झेल रही हैं, वहीं दो रेडियो जॉकी भी आपस में उलझ गए हैं। ‘रेडियो सिटी’ की आरजे गिन्नी और ‘रेड एफम’ के आरजे रौनक के बीच ट्विटर पर वैचारिक द्वंद्व चल रहा है।
दरअसल, रौनक जहां कड़ी कार्रवाई के पक्षधर हैं, वहीं गिन्नी की नज़र में हिंसा का जवाब हिंसा नहीं। बस, इसी बात को लेकर दोनों में ट्वीट का आदान-प्रदान हो रहा है। इस द्वंद्व की शुरुआत आरजे रौनक के उस ट्वीट से हुई, जिसमें उन्होंने पुलवामा हमले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा ‘Peace नहीं, pieces चाहिए।’ रौनक के इस ट्वीट को सोशल मीडिया यूजर्स का भारी समर्थन मिला। इसे अब तक चार हजार से ज्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है।
हालांकि आरजे गिन्नी को रौनक का यह अंदाज़ पसंद नहीं आया। उन्होंने इसके जवाब में ट्वीट किया ‘माफ करें रौनक, लेकिन अभी हमें इसकी ज़रूरत नहीं है...हम सभी को प्रतिक्रिया देना बंद करना चाहिए और सरकार को उसका काम करने देना चाहिए, हमें सरकार पर विश्वास रखने की ज़रूरत है। इस तरह की हिंसा की बात करने से कुछ होने वाला नहीं है।’
हालांकि, गिन्नी ने भी इसका दमदार जवाब दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा ‘सर मेरा कहना है कि सरकार और सेना पर भरोसा रखें...मैं शर्म करूँ...तो फिर हमें किस पर भरोसा करना चाहिए’? वहीं, ‘द क्विंट’ से जुड़ीं वात्सल्य सिंह ने गिन्नी का समर्थन किया है, इसके साथ ही उन्होंने रौनक की भाषा पर भी आपत्ति जताई है। वात्सल्य ने लिखा है ‘मैं आपसे बिल्कुल सहमत हूं गिन्नी। एक लोकप्रिय आरजे को इस तरह की भाषा का प्रयोग करते देखना दुखद है। मैंने स्कूल और कॉलेज में उनके कार्यक्रमों को सुना, और मैं बहुत निराश हूं। यह कोई नहीं बता सकता कि उस माइक के पीछे कोई कट्टर व्यक्ति बैठा है।’
गिन्नी के जवाब का रौनक ने भी अपने ही अंदाज़ में जवाब दिया। उन्होंने कहा ‘आपको माफ़ी मांगनी चाहिए गिन्नी, ये पॉइंट आपको समझ भी नहीं आएगा। आपके हिसाब से ये हिंसा है? वाह! कल उस हमले में मेरे पहचान का एक शहीद हुआ है! पर आपकी ग़लती नहीं है, एक आम हिंदुस्तानी की भावनाओं को बुद्धिजीवी के लिए का समझना मुश्किल है! आप कैंडल ख़रीदिए! बाक़ी सेना तो है ही’!
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