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BW EXCLUSIVE: पीएम संग अरनब का इंटरव्यू तो देखा, अब इस पर पढ़िए अरनब के 'मन की बात'
टाइम्स नाउ और ईटी नाउ के प्रेजिडेंट-न्यूज और एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने पीएम मोदी के साथ अपने बहुचर्चित इंटरव्यू पर देश की लोकप्रिय बिजनेस मैगजीन बिजनेस वर्ल्ड (BW) के लिए इस इंटरव्यू को लेकर एक एक्सक्लूसिव लेख लिखा है। अंग्रेजी में लिखे इस लेख को हम अपने पाठकों के लिए हिंदी में अनुवादित कर करे हैं...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
टाइम्स नाउ और ईटी नाउ के प्रेजिडेंट-न्यूज और एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने पीएम मोदी के साथ अपने बहुचर्चित इंटरव्यू पर देश की लोकप्रिय बिजनेस मैगजीन बिजनेस वर्ल्ड (BW) के लिए इस इंटरव्यू को लेकर एक एक्सक्लूसिव लेख लिखा है। अंग्रेजी में लिखे इस लेख को हम अपने पाठकों के लिए हिंदी में अनुवादित कर करे हैं...
अरनब गोस्वामी ।।
सोमवार के दिन दोपहर होने से कुछ समय पहले जब मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपना इंटरव्यू शुरू किया तो उसकी पहली न्यूज फ्लैश दोपहर दो बजे से शुरू की और 4 बजे तक हम क्लिप की पहली झलक और प्रोमोज जारी कर चुके थे। इसके बाद 6 बजे पूरे इंटरव्यू का प्रसारण किया गया, ये रात 9 बजे फ्रैंकली स्पीकिंग(Frankly Speaking)के तहत प्रसारित होने वाले पूरे एपिसोड के पहले की पेशकश थी।
अगले दिन सुबह, प्रधानंमत्री का इंटरव्यू पूर देश की मीडिया का चर्चा का विषय था। मैं बिलकुल ही आश्चर्यचकित नहीं था क्योंकि, एनएसजी से लेकर चीन, पाकिस्तान से लेकर राजन, स्वामी से लेकर महंगाई, ध्रुवीकरण की राजनीति, उत्तर प्रदेश चुनाव, संसद गतिरोध, बेरोजगारी, जीएसटी, कालाधन और सभी के खातों में 15 लाख के वादों जैसे मुद्दों को हमने इंटरव्यू में उठाया में था। वास्तव में इसे इतने विस्तृत ढंग से कवर किया गया था कि इस पूरे इंटरव्यू को नजरअंदाज करने का मतलब था कि अगले दिन बड़ी स्टोरी को मिस करने का रिस्क उठाना।
इसलिए नेशनल मीडिया ने इसे फॉलो किया, फिर चाहे वह प्रिंट मीडिया हो, टेलिविजन मीडिया या फिर डिजिटल मीडिया। हां यदि किसी ने अनिच्छा से भी इसे फॉलो किया है तो भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
इंटरव्यू प्रसारित होने के अगले दिन शाम को चीन की सरकार ने इंटरव्यू को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी और बुधवार को पाकिस्तान सरकार ने सरताज अजीज के माध्यम से पाक में दो शक्तिकेंद्र होने की बात पर प्रधानमंत्री को जवाब दिया। ट्विटर पर अभी तक इस इंटरव्यू को लेकर 1.4 बिलियन ट्वीट हो चुके हैं, लगभग एक मिलियन से ज्यादा लोगों ने इंटरव्यू देखा है और फेसबुक यूजर्स करीब 10.2 मिलियन बार इसे लेकर चर्चा कर चुके हैं। ट्विटर पर तो 8 घंटे तक ये हैशटैग ट्रेंड करता रहा था। दुनिया भर की मीडिया में यह इंटरव्यू सुर्खियां बना। इससे यह बात तो साफ हो जाती है कि यह इंटरव्यू कोई आम इंटरव्यू नहीं था, बल्कि इतना बड़ा था कि इसकी पहुंच और इसका प्रभाव कम से कम पांच सालों तक रहेगा। हां ये इतना जरूर था कि ये इंटरव्यू इतना प्रभाव डालेगा, हमनें इसकी इतनी कल्पना नहीं की थी।
अगले दिन शाम को, एक सामाजिक कार्यक्रम में अखबार का एक संपादकीय सोच रखने वाला मालिक, जिसने इस इंटरव्यू के खिलाफ कैंपेन चला रखा है, मेरे पास आया और उसने भी मुझे हार्दिक बधाई दी। उसने मुझसे कहा कि यह सिर्फ एक बेबाक इंटरव्यू नहीं था, बल्कि इस इंटरव्यू में सभी विषयों को इतने विस्तार से उठाया गया और यह पत्रकारिता के प्रभाव को दर्शाता है। हालांकि मैंने उनसे ये पूछना दरकिनार ही किया कि क्यों लुटियन दिल्ली के संपादक ऐसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं जैसे उन्हें एक बड़ा झटका लगा है।
पिछले दस सालों से ‘न्यूजआर’(Newshour) और ‘फ्रैंकली स्पीकिंग’ (Frankly Speaking) ने देश में खबर के एजेंडे को परिभाषित किया है।ललित गेट से कॉमनवेल्थ गेम्स तक, हर बड़ी स्टोरी को चैनल पर ब्रेक किया है और उसका खुलासा किया है। राहुल गांधी से लेकर पीएम मोदी तक ‘फ्रैंकली स्पीकिंग’ में कई बड़े इंटरव्यू भी किए गए हैं, दरअसल इसकी वजह ये है कि यहां प्रतिभागी अच्छे से जानते हैं कि अन्य चैनल की तुलना में इसके अधिक दर्शक हैं।
मैं लुटियन पत्रकारिता की साजिश और दांव-पेंच से दूर रहकर ही काम करता हूं। सामूहिक तौर पर लुटियन पत्रकारों की प्रतिक्रिया यही है कि मुझे काफी बढ़िया इंटरव्यू मिला है। उनमें से एक एंकर भी हैं, जो मेरे ‘न्यूजआर’ शो में बतौर गेस्ट शामिल होने का मौका पाने के लिए लॉबिंग करती रहती हैं। यद्यपि उसने एक ट्वीट भी किया, जिसमें उसने पूछा कि अखिर प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे ही इंटरव्यू देने के लिए क्यों चुना, प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की। हालांकि बाद में वह अपनी इस गुस्सैल प्रतिक्रिया पर शर्मिंदा हुईं और फिर वह ट्वीट डिलीट कर दिया। मैंने सोचा कि उसका सवाल बौद्धिक रूप से सही नहीं था। दरअसल दुनियाभर में पहला एक्सक्लूसिव इंटरव्यू उन्हीं एंकर्स और चैनल को दिया जाता है, जिनके पास जबर्दस्त व्युयरशिप होती है, उन्हें नहीं जिन्हें कोई नहीं देखता है।
आखिर में, मेरे जहन में बस कुछ हास्यास्पद सवाल थे। क्या मैंने नरमरुख अख्तियार किया था?, क्यों मैं ‘न्यूजआर’ की तरह अपनी आवाज बुलंद नहीं कर पाया? क्यों मैं प्रधानमंत्री को ‘मिस्टर प्राइम मिस्टर’ के तौर पर संबोधित करता रहा? और इन्हीं तीनों का जवाब इंडस्ट्री को भी चाहिए, जो मेरे बारे में कहे जा रहे थे। पहली बात ये कि मैंने इसी तरह का रुख राहुल गांधी के इंटरव्यू के समय भी अख्तियार किया था। और यदि इंडस्ट्री इस बात से निराश है कि उन्होंने उन्हें ही कैसे नीचे दिखाया था तो ये मेरी समस्या नहीं है। दूसरी बात ये ‘फ्रैंकली स्पीकिंग’ एक इंटरव्यू प्रोग्राम है और ‘द न्यूजआर’ एक डिबेट प्रोग्राम। दोनों की शैली और फॉर्मेट अलग हैं। और अंत में कहना चाहूंगा कि जब आप प्रधानमंत्री से बात कर रहे हों तब ‘मिस्टर प्राइम मिनिस्टर’ ही कहना सबसे उपयुक्त है।
मुझे इसके बारे में कोई और स्पष्टीकरण देने की जरूरत नहीं है, लेकिन मैंने ये यहां इसलिए लिखा है, क्योंकि मैं चाहता हूं कि इंडस्ट्री जिसे कुछ करना नहीं है, लेकिन मेरे बारे में लिखना है वो शांत हो सके और उसे मानसिक शांति मिल सके।
आखिरकार, हम सब का आंकलन उसी से होता है, जो हम करते हैं। उससे नहीं जिस ढंग से सोशल मीडिया और उसके अन्य प्लेटफॉर्मों पर आपको ट्रोल किया जाए।
(डिस्क्लेमर: लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं और इसमें वेबसाइट द्वारा किसी भी अन्य विचारों को नहीं जोड़ा गया है)
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