राजेंद्र माथुर: संभवत: पत्रकारिता के शीर्ष पुरुष की मृत्यु का कारण भी यही था

राजेंद्र माथुर हिंदी पत्रकारिता में अमिट हस्ताक्षर के समान हैं। मालवा के साधारण परिवार में जन्मे राजेंद्र बाबू...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 07 August, 2019
rajendra

राजेंद्र माथुर हिंदी पत्रकारिता में अमिट हस्ताक्षर के समान हैं। मालवा के साधारण परिवार में जन्में राजेंद्र बाबू ने हिंदी पत्रकारिता जगत में असाधारण प्रतिष्ठा प्राप्त की। उनका जन्म 7 अगस्त, 1935 को मध्य प्रदेश  के धार जिले में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धार, मंदसौर एवं उज्जैन में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वे इंदौर आए जहां उन्होंने अपने पत्रकार जीवन के महत्वपूर्ण समय को जिया।

राजेंद्र माथुर उन बिरले लोगों में से थे जो उद्देश्य के लिए जीते हैं। पत्रकार जीवन की शुरुआत उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही कर दी थी। जिस समय हिंदी पत्रकारिता मुख्य धारा में अपना स्थान बनाने के लिए संघर्ष कर रही थी, उसी समय राजेंद्र बाबू भी पत्रकारिता में अपना स्थान बनाने के लिए आए थे। पत्रकारिता जगत में उन्होंने अपना स्थान ही नहीं बनाया बल्कि हिंदी पत्रकारिता को भी मुख्य धारा में लाए। अंग्रेजी भाषा के अच्छे जानकार राजेंद्र माथुर चाहते तो अंग्रेजी पत्रकारिता में अपना स्थान बना सकते थे। लेकिन तब शायद भारत के अंतर्मन को समझने का उचित  मौका न मिलता।

भारतीय भाषा में भारत के सरोकारों को समझने के लिए उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को अपने माध्यम के रूप में चुना। पत्रकारिता की दुनिया में उन्होंने 'नईदुनिया' दैनिक पत्र के माध्यम से दस्तक दी। नईदुनिया के संपादक राहुल बारपुते से उनकी मुलाकात शरद जोशी ने करवाई थी। बारपुते जी से अपनी पहली मुलाकात में उन्होंने पत्र के लिए कुछ लिखने की इच्छा जताई। राहुल जी ने उनकी लेखन प्रतिभा को जांचने-परखने के लिए उनसे उनके लिखे को देखने की बात कही। उसके बाद अगली मुलाकात में राजेंद्र माथुर अपने लेखों का बंडल लेकर ही बारपुते जी से मिले।

अंतरराष्ट्रीय विषयों पर गहन अध्ययन एवं जानकारी को देखकर राहुल जी बड़े प्रभावित हुए। उसके बाद समस्या थी कि राजेंद्र माथुर के लेखों को पत्र में किस स्थान पर समायोजित किया जाए। इसका समाधान भी राजेंद्र जी ने ही दिया। राहुल बारपुते जी का संपादकीय अग्रलेख प्रकाशित होता था, राजेंद्र जी ने अग्रलेख के बाद अनुलेख के रूप में लेख को प्रकाशित करने का सुझाव दिया। अग्रलेख के पश्चात अनुलेख लिखने का सिलसिला लंबे समय तक चला। सन 1955 में नई दुनिया की दुनिया में जुड़ने के बाद वह 27 वर्षों के लंबे अंतराल के दौरान वे नई दुनिया के महत्वपूर्ण सदस्य बने रहे।

राजेंद्र जी ने लगातार दस वर्षों तक अनुलेख लिखना जारी रखा। सन 1965 में बदलाव करते हुए उन्होंने पिछला सप्ताह नामक लेख लिखना प्रारंभ किया, जिसमें बीते सप्ताह के महत्वपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी एवं विश्लेषण प्रकाशित होता था। सन 1969 में किसी मनुष्य ने चंद्रमा पर पहला कदम रखकर अप्रत्याशित कामयाबी पाई थी। मनुष्य के चंद्रमा तक के सफर पर नई दुनिया ने 16 पृष्ठों का परिशिष्ट प्रकाशित किया था। यह कार्य राजेंद्र माथुर के नेतृत्व में ही हुआ था। वे गुजराती कॉलेज में अंग्रेजी के प्राध्यापक थे, 1969 में वे अध्यापकी छोड़ पूरी तन्मयता के साथ नईदुनिया की दुनिया में रम गए।

'पिछला सप्ताह' स्तंभ लिखना उन्होंने आपातकाल तक जारी रखा। आपातकाल के दौरान सरकार ने जब प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास किया। तब राजेंद्र जी ने ‘शीर्षक’ के नाम से सरकारी प्रतिक्रिया की परवाह किए बिना धारदार आलेख लिखे। सन 1980 से उन्होंने कल ‘आज और कल’ शीर्षक से स्तंभ लिखना शुरू किया। 14 जून, 1980 को वे प्रेस आयोग के सदस्य चुने गए। जिसके बाद सन 1981 में उन्होंने नई दुनिया के प्रधान संपादक के रूप में पदभार संभाला। प्रेस आयोग का सदस्य बनने के पश्चात वे टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादक गिरिलाल जैन के संपर्क में आए।

गिरिलाल जैन ने राजेंद्र माथुर को दिल्ली आने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि राजेंद्र जी जैसे मेधावान पत्रकार को दिल्ली में रहकर पत्रकारिता करनी चाहिए। लंबे अरसे तक सोच-विचार करने के पश्चात राजेंद्र जी ने दिल्ली का रुख किया। सन 1982 में नवभारत टाइम्स के प्रधान संपादक बन कर वे दिल्ली आए। नवभारत टाइम्स की ओर से अमेरिकी सरकार के आमंत्रण पर उन्हें अमेरिका जाने का अवसर प्राप्त हुआ। अमेरिका में गए हिंदी पत्रकार ने अपनी अंग्रेजी की विद्वता से परिचय कराया। उनकी अंग्रेजी सुनकर अंग्रेज पत्रकार भी हतप्रभ रह गए। ऐसे समय में जब अंग्रेजी प्रतिष्ठा का सवाल हो हिंदी पत्रकारिता में योगदान देना प्रेरणादायी है।

दिल्ली आने के पश्चात राजेंद्र माथुर ने नवभारत टाइम्स को दिल्ली, मुंबई से निकालकर प्रादेशिक राजधानियों तक पहुंचाने का कार्य किया। नवभारत टाइम्स को उन्होंने हिंदी पट्टी के पाठकों तक पहुंचाते हुए लखनऊ, पटना एवं जयपुर संस्करण प्रकाशित किए। यही समय था जब राजेंद्र माथुर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। वे एडिटर्स गिल्ड के प्रधान सचिव भी रहे। उनके लेखन को संजोने का प्रयास करते हुए उनके लेखों के कई संग्रह प्रकाशित हुए हैं, जिनमें प्रमुख हैं- गांधी जी की जेल यात्रा, राजेंद्र माथुर संचयन- दो खण्डों में, नब्ज पर हाथ, भारत एक अंतहीन यात्रा, सपनों में बनता देश, राम नाम से प्रजातंत्र।

राजेंद्र माथुर की पत्रकारिता निरपेक्ष पत्रकारिता थी। पूर्वाग्रह ग्रसित पत्रकारिता से तो वे कोसों दूर थे। उनके निरपेक्ष लेखन का जिक्र करते हुए पत्रकार आलोक मेहता ने लिखा है-

‘1985-86 के दौरान भारत की एक महत्वपूर्ण गुप्तचर एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी ने मुलाकात के दौरान सवाल किया- ‘आखिर माथुर जी हैं क्या? लेखन से कभी वे कांग्रेसी लगते हैं, कभी हिंदूवादी संघी, तो कभी समाजवादी। आप तो इंदौर से उन्हें जानते हैं क्या रही उनकी पृष्ठभूमि?‘ मुझे जासूस की इस उलझन पर बड़ी प्रसन्नता हुई। मैंने कहा, ‘माथुर साहब हर विचारधारा में डुबकी लगाकर बहुत सहजता से ऊपर आ जाते हैं। उन्हें बहाकर ले जाने की ताकत किसी दल अथवा विचारधारा में नहीं है। वह किसी एक के साथ कभी नहीं जुड़े। वह सच्चे अर्थों में राष्ट्रभक्त हैं, उनके लिए भारत राष्ट्र ही सर्वोपरि है। राष्ट्र के लिए वे कितने ही बड़े बलिदान एवं त्याग के पक्षधर हैं‘‘ (सपनों में बनता देश, आलोक मेहता)

राजेंद्र माथुर ने कभी किसी विचारधारा का अंध समर्थन नहीं किया। उनकी पत्रकारिता विशुद्ध राष्ट्रवाद को समर्पित थी। जड़ता की स्थिति में पहुंचाने वाली विचारधाराओं से उन्होंने सदैव दूरी बनाए रखी। पत्रकार के रूप में विचारधारा एवं पार्टीवाद से ऊपर उठकर वे पत्रकारिता के मिशन में लगे रहे। वर्तमान समय में जब पत्रकार विचारधाराओं के खेमे तलाश रहे हैं, ऐसे वक्त में राजेंद्र माथुर की याद आना स्वाभाविक है।

राजेंद्र माथुर ने बड़े ही जीवट से मूल्यपरक पत्रकारिता की थी, परंतु एक वक्त ऐसा भी आया जब वे बाजार के झंझावतों से निराश हुए। उन्होंने नवभारत टाइम्स को पूर्ण अखबार बनाने का स्वप्न देखा था। उनका यह स्वप्न तब तक रूप लेता रहा जब तक प्रबंधन अशोक जैन के हाथ था, किंतु जब प्रबंधन का जिम्मा समीर जैन पर आया तो यह स्वप्न बिखरने लगा था। समीर जैन नवभारत टाइम्स को ब्रांड बनाना चाहते थे जो बाजार से पूंजी खींचने में सक्षम हो। माथुर साहब ने अखबार को मुकम्मल बनाया था, लेकिन बाजार की अपेक्षाएं शायद कुछ और ही थीं। यही उनकी निराशा का कारण था। संभवतः पत्रकारिता के शीर्ष पुरूष की मृत्यु का कारण भी यही था। इस घटना के बारे में अनेको वर्षों तक उनके सहयोगी रहे रामबहादुर राय जी बताते हैं-

‘जब उन्हें लगा कि संपादक को संपादकीय के अलावा प्रबंधन के क्षेत्र का काम भी करना होगा, तो वह द्वंद में पड़ गए। इससे उन्हें शारीरिक कष्ट हुआ। अपने सपने को टूटते बिखरते हुए वे नहीं देख पाए। मृत्यु के कुछ दिनों पहले मेरी उनसे लंबी बातचीत हुई थी। एक दिन उन्हें फोन कर मैं उनके घर गया। माथुर साहब अकेले ही थे। वह मेरे लिए चाय बनाने किचन की ओर गए तो मैं भी गया। मैंने महसूस किया था कि वे परेशान हैं। मैंने पूछा क्या अड़चन है? उन्होंने कहा- देखो,  अशोक जैन नवभारत टाइम्स पढ़ते थे। उनको मैं बता सकता हूं कि अखबार कैसे बेहतर बनाया जाए। समीर जैन अखबार पढ़ता ही नहीं है। वह टाइम्स आफ इंडिया और इकानामिक टाइम्स को प्रियारिटी पर रखता है। उससे संवाद नहीं होता। उसका हुकुम मानने की स्थिति हो गई है। यही माथुर साहब का द्वंद था।’ (मीडिया विमर्श, मार्च 2012)

राजेंद्र माथुर ने मानों शब्दों की सेवा का ही प्रण लिया था। यही कारण था कि अनेकों बार अवसर प्राप्त होने पर भी वे सत्ता शिखर से दूर ही रहे। श्री माथुर के सहयोगी रहे विष्णु खरे ने सन 1991 में उनके अवसान के पश्चात  नवभारत टाइम्स में प्रकाशित लेख ‘बुझना एक प्रकाश-स्तंभ का‘ में लिखा था-

‘नवभारत टाइम्स के प्रधान संपादक बन जाने के बाद वे भविष्य में क्या बनेंगे, इसको लेकर उनके मित्रों में दिलचस्प अटकलबाजियां होती थीं और बात राष्ट्रसंघ एवं केन्द्रीय मंत्रिमंडल तक पहुंचती थी। लेकिन अपने अंतिम दिनों तक राजेंद्र माथुर ‘एडिटर्स गिल्ड आफ इंडिया‘ जैसी पेशेवर संस्था के काम में ही स्वयं को होमते रहे। राजेंद्र माथुर जैसे प्रत्येक व्यक्ति के चले जाने के पश्चात ऐसा कहा जाता है कि अब ऐसा शख्स दुबारा दिखाई नहीं देगा। लेकिन आज जब हिंदी तथा भारतीय पत्रकारिता पर निगाह डालते हैं और इस देश के बुद्धिजीवियों के नाम गिनने बैठते हैं तो राजेंद्र माथुर का स्थान लेता कोई दूसरा नजर नहीं आता। बड़े और चर्चित पत्रकार बहुतेरे हैं, लेकिन राजेंद्र माथुर जैसी ईमानदारी, प्रतिभा, जानकारी और लेखन किसी और में दिखाई नहीं दी।’ (पत्रकारिता के युग निर्माता,शिव अनुराग पटैरया)

पत्रकारिता में स्थान बनाने के बाद पत्रकार सत्ता के केंद्रों से नजदीक आने को लालायित हैं। सत्ता केन्द्र से नजदीकी को कैरियर का शिखर मानने की वर्तमान समय में परिपाटी बन गई है। ऐसे में सत्ता केन्द्रों से समानांतर दूरी रखने वाले राजेंद्र माथुर का पत्रकार जीवन अनुकरणीय है।

(साभार: अवधभूमि)

 

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जामिया में पिटे पत्रकार, कई के टूटे कैमरे

नए नागरिकता कानून का विरोध कर रहे हैं जामिया विश्वविद्यालय के छात्र, महिला पत्रकारों को दौड़ाया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 14 December, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 December, 2019
Attack

नए नागरिकता कानून के विरोध में शनिवार को दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय में जमकर हंगामा हुआ। इस कानून के विरोध में गुस्साए छात्रों ने मीडिया पर हमला कर दिया। छात्रों के हमले में कई मीडियाकर्मी घायल हुए हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मीडियाकर्मियों के कैमरों को भी तोड़ दिया।

बता दें कि यहां के छात्रों ने शुक्रवार को भी विरोध प्रदर्शन किया था। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ा था। शनिवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र हिंसक हो गए और उन्होंने मीडिया को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस दौरान महिला पत्रकारों को भी दौड़ाया गया। मीडियाकर्मियों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।

बताया जाता है कि शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी जामिया के बाहर खड़े हुए थे। वे विरोध कर रहे छात्रों से बातचीत कर उनके आक्रोश का कारण जानना चाह रहे थे। इस दौरान कुछ लोग मीडिया का विरोध कर रहे थे और मीडिया गो बैक-गो बैक कर रहे थे। इन लोगों ने जामिया के गेट पर भी मीडिया वापस जाओ के पोस्टर लगाए हुए थे। इसी दौरान जब वहां पर आरजेडी के नेता पप्पू यादव पहुंचे तो उनसे बात करने के लिए जैसे ही मीडियाकर्मी उनके पास पहुंचे, तभी भीड़ ने मीडिया पर हमला कर दिया।

हमले में ‘इंडिया न्यूज’ के पत्रकार अजीत श्रीवास्तव, कैमरामैन राजन सिंह और ‘एबीपी न्यूज’ के कैमरामैन भूपेंद्र रावत घायल हो गए। राजन सिंह और भूपेंद्र रावत का कैमरा भी टूट गया। यही नहीं, 'एएनआई' के विडियो जर्नलिस्ट वसीम जैदी और रिपोर्टर धनेश पर भी हमला किया गया। 'नवोदय टाइम्स' के फोटो जर्नलिस्ट नीरज कुमार के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उनका कैमरा भी छीन लिया गया। इस संबंध में उन्होंने लोकल थाने में शिकायत दर्ज की। पत्रकारों ने इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।

छात्रों के हमले में मीडियाकर्मी किस तरह घायल हुए हैं और उन्होंने पुलिस को जो एफआईआर दी है, वह आप यहां देख सकते हैं।

मीडिया पर प्रदर्शनकारियों ने किस तरह हमला किया, उसका विडियो आप यहां देख सकते हैं।    

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माखनलाल विश्वविद्यालय: रजिस्ट्रार ने दिलीप मंडल व मुकेश कुमार पर लिया ये फैसला

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग पर गठित की गई है कमेटी, 15 दिन में तैयार करेगी अपनी रिपोर्ट

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 14 December, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 December, 2019
MUC

देश के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCNUJC), भोपाल में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। यहां दो फैकल्टी प्रोफेसर्स के खिलाफ विद्यार्थियों ने काफी देर तक प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि दोनों प्रोफेसर्स विश्वविद्यालय का माहौल खराब कर रहे हैं और छात्रों को जातिगत तौर पर बांट रहे हैं। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को शांत कराया। 

दरअसल, प्रदर्शन कर रहे विद्य़ार्थियों का आरोप था कि यूनिवर्सिटी के दो फैकल्टी प्रोफेसर दिलीप मंडल और मुकेश कुमार सोशल मीडिया पर जाति विशेष के नाम पर लगातार पोस्ट कर रहे हैं और हैशटैग चला रखा है। छात्र दोनों प्रोफेसर्स को निलंबित किए जाने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर विद्यार्थियों ने गुरुवार को भी धरना दिया था। शुक्रवार को भी कुलपति के कार्यालय के बाहर छात्र धरने पर बैठे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा समझाने के बावजूद जब विद्यार्थी नहीं माने तब पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस ने विद्यार्थियों को वहां से हटाया। हंगामे के दौरान तीन छात्र बेहोश भी हो गए, जिन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाना पड़ा था। विद्यार्थियों ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को घसीटकर पांचवीं मंजिल से तीसरी मंजिल पर उतारा।

इस मामले में एडिशनल एसपी संजय साहू का कहना है कि छात्रों की मांग पर जांच कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में छात्रों को भी शामिल किया गया है। यह कमेटी 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। वहीं, रजिस्ट्रार दीपेंद्र बघेल का कहना है कि यह कमेटी तथ्यों के आधार पर जांच करेगी। छात्रों ने जिन दो प्रोफेसर्स पर आरोप लगाए हैं, फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जांच के बाद ही उन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश करने दिया जाएगा। इस बारे में दिलीप मंडल का कहना है कि विश्वविद्यालय में क्या विरोध हुआ, यह बात उनके संज्ञान में नहीं है। वहीं, मुकेश कुमार ने छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।

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सूचना प्रसारण मंत्रालय में हुई नए सचिव की एंट्री

कई अन्य सचिवों के कार्यक्षेत्र में किया गया है फेरबदल, केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
MIB

बिहार कैडर के 1986 बैच के आईएएस अधिकारी रवि मित्तल को ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) में नया सचिव नियुक्त किया गया है। वह अमित खरे का स्थान लेंगे, जिन्हें ‘उच्च शिक्षा विभाग’ (Department of Higher Education) का नया सचिव बनाया गया है। बता दें कि इन दिनों मित्तल वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) में विशेष सचिव के तौर पर काम कर रहे थे। वहीं, सुशील कुमार को खनन सचिव और प्रवीण कुमार को कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में सचिव बनाया गया है।

इसके अलावा राजेश भूषण को जहां ग्रामीण विकास विभाग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं सुनील कुमार पंचायती राज मंत्रालय में सचिव बनाए गए हैं। बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है।

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स्टार और डिज्नी इंडिया को मिला नया कंट्री हेड

पिछले महीने संजय गुप्ता ने इस पद से दे दिया था इस्तीफा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
Star disney

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) का नया कंट्री मैनेजर के. माधवन को नियुक्त किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सभी विभागों के हेड अब माधववन को रिपोर्ट करेंगे। माधवन की रिपोर्टिंग सीधे ‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ (The Walt Disney Company, Asia Pacific) के प्रेजिडेंट उदय शंकर को होगी।

माधवन इससे पहले ‘स्टार इंडिया’ (Star India) के मैनेजिंग डायरेक्टर (साउथ बिजनेस) थे। वह वर्ष 2016 से यह जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह वर्तमान में दक्षिण भारत के चार राज्यों में ‘स्टार’ के बिजनेस को देखने के साथ ही मलयालम, कन्नड़, तमिल और तेलुगू में प्रादेशिक चैनल्स का कामकाज संभाल रहे थे।

बता दें कि संजय गुप्ता ने पिछले महीने ‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के कंट्री मैनेजर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने ‘गूगल इंडिया’ (Google India) के साथ बतौर अपनी नई पारी शुरू की है, जहां उन्हें कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेजिडेंट (सेल्स और ऑपरेशंस) के पद पर नियुक्त किया गया है। संजय गुप्ता अगले साल की शुरुआत में इस पद को संभालेंगे।

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Zee Media के जवाहर गोयल को Dish TV में फिर मिली बड़ी जिम्मेदारी

जवाहर गोयल को इस साल मार्च में ‘जी मीडिया नेटवर्क’ का एडिटर-इन-चीफ नियुक्त किया गया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
Jawahar Goel

डायरेक्ट टू होम टेलिविजन सर्विस ‘डिश टीवी’ (Dish TV) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर है कि जवाहर गोयल को एक बार फिर ‘डिश टीवी’ का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। गुरुवार को हुई कंपनी बोर्ड की मीटिंग में यह निर्णय लिया गया। उनका कार्यकाल 17 दिसंबर 2019 से 31 मार्च 2020 तक होगा। बताया जाता है कि मैनेजिंग डायरेक्टर का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी जवाहर गोयल बोर्ड के चेयरमैन बने रहेंगे।

बता दें कि ‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के छोटे भाई जवाहर गोयल को इसी साल मार्च में ‘जी मीडिया नेटवर्क’ (Zee Media network) का एडिटर-इन-चीफ नियुक्त किया गया था।

‘जी मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ पद की जिम्मेदारी के साथ ही उन्हें मीडिया नेटवर्क की ‘एडिटोरियल गवर्निंग काउंसिल’(Editorial Governing Council) का चेयरमैन भी बनाया गया था। यह काउंसिल नेटवर्क की सभी प्रमुख एडिटोरियल पॉलिसी को दिशा-निर्देशित करती है।
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हैदराबाद कांड की मीडिया कवरेज पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाया ये कदम

शीर्ष अदालत ने मामले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मीडिया में चलने पर नाराजगी जताई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 12 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
Media Coverage

हैदराबाद कांड में मीडिया की भूमिका पर उठे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया के साथ ही ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (पीसीआई) को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत चाहती है कि बलात्कार और हत्या जैसे संगीन मामलों की रिपोर्टिंग के संबंध में मीडिया को खास ध्यान रखना चाहिए। 

हालांकि अदालत ने साफ किया है कि उसका इरादा मीडिया को रिपोर्टिंग से रोकने का बिलकुल नहीं है, बल्कि वह जांच के पहलुओं को सार्वजनिक होने से रोकने पर विचार कर रही है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने हैदराबाद कांड से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मीडिया में चलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर मीडिया में सुबह से लेकर शाम तक केस से जुड़े सबूत क्यों दिखाए जाते रहे? इस पर तेलंगाना पुलिस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि मीडिया में खबर आने के बाद ही इस बारे में सबको पता चला।

चीफ जस्टिस ने अदालत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हम मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक नहीं लगा रहे हैं, हम केवल यही चाहते हैं कि जांच से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सार्वजनिक न किया जाए। अदालत ने वेटनरी डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या के सभी आरोपितों के एनकाउंटर की सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज से जांच कराये जाने के आदेश भी दिए हैं।

गौरतलब है कि मीडिया ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। इस फेर में कई मीडिया संस्थानों ने पीड़िता और उसके परिवार की न सिर्फ पहचान उजागर की थी, बल्कि पीड़िता की तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो गई थी। इसके अलावा, आरोपितों की तस्वीरें भी सार्वजनिक कर दी गई थीं।

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फोटो जर्नलिस्ट के सामने आई ये मजबूरी, कैमरा किनारे रख करनी पड़ रही मजदूरी

स्थानीय सहित राष्ट्रीय अखबारों में भी उनके द्वारा खींची गईं फोटो छपती रही हैं। उन्होंने पिछले साल शादी भी कर ली, मगर एक ही झटके में पूरी तस्वीर ही बदल गई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
Photo Journalist

मजबूरी इंसान से क्या कुछ नहीं करा लेती। अपनी तस्वीरों से अखबारों में छाए रहने वाले फोटो जर्नलिस्ट मुनीब उल इस्लाम आज मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने को विवश हैं। मुनीब के बुरे दिन कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मिली आजादी के साथ शुरू हुए। कुछ दिन तो उन्होंने जैसे-तैसे गुजार लिए, लेकिन जब कोई रास्ता नजर नहीं आया तो उन्हें मजबूरन कैमरा किनारे रखकर ईंट-पत्थरों से भरे तसले उठाने पड़े।

अनंतनाग निवासी मुनीब फ्रीलांस फोटो जर्नलिस्ट के रूप में पिछले कई सालों से काम कर रहे हैं। स्थानीय सहित राष्ट्रीय अखबारों में भी उनके द्वारा खींची गईं फोटो छपती रही हैं। पांच अगस्त से पहले तक उनकी जिंदगी काफी अच्छी चल रही थी। उन्होंने पिछले साल शादी भी कर ली, मगर एक ही झटके में पूरी तस्वीर ही बदल गई।

दरअसल, अनुच्छेद 370 खत्म करने के साथ ही सरकार ने एहतियात के तौर पर घाटी में कई प्रतिबंध लगा दिए थे। इनमें फोन और इंटरनेट सेवा भी शामिल है। इंटरनेट सेवा तो अब तक पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है, जिसका खामियाजा मीडिया और पत्रकारों को भी उठाना पड़ा। खासकर मुनीब जैसे पत्रकार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जिन्हें सैलरी नहीं मिलती।

वैसे, श्रीनगर के पत्रकार मीडिया सुविधा केंद्र में इंटरनेट उपयोग कर सकते हैं, लेकिन कश्मीर के अन्य जिलों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है। इसके परिणामस्वरूप पत्रकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। घाटी के माहौल के चलते मीडिया संस्थानों को विज्ञापन आदि से होने वाले कमाई में भी गिरावट आई है, इससे निपटने के लिए उनके द्वारा कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। 

30 वर्षीय मुनीब ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इस तरह मजदूरी करनी पड़ेगी। वह कहते हैं, ‘मैंने पिछले साल शादी की थी। मेरी पत्नी प्रेग्नेंट हैं, जिसकी देखभाल के लिए मुझे पैसों की जरूरत रहती है। यही वजह है कि जब हालात नहीं बदले तो मुझे मजदूरी करने पर विवश होना पड़ा। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में से अधिकांश दिन मैं बेरोजगार ही रहा।’

ऐसा नहीं है कि मुनीब ने घाटी की फिजा को कैमरे में उतारना बंद कर दिया है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी उन्होंने सैकड़ों तस्वीरें खींचीं, लेकिन इंटरनेट सेवा बहाल नहीं होने के चलते वह उन्हें किसी पब्लिकेशन को भेज नहीं सके। मुनीब और उनके जैसे पत्रकारों के लिए बार-बार श्रीनगर जाना संभव नहीं है। नतीजतन, उनकी फोटो-खबरें बस उनकी ही होकर रह गई हैं।

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पत्रकार के खिलाफ FIR मामले में प्रेस काउंसिल आई हरकत में, उठाया ये कदम

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील में नमक-रोटी दिए जाने की खबर दिखाने पर पत्रकार के खिलाफ दर्ज किया गया था मुकदमा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
PCI

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के तहत बच्‍चों को नमक-रोटी दिए जाने की खबर को लेकर मुकदमे का सामना कर रहे ‘जनसंदेश टाइम्स’ अखबार के पत्रकार पवन जायसवाल के मामले में अब ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) भी हरकत में आ गई है। काउंसिल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और मिर्जापुर के पुलिस अधीक्षक को तलब किया है। इन अधिकारियों से 18 दिसंबर तक अपना जवाब देने को कहा गया है।  

बता दें कि ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ पहले ही पवन जायसवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को पत्रकारों के खिलाफ क्रूर कदम बताते हुए इसकी निंदा पर चुका है।

गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व मिर्जापुर में हिनौता स्थित एक प्राइमरी स्कूल के बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर नमक-रोटी खिलाने का मामला सामने आया था। पवन जायसवाल ने इस घटना का विडियो बनाकर सरकारी तंत्र की लापरवाही को उजागर किया था। वहीं, मिर्जापुर के जिला प्रशासन का आरोप था कि पवन जायसवाल ने फर्जी तरीके से और गलत नीयत से यह विडियो बनाया। इसके बाद प्रशासन ने पवन जायसवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।

प्रशासन ने पवन जायसवाल के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा उत्पन्न करने, झूठे साक्ष्य और धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। एफआईआर के मुताबिक, इस विडियो को रिकॉर्ड करने के लिए गांव के एक अधिकारी ने जायसवाल के साथ साजिश रची थी, क्योंकि उन्हें पता था कि स्कूल में काम करने वाले रसोइए के पास सामान नहीं था।

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वरिष्ठ पत्रकार के घर में दिनदहाड़े घुसा अंजान शख्स, दे गया ये धमकी

पत्रकार ने पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की गुजारिश की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 10 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
Threat

मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र जैन को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि इस धमकी की वजह पिछले दिनों मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी राधेश्याम जुलानिया के संबंध में लिखी गई खबर है। रविंद्र जैन ने इस घटना से पुलिस को अवगत करा दिया है। दरअसल, रविंद्र जैन ने अपनी न्यूज वेबसाइट ‘सबकी खबर’ पर 18 नवंबर को एक खबर प्रकाशित की थी। इस खबर में बताया गया था कि कैसे जुलानिया ने अपनी बेटी की कंपनी को अरबों के ठेके दिलवाए। इस खुलासे ने प्रदेश में हडकंप मचा दिया था।

‘समाचार4मीडिया’ से बातचीत में जैन ने बताया, ‘8 दिसंबर को एक अंजान शख्स हाथ में फाइल लिए मेरे आवास पर पहुंचा, लेकिन उस वक्त मैं घर पर नहीं था। उसने बताया कि उसे राधेश्याम जुलानिया ने कुछ जरूरी बात करने के लिए भेजा है। इस पर मेरे बेटे ने उसे घर के अंदर बुलाया। कुछ देर यहां-वहां की बातें करने के बाद उसने मेरे बेटे से कहा कि तुम्हारे पिता राधेश्याम जुलानिया को जानते नहीं हैं, जुलानिया उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर देंगे, आप भी उनकी लाश नहीं ढूंढ पाओगे। इतना कहने के बाद वो वहां से निकल गया, लेकिन मेरे बेटे ने उसकी एक फोटो खींच ली।’ जैन ने श्यामला हिल्स पुलिस स्टेशन में इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज की है।

बता दें कि रविंद्र जैन अब तक कई खुलासे कर चुके हैं। पुलिस और प्रशासन पर गहरी पकड़ रखने वाले जैन ने अपनी धारधार लेखनी की बदौलत सियासी गलियारों में भी जमकर हडकंप मचाया है। भोपाल से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘राज एक्सप्रेस’ में समूह संपादक की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्होंने सत्ता प्रतिष्ठान की नींद उड़ा रखी थी। इसके बाद जब उन्होंने टैबलॉयड अखबार ‘अग्निबाण’ की कमान संभाली, तो तकरीबन रोजाना कोई न कोई विशेष खबर अखबार के फ्रंट पेज पर रहती थी। फिलहाल वह अपने न्यूज पोर्टल पर ध्यान केंद्रित किये हुए हैं और यहां भी उनकी खबरें सुर्खियां बंटोर रही हैं।

लोगों का कहना है कि चूंकि यह मामला सीधे तौर पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से जुड़ा है, लिहाजा यह देखने वाली बात होगी कि पुलिस क्या कार्रवाई करती है। जैन के अनुसार, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस विषय में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

जिस खबर के चलते रविंद्र जैन को धमकी मिली, उसे आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं:

रविंद्र जैन के बेटे द्वारा पुलिस में दी गई शिकायत की कॉपी आप यहां पढ़ सकते हैं:

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HT को बाय बोल वरिष्ठ पत्रकार कुमार उत्तम ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

पूर्व में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं कुमार उत्तम

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 10 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
Kumar Uttam

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार कुमार उत्तम ने यहां से बाय बोल दिया है। उन्होंने अब नई दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रतिष्ठित विमान निर्माता कंपनी ‘एयरबस’ (AirBus) का दामन थामा है। खबर है कि यहां उन्हें डायरेक्टर (कॉर्पोरेट अफेयर्स) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

बता दें कि कुमार उत्तम पूर्व में कई मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। मूल रूप से रांची (झारखंड) के रहने वाले कुमार उत्तम ने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है।

कुमार उत्तम ने वर्ष 2000 में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में बतौर करेसपॉन्डेंट अपने करियर की शुरुआत की थी। करीब पौने पांच साल (दिसंबर 2000-सितंबर 2005) यहां काम करने के बाद उन्होंने अक्टूबर 2005 में बतौर प्रिंसिपल करेसपॉन्डेंट ‘डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड’ का दामन थाम लिया। यहां करीब दो साल अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने यहां से बाय बोल दिया और सितंबर 2007 में स्पेशल पॉलिटिकल करेसपॉन्डेंट के तौर पर ‘द पॉयनियर’ से जुड़ गए। यहां करीब साढ़े छह साल तक उन्होंने अपनी सेवाएं दीं और फिर यहां से अलविदा कहकर फरवरी 2014 में एक बार फिर ‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ के साथ जुड़ गए। अब करीब छह साल पुरानी अपनी पारी को विराम देकर कुमार उत्तम ने ‘एयरबस’  के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।

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