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वेलेंटाइन डे : उत्साही नौजवानों के लिए पत्रकार पीयूष पांडे के कुछ सुझाव...
पीयूष पांडे पत्रकार व व्यंग्यकार ।। साल के कैलेंडर में वेलेंटाइन डे की अपनी उपयोगिता है। पहली उपयोगिता तो यह कि प्रेम के लिए कम से कम एक दिन तो आरक्षित है। आरक्षण की खासियत ही यही है कि इसकी मांग उत्तरोत्तर बढ़
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
पीयूष पांडे
पत्रकार व व्यंग्यकार ।।
साल के कैलेंडर में वेलेंटाइन डे की अपनी उपयोगिता है। पहली उपयोगिता तो यह कि प्रेम के लिए कम से कम एक दिन तो आरक्षित है। आरक्षण की खासियत ही यही है कि इसकी मांग उत्तरोत्तर बढ़ती जाती है। सरकारी नौकरियों में पहले दो चार फीसदी आरक्षण था। अब सरकारी नौकरी में आरक्षण है या आरक्षण में सरकारी नौकरी-सब गड्ड मड्ढ है। खैर, इसी सिद्धांत पर चलते हुए माना जाना चाहिए कि प्रेम के लिए भी आने वाले दिनों में कई दिन आरक्षित होंगे। हर तरफ प्यार ही प्यार होगा।
उपयोगिता का दूसरा आयाम यह है कि कम से कम इस दिन बंदा प्रेम की खोज में निकलता है। प्रेम की खोज ईश्वर की खोज है और इस लिहाज से बंदा जीवन के महत्वपूर्ण दर्शन को समझने की दिशा में आगे बढ़ता है। वैसे भी, पेट्रोल-डीजल की कीमतों के मद्देनज़र आजकल रोज़-रोज़ प्रेम की खोज़ में निकलना लगभग असंभव है।
वेलेंटाइन डे एक अहम शैक्षिक दिवस भी है क्योंकि इसी दिन हुड़दंगी भाई प्रैक्टिकल करते हैं। मतलब, जिम में, अखाड़े में, लोकल गुंडों से, राजनीतिक चंपूओं से जो कुछ सीखा-उसका प्रैक्टिकल। वरना, हम सब यह जानते हैं कि हिन्दुस्तानी शिक्षा व्यवस्था में थ्योरी तो खूब पढ़ाई जाती है, प्रैक्टिकल सिखाने की कोई व्यवस्था नहीं या कहें इस दिशा में सोचा ही नहीं जाता।
प्रेम की धारा में बहने को बेकरार उत्साही नौजवानों के लिए इस दिन की अपनी महिमा है। तो लीजिए वेलेंटाइन डे मनाने के उत्सुक नौजवानों के लिए कुछ सुझाव-
सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक चुप्पी साधकर बैठे रहें। इन तीन घंटे हुडंदगी भाई च्वयनप्राश का जूस पीकर सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं। एक बजे तक टेलिविजन के कैमरों में फुटेज कैद हो चुकी होती है और शांति धीरे धीरे कायम होने लगती है।
अपना हो तो ठीक नहीं तो उधार का चौपहिया वाहन लें। दोपहिया पर सैर करना इस दिन ठीक नहीं।
गुलाब की एक-एक कली अनारकली की तरह पहुंच से बाहर हो लेती है, लिहाजा दो-चार पहले ही खरीद ली जाएं।
लड़की इनकार करे तो उसे पूरा सम्मान दें। भारत में पुरुष-स्त्री लिंग अनुपात गड़बड़ जरुर है लेकिन अभी यह नौबत नहीं आई है कि एक के पीछे ही पड़ा रहा जाए।
प्यार और जंग में ठुकाई-पिटाई आवश्यक है। पिट जाएं तो दिल पर न लें। आत्महत्या जैसे विचार मन से निकाल दें। वैसे, इतनी शर्म होगी आपमें-इसमें शक है।
व्हाटसअप करते वक्त या एसएमएस भेजते वक्त नयी उपमाएं गढ़ें। वरना एक ही एसएमएस-मैसेज फॉरवर्ड होते हुए इस तरह महबूब के पास पहुंचता है कि समझ नहीं आता कि मुहब्बत का संदेश राम-श्याम-पीटर-अली ऑरिजनली किसका है। किसे जवाब दिया जाए?
मामला पहले से फिट हो तो वेलेंटाइन डे को 14 के बजाय उसके बाद के शनिवार-रविवार को मनाने की योजना बना सकते हैं। महंगाई के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के बाद गुलाब की कली औकात में आ चुकी होती है। हुडदंगी मार-कुटाई करने के बाद अपने अपने वेलेंटाइन के साथ घूमने निकल चुके होते हैं। रेस्तरां में भीड़ छंट चुकी होती है और बालक-बालिका पर शक करने वाले परिवार के लोग उन्हें शानदार करैक्टर का सर्टिफिकेट दे चुके होते हैं।
और आखिरी सुझाव यह कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। आखिर बाज़ार ने कोशिश करके जब वेलेंटाइन डे गढ़ डाला, करोड़ों के व्यापार के लिए तमाशा खड़ा कर डाला और हमें-आपको उसका हिस्सा बना डाला तो आप भी जो चाहे कर सकते हैं। लड़की पटाना तो बहुत छोटी चीज़ है।
(पीयूष पांडे का दूसरा व्यंग्य संग्रह 'धंधे मातरम्' हाल में प्रभात प्रकाशन से आया है। ये व्यंग्य उसी व्यंग्य संग्रह से लिया गया है)
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