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दो साल से बेरोजगार पत्रकार ने की अपनी जीवन लीला समाप्त...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। पूर्वी दिल्ली के मधु विहार स्थित अपने आवास पर सोमवार की सुबह एक फ्रीलांस जर्नलिस्ट ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बताया कि मृतक पत्रकार सौमित सिंह के पास से फिलहाल कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पूर्वी दिल्ली के मधु विहार स्थित अपने आवास पर सोमवार की सुबह एक फ्रीलांस जर्नलिस्ट ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने बताया कि मृतक पत्रकार सौमित सिंह के पास से फिलहाल कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। वह डिप्रेशन में था और वह इसकी दवा भी ले रहा था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि मृतक पत्रकार सौमित पिछले दो साल से बेरोजगार था, जिसकी वजह से ही वह डिप्रेशन में आ गया था। फिलहाल वह फ्रीलांस के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस ने फिलहाल हत्या की संभावना से इनकार कर दिया है।
मृतक पत्रकार की बॉडी पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दी गई है।
सोमवार सुबह लगभग 8 बजे सौमित की बॉडी मयूरध्वज स्थित उसके अपार्टमेंट में पंखे लटकी मिली। एक रिश्तेदार ने बताया, ‘उसकी बॉडी को सबसे पहले नौकरानी ने देखा था, जिसके बाद सौमित को नीचे उतारा गया और तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वह बच नहीं सका।’
एसएमई पोस्ट के एडिटर व वरिष्ठ पत्रकार शरद गुप्ता ने मृतक पत्रकार को याद करते हुए अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा, ‘आज सुबह इस खबर को पढ़कर जो धक्का लगा, काबिले बयान नहीं है। मैं Saumit Sinh को जानता था। शायद हम फेसबुक पर ही मिले थे। वह लखनऊ का रहने वाला था। नौकरी मुंबई में कर रहा था। मिडडे, डीएनए जैसे कई अखबारों में काम किया। फिर एक वेबसाइट शुरू की - Mumbaiwalla. बड़ा अचरज हुआ। तीस साल की उम्र में किसी मीडिया संस्थान की नियमित आय वाली नौकरी छोड़कर अनिश्चित आय और भविष्य वाला अपना काम शुरू करना पत्रकारों के लिए किसी बड़े जोखिम से कम नहीं होता।
लेकिन उसने यह जोखिम उठाया। कुछ अच्छी खबरें ब्रेक कीं। उसकी एक खबर उसकी वेब साइट से साभार लेकर मैंने भी दैनिक भास्कर की संडे जैकेट पर छापी थी।
वही हुआ जिसकी आशंका थी। वेबसाइट चली नहीं। कई मुकदमे हुए। सौमित ने नौकरी खोजनी शुरू की। दिल्ली शिफ्ट हो गया। यहीं हमारी पहली मुलाकात हुई। लेकिन रेग्युलर काम से ब्रेक सीवी में धब्बा माना जाता है। अनुभव और प्रतिभा से ज्यादा कद्र सीवी में लिखे शब्दों की होती है। अखबार में छपा है- वह दो साल से बेराजगार था। वह डिप्रेशन का शिकार था। दवाइयां ले रहा था।
सौमित तीन-चार महीने पहले मुझे प्रेस क्लब में मिला था। अजीब सी बातें कर रहा था। सभी के प्रति अजीब सा जहर भरा था उसके मन में। मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था। लेकिन ऐसा कदम उठाएगा, कभी कल्पना भी न थी।
इस प्रकरण से एक बात समझ आती है- यह हाल उनका है जो 'सिस्टम' से तालमेल नहीं बिठा पाते हैं। सरवाइवल के लिए अखबार या टीवी चैनल का मुंह ताकते हैं। अगर सौमित ने भी अपने संबंधों को इस्तेमाल कर कॉरपोरेट्स/बिजनेस घरानों के काम कराने शुरू कर किए होते तो वह दौलत से खेल रहा होता। सत्ता के गलियारों में सैकड़ों उसे सलाम ठोक रहे होते। कहीं कॉरपोरेट कम्युनिकेशन का हेड होता। काश....
काश...हम इस सिस्टम में बदलाव ला सकते।
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