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एक्सचेंज4मीडिया कॉनक्लेव के पहले सत्र में मीडिया सर्विस ब्रांड ए क्रिएशन ऑफ द पास्ट डिकेड्स, व्हाट इज नेक्स्ट ? पर चर्चा
एक्सचेंज4मीडिया कॉनक्लेव के पहले सत्र में मीडिया सर्विस ब्रांड ए क्रिएशन ऑफ द पास्ट डिकेड्स, व्हाट इज नेक्स्ट ? पर चर्चा
<p>सत्र की शुरुआत ‘मीडिया सर्विस ब्रांड ए क्रिएशन ऑफ द पास्ट डिकेड्स, व्हाट इज नेक्स्ट ? &rsqu
समाचार4मीडिया ब्यूरो
10 years ago
सत्र की शुरुआत ‘मीडिया सर्विस ब्रांड ए क्रिएशन ऑफ द पास्ट डिकेड्स, व्हाट इज नेक्स्ट ? ’ शीर्षक से हुई, जिसकी अध्यक्षता एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के डायरेक्टर स्ट्रेटजी वी.रामचंद्रम ने की। सत्र में सबसे पहले बोलते हुए जापान से आए डेन्टसू के डायरेक्टर और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हयाता शान ने कहा कि मीडिया सर्विस ब्रांड के लिहाज से आज का समय ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह जापान में ब्रांडिंग को महत्व दिया जाता है और आउटडोर मीडिया ने इसमें सबसे ज्यादा मदद की है। जापान मीडिया सर्विस ब्रांड को परिभाषित करने में सबसे आगे रहा है।
उन्होंने हिटाची कंपनी के विज्ञापन का उदाहरण देकर अपनी बात को स्पष्ट किया कि जब जापान में एक वीडियो के द्वारा हिटाची का विज्ञापन दिखाया गया तो इस ब्रांड की सेल में काफी बढ़ोत्तरी हुई। साथ ही बताया कि हिटाची ने प्रोडेक्ट प्लेसमेंट को कैसे रिडिफाइंड किया। आउटडोर मीडिया के एक्पेरिमेंट को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह ब्रांड को बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
हयाता ने कहा कि आज ब्रांड ‘मस्कट’ हो गया है। लेकिन क्या वह कल्चर का हिस्सा बन सकता है ? उन्होंने डोकमोडेके का उदाहरण देकर कहा कि यह विज्ञापन बहुत लोकप्रिय है। और यह आज कल्चर का हिस्सा बन गया है। विज्ञापन की सफालता इसमें है कि वह हमारे कल्चर का हिस्सा बन जाए। लेकिन आने वाले समय में नई चुनौतियों भी होंगी और मीडिया सर्विस ब्रांड की बजाय क्रिएटिव एजेंसी का बोलबाला होगा। अब क्रिएटिवीटी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
विवाकी इडिंया के कंट्री चेयर श्रीकांत शास्त्री मीडिया सर्विस ब्रांड के बारे में बात करते हुए बताया कि जब हम मीडिया सर्विस ब्रांड की बात करते हैं तो अक्सर ध्यान सर्विस पर जाता है जैसे कि आप कहते हैं कि हेल्थ सर्विस। लेकिन तब उसके लिए ‘पे’ करते हैं और वहीं पर अगर म्यूनिसिपल सर्विस की बात करें, तो वह अलग इसलिए हो जाती है क्योंकि वहां पर हम जो पे करते हैं वह काफी कम होता है, क्योंकि वहां पर रीइन्वेशन कम होता है और इसलिए हम उसकी सर्विस से खुश नहीं।
मुद्दे की बात यह है कि आज से एक डेढ़ साल पहले मीडिया हाउस के मालिक हमेशा यह कहते रहते थे कि उन्हें उस तरह का विज्ञापन रेवन्यू नहीं मिल रहा है, जैसा मिलना चाहिए। इसकी कई वजहें थीं। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि जब बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्ट्रपति पद से हटे तो वह करीब-करीब दिवालिया हो चुके थे। लेकिन बाद मे स्थिति बेहतर हो गई। आप जानते हैं कि यह सब कैसे हुआ? उन्होंने अपने टेंलेंट का इस्तेमाल किया और अपने टेलेंट का रीइन्वेंशन किया। मीडिया एंजेसीज को भी रीइन्वेंशन की जरूरत है। और इसके लिए 360 मॉडल के साथ-साथ मल्टीपल स्पेशलाइजेशन युनिट पर ध्यान देना होगा। अब समय बदल रहा है। अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2010-11 में विज्ञापन का ज्यादा हिस्सा डिजिटल क्षेत्र पर जायेगा, क्योंकि यहां पर इन्वेंशन ज्यादा है। यह इस बात का संकेत है कि दुनिया कहां जा रही है। आज मोबाइल और इंटरनेट यूजर्स बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। अभी मीडिया एजेंसी की तुलना में क्रिएटिव एजेंसी की आय दोगुनी है। लेकिन बहुत जल्द ही डिजिटल एजेंसी सबको पीछे छोड़ देगी। आने वाला समय उस कंपनी के लिए सबसे बेहतर होगा जो अपने पोडक्ट को सबसे कम आया वाले व्यक्ति के पास पहुंचा सके यह बहुत बड़ी चुनौती भी है। भारत और विश्व दोनों जगहों पर लो इनकम ग्रुप को ध्यान में रखकर प्रोडक्ट लांच करना होगा। और काफी हद तक यह हो रहा है। जो ऐसा कर रहे हैं वे सफल हैं। भारत के बाजार पर ध्यान दे तो आज भी यहां लो इनकम ग्रुप काफी बड़ा है, लिहाजा इसे ध्यान रखते हुए अपने प्रोडेक्ट बनाने होंगे।
जॉजी पाल, चेयरमैन और एनसीडी, बीबीडिओ इंडिया, ने इंटरनेट की जरूरत और इसके महत्व को अपने क्रिएटिव अंदाज में बताया। टेक्नॉलॉजी ने हम सबको मीडिया बना दिया है। उन्होंने यू-ट्यूब पर डाउनलोड एक वीडियो दिखाकर बताया कि यह सोमालिया जैसे एक गरीब देश के गुमनाम संगीतकार कैनन का वीडियो है। आपको आश्चर्य होगा कि दक्षिण अफ्रीका में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप 2010 का यह थीम सॉंग बन गया है। यू-ट्यूब से वर्ल्ड कप के थीम सांग का यह सफर नेट के रास्ते ही तय हुआ। इंटरनेट के बारे में बताते हुए जोजी ने कहा कि यह आज टीचर बन गया है। और यह हमें एक नेशन के रूप में डेवेलप कर रहा है। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि आप इसका सकारात्मक उपयोग करते हैं या नकारात्मक उपयोग। मीडिया सर्विस ब्रांड्स की ओर बात करें तो आज पीआर डायरेक्टर्स , डिजिटल, सभी को सम्मलित करना चाहिए। मीडिया के इन सभी माध्यमों को साथ लेकर बेहतर काम किया जा सकता है।
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