TV9 विवाद में आया नया मोड़, जानें क्यों मुश्किल में आए पूर्व CEO रवि प्रकाश

रवि प्रकाश की अग्रिम जमानत याचिका पर तेलंगाना हाई कोर्ट में हुई सुनवाई

Last Modified:
Wednesday, 12 June, 2019
TV9

टीवी9 (TV9) समूह में शुरू हुए विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन इससे जुड़े नए मामले सामने आ रहे हैं। वरिष्ठ टीवी पत्रकार और टीवी9 के पूर्व सीईओ रवि प्रकाश ने समूह के प्रमोटर्स पर तमाम आरोप लगाए हैं। रवि प्रकाश का आरोप है कि कंपनी के पूर्व और वर्तमान प्रमोटर्स ने 294 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की है। रवि प्रकाश के लिए अग्रिम जमानत की मांग करते हुए उनके वकील दिलजीत सिंह अहलूवालिया ने तेलंगाना हाई कोर्ट के जस्टिस जी. श्रीदेवी की कोर्ट में ये आरोप लगाए हैं। बता दें कि रवि प्रकाश के खिलाफ हैदराबाद में दर्ज आपराधिक मामलों में अग्रिम जमानत के लिए इस कोर्ट में सुनवाई हो रही है।

अहलूवालिया के इन आरोपों के अनुसार, चैनल के वास्तविक प्रमोटर सी. श्रीनिवास राजू ने ‘टीवी9’ का संचालन करने वाली ‘एसोसिएटेड ब्रॉडकास्टिंग कंपनी लिमिटेड’ (ABCL) कंपनी में अपने 90 प्रतिशत शेयर ‘माई होम ग्रुप’ (My Home group) के प्रमोटर्स जे. रामेश्वर राव और जे. जगपथी राव व अन्य को 500 करोड़ रुपए में बेच दिए। रवि प्रकाश के वकील ने कोर्ट को बताया कि इस सौदे में 206 करोड़ रुपए चेक से दिए गए जबकि बाकी की रकम के लिए नकद में गुपचुप रूप से डील हुई और हवाला के जरिये यह रकम दी गई।

अहलूवालिया के अनुसार, रवि प्रकाश ने इस ‘गुपचुप’ डील की शिकायत सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से करते हुए मामले की जांच की मांग की थी। इस बारे में अहलूवालिया ने कोर्ट के समक्ष उस ई-मेल की कॉपी भी पेश की, जो रवि प्रकाश ने सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय को भेजी थी। अहलूवालिया का आरोप है कि इस ई-मेल को भेजने के साथ ही रवि प्रकाश के लिए मुश्किलें शुरू हो गई थीं। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता हरिन रावल का कोर्ट के समक्ष कहना था कि रवि प्रकाश ने पुलिस पूछताछ के दौरान कभी सहयोग नहीं किया। इसके अलावा भी उन्होंने रवि प्रकाश पर तमाम आरोप लगाए।

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काम नहीं आई पुलिस से बचने की ये ट्रिक, साथियों संग हवालात पहुंचा 'पत्रकार'

गिरफ्तारी के लिए उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की पुलिस दे रही थी दबिश

Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Arrest

खुद को तहलका इंडिया न्यूज चैनल का पत्रकार बताकर लोगों को ब्लैकमेल करने और उनसे रंगदारी मांगने के आरोप में फरार चल रहा अनुज अग्रवाल आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। दरअसल, ओडिशा पुलिस ने ब्लैकमेलिंग के नए मामले में उसे गिरफ्तार कर लिया है।

ब्लैकमेलिंग और रंगदारी से जुड़े कई मामलों में अनुज अग्रवाल काफी समय से फरार चल रहा था और उसे दबोचने के लिए उप्र समेत कई राज्यों की पुलिस उसके पीछे लगी हुई थी। पुलिस से बचने के लिए यहां से भागकर अनुज ने ओडिशा को अपना ठिकाना बना रखा था। बताया जाता है कि अनुज ने 12 जून को ओडिशा के बरगड जिले में एक कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर से रंगदारी मांगी थी। असिस्टेंट मैनेजर की शिकायत पर पुलिस ने अनुज अग्रवाल को उसके तीन साथियों विशाल गंभीर, इमरान खान और तपन कुमार साहू के साथ तीन लाख रुपए की रंगदारी लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से कैमरा, माइक आईडी, प्रेसकार्ड समेत लैपटॉप बरामद हुआ है।

गौरतलब है कि इससे पहले खुद को पत्रकार बताकर अनुज अग्रवाल ने मोदी स्टील फैक्ट्री के जीएम को ब्लैकमेल कर एक करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी थी। उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र से जुड़े इस मामले की जांच में पता चला था कि अनुज अग्रवाल नामक कथित पत्रकार हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ देहरादून के थानों में कई मामले दर्ज हैं। इस मामले में पीड़ित ने कथित पत्रकार समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इसके अलावा देहरादून के श्रीमहंत इंद्रेश अस्पताल प्रबंध समिति के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने भी अनुज अग्रवाल और उसके साथियों के खिलाफ रंगदारी मांगने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रतूड़ी का कहना था कि अनुज अग्रवाल ने खुद को ‘तहलका चैनल’ का पत्रकार बताते हुए कुछ विडियो शूट कर रंगदारी मांगी थी।

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टीवी टुडे नेटवर्क में इस बड़े पद पर नियुक्ति को MIB की हरी झंडी

कंपनी ने आठ फरवरी को दी थी सूचना, किया जा रहा था मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार

by पंकज शर्मा
Published - Monday, 24 June, 2019
Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
TV TODAY

सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB)  ने ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) में नीरा मल्होत्रा की एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में पांच वर्ष तक के लिए नियुक्ति को हरी झंडी दे दी है। बताया जाता है कि कंपनी ने नीरा मल्होत्रा की इस पद पर नियुक्ति के बारे में आठ फरवरी को ही सूचना दे दी थी, लेकिन इस बारे में शेयरहोल्डर्स और एमआईबी के अप्रूवल का इंतजार किय़ा जा रहा था।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी गई सूचना में कंपनी का कहना है कि एमआईबी ने 20 जून को एक पत्र में नीरा मल्होत्रा की एडिशनल इंडिपेंडेट डायरेक्टर के रूप में नियुक्ति को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके बाद इस पद पर नीरा मल्होत्रा की नियुक्ति 20 जून से प्रभावी हो गई है।

बता दें कि 63 वर्षीय मल्होत्रा ऑफिस मैनेजमेंट में ग्रेजुएट हैं और उन्हें सोशल सर्विस व बिजनेस मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम करने का 37 साल से ज्यादा का अनुभव है। नीरा मल्होत्रा ‘Living Media India’ में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा वह ‘Living Media India’ की ‘Audit Committee and Nomination & Remuneration Committee’ की मेंबर भी हैं।

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टीवी9 भारतवर्ष को मिला नया मैनेजिंग एडिटर, जुलाई से संभालेंगे जिम्मेदारी

विनोद कापड़ी की टीवी9 समूह से विदाई के बाद से रिक्त था ये पद

by पंकज शर्मा
Published - Monday, 24 June, 2019
Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
TV9 Bharatvarsh

टीवी9समूह के हिंदी चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ को वरिष्ठ पत्रकार संत प्रसाद के रूप में नया मैनेजिंग एडिटर मिल गया है। बताया जाता है कि संत प्रसाद अगले महीने इस पद पर जॉइन करेंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने चैनल के संस्थापकों में से  एक विनोद कापड़ी, जो चैनल के मैनेजिंग एडिटर भी थे, उनकी टीवी9 समूह से विदाई के बाद से ये पद रिक्त था। संत प्रसाद फिलहाल ‘इंडिया टीवी’ में बतौर सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

गौरतलब है कि संत प्रसाद ने मई 2018 में ‘इंडिया टीवी’ में कार्यभार संभाला था। ‘इंडिया टीवी’ के साथ उनकी यह दूसरी पारी थी। इससे पहले वह जून 2015 से जुलाई 2017 तक भी यहां सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर रह चुके हैं। ‘इंडिया टीवी’ के साथ अपनी दूसरी पारी शुरू करने से पहले वे जुलाई 2017 से अप्रैल 2018 तक ‘जी मीडिया’ में बतौर एडिटर (आउटपुट) अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। जी न्यूज के साथ भी ये उनकी दूसरी पारी थी।

मूलरूप से बिहार के बक्सर निवासी संत प्रसाद को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 24 साल का अनुभव है। संत प्रसाद ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत ‘ऑल इंडिया रेडियो’ से की थी। इसके बाद वे रामोजी फिल्म सिटी, हैदराबाद से जुड़ गए और ‘ईटीवी यूपी’ में प्रड्यूसर/न्यूज एंकर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। यहां से बाय बोलकर संत प्रसाद ने  ‘सहारा समय’ का दामन थाम लिया। करीब डेढ़ साल तक ‘सहारा समय’ से जुड़े रहने के बाद संत प्रसाद वर्ष 2004 में ‘जी न्यूज’ के साथ जुड़ गए और करीब नौ साल तक अपनी जिम्मेदारी निभाई। ‘जी न्यूज’ में बतौर डिप्टी एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर वह यहां प्राइम टाइम बुलेटिन और प्रोग्राम्स की जिम्मेदारी भी संभालते थे। वह ‘न्यूज24’ में आउटपुट हेड के रूप में भी काम कर चुके हैं। संत प्रसाद ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है।

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सागरिका घोष का बड़ा सवाल, इस तरह कैसे 'सबका विश्वास' जीतेंगे मोदी?

लोकसभा चुनाव में जीत के बाद बीजेपी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे में बदलाव किया है

Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Sagarika ghose

लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के सभी नेताओं ने अपने नाम के आगे से ‘चौकीदार’ शब्द हटा लिया है। यानी सोशल मीडिया पर अब कोई चौकीदार नहीं है। इसके अलावा ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे में भी बदलाव किया गया है। अब यह बदलकर ‘सबका साथ, सबका विश्वास’ हो गया है। इसके पीछे मोदी का तर्क है कि सबको साथ लेकर विकास कैसे करते हैं, यह हम बता चुके हैं। अब हमें सबका विश्वास जीतना है। लेकिन बीते कुछ समय में जिस तरह से राजनीतिक उठापठक की खबरें सामने आई हैं, उससे यह सवाल जरूर खड़ा हो गया है कि मोदी विपक्ष को तोड़कर उसका विश्वास कैसे जीतेंगे? या फिर यह नारा महज कहने के लिए है?

वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष ने अपने लेख में इसी मुद्दे को उठाया है। उनका कहना है कि एक तरफ मोदी सबका विश्वास पाना चाहते हैं। ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे विषय पर सभी पार्टियों का सहयोग चाहते हैं और दूसरी तरफ उन्हीं पार्टियों को खत्म करने में लगे हैं। तेलगुदेशम पार्टी (टीडीपी) के चार प्रमुख सदस्यों का भाजपा में शामिल होना इसका सबूत है। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित इस लेख में सागरिका ने कई ऐसी बातों को रेखांकित किया है, जिन पर विचार किये जाने की जरूरत है।

सागरिका घोष का पूरा लेख आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं-

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खत्म नहीं हो रहीं NDTV की मुश्किलें, लगा एक और झटका

‘एनडीटीवी’ के प्रमोटर्स डॉ. प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं

by पंकज शर्मा
Published - Monday, 24 June, 2019
Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Radhika-Prannoy

‘एनडीटीवी’ (NDTV) के प्रमोटर्स डॉ. प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक हफ्ते के अंदर ही उन्हें दूसरा बड़ा झटका लगा है। ‘भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड’ (SEBI) के बाद दोनों को इस बार यह झटका इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ने दिया है। दरअसल, ट्रिब्यूनल ने सिक्योरिटी मार्केट में लेनदेन को लेकर कर चोरी के मामले में दोनों के खिलाफ आयकर विभाग के पुराने फैसले को बरकरार रखा है। दोनों पर 2009-10 और 2010-11 के असेसमेंट ईयर में 117 करोड़ रुपए की आय छिपाने का आरोप है। ट्रिब्यूनल के जूडिशियल मेंबर बीना ए पिल्लई और अकाउंटेंट मेंबर प्रशांत महर्षि की बेंच ने दोनों के खिलाफ यह फैसला सुनाया है।

आरोप है कि राधिका रॉय ने 31 जुलाई 2010 को दाखिल इनकम टैक्स रिटर्न में 90,80,683 रुपए की आय दिखाई थी। बाद में 16 मार्च 2011 को रिवाइज रिटर्न में करीब 35 करोड़ रुपए के कैपिटल लॉस की बात कही गई। इसे पुराने रिटर्न में छिपाया गया था। इसके बाद आयकर विभाग के अधिकारियों ने इस मामले को जांच के लिए स्क्रूटनी में डाल दिया। मामले की स्क्रूटनी में पता चला कि 2009 में एनडीटीवी के शेयर्स 140 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से मार्केट में बिक रहे थे, लेकिन राधिका रॉय ने 57 लाख 81 हजार 841 शेयर मात्र चार रुपए प्रति शेयर की दर से 3 अगस्त 2009 को दूसरी कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स को बेच दिए। उन्हीं शेयर को सात महीने बाद ही 140 रूपये की दर से 9 मार्च 2010 को 3500 फीसदी ज्यादा कीमत पर बेचा गया। आयकर विभाग ने इस सौदे पर सवाल खड़े किए थे। यही नहीं, जिस आरआरपीआर होल्डिंग्स कंपनी को ये शेयर बेचे गए थे, उसकी आधी हिस्सेदारी रॉय दंपति के पास थी। विभाग ने पाया कि इस सौदे में कैपिटल गेन को छिपाया गया है। इसके अलावा इस ट्रांजैक्शन पर किसी भी तरह का चार्ज भी नहीं चुकाया गया। आयकर के असेसमेंट अधिकारी ने इस जांच में पाया कि आयकर दाता ने कर चोरी के इरादे से ट्रांजैक्शन की हेराफेरी की है।

स्क्रूटनी के दौरान कर चोरी का मामला सामने आने पर आयकर अधिकारियों ने टैक्स और जुर्माना लगा दिया था। रॉय दंपति ने इस फैसले को इनकम टैक्स कमिश्नर के यहां चुनौती दी थी। इनकम टैक्स कमिशनर के यहां से एक केस में रॉय दंपति को राहत मिल गई थी, जबकि दूसरे में असेसमेंट अफसर के फैसले को बरकरार रखा गया था। इसके बाद रॉय दंपति और असेसमेंट अफसर दोनों अपीलेट ट्रिब्यूनल पहुंच गए थे, जहां पर ट्रिब्यूनल ने असेसमेंट अफसर के फैसले को बरकरार रखा है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों सेबी ने टैक्स में हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में घिरे डॉ. प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर मैनेजमेंट में कोई भी पद लेने पर अगले दो साल तक के लिए रोक लगा दी थी। इसके साथ ही सेबी ने दोनों पर दो साल के लिए प्रतिभूति मार्केट (securities market) से जुड़े रहने पर भी रोक लगा दी थी। हालांकि, Securities Appellate Tribunal (SAT) ने सेबी द्वारा प्रणॉय रॉय, राधिका रॉय और उनकी होल्डिंग कंपनी पर लगाए गए दो वर्ष के बैन को स्थगित कर दिया था।

 

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ऑफिस से लौट रही महिला पत्रकार के साथ हुई बड़ी वारदात

पूर्वी दिल्ली इलाके में कार सवार दो हमलावरों ने दिया घटना को अंजाम

by पंकज शर्मा
Published - Monday, 24 June, 2019
Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Mitali Chandola

महिला पत्रकार पर रविवार की देर रात कुछ हमलावरों ने हमला कर दिया। मिताली चंदोला (38) नामक महिला पत्रकार के साथ यह वारदात पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार इलाके में धर्मशिला अस्पताल के पास घटी, जहां कार सवार दो हमलावरों ने महिला पत्रकार की कार पर गोलियां चलाईं। नोएडा स्थित न्यूज चैनल में कार्यरत मिताली घटना के दौरान देर रात करीब सवा 12 बजे घर लौट रही थीं। हमले के दौरान बाजू में गोली लगने से मिताली घायल हो गईं। उन्हें धर्मशिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।

बताया जाता है कि हमलावर पहले से ही मिताली की कार का पीछा कर रहे थे। हमला करने से पहले उन्होंने मिताली की कार के शीशे पर अंडा फेंक दिया था, जिससे उन्हें बाहर का कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया और कार रोकनी पड़ी। तभी हमलावरों ने उन पर दो गोलियां दाग दीं। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है।

जांच में यह भी पता चला है कि ग्रेटर नोएडा में रहने वाली मिताली चंदोला का पति से भी झगड़ा चल रहा है। दोनों की ओर से नोएडा में पहले से ही क्रॉस एफआईआर भी दर्ज कराई गई हैं। ऐसे में पुलिस इस हमले को पारिवारिक रंजिश से भी जोड़कर देख रही है।

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पत्रकार की इस हरकत पर भड़के राष्ट्रपति, दी जेल भेजने की धमकी

राष्ट्रपति आये दिन किसी न किसी बात पर पत्रकारों को धमकाते रहते हैं

by नीरज नैयर
Published - Monday, 24 June, 2019
Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Journalist

भारतीय पत्रकार भले ही अमेरिका में मीडिया की आजादी का हवाला देकर अपनी सरकार को निशाना बनाते रहें, लेकिन हकीकत में वहां स्थिति यहां से ज्यादा खराब है। खासकर डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति भवन पहुंचने के बाद से पत्रकारों के लिए परिस्थितियां और भी विपरीत हो गई हैं। ट्रम्प आये दिन किसी न किसी बात पर पत्रकारों को धमकाते रहते हैं।

ताजा मामला किम जोंग-उन के पत्र की तस्वीर खींचने से जुड़ा है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने तस्वीर लेने वाले टाइम्स मैगजीन के पत्रकार को जेल भेजने तक की धमकी दे डाली है। दरअसल, व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रम्प का इंटरव्यू चल रहा था। ट्रम्प 2020 में होने वाले चुनाव के संबंध में अपनी रणनीतियों के बारे में बता रहे थे। इस दौरान ट्रम्प ने कई बातें ऑफ-द-रिकॉर्ड बताईं। उन्होंने पत्रकारों को उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन द्वारा उन्हें भेजा गया पत्र भी दिखाया। इस बीच ट्रम्प कुछ देर अपने सहयोगियों से किसी विषय पर चर्चा में व्यस्त हो गए, तभी मौका पाकर टाइम मैगजीन के पत्रकार ने किम जोंग-उन के लेटर की फोटो अपने कैमरे में कैद कर ली।

ट्रम्प की नजरों ने भी पत्रकार की इस हरकत को कैद कर लिया और जैसे ही पत्रकार ने कठिन सवाल राष्ट्रपति की ओर उछाला, वो बिफर गए। पत्रकार ने पूछा कि आपको क्या लगता है कि 2020 में आपको कौन कड़ी चुनौती दे सकता है? इस पर ट्रम्प ने कहा, ‘मुझे नहीं पता, मैंने बहुत से काम किये हैं।‘ इसके बाद जब पत्रकार ने किसी मामले का हवाला देकर पूछा कि वो स्पेशल काउंसल रोबर्ट मुलेर की जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं? तो फिर ट्रम्प खुद को नहीं रोक सके। उन्होंने लेटर की तस्वीर खींचने का मुद्दा उठाते हुए पत्रकार को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा, ‘ठीक है, आप इसके बजाय जेल जा सकते हैं यदि आपने उस गोपनीय पत्र की तस्वीर इस्तेमाल की, जो मैंने आपको दिखाया था। मैंने आपको तस्वीर लेने के लिए पत्र नहीं दिखाया था, मेरे साथ खेल खेलने की जरूरत नहीं है।’

राष्ट्रपति के ऐसे शब्द सुनकर पत्रकार भी चौंक गया। उसने जवाब में कहा, ‘मुझे क्षमा करें श्रीमान राष्ट्रपति, क्या आप मुझे जेल की धमकी दे रहे हैं’? इस पर ट्रम्प ने कहा, ‘मैंने आपको यह बातें बताईं, मैंने आपसे ऑफ द रिकॉर्ड लेटर देखने को कहा, इसका यह मतलब नहीं कि आप अपना कैमरा निकालकर उसकी फोटो लेना शुरू कर दें’। ट्रम्प इतने पर भी नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, ‘जाइए अपनी स्टोरी का आनंद उठाइये, मुझे पता है कि यह टाइम मैगजीन की 128वीं भयानक स्टोरी होगी।’

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युवा पत्रकार सुरेश सिंह ने उठाया ऐसा कदम, शोक में हैं साथी पत्रकार

हिन्दुस्तान के आगरा एडिशन में कार्यरत पत्रकार ने की आत्महत्या

by नीरज नैयर
Published - Sunday, 23 June, 2019
Last Modified:
Sunday, 23 June, 2019
suresh

आगरा से मिली बुरी खबर के मुताबिक वहां के हिन्दुस्तान अखबार में कार्यरत पत्रकार सुरेश सिंह कुशवाह का आज सुबह निधन हो गया है।
बताया गया है कि वो रात दो बजे संस्थान से काम करके वापस घर पहुंचे थे और करीब चार बजे उन्होंने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। वे हिन्दुस्तान में बतौर रिटेनर कार्यरत थे। इससे पहले वे अमर उजाला के आगरा संस्करण, पंजाब केसरी, सी एक्सप्रेस और पुष्प सवेरा अखबारों में भी काम कर चुके हैं।

वे अच्छे भजन गायक और अभिनेता भी थे। देवी के भजनों का उनका एक कैसट भी लॉन्च हो चुका था। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से वे आर्थिक तंगी में चल रहे थे। उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं।

उनके निधन की खबर सुनकर आगरा में उनके पत्रकार साथी स्तब्ध है। हंसमुख स्वभाव के सुरेश काफी मिलनसार भी थे। 

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अंजना ओम कश्यप ने दी सफाई, सुनाई दुष्यंत कुमार की ये कविता

आईसीयू में रिपोर्टिंग को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही हैं अंजना ओम कश्यप

by नीरज नैयर
Published - Friday, 21 June, 2019
Last Modified:
Friday, 21 June, 2019
Anjana Om Kashyap

आईसीयू में रिपोर्टिंग और डॉक्टरों के साथ अफसरी अंदाज में सवाल-जवाब करने के चलते आलोचना झेल रहीं आजतक की स्टार एंकर अंजना ओम कश्यप हर संभव प्लेटफॉर्म पर सफाई पेश कर रही हैं। ट्विटर के बाद अब उन्होंने फेसबुक पर अपने अंदाज को वाजिब करार दिया है। करीब दो महीने बाद अंजना ने फेसबुक का रुख किया है। इससे पहले उन्होंने आखिरी बार 23 अप्रैल को चुनावी पोस्ट की थी।

ट्विटर के इतर अंजना ने फेसबुक पर जो सफाई पेश की है, उसमें उन्होंने इतना अतिरिक्त जोड़ दिया है कि वो विपरीत परिस्थितयों में डटे डॉक्टरों का सम्मान करती हैं। 

अपनी सफाई की शुरुआत अंजना ने दुष्यंत कुमार की लोकप्रिय कविता ‘कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो, लोग कहते थे कि ये बात नहीं कहने की तुमने कह दी है तो कहने की सजा लो यारो’ से की है। कविता के माध्यम से उन्होंने यह बताने का प्रयास किया है कि उन्होंने केवल जर्जर हो चुकी व्यवस्था पर चोट की है और इसके लिए मिल रहीं आलोचनाओं का उन्हें कोई अफसोस नहीं।

सफाई के इस विडियो में अंजना कहती हैं, ‘मैंने भी अपनी रिपोर्ट से उस सिस्टम पर एक पत्थर फेंका है, जिसमें साल बदल जाते हैं, मौत के आंकड़े बदल जाते हैं, पर हालात नहीं बदलते। ये पत्थर उसी हालात को बदलने के लिए है, अगर ऐसा होता है तो यह बतौर पत्रकार मेरे पेशे की सबसे बड़ी कामयाबी होगी, क्योंकि हमारा काम सिर्फ कालीन की खूबसूरती की आड़ में छिपी गंदगी को सामने लाना है।’

35 सेकंड के इस विडियो में अंजना ने कहीं भी रिपोर्टिंग के दौरान अपने अंदाज़ पर माफी नहीं मांगी, न ही उन्होंने डॉक्टर या अस्पताल स्टाफ को उनकी वजह से हुई असुविधा का जिक्र किया। विडियो के साथ उन्होंने बस इतना जरूर लिखा है, ‘हमारा मकसद ‘ICU’ के बद्तर हालात की सच्चाई को देश के सामने लाना था। हमारा मकसद ये है कि सुशासन की चमक के सियासी बखान में चमकी बुखार से पीड़ित परिवारों के घरों का अंधेरा खो ना जाए। ऐसे अस्पताल का सच,जो खुद ICU में है! हम उन डॉक्टरों का सम्मान करते हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में डटे हैं।’

अंजना की इस पोस्ट पर 11 हजार से ज्यादा लोगों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 10 हजार के आसपास कमेंट्स हैं और 630 बार इसे शेयर किया जा चुका है। कमेंट बॉक्स में नजर आने वाले अधिकांश कमेंट्स में लोगों ने अंजना की आलोचना ही की है। लोगों का कहना है कि रिपोर्टिंग के नाम पर अंजना ने जिस तरफ आईसीयू में घुसकर डॉक्टरों के साथ अभद्रता की, उसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आरती आर्य नामक डॉक्टर ने तो अंजना से अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ से बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। उन्होंने आगे लिखा है कि व्यवस्था में सुधार के लिए जिम्मेदार लोगों से सवाल पूछिए। इसी तरह शाश्वत सिंह ने लिखा है, ‘हमें आपके सम्मान की कोई जरूरत नहीं, जाकर देखिये कि डॉक्टरों को सोने के लिए कितना समय मिलता है, उन्हें क्या सुविधाएं मिलती हैं।’ रिक्की चौहान ने भी अंजना को खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने लिखा है, ‘अपने आईसीयू वाले विडियो को 15 सेकंड देख लीजिये, समझ आ जायेगा कि डॉक्टर उस वक़्त भी काम कर रहे थे, यदि आप बकवास न करतीं तो शायद एक और बच्चे की जान बच जाती।’

अंजना ओम कश्यप द्वारा फेसबुक पर पोस्ट किए गए विडियो को आप यहां देख सकते हैं-

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देखें विडियो: CM के सामने पत्रकारों को धक्का दे निकाला बाहर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चमकी बुखार से मर रहे बच्चों को लेकर चल रही मीडिया कवरेज से खुश नही है

Last Modified:
Friday, 21 June, 2019
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चमकी बुखार से मर रहे बच्चों को लेकर चल रही मीडिया कवरेज से खुश नही है। वे इस मुद्दे पर पत्रकारों के सवाल का जवाब भी नहीं दे रहे हैं।

ऐसे में आज जब लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान राज्यसभा का नामांकन भरने विधानसभा कक्ष पहुंचे तो सीएम नीतीश कुमार भी वहा मौजूद थे। इस दौरान बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों को देखकर नीतीश ने आपत्ति दर्ज की। उसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने मीडियाकर्मियों को धक्का मारकर बाहर निकाल दिया।

जिस बुरी तरह से सुरक्षाकर्मियों ने मीडियावालों को धक्का दे देकर बाहर निकाला, उसका विडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। आप नीचे विडियो के जरिए खुद देखें कि किस तरह से बिहार में आजकल मीडियाकर्मियों को ट्रीट किया जा रहा है।  
देखें विडियो: CM के सामने पत्रकारों को धक्का दे निकाला बाहर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चमकी बुखार से मर रहे बच्चों को लेकर चल रही मीडिया कवरेज से खुश नही है। वे इस मुद्दे पर पत्रकारों के सवाल का जवाब भी नहीं दे रहे हैं।

ऐसे में आज जब लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान राज्यसभा का नामांकन भरने विधानसभा कक्ष पहुंचे तो सीएम नीतीश कुमार भी वहा मौजूद थे। इस दौरान बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों को देखकर नीतीश ने आपत्ति दर्ज की। उसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने मीडियाकर्मियों को धक्का मारकर बाहर निकाल दिया।

जिस बुरी तरह से सुरक्षाकर्मियों ने मीडियावालों को धक्का दे देकर बाहर निकाला, उसका विडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। आप नीचे विडियो के जरिए खुद देखें कि किस तरह से बिहार में आजकल मीडियाकर्मियों को ट्रीट किया जा रहा है।  

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