इन बड़े एंकर्स ने अपनी पसंद का खोला ‘राज’, कई एंकर्स के पढ़े कसीदे

‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह की ओर से 22 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2019 दिए गए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 29 February, 2020
Last Modified:
Saturday, 29 February, 2020
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न्यूज चैनल पर दिखने वाले मेल या फीमेल एंकर्स में से किसी न किसी को तो हर कोई फॉलो करता है। सोशल मीडिया के जरिए भी न्यूज चैनल के मेल या फीमेल एंकर की फैन फॉलोइंग का पता चल ही जाता है, लेकिन शायद ही कोई जानता हो कि इन एंकर्स की पसंद क्या है, वे किस एंकर को फॉलो करते हैं, इतना ही नहीं वे किस चैनल को पसंद करते हैं। इस बात का खुलासा ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह की न्यूजनेक्सट कॉन्फ्रेंस क दौरान हुआ, जब एक पैनल डिस्कशन के दौरान ‘Differentiating editorial content from propaganda’ विषय पर चर्चा हो रही थी।

इस पैनल डिस्कशन को बतौर सेशन चेयर फिल्म मेकर, इंटरनेशनल एंटरप्रिन्योर, मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक डॉ. भुवन लाल मॉडरेट कर रहे थे। पैनल डिस्कशन में ‘एबीपी न्यूज’ के वाइस प्रेजिडेंट (प्लानिंग और स्पेशल कवरेज) सुमित अवस्थी, ‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) रोहित सरदाना, ‘जी बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी, ‘राज्यसभा टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन, ‘सीएनएन न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे और ‘विऑन’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर पलकी शर्मा उपाध्याय शामिल थे।

यह पैनल डिस्कशन अपने अंतिम पड़ाव पर था कि तभी एक्सचेंज4मीडिया के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने पैनल में मौजूद सभी सदस्यों से उनके पसंदीदा एंकर और न्यूज चैनल को लेकर सवाल पूछ लिया। हालांकि सवाल सुनकर पैनल में मौजूद सभी सदस्य थोड़ा सा असहज हो गए, क्योंकि इतने बड़े मंच से अपने कॉम्पटीटर चैनल्स के एंकर का नाम लेकर अपनी पसंद जाहिर करना उनके लिए मुश्किल तो था। लिहाजा, ‘विऑन’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर पलकी शर्मा इस सवाल से बचती दिखीं, उन्होंने तुरंत ही अपने चैनल का नाम लिया, लेकिन डॉ. बत्रा ने उनका जवाब सुनकर तुरंत ही अपने सवाल को फिर दोहराया कि अपने चैनल के एंकर को छोड़कर आप किसी भी अन्य चैनल की बात कर सकती हैं।       

यह सुनते ही सबसे पहले इसका जवाब देने के लिए ‘सीएनएन न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे ने हाथ खड़ा कर दिया और निसंकोच उन्होंने बताया कि वे रोहित सरदाना को बतौर एंकर काफी पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि मेरी मुलाकात रोहितजी से इतनी नहीं है, लेकिन मैं उनके प्रोग्राम्स को देखना पसंद करता हूं। कॉम्लीमेंट के तौर पर मैं कहना चाहूंगा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि वे कभी अपनी मर्यादा को क्रॉस नहीं करते हैं। हां, इनके सवाल जरूर तल्ख हो सकते हैं। विचारधारा को लेकर भले ही आप इनकी आलोचना कर सकते हैं कि वे इस तरफ हैं या उस तरफ हैं, लेकिन मेरे लिए वे आपके पूछे सवाल में पूरी तरह से फिट बैठते हैं। मैंने कभी उन्हें उस तरह से चिल्लाते नहीं देखा है, जैसा कि अन्य कई चैनलों पर होता है। उन्होंने कहा कि तल्ख आपके सवाल में होना चाहिए, आपके व्यवहार में नहीं।

इसके बाद फिर अगला नंबर पलकी शर्मा का आया तो उन्होंने इस बार सवाल को यह कहते हुए आगे पास कर दिया कि वे सबसे आखिर में इसका जवाब देंगी। यह सुनकर ‘राज्यसभा टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन ने कहा कि यह बहुत ही कठिन सवाल है कि कोई एक एंकर दूसरे एंकर की नाम लेकर प्रशंसा करे।

लिहाजा सभी को बीच में रोकते हुए इस सवाल का जवाब देने की कमान ‘जी बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने अपने हाथों में ले ली और कहा कि मैं एक से ज्यादा एंकर को पसंद करता हूं। लेकिन पहला नाम यहां भूपेंद्र चौबे का लेना चाहूंगा। उन्होंने कहा कि मैं इन्हें ‘सीएनबीसी’ के दिनों से ही पसंद करता हूं, क्योंकि जब हम पॉलिटिकल डिस्कशन करते थे, तो पॉलिटिकल ओपिनियन के लिए हमारी पहली पसंद भूपेंद्र चौबे ही होते थे, जबकि ‘नेटवर्क18’ में और भी पत्रकार थे। लेकिन ऐसा इसलिए था, क्योंकि उनकी ओपिनियन मुझे बिल्कुल क्लियर, अनबॉयस्ड लगती थी। उन्होंने कहा कि यहां, दूसरे एंकर का मैं नाम नहीं लूंगा, लेकिन मैं एक ऑर्गनाइजेशन के तौर पर ‘आजतक’ को पसंद करता हूं। मैं इस चैनल की बहुत रिस्पेक्ट करता हूं। उन्होंने कहा कि ये बिजनेस मीडिया का हिन्दुस्तान यूनिलीवर है। लेकिन अपनी बात को खत्म करते-करते उन्होंने एक और एंकर का जिक्र कर ही दिया वे रोहित सरदाना को भी बतौर एंकर पसंद करते हैं।

इसके बाद, ‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) रोहित सरदाना ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि टीवी पर बहुत सारे एंकर्स हैं, जिन्हें हम सभी एप्रिसिएट करते हैं। बातों के दौरान उन्होंने सुमित अवस्थी की ओर इशारा करते हुए अपनी पसंद जगजाहिर की और कहा कि मैं ऐसा इसलिए नहीं कह रहा हूं कि सुमित मेरे बगल में बैठे हैं या फिर मैंने इनके साथ काम किया है, बल्कि जब मैंने इनके साथ कभी काम नहीं किया था, कभी किसी इवेंट मुलाकात होती थी, तब भी मैं हमेशा इन्हीं का नाम लेता था। फिर हमें बाद में ‘जी न्यूज’ में कुछ दिन एक साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि एक अच्छी चीज कहना चाहूंगा कि ‘ताल ठोक के’ शो जो मैंने जी न्यूज पर किया था कि उसका नाम सुमित ने ही दिया था और मैं उसका एंकर था, लेकिन बहुत सारे लोग मुझे सुमित कहकर संबोधित कर देते थे। यहां तक कुछ लोग शो में भी मुझे सुमित ही कह देते थे, क्योंकि अगला शो सुमित का ही होता था और कई लोग इनके शो में भी शामिल होते थे। लिहाजा उनके दिमाग में सुमित ही चलता रहता होगा, क्योंकि मेरी शक्ल कुछ-कुछ सुमित से मिलती है, मेरी भी मूछें हैं, मैं भी चश्मा पहनता हूं और इत्तेफाकन कपड़े भी एक जैसे ही पहनता हूं। कद-काठी में भी ज्यादा अंतर नहीं है, बस इन्होंने जिम जाकर अपने आपको मेंटेन किया हुआ है। इसलिए शायद ये लोग मुझे सुमित कहकर बुला देते होंगे और मैं इस बात का बुरा भी नहीं मानता हूं।

इसके बाद रोहित सरदाना ने श्वेता सिंह का नाम लिया और कहा कि मैं अपने चैनल में श्वेता सिंह को देखता हूं। उन्हें हमेशा से देखता आया हूं और मैं उनकी प्रशंसा करता हूं कि उन्होंने कई सालों से अपने आपको मेंटेन किया हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे ही आप मीमांसा मलिक को देखिए, जबसे देख रहा हूं उन्होंने अपने आपको बहुत मेंटेन किया हुआ है। सारे दौर गुजर गए लेकिन मीमांसा मलिक ने अपना एक ऑरा मेंटेन किया हुआ है और वो आज भी वे वैसे की वैसी ही दिखती हैं। टेलिविजन चैनल के बाहर यदि बात करें तो मैं बीबीसी नाउ में मिलिंद खांडेकर को देखता हूं, जबकि मैंने इनके साथ कभी काम नहीं किया है। ट्विटर पर यदि मैं इन्हें ऐसी वैसी कोई बात लिख भी देता हूं तो मैंने कभी नहीं देखा कि वे नाराज हो गए हो, बल्कि वे इसका जवाब भी देते हैं और मेरी कही बात को रीट्वीट भी कर लेते हैं। यही तो एक अच्छे आदमी की पहचान है।   

इसके बाद अब बारी थी सुमित अवस्थी की, तो उन्होंने इस सवाल के जवाब में कहा कि मैं यहां एक नहीं दो नाम लेना चाहूंगा, किसी चेहरे को देखते हुए नहीं, बल्कि प्रोफेशनली। उन्होंने कहा कि हर जर्नलिज्म के स्टूडेंट को हमेशा डॉ. रजत शर्मा से सीखना चाहिए कि आप कैसे विनम्रता और सरलता से अपने मेहमानों से अच्छी चीजें निकलवा सकते हैं, न्यूज पॉइंट्स निकलवा सकते हैं, हेडलाइंस निकलवा सकते हैं। इसके अलावा डॉ. प्रणॉय रॉय से सीखना चाहिए। आइडियोलॉजिकली ये दोनों आदमी अपनी-अपनी दो धुरी के दो स्ट्रीम हो सकते हैं, लेकिन इनसे सीखने के लिए बहुत कुछ है। दोनों ही बहुत मेहनती हैं। दोनों ही अपने-अपने दम पर बने और खड़े हुए हैं। उन्होने कहा कि मैंने उनसे काफी कुछ सीखा है, लेकिन मैं एक असफल छात्र रहा हूं और यह जानता हूं कि मैं उनके एग्जाम में फेल हो जाउंगा। इसलिए उनसे सीखना चाहिए।   

इसके बाद ‘राज्यसभा टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन ने सुमित अवस्थी की बातों पर सहमति जताते हुए कहा कि मैं डॉ. प्रणॉय रॉय को शुरू से ही बहुत ज्यादा फॉलो करता हूं। इसके अलावा मैं कहूं तो नविका कुमार को बहुत ही ज्यादा फॉलो करता हूं। उनकी एंकरिंग स्किल्स के लिए नहीं, बल्कि उनकी डेप्थ ऑफ नॉलेज के लिए मैं उन्हें फॉलो करता हूं। हालांकि इन लोगों के जवाब सुनने के बाद, डॉ. बत्रा ने एक बार फिर भूपेंद्र चौबे का रुख किया और कहा कि जो एंकर पैनल में शामिल नहीं हैं और जिन्हें आप पसंद करते हैं, ऐसे एंकर का नाम आप बताइए। इसका जवाब देते हुए

उन्होंने कहा कि मैंने जीवन में दो कंपनियों में काम किया है। डॉ.प्रणॉय रॉय और रजत शर्मा चार्मर है, लेकिन उनके साथ ही एक और व्यक्ति हैं राघव बहल, जिन्हें मैं काफी पसंद करता हूं। हालांकि वो कोई रेगुलर एंकर नहीं है। लेकिन मैं यहां सभी गुजारिश करूंगा कि सभी लोग उनका वित्त मंत्री के साथ किया इंटरव्यू जरूर देखें, कि कैसे उन्होंने बड़ी ही सहजता और विनम्रता पूर्वक उनसे सवाल किए हैं और वो भी पूरे डेटा के साथ। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि मेरी नजर में वही ऐसे एक एंकर हैं, जो बड़ी ही मेहनत और पूरे डेटा के साथ इंटरव्यू करते हैं।

और अंत में एक बार फिर यह सवाल ‘विऑन’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर पलकी शर्मा के सामने आ गया, और इस बार में उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि सबको सुनने के बाद मैं कहना चाहूंगी कि यहां किसी ने भी उनका नाम नहीं लिया है, जिसका नाम लेना चाहिए था। पुरुष प्रधान वाले इस देश में जैसा कि पैनल में भी देखने को मिल रहा है, वह बहुत ही जाना माना नाम है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में काफी उल्लेखनीय काम किया है, जिनमें शीरीन भान और सुहासिनी जैसे लोगों का नाम लिया जा सकता है, जिनके साथ मैंने काम किया है। लेकिन कुछ ऐसे भी नाम हैं, जिनके साथ मैंने काम नहीं किया है, जैसे नविका कुमार और सोनिया सिंह हैं, जो इस समय शीर्ष पर हैं और न्यूजरूम में बहुत ही बैलेंस करके काम कर रही हैं।

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CPM नेता सीताराम येचुरी के पत्रकार बेटे का कोरोना से निधन

कोरोना की दूसरी लहर में मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। मौत के इस तांडव का शिकार इस बार सबसे अधिक युवा हो रहे हैं।

Last Modified:
Thursday, 22 April, 2021
ashish454

कोरोना की दूसरी लहर में मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। मौत के इस तांडव का शिकार इस बार सबसे अधिक युवा हो रहे हैं। इस बीच सीपीएम (CPM) महासचिव और वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी के बड़े बेटे आशीष येचुरी का निधन हो गया है। वह कोरोना वायरस से संक्रमित थे। सीताराम येचुरी ने खुद अपने ट्विटर अकाउंट से यह दुखद जानकारी दी। येचुरी के बेटे का गुरुग्राम के अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां आज सुबह ही उन्होंने आखिरी सांस ली। आशीष 9 जून को 35 साल के होने वाले थे।

करीब दो हफ्तों से उनका कोरोना का इलाज चल रहा था। स्थिति गंभीर होने के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी सेहत में सुधार भी हो रहा था। कोरोना से दो हफ्ते की जंग के बाद आज सुबह साढ़े 5 बजे अचानक उनका निधन हो गया जिससे पूरा परिवार सदमे में है। आशीष के अलावा सीताराम येचुरी के परिवार में उनकी पत्नी और बेटी है। 

आशीष येचुरी, एक अखबार में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में काम कर रहे थे. दो हफ्ते तक कोरोना से जंग लड़कर जीत की दहलीज पर पहुंचने से पहले ही आशीष की सांसें थमने से उनके परिवार के साथ दोस्तों में गम का माहौल है। उनके पिता सीताराम येचुरी ने गुरुवार सुबह ट्वीट करके अपने बड़े बेटे के निधन की खबर दुनिया को दी।

सीताराम येचुरी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘भारी दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि कोविड-19 से आज सुबह मैंने अपने बड़े बेटे आशीष येचुरी को खो दिया। मैं उन सभी का, डॉक्टरों, नर्सों, अग्रिम मोर्चे के कर्मियों, सफाईकर्मियों का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने हमें हिम्मत दी और उनका उपचार किया तथा संकट के समय में हमारे साथ खड़े रहे।’ फिलहाल सीताराम येचुरी भी क्वारनटीन हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सीताराम येचुरी के परिवार के प्रति शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, 'सीताराम येचुरी जी और उनके परिवार को पुत्र आशीष के दुखद और असामयिक निधन पर संवेदना व्यक्त करता हूं। ओम शांति।'

आशीष ने एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, चेन्नई से पढ़ाई की थी और उन्होंने दिल्ली में 'टाइम्स ऑफ इंडिया' समेत कई मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वह पुणे चले गए। वर्तमान में वह 'न्यूजलॉन्ड्री' (Newslaundry) वेबसाइट में असिसटेंट एडिटर की भूमिका निभा रहे थे।

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‘नवोदय टाइम्स’ के डिजिटल एडिटर की जिंदगी पर भारी पड़ी महामारी, गई जान

कोरोना वायरस ने एक बार फिर तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है।

Last Modified:
Thursday, 22 April, 2021
ChandanJaiswal545

कोरोना वायरस ने एक बार फिर तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। हर दिन देशभर में वायरस के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इस बीच कई पत्रकार भी कोरोना की चपेट में आए हैं, जिनमें से तो कई पत्रकारों की जान तक चली गई है। इन्हीं में अब एक और नाम जुड़ गया है पंजाब केसरी ग्रुप के ‘नवोदय टाइम्स’ के डिजिटल हेड चंदन जायसवाल का। चंदन जायसवाल को भी कोरोना ने अपने चपेट में ले लिया, जिसके बाद उनके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का लेवल बहुत ही कम रह गया और उन्हें मंगलवार को नोएडा के भारद्वाज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे अंतिम सांस ली। वे करीब 40 वर्ष के थे।

चंदन जायसवाल बिहार के सिवान जिले के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा है। उनका बेटा चौथी कक्षा में पढ़ रहा है।

चंदन जायसवाल पंजाब केसरी ग्रुप के साथ अक्टूबर, 2014 में जुड़े थे, जिसके बाद उनके नेतृत्व में ही ‘नवोदय टाइम्स’ डिजिटल की नींव रखी गई। इसके पहले वे ‘अमर उजाला’ डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने मार्च, 2012 में 'अमर उजाला' जॉइन किया था। इसके पहले अगस्त, 2007 से फरवरी 2012 तक 'दैनिक जागरण' में विभिन्न पदों पर रहते हुए सीनियर सब एडिटर तक की अपनी पारी खेली।

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जानिए, कैसे पत्रकारों के लिए खतरनाक देश है भारत

अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता गैर लाभ संगठन की ओर से प्रकाशित विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में भारत की रैंकिंग नीचे नहीं गिरी है

Last Modified:
Thursday, 22 April, 2021
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भारत पत्रकारिता के लिहाज से दुनिया के सुरक्षित देशों में शुमार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता गैर लाभ संगठन की ओर से प्रकाशित विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में भारत की रैंकिंग नीचे नहीं गिरी है, लेकिन भारत को अब भी पत्रकारिता के लिहाज से सुरक्षित देश नहीं माना गया है। इसमें कहा गया है कि भारत विश्व के सबसे अधिक खतरनाक देशों में है, जहां पत्रकारों को अपना काम सुविधाजनक तरीके से करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, ब्राजील, मैक्सिको और रूस के साथ 'खराब' श्रेणी में है। गैर लाभकारी संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) की ओर से जारी विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में भारत की रैंकिंग पिछले वर्ष की तरह 142 ही है। मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, ब्राजील, मैक्सिको और रूस के साथ 'खराब' श्रेणी में है। 2004 में यूपीए सरकार ने सत्ता संभाली तो भारत की रैंकिंग 120 थी, जो 2005 में 106 तक आ गई थी। वहीं, 2014 में यूपीए की सत्ता जाने तक रैंकिंग गिरकर 140 तक पहुंच गई थी। हालांकि, यूपीए शासनकाल के दौरान 2006 व 2009 में 105 तक भी आ गई थी।

नवीनतम रिपोर्ट में भारत के किसी भी आलोचना करने वाले पत्रकार के लिए भाजपा समर्थकों द्वारा बनाए गए डराने-धमकाने के माहौल को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे रिपोर्टर को ‘राज्य-विरोधी’ या ‘राष्ट्र-विरोधी’ के रूप में चिह्नित किया जाता है। इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मीडिया पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।’ 

रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘2020 में अपने काम के दौरान चार पत्रकार मारे गए। ऐसे में भारत पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से बन गया है, जहां अपना काम ठीक से कर पाना बहुत कठिन है।’ पत्रकारों को हर तरह के हमले का सामना करना पड़ता है, जिसमें पुलिस हिंसा, राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा घात लगाना, और आपराधिक समूहों या भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों द्वारा उकसाए गए विद्रोह शामिल हैं। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत के बाद मीडिया पर हिंदू राष्ट्रवादी सरकारों की लाइन पर चलने के लिए दबाव बढ़ गया है।’

रिपोर्ट कहती है, ‘हिंदुत्व की विचारधारा का समर्थन करने वाले भारतीय सार्वजनिक बहस को राष्ट्रविरोधी विचार साबित करने पर जुटे हैं। भारत में हिंदुत्व का समर्थन करने वालों के खिलाफ लिखने वाले या बोलने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जाता है, उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर नफरत भरा अभियान चलाया जाता है। पत्रकारों के खिलाफ हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है, विशेष रूप से जब निशाना महिला हो।’

रिपोर्ट कहती है कि सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को चुप कराने के लिए उन पर राजद्रोह जैसे मुकदमे चलाए जाते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘भारत सरकार ने किस प्रकार देश में कोरोना महामारी का लाभ उठाकर प्रेस की स्वतंत्रता को कुचलने का काम किया। कश्मीर में स्थिति अभी भी चिंताजनक है। वहां पर पत्रकारों को अभी भी पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। वहां ऑरवेलियन कंटेट रेगुलेशन का सामना किया जा रहा है, जो मीडिया आउटलेट के बंद होने के लिए जिम्मेदार है, जैसा कि कश्मीर टाइम्स के साथ हुआ।’

रिपोर्ट कहती है, ‘सरकार समर्थित मीडिया ने दुष्प्रचार शुरू किया है। ऐसे पत्रकार जो सरकार की आलोचना करने की हिम्मत रखते हैं, उन्हें भाजपा के समर्थकों द्वारा राष्ट्रविरोधी या यहां तक कि आतंकवादी समर्थक तक कहा जा रहा है।’

जारी की गई विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में 180 देशों में सबसे ऊपर नॉर्वे है। इसके बाद फिनलैंड और डेनमार्क हैं। जबकि सबसे नीचे इरिट्रिया है। चीन 177 वें स्थान पर है, और उत्तरी कोरिया के ऊपर 179 और तुर्कमेनिस्तान में 178 वें स्थान पर है। भारत पिछले साल की तरह ही 142 वें स्थान पर है। 2016 में 133 के बाद से यह लगातार नीचे खिसक रहा है। दक्षिण एशियाई देशों में पड़ोसी नेपाल 106, श्रीलंका 127, म्यांमार (तख्तापलट से पहले) 140, पाकिस्तान 145 और बांग्लादेश 152वें स्थान पर हैं।

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दंगल टीवी से अलग हुए प्रशांत भट्ट, निभा रहे थे ये जिम्मेदारी

'एंटर10 टेलीविजन' (Enterr10 Television) के फ्री-टू-एयर (FTA) हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल ‘दंगल टीवी’ के प्रोग्रामिंग हेड प्रशांत भट्ट ने पद छोड़ने का फैसला किया है।

Last Modified:
Thursday, 22 April, 2021
Prashant545

'एंटर10 टेलीविजन' (Enterr10 Television) के फ्री-टू-एयर (FTA) हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल ‘दंगल टीवी’ के प्रोग्रामिंग हेड प्रशांत भट्ट ने पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया से इस खबर की पुष्टि की है।

भट्ट पिछले साल अक्टूबर में चैनल से जुड़े थे और पिछले सात महीने से चैनल की प्रोग्रामिंग की कमान संभाल रहे थे। इससे पहले, वे ‘जी पंजाबी’ (Zee Punjabi) के साथ जुड़े थे।

वे चैनल के फिक्शन व नॉन-फिक्शन शोज दोनों को हेड कर रहे थे। जी पंजाबी में भी वे फिक्शन व नॉन-फिक्शन शोज के कंटेंट को कॉन्सेप्ट बनाना और उसे निर्मित करने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। नेटवर्क के लिए कुछ नए तरीके से मार्केटिंग और प्रमोशन करने की रणनीति तैयार करने की भी जिम्मेदारी उन पर थी, ताकि मार्केट में जी बिजनेस और मजबूत छाप छोड़ सके।  

वे स्टूडियो बी&एम (Studio B&M) के फाउंडर व क्रिएटिव डायरेक्टर भी थे। यहां उन्होंने ‘चैनल वी’ (Channel V) के लिए ‘मस्तांगी’ (Mastaangi) और ‘एंडटीवी’ (AndTV) के लिए ‘सिद्धि विनायक’ (Siddhi Vinayak) शो को प्रड्यूस किया। उन्होंने ‘कलर्स टीवी’ (Colors TV) के लिए फिक्शन प्रोग्रामिंग का भी नेतृत्व किया। 

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ZEEL को अलविदा कह एमेजॉन प्राइम वीडियो से जुड़ीं विभा चोपड़ा, मिली यह जिम्मेदारी

‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ की हेड (Global Syndication & International Film Distribution) विभा चोपड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

Last Modified:
Monday, 19 April, 2021
Vibha Chopra

‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEE ENTERTAINMENT ENTERPRISES LTD) की हेड (Global Syndication & International Film Distribution) विभा चोपड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ‘एमेजॉन प्राइम वीडियो’ (Amazon Prime Video) इंडिया में बतौर कंटेंट अधिग्रहण (content acquisition) जॉइन किया है। ZEEL में अपनी पारी के दौरान विभा कंपनी के ओवरसीज फिल्म और कंटेंट सिंडीकेशन को आगे बढ़ाने का काम कर चुकी हैं।

इस बारे में अपनी लिंक्डइन पोस्ट में विभा चोपड़ा का कहना है, ‘ZEE में मेरा सफर काफी रोमांचक रहा है, जहां मैंने विभिन्न प्रोजेक्ट्स और बेहतरीन लोगों के साथ काम करना और आगे बढ़ना सीखा है। मैं अपने सीनियर्स अमित गोयनका और पुनीत गोयनका को धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया और विभिन्न जिम्मेदारियां दीं।’

इसके साथ ही विभा चोपड़ा का कहना है, ‘यह घोषणा करते हुए मैं काफी रोमांचित हूं कि मैंने एमेजॉन प्राइम वीडियो, इंडिया जॉइन कर लिया है। अपने जीवन के इस सफर को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं और इस ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन के साथ काम करने को लेकर काफी उत्सुक हूं।’

बता दें कि वर्ष 2016 में विभा चोपड़ा को ZEEL में हेड (film acquisition and distribution business) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष 2019 में उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी के तहत ग्लोबल कंटेंट लाइसेंसिंग बिजनेस की कमान सौंपी गई थी। ZEEL के अलावा वह ‘टैम मीडिया’ (TAM Media) और ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के साथ भी काम कर चुकी हैं।

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स्टार इंडिया के VP विशाल सोमानी पहुंचे ZEEL, संभालेंगे ये जिम्मेदारी

स्टार इंडिया के वाइस प्रेजिडेंट व सीआईओ विशाल सोमानी ने यहां से विदाई लेकर जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है

Last Modified:
Monday, 19 April, 2021
Vishal54

स्टार इंडिया के वाइस प्रेजिडेंट व सीआईओ विशाल सोमानी ने यहां से विदाई लेकर जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्हें यहां एंटरप्राइज आईटी का हेड नियुक्त किया गया है। सात वर्षों तक स्टार इंडिया में रहते हुए सोमानी ने कई वरिष्ठ पदों पर काम किया। फरवरी 2014 में वे स्टार इंडिया के साथ बिजनेस सिस्टम्स के वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर शामिल हुए थे।

सोमानी को मीडिया व ब्रॉडकास्टिंग और बीएफएसआई डोमेन में दो दशकों का अनुभव है। उन्होंने टीसीएस और टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस में लंबे समय तक काम किया।

ZEEL ने आधिकारिक लिंक्डइन पोस्ट के जरिए सोमानी का स्वागत करते हुए कहा, ‘एंटरप्राइज आईटी के हेड के तौर पर विशाल सोमानी का स्वागत है। उन्हें मीडिया-ब्रॉडकास्टिंग और बीएफएसआई डोमेन में 2 दशकों के अनुभव है। उन्होंने विभिन्न टेक्नोलॉजी का नेतृत्व किया है। हम उनका स्वागत करते हैं और उन्हें नई भूमिका के लिए बधाई देते हैं।’

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वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा प्रसाद को The Hindu ग्रुप में मिली बड़ी जिम्मेदारी

पूर्व में प्रसाद आउटलुक मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ और टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के विजय टाइम्स अखबार के एडिटर रह चुके हैं।

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Krishna Prasad

‘द हिंदू’ (THE HINDU), ‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ (The Hindu BusinessLine), ‘फ्रंटलाइन’ (Frontline) और ‘स्पोर्टस्टार’ (Sportstar) के पब्लिशर ‘द हिन्‍दू ग्रुप पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (The Hindu Group Publishing Private Limited) ने कृष्णा प्रसाद को ग्रुप एडिटोरियल ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया है। उनकी यह नियुक्ति 16 अप्रैल 2021 से प्रभावी है। अपनी इस भूमिका में वह ‘द हिंदू समूह’ के सभी प्रकाशनों में समन्वित प्रयासों से, विभिन्न प्रिंट प्रकाशनों और डिजिटल सामग्री में अधिक से अधिक तालमेल बैठाते हुए नेतृत्व करेंगे।

प्रसाद को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का काफी लंबा अनुभव है। पूर्व में प्रसाद ‘आउटलुक’ (Outlook) मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (Times of India group) ग्रुप के अखबार ‘विजय टाइम्स’ (Vijay Times) के एडिटर रह चुके हैं। वह ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (Press Council of India) के सदस्य रह चुके हैं। वह डिजिटल शैली को अपनाने वाले शुरुआती मुख्यधारा के पत्रकारों में से एक हैं।  

कृष्णा प्रसाद की नियुक्ति के बारे में ‘द हिन्‍दू ग्रुप पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड’ की चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी का कहना है, ‘ग्रुप एडिटोरियल ऑफिसर के रूप में प्रसाद, सभी पब्लिकेशंस के कंटेंट मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजी को लेकर मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।’ वहीं, कृष्णा प्रसाद का कहना है, ‘मैं समूह के संपादकों, पत्रकारों के साथ-साथ बिजनेस और टेक्निकल टीमों संग मिलकर काम करने को लेकर उत्सुक हूं।’

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एडिटर्स गिल्ड ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर किया ये आग्रह

देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार से पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने का आग्रह किया है।

Last Modified:
Friday, 16 April, 2021
Editors Guild

देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार से पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने का आग्रह किया है। यही नहीं गिल्ड ने सरकार से पत्रकारों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने की मांग भी की है।

एडिटर्स गिल्ड की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि पाठकों तक खबरें और सूचनाएं पहुंचाने के लिए समाचार संगठन लगातार महामारी, चुनाव और अन्य समसामयिक मामलों को कवर कर रहे हैं। इसलिए पत्रकारों को संरक्षण के दायरे में लाया जाए।'

बयान के मुताबिक अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स की तर्ज पर पत्रकारों को टीकाकरण में प्राथमिकता दी जाए। टीकाकरण का संरक्षण मिले बगैर मीडिया कर्मियों के लिए अपनी पेशेवर जवाबदेही का निर्वाह करना अत्यंत कठिन है।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स मानते हुए कोरोना वैक्सीन लगाने की वकालत की थी। दिल्ली सरकार ने इस बाबत एक पत्र भी केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को लिखा है और पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स मानते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनके टीकाकरण के लिये विचार करने की अपील की है।

दिल्ली सरकार द्वारा भेजे गये पत्र में कहा गया है कि पत्रकारिता सरकार और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करती है। सबसे मुश्किल हालात में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ-साथ मीडियाकर्मी भी सबसे आगे रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान मीडिया ने सक्रिय रूप से लोगों को बीमारी के बारे में जानकारी देने और इसकी रोकथाम के लिए जागरूक करने का काम किया है।

गौरतलब है कि पत्रकारों को कोरोना वैक्सीन लगाने की अनुमति देने के लिए कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी केंद्र सरकार से मांग की है। पिछले 10 दिनों में भारत में कोरोना के मामले दोगुने हो गए हैं। इसके साथ ही पूरे विश्व में कोरोना के मामलों में भारत में ब्राजील को पीछे छोड़ दिया। अब भारत विश्व में सबसे ज्यादा कोरोना केस वाला देश बन गया है।

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कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच 'आजतक' ने उठाया यह ऐहतियाती कदम

कोरोना वायरस ने एक बार फिर तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है।

Last Modified:
Friday, 16 April, 2021
Aajtak

कोरोना वायरस ने एक बार फिर तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। हर दिन देशभर में वायरस के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इस बीच कई पत्रकार भी कोरोना की चपेट में आए हैं, जिनमें से तो कई पत्रकारों की जान तक चली गई है। तेजी से बढ़ती कोरोना महामारी को देखते हुए हिंदी न्यूज चैनल आजतक ने अपने खास पॉलिटिकल प्रोग्राम, जोकि ग्राउण्ड जीरो से प्रसारित किया जाता है, फिलहाल के लिए उसे बंद कर दिया है। इस प्रोग्राम का नाम है- बुलेट रिपोर्टर।

बता दें कि चुनावों पर केंद्रित इस शो को ‘आजतक’ तक की डिप्टी एडिटर व सीनियर एंकर चित्रा त्रिपाठी होस्ट करती थीं।  उन्होंने इस बात की जानकारी अपने ट्विटर हैंडल के जरिए दी। दरअसल तेजी से फैलते कोरोना संक्रमण को देखते हुए ही इस शो को फिलहाल के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है। फिलहाल इस शो को कब तक के लिए बंद किया जा रहा है और दोबारा कब इसे शुरू किया जाएगा, इसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी है।

‘बुलेट रिपोर्टर’ की खास बात थी इसका अंदाज, जो लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आ रहा था। चित्रा त्रिपाठी चैनल की ओबी वैनं में नहीं बल्कि बुलेट पर सवार होकर जगह-जगह घूम-घूमकर मतदाताओं का मन टटोलती थीं। उनसे बात करती थीं, प्रत्याशियों का हाल जानती थीं और उन समस्याओं पर भी प्रकाश डालती थीं, जो अब तक अनसुलझी थीं।

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मीडिया-मनोरंजन उद्योग ने महाराष्ट्र के CM से किया ये अनुरोध

मीडिया-मनोरंजन उद्योग की समन्वय समिति ने मिलकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर अनुरोध किया है

Last Modified:
Friday, 16 April, 2021
uddhav thackeray45

कोरोना वायरस ने एक बार फिर तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। हर दिन देशभर में वायरस के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इस बीच बीते कई दिनों से कोरोना का गढ़ बन चुके महाराष्ट्र में 15 दिनों का  लॉकडाउन लगाया गया है। इस लॉकडाउन के कारण कई फिल्मों की शूटिंग रुक गई है, जिसके चलते इन फिल्मों में दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगों की रोजी रोटी पर संकट आ गया है। लिहाजा इसे देखते हुए मीडिया और मनोरंजन उद्योग की समन्वय समिति, जिसमें IMPPA, IFTDA, FWICE और CINTAA जैसे फिल्म निकाय शामिल हैं, सभी ने मिलकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि 15 दिनों के कर्फ्यू के दौरान उन्हें सीमित स्तर पर काम करने की अनुमति दी जाए।

समिति ने 15 दिनों के लिए बंद होने को लेकर पत्र में आग्रह किया गया है कि बंद वातावरण में पोस्ट-प्रॉडक्शन के काम को करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि प्रसारण के लिए कंटेंट को एडिट किया जा सके।

इसके अलावा, उन्होंने अनुरोध किया है कि प्रड्यूसर्स को होने वाले नुकसान से बचने के लिए इस निर्माण कार्य की अनुमति दी जानी चाहिए। निर्माण श्रमिकों की तरह, सेट बिल्डिंग से जुड़े लोग भी सभी सावधानियों के साथ सेट पर रहकर काम कर सकते हैं। दैनिक वेतन भोगियों के लिए घोषित वित्तीय पैकेज को मीडिया और मनोरंजन उद्योग के श्रमिकों, तकनीकी विभाग के लोगों और अभिनेताओं के लिए भी छूट बढ़ाई जाने सहित पत्र में कई तरह के अनुरोध किए गए हैं।

अंत में, निकाय ने आग्रह किया कि यदि संभव हो तो फिल्म सिटी और मीरा-भायंदर क्षेत्र में टीकाकरण केंद्र और फिल्म व टीवी कर्मचारियों के लिए खानपान की स्थापना की जाए।

 

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