अमृतराज ब्रदर्स: दुनिया के मंच पर भारत का नाम रोशन करने वाला परिवार

यह कहानी 1960 के दशक से शुरू होती है। मद्रास, जिसे आज चेन्नई के नाम से जाना जाता है, के एक मध्यमवर्गीय रोमन कैथोलिक परिवार के तीन भाइयों ने टेनिस खेलना शुरू किया।

Last Modified:
Monday, 07 September, 2026
Amritraj Brothers


भुवन लाल ।।

नई दिल्ली में 23 जून 2026 की शाम राष्ट्रपति भवन का गणतंत्र मंडप एक खास समारोह का गवाह बना। यहां आयोजित अलंकरण समारोह में देश की राजनीतिक और न्यायिक हस्तियों के साथ वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा क्षेत्र के लोग और कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं। इसी दौरान जब भारत के महान टेनिस खिलाड़ियों में शुमार विजय अमृतराज का नाम पुकारा गया तो वह हाथ जोड़कर लाल कालीन से होते हुए मंच की ओर बढ़े। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया। समारोह में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ भारत के इस महान टेनिस खिलाड़ी का स्वागत किया।

विजय अमृतराज की उपलब्धियों पर काफी कुछ लिखा जा चुका है, लेकिन उनकी कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है। यह कहानी एक ऐसे युवा की है, जिसने उस दौर में दुनिया के बड़े-बड़े टेनिस खिलाड़ियों के सामने खड़े होने का सपना देखा, जब भारत में टेनिस के लिए न तो बहुत ज्यादा सुविधाएं थीं और न ही कोई मजबूत व्यवस्था। उनके पास था तो सिर्फ हुनर, आगे बढ़ने की भूख और यह भरोसा कि वह दुनिया के सबसे बड़े टेनिस मंच पर अपनी जगह बना सकते हैं।

मां ने गैराज से चल रहे कारोबार से जुटाए टेनिस के पैसे

यह कहानी 1960 के दशक से शुरू होती है। मद्रास, जिसे आज चेन्नई के नाम से जाना जाता है, के एक मध्यमवर्गीय रोमन कैथोलिक परिवार के तीन भाइयों ने टेनिस खेलना शुरू किया। उनकी मां मैगी अमृतराज ने गैराज से चलने वाले पैकेजिंग कारोबार से टेनिस की ट्रेनिंग का खर्च उठाया। 

उनके पिता रॉबर्ट रेलवे में काम करते थे। तीनों भाइयों (आनंद, विजय और अशोक अमृतराज) ने आगे चलकर भारत को प्रोफेशनल टेनिस की दुनिया में एक नई पहचान दिलाई। उनके दादा की इच्छा थी कि परिवार का कम से कम एक बेटा विंबलडन खेले। लेकिन उनकी यह इच्छा एक नहीं, बल्कि तीनों भाइयों ने पूरी कर दी। 

तीनों भाई एक ही विंबलडन टूर्नामेंट में खेलने वाले भारत के पहले भाई-बहन नहीं, बल्कि तीन सगे भाइयों का ऐसा परिवार बने, जिन्होंने एक ही संस्करण में हिस्सा लिया और सेंटर कोर्ट पर भी साथ उतरे। तीनों ने जूनियर स्तर पर भी भारत का नाम रोशन किया। सबसे बड़े भाई आनंद ने 1965 से 1967 तक भारत का जूनियर खिताब अपने नाम रखा। इसके बाद विजय ने 1968 से 1970 तक यह परंपरा आगे बढ़ाई। सबसे छोटे भाई अशोक भी भारत के शीर्ष जूनियर चैंपियन बने।

बीमारी से जूझने वाला बच्चा बना दुनिया का स्टार

विजय का बचपन भी आसान नहीं था। एक समय वह बीमार रहने वाले बच्चे थे और उनकी मां अस्पताल में उनके बिस्तर के पास बैठकर उनकी पढ़ाई की चीजें लिखती थीं। लेकिन यही बच्चा आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय टेनिस के बड़े-बड़े खिलाड़ियों को हराने लगा।

जुलाई 1973 में महज 21 साल की उम्र में विजय ने अमेरिका के ब्रेटन वुड्स में वोल्वो इंटरनेशनल खिताब जीतकर टेनिस की दुनिया को चौंका दिया। यह जीत इस बात का बड़ा संकेत थी कि भारत अब विश्व टेनिस के नक्शे पर अपनी जगह बना चुका है। इसके बाद विजय ने अपने दौर के कई दिग्गज खिलाड़ियों को हराया। इनमें ब्योर्न बोर्ग, जिमी कॉनर्स, जॉन मैकेनरो, इवान लेंडल, रॉड लेवर और स्टैन स्मिथ जैसे नाम शामिल थे। उनकी सफलता इतनी चर्चा में रही कि एक पत्रकार ने टेनिस के महान खिलाड़ियों के लिए ABC of Tennis शब्द का इस्तेमाल किया- Amritraj, Borg और Connors। 

विजय ने विंबलडन और यूएस ओपन दोनों में कई बार क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर यह साबित किया कि वह दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बना चुके हैं।

23 साल तक चला शानदार प्रोफेशनल करियर

विजय अमृतराज का प्रोफेशनल करियर 1970 में शुरू हुआ और 1993 में खत्म हुआ। इस दौरान उन्होंने 16 सिंगल्स खिताब जीते। उनका करियर का सर्वोच्च एटीपी सिंगल्स रैंकिंग विश्व नंबर 18 रहा, जो उन्होंने 1980 में हासिल की। वह तीन बार राष्ट्रीय सिंगल्स चैंपियन रहे और दो दशक से ज्यादा समय तक भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने भारत को 1974 और 1987 में डेविस कप फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

1988 के सियोल ओलंपिक में उन्हें ओलंपिक टॉर्च बियरर के रूप में भी चुना गया। करीब 6 फीट 4 इंच लंबे विजय जब कोर्ट पर उतरते थे तो उनके साथ सिर्फ उनकी अपनी महत्वाकांक्षा नहीं होती थी, बल्कि भारत और विदेशों में बसे लाखों भारतीयों का गर्व भी जुड़ा होता था।

विजय ने एक बार बताया था कि मैच खत्म होने के बाद भारतीय मूल के लोग उन्हें नोट देकर धन्यवाद करते थे। इनमें डॉक्टर और इंजीनियर जैसे प्रोफेशनल भी शामिल थे। जब विजय ने उनसे पूछा कि वे उन्हें धन्यवाद क्यों दे रहे हैं, तो उनका जवाब था कि विजय को खेलते देखने के बाद उनके विदेशी नियोक्ताओं को अपनी कंपनी में एक भारतीय के होने पर गर्व महसूस होता था।

टेनिस के बाद फिल्मों में भी बनाई पहचान

1980 के दशक में विजय ने टेनिस कोर्ट से आगे बढ़कर फिल्मों की दुनिया में भी कदम रखा। उन्होंने जेम्स बॉन्ड की फिल्म Octopussy में MI6 एजेंट की भूमिका निभाई। फिल्म में वह जेम्स बॉन्ड के साथ नजर आए। इसके बाद वह हॉलीवुड से भी जुड़े रहे। आज भी उनकी आवाज दुनिया भर में होने वाली टेनिस कमेंट्री में सुनाई देती है।

आनंद अमृतराज के साथ बनी शानदार जोड़ी

विजय के बड़े भाई आनंद अमृतराज भी अपने आप में एक शानदार टेनिस खिलाड़ी रहे। उन्होंने सिंगल्स में विश्व रैंकिंग में 74वां स्थान हासिल किया। लेकिन उनकी सबसे खास पहचान विजय के साथ बनी डबल्स जोड़ी थी। दोनों भाइयों ने मिलकर आठ डबल्स खिताब जीते और 1976 में विंबलडन के सेमीफाइनल तक पहुंचे।

दोनों भाइयों ने दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों का सामना किया और कभी पीछे नहीं हटे। उनकी जोड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत प्रतिस्पर्धी भावना का उदाहरण बन गई।

1974 में डेविस कप फाइनल से हटना पड़ा

1974 में भारत के पास पहली बार डेविस कप जीतने का बड़ा मौका था। आनंद और विजय अमृतराज के कंधों पर भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जीत दिलाने की जिम्मेदारी थी। लेकिन उस समय दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद यानी अपार्थाइड की आधिकारिक नीति लागू थी। जोहान्सबर्ग के एलिस पार्क में होने वाले मुकाबले के दौरान दक्षिण अफ्रीका ने भारतीय दर्शकों के लिए अलग व्यवस्था की मांग की।

भारत सरकार नस्लभेदी अपार्थाइड व्यवस्था के खिलाफ थी। ऐसे में भारत ने डेविस कप फाइनल का बहिष्कार करने का फैसला किया। यह फैसला खिलाड़ियों के लिए बेहद मुश्किल था, क्योंकि उनके सामने पहली बार भारत को डेविस कप जिताने का मौका था। इसके बावजूद इस सिद्धांत आधारित फैसले की दुनिया भर में सराहना हुई। बाद में आनंद अमृतराज ने भारतीय डेविस कप टीम के गैर-खिलाड़ी कप्तान के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।

अशोक अमृतराज ने हॉलीवुड में बनाया बड़ा नाम

तीनों भाइयों में सबसे छोटे अशोक अमृतराज ने टेनिस के बाद एक अलग क्षेत्र चुना। 1974 में वह विंबलडन जूनियर फाइनल तक पहुंचे और प्रोफेशनल स्तर पर चार जीत भी दर्ज कीं। लेकिन इसके बाद उन्होंने मनोरंजन की दुनिया में कदम रखा।

अशोक ने हॉलीवुड में Hyde Park Entertainment की स्थापना की। इस कंपनी ने दुनिया के लिए फिल्मों और मनोरंजन परियोजनाओं के विकास, वित्तपोषण और निर्माण का काम किया। उनकी फिल्मों में हॉलीवुड के कई बड़े और ऑस्कर विजेता कलाकार नजर आए। इनमें एंजेलिना जोली, एंटोनियो बैंडेरास, ब्रूस विलिस, केट ब्लैंचेट, डस्टिन हॉफमैन, जेनिफर एनिस्टन, इदरीस एल्बा, रिचर्ड गेयर, रॉबर्ट डी नीरो, सुसान सारंडन और सिल्वेस्टर स्टेलोन जैसे नाम शामिल हैं। 

उनकी चर्चित फिल्मों में Ghost Rider: Spirit of Vengeance में निकोलस केज, Walking Tall में ड्वेन जॉनसन, Premonition में सैंड्रा बुलॉक और स्टीव मार्टिन व क्वीन लतीफा की Bringing Down the House शामिल हैं।इसके अलावा Shopgirl, जिसमें स्टीव मार्टिन और क्लेयर डेन्स थे, और 99 Homes, जिसमें एंड्रयू गारफील्ड और लॉरा डर्न नजर आए, को भी आलोचकों की सराहना मिली। 100 से ज्यादा फिल्मों के बाद अशोक अमृतराज को हॉलीवुड में सबसे सफल भारतीयों में गिना जाता है। उनकी फिल्मों ने कुल मिलाकर 2 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार किया है। उन्हें इंटरनेशनल एमी से भी सम्मानित किया जा चुका है और गोल्डन ग्लोब्स व कान्स में भी उनकी फिल्मों को पहचान मिली। फ्रांस के राष्ट्रपति ने उन्हें प्रतिष्ठित Chevalier सम्मान से भी नवाजा।

विजय को विंबलडन और इंटरनेशनल टेनिस हॉल ऑफ फेम में मिली जगह

टेनिस से जुड़ाव विजय का आज भी कायम है। वह ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब, विंबलडन की मानद सदस्यता के लिए सर्वसम्मति से चुने जाने वाले एकमात्र एशियाई हैं। 2024 में वह International Tennis Hall of Fame में Contributor श्रेणी में शामिल होने वाले पहले एशियाई पुरुष बने। यह सम्मान खिलाड़ी, कमेंटेटर, प्रशासक और टेनिस के समर्थक के तौर पर उनके पूरे योगदान की पहचान है। करीब चार दशक से दक्षिणी कैलिफोर्निया में रहने के बावजूद विजय ने अपना भारतीय पासपोर्ट बरकरार रखा है।

तीन भाइयों ने दुनिया में बनाई भारत की पहचान

अमृतराज भाइयों की कहानी सिर्फ खेल और मनोरंजन की सफलता की कहानी नहीं है। तीनों भाइयों ने अलग-अलग क्षेत्रों में भारत का नाम दुनिया तक पहुंचाया। विजय और आनंद ने टेनिस कोर्ट पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, जबकि अशोक ने हॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई। इसके साथ ही तीनों भाई उस देश से जुड़े रहे, जहां उनका जन्म हुआ था और अब परोपकार के जरिए समाज को वापस देने की कोशिश भी कर रहे हैं।

विजय अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपनी मां मार्गरेट (मैगी) अमृतराज को देते हैं। उन्होंने ही बच्चों को मुश्किल परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनका सामना करना सिखाया। अपनी आत्मकथा में विजय ने अपनी मां को याद करते हुए लिखा कि आखिर किस तरह एक महिला में यह भरोसा था कि वह अपने तीन बेटों को ऑल इंग्लैंड क्लब यानी विंबलडन के मैदान तक पहुंचा सकती है।

मद्रास के छोटे से घर से सेंटर कोर्ट और हॉलीवुड तक का सफर

अमृतराज भाइयों की कहानी यह बताती है कि सफलता के लिए हमेशा बड़े संसाधनों या मजबूत पृष्ठभूमि की जरूरत नहीं होती। एक मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार, एक मां का विश्वास, परिवार का साथ और खुद पर भरोसा भी बड़ी से बड़ी मंजिल तक पहुंचा सकता है।

मद्रास के एक साधारण घर से शुरू हुई यह कहानी विंबलडन के सेंटर कोर्ट से होती हुई हॉलीवुड तक पहुंची। विजय, आनंद और अशोक अमृतराज ने सिर्फ अपने लिए नाम नहीं बनाया, बल्कि दुनिया के सामने भारतीय प्रतिभा की एक अलग तस्वीर पेश की।

इन तीनों भाइयों की जिंदगी से सबसे बड़ी सीख शायद प्रसिद्धि नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, परिवार के मूल्यों, मेहनत और विनम्रता की है। यही वे चीजें हैं, जिन्होंने तीन साधारण भारतीय भाइयों को दुनिया में एक पहचान दी।

(भुवन लाल एक फिल्म निर्माता, उपन्यासकार, लेखक, बॉयोग्राफर और रचनात्मक क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमी हैं।)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

सनी देओल की फिल्म ‘Suryaa’ के प्रोमो पर IMA को आपत्ति, MIB से की समीक्षा की मांग

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अभिनेता सनी देओल और संजय दत्त की फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ के प्रचार वीडियो पर आपत्ति जताई है।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
SunnyDeol5421

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अभिनेता सनी देओल और संजय दत्त की फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ के प्रचार वीडियो पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि फिल्म का प्रोमो चिकित्सा पेशे में भ्रष्टाचार को व्यापक रूप में दिखाता है और डॉक्टरों व अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा को इस तरह पेश करता है, जिससे लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। IMA ने इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से प्रचार सामग्री की समीक्षा करने की मांग की है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जे. नायक ने 22 अक्टूबर को सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म की प्रचार सामग्री की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। एसोसिएशन ने फिल्म निर्माताओं से जरूरी सुधार करने को भी कहा है। साथ ही, उसने कहा है कि लागू कानूनों के तहत जरूरत पड़ने पर प्रतिबंध या दूसरी उचित कार्रवाई पर विचार किया जाए।

यह पत्र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष को भी भेजा गया है।

डॉक्टरों की छवि को लेकर जताई चिंता

IMA का कहना है कि फिल्म में कुछ लोगों के भ्रष्टाचार या गलत कामों को इस तरह दिखाए जाने की आशंका है, जिससे पूरे चिकित्सा समुदाय की छवि प्रभावित हो सकती है। एसोसिएशन ने कहा कि अगर कोई डॉक्टर गलत काम करता है, तो उसके खिलाफ जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सजा भी मिलनी चाहिए। लेकिन कुछ लोगों के गलत कामों के लिए पूरे डॉक्टर समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा पर भी आपत्ति

एसोसिएशन ने फिल्म के उन दृश्यों पर भी चिंता जताई है, जिनमें डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल के कर्मचारियों पर शारीरिक हमला दिखाया गया है। IMA के मुताबिक, अगर ऐसी हिंसा को बहादुरी या जायज कार्रवाई के रूप में पेश किया जाता है, तो इससे स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को सामान्य मानने की सोच बढ़ सकती है।

IMA ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पहले से ही चिंता का विषय है। ऐसे में फिल्मों और उनकी प्रचार सामग्री में हिंसा को सही ठहराने वाले चित्रण से स्थिति और मुश्किल हो सकती है।

मरीजों और डॉक्टरों के बीच भरोसे पर असर की आशंका

IMA ने अपने पत्र में यह भी आशंका जताई कि इस तरह का चित्रण मरीजों और डॉक्टरों के बीच अविश्वास बढ़ा सकता है। इलाज के दौरान दोनों के बीच भरोसा और सहयोग जरूरी होता है। एसोसिएशन के अनुसार, चिकित्सा पेशे की नकारात्मक छवि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों का मनोबल भी प्रभावित कर सकती है और युवाओं को इस पेशे में आने से हतोत्साहित कर सकती है।

हालांकि, IMA ने रचनात्मक स्वतंत्रता के महत्व को स्वीकार किया है। उसका कहना है कि फिल्मों और दूसरी रचनात्मक सामग्री को बनाने की आजादी जरूरी है, लेकिन जहां स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं पर लोगों के भरोसे का सवाल हो, वहां इस स्वतंत्रता का जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

फिलहाल, IMA ने मंत्रालय से फिल्म के प्रचार वीडियो की समीक्षा करने और लागू नियमों के तहत उचित कदम उठाने की मांग की है। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

टीवी रेटिंग पर रोक के बीच GTPL Hathway ने शुरू किया व्युअरशिप डेटा जारी करना

टीवी रेटिंग जारी करने की व्यवस्था में रुकावट के बीच केबल टीवी और ब्रॉडबैंड सेवा देने वाली कंपनी GTPL Hathway ने टेलीविजन दर्शकों से जुड़ा डेटा जारी करना शुरू कर दिया है।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
GTPL6943

टीवी रेटिंग जारी करने की व्यवस्था में रुकावट के बीच केबल टीवी और ब्रॉडबैंड सेवा देने वाली कंपनी GTPL Hathway ने टेलीविजन दर्शकों से जुड़ा डेटा जारी करना शुरू कर दिया है। कंपनी इसके लिए रिटर्न पाथ डेटा (RPD) तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। फिलहाल इस व्यवस्था के तहत 10 हजार से ज्यादा ऐसे सेट-टॉप बॉक्स से डेटा जुटाया जा रहा है, जो इस तकनीक से जुड़े हैं। कंपनी आने वाले कुछ महीनों में इस दायरे को बढ़ाकर करीब 50 हजार घरों तक पहुंचाना चाहती है।

कंपनी के मुताबिक, यह पहल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 के अनुरूप है। GTPL ने अपनी वेबसाइट पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले टीवी चैनलों और सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध डिजिटल विज्ञापन माध्यमों से जुड़ी जानकारी के सारांश भी जारी करने शुरू कर दिए हैं।

GTPL के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, एक औसत घर में रोजाना साढ़े सात घंटे से ज्यादा समय तक पारंपरिक टीवी देखा जाता है। कंपनी का कहना है कि यह आंकड़ा भारतीय घरों में लीनियर टेलीविजन यानी तय कार्यक्रमों और प्रसारण समय के अनुसार टीवी देखने की आदत को दिखाता है।

यह पहल ऐसे समय में आई है, जब टीवी रेटिंग व्यवस्था में जारी रुकावट के बीच प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों को दर्शकों की पसंद और विज्ञापनों की पहुंच समझने के लिए दूसरे स्रोतों की जरूरत है। हालांकि, GTPL का यह प्लेटफॉर्म आधारित डेटा मौजूदा उद्योग-स्तरीय टीवी रेटिंग व्यवस्था से अलग है।

50 हजार घरों तक सैंपल बढ़ाने की योजना

GTPL फिलहाल 200 से ज्यादा शहरों और कस्बों के साथ करीब 3,000 पिन कोड क्षेत्रों में मौजूद 10 हजार से अधिक RPD-सक्षम सेट-टॉप बॉक्स से डेटा जुटा रही है। इस सैंपल में महानगरों, शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया है।

कंपनी का लक्ष्य अगले कुछ महीनों में इस सैंपल को बढ़ाकर लगभग 50 हजार घरों तक पहुंचाना है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में टीवी देखने के तौर-तरीकों को समझने और आंकड़ों का अधिक बारीकी से विश्लेषण करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कंपनी के मुताबिक, इस व्यवस्था के लिए शुरुआती अध्ययन एक स्वतंत्र तीसरी पार्टी की रिसर्च एजेंसी ने किया है। इसमें अलग-अलग बाजारों में दर्शकों की देखने की आदतों को समझने के लिए सांख्यिकीय और वैज्ञानिक सैंपलिंग तरीकों का इस्तेमाल किया गया है।

GTPL के पास 1.1 करोड़ से ज्यादा सक्रिय डिजिटल टीवी घरों का ग्राहक आधार है और कंपनी का अनुमानित दर्शक आधार करीब 5 करोड़ है। कंपनी का कहना है कि सैंपल बढ़ने से उसके ग्राहक आधार में टीवी देखने के रुझानों की बेहतर जानकारी मिल सकती है।

हालांकि, इन आंकड़ों की सटीकता और व्यापकता इस बात पर निर्भर करेगी कि सैंपल में किस तरह के घर शामिल हैं, उन्हें कैसे चुना गया है और उनके आंकड़ों के आधार पर बड़े ग्राहक आधार के अनुमान किस तरीके से तैयार किए जाते हैं। इसलिए इस डेटा को पूरे भारत के टीवी दर्शकों की पसंद का प्रतिनिधि मानने से पहले इसकी कार्यप्रणाली को समझना जरूरी होगा।

RPD तकनीक से कैसे मिलेगी जानकारी?

रिटर्न पाथ डेटा यानी RPD तकनीक के जरिए टीवी देखने से जुड़ी गतिविधियों का डेटा सीधे इससे जुड़े सेट-टॉप बॉक्स से मिलता है। सर्वे में लोगों से उनकी टीवी देखने की आदतों के बारे में पूछने के बजाय यह तकनीक अपने आप देखने की गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार करती है।

GTPL के मुताबिक, इस डेटा से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि लोग कितनी देर टीवी देखते हैं, किन चैनलों को पसंद करते हैं, किस समय और किस तरह के कार्यक्रम ज्यादा देखते हैं और अलग-अलग बाजारों में दर्शकों की पसंद कैसे बदलती है।

इस व्यवस्था के जरिए दर्शकों की पहुंच, विज्ञापनों के अनुमानित इम्प्रेशन, चैनलों की लोकप्रियता, क्षेत्रीय देखने के रुझान, कार्यक्रमों की श्रेणी और अलग-अलग समय के हिसाब से टीवी देखने की आदतों का विश्लेषण किया जा सकता है। कंपनी लंबे समय में दर्शकों की पसंद में होने वाले बदलावों और विज्ञापनों की प्रभावशीलता को समझने के लिए भी इसका इस्तेमाल करना चाहती है।

कंपनी के अनुसार, यह व्यवस्था उसके प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करीब 1,000 टीवी चैनलों के देखने से जुड़े डेटा को कवर करती है। इसमें पे चैनल और फ्री-टू-एयर चैनल, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनल के साथ सैटेलाइट और प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराए जाने वाले चैनल भी शामिल हैं।

इससे छोटे, क्षेत्रीय और नए प्रसारकों को भी अपने कार्यक्रमों की पहुंच और दर्शकों की पसंद समझने में मदद मिल सकती है। प्रसारक इस जानकारी के आधार पर कार्यक्रमों और उनके प्रसारण के समय से जुड़े फैसलों का आकलन कर सकते हैं। वहीं, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां इसका इस्तेमाल विज्ञापन की योजना बनाने और दर्शकों के रुझान समझने के लिए कर सकती हैं।

सेट-टॉप बॉक्स पर डिजिटल विज्ञापनों का भी होगा आकलन

GTPL ने टीवी देखने के आंकड़ों के अलावा सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध डिजिटल विज्ञापन माध्यमों के प्रदर्शन को मापने की व्यवस्था भी तैयार की है।

कंपनी के मुताबिक, सैंपल में शामिल घरों के देखने के व्यवहार से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा और सांख्यिकीय तरीकों से इनके आधार पर अपने व्यापक ग्राहक आधार के लिए अनुमान तैयार किए जाएंगे।

इससे विज्ञापनदाताओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि सेट-टॉप बॉक्स पर मौजूद डिजिटल विज्ञापन माध्यम कितने लोगों तक पहुंचे और उन्हें देखने में कितना समय बिताया गया। इसके लिए विज्ञापनों की अनुमानित पहुंच और औसत देखने के समय जैसे मानकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

कंपनी विज्ञापनदाताओं को इन डिजिटल माध्यमों पर तय डिजिटल मानकों के आधार पर विज्ञापन खरीदने का विकल्प देने की योजना बना रही है। इनमें प्रति हजार इम्प्रेशन की लागत यानी CPM के आधार पर विज्ञापन खरीदने की व्यवस्था भी शामिल होगी। डिजिटल विज्ञापन जगत में गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म पर भी इस तरह के मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है।

इस पहल से GTPL को अपने सेट-टॉप बॉक्स आधारित विज्ञापन माध्यमों के लिए एक नया कारोबारी विकल्प मिल सकता है। विज्ञापनदाता भी टीवी और डिजिटल माध्यमों पर अपनी पहुंच का आकलन करने के लिए इन आंकड़ों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

हालांकि, कंपनी ने अभी इस विज्ञापन सुविधा की व्यावसायिक शर्तों और उपलब्ध विज्ञापन माध्यमों का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया है।

डेटा की गोपनीयता पर कंपनी का क्या कहना है?

GTPL का कहना है कि उसने इस व्यवस्था में डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखा है। कंपनी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान बताने वाली जानकारी एकत्र नहीं की जाती। डेटा को प्रोसेस करने से पहले उसकी पहचान छिपाई जाती है और जानकारी को घरों के स्तर पर एकत्रित रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

कंपनी ने डेटा जुटाने और उसके विश्लेषण को सुरक्षित रखने के लिए स्वचालित प्रणालियों के इस्तेमाल की भी बात कही है।

टीवी रेटिंग व्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह पहल?

टीवी रेटिंग का डेटा प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इससे उन्हें चैनलों और कार्यक्रमों की लोकप्रियता समझने, विज्ञापन की योजना बनाने और अपने निवेश से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलती है।

ऐसे में GTPL की यह पहल टीवी देखने के रुझानों को समझने के लिए एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध करा सकती है। आने वाले महीनों में सैंपल को 50 हजार घरों तक बढ़ाने से कंपनी के अपने ग्राहक आधार से मिलने वाले आंकड़ों का दायरा बढ़ सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि GTPL का डेटा उसके प्लेटफॉर्म से जुड़े सेट-टॉप बॉक्स और चुने गए घरों के सैंपल पर आधारित है। इसे अपने आप पूरे भारत की टीवी व्युअरशिप का आधिकारिक या सार्वभौमिक माप नहीं माना जा सकता। इसके निष्कर्षों को समझने के लिए सैंपल के चयन, आंकड़ों के विश्लेषण और अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया को देखना होगा।

कुल मिलाकर, GTPL Hathway की इस पहल से टीवी दर्शकों की पसंद और सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध विज्ञापन माध्यमों के प्रदर्शन को समझने का एक नया रास्ता खुल सकता है। इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि उद्योग के दूसरे पक्ष इन आंकड़ों और उनकी कार्यप्रणाली का आकलन किस तरह करते हैं।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Zee Learn में राकेश चतुर्वेदी को बड़ी जिम्मेदारी, 9 नवंबर से बनेंगे होल-टाइम डायरेक्टर

शिक्षा क्षेत्र की कंपनी जी लर्न (Zee Learn Ltd) ने राकेश चतुर्वेदी को होल-टाइम डायरेक्टर (पूर्णकालिक निदेशक) नियुक्त किया है।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
Rakesh5412

शिक्षा क्षेत्र की कंपनी जी लर्न (Zee Learn Ltd) ने राकेश चतुर्वेदी को होल-टाइम डायरेक्टर (पूर्णकालिक निदेशक) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 9 नवंबर, 2026 से प्रभावी होगी। वह कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।

कंपनी के निदेशक मंडल ने 23 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस नियुक्ति को मंजूरी दी। यह फैसला नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर लिया गया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के लिए कंपनी के सदस्यों की मंजूरी भी जरूरी होगी। यह मंजूरी अगली आम बैठक में या नियुक्ति की तारीख से तीन महीने के भीतर, जो भी पहले हो, ली जानी है।

मीडिया और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में 30 साल का अनुभव

राकेश चतुर्वेदी को विभिन्न कॉरपोरेट क्षेत्रों में करीब 30 साल का अनुभव है। इसमें मीडिया और टेक्नोलॉजी क्षेत्र भी शामिल हैं। उनके पास कॉमर्स और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री, कानून में स्नातक (LL.B.) और फाइनेंस में डॉक्टरेट (Ph.D.) की डिग्री है।

जी लर्न में नई जिम्मेदारी मिलने से पहले वह जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd) में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत थे। वहां वह जोखिम प्रबंधन, आंतरिक ऑडिट और वित्तीय नियंत्रण से जुड़े काम संभालते थे।

इसके अलावा, वह इंडिया वेब पोर्टल प्राइवेट लिमिटेड (India.com) में मुख्य वित्तीय अधिकारी और नियामक मामलों के प्रमुख की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। उनके अनुभव में वित्तीय योजना तैयार करना, जोखिम प्रबंधन, नियमों का पालन, पूंजी के इस्तेमाल की योजना और कंपनियों के विलय एवं अधिग्रहण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

सेबी के नियमों के तहत दी गई जानकारी

कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया है कि सेबी या किसी अन्य प्राधिकरण के आदेश के तहत राकेश चतुर्वेदी पर निदेशक का पद संभालने की कोई रोक नहीं है।

यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के विनियमन 30 के तहत साझा की गई है। कंपनी के अनुसार, 23 अक्टूबर को बोर्ड की बैठक शाम 4 बजे शुरू हुई और शाम 6:30 बजे समाप्त हुई। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Affle 3i ने प्रमोटर कंपनी को आवंटित किए 12.77 लाख शेयर, पूंजी बढ़कर हुई ₹28.78 करोड़

डिजिटल विज्ञापन और मोबाइल मार्केटिंग टेक्नोलॉजी कंपनी Affle 3i लिमिटेड ने अपनी प्रमोटर कंपनी Affle Holdings Pte. Ltd. को 12,77,155 नए इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
affle4120

डिजिटल विज्ञापन और मोबाइल मार्केटिंग टेक्नोलॉजी कंपनी Affle 3i लिमिटेड ने अपनी प्रमोटर कंपनी Affle Holdings Pte. Ltd. को 12,77,155 नए इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। कंपनी ने ये शेयर वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलने पर जारी किए हैं। हर शेयर का अंकित मूल्य 2 रुपये है, जबकि इश्यू प्राइस 1,487 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

कंपनी ने 21 अक्टूबर, 2026 को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि यह आवंटन प्रेफरेंशियल आधार पर किया गया है। इससे पहले 19 अक्टूबर को कंपनी ने प्रमोटर कंपनी को 17,04,324 इक्विटी शेयर आवंटित करने की जानकारी दी थी।

अब तक 30.16 लाख शेयर आवंटित

Affle 3i के मुताबिक, प्रमोटर कंपनी को कुल 74 लाख वारंट आवंटित किए गए थे। इनमें से अब तक 30,16,443 वारंट को इक्विटी शेयरों में बदला जा चुका है। इसके बदले कंपनी को कुल 6,115.04 मिलियन रुपये यानी करीब 611.50 करोड़ रुपये मिले हैं।

कंपनी ने बताया कि 74 लाख वारंट के लिए कुल 11,003.80 मिलियन रुपये यानी करीब 1,100.38 करोड़ रुपये की राशि तय है। इसमें वारंट आवंटन के समय मिलने वाली 25 फीसदी शुरुआती राशि और वारंट को शेयरों में बदलने के लिए दी जाने वाली बाकी रकम शामिल है।

1,487 रुपये प्रति शेयर है इश्यू प्राइस

कंपनी ने वारंट को शेयरों में बदलने के लिए प्रति शेयर 1,487 रुपये का इश्यू प्राइस तय किया है। इसमें से 25 फीसदी यानी 371.75 रुपये प्रति वारंट की राशि पहले ही मिल चुकी थी। बाकी 75 फीसदी यानी 1,115.25 रुपये प्रति वारंट का भुगतान वारंट को शेयरों में बदलने के समय किया गया।

इस प्रक्रिया के बाद कंपनी की जारी, सब्सक्राइब्ड और पूरी तरह चुकता शेयर पूंजी बढ़कर 28,77,91,654 रुपये हो गई है। यह पूंजी 2 रुपये अंकित मूल्य वाले कुल 14,38,95,827 इक्विटी शेयरों में बंटी है।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

राजेंद्र तिवारी ने LENS में संभाली एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी

राजेंद्र तिवारी पूर्व में दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान, अमर उजाला और प्रभात खबर जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर काम कर चुके हैं।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
Rajendra Tiwari

वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी ने लाइव आई न्यूज सर्विस (LENS) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में नई पारी शुरू की है। प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले तिवारी यहां न्यूजरूम का नेतृत्व करेंगे। उनकी जिम्मेदारी में खबरों की पुष्टि, न्यूजरूम की कार्यप्रणाली और संपादकीय मानकों की देखरेख शामिल होगी।

राजेंद्र तिवारी पूर्व में दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान, अमर उजाला और प्रभात खबर जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर काम कर चुके हैं। प्रभात खबर में उन्होंने कॉरपोरेट एडिटर के रूप में भी काम किया है।

उनके पत्रकारिता अनुभव का दायरा दिल्ली, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, भोपाल, इंदौर, रायपुर, रांची और कोलकाता तक फैला रहा है। अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों में काम करने का उनका अनुभव उनके लंबे पत्रकारिता करियर का हिस्सा रहा है।

हाल के वर्षों में तिवारी डिजिटल पत्रकारिता से भी जुड़े रहे हैं। वह यूट्यूब आधारित न्यूज और राजनीतिक विश्लेषण मंच अनब्रेकिंग (UnBreaking) से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा, वह द वायर (The Wire) पर ‘बात दरअसल ये है’ नाम से राजनीतिक विश्लेषण कार्यक्रम भी प्रस्तुत करते हैं।

दरअसल, LENS एक ऐसा मंच विकसित कर रहा है, जो रिपोर्टरों और स्ट्रिंगरों के वीडियो फुटेज को ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल पब्लिशर्स से जोड़ने का काम करेगा। इसका उद्देश्य खबरों से जुड़े वीडियो फुटेज की पुष्टि करना, उनके अधिकारों को स्पष्ट रखना और एक व्यवस्थित लाइसेंसिंग व्यवस्था के जरिए उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था में योगदान देने वाले लोगों को पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

डॉ. अनुराग बत्रा दुबई में MDME 2026 के उद्घाटन समारोह में रखेंगे अपने विचार

एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा आज दुबई में आयोजित होने वाले मिडिल ईस्ट डिजिटल मार्केटिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड्स (MDME) 2026 के उद्घाटन समारोह में विशेष कीनोट संबोधन देंगे।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
AnnuragBatra512

BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा 23 अक्टूबर को यानी आज दुबई में आयोजित होने वाले मिडिल ईस्ट डिजिटल मार्केटिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड्स (MDME) 2026 के उद्घाटन समारोह में विशेष कीनोट संबोधन देंगे।

इस कार्यक्रम का आयोजन ग्रैंड एक्सिस ग्लोबल (Grand Axis Global) की ओर से किया जा रहा है। यह आयोजन दुबई के डाउनटाउन इलाके में स्थित केम्पिंस्की द बुलेवार्ड में होगा। कार्यक्रम में ‘टॉप 50 मार्केटिंग लीडर्स ऑफ द मिडिल ईस्ट 2026’ के तहत क्षेत्र के प्रमुख मार्केटिंग लीडर्स को भी पहचान दी जाएगी।

डॉ. बत्रा की भागीदारी से कार्यक्रम में भारतीय मीडिया और मार्केटिंग इंडस्ट्री का नजरिया भी सामने आएगा। BW Businessworld और एक्सचेंज4मीडिया के जरिए वह बिजनेस पत्रकारिता के साथ-साथ विज्ञापन, मार्केटिंग और मीडिया जगत से जुड़े मुद्दों को सामने लाने में सक्रिय रहे हैं।

उन्होंने साल 2000 में एक्सचेंज4मीडिया की स्थापना की थी। इसके बाद इस मंच ने विज्ञापन, मार्केटिंग और मीडिया क्षेत्र के पेशेवरों के बीच अपनी पहचान बनाई। समूह के काम में खबरों और विश्लेषण के साथ इंडस्ट्री से जुड़े कार्यक्रम, चर्चाएं और वरिष्ठ कारोबारी नेताओं तथा ब्रैंड से जुड़े फैसले लेने वाले लोगों के साथ संवाद भी शामिल हैं।

डिजिटल मार्केटिंग के अलग-अलग क्षेत्रों पर रहेगा फोकस

MDME 2026 का उद्देश्य डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में बेहतर काम और नए प्रयोगों को पहचान देना है। इसके तहत परफॉर्मेंस मार्केटिंग, ब्रैंडिंग, ग्राहकों से जुड़ाव, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैंपेन, मार्केटिंग टेक्नोलॉजी, विज्ञापन तकनीक और डिजिटल बदलाव जैसे क्षेत्रों में उपलब्धियों को सम्मानित किया जाएगा।

अवॉर्ड्स की विभिन्न श्रेणियों में सोशल मीडिया और कंटेंट, कारोबार की वृद्धि, ग्राहक अनुभव, ब्रैंड की पहचान, नई तकनीक, रचनात्मक प्रयोग, एजेंसी के काम और व्यक्तिगत नेतृत्व को शामिल किया गया है। इनमें मार्केटिंग में जनरेटिव AI के इस्तेमाल और ऐसे कैंपेन को भी जगह दी गई है, जिनसे कारोबार में मापने योग्य वृद्धि हुई हो।

कार्यक्रम में ‘टॉप 50 मार्केटिंग लीडर्स ऑफ द मिडिल ईस्ट 2026’ के जरिए क्षेत्र के उन पेशेवरों को भी पहचान दी जाएगी, जो मार्केटिंग जगत को दिशा देने में भूमिका निभा रहे हैं। इस तरह कार्यक्रम में एक ओर प्रभावी मार्केटिंग अभियानों और दूसरी ओर इस क्षेत्र का नेतृत्व करने वाले लोगों पर ध्यान दिया जाएगा।

ग्रैंड एक्सिस ग्लोबल कर रहा है आयोजन

दुबई स्थित ग्रैंड एक्सिस ग्लोबल कॉरपोरेट कार्यक्रमों का आयोजन करने वाली कंपनी है। इसके काम में अवॉर्ड्स, नेतृत्व से जुड़े सम्मेलन, वरिष्ठ अधिकारियों की गोलमेज बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। कंपनी का उद्देश्य मिडिल ईस्ट में कारोबार से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों, ब्रैंड्स, एजेंसियों और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है।

कंपनी की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) प्रियंका भदौरिया हैं। उन्हें बिजनेस इवेंट्स इंडस्ट्री में 25 साल से अधिक का अनुभव है। ग्रैंड एक्सिस ग्लोबल की स्थापना से पहले वह नौ साल से अधिक समय तक एक्सचेंज4मीडिया के साथ जुड़ी रही थीं। वहां उन्होंने अवॉर्ड्स, नेतृत्व सम्मेलनों और वेबिनार जैसे कार्यक्रमों पर काम किया। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

चिंतन जोशी बने अमागी में हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस

अमागी ने चिंतन जोशी को हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस नियुक्त किया है। इससे पहले वह इनमोबी एक्सचेंज में सीनियर मैनेजर-रेवेन्यू ऑपरेशंस थे और करीब पांच वर्षों तक इनमोबी से जुड़े रहे।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
amagi

अमागी (Amagi) ने चिंतन जोशी (Chintan Joshi) को हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस के पद पर नियुक्त किया है। जोशी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर पोस्ट साझा कर अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी दी।

जोशी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने अमागी में हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।”

अमागी से पहले जोशी इनमोबी (InMobi) से जुड़े हुए थे। यहां वह इनमोबी एक्सचेंज में सीनियर मैनेजर-रेवेन्यू ऑपरेशंस के पद पर काम कर रहे थे। वह करीब पांच वर्षों तक इनमोबी से जुड़े रहे।

अपने करियर में जोशी इंफोसिस (Infosys) और यस प्रॉपर्टी (Yes Property) के साथ भी काम कर चुके हैं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

रेनी किशोर बनीं डब्ल्यूपीपी मीडिया में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट

रेनी किशोर तिलकनगर इंडस्ट्रीज के अल्कोहलिक बेवरेज पोर्टफोलियो, मीडिया रणनीति और ब्रांड समाधान का नेतृत्व करेंगी।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
wpp media

रेनी किशोर (Reni Kishore) ने डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-क्लाइंट सॉल्यूशंस के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। वह मई से इस भूमिका में काम कर रही हैं और हाल ही में लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।

नई भूमिका में रेनी भारत में तिलकनगर इंडस्ट्रीज (Tilaknagar Industries) के अल्कोहलिक बेवरेज पोर्टफोलियो का नेतृत्व करेंगी। इसमें इंपीरियल ब्लू (Imperial Blue), सेवन आइलैंड्स व्हिस्की (Seven Islands Whiskey) और मैंशन हाउस (Mansion House) जैसे ब्रांड शामिल हैं। उनकी जिम्मेदारियों में मीडिया रणनीति, ब्रांड समाधान, प्रचार साझेदारियां और रणनीतिक कारोबार विकास शामिल होगा।

इससे पहले रेनी डब्ल्यूपीपी मीडिया में सहायक उपाध्यक्ष-रणनीति एवं साझेदारी के रूप में काम कर रही थीं। इससे पहले उन्होंने एसेंसमी़डियाकॉम इंडिया (EssenceMediacom India) में तीन वर्षों से अधिक समय तक काम किया।

रेनी को बी2सी और बी2बी मार्केटिंग में 15 वर्षों का अनुभव है। उन्हें डिजिटल रणनीति, ब्रांड निर्माण, कंटेंट मार्केटिंग, मार्केटिंग कम्युनिकेशन और पार्टनर मैनेजमेंट में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने भारत के अलावा एशिया-प्रशांत और अमेरिका के बाजारों में भी काम किया है।

अपने करियर में रेनी मीडिया कॉम (MediaCom), ग्रुपएम (GroupM), रेकिट बेनकाइजर (Reckitt Benckiser), इंटरग्लोब टेक्नोलॉजीज (InterGlobe Technologies) और वीडोपिया (Vdopia) जैसी कंपनियों के साथ भी काम कर चुकी हैं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मैरिको के लिए डिजिटल प्लानिंग संभालेंगे आशीष वानखड़े

आशीष वानखड़े पीएचडी में ग्रुप हेड-डिजिटल प्लानिंग के रूप में शामिल हुए हैं। वह मैरिको के लिए डिजिटल प्लानिंग संभालेंगे। इससे पहले वह डब्ल्यूपीपी मीडिया और अन्य मीडिया एजेंसियों से जुड़े थे।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
marico

आशीष वानखड़े (Ashish Wankhade) पीएचडी (PHD) में ग्रुप हेड-डिजिटल प्लानिंग के रूप में शामिल हुए हैं। उन्हें मैरिको (Marico) के लिए डिजिटल प्लानिंग की जिम्मेदारी दी गई है।

पीएचडी में शामिल होने से पहले वह डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) में मीडिया प्लानिंग मैनेजर के तौर पर एक साल से कुछ अधिक समय तक काम कर चुके हैं।

वानखड़े ग्रुपएम नेक्सस (GroupM Nexus) और मैडिसन वर्ल्ड (Madison World) के साथ भी काम कर चुके हैं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इंडिया टुडे ग्रुप को बाय बोलकर अविनाश सिंह ने जॉइन किया NDTV

अविनाश सिंह इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) में मैनेजर–मार्केटिंग (ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट एवं रेपुटेशन स्ट्रैटेजी) के पद पर कार्यरत थे।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
Avinash Singh

मीडिया प्रोफेशनल अविनाश सिंह अब मीडिया नेटवर्क NDTV से जुड़ गए हैं। अविनाश सिंह को स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस, ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट और डिजिटल नैरेटिव बिल्डिंग में करीब एक दशक का अनुभव है।

NDTV से जुड़ने से पहले वह इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) में मैनेजर–मार्केटिंग (ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट एवं रेपुटेशन स्ट्रैटेजी) के पद पर कार्यरत थे। यहां अपने तीन साल से अधिक के सफर में उन्होंने आजतक (AajTak), इंडिया टुडे (India Today) और नेटवर्क के अन्य ब्रैंड्स की रेपुटेशन और इमेज बिल्डिंग से जुड़ी पहलों में अहम भूमिका निभाई।

उनकी जिम्मेदारियों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं का मुकाबला करने, लोगों की प्रतिक्रिया को समझने और संवेदनशील न्यूज घटनाक्रमों के दौरान ब्रैंड की छवि को संभालने के लिए स्ट्रैटेजी तैयार करना शामिल था।

समाचार4मीडिया से बातचीत में अविनाश सिंह ने बताया कि इंडिया टुडे ग्रुप में उन्होंने ऐसे कैंपेन तैयार करने में भी योगदान दिया, जिनके जरिए लोगों के बीच कम्युनिकेशंस को बढ़ावा मिला और ब्रैंड्स की विजिबिलिटी, प्रासंगिकता तथा ऑडियंस एंगेजमेंट को मजबूत करने में मदद मिली।

इंडिया टुडे ग्रुप से पहले अविनाश सिंह ने नेशन विद नमो (Nation with NaMo) में डिजिटल स्ट्रैटेजी और नैरेटिव ऑपरेशंस के कैंपेन मैनेजर के रूप में काम किया। जनवरी 2019 से मई 2023 तक इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जनधारणा को प्रभावित करने के लिए डिजिटल पीआर और नैरेटिव स्ट्रैटेजी पर काम किया। उन्होंने ऑडियंस के व्यवहार और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप डेटा आधारित कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी तैयार करने तथा बड़े स्तर पर कंटेंट प्रसार के लिए नेटवर्क विकसित करने में भी भूमिका निभाई।

इससे पहले वह इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर (Indian Chamber of Food and Agriculture) में असिस्टेंट मैनेजर–मार्केटिंग कम्युनिकेशंस और अरुकस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Arrucus Media Private Limited) में मार्केटिंग एग्जिक्यूटिव के रूप में काम कर चुके हैं।

अविनाश सिंह ने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की है। इसके अलावा, उन्होंने एनबीए ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए