SC से गेमिंग कंपनियों को बड़ी राहत, प्रमोटर्स की व्यक्तिगत जवाबदेही पर अभी भी सस्पेंस

भारत के ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने GST विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए टैक्स विभाग की उस गणना पद्धति को खारिज कर दिया है

Last Modified:
Monday, 22 June, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, समाचार4मीडिया ।।

भारत के ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने GST विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए टैक्स विभाग की उस गणना पद्धति को खारिज कर दिया है, जिसके आधार पर गेमिंग कंपनियों पर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी बनाई गई थी। हालांकि, इस फैसले के बावजूद एक बड़ा सवाल अभी भी बाकी है- क्या इन टैक्स मामलों में कंपनियों के प्रमोटर्स और निदेशकों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

यह मामला ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स, फैंटेसी स्पोर्ट्स कंपनियों और कैसीनो से जुड़ा है। टैक्स विभाग का दावा था कि खिलाड़ियों द्वारा लगाए गए हर दांव (Bet) पर 28% GST लगाया जाना चाहिए। वहीं कैसीनो के मामलों में बार-बार इस्तेमाल होने वाले चिप्स की पूरी राशि को टैक्स के दायरे में शामिल किया गया था। इसी आधार पर कई कंपनियों को भारी-भरकम नोटिस भेजे गए थे।

सबसे चर्चित मामला गेम्सक्राफ्ट (Gameskraft) का रहा, जिस पर लगभग 2.09 लाख करोड़ रुपये का GST नोटिस जारी किया गया था। यह रकम कंपनी की उस अवधि की कुल आय, जो करीब 4,650 करोड़ रुपये थी, से कई गुना अधिक थी।

अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों के मामलों में टैक्स की गणना CGST नियमों के Rule 31B के तहत की जाएगी। इसका मतलब यह है कि GST केवल खिलाड़ियों द्वारा प्लेटफॉर्म में जमा की गई मूल राशि (Player Deposits) पर लगेगा, न कि हर बार लगाए गए दांव पर। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि खिलाड़ी अपनी जीती हुई रकम को निकाले बिना दोबारा खेल में इस्तेमाल करता है, तो उसे नई जमा राशि नहीं माना जाएगा।

गेमिंग और टेक्नोलॉजी कानून विशेषज्ञ जय सयटा के अनुसार, इस फैसले से गेमिंग कंपनियों की टैक्स देनदारी में बड़ी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि अब टैक्स की गणना हर दांव पर नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के शुरुआती जमा पर होगी, जिससे पहले जारी किए गए नोटिसों की रकम काफी कम हो सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला टैक्स विभाग की पहले की गणना पद्धति में बड़ा बदलाव लाता है। CMS INDUSLAW के पार्टनर शशि मैथ्यूज के मुताबिक, कोर्ट ने माना है कि Rule 31B केवल नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद नियमों की स्पष्टता के लिए लाया गया प्रावधान है। इसलिए इसे पिछली अवधि पर भी लागू किया जाएगा।

इसका सीधा असर यह होगा कि 1 अक्टूबर 2023 से पहले के सभी लंबित मामलों और नोटिसों की फिर से गणना करनी होगी। हालांकि कोर्ट ने टैक्स देनदारी पूरी तरह खत्म नहीं की है, बल्कि सिर्फ उसकी गणना का तरीका बदला है। इसलिए उद्योग पर टैक्स का बोझ कम होगा, लेकिन समाप्त नहीं होगा।

फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों के साथ-साथ उनके निदेशकों, प्रमोटर्स और प्रमुख प्रबंधन अधिकारियों को जारी किए गए नोटिसों को रद्द नहीं किया है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों को आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने और उसके बाद अधिकारियों को मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया है।

यही कारण है कि अब उद्योग में एक नई बहस शुरू हो गई है। यदि कोई गेमिंग कंपनी वित्तीय संकट या दिवालिया होने की स्थिति में पहुंचती है, तो क्या उसके प्रमोटर्स और निदेशकों से व्यक्तिगत रूप से टैक्स वसूला जा सकता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस सवाल का जवाब अभी पूरी तरह साफ नहीं है। शशि मैथ्यूज के मुताबिक, व्यक्तिगत जिम्मेदारी का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि टैक्स विभाग ने किस कानूनी प्रावधान के तहत नोटिस जारी किया है और क्या कंपनी के अधिकारियों की किसी तरह की जानबूझकर की गई चूक, धोखाधड़ी या कर चोरी में भूमिका साबित होती है।

गेमिंग नीति विशेषज्ञ और वकील राजाराम सुरियनारायणन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में प्रमोटर्स या निदेशकों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर कोई सीधा फैसला नहीं दिया गया है। इस मुद्दे की जांच अलग-अलग मामलों में कंपनियों अधिनियम, दिवाला कानून (IBC) और CGST अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत की जाएगी।

वहीं जय सयटा का मानना है कि चूंकि यह पूरा विवाद कानून की व्याख्या से जुड़ा था और पहले कई हाई कोर्ट गेमिंग कंपनियों के पक्ष में फैसले दे चुके थे, इसलिए धोखाधड़ी या जानबूझकर जानकारी छिपाने जैसे आरोपों को साबित करना आसान नहीं होगा।

KS Legal & Associates की मैनेजिंग पार्टनर सोनम चंदवानी ने भी कहा कि किसी कंपनी के दिवालिया होने मात्र से उसके प्रमोटर्स या निदेशकों पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं आ जाती। GST कानून के तहत व्यक्तिगत जवाबदेही केवल विशेष परिस्थितियों में तय की जा सकती है, जब यह साबित हो कि टैक्स की वसूली न हो पाने के पीछे निदेशकों की गंभीर लापरवाही, कर्तव्य उल्लंघन या गलत आचरण जिम्मेदार था।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत के ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इससे कंपनियों पर बने भारी GST दावों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। लेकिन अब उद्योग की नजर एक नए सवाल पर टिक गई है—क्या टैक्स की अंतिम जिम्मेदारी सिर्फ कंपनियों तक सीमित रहेगी या फिर उसके प्रमोटर्स और निदेशकों तक भी पहुंचेगी। आने वाले महीनों में शुरू होने वाली सुनवाई और निर्णय इस सवाल का जवाब तय करेंगे।

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ब्लूगॉड एंटरटेनमेंट में रितु तिवारी अतिरिक्त गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक नियुक्त

ब्लूगॉड एंटरटेनमेंट लिमिटेड ने अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए रितु तिवारी को अतिरिक्त गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया है

Last Modified:
Monday, 22 June, 2026
BlueGodEntertainment874

फिल्म प्रोडक्शन और कंटेंट बनाने वाली कंपनी 'ब्लूगॉड एंटरटेनमेंट लिमिटेड' (पूर्व नाम इंद्रा इंडस्ट्री लिमिटेड) ने अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए रितु तिवारी को अतिरिक्त गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक (Additional Non-Executive Independent Director) नियुक्त किया है। कंपनी के बोर्ड ने 16 जून 2026 को पारित प्रस्ताव के जरिए उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी। हालांकि, यह नियुक्ति कंपनी के शेयरधारकों की स्वीकृति के अधीन रहेगी।

कंपनी ने इस संबंध में बताया कि रितु तिवारी का पहला कार्यकाल लगातार पांच वर्षों का होगा, जो 16 जून 2026 से प्रभावी माना जाएगा। यह फैसला कंपनी की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) की सिफारिश के आधार पर लिया गया है।

रितु तिवारी एक योग्य कंपनी सेक्रेटरी हैं और उन्हें कॉरपोरेट अनुपालन (Corporate Compliance), कॉरपोरेट गवर्नेंस तथा शैक्षणिक क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह खैरातुंडा बरवा अड्डा रोड लिमिटेड में कंपनी सेक्रेटरी एवं कंप्लायंस ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं।

इसके अलावा वह कबरा ड्रग्स लिमिटेड, केसीडी इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड और ब्लू पर्ल एग्रीवेंचर्स लिमिटेड के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।

कॉरपोरेट जिम्मेदारियों के साथ-साथ रितु तिवारी शिक्षा जगत से भी जुड़ी हुई हैं। वह प्रबंधन, कानून और वाणिज्य विषयों में फैकल्टी एवं प्रोफेसर के रूप में कार्य कर चुकी हैं और छात्रों के मार्गदर्शन तथा शिक्षण का लंबा अनुभव रखती हैं।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि रितु तिवारी का कंपनी के किसी भी मौजूदा निदेशक से कोई संबंध नहीं है। साथ ही, बीएसई के दिशानिर्देशों के अनुसार उन पर सेबी या किसी अन्य नियामक अथॉरिटी द्वारा निदेशक पद संभालने पर किसी प्रकार की रोक नहीं है।

ब्लूगॉड एंटरटेनमेंट का मानना है कि रितु तिवारी का अनुभव और विशेषज्ञता कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस को और मजबूत करने में मदद करेगी तथा बोर्ड को रणनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

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‘The Plan Beyond’ ने प्रियंका अरोड़ा को बनाया चीफ मार्केटिंग ऑफिसर

प्रियंका अरोड़ा को मार्केटिंग जगत की प्रमुख शख्सियतों में गिना जाता है। उन्हें BW 40 Under 40 और IMPACT 40 Under 40 जैसी प्रतिष्ठित सूचियों में शामिल किया जा चुका है।

Last Modified:
Sunday, 21 June, 2026
Priyanka Arora

भारत में 'फैमिली कंटिन्यूटी' और डिजिटल लेगेसी मैनेजमेंट कैटेगरी विकसित करने की दिशा में काम कर रही कंपनी ‘द प्लान बियॉन्ड’ (The Plan Beyond) ने प्रियंका अरोड़ा को चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) नियुक्त किया है।

कंपनी में फाउंडिंग मेंबर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में वह भारत में ‘फैमिली कंटिन्यूटी’ कैटेगरी के निर्माण का नेतृत्व करेंगी। इसके साथ ही वह संगठन के ब्रैंड, ग्रोथ, मार्केट डेवलपमेंट और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी संभालेंगी।

प्रियंका अरोड़ा को मार्केटिंग और बिजनेस क्षेत्र की एक अनुभवी पेशेवर के तौर पर जाना जाता है। उनके पास मार्केटिंग, बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन, ग्रोथ स्ट्रैटेजी, कंज्यूमर एंगेजमेंट, ब्रैंड बिल्डिंग और नई कैटेगरी विकसित करने के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में वित्तीय सेवाओं, टेलीकॉम, कंसल्टिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में काम किया है।

‘The Plan Beyond’ से जुड़ने से पहले वह एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस में वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थीं। वहां उन्होंने बड़े स्तर पर मार्केटिंग ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मार्केटिंग इकोसिस्टम, डिजिटल-फर्स्ट ग्रोथ स्ट्रैटेजी, ब्रैंड रीपोजिशनिंग और बिजनेस विस्तार से जुड़े कार्यक्रमों का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में कंज्यूमर्स जुड़ाव, राजस्व वृद्धि, बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने और ब्रैंड विकास से संबंधित कई पहलें आगे बढ़ीं।

अपने करियर के दौरान प्रियंका अरोड़ा भारती लाइफ वेंचर्स, आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस, एयरटेल, मैकिंजी एंड कंपनी और मैक्स न्यूयॉर्क लाइफ इंश्योरेंस जैसी कंपनियों में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुकी हैं। इन संगठनों में उन्होंने कस्टमर एनालिटिक्स, कंज्यूमर इनसाइट्स, ब्रैंड स्ट्रैटेजी, कस्टमर लाइफटाइम वैल्यू मैनेजमेंट, फिनटेक इकोसिस्टम डेवलपमेंट, डिजिटल मार्केटिंग, प्रोडक्ट मैनेजमेंट, स्ट्रैटेजिक प्लानिंग और बिजनेस ग्रोथ जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल की।

प्रियंका अरोड़ा को मार्केटिंग जगत की प्रमुख शख्सियतों में गिना जाता है। उन्हें BW 40 Under 40 और IMPACT 40 Under 40 जैसी प्रतिष्ठित सूचियों में शामिल किया जा चुका है। इसके अलावा वह कई ACEF Awards से भी सम्मानित हो चुकी हैं। वह Effie Awards की जूरी सदस्य रह चुकी हैं, ET Sharks में भाग ले चुकी हैं और विभिन्न इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म्स एवं नेतृत्व कार्यक्रमों में नियमित वक्ता के रूप में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहती हैं।

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MIB ने प्रोडक्शन मैनेजर के पद पर निकाली वैकेंसी, 56 वर्ष तक के अधिकारी कर सकते हैं आवेदन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने CBC और DPD के साझा कैडर में प्रोडक्शन मैनेजर (प्रिंटेड पब्लिसिटी) / प्रोडक्शन ऑफिसर (प्रोडक्शन) के एक पद को प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरने के लिए आवेदन मांगे हैं।

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने अधीनस्थ कार्यालयों सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (CBC) और डायरेक्टरेट ऑफ प्रिंटिंग एंड डिजाइन (DPD) के साझा कला एवं प्रोडक्शन कैडर में प्रोडक्शन मैनेजर (प्रिंटेड पब्लिसिटी) / प्रोडक्शन ऑफिसर (प्रोडक्शन) के एक पद को प्रतिनियुक्ति (Deputation) के आधार पर भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।

मंत्रालय द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार यह पद ग्रुप ‘A’ गजटेड, गैर-मंत्रालयी श्रेणी का है और इसका वेतनमान सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे मैट्रिक्स लेवल-11 (67,700 रुपये से 2,08,700 रुपये) निर्धारित किया गया है।

प्रतिनियुक्ति की अवधि और आयु सीमा

चयनित अधिकारी की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से एक वर्ष के लिए होगी, जिसे नियुक्ति प्राधिकारी के विवेक से बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, किसी भी अधिकारी की कुल प्रतिनियुक्ति अवधि सामान्यतः तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी।

इस पद के लिए प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन प्राप्त होने की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

यह अवसर केंद्र और राज्य सरकारों के उन अधिकारियों के लिए है जो—

  • समान (Analogous) पद पर नियमित रूप से कार्यरत हों, या
  • लेवल-10 के समकक्ष पद पर कम से कम 5 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर चुके हों, या
  • लेवल-7 के समकक्ष पद पर कम से कम 8 वर्ष की नियमित सेवा कर चुके हों।

इसके अलावा उम्मीदवार के पास निम्न शैक्षणिक योग्यता और अनुभव होना आवश्यक है—

जरूरी योग्यता

  • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा, अथवा किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से डिग्री।
  • किसी प्रतिष्ठित प्रिंटिंग एवं पब्लिशिंग हाउस, विज्ञापन एजेंसी, प्रचार संस्था या सरकारी संगठन में कम से कम 7 वर्ष का पर्यवेक्षी (Supervisory) अनुभव।
  • प्रिंटिंग की विभिन्न प्रक्रियाओं, लेआउट, फोटोग्राफी, आर्टवर्क, कॉस्टिंग और एस्टिमेटिंग का व्यावहारिक अनुभव।

वांछनीय योग्यता

  • हिंदी का ज्ञान रखने वाले उम्मीदवारों को वरीयता दी जाएगी।

क्या होगी जिम्मेदारी?

चयनित अधिकारी को पोस्टर, फोल्डर, लीफलेट, बुकलेट, ब्रॉडशीट और अन्य प्रचार सामग्री के मुद्रण कार्य की निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

आवेदन प्रक्रिया

सभी मंत्रालयों और विभागों से अनुरोध किया गया है कि वे पात्र अधिकारियों के आवेदन निर्धारित प्रारूप में मंत्रालय को भेजें। आवेदन के साथ पिछले पांच वर्षों की एसीआर/एपीएआर, सतर्कता (Vigilance) मंजूरी, सत्यनिष्ठा (Integrity) प्रमाणपत्र और यह प्रमाणपत्र भी संलग्न करना होगा कि पिछले दस वर्षों में अधिकारी पर कोई बड़ी या छोटी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।

आवेदन रोजगार समाचार (Employment News) में विज्ञापन प्रकाशित होने की तिथि (18 जून 2026) से छह सप्ताह के भीतर मंत्रालय के शास्त्री भवन स्थित कार्यालय में भेजने होंगे।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अधूरे आवेदन, निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त आवेदन या आवश्यक दस्तावेजों के बिना भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

 

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द हिंदू ग्रुप पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन बने एन. मुरली

इस पद पर उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। एन. मुरली ने डॉ. निर्मला लक्ष्मण का स्थान लिया है।

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
The Hindu

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में से एक 'द हिंदू' समूह की प्रकाशन कंपनी द हिंदू ग्रुप पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड (THGPPL) ने एन. मुरली को कंपनी के निदेशक मंडल का चेयरमैन नियुक्त किया है। इस पद पर उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।

एन. मुरली ने डॉ. निर्मला लक्ष्मण का स्थान लिया है। बता दें कि डॉ. निर्मला लक्ष्मण ने 18 जून 2026 को आयोजित बोर्ड बैठक में अपने तीन वर्षीय कार्यकाल की समाप्ति के करीब पहुंचने पर चेयरपर्सन पद से इस्तीफा दे दिया था।

कंपनी के बोर्ड की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णा श्रीनिवासन कर रहे हैं, ने सर्वसम्मति से एन. मुरली के नाम की सिफारिश की। समिति का मानना है कि न्यूज मीडिया और पेशेवर पत्रकारिता के लिए चुनौतीपूर्ण दौर में उनके अनुभव और नेतृत्व का लाभ कंपनी को मिलेगा।

एन. मुरली को न्यूजपेपर इंडस्ट्री के प्रबंधन, कारोबार और वित्तीय मामलों में 56 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव है। उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज हाई स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद चेन्नई के लोयोला कॉलेज से वाणिज्य (कॉमर्स) में स्नातक की डिग्री हासिल की और चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में पेशेवर योग्यता प्राप्त की।

वर्ष 1969 में उन्होंने 'द हिंदू' के पारिवारिक व्यवसाय से जुड़कर अपने करियर की शुरुआत की। वर्ष 1977 में वे जनरल मैनेजर बने, जबकि 1995 में उन्हें जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2006 में उन्होंने 'द हिंदू' और अन्य संबद्ध प्रकाशनों के प्रकाशक कस्तूरी एंड संस लिमिटेड (Kasturi & Sons Limited) के मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभाला।

इसके बाद उन्होंने कस्तूरी एंड संस लिमिटेड के चेयरमैन के रूप में भी सेवाएं दीं। पिछले कई वर्षों से वे द हिंदू ग्रुप पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड (THGPPL) और कस्तूरी एंड संस लिमिटेड (KSL) के निदेशक के रूप में जुड़े रहे हैं।

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लैंडिंग पेज रेटिंग विवाद पर 13 जुलाई तक टली सुनवाई : नई TV रेटिंग्स पर बना सस्पेंस

अदालत विवादित प्रावधान के अमल पर अंतरिम रोक लगा चुकी है। हालांकि पूरी TV रेटिंग पॉलिसी 2026 पर रोक नहीं है, लेकिन नए नियमों के आधार पर रेटिंग जारी करने की प्रक्रिया प्रभावी रूप से प्रभावित हुई है।

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
tvrating

टेलीविजन ऑडियंस मापन में लैंडिंग पेज व्यूअरशिप को शामिल करने या बाहर रखने को लेकर चल रहा विवाद अब और गंभीर होता जा रहा है। केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई तक स्थगित कर दी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि जब तक इस विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक संशोधित TV रेटिंग ढांचे के तहत नई रेटिंग्स लागू नहीं की जा सकतीं।

यह मामला TV रेटिंग पॉलिसी 2026 की धारा 5.4.1 से जुड़ा है, जिसमें लैंडिंग पेज से मिलने वाली व्यूअरशिप को ऑडियंस मापन की गणना से बाहर रखा गया है। इस प्रावधान को ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) ने अदालत में चुनौती दी है। फेडरेशन का कहना है कि लैंडिंग पेज दर्शकों तक चैनल पहुंचाने का एक वैध माध्यम है और उसकी व्यूअरशिप को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

इससे पहले अदालत विवादित प्रावधान के अमल पर अंतरिम रोक लगा चुकी है। हालांकि पूरी TV रेटिंग पॉलिसी 2026 पर रोक नहीं है, लेकिन नए नियमों के आधार पर रेटिंग जारी करने की प्रक्रिया प्रभावी रूप से प्रभावित हुई है।

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि लैंडिंग पेज और बूट-अप स्क्रीन वर्षों से TV रेटिंग्स को प्रभावित करते रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, TV ऑन करते ही किसी चैनल का स्वतः दिखाई देना दर्शकों की वास्तविक पसंद नहीं माना जा सकता। ऐसे इम्प्रेशंस केवल "पैसिव एक्सपोजर" होते हैं, जिससे कुछ चैनलों को कृत्रिम लाभ मिलता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) का कहना है कि नई नीति व्यापक उद्योग परामर्श के बाद तैयार की गई है और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) भी लंबे समय से लैंडिंग पेज के कारण रेटिंग्स में होने वाली विकृतियों पर चिंता जताता रहा है।

दूसरी ओर, केबल और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों का तर्क है कि लैंडिंग पेज चैनल डिस्कवरी और दर्शक सहभागिता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम हैं। उनका मानना है कि इन्हें रेटिंग गणना से पूरी तरह बाहर करना उचित नहीं होगा।

यह विवाद प्रसारण उद्योग के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि TV रेटिंग्स का सीधा असर एडवर्टाइजिंग स्पेंड्स, चैनल रैंकिंग, मीडिया प्लानिंग, सब्सक्रिप्शन स्ट्रैटेजी और कैरिज फीस एग्रीमेंट्स पर पड़ता है। ऐसे में अब पूरे उद्योग की नजर 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।

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वरिष्ठ TV पत्रकार निखिल दुबे ने ‘NDTV’ को कहा अलविदा

उन्होंने पिछले साल जून में यहां जॉइन किया था और एग्जिक्यूटिव शो प्रड्यूसर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। समाचार4मीडिया से बातचीत में निखिल दुबे ने अपने इस्तीफे की पुष्टि की है।

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
Nikhil Dubey

वरिष्ठ टीवी पत्रकार निखिल दुबे ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। उन्होंने पिछले साल जून में यहां जॉइन किया था और एग्जिक्यूटिव शो प्रड्यूसर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। समाचार4मीडिया से बातचीत में निखिल दुबे ने अपने इस्तीफे की पुष्टि की है। निखिल दुबे का कहना था कि वह जल्द ही अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे, तब इसके बारे में बताएंगे। 

बता दें कि निखिल दुबे इससे पहले हिंदी न्यूज चैनल ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में बतौर सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर रात नौ बजे के प्राइम टाइम शो ‘Public Interes’ को लीड कर चुके हैं। निखिल दुबे की ‘एबीपी न्यूज’ के साथ यह चौथी पारी थी।

‘एबीपी न्यूज’ के साथ अपनी चौथी पारी शुरू करने से पहले निखिल दुबे ‘टीवी9’ में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह इस नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इस चैनल के साथ भी उनका संक्षिप्त कार्यकाल रहा था। वहीं, इससे पहले वह ‘इंडिया टीवी’ (India TV) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत थे।

‘इंडिया टीवी’ से पहले निखिल दुबे ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ में कार्यरत थे। इससे पहले वह ‘जी न्यूज’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। ‘जी न्यूज’ से पहले वह ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर कार्यरत थे।

टीवी न्यूज इंडस्ट्री में पर्दे के पीछे काम करने वालों में निखिल कुमार दुबे ऐसा चेहरा हैं, जिन्हें काफी काबिल माना जाता है। निखिल दुबे को तमाम चैनल्स के साथ काम करने का 22 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने फरवरी 2019 में ‘न्यूज नेशन’ जॉइन किया था और मई में उसे अलविदा कह दिया था। वहीं ‘इंडिया न्यूज’ में वह नवंबर 2018 से जनवरी 2019 तक कार्यरत रहे।

‘इंडिया न्यूज’ से पहले निखिल दुबे ‘एबीपी न्यूज’ में एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने वहां 9 जुलाई 2016 को पदभार संभाला था। जब वहां के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने अचानक चैनल से इस्तीफा दिया था तो निखिल ने भी वहां से अपना इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले वह अप्रैल 2006 से अक्टूबर 2009 में एसोसिएट एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के तौर पर भी इस चैनल के साथ काम कर चुके हैं। तब इस चैनल का नाम ‘एबीपी न्यूज’ की जगह ‘स्टार न्यूज’ था।

निखिल कुमार ने 1995 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने के बाद 2002 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से मॉसकॉम किया और इसके बाद पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। मई 2003 में उन्होंने ‘सहारा समय’ से अपने करियर की शुरुआत की और नवंबर 2005 तक वह यहां रहे। ‘सहारा समय’ में अपने सफर में वह विशेष संवाददाता की भूमिका में थे। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 2006 में ‘स्टार न्यूज’ के साथ अपने सफर को आगे बढ़ाया। वहां तीन साल सात महीने रहने के बाद उनके सफर का अगला पड़ाव ‘आजतक’ बना। नवंबर 2010 से नवंबर 2012 तक वह सीनियर प्रड्यूसर के तौर पर ‘आजतक’ को अपना योगदान देते रहे। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक फ्रीलांस के तौर पर काम किया।

इसके बाद वह जुलाई 2013 में मुंबई में एंडेमॉल प्रॉडक्शन हाउस (Endemol production house) के साथ जुड़ गए और सितंबर 2013 तक बतौर स्क्रिप्ट राइटर काम किया। फिर वह एसोसिएट एडिटर बनकर ‘इंडिया टीवी’ आ गए। सितंबर 2013 से जनवरी 2014 तक वे यहां रहे। ‘इंडिया टीवी’ के बाद उन्होंने ‘न्यूज एक्सप्रेस’ में बतौर डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर काम किया और जनवरी से अगस्त 2014 तक रहे।

फिर करीब तीन महीने तक उन्होंने ‘न्यूज24’ का हाथ थामा और डिप्टी एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के तौर पर नवंबर 2014 तक का सफर तय किया। इसके बाद वह एसोसिएट एडिटर बनकर ‘जी न्यूज’ आ गए और जुलाई 2016 तक रहे। इसके बाद वह ‘टीवी टुडे नेटवर्क’, ‘इंडिया टीवी’ और ‘टीवी9’ होते हुए ‘एबीपी न्यूज’ पहुंचे थे और वहां अपनी पारी को विराम देने के बाद पिछले साल ‘एनडीटीवी’ के साथ नई पारी का आगाज किया था, जहां से अब उन्होंने बाय बोल दिया है।

आपको यह भी बता दें कि निखिल दुबे ने इंडिया टीवी में ‘तलाश’ नाम से शो बनाया था। वह एबीपी में ‘घंटी बजाओ’ और ‘वायरल सच’ शो में काम कर चुके हैं। इसके अलावा चार घंटे का मॉर्निंग शो ‘नमस्ते भारत’ प्रोड्यूस किया। जी न्यूज में रहते हुए उन्होंने क्रिकेट विश्वकप पर सात करोड़ रुपये की प्रॉडक्शन कास्ट का शो ‘वर्ल्ड war’ प्रड्यूस किया। इसके अलावा भी वह तमाम जाने-माने शो प्रड्यूस कर चुके हैं।

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राजीव के. विज ने बदली मोबिलिटी की तस्वीर, 29 गाड़ियों से शुरू हुआ सफर देशभर तक पहुंचा

कुछ लोग कंपनी बनाते हैं और कुछ पूरी इंडस्ट्री खड़ी कर देते हैं। कारज़ॉनरेंट (Carzonrent) के फाउंडर और चेयरमैन राजीव के. विज इसी दूसरी कैटेगरी में आते हैं।

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
RajeevKBiz87451

कुछ लोग कंपनी बनाते हैं और कुछ पूरी इंडस्ट्री खड़ी कर देते हैं। कारज़ॉनरेंट (Carzonrent) के फाउंडर और चेयरमैन राजीव के. विज इसी दूसरी कैटेगरी में आते हैं। उन्होंने भारत में कैब और कार रेंटल की दुनिया को उस समय नया आकार दिया, जब यह सेक्टर पूरी तरह बिखरा हुआ और असंगठित था।

साल 2000 में उन्होंने सिर्फ 29 गाड़ियों के छोटे से बेड़े के साथ इस कंपनी की शुरुआत की थी। उस वक्त देश में प्रोफेशनल कार रेंटल या कॉर्पोरेट मोबिलिटी जैसी सेवाएं बहुत सीमित थीं। लेकिन विज ने पहले ही समझ लिया था कि आने वाले समय में लोगों को भरोसेमंद, टेक्नोलॉजी-आधारित और प्रोफेशनल ट्रांसपोर्ट सेवाओं की जरूरत होगी।

धीरे-धीरे यह छोटा सा प्रयास एक बड़े मोबिलिटी नेटवर्क में बदल गया, जो आज देशभर में कॉरपोरेट्स, एयरपोर्ट ट्रैवलर्स और बिजनेस यात्रियों को सेवाएं देता है। कंपनी ने सिर्फ रेंटल तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कॉर्पोरेट मोबिलिटी मैनेजमेंट, लॉन्ग टर्म लीजिंग और प्रीमियम ड्राइवर-सर्विस जैसी सुविधाएं भी शुरू कीं।

राजीव के. विज की खासियत यह रही कि उन्होंने समय के साथ बदलती जरूरतों को पहले ही पहचान लिया। इसी सोच के चलते कंपनी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में भी कदम बढ़ाया और प्लग मोबिलिटी (Plug Mobility) नाम से अपनी ईवी सर्विस प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। उनका मानना है कि आने वाले समय में शहरी परिवहन का भविष्य इलेक्ट्रिक और टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा।

कंपनी ने भारत के बाहर भी अपनी सेवाओं का विस्तार किया है, जिससे विदेशों में यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों को भी समान क्वॉलिटी की लिमोजिन और ड्राइवर सेवाएं मिल सकें।

इस पूरे सफर में राजीव के. विज की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ कंपनी का विस्तार नहीं रही, बल्कि एक ऐसे सेक्टर को संगठित करना रहा जिसमें हजारों ड्राइवर, फ्लीट पार्टनर और मोबिलिटी प्रोफेशनल्स को रोजगार और नई पहचान मिली। उन्होंने इस इंडस्ट्री में सेवा, सुरक्षा और प्रोफेशनलिज्म के नए मानक तय किए।

आज भले ही कंपनी नई पीढ़ी के नेतृत्व की ओर बढ़ रही हो, लेकिन राजीव के. विज की सोच और विजन अब भी कंपनी की कार्यशैली और संस्कृति में गहराई से शामिल है।

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‘तहलका’ मैगजीन में संपादक नियुक्त हुए अरविंद कुमार चतुर्वेदी

समाचार4मीडिया से बातचीत में अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने यहां 17 जून को जॉइन किया है और वह दिल्ली से अपना कामकाज संभालेंगे।

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
Arvind Kumar Chaturvedi

चर्चित मैगजीन 'तहलका' (Tehelka) ने वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार चतुर्वेदी को संपादक के पद पर नियुक्त किया है। अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने इस बात की जानकारी खुद सोशल मीडिया पर शेयर की है।

अपनी फेसबुक पोस्ट में अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने लिखा है, ‘नमस्कार दोस्तों, टेलीविज़न में काम करते -करते कब बीस साल से ज़्यादा समय बीत गया पता ही नहीं चला। आज जब पीछे मुड़ के देखता हूँ तो लगता है ...जैसे कल की बात है। हमेशा जीवन में चुनौतियों को स्वीकार करना ही बड़ों ने सिखाया है। इसी क्रम में एक नई ज़िम्मेदारी मिली है ...देश और दुनिया में अपनी विशेष साख रखने वाली पत्रिका "तहलका " में मुझे सम्पादक के तौर पर काम करने का अवसर मिला है, उम्मीद और विश्वास है कि आप लोगों का पहले की तरह प्रेम और सहयोग मुझे मिलेगा।

समाचार4मीडिया से बातचीत में अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने यहां 17 जून को जॉइन किया है और वह दिल्ली से अपना कामकाज संभालेंगे।

बता दें कि अरविंद कुमार चतुर्वेदी को प्रिंट और टीवी मीडिया में काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया डेली लाइव’ (India Daily Live) में मैनेजिंग एडिटर रह चुके हैं। उससे पहले वह हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ (India News) में चैनल हेड (यूपी/यूके) और डिप्टी मैनेजिंग एडिटर (इंडिया न्यूज) के पद पर कार्यरत थे। वह लखनऊ से अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वह वर्ष 2014 से ‘इंडिया न्यूज’ के साथ जुड़े हुए थे। इससे पहले वह इस चैनल में रेजिडेंट एडिटर (यूपी/यूके) के पद पर काम कर रहे थे।  

उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के रहने वाले अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीन किताबें (द रियल मोदी, मोदी का बनारस, माँ हीरा बहन और नरेन्द्र) लिख चुके हैं। समाचार4मीडिया की ओर से अरविंद कुमार चतुर्वेदी को नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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Dish TV ने अमितेश पुनहानी को बनाया कॉर्पोरेट हेड-मार्केटिंग (DTH)

उनकी नियुक्ति 18 जून 2026 से प्रभावी हो गई है। कंपनी के अनुसार, अमितेश पुनहानी सीनियर मैनेजमेंट टीम का हिस्सा होंगे और मार्केटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
Dish TV Amitesh

डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सर्विस प्रोवाइडर कंपनी डिश टीवी (Dish TV) ने अमितेश पुनहानी को कॉर्पोरेट हेड-मार्केटिंग (DTH) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 18 जून 2026 से प्रभावी हो गई है। कंपनी के अनुसार, अमितेश पुनहानी सीनियर मैनेजमेंट टीम का हिस्सा होंगे और मार्केटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

अमितेश पुनहानी को बिजनेस ग्रोथ, ब्रैंड निर्माण, बड़े पैमाने पर पी एंड एल (P&L) पोर्टफोलियो प्रबंधन और राजस्व वृद्धि से जुड़ी पहलों का नेतृत्व करने का दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने भारत, एशिया-प्रशांत (APAC) और वैश्विक बाजारों में विभिन्न भूमिकाओं में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक और मार्केटिंग परियोजनाओं का नेतृत्व किया है।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टाटा स्टील से की थी। इसके बाद उन्होंने रॉकवेल ऑटोमेशन, गैप इंक, भारती एयरटेल लिमिटेड, इंटेक्स टेक्नोलॉजीज और जाब्रा जैसी कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाईं।

अपने पेशेवर सफर के दौरान पुनहानी ने बड़े बिजनेस पोर्टफोलियो का प्रबंधन किया, रणनीतिक साझेदारियों को विकसित किया, विभिन्न श्रेणियों में कारोबार वृद्धि की पहल का नेतृत्व किया और राजस्व बढ़ाने से जुड़ी रणनीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया।

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गेम्सक्राफ्ट मामला: पूर्व CFO का दावा- 250 करोड़ रुपये के लेन-देन से वाकिफ थे फाउंडर्स

ऑनलाइन गेमिंग यूनिकॉर्न गेम्सक्राफ्ट से कथित तौर पर 250 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन मामले में नया मोड़ सामने आया है।

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
Gameskraft

ऑनलाइन गेमिंग यूनिकॉर्न गेम्सक्राफ्ट से कथित तौर पर 250 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन मामले में नया मोड़ सामने आया है। कंपनी के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) रमेश प्रभु ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिए अपने बयान में दावा किया है कि धनराशि का ट्रांसफर कंपनी के संस्थापकों के निर्देश पर किया गया था और इसकी जानकारी शीर्ष नेतृत्व को थी। यह दावा कर्नाटक हाईकोर्ट के 16 जून के आदेश में दर्ज बयान के आधार पर सामने आया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में ED द्वारा की गई गिरफ्तारियों की वैधता की समीक्षा करते हुए संबंधित तथ्यों का उल्लेख किया है।

संस्थापकों के निर्देश पर हुआ फंड ट्रांसफर: प्रभु

हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज जानकारी के अनुसार, रमेश प्रभु ने 18 नवंबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 50 के तहत ED के समन के जवाब में ईमेल भेजा था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के संस्थापक विकास तनेजा, दीपक सिंह अहलावत, पृथ्वी राज सिंह और दीपक कुमार झा के निर्देश पर धनराशि कंपनी से बाहर ट्रांसफर की गई थी। प्रभु के अनुसार, इन लेनदेन को कंपनी के भीतर ऐसे निवेश के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसे बाद में लाभ के साथ वापस कंपनी में लाया जाना था।

2019 के विवाद के बाद बनी योजना

बयान में प्रभु ने दावा किया कि इस व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी। उनके अनुसार, उस समय रम्मीसर्कल संचालित करने वाली कंपनी गेम्स24x7 ने गेम्सक्राफ्ट के कुछ संस्थापकों के खिलाफ कथित रूप से सोर्स कोड और कस्टमर डेटाबेस की चोरी को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी।

प्रभु ने कहा कि इस मुकदमे के बाद संस्थापकों को कंपनी में जमा हो रही धनराशि को लेकर चिंता थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें धीरे-धीरे कंपनी से पैसा निकालकर शेयर बाजार में निवेश करने के लिए कहा गया था, ताकि बाद में उसे कंपनी में वापस लाया जा सके।

फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग में लगाया गया पैसा

रमेश प्रभु ने ED को बताया कि ट्रांसफर की गई रकम को उनके जेरोधा खाते के जरिए फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में निवेश किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक अन्य ट्रेडिंग खाता उनकी पत्नी के नाम पर खोला गया था, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। प्रभु के मुताबिक, कंपनी से ट्रांसफर किया गया पूरा पैसा डेरिवेटिव ट्रेडिंग में नुकसान के रूप में समाप्त हो गया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई लाभ नहीं हुआ।

म्यूचुअल फंड निवेश दिखाने का आरोप

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ा है। प्रभु ने आरोप लगाया कि उनके खातों में भेजी गई रकम को गेम्सक्राफ्ट के वित्तीय दस्तावेजों में म्यूचुअल फंड निवेश के रूप में दर्ज किया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि संस्थापकों ने ऑडिट के लिए फर्जी म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट तैयार करने को कहा था। हालांकि, उन्होंने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान ऐसा करने से इनकार कर दिया था। उल्लेखनीय है कि गेम्सक्राफ्ट की ओर से पहले दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत में भी फर्जी निवेश रिकॉर्ड और कथित नकली म्यूचुअल फंड दस्तावेजों के जरिए फंड डायवर्जन छिपाने की बात कही गई थी।

बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं को मिलती थी

प्रभु ने अपने बयान में यह भी कहा कि जिस RBL बैंक खाते से धनराशि ट्रांसफर की गई, उसके संचालन के लिए दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की आवश्यकता थी। इनमें वह स्वयं और सह-संस्थापक पृथ्वी राज सिंह शामिल थे। उनका दावा है कि खाते से होने वाले प्रत्येक लेनदेन की सूचना ईमेल और SMS के जरिए दोनों अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को प्राप्त होती थी।

IPO की तैयारी के दौरान बढ़ा दबाव

प्रभु ने आरोप लगाया कि जब गेम्सक्राफ्ट संभावित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की तैयारी कर रही थी, तब कंपनी के खातों में धनराशि दिखाना जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा कि कंपनी अगले दो वर्षों में IPO लाने की योजना बना रही थी। चूंकि F&O ट्रेडिंग में पैसा पहले ही खत्म हो चुका था, इसलिए नुकसान के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया। प्रभु का यह भी आरोप है कि बाद में उन्हें देश छोड़ने की सलाह दी गई और आश्वासन दिया गया कि स्थिति को संभाल लिया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन लेनदेन से जुड़े निर्देश मौखिक रूप से दिए जाते थे और लिखित संचार से बचा जाता था।

ED की जांच का अहम आधार बना बयान

प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में रमेश प्रभु के बयान को महत्वपूर्ण आधार बनाया है। हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज गिरफ्तारी के आधारों के अनुसार, ED का आरोप है कि गेम्सक्राफ्ट के संस्थापक और पूर्व CFO कथित तौर पर मिलकर 250 करोड़ की राशि को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस तथा म्यूचुअल फंड निवेश के नाम पर डायवर्ट और मनी लॉन्ड्रिंग करने में शामिल थे।

एजेंसी का यह भी आरोप है कि कथित अपराध से अर्जित धन का एक हिस्सा निवेश संरचनाओं और डिविडेंड भुगतान के माध्यम से परिवार-नियंत्रित संस्थाओं और संपत्तियों तक पहुंचाया गया। हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इन आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत ने केवल यह परखा कि PMLA के तहत की गई गिरफ्तारियों के लिए ED के पास पर्याप्त आधार मौजूद थे या नहीं।

संस्थापकों की गिरफ्तारी को हाईकोर्ट ने बताया अवैध

इस बीच, कर्नाटक हाईकोर्ट ने गेम्सक्राफ्ट के संस्थापक दीपक सिंह, पृथ्वी राज सिंह और विकास तनेजा की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि ED गिरफ्तारी से संबंधित वैधानिक प्रक्रियाओं और सुरक्षा प्रावधानों का पालन करने में विफल रही। यह आदेश 7 और 8 मई को हुई ED की तलाशी कार्रवाई के बाद की गई गिरफ्तारियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया।

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